मायानगरी -45

मायानगरी-45

उन्होंने एक बड़ा सा बंडल उठाकर अभिमन्यु की हथेली पर भी रख दिया।  अभिमन्यु ने उस बंडल को चारों तरफ से अच्छे से देखने के बाद मुस्कुराकर पुरोहित मैडम को थैंक यू बोला और पैसे अपनी बैग के हवाले कर दिए…..

अभिमन्यु को इतने आराम से सब कुछ करते देख झनक हैरान थी.. उसकी समझ से बाहर था कि इतने खतरे के खेल में भी अभिमन्यु कैसे इतना सहज बना हुआ है,  पुरोहित मैडम को झनक के चेहरे की परेशानियां नजर आ रही थी वह एक बार फिर सभी विद्यार्थियों को संबोधित करती सामने आकर अपनी बात उन सबके सामने रखने लगी…

” बच्चों आप सब एग्जाम्स के लिए तैयार हैं हमारे पास यह दो धुरंधर विद्यार्थी मौजूद हैं इनमें से इस लड़की का नाम है वीजा और उस लड़के का नाम है एल्बम यह दोनों आपकी पूरी मदद करेंगे अब आप समझ गए होंगे कि मैंने इन दोनों के सही नाम नहीं बताए तो वह इसलिए क्योंकि आपको इन नामों को जानने की जरूरत भी नहीं है दूसरी बात आप सबको मालूम है कि आप लोग सेलेक्ट हो जाएंगे आप लोगों को काउंसलिंग में जाने से पहले एक बार फिर हमसे मिलने आना है, जिससे हम आपको यह गाइड कर सकें कि आपको कौन सी यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं लेना है इसका एक बहुत छोटा सा कारण है वही कि हम नहीं चाहते, हमारे वह विद्यार्थी जो आप जैसे विद्यार्थियों की मदद करते हैं उनका नाम या पता उजागर हो आज तो आप इनकी सहायता से आगे बढ़ जाएंगे, सेलेक्ट हो जाएंगे और अपने अपने कॉलेज में पहुंच जाएंगे… कल कहीं गलती से आपने इनके नाम रिवील कर दिए तो वह उनके कैरियर के लिए सही नहीं होगा..
मेरे ख्याल से मैंने आप सबको सारी जरूरी सूचनाएं दे दी हैं। अब यहां आप सबके लिए खाना आएगा आप लोग खाना खाकर पूरी तरह से रेडी हो जाइए उसके बाद ठीक दस बजे मैं आपसे वापस आकर मिलूंगी तब तक आप लोग अपना खाना इंजॉय कीजिए..

उन्होंने उस कमरे से लगे एक छोटे कमरे की तरफ बढ़ते हुए अभिमन्यु और झनक को भी इशारा किया और वह दोनों उनके पीछे निकल गया..

सभी के लिए खाना उसी कमरे में आ चुका था पुरोहित सर ने सभी बच्चों को खाने के पैकेट बांटने के बाद उस दूसरे कमरे में लाकर भी पुरोहित मैडम झनक और अभिमन्यु को खाना दे दिया…

अभिमन्यु ने अपना पैकेट खोला और खाने लगा लेकिन झनक के चेहरे पर हवाइयां अब भी उड़ रही थी

” क्या हुआ तुम कुछ ज्यादा ही परेशान लग रही हो?”

पुरोहित मैडम ने झनक के कंधे पर हाथ रखा और झनक धीरे से सिसक उठी, उसे इस तरह रोते देख अभिमन्यु भी घबरा गया उसने तुरंत खाने का पैकेट दूसरी तरफ किया और झनक की तरफ अपनी कुर्सी खींच कर बैठ गया…

“क्या हुआ झनक!! तुम अचानक रोने क्यों लगीं, प्लीज बताओ हुआ क्या है..?”

अभिमन्यु के सांत्वना भरे शब्द झनक का रोना कम करने की जगह और बढ़ा गए वह दोनों हाथों में चेहरा छुपाए फूट-फूट कर रोने लगी। पुरोहित मैडम की भी समझ से बाहर था कि अचानक ऐसा क्या हो गया जो झनक इतनी जोर से रोने लग गई उन्होंने पानी का गिलास उठाकर झनक की तरफ बढ़ाया और उसकी पीठ पर अपना हाथ फेरती रही उनके सहलाने से धीरे-धीरे झनक का रोना कुछ कम हुआ लेकिन अब भी वह बीच-बीच में जोर से हिचकी लेकर आंसू पोंछ लेती थी…

“मुझे लगता है तुम बहुत ज्यादा डर गई हो झनक कहीं इस बात का तुम्हारी परफॉर्मेंस पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा? ऐसा तो नहीं होगा कि एग्जाम एंजाइटी के कारण तुम सारा पेपर बिगाड़ दो ?देखो हम लोगों का सारा पैसा इस बार तुम पर लगा है..

“नहीं मैम आप चिंता मत कीजिए , मैं पेपर नहीं बिगड़ने दूंगी मेरा स्वभाव बाकियों से जरा हटके हैं …लोग एंजाइटी में पेपर बिगाड़ देते हैं और मेरा ज्यादा अच्छा बनता है..
  लेकिन मुझे एक बात की बहुत टेंशन हो रही है मैडम

“हां बोलो ना किस बात की टेंशन है? मैं यहां तुम्हारी टेंशन दूर करने के लिए ही तो बैठी हूं..!”

“मैम अभी कुछ महीनों पहले हमारी एक सीनियर आदिति मैडम की डेथ हुई है। और मुझे यह सुनने में आया था कि वह भी इसी तरह के किसी काम में  थी..”

” ऐसा कुछ नहीं है झनक, अदिति का मैटर अलग था तुम उससे खुद को कंपेयर मत करो..!”

“अब मैंने तो अपनी जिंदगी की बागडोर पूरी तरह से आपके हाथ में सौंप दी है। मुझे इस कॉलेज में आने के बाद अब जब तक यहां पढ़ूंगी तब तक आपका आशीर्वाद अपने सर पर चाहिए… मैं आप पर अंधों की तरह विश्वास करती हूं ।आप जो कहेंगे मैं सब कुछ मानने को तैयार हूं लेकिन जाने क्यों अदिति मैडम की डेथ के बाद से मुझे बहुत डरावने सपने आने लगे हैं। ऐसा लगता है जैसे मैं किसी अंधे कुएं में गिर रही हूं बहुत बार ऐसा लगता है कि पुलिस आकर मुझे पकड़ कर ले जा रही है। ऐसा लगता है कुछ पेरेंट्स और बच्चे जो मेरे कारण मेडिकल की सीट से वंचित रह गए मेरी तरफ उंगली दिखा दिखा कर मुझे कोस रहे हैं। कभी-कभी नजर आता है मैडम चार पांच बच्चे आए और मुझे उठा कर फांसी पर लटका कर चले गए ।आप मेरी हालत नहीं समझ सकती मैडम मैं बहुत परेशान हूं बहुत ज्यादा…
   मुझे लगता है अगर मैं किसी दिन पकड़ी गई तो पुलिस के मुझ तक पहुंचने से पहले मैं भी आदिति मैडम की तरह सुसाइड कर लूंगी…”

झनक एक बार फिर जोर जोर से रोने लग गई और इस बार अभिमन्यु ने उसके सिर पर हाथ रखकर उसके बालों में हाथ फिराना शुरू किया..

“घबराओ मत झनक, जो तुम कर ने जाने वाली हो, वही काम मैं भी तो करने जाने वाला हूं। तुम अपने मन से किसी भी तरह का गिल्ट निकाल दो कि, तुम्हारे कारण कुछ होशियार विद्यार्थी मेडिकल की सीट से वंचित रह गए। ऐसा अपने दिमाग में कभी लाना भी मत। तुम खुद ही सोचो या तो विद्यार्थी को अपने आप में इतना टैलेंटेड होना चाहिए कि, बिना किसी मदद के वह सेलेक्ट होने का माद्दा रखता हो, और या फिर उसके पास पैसे होने चाहिए… अगर जिसके पास यह दोनों ही नहीं है तो वह अपनी बदकिस्मती से उस सीट को गँवा रहा है, उसमें तुम क्या कर सकती हो? बल्कि तुम ऐसे  सोचो कि तुमने जाने कितने विद्यार्थियों की मदद की है… उनका सपना पूरा करने में।
     वह सारे विद्यार्थी जो उस कमरे में बैठे हैं, वह सब सेलेक्शन के बाद तुम्हें कितनी ढेर सारी दुआएं देंगे तुम जानती भी हो…?”

झनक ने अभिमन्यु की तरफ देखा और धीरे से रोते हुए उससे सवाल कर दिया…

“तुम कब से पुरोहित मैडम के साथ यहां काम कर रहे हो?”

अभिमन्यु ने मुस्कुराकर पुरोहित मैडम की तरफ देखा और झनक की ओर देखकर हंसने लगा..

“कब से क्या? इसी साल से करना शुरू करने वाला हूं। अब तक इसके पहले मैंने कभी ऐसा नहीं किया… वह तो मुझे पैसों की बहुत ही ज्यादा जरूरत थी, और उसी समय इत्तेफाक से पुरोहित सर से मुलाकात हो गई, बस सर मसीहा बनकर मेरी जिंदगी में उस समय आये जब मुझे रुपयों की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्होंने बिना कुछ पूछे मुझे मेरी जरूरत के रुपए उधार दे दिये ,और देखो झनक मैं सच कहूं तो आज की दुनिया प्रैक्टिकल दुनिया है, अब लोग इमोशनल होने को बेवकूफ होना कहते हैं, और मैं बेवकूफ कतई नहीं हूं।
    मुझे पता है कि पैसे की पावर क्या होती है? इस यूनिवर्सिटी में जहां आज मैं अपने दिमाग के बलबूते पर पहुंचा हूं, मेरे जैसे कितने विद्यार्थी हैं यहां पर? तुम उंगलियों पर गिन सकती हो । लेकिन वह विद्यार्थी जो अपने रूपयों के बल पर यहां पहुंचे हैं वह अनकाउंटेबल हैं… एक तरह से यह मायानगरी उन्हीं विद्यार्थियों की बदौलत चल रही है… तुम्हें क्या लगता है वह विधायक का लड़का वेदांत रुपयों की फैक्ट्री है वह…
कोई प्रोफ़ेसर उसके सामने मुंह खोलने की हिम्मत क्यों नहीं कर पाता? जानती हो, क्योंकि रुपयों की गड्डी उनके मुंह में ठूंस दी जाती है…
   और इसमें बुराई भी क्या है? अखिर हमें जीने खाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत इन्हीं रुपयों की तो है। लोग कहते हैं सीधे तरीके से चलो, सच्चे तरीके से चलो , ईमानदार बनो। मैं कहता हूं कि ईमानदारी से बेईमानी करो,  जिससे आपको कोई पकड़ ना पाए।
     वैसे भी आज की दुनिया में जो पकड़ा गया वही चोर है …”

“वो सब तो मैं भी जानती हूं , अभिमन्यु, मुझे भी रुपयों की जरूरत है इसीलिए तो मैं भी मैडम के कहने पर एक बार में यहां चली आई… बल्कि मैं तो यह भी चाहती थी कि मेरे साथ कि और भी ऐसी लड़कियां जो तेज दिमाग है वह यहां आकर पैसे कमा सकती है, लेकिन मैडम ने इस साल के लिए मना कर दिया। बस मुझे एक ही बात का डर है कि कहीं पुलिस मुझे पकड़ कर ना ले जाए… और अगर ऐसा हुआ कि पुलिस मुझ तक पहुंचने वाली हुई तो मैं कसम से कह रही हूं कि मैं आत्महत्या कर लूंगी… और मुझे पता नहीं क्यों ऐसा लगता है आदिति मैडम के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा , इसलिए उन्होंने भी अपने आप को खत्म कर लिया..”

“हां !!यही एक छोटा सा डर मुझे भी कभी  बना रहता है, कि पुलिस ना पकड़ कर ले जाए ,वरना मेरी सारी डिग्री बर्बाद हो जाएगी, मेरे पापा बर्बाद हो जाएंगे ,मम्मी तो रो-रोकर बेहाल हो जाएगी….”

झनक की इस बात पर अभिमन्यु भी थोड़ा इमोशनल होने लगा और उन दोनों को देखकर पुरोहित मैडम ने तुरंत आगे बढ़कर हम दोनों के हाथों पर हाथ रख दिया।

“तुम दोनों को किसी से डर ने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है …पुलिस भी हम पर हाथ नहीं डाल सकती ,अरे जब मेडिकल हॉस्टल में घुसकर अदिति को ठिकाने लगा दिया और पुलिस आज तक कुछ नहीं कर पाई अब क्या करेगी..?”

झनक आंखें फाड़े पुरोहित मैडम की तरफ देखने लगी…

“आप झूठ बोल रही हैं है ना मैडम..?”

“नहीं मैं सच कह रही हूं झनक, अदिति ने आत्महत्या नहीं की उसे हमें ठिकाने लगाना पड़ा था । इसीलिए तुमसे बार-बार कह रही हूं कि तुम इस डर को मन से निकाल दो कि ऐसा कुछ होगा कि पुलिस पकड़ने आएगी और उस शर्मिंदगी से तुम्हें अपने आप को मारना पड़ेगा ऐसा कुछ नहीं होगा.”

“मतलब अदिति ने आत्महत्या नहीं की…”

झनक के चेहरे पर अब जरा राहत के भाव नजर आ रहे थे और झनक के चेहरे को देखकर पुरोहित मैडम मुस्कुराने लगी उन्होंने झनक के कंधे पर हाथ रखा और उसके पास खिसक कर चली आई…

” अदिति जब फर्स्ट ईयर में आई तब बहुत डरी सहमी सी लड़की थी, पढ़ाई में बहुत होशियार थी।  मेडिकल एंट्रेंस में उसने भी टॉप किया था तब से उस पर मेरी नजर थी फिर जब मैंने देखा कि उसे पैसों की कुछ ज्यादा ही जरूरत है, तब मैंने उसे पैसो के लालच से ही इस काम से जुड़ने के लिए मना लिया… वह तैयार भी हो गई और हमारे साथ काम करने लगी… उसने सिर्फ यही का एंट्रेंस बस नहीं दिया इसके अलावा बाकी स्टेट के लिए भी वो हमारे साथ ट्रैवल करके गई… उसने लगभग 50  बच्चों की मदद की , बहुत ही होशियार और समझदार लड़की थी…दूसरे साल भी उसने हमारी पूरी मदद की…”

“फिर ऐसी क्या बात हो गई मैडम की उसी रास्ते से हटाना पड़ा…?”

“वो कुछ ज्यादा ही पंख फैलाने लगी थी, एक्चुअली यह कोई छोटा मोटा काम नहीं है…. इस काम के लिए एक लंबा चौड़ा जाल बिछा होता है। इसमें हमारे साथ ढेर सारे लोग जुड़े हुए हैं जिन सबका नाम तो मैं नहीं बता सकती लेकिन हर विभाग से कोई ना कोई हमारे साथ जुड़ा है तभी तो इतनी बड़ी धांधली हो पाती है…
…. इंजीनियरिंग सीट्स मैं सिलेक्शन के लिए पेरेंट्स दस लाख रुपए देते हैं आईआईटी के लिए चालीस लाख और मेडिकल सीट के लिए तीस लाख फिक्स है…
  अभी तुम लोगों को सुनकर लग रहा होगा कि यह बहुत बड़ी रकम है लेकिन ऐसा नहीं है हमारे इस काम में एक पूरी कंपनी काम करती है… बिल्कुल वैसा ही काम है जिसमें एक बॉस होता है और उसके नीचे ढेर सारे एम्पलॉइस ।
   देखा जाए तो हम सबसे ग्राउंड लेवल के एंप्लॉय हैं हमारा काम सिर्फ बच्चों को इस कमरे में बैठा कर तुम जैसे होशियार विद्यार्थियों की सहायता से पेपर निकलवाना है, लेकिन तुमको क्या लगता है सिर्फ इतने से ही बच्चे सेलेक्ट हो जाते हैं….
… नहीं बल्कि इस सबके पीछे ढेर सारे लोग हैं। अब तुम सोचो पेपर बनाने वाले से लेकर पेपर जहां पर प्रिंट होता है, उसके बाद पेपर जहां सील करके रखा जाता है। इन सभी विभागों में हमारे लोग घुसे हुए हैं, इसीलिए तो हमें पेपर लीक होकर 10 मिनट के लिए मिल जाता है।
      10 मिनट में उस पेपर को हमारे एक पर्टिकुलर नंबर पर भेजने के बाद भेजने वाला डिलीट कर देता है जिससे कि वो पेपर ऑन एयर ना रहे…
यह तो हुई पेपर लीक करने वालों की बात इसके अलावा कल जहां बैठकर तुम लोग एंट्रेंस दोगे वहां पर ड्यूटी करने वाले से लेकर वहां सीटिंग अरेंजमेंट करवाने वालों तक के लोग भी हमारी टीम के लोग रहते हैं। हमारे इस टीम में बहुत से लोग भी मौजूद है…
   ये  रैकेट काफी लंबा चौड़ा है, और इस में काम करने वाले भी हर एक विभाग में मौजूद है ।चाहे पुलिस विभाग हो या प्रशासन मैं किसी का भी नाम नहीं ले सकती क्योंकि बहुत सारे बड़े नाम भी इसमें इंवॉल्व  हैं ,और जाहिर सी बात है अगर बड़े नाम इस में जुड़े नहीं होते तो हमारी कोई औकात ही नहीं थी इतना सब कुछ करने की…”

“लेकिन मायानगरी को आपने इसके लिए क्यों चुना मैडम?”

“माया नगरी को तो मैं कभी चुनना ही नहीं चाहती थी, क्योंकि मैं जानती हूं जिस दिन राजा अजातशत्रु को इस सब के बारे में खबर हुई वह मुझे अपने महल मैं बुलाने तक का भी इंतजार नहीं करेगा और मैं जहां रहूंगी वहां पहुंच कर सीधे मुझे गोली मार देगा..”

“आखिर मायनगरी इंवॉल्व कैसे हुई..?”

  “इस सब के पीछे भी बहुत लंबी कहानी है, हालांकि माया नगरी में बहुत अंदर तक अभी यह जाल नहीं पहुंचा है, लेकिन आने वाले दो चार साल में हमारा रैकेट माया नगरी पर पूरी तरह कब्जा जमा चुका होगा…”

पुरोहित मैडम अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाई थी, कि दरवाजे पर किसी ने जोर से दस्तक दी। वह सारे लोग चौक गए कि इस वक्त यहां कौन आ सकता है, पुरोहित मैडम ने तुरंत अपने पति की ओर इशारा किया और वह उस छोटे कमरे से निकलकर बाहर हॉल वाले कमरे की तरफ बढ़ने लगे….

क्रमशः

aparna

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