
मायानगरी – 39
पंखुड़ी अपने रूम में तैयार हो रही थी और उसके मन में ये भी चल रहा था कि शेखर ने उसे डिनर के लिए क्यों बुलाया ?
जब वों किसी और से प्यार करता है, तो आखिर क्या जरूरत है उसे इस तरह बुलाने की …
आज जाने क्या सोच कर उसने अपनी मम्मी की दी हुई साड़ी निकल ली ..साड़ी सफेद रंग की थी जिस पर हल्के स्लेटी और काले रंग से बाँसुरी बनी हुई थी …साड़ी बहुत सुन्दर थी ..
पंखुड़ी को साड़ी पहनना कुछ खास ज्यादा पसंद नहीं था लेकिन आज उसका अपनी माँ की दी हुई साड़ी पहनने का मन कर रहा था और इसलिए वों उसे पहन कर तैयार हो गई …
बाल काढ़ कर उसने खुले ही छोड़ दिए थे …कानो में उसने साड़ी की डिज़ाइन से मिलती जुलती सोने की बाँसुरी पहन ली ..
और तैयार होकर शेखर का इंतजार करने लगी ..कुछ देर बीती थी कि शेखर नीचे अपनी गाड़ी लेकर चला आया…
पंखुड़ी ने कमरे की खिड़की से देखा और फटाफट सीढियां उतर गईं….
शेखर गाड़ी से बाहर निकल कर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था , उसे आते देख शेखर का ध्यान अचानक उसकी साड़ी पर गया और उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आईं…
” लगता है डॉक्टर साहिबा आपको फ्लूट बेहद पसंद है !”
” हाँ मुझे बाँसुरी बहुत पसंद है , इन फैक्ट मुझे बजानी भी आती है.. क्यों आपको नहीं पसंद?
” मुझे भी बहुत पसंद है लेकिन मुझे बजाना नहीं आता ।
पंखुड़ी के बैठते हैं शेखर ने गाड़ी रेस्टोरेंट की ओर आगे बढ़ा दी…
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समर ने जबसे राजा को अदिति की मौत के बारे में बताया था राजा बेहद परेशान हो उठा था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी बनाई यूनिवर्सिटी में एक लड़की इस तरह मारी जाएगी। वह अब पूरी तरह से इस मामले की तह तक जाना चाहता था और इसके लिए उसने शहर के कमिश्नर के अलावा यूनिवर्सिटी के खास पदों पर काम करने वाले पदाधिकारियों को और अस्पताल में अदिति की डेड बॉडी का परीक्षण करने वाले डॉक्टरों के साथ मीटिंग बुलाई थी…
मीटिंग में यूनिवर्सिटी से निरमा के अलावा मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और लेक्चरर को बुलाया गया था। पुरोहित मैडम एक बार फिर छुट्टी का एप्लीकेशन देकर यूनिवर्सिटी से गायब थी…
पिया को भी मीटिंग के लिए महल बुलाया गया था। वह अपना सामान उठाकर निकल ही रही थी कि उसके फोन पर निरमा का कॉल आने लगा..
” जी निरमा जी कहिए कैसे याद किया?”
” राजा भैया ने तुम्हें भी तो मीटिंग में बुलाया ही होगा महल जा रही हो क्या?”
“हां!! मैं बस वही के लिए निकल रही थी।”
“मैं भी यूनिवर्सिटी से निकल ही रही थी तो ऐसा करें साथ ही चलते हैं; मैं तुम्हें तुम्हारे हॉस्पिटल से पिक कर लेती हूं।”
“जी अच्छी बात है! मैं हॉस्पिटल मेन गेट तक पहुंच रही हूं आप मुझे यहां से ले लीजिएगा!”
कुछ देर में ही निरमा की गाड़ी पिया तक पहुंच गई और पिया को अपने साथ बैठाकर निरमा ने गाड़ी यूनिवर्सिटी के पीछे बने स्टाफ क्वार्टर की तरफ मोड़ ली..
” हम इधर कहां जा रहे हैं? किसी और को भी लेना है क्या?”
पिया के सवाल पर निरमा ने धीमे से हाँ मेँ सर हिला दिया…
स्टाफ क्वार्टर्स में शुरुआती घर डॉक्टरों के बने थे। उसके बाद की दो चार गलियां बदलने के बाद बाकी स्टाफ का घर था उनमें से एक गली के बाहर ही निरमा ने गाड़ी को रोक दिया..
“पिया जैसा मैं बता रही हूं ,वैसा करना । यहां उतर के अंदर मुड़ने के बाद दो घर छोड़कर राइट हैंड पर टर्न लेना है। उसके बाद दाहिने हाथ पर दूसरा घर सी 102 लिखा हुआ दिखेगा; उस घर की बेल बजाना, जब तक घर की औरत आकर दरवाजा न खोल दे। अगर अंदर से कोई कुछ सवाल करता है तो…”
“मैं समझ गई निरमा जी, मैं जाती हूं!”
पिया गाड़ी से उतरकर तेज कदमों से उस गली के अंदर दाखिल हो गई..
घर के गेट पर जाकर पिया ने घर के बाहर लगे कॉल बेल बजा दी..
लगभग 2 बार बेल बजाने के बाद अंदर से आवाज आई…” कौन है!”
” हर्बल केयर वाली हूं मैडम! प्लीज दरवाजा खोलिए एक बार मेरे प्रोडक्ट देख लीजिए, विश्वास कीजिए बिना किसी डाइटिंग और एक्सरसाइज के 1 महीने में 10 किलो वजन कम हो जाएगा। आप एक बार दरवाजा तो खेलिए…”
कुछ 10 मिनट बाद दरवाजा खुला और कॉटन का कफ्तान पहने एक महिला दरवाजे पर निकल आई उसने पिया को देखा और सवाल पूछने लगी…
“कहां है भाई आपके प्रोडक्ट? वैसे यह सब कुछ काम तो आता नहीं है? और एक महीने में दस किलो वजन घटता भी है…?”
उसने ध्यान से पिया का चेहरा नहीं देखा था, वह इधर-उधर उसके बैग की तरफ देखने की कोशिश कर रही थी। लेकिन अपनी बात खत्म करते-करते उसे लगा जैसे उसने पिया को कहीं देखा है और इतनी देर में ही उसके दरवाजे के एक तरफ से निरमा भी निकल आई..
” भगवान का शुक्र है पुरोहित मैडम कि, आप की तबीयत इतनी खराब नहीं है कि, आप बिस्तर पर पड़ गई है ।
मुझे तो लगा था आप बहुत ज्यादा बीमार है, इसलिए मैं अपने साथ डॉक्टर को लेकर आई थी …पर आपको ठीक-ठाक देख कर अच्छा लगा!”
“निरमा मैडम !! आप, आप यहां कैसे ? और यह इन्हें तो मैंने देखा है कहीं? अरे हां आप तो हमारी अस्पताल की डॉक्टर है ना?”
पुरोहित मैडम के चेहरे पर घबराहट देखकर पिया और निरमा मुस्कुराने लगे। पुरोहित मैडम के सवाल का निरमा ने ही आगे बढ़ कर जवाब दिया..
“हां आपने सही पहचाना। यह हमारे ही हॉस्पिटल की डॉक्टर हैं, डॉक्टर पिया। आपने आज फिर छुट्टी का आवेदन दे दिया था, कि आपकी तबीयत नासाज है। इसीलिए मैंने सोचा पिया को लेकर आपके घर ही चलती हूं; और एक बार आपका हाल-चाल पूछ लेती हूं अब कैसी तबीयत है आपकी?”
“इतना आराम तो नहीं है, पर ठीक ही हूं..”
रंगे हाथों पकडे जाने का डर पुरोहित मैडम के चेहरे पर नजर आ रहा था। उनकी बोलती बंद हो चुकी थी, क्योंकि अगर वह अब तबीयत का कोई भी बहाना करती तो निरमा के साथ पिया भी वहां खड़ी थी..
“तो अगर आप की तबीयत ठीक है, तो चलिए हमारे साथ राजा साहब ने मीटिंग में बुलाया हुआ है।”
“निरमा मैडम!! तबीयत इतनी ठीक नहीं है कि, घर से बाहर जा सकूं कपड़े बदलने की हिम्मत नहीं हो रही..”
“कोई बात नहीं! यह कोई कॉर्पोरेट मीटिंग नहीं है, मैं मानती हूं कि राजा साहब सीएम है। और वहां आज की मीटिंग में हमारी यूनिवर्सिटी के सारे बड़े पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। लेकिन अगर आप की हालत ही नहीं है कपड़े बदलने की तो इसके लिए मैं आपको मजबूर नहीं करूंगी। बल्कि अगर आप अपनी ऐसी ही हालत में वहां पहुंचती है तो लोग आपकी ईमानदारी के लिए आपकी तारीफ ही करेंगे..”
“अरे नहीं निरमा मैडम, इतने सारे आदमियों के बीच में ऐसे घर के गाउन में पहुंच जाऊं मुझे अच्छा नहीं लगेगा..”
पुरोहित मैडम की बात सुनकर पिया उनकी तरफ आगे बढ़ गई..
“आइए मैं आपके कपड़े बदल देती हूं..”
“अरे नहीं नहीं उसकी जरूरत नहीं है। आप दोनों बैठे मैं कपड़े बदल कर आती हूं..”
निरमा और पिया मुस्कुराकर हॉल में पड़े सोफे पर बैठ गए और पुरोहित मैडम मुंह बनाती हुई अंदर चली गई..
“पुरोहित मैडम एक बात और कहनी थी! आपके पिछले दरवाजे के बाहर दो चार पुलिसवाले तफरीह कर रहे हैं, इसलिए कपड़े बदलते समय उस तरफ की खिड़की दरवाजे अच्छे से बंद कर लीजिएगा..”
पुरोहित मैडम के पिछले दरवाजे से चुपचाप निकल भागने के मंसूबों पर भी निरमा ने पानी फेर दिया था..
कुछ ही देर में पुरोहित मैडम को साथ लेके पिया और निरमा महल की ओर चल पड़े..
महल पहुंचने के बाद वह लोग सीधे राजा साहब के ऑफिस की तरफ बढ़ गए..
ऑफिस में बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं थी। राजा ने बहुत ही चुने खास लोगों को ही इस मीटिंग के लिए आमंत्रित किया था जिनमें विराज भी शामिल था।
निरमा और पिया भी भीतर दाखिल हो गए.. राजा और युवराज अब तक मीटिंग में नहीं पहुंचे थे। सबसे सामने की कुर्सियों में जाकर निरमा और पिया बैठ गये । पिया के वहां बैठते हैं उसकी नजर ठीक सामने बैठे समर पर पड़ गई, समर कुछ फाइलों पर अपना सिर झुकाए हमेशा की तरह कुछ पढ़ रहा था..
पिया और निरमा के वहां पहुंचने पर महल का एक नौकर उनके लिए चाय और कॉफी लेकर पहुंच गया.. पिया ने थोड़ा जोर से चाय कॉफी के लिए मना कर दिया। उसकी आवाज सुनते ही समर में तुरंत सिर उठाकर सामने देखा और उसे सामने बैठे देख कुछ देर को उसे देखता रह गया..
पिया भी समर को ही देख रही थी, लेकिन पिया की नजरों में एक उलाहना था गुस्सा था नाराजगी थी!
और समर की नजरों में वही पहले वाला प्यार था। जिसे खुद चाह कर भी पिया के सामने दिखा नहीं पाता था। कुछ देर तक पिया के चेहरे को देखते रहने के बाद उसने वापस अपना ध्यान अपने काम पर लगा लिया…
पिया ने गुस्से में अपना फोन निकाला और समर को एक मैसेज भेज दिया…
” तुम कभी नहीं सुधर सकते! तुम्हारे लिए आज भी मुझसे कहीं ज्यादा इंपॉर्टेंट तुम्हारा काम ही है।”
” हां इंपॉर्टेंट तो काम ही है, लेकिन तुम जिंदगी हो!”
पिया को यकीन नहीं था कि समर उसे रिप्लाई भेजेगा उसने तुरंत सिर उठा कर सामने जहां समर बैठा था वहां देखा, लेकिन अब समर वहां मौजूद नहीं था..
पिया इधर-उधर देखने लगी ,लेकिन उसे समर कहीं नजर नहीं आया और उसने वापस उसे एक मैसेज भेज दिया…
” जिंदगी हूं! इसलिए मुझे देखने तक की फुर्सत नहीं है तुम्हारे पास?”
” पर यह मान लो, कि जैसे मैं तुम्हें देखता हूं वैसे तुम्हें कोई नहीं देख सकता। इसलिए तो मेरी एक नजर पडते ही तुरंत मोबाइल निकाल कर मुझे मैसेज भेज दिया!”
” बकवास मत करो, बहुत गुस्सा आ रहा था तुम पर इसलिए मैसेज भेजा !”
” लेकिन दिल में तो अब भी मेरे लिए प्यार ही है, चाहे कितना भी गुस्सा दिखा लो तुम!”
” बस 1 महीने में मेरी शादी होने वाली है!”
“बधाई हो, मैं जरूर आऊंगा!”
” क्या मेरी बिदाई देखने आओगे? , या शादी का खाना खाने आओगे?”
” खाना भी खा लूंगा और तुम्हें अपने साथ बिदा करके भी ले आऊंगा । आई प्रॉमिस यू , भाग लो जितना भाग सकती हो मुझसे, मैं भी देखता हूं कहां जाओगी मुझे छोड़कर।”
” मिस्टर सनकी!! तुम जैसे लड़कों से शादी करके लड़कियां जिंदगी भर रोती है। इसीलिए मैंने यह डिसाइड किया कि मैं तुमसे शादी ही नहीं करूं।”
” हां जानता हूं तुमने डिसाइड कर लिया है ,लेकिन अपनी इस बात पर कायम रहती हो या नहीं वह देखना है।
और मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारी यह प्रतिज्ञा मैं बड़ी आसानी से तोड़ दूंगा। तुम अपनी जिद पर अड़े रहो मैं मेरी जिद पर अड़ा रहूंगा.. अब मैसेज मत करना राजा साहब आ रहे हैं , अब मैं जवाब नहीं दे पाऊंगा और तुम बेवजह नाराज हो जाओगी..
इस मैसेज को पढ़ने के बाद पिया ने गुस्से में फोन वापस पर्स में डाल दिया..
कुछ देर में ही राजा और युवराज मीटिंग हॉल में चले आए..
राजा युवराज के आते ही सभी लोग अपनी अपनी जगह पर खड़े हो गए। सबको बैठने का इशारा करने के बाद और युवराज के बैठने के बाद राजा अपनी जगह पर माइक लेकर खड़ा हो गया..
” आप सब लोग जानते हैं कि मैंने यह अर्जेंट मीटिंग क्यों बुलाई है? आप में से अधिकतर लोगों को मालूम हो चुका होगा कि मायानगरी में कितनी बड़ी दुर्घटना घट चुकी है। मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की एक लड़की ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे बड़ी शर्म की बात हमारी यूनिवर्सिटी के लिए और कोई नहीं हो सकती । मेरा इस यूनिवर्सिटी को खोलने का सपना यही था कि हर गरीब बच्चा भी अच्छी शिक्षा पा सके। मेरा सपना यही था कि हमारे यहाँ बिल्कुल ऐसा माहौल रहे कि यह पता भी ना चले कि कौन ऊंचे तबके का है और कौन गरीब तबके से। इतनी सारी व्यवस्थाओं के बावजूद मुझे यह नहीं समझ में आ रहा है कि मुझसे चूक कहां पर हो गई? अखिर कौन है वह जिसने मेरी यूनिवर्सिटी में ऐसी सेंधमारी की है कि जिसके बारे में मुझे पता ही नहीं चल पाया।
आप सभी जानते हैं कि लकड़ी चाहे कितनी बेशकीमती हो और उसका बना हुआ सिंहासन कितना भी मजबूत हो पर अगर दीमक कहीं से भी उसके अंदर घर कर गई तो फिर उससे सिहासन को बचाना मुश्किल हो जाता है।
मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि हमारी यूनिवर्सिटी में एक बच्ची मारी गई है। मुझे सांत्वना देने वालों ने यह भी कहा कि हमने उस दीमक को उसके पहले कदम पर ही पकड़ लिया है, और हम उसे समूल नष्ट कर देंगे । लेकिन फिर भी मैं यह कैसे मान लूं कि हमने उस दीमक को उसके पहले चरण पर ही पकड़ लिया है? यह भी तो हो सकता है कि अदिति अकेली लड़की ना हो जो इस तरह के किसी जाल में फंसी हो और यही बात सोच कर मैं चैन से सो नहीं पा रहा हूं। क्योंकि अगर यूनिवर्सिटी के और भी बच्चे इस तरह के किसी भी क्रियाकलाप में शामिल है तो उनकी जिंदगी भी खतरे में है। और यूनिवर्सिटी के इतने सारे बच्चों की जिम्मेदारी हम सब के कंधों पर है। उनकी जिम्मेदारी जितनी मेरी है उतनी ही आप सब की भी है।
जिस दिन से यह यूनिवर्सिटी खुली है उस दिन से इन सारे बच्चों को मैंने अपने शौर्य के बराबर ही माना है । और इनमें से किसी के भी साथ गलत होना मतलब मेरे किसी राजकुमार या राजकुमारी के साथ गलत होना है, और यह मैं किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं जानता हूं आप सब अपने अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं, पुलिस भी पूरी जांच कर रही है। लेकिन इतना समय गुजर जाने पर भी उस लड़की के बारे में कुछ भी मालूम नहीं हो सका? क्यों उस के बारे में कुछ भी मालूम नहीं हो सका क्या मैं इसका कारण जान सकता हूं..?
चाहता तो मैं यही था कि आप में से हर एक को खड़े करके सवाल पूछूं कि – उस लड़की ने आत्महत्या क्यों की? क्या यहां उपस्थित किसी को भी उसके बारे में कुछ भी मालूमात नहीं होंगे?
किसी को तो कुछ तो मालूम होगा? और यह भी सही है कि छुपाने वाला सारी सच्चाई छुपाए बैठा है! लेकिन मैंने भी अपने आप से वादा कर रखा है कि मैं उस लड़की की मौत यू जाया नहीं होने दूंगा। आप लोगों को शायद मालूम नहीं लेकिन जिस रात समर ने मुझे यह सूचना दी थी, उसके अगले दिन मैं और बांसुरी उस लड़की अदिति के माता-पिता से मिलने उसके घर गए थे, और मुझे सच कहूं तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं उन्हें क्या सांत्वना दूं?
क्योंकि उन्हें सांत्वना देने के पहले जब मैं उनके सामने बैठा था तो एक पल को मैंने महसूस किया कि अगर अदिति मेरी अपनी बेटी होती तो मेरे दिल पर क्या बीत रही होती? उस समय जो मैंने महसूस किया है उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता..
बस आप सब से यही निवेदन कर सकता हूं कि अदिति को अपनी बेटी मानकर उसकी केस की छानबीन करिए..
मेरी अब तक की बातें बिल्कुल ऐसी थी जैसे कोई पिता बोल रहा हो।
लेकिन अब मैं राजा अजातशत्रु यहां बैठे सभी लोगों को यह आज्ञा देता हूं कि पंद्रह दिन के भीतर मुझे यह केस सुलझा हुआ मिलना चाहिए और अगर यह केस नहीं सुलझता, तब आप सब स्वयं को मिलने वालीं सजा के जिम्मेदार ख़ुद होंगे…
अब आप सब इसे मेरा गुस्सा समझिए या सनक..लेकिन मुझे पंद्रह दिन के अंदर सारा केस सुलझा हुआ चाहिए…..
अब आगे की बातें समर आप लोगों को समझाएगा
राजा साहब के बैठते ही समर ने आगे बोलना शुरु कर दिया… पिया और निरमा के बगल में बैठी पुरोहित मैडम के चेहरे पर पसीना छलक रहा था…
निरमा धीमे से पुरोहित मैडम की तरफ झुक गई..
“यह तो तुगलकी फरमान है ! अब अगर एक लड़की आत्महत्या कर रही है, तो इसमें हम और आप क्या कर सकते हैं? उसके आत्महत्या करने के भी सौ कारण होंगे, क्या वह हमें बता कर मरी है जो हम पंद्रह दिन के अंदर केस सॉल्व कर दें!”
पुरोहित मैडम की आंखे आश्चर्य से चौड़ी हो गई, उन्होंने निरमा की तरफ देखा और चुपचाप हां में सिर हिला दिया..
” एक तो यहां यूनिवर्सिटी के एग्जाम सर पर है, दूसरा मेडिकल एंट्रेंस का भी टाइम आ चुका है …अब ऐसे में इस समय ये सब माथापच्ची कौन करेगा? यह नहीं कि चुपचाप केस को दबा दें..”
निरमा के ऐसा बोलते ही पुरोहित मैडम जो इतनी देर में सांस लेना भूल चुकी थी, सुकून से गहरी गहरी सांसें लेने लगी। थोड़ा दम मिलते ही उन्होंने निरमा की हां में हां मिलाना शुरू कर दिया..
“मैंने तो पहले ही आपसे कहा था कि पोस्टमार्टम के लिए बॉडी मत भेजिए, पर आपने सुना ही नहीं। पुलिस तक चला गया मैटर ,और इसीलिए तो राजा साहब तक पहुंच गया वरना वहीं के वहीं केस दब गया होता..”
“आप समझती नहीं है पुरोहित मैडम !! सबके सामने दिखाना भी पड़ता है, अब मैं किसी छोटी-मोटी पोस्ट पर तो हूं नहीं, मुझे तो यही दिखाना पड़ेगा कि मैं ईमानदारी से सारा काम कर रही हूं ।।इसीलिए तो अपनी दोस्त के पास ही बॉडी भेजी, और उसने वही रिपोर्ट तैयार की जो मैंने कही थी..”
“क्या बात कर रही हैं आप? क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आपके हिसाब से तैयार की गई है..?”
“जी हां !! बिल्कुल पोस्टमार्टम की रिपोर्ट मेरे हिसाब से ही तैयार की गई है, लेकिन अगर तुरंत सब कुछ दे देते तो राजा साहब को हम सब पर शक हो सकता था..
इसलिए ऐसा माहौल बनाना पड़ा कि जैसे इन्वेस्टिगेशन चल रहा है और इसीलिए इतना लंबा मैटर को भी खींचना पड़ा।
हम सब तो बस इसी बात का इंतजार कर रहे थे कि राजा साहब इस तरह का कुछ फरमान जारी करें और उसके बाद यह दिखाते हुए कि हमने इतनी जल्दबाजी में काम किया है उनके सामने रिपोर्ट प्रस्तुत करें..”
पुरोहित मैडम को निरमा की बातों पर पूरी तरह से भरोसा तो नहीं हो रहा था, लेकिन दूसरी तरफ उसे यह भी लगा कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलाने वाली इतनी छोटी उम्र की औरत अगर धांधलीबाज नहीं होती तो इतनी ऊंची पोजीशन पर पहुंचती कैसे ? जरूर यहां तक पहुंचने के लिए इसने कई पैंतरे आजमाएं होंगे, तभी तो आज अपने से दुगुनी दुगुनी उम्र के लोगों के सर पर बैठकर उन्हें आदेश दे रही है ..
धीरे धीरे पुरोहित मैडम को निरमा की बातों पर थोड़ा-थोड़ा ही सही यकीन आने लगा..
समर के कहने के बाद युवराज भैया ने भी केस को जल्दी निपटाने के लिए सभी को कुछ सुझाव दिए और अपनी तरफ से मीटिंग समाप्त करके वहां से निकल गए उनके पीछे ही राजा साहब भी निकल गए समर ने वापस माइक थाम लिया…
” आप सब से दरख्वास्त है कि आप सभी यहां से खाना खाकर ही जाइएगा … आप सभी ने अपना कीमती समय हम लोगों को दिया और इसके अलावा इतनी शॉर्ट नोटिस पर आप सब इस अर्जेंट मीटिंग के लिए एक बार में पहुंच गये इसलिए महल की भी जिम्मेदारी है कि आप लोगों का ध्यान रखा जाए। इसलिए वापस आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप लोग भोजन करके ही जाइएगा…”
“इन सब बातों की कितनी अकल है इसे, बस लव लाइफ कैसे हैंडल करना है वहीं नहीं आता?'”
पिया को खुद में बड़बड़ करते देख निरमा मुस्कुरा उठी और उसे साथ लेकर वह खाने के लिए आगे बढ़ गई….
पिया अपना प्लेट लेकर आगे बढ़ी कि तभी समर भी अपनी प्लेट लेकर ठीक उसके पीछे खड़ा हो गया । वह धीरे से पिया की तरफ झुका और उसके कान के पास आकर पूछ लिया…
” शाम को फ्री हो?”
” बिल्कुल नहीं और तुम्हारे लिए तो बिल्कुल, बिल्कुल भी नहीं!”
” मतलब फ्री हो! एकदम फ्री!”
” अभी से कुछ नहीं कह सकती। कोई केस अचानक भी तो आ सकता है, और वैसे भी आज मुझे शादी की शॉपिंग के लिए जाना है!”
” क्यों अब तक शादी का लहंगा खरीदा नहीं?”
” नहीं! नहीं खरीदा!”
” मेरा इंतजार कर रही थी!”
” जी नहीं!! अब तक वक्त नहीं मिल पाया था, लेकिन आज शाम को सोच रही हूं खरीद लूंगी..!
” कहां से खरीदोगी?”
” मैं तुम्हें क्यों बताऊं कि मुझे ‘वामा’ या ‘काव्यांजलि’ ही पसंद है!”
” दोनों में से कहां मिलोगी?”
” तुम खुद को समझते क्या हो?”
” पांच बजे तक तो तुम्हारी शाम की ओपीडी खत्म होती है, उसके बाद ही निकलोगी…
मैं आ जाऊंगा…
पिया के पीछे पीछे घूमते हुए भी समर ने अपनी प्लेट में कुछ भी नहीं परोसा था। समर के ऐसा कहते ही पिया ने पलट कर उसे देखा और अपनी प्लेट लेकर निरमा की तरफ आगे बढ़ गई समर भी उसके पास चला आया…
उसकी प्लेट से मीठा उठा कर उसने आधा खाया और वापस प्लेट में रख कर मुड़ कर मुस्कराते हुए चला गया…
” इंतजार करना मेरा …”
पिया ने एक नजर घूर कर उसे देखा और निरमा की तरफ देखने लगी निरमा उन दोनों को देखकर अपनी हंसी छुपाने की कोशिश में लगी थी…
उसी वक्त निरमा के मोबाइल पर कोई मैसेज आया … और निरमा ने उस नंबर पर फोन लगा लिया..
दूसरी तरफ से फोन के उठते ही निरमा वहाँ से जरा दूर चली गई..
” हां मुझे पता है दोनों तरफ के एग्जाम की डेट एक साथ पड़ रही है, कोई दिक्कत नहीं आएगी तुम तैयारी रखो!”
फोन काट कर निरमा मुस्कुराते हुए पुरोहित मैडम और पिया के पास चली आयी, और निरमा को आते देख समर का छोड़ा हुआ मीठा जो पिया अपने मुहँ में रखने जा रही थी, गप से उसने मुहँ में रखा औऱ निगल गई……
क्रमशः
aparna .
