मायानगरी -38

मायानगरी- 38

    गौरी एक एक कर कमरे में रखा समान पैक करती जा रही थी , उसके पापा को छुट्टी मिल गई थी , हालांकि पंद्रह-बीस दिन बाद आकर उन्हें एक बार खुदको दिखाना था. …
  
   ” पापा अपना ख्याल रखियेगा , दवाएं समय पर लीजियेगा , खाने पीने में भी परहेज करना होगा ।”

  उसके पापा मुस्कराते हुए उसकी बातेँ सुन रहे थे और हाँ में सर हिलाते जा रहे थे,  गौरी ने सारी दवाएं एक साथ ट्रे में ली और किनारे बैठी अपनी सौतेली माँ के पास जाकर बैठ गई..

” मैं आपको समझा देती हूं कि कौन सी दवा कब लेनी है ?”

  गौरी एक एक दावा के बारे में उन्हें बताती रही ..

” आप समझ गईं ना , कुछ दिक्कत हो तो मुझे फोन कर लीजियेगा…”

” डॉक्टर नहीं हूं इसका ये मतलब नहीं की अनपढ़ हूं मैं! मुझे समझ में आ गया है कि क्या कब लेना है…?

  गौरी चुपचाप उठ कर अपने पापा के पास चली आईं…उन्होंने उसे देखा और उसके सर पर हाथ रख दिया ….

” तू चलेगी क्या बेटा मेरे साथ ? अभी तो तेरे इम्तिहान होने में भी समय है ?”

” अब कहाँ समय बचा है पापा ; दो हफ्ते बाद ही तो हैं .. फिर ढेर सारी पढ़ाई भी करनी है,  ये मेर लास्ट प्रोफ है ना !”

उसके पापा के चेहरे पर खुशी दिखने लगी ..

” बताओ मेरी छोटी सी लड्डू, देखते देखते डॉक्टर बन जाएगी बस दो हफ्ते बाद ही ..

” अरे नहीं पापा, अभी एक्जाम होंगे उसके बाद इंटर्नशिप होगी , तब जाकर कहीं डॉक्टर बनेंगी .. फिर मुझे पीजी भी तो करना है …

” हाँ मेरी बच्ची !तुझे खूब पढ़ना है अभी !”

  उसी वक़्त दरवाजा खुला और मृत्युंजय हाथ में एक कागज पकड़े अंदर चाला आया,  और गौरी के हाथ में पकड़ा दिया ..

” कैसे हैं अंकल अब ? आज तो काफी फ़्रेश दिखाईं दे रहे है!”

” थैंक्स बेटा आप सब ने बहुत ध्यान रखा मेरा !”

” ये तो हमारा फर्ज है, हमें करना ही है , वैसे गौरी तुम्हें पता है मैं आज से सस्पेंड हूं , दो हफ्तों के लिए अब मुझे अस्पताल नहीं आना..बस आज अंकल के ये डिस्चार्ज पेपर्स के लिए ही आया हूँ!”

” क्यों बेटा ऐसा क्या हुआ कि आप जैसे काबिल डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया क्या?’

” आप टेंशन मत लीजिए अंकल यह सब तो हमारी जिंदगी का हिस्सा है और यह सब लगा ही रहता है, मजे से 2 हफ्ते आराम करूंगा कम से कम सस्पेंशन के बहाने ही सही छुट्टी तो मिलती है! वरना तो हम लोग छुट्टियों को तरस जाते हैं!”

” घूमने के लिए हमारे शहर भी आओ बेटा पास ही में  है!

   गौरी ने प्यार से घूर कर अपने पापा को देखा, उसे उनका मृत्युंजय से इतना घुल मिलकर बातें करना कुछ अजीब लग रहा था…
   उसके पापा अपने बेड से खड़े हो गए और कमरे से बाहर निकल गये ,गौरी और उसकी सौतेली मां उनका सामान लिए उनके पीछे-पीछे बाहर तक चले आए..
    उन लोगों की कार में बैठकर वहां से निकलते हैं गौरी पीछे मुड़ के अस्पताल की सीढ़ियां चढ़ गई अस्पताल के दरवाजे पर ही मिलती मुझे हाथ बांधे खड़ा मुस्कुरा रहा था…

“थैंक यू सो मच सर आपने बहुत हेल्प की!”

” इट्स ओके यार! यह कोई बड़ी बात तो नहीं है”

” बहुत शाम हो गई है सर मैं अब निकलती हूं !”

गौरी मुस्कुराकर हॉस्टल की तरफ निकलने वाली थी कि मृत्युंजय का फोन बजने लगा मृत्युंजय ने फोन उठाया और उसे फोन पर बात  करते देख गोरी ने उसे धीमे से अपने जाने का इशारा किया और सीढ़ियां उतरने लगी…
         मृत्युंजय ने किसी से फोन पर बात की और फोन रखने के बाद वह खुशी से गौरी को आवाज लगाता उसके पास चला आया…

” गौरी एक गुड़ न्यूज है!”

” क्या हुआ सर?”

” मेरा पीजी में सेलेक्शन हो गया है …और इस बार रैंक काफी अच्छी आईं है , यूँ लग रहा मेरी पसंदीदा ब्रांच मिल जाएगी …
   मेरा सपना था गौरी न्यूरो सर्जन बनने का , लास्ट ईयर कुछ मार्क्स से चूक गया था इसलिए ब्रांच नहीं मिल पायी थी ।

  और खुशी से मृत्युंजय गौरी के हाथ पकड़ लिए …
गौरी ने अपने हाथ देखे और मुस्करा कर उसे वापस देखने लगी..

” सर अब मेरा ट्रीटमेंट कौन करेगा?”

” तुम्हारा इलाज तो मैं ही करूंगा , और वो भी बड़े अच्छे से …

  दोनों बात करते करते आगे बढ़ते हुए कैंटीन tk पहुंच गए…

” गौरी कॉफ़ी पी लें?”

” वाह सर!! आपको तो पार्टी देनी चाहिए सेलेक्शन की , और आप बस कॉफ़ी में टाल रहें हैं!”

” पार्टी भी दे देंगे.. .. बस काउंसिलिंग से वापस लौट आऊं, पता चलेगा क्या ब्रांच मिलती है वहाँ, ईएनटी, एनसथेसिया से तो मनोरोग विशेषज्ञ ही ठीक है …”

  अपनी बात कहकर मृत्युंजय जोर से क्या खिला उठे तभी उसके साथ दो और लोग कैंटीन में चले आए..
  हाथी और लोगों ने मृत्युंजय के पीठ पर एक जबरदस्त धवल जमाया..

  तो बेटा आखिर पूरा हो ही गया तुम्हारा न्यूरो सर्जन  बनने का सपना!

  ” अबे अभी कहां पूरा हुआ है अभी तो बस सिलेक्शन हुआ है अगले हफ्ते काउंसलिंग है तब देखो पता चलता है कि क्या मिलता है?”

” इस बार एंड बहुत अच्छी है जी मुझे तो पूरी उम्मीद है तुझे जो चाहिए होगा वह मिल जाएगा”

कॉलेज भी तो माया नगरी ही चाहिए ऐसे करनी है मुझे आगे की पढ़ाई।

और अगर गेम्स मिला तो,  नहीं जाएगा?

नहीं एम्स जाने का भी मन नहीं है; मुझे माया नगरी ही चाहिए!”

  जय के दोनों दोस्त भी वही कुर्सी खींच कर बैठ गए सभी लोग कॉफी पीते हुए बातों में लग गए उन लोगों के आने से गोरी थोड़ी शांत हो गई थी उसने अपनी कॉपी जल्दी से खत्म की और अपनी जगह पर खड़ी हो गई…

   ” ओके सर मैं चलती हूं मुझे फिर देर हो जाएगी!”

  मृत्युंजय ने हां में सिर हिलाया और गौरी के पीछे खड़ा हो गया गौरी आगे बढ़ गई कि मैं तुझे नाम से पीछे से आवाज दी और कैंटीन के काउंटर से एक बॉक्स उठाकर उसकी तरफ चला आया..

    ” गौरी इसमें पेस्ट्री है, तुम रूम पर मुंह मीठा कर लेना।  एंड वन मोर थिंग; थैंक्स फॉर योर सपोर्ट।”

” सर सपोर्ट तो आपका रहता है, आपने जाने कितनी बार मेरी हेल्प की हैं कि अब तो मेरा थैंक्यू भी बहुत छोटा पड़ जाता है!”

” ओके,  अब जाओ , देर हो रही है … कल मिलते हैं सुबह जॉगिंग ट्रैक पर!”

  मुस्करा कर गौरी हाथ में पेस्ट्री बॉक्स लिए आगे बढ़ गई…

***

  वेदांत अस्पतालों में भुवन से मिलने आया था , आज भुवन की तबियत में और भी ज्यादा सुधार दिख रहा था …

” क्या बात है छोटे? आज एक दम राजा बेटा बन कर आए हो ? सफेद झक शर्ट और ग्रे पैंट,  लग रहा है किसी कोर्पोरेट पार्टी का हिस्सा बनने जा रहे हो ?”

” सही पहचाना भुवन भैया,  वहीं तो जा रहे हैं … आज बाबूजी की एक पार्टी है ..पार्टी में सभी बड़े लोग आने वाले हैं..सीएम साहब खुद आने वाले हैं,  उनके कैबिनेट के सारे मंत्री सिपाहियों का जमावड़ा होने वाला है..आप स्वस्थ रहते तो आप ही बाबूजी के साथ जाते , पर आप जा नहीं पाता रहे इसलिए उन्होंने हमें साथ चलने कहा है !
   और विशेष तौर पर कहा कि हम सफेद शर्ट में ही आए..आप तो उन्हें जानते ही हैं,  उन्हें हमारे ऊलजलूल जींस टीशर्ट से कितनी चिढ़ है , बस इसलिए आज सुबह ही लिनेन की नयी कमीज लेकर आए हैं ..बस आपका आशीर्वाद लेने आए थे ! “

” बहुत खुशी हो रही तुझे देख कर छोटे , बड़े भैया लोग तो अपने घर परिवार में ही व्यस्त हैं..तुझे ही काका की धरोहर को आगे लेकर जाना है ..

” सिर्फ हमे नहीं , आप और हम साथ लेकर जाएंगे ..चलिए अब जल्दी से आशीर्वाद दीजिए , मैं निकलता हूं वर्ना देर हो जाएगी , इतने बड़े लोगों की पार्टी में देर से पहुंचना अच्छा नहीं लगेगा , राजा साहब भी आने वाले है ना !

” अब राजा कहो चाहे मंत्री है तो वो दोनों ही .. द ग्रेट राजा अजातशत्रु सिंह!! किस्मत वाले हो जो उनका दर्शन करने जा रहे..हम भी स्वस्थ होजरी सबसे पहले वहीं जाएंगे ..उनका हाथ सिर पर हो फिर किसी बात का ग़म नहीं !

” जी भैया !”

  भुवन के पैर छूकर वेदांत बाहर निकल गया … उसने निकलते हुए अपने एक दोस्त को फोन कर लिया जिससे उसने बुके मंगवाया था , उसने बताया की वो कैंटीन के पास ही बुके लेकर उसका इंतजार कर रहा है .. इसलिए वेदांत ने गाड़ी कैंटीन की तरफ़ बढ़ा ली …

  गाड़ी कैंटीन के गेट के बाहर खड़ी कर वेदांत ने उस लड़के को बुलाया और गाड़ी से उतर कर एक सिगरेट सुलगा ली..
  वो इधर से उधर टहलते हुए अपने मोबाइल पर मेसेज भी देखता जा रहा था कि उसे आहट सी सुनाई दी और वो तुरंत गेट से अंदर की तरफ़ बढ़ा , अंदर से बाहर निकलती गौरी भी हडबडी में थी , वो सामने से आते वेदांत से टकरा गई और उसके हाथ का डिब्बा खुल कर नीचे गिर पड़ा…
   डिब्बे पर की चॉकलेट पेस्ट्री वेदांत की सफेद कमीज रंग गई..और वेदांत गुस्से में आग बबूला हो गया..

” अंधी हो क्या ? देख कर नहीं चला जाता , सारी कमीज खराब कर दी?”

” अंधा तुम जैसे लोगों को कहा जाता है जो आंखें होते हुए भी चलते समय मोबाइल पर अपनी आंख गड़ाए रहते हैं समझे!”

” मुझे समझाने की जरूरत नहीं है। मुझे तो लगता था तुम बस पागल हों पर अब समझ में आ रहा है अंधी और बहरी भी हों !”

मैं क्या हूं यह तुम्हें जानने की जरूरत नहीं है; अपने काम से काम रखो।”

” इतनी अकड़ किसे दिखा रही हो?जानती भी हो मैं हूं कौन?”

“इक बेईमान नेता की बिगड़ी हुई औलाद के नाम पर ही तुम्हारी पहचान है वेदांत सिंह , इससे ज्यादा तुम्हारी अपनी कोई पहचान नहीं …
   मुझे इतना बोलने की आदत नहीं है लेकिन किसी ने एक दिन मुझसे कहा था कि अगर गलत को देख कर भी हम चुप है इसका मतलब हम कहीं ना कहीं उस गलती को स्वीकार कर रहे , और मैं तुम्हारी गलतियों को स्वीकार नहीं कर सकतीं इसलिए अगर तुमने गलती की है तो वो तुम्हारी अपनी है उसमें मेरा कोई दोष नहीं !”

” देख रहा हूं उस मृत्युंजय के चक्कर में तुम्हारी जबान भी खुलने लगी है !”

” पहली बार कुछ सही देख रहे हो, उन्हें इसी तरह देखते रहो जीवन में कुछ ठीक ठाक चीज सीख जाओगे !”

  वेदांत का गुस्से से बुरा हाल था , एक तो वो पार्टी के लिए लेट हो गया था दूसरे उसे इस तरह किसी लड़की ने आज तक जवाब नहीं दिया था इसलिए उसका पारा सातवें आसमान पर था ..

” मैं चाहूँ ना तो तेरा घमंड पल मे तोड़ सकता हूँ , लेकिन लड़की वो भी दिमाग से कमजोर समझकर छोड़ देता हूं!”

” बहुत अच्छा करते हो क्योंकि जिस दिन मुझे कमजोर समझ मेरा घमंड तोड़ने आगे बढोगे ना उस दिन तुम्हें तोड़ने वालों की लाइन लग जाएगी; तो ये गीदड़ भभकी अपने चेलों के लिए बचा कर रखो और फ़ूट लो यहां से। “

  वेदांत का दिल कर रहा था गौरी को खिंच कर एक थप्पड़ लगा दे पर कुछ तो था उसके मासूम चेहरे में था  की वो मारना चाह कर भी मार नहीं पाया और अपने जेब से रुमाल निकल अपनी शर्ट साफ़ कर्ता गाड़ी में जा बैठा,  गौरी भी मुड़ कर जाने को थी कि पीछे खड़े मृत्युंजय ने तालियां बजानी शुरू की और आगे बढ़ कर गौरी के सिर पर हाथ रख दिया … ” वेरी वेलडन गौरी ! तुम्हें आज इतना कॉफ़ीडेंट देख कर बहुत खुशी हुई !”

  गौरी धीमे से मृत्युंजय की तरफ़ खिसक आईं और उसका करीब अना समझ में आते ही मृत्युंजय ने उसे धीमे से गले से लगा लिया …
    वेदांत ने अपनी गाड़ी वहीं से घुमायी और उन दोनों को घूरते हुए आगे बढ़ गया ….

क्रमशः

aparna

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