जीवनसाथी- 2/64


जीवनसाथी – 2/64

   वो इण्डिया वापस आ चुका था.. उसके अंदर बदले कि आग धधक रहीं थी, और वो आग सिर्फ और सिर्फ वासुकी और बाँसुरी के ख़ून की बारीश से ही बुझ सकती थी….

   सुनील शेखावत ने फ़्लाइट से हिंदुस्तान की ज़मीन पर उतरने के बाद एक बार अपने पिता की तस्वीर अपने हाथ में ली और वापस अपनी कसम को दुहरा उठा…
उसके पिता के बचपन का दोस्त चंद्रभान राजदेव भी अपने दोस्त कि असमय हुई मौत से कुढा बैठा था… इसलिए जैसे ही उसे मालूम चला कि सुनील इण्डिया आना चाहता  है, उसने फौरन उसे अपने पास बुला लिया…

एयरपोर्ट से निकलते ही उसकी गाड़ी सीधे मंत्रालय के दूसरी तरफ के गौरव पथ की तरफ मुड़ गयी….

वहाँ विदेश में बैठे बैठे ही उसने बाँसुरी के बारे में जितना मालूम चल सकता था वो सारी जानकारी निकलवा ली थी…
  
  दुश्मन का दुश्मन दोस्त भले ना बन पाए लेकिन हमकदम ज़रूर हो जता है उसी तर्ज़ पर राजा अजातशत्रु की विपक्षी पार्टी के नेता चंद्रभान ने ही अजातशत्रु से अपने किसी पुराने बदले को पूरा करने ही सुनील शेखावत से हाथ मिला लिया था… चंद्रभान अपने दोस्त शेखावत की कमीनाई से परिचित था लेकिन चंद्रभान नहीं जानता था कि सुनील शेखावत असल में क्या बला था… ?

सुनील की गाड़ी चंद्रभान की कोठी के सामने उसके दरबान द्वारा रुकवा दी गयी… और अपना पता अंदर भेजने के बाद वहाँ बैठा सुनील अपने मंसूबों में खोया रहा कि अंदर से उसे दाखिल होने का फरमान मिल गया…

वो अंदर पहुंचा उस वक्त चंद्रभान के यहाँ कोई जलसा चल रहा था…
सुनील के अंदर पहुँचते ही चंद्रभान खुद उसका स्वागत करने चला आया…

” तुम्हारा स्वागत है सुनील… अब यहाँ तुम्हें जिस चीज़ की ज़रूरत होगी उसके लिए हम हैं, सारा इंतज़ाम देखने के लिए…
अच्छा एक बात बताओ, तुम्हारी फैमिली कहाँ है.. ? अपनी फैमिली को वहीँ छोड़ कर आये हो क्या.. ?”

” जी अंकल !! उन सब को यहाँ फ़िज़ूल लेकर आने का कोई मतलब ना था… वैसे आप बतायें, आप कैसे हैं… ?”

“क्या कहें बस जी रहें हैं… ! उस अजातशत्रु ने कहीं का नहीं छोड़ा…

” क्यों ऐसा क्या किया उसने… ?”

सुनील की पीठ पर हाथ रखें चंद्रभान उसे अपने ऑफ़िस की तरफ लें चलें….

“हमारे जैसे राजनीती के मंजे हुए खिलाडी को चुनाव में ऐसी धोबी पछाड़ दी कि क्या कहें तुमसे… !
वो पहली बार चुनाव में खड़ा हुआ था, वो भी अपनी अलग पार्टी बना कर.. उसके आने के पहले हमारी पार्टी ही अग्रणी रहा करती थी..रिज़ल्ट के वक्त उसकी पार्टी आगे ज़रूर थी लेकिन सरकार बनाने के लिए हमसे या दूसरी पार्टी से उसे हाथ मिलाना ही पड़ता…
हमनें उसके पास अपना प्रस्ताव भी भेजा कि हम उससे हाथ मिलाने को तैयार है बस हमारी शर्त  ये  रहेगी कि मुख्यमंत्री हम बनेंगे.. !
उसने सिरे से हमारा प्रस्ताव नकार दिया.. फिर हमनें कहा कि ठीक है हम समर्थन देंगे लेकिन कम से कम आधे कार्यकाल के लिए हमें मंत्री पद दे दे.. तब उसने हामी भर दी… !
 
  उसके बाद जब हमनें समर्थन दे दिया तब वो सरेआम अपने सारे वादो से मुकर गया…
हमनें कहलवाया था कि मंत्रिमंडल में मुख्य पदों पर हमारे आदमी बैठेंगे, लेकिन उसने सारे अपने लोगों को बैठाया.. यहाँ तक कि हमें भी कोई ढंग का कार्यभार नहीं दिया…

“आप क्या देख रहें हैं अभी.. ?”

चंद्रभान अपना माथा पकड़ कर बैठ गया..

” आदिवासी एवं वनवासी विभाग दिया है हमें, जिसमे ना किसी तरह कि कमाई है ना मलाई.. !
शराब के सरकारी ठेके के लिए हमनें उससे कहा, वो भी नहीं दिया, अहाता छीना तो छीना चखने का सारा काम भी छीन लिया..
  राज्य में जितने भी छुटपुट या बड़े प्लांट है उनका फ्लाई ऐश का काम भी खुद देख रहा है……
सारे  लिक्विड लाने वाले विभाग चुन चुन कर अपने लोगों को सौंप दिये हैं और जिनमे कोई कमाई नहीं है,  कुछ नहीं है वो सारे विभाग हमारी तरफ बांटे है… !
  पूरा बंटाधार कर के ही माना है ये आदमी… और तो और हमारे साढ़ू का लड़का मेडिकल एंट्रेंस में तिकड़म से पास होकर फाइनल ईयर में पहुँच भी गया था… एक साल बस बचा था और इसने मेडिकल स्कीम के नाम पर ऐसा बवाल मचाया कि पुलिस को सारे केस खोल खोल कर ऐसे बच्चो को छांटना पड़ा जो धांधली से पास होकर मेडिकल में सीट पका कर पहुंचे थे… ऐसे सारे बच्चो छांट छूँट कर कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखा दिया है इसी अजातशत्रु ने..

“क्यों दुःखी हो रहें हैं अंकल, आपका एक ही तो भतीजा गया इसमें…..

“अरे कहाँ एक भतीजा…?
हमारे पास दूर सभी में जितने बच्चे थे सभी कि डूबती नैया को हम ऐसे ही पार लगवाए थे |  कहने को हो जाता कि मंत्री जी के घर के लगभग सभी बच्चे डॉक्टर इंजीनियर हैं |
पर इस के कारण अब सारे बच्चे वापस सिर्फ बारहवी पास रह गए है… | बोलों ये भी कोई बात हुई भला.. उन मासूम बच्चो का क्या कसूर था इसमें ?

अब और क्या क्या बतायें.. ? इसके काम करने का यहीं हाल रहा तो कुछ दिन में एक झोला पकड़ कर हम रोड पर आ जायेंगे…

हमारी साली साहिबा की बेटी फ़र्ज़ी सीट से पढ़ कर डॉक्टर बन भी गयी थी.. उसकी शादी हो रहीं थी…| बारात द्वारे लगी खड़ी थी कि ये फ़र्ज़ी सीट कांड की खबर जाने कहाँ से वहाँ फ़ैल गयी.. उसी वक्त पुलिस वहाँ चली आयी और उस लड़की को पकड़ कर लें जाने लगी… |
  अब हमारी बीवी, उसकी बहन सब हमारे सामने बमकने लगे लेकिन पुलिस पर हमारे कुछ कहने का असर हो तब ना… ?
   हमारे लाख रोकने के बावजूद लड़की को पुलिस लें गयी, हालाँकि पूछताछ के बाद अगले दिन उसकी डिग्री रद्द करवाने का एप्लिकेशन देकर पुलिस ने उसे छोड़ दिया लेकिन तब तक में उसकी शादी टूट गयी…| लड़की ने रो रोकर घर सर पर उठा लिया और हम बिना गलती के भी सब के दोषी बन गए.. |
उस दिन से जो हमारी बीवी घर छोड़ कर मायके जाकर बैठी है आज दिन तक वापस नहीं लौटी… |
दिल तो करता है अजातशत्रु का गला दबा दे…|
   ना रहें बांस ना बजे बाँसुरी…

” अब कहा ना सही से…. | आपके इस मुहावरे को थोड़े से सुधार की ज़रूरत है..
ना बजे बाँसुरी और ना बचे अजातशत्रु… !!
आपकी इस बाँसुरी के बिगड़े सुरताल की वजह से मेरे बाप ने भी बहुत कुछ खोया है.. और मैं तो इसी औरत की जान लेने आया हूँ… !
जब तक इसकी मौत की खबर नहीं सुन लूंगा मैं वापस नहीं लौटूंगा… ! “

सुनील की बात सुन चंद्रभान आश्चर्य से उसे देखने लगा…

“हाँ इसकी बीवी कलेक्टर थी कहीं की… लेकिन उसने क्या बिगड़ा है तुम्हारा ?..

“क्या नहीं बिगड़ा है इस औरत ने अंकल.. बताने बैठा तो पूरी रात निकल जाएंगी… आप बस कुछ हफ्ते  भर के लिए मेरे रहने का बंदोबस्त कर दीजिये… मैं बस मौका मिलते ही इस औरत को और उसे मार कर वापस लौट जाऊंगा.. !”

” उसे किसे ? ये दूसरा कौन… ? राजा अजातशत्रु ?”

” नहीं, राजा साहब को ज़िंदा छोड़ना है उनकी बीवी के बिना, तब समझ आएगा उसे कि अपनों के बिना जीना क्या होता है ?”

” फिर.. ? और किसे मारना चाहते हो ?”

“वासुकी…. अनिरुद्ध वासुकी.. !”

“ये कौन है.. ?”

“आप नहीं जानते, लेकिन मैं जानता हूँ उसे… !”

“ज़रा तस्वीर दिखाना, आखिर हम भी तो देखें कि ये है कौन बला…… ?”

“तस्वीर ही तो नहीं है उसकी… !”

“मतलब.. ? तुम पहचानते नहीं हो उसे.. ?”

“वो ऐसा ज़हरीला सांप है अंकल कि आसपास होने पर उसे सूंघ कर पहचान लूंगा.. !”

वो लोग हॉल के एक तरफ लगे कमरे में बातचीत  कर रहें थे कि एक नौकर ने दस्तक दे दी..
अंदर बुलाये जाने पर वो अंदर चला आया..

“हुज़ूर एक पुलिस वाला आया है आपसे मिलने.. | अंदर भेज दूँ.. ?”

“भेजो.. |”

चंद्रभान ने सुनील की तरफ देखा, और उसी वक्त अनिर्वान अंदर दाखिल हो गया…
अंदर आते ही सुनील और चंद्रभान के चेहरे पर पड़े हुए बल देख कर अनिर्वान का माथा भी सिकुड़ गया..

“क्या हुआ मंत्री जी… लगता है मैं गलत वक्त पर चला आया.. ?”

“नहीं ऐसी कोई बात नहीं.. काम क्या है वो बोलों.. ?”
.
” आपके घर का सर्च वारंट लेकर आया हूँ.. ! तलाशी लेनी थी.. !”

“पगला गए हो क्या.. ? आखिर हमारे घर की तलाशी क्यों लेनी है.. ? ऐसा तो कुछ नहीं है हमारे घर में !”

“मुझे खबर मिली की आपके गोदाम में एक ट्रक खड़ी है..

“हाँ तो, हमारी ट्रक भी चलती है तो अक्सर जब रेस्ट में हो तो गोदाम में ही मिलती है.. !”

“लेकिन ये भी जानकारी मिली है कि यहाँ से कम दामों में शराब इकट्ठी कर आप दूसरे स्टेट में अधिक दामों में बिना टैक्स के मूल्य पर बेच देते है… !”

सुनील बहुत ध्यान से अनिर्वान का चेहरा देख रहा था… उसने आज तक वासुकी को नहीं देखा था…
वो वीडियो जिसमे उसके पिता कि मौत दिख रहीं थी में भी वासुकी का चेहरा उतना साफ नज़र नहीं आ रहा था..
लेकिन फिर भी सुनील को हल्का सा ऐसा लगा कि अनिर्वान को उसने कहीं देखा है…

“एक्सक्यूज़ मी, मुझे लगता है हम पहले कहीं मिले हैं… !”

सुनील कि बात पर अनिर्वान मुस्कुरा दिया…

“बिल्कुल मिले ही होंगे… दुनिया गोल है… ! आप कभी पहले यहाँ आये होंगे तो हम ज़रूर मिले होंगे.. !”

“नहीं मैं यहाँ तो कभी नहीं आया…खैर… !”

सुनील की बात सुन अनिर्वान ने उसे भी देखा और वापस चंद्रभान की तरफ मुड़ गया…

“सर सुनने में आया है, आपका ट्रक पडोसी मुल्क तक भी जाता है.. और शराब की बोतलों के नीचे बड़ी छोटी सस्ती महंगी गन भी छिपा कर सप्लाई कर दी  जाती है.. !”

“क्या बकवास है ये….. तुम तो सीधे तौर पर मुझे आतंकवादी बनाने पर तुले हो.. !”

सुनील अनिर्वान और चंद्रभान की बात से इतर उस वीडियो को ध्यान से देखता बैठा था.. उसने जहाँ पर वासुकी नज़र आ रहा था उस हिस्से की तस्वीर लेने के बाद उसे बड़ा कर के देखने की कोशिश की..
    लेकिन वासुकी के चेहरे पर पड़े ख़ून के छींटों और धूल के कारण तस्वीर साफ साफ पहचान में नहीं आ रहीं थी…
उसने फोटोशॉप एप खोल लिया और उसमे इस फोटो  को डाल कर उसे साफ करना शुरू कर दिया…!
इधर चंद्रभान बराबर अनिर्वान से उलझा हुआ था…

“अरे सर मैंने पाकिस्तान कब बोला.. मैं तो नेपाल की बात कर रहा था.. !”

“ना नेपाल ना भूटान ना बांग्लादेश और ना पाकिस्तान… हमारा माल यहाँ से सिर्फ गुजरात जाता है… !”

अनजाने में चंद्रभान ना बोलने लायक बात भी कह गया और उसकी बात सुन कर अनिर्वान मुस्कुरा उठा…

सुनील अब भी वासुकी की तस्वीर को साफ करने में लगा था…

*****

बाँसुरी जहाँ जिस कमरे में थी, वहाँ उस कमरे में ना कोई घडी थी और ना कोई मोबाइल…
उसके कमरे में सुबह शाम एक लड़की, एक बूढ़ा आदमी और एक लड़का आता था | वो लोग उससे बातें करते, उसे सब कुछ बताते, उसका ध्यान रखते और चलें जाते… |
उन तीनों ने अपने नाम भी कुछ अजीबोगरीब बतायें थे…
   जिसके कारण बाँसुरी को उन तीनों पर संदेह तो होता था… लेकिन वहाँ चुपचाप पड़ा रहने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचा था… |

आज भी सुबह रोज़ की तरह गेंदा उसके कमरे में चली आयी…

“खम्मा घणी हुकुम ! अब तबियत कैसी है ?”

“साहेब कब आने वाले हैं… ?”

“जल्दी ही आएंगे हुकुम.. तब तक आप नाश्ता कर लीजिये… !”

“अब मैं इन बहानों से थकने लगी हूँ… मुझे पता ही नहीं चल रहा कि कौन सा दिन है क्या तारीख है..?  ऐसा लग रहा है मैं सब भूलने लगी हूँ… !
एक बात सच कहना, क्या मेरे खाने में कुछ मिलाते हो तुम लोग.. ?”

“ऐसा क्यों करेंगे हुकुम… आप रानी साहब है.. !”

“अगर सच में अपनी रानी मानती हो तो प्लीज़ एक बार मुझसे सच कह दो कि मुझे यहाँ क्यों रखा है… ?”

“राजा साहब का आदेश है हुकुम… !”

“झूठ झूठ.. बहुत बड़ा झूठ है ये… !
  राजा साहब किसी कीमत पर मुझे यहाँ ऐसे नहीं रखवा सकतें… !
एक छोटे से बच्चे से उसकी माँ को अलग नहीं करवा सकतें… !
अरे तुम लोग मेरी क्या सुरक्षा करोगे?  क्या एक पति से ज्यादा कोई और पत्नी कि सुरक्षा कर सकता है भला… नहीं… ! कभी नहीं !
और मेरे राजा साहब जब तक मेरे पास है कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता… !
प्लीज़ मुझे अब यहाँ से जाने दो… !”

“अभी आपके जाने का वक्त नहीं आया हुकुम ! जिस दिन हमें आदेश मिल जायेगा, आप यहाँ से जा सकेंगी !”

वो लड़की अदब से  नाश्ते की प्लेट रख कर चली गयी….
गुस्से में बाँसुरी ने घूर कर एक बार उस प्लेट को देखा और सरका दिया …

शुरुवात में इन लोगों ने जैसा कहा उसे भी यहीं लगा था कि उसकी सुरक्षा के लिए राजा साहब ने ही उसे यहाँ रखवाया है! लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहें थे अब इन लोगों पर बाँसुरी का विश्वास कम होने लगा था… !
उसे पूरा यक़ीन था कि राजा इतने दिनों के लिए उसे खुद से अलग कर ही नहीं सकता… !
उसे अब शौर्य और राजा की याद आने लगी थी, लेकिन यहाँ से भाग निकलने की कोई सूरत उसे नजर नहीं आ पा रहीं थी…

सोचते सोचते उसके सर में दर्द होने लगा था.. आखिर उसने वहाँ रखें कॉफ़ी मेकर में डली कॉफ़ी से अपने लिए एक कप कॉफ़ी तैयार की और पी ली…

और सोचते सोचते वो कुछ देर में गहरी नींद में खो गयी…

*****

   एक रात अस्पताल में रहने के बाद शोवन की हालत में अब काफ़ी सुधार था…

   उसके कमरे में ही पिया मुहँ हाथ धोकर बैठी थी कि समर उसके और अपने लिए चाय लें आया…
शोवन अब भी चुपचाप लेटा हुआ था, उसे यूँ लग रहा था जैसे उसकी तबियत बिगड़ने में उसकी ही गलती थी… वो दुःखी नज़र आ रहा था.. लेकिन उसने किसी से कुछ नहीं कहा था !

पिया चाय पी रही थी कि कमरे के दरवाज़े पर दस्तक दे कर पंखुड़ी भीतर चली आयी… समर और पंखुड़ी ने एक दूजे की तरफ देखा और मुस्कुरा दिये…

समर ने दोनों सखियों को एक दूसरे से बात करने छोड़ा और बाहर निकल गया… !

पंखुड़ी पिया की हालत समझ रहीं थी… वो कुछ देर तक चुपचाप उसे देखती बैठी रहीं..
पिया भी चुप ही थी… पहले बात बेबात खिलखिलाने वाली पिया एकदम से चुप हो गयी थी…

“पिया !! एक बात कहूं ?”

पिया ने पंखुड़ी की तरफ देखा..

“क्या तुझे वाकई लगता है कि ये समर का बेटा है.. ?”

पंखुड़ी ने बहुत धीमे से कहा, क्योंकि शोवन भी वहीँ था, हालाँकि वो ऑंखें बंद किये पड़ा था…

पिया ने पंखुड़ी की तरफ देखा और समर की बताई सारी बातें पंखुड़ी को बता दी…

ये सब सुनते ही पंखुड़ी की ऑंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गयी….

” मैं खुद तुझसे यहीं कहना चाहती थी कि मुझे ये बच्चा समर का बच्चा लगता ही नहीं है.. और देख अब समर ने भी यहीं बोला है, अगर तुझे अब भी समर की  बात पर यक़ीन नहीं है तो, तू इस लड़के का और समर का डीएनए भी तो मैच करवा सकती है… नहीं मिला मतलब समर की  बात सच्ची… !

“और कहीं मिल गया तो… ?”

पिया ने पंखुड़ी की तरफ देखा… पंखुड़ी ने अब तक ऐसा सोचा ही नहीं था…
पिया ने एक गहरी सी साँस ली और कमरे की खुली खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गयी….

“पाखी… तुझे क्या लगता है मेरे दिमाग में आज तक ये बात नहीं आई होगी कि मैं इन दोनों का डीएनए मैच करवा लूं…?  बावजूद मैंने नहीं करवाया, जानती है क्यों…?”

पंखुड़ी ने अपनी ऑंखें पिया पर टिका दी…

“मैं भी डॉक्टर हूँ पाखी, जिस दिन ये बात उठी और हम लोग शोवन को लेकर आये उसी दिन इस बच्चे को देख कर लगा कि ये समर कि औलाद हो ही नहीं सकता, लेकिन तब तक समर ने मुझे सच्चाई नहीं बताई थी…
   तब भी मेरा एक मन यहीं कह रहा था कि जाँच करवा कर दूध का दूध और पानी का पानी करवा लूं… लेकिन ये बाकी दुनिया के लिए भले ही एक टेस्ट हो मेरे लिए इसकी रिपोर्ट मेरी ज़िन्दगी हो जाती… ..

मैं समर कि इस हरकत पर उससे नाराज थी, बेहद नाराज़…|
    लेकिन साथ ही अपने दिल के हाथों ऐसी मजबूर भी थी कि मैं उसे छोड़ कर नहीं जा पायी.. |
बार बार मेरे दिल से आवाज़ आती थी कि सच्चाई जानने के लिए इस जाँच का सहारा लें लूं, लेकिन फिर उसी पल दिमाग से आवाज़ आती कि कहीं इस टेस्ट में शोवन समर का ही बच्चा है ये साबित हो गया तो मेरा क्या होगा… ?

अभी तक समर से अपनी सारी नाराज़गी के बावजूद कहीं न कहीं दिल के किसी कोने में एक उम्मीद ज़िंदा  थी कि हो सकता है ये समर का बच्चा ना हो, और बात कुछ और ही हो…
   सच कहूं तो अपने मन कि इस उम्मीद को जिलाये  रखने के लिए ही मैंने समर को भी कसम दे रखी थी कि वो मुझे शोवन से जुडी कोई बात ना बतायें..!

    क्योंकि मुझे लगा अगर समर ने ये कह दिया कि रेवन के साथ अपने किन्ही कमज़ोर पलों में दोनों ने अपनी हदें पार कर दी और उसी की परिणति शोवन है तो मैं टूट कर बिखर जाती…

  वही समर जिससे मैंने टूट कर प्यार किया था मुझे बिखरा जाता …!
और मैं जानती हूँ कि उस दिन के बाद मेरा उसके साथ रहना मुश्किल हो जाता.. |
तू ये भी कह सकती है कि मैं सच्चाई से शायद भाग रहीं थी, लेकिन हाँ मैं वाकई इस सच्चाई से भाग रहीं थी, क्योंकि मेरे अंदर कि स्वाभिमानी औरत अपने पति का किसी और से संबंध सहन ना कर पाती और मेरे अंदर की प्रेयसी अपने प्रेमी को छोड़ कर जा नहीं पाती… |

पिछले कुछ दिनों से मैंने रात दिन इतनी तकलीफ में गुज़ारे हैं कि क्या कहूं… ?
   हर वक्त दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल तफरीह करता था कि शोवन के साथ मैं ईमानदार रह पाऊँगी या नहीं… ?
  मुझे समर कि इस हरकत के लिए उसे छोड़ देना चाहिए या नहीं… ?

और अब जब समर ने मुझे सारी सच्चाई बता दी है… तब मैं उस पर विश्वास करना चाहती हूँ… !
अब भी मेरा दिमाग यहीं कह रहा कि क्या समर ने मुझसे वाकई सच कहा है? लेकिन मेरा दिल मुझ पर दबाव बना रहा कि मैं समर की बात को मान जाऊं… !

मुझे शायद थोड़ा वक्त लगेगा पाखी लेकिन मैं समर की बात पर विश्वास करना चाहती हूँ…!
  मैं यक़ीन करना चाहती हूँ उस सच पर जो उसने मुझसे कहा है…. |
मैं एक बार फिर यक़ीन करना चाहती हूँ अपने प्यार पर और इसलिए उस पर शक करते हुए किसी तरह का कोई टेस्ट नहीं करवाना चाहती हूँ….|”

पंखुड़ी ने पिया की तरफ देखा उसकी आंखें भीगी हुई थी… पिया के दिल और दिमाग की जद्दोजहद के बीच एक औरत अपने विश्वास की लौ को बचाये रखने की कोशिश में और मजबूत नजर आ रहीं थी….

उसी समय नर्स दरवाज़े पर दस्तक देकर भीतर चली आई….
उसने शोवन को देखा जांचा और पिया को बुला कर शोवन की छुट्टी के लिए पूछने लगी…

अपने आप को संभालती पिया शोवन को भी संभालने का प्रयास करती नज़र आ रहीं थी और उसे देखते खड़ी पंखुड़ी के चेहरे पर मुस्कुराहट छा गयी…
  वो पिया के पास चली आई और पीछे से वो पिया से लिपट गयी…

“तू बेहद मजबूत है पिया, और भगवान तेरी मजबूती को ऐसे ही बनाये रखें…
  एक बात और कहनी थी… बेटा मुबारक हो !”

पंखुड़ी ने प्यार भरी आँखों से शोवन को देखने के बाद पिया की तरफ देखते हुए कहा….
पिया ने मुस्कुरा कर पंखुड़ी की बाँहे थाम ली…

******

चंद्रभान और अनिर्वान की बातों के बीच एक तरफ बैठा सुनील अपने मोबाइल के फोटोशॉप एप पर वासुकी के चेहरे से धूल मिट्टी और ख़ून के दाग साफ करने के आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुका था…
वासुकी की धुंधली सी तस्वीर के सामने समय का चक्र गोल गोल घूमता इंटेरनेट की धीमी स्पीड का मखौल सा उड़ा रहा था…

कि अचानक वो गोला थम गया… और साफ सुथरी क्लियर तस्वीर सुनील के सामने आ गयी…
वासुकी की तस्वीर खुल गयी…

क्रमशः

aparna…..

..

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments