जीवनसाथी -2/100

जीवनसाथी -2 भाग 100

सबसे पहले इस सीज़न के सौंवे भाग की आप सभी जीवनसाथी पाठकों को ढ़ेर सारी बधाइयाँ…
आपका प्यार इसी तरह बना रहा तो कहानी इसके आगे एक और शतकीय पारी खेलने के लिए तैयार है…

और हाँ दोस्तों… शौर्य बड़ा हो भी जायेगा तब भी हमारे राजा रानी बूढ़े नहीं होंगे…
आजकल अपने लेट 40s में वैसे भी कोई बूढ़ा नहीं होता…. बस राजा जी अपने चेहरें पर चढ़े चश्मे के साथ और भी ज्यादा हैंडसम हो जाएंगे और हमारी फिटनेस फ्रीक रानी साहिबा ब्यूटी पेजेंट की ब्रांड एम्बेसेडर बन कर और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाएँगी…

ये तो हुई लीप के बाद की बात… अभी तो फ़िलहाल चलते है वर्तमान में…
देखते हैं, क्या चल रहा है हमारे महल और उसके आसपास…

***

समर को पिया ने रात ही बता दिया था की शेरी अगले दिन उन लोगों के साथ घूमने जाना चाह रहा था तो उसने हामी भर दी है..
समर बिस्तर पर अधलेटा सा छत देखते हुए कुछ सोच रहा था..

समर का दिमाग भी सोचा करता होगा की दुनिया में शायद ये अकेला आदमी होगा, जिसने मुझे मुझ से ज्यादा इस्तेमाल कर लिया है और लगातार करता ही जा रहा है..

समर पिंकी के लिए चिंतित था और राजा के लिए भी.. उसे यही लग रहा था की अगर पिंकी का नाम इस सब में लिप्त पाया गया तो ये राजा के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.. और ऐसे में राजा पिंकी का नाम सेलेक्शन लिस्ट से हटवा कर रहेगा..!
पिंकी जितनी जिद्दी है, वो इस बात पर राजा से रूठ कर मुँह फेर जायेगी…
उसे राजा के लिए यहीं चिंता सता रही थी कि,अगर वो अपना राजनैतिक कैरियर देखता है तो उसके अपने रूठ जाते हैं। और अपनों को समेटने की कोशिश में कैरियर..।
उसी बीच पिया ने शेरी वाली बात कही और समर ने उसके साथ जाने के लिए हामी भर दी..

बिना कुछ ज्यादा पूछे, इस बात पर पिया को हैरानी भी हुई लेकिन वो समझ गयी थी कि समर किसी और विषय में परेशान है। वो ये भी जानती थी कि समर अपनी हर बात पिया को नहीं बताता.. ।
वो इस बात को अच्छे से समझती थी कि महल से जुडी हर बात बताई भी नहीं जा सकती..
लेकिन इस सब में समर ने पिया को शेरी वाली बात भी नहीं बताई..।

अगली सुबह समर के निकलने के बाद पिया ने शोवन को तैयार किया और खुद भी तैयार हो गयी.. ।

कुछ देर में ही विराट और शेरी वहाँ चले आये..
विराट सिर्फ शेरी को छोड़ने आया था, उसने शेरी को वहीँ उतारा और पिया से मिल कर निकल गया..।
.
पिया ने अपनी गाड़ी निकाल ली..
शोवन ने पिया के साथ आगे बैठने की ज़िद पकड़ ली…
लेकिन सुरक्षा कारणों से पिया ने उसे सामने नहीं बैठने दिया और बहुत प्यार से उसे समझा कर पीछे बैठा कर उसकी सीट बेल्ट लगा दी..

शेरी पिया के साथ सामने बैठ गया..।

पिया ने गाडी आगे पहाड़ी वाले मंदिर की तरफ बढ़ा दी..।
पहाड़ी वाला मंदिर काफी पुराना मंदिर था, जिसके बारे में यही मान्यता थी कि यह मंदिर किसी प्राचीन ऋषि मुनि द्वारा स्थापित किया गया था और इसके गर्भ ग्रह में मौजूद देवी प्रतिमा स्वयं धरती से निकलकर बाहर आई थी ।
   उस प्रतिमा को देखने के बाद वहां तपस्या में बैठे किसी ऋषि मुनि ने उस प्रतिमा पर एक फूंस की छानी  डाल दी थी। और कालांतर में यह झोपड़ी एक छोटे से मंदिर में बदल गई। बाद में राजा अजातशत्रु के पूर्वजों में से किसी राजा ने उस मंदिर को जीर्णोद्धार करके वहां पर एक बड़ा और सुंदर मंदिर बनवा दिया था ।उसी समय से यह मंदिर राज परिवार के कुलदेवी मंदिर के तौर पर स्थापित हो गया था… ।

मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय थी। काले बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर मंदिर को बहुत सुंदर आकृति में बनाया गया था ।मंदिर का स्थापत्य देखकर दक्षिण भारत के चोल साम्राज्य के मंदिरों का आभास होता था। इसलिए यह मंदिर अपनी सुंदरता के कारण आसपास के लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। इसलिए विजयराघव गढ़ घूमने आने वाले लोग इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाते थे…।

विराट के कहने और शेरी की जिद के कारण पिया उसे सबसे पहले इसी मंदिर के दर्शन हेतु लिए जा रही थी…। हालांकि शेरी को इतना सब बताने की जरूरत ना महसूस कर पिया ने कुछ थोड़ी बातें ही मंदिर के बारे में शेरी को बता दी थी.. ।

मंदिर में ऊपर पहाड़ी पर कुछ दूर तक जाने के बाद आगे पैदल ही जाना होता था, गाड़ी को एक तरफ लगाकर पिया गाड़ी से उतर गई और शोवन को भी उसने अपने साथ उतार लिया…

ज्यादा खड़ी चढ़ाई नहीं थी और आरामदायक चौड़ी सीढ़ियां वहां से लेकर मंदिर तक बनी हुई थी। वैसे तो महल की रानियों के लिए मंदिर तक गाड़ियां जाती थी, लेकिन प्रदूषण से उस परिसर को बचाए रखने के कारण ही शहर भर के लोगों और पर्यटकों के लिए गाड़ी को मंदिर से कुछ अधिक दूरी पर ही रोक दिया जाता था।
पिया चाहती तो अपना परिचय देकर मंदिर तक गाड़ी लेकर जा सकती थी, लेकिन उसने वहां अपना परिचय नहीं दिया.. ।

शेरी को यह सारी बातें विराट पहले ही बता चुका था कि उन लोगों को सामान्य लोगों की तरह नीचे नहीं रुकना पड़ेगा, वह लोग मंदिर तक आराम से गाड़ी में जा सकते हैं। और इसीलिए पिया को नीचे ही गाड़ी खड़ी करते शेरी ने पिया से कारण पूछ लिया और पिया ने ऊपर गाड़ी ले जाने से मना कर दिया…

” एक पढ़ी-लिखी डॉक्टर होने के बाद भी अगर मैं इस बात को ना समझूँ कि गाड़ियां नीचे क्यों रुकवाई जाती हैं, तो फिर मेरे पढ़े लिखे होने का क्या मतलब ?”

“लेकिन ये सुविधा तो आपको विशेष रूप से दी गयी है, आखिर आप भी महल का ही एक हिस्सा है.. !”

” महल का हिस्सा मैं अपने पति की वजह से हूं। इसलिए जब उनके साथ या महल की बाकी औरतों के साथ आती हूं तो जरूर ऊपर तक चली जाती हूं। क्योंकि उस वक्त मेरे पास और कोई उपाय नहीं होता। लेकिन आज तो मैं खुद आई हूं, और अपने अकेले के व्यक्तित्व के साथ आई हूं ।इसलिए मुझे यही सही लगा कि मैं यहां से ऊपर तक पैदल चली जाऊं ।
   वैसे भी कोई बहुत ज्यादा सीढ़ियां नहीं है ।25 से 30 सीढ़ियां हैं, जो मैं और मेरा बेटा आराम से चल सकते हैं। लेकिन अगर आपको दिक्कत हो तो फिर आप बताइए.. ।”

“नहीं मुझे भी कोई दिक्कत नहीं.. !”

शोवन को वहां बड़ा मजा आ रहा था। उसे वैसे भी स्कूल जाना बिल्कुल पसंद नहीं था, और स्कूल से आने के बाद भी वह जब तक पिया नहीं आ जाती थी तब तक टकटकी लगाए उसका रास्ता देखता था…
इसीलिए उसके लिए रविवार का दिन बहुत खास होता था। क्योंकि इस दिन वह अपना पूरा वक्त अपनी माॅमी के साथ बिताता था। और आज तो उसे एक तरह से बोनस मिल गया था क्योंकि उसकी माॅमी उसे लेकर घुमाने के लिए निकली थी… ।
अपनी माॅमी के साथ बिताया हर पल उसके लिए बेहतरीन होता था। आज उसकी खुशी हर बात से छलक रही थी ।
   वह सीढ़ियों पर कूदता फांदता ऊपर चढ़ रहा था। और पिया बात बात पर उसे टोकती हुई आराम से और धीरे चलने को कह रही थी। शेरी मुस्कुराते हुए इस अनूठी मां बेटे की जोड़ी को देख रहा था। भागते दौड़ते सीढ़ियां चढ़ते हुए आखिर एक जगह शोवन जोर से गिर पड़ा उसके घुटने में रगड़ लग गई और हल्का सा खून छलक आया। पिया भागकर उसके पास पहुंच गई, और उसे उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया। बड़े प्यार से पिया उसके घाव को देखकर फूंकने लगी। शेरी भी उन दोनों के पास पहुंच गया। पिया ने अपने कंधे पर टांग रखे बैग को नीचे रखा, उसकी जिप खोलकर उसमें से एक छोटा सा मेडिकल किट निकाल लिया, उसमें से कॉटन निकालकर उसने शोवन के उस जख्म को साफ कर दिया। एक क्रीम निकाल कर उसने उसके घाव पर लगाई और एक छोटा सा स्टिकर उस पर चिपका दिया। शोवन के पैर को घुटने के बाद पकड़कर पिया ने धीरे-धीरे आगे पीछे हिला कर देखा और शोवन के गालों को चूम लिया..

“अब तुम ठीक हो शोवी?”..

“यह माॅमी..।”

शोवन अपनी माॅमी के गले में बाहें डाल कर उससे चिपक गया। पिया के गालों को चूम कर शोवन उसकी गोद से उतरा और एक बार फिर वैसे ही उछल कूद मचाते हुए आगे बढ़ गया। लेकिन अबकी बार पिया ने उसे धीरे चलने के लिए नहीं टोका.. ।

“अब क्यों नहीं टोका उसे? वह तो फिर वैसे ही शैतानी करने लगा..।”

“क्योंकि अब वह एक बार गिर चुका है। इसलिए उसे पता है कि अगर वह संभलकर नहीं चलेगा तो वह फिर से गिर जाएगा, और उसे वापस चोट लग जाएगी। पहली बार में उसे मालूम नहीं था कि ऐसे चलने से चोट लग सकती है। इसलिए मैं उसे टोक रही थी। अब जब वह खुद जानता है, तो वह खुद इस बात को समझता भी है कि वह कितनी तेजी से भागे लेकिन उसे अपने आप को गिरने से भी बचाना है। मैं उसकी तेजी या उसकी चंचलता को नहीं रोकना चाहती थी, मैं बस उसे यह आभास करवाने के लिए रोक रही थी कि वह जो भी करें सुरक्षा के दायरे में रहकर करें और मेरा बेटा एक बार चोट खाकर यह बात समझ चुका है ।”

पिया मुस्कुरा कर आगे बढ़ गई शेरी भी अपने बालों पर हाथ फिराते हुए आगे बढ़ गया…

मंदिर में पहुंचकर पिया और शोवन देवी माता की मूर्ति के सामने घुटनों के बल बैठकर हाथ जोड़े प्रार्थना करने लगे।
   शेरी चुपचाप एक खंभे से टिक कर खड़ा था। वह इधर-उधर मंदिर की स्थापत्य कला को देखते हुए खोया हुआ था। मंदिर के अंदरूनी कक्ष में पत्थरों पर तरह-तरह की कारीगरी करके देवी कथाओं को रूप दिया गया था। उन्हीं सब में खोया शेरी एक-एक चित्र को समझने की कोशिश कर रहा था। पिया ने भगवान की प्रार्थना करने के बाद प्रसाद लिया और शेरी के पास चली आई। वह उसके साथ मंदिर में घूमते हुए उसे हर एक कलाकारी के पीछे छिपी कथा बताने लगी ।
   शोवन भी उन लोगों के आगे पीछे उछल कूद मचाता हुआ पैदल भागने लगा।
पिया ने शेरी के सामने प्रसाद बढ़ा दिया। शेरी ने चुपचाप प्रसाद उठाकर खा लिया।
मंदिर की परिक्रमा पूरी होने के बाद पिया शोवन को लेकर निकल गयी और जाने क्या सोचकर शेरी वापस मंदिर की तरफ पलटा और देवी मां के सामने जाकर उसने भी अपने हाथ जोड़ लिए। पिया ने पलट कर एक बार उस गोरे को देखा और मन ही मन मुस्कुरा उठी..

यह अंग्रेज भी ना आधे पागल होते हैं। हम भारतीय अपने मंदिरों में अपनी श्रद्धा के कारण जाते हैं ,और यह हमारे मंदिरों की स्थापत्य कला को देखने के लिए अंदर जाते हैं….।
चुपके-चुपके ही सही हमारे यहां की खूबसूरती से अपनी आंखें भर लेते हैं, लेकिन कभी इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे कि इनके यूरोपीय आर्किटेक्चर के सामने हमारा हिंदुस्तानी स्थापत्य शिल्प कितना उम्दा है…

वह अभी शेरी के बारे में सोच रही थी कि शेरी वापस पलट गया, उसने पिया को देखा और मुस्कुरा उठा। उसे भी पंडित जी ने चरणामृत दिया। अपनी हथेली में चरणामृत लिए शेरी उसे घूर कर देखने लगा। उसने पिया की तरफ देखकर पूछा कि इस पानी का क्या करना है? पिया ने उसे इशारे से पीने को कहा और हंसते हुए आगे निकल गई।
चरणामृत पीने के बाद उसने पंडित जी से प्रसाद लिया और बाहर चला आया…

बाहर पिया शोवन को लेकर बैठी उसी का इंतजार कर रही थी, शेरी भी आकर उन लोगों के पास बैठ गया।
पिया ने शोवन के लिए अपने बैग में से पानी का बोतल निकाला और उसे पिलाने लगी। दो घूंट पीने के बाद शोवन ने बोतल वापस कर दी, और पिया ने बैग में डाल ली।
उसके बाद पिया ने एक छोटी सी जूस की बोतल निकालकर शोवन के हाथ में रख दी और शोवन जूस पीते हुए मगन हो गया..

“हे पिया उसने तुमसे जूस मांगा नहीं, फिर तुमने कैसे दे दिया? आई मीन तुम्हें कैसे पता चला कि उसे जूस चाहिए.. ?”

“क्योंकि मैं उसकी मां हूं.. ।”

शेरी को पिया का यह जवाब कुछ खास पसंद नहीं आया और उसने कंधे उचका दिए। वह पिया और शोवन को वहीं बैठा छोड़ आसपास के परिसर में घूमने लगा। वहां अलग अलग तरह की आकृतियां बनी हुई थी। जिन्हें देखकर वह मोहित हुआ जा रहा था। उस परिसर से निकलते ही बहुत बड़ा बगीचा बना हुआ था। जहां बीच में एक सरोवर था। जहां नीले रंग के कमल खिले हुए थे। नीलकमल से वह पूरा सरोवर पटा हुआ था…।

” ब्लू लोटस..!”

“हां यहां मिलते हैं..”

सरोवर में बोटिंग भी हो रही थी। पिया ने शेरी से पूछा लेकिन शेरी ने ना में गर्दन हिला दी।
  लेकिन शोवन बोटिंग करने के पीछे पड़ गया। पिया उसे भी बोटिंग करने से मना कर रही थी, लेकिन शोवन किसी हाल में पिया की बात नहीं मान रहा था। उसी वक्त पिया की एक पुरानी मरीज़ वहाँ मिल गयी और पिया से बात करने लगी, पिया का ध्यान शोवन से हटा और उसी वक्त उसकी ज़िद को मान कर शेरी ने शोवन का हाथ पकड़ा और उसे लेकर बोटिंग वाले के पास चला गया। उसने वहां बैठे आदमी से बोट के लिए टिकट कटवाया और शोवन को उसमें बैठा दिया।
  बोट वाला बोट आगे बढ़ाने वाला था कि पिया भागती हुई चली आई और उसे आवाज देकर रुकवा दिया। उसने शेरी की तरफ गुस्से में घूर कर देखा और उससे उलझ पड़ी।

” ऐसे कैसे आपने छोटे से बच्चों को अकेले बोट में बैठा दिया ?”

शैरी को अचानक समझ में नहीं आया कि पिया को क्या हो गया है और वह क्यों इतनी तेजी से उस पर नाराज़ हो रही है?
       पिया ने घूर का शेरी को देखा और बोट वाले के हाथ में 100 का नोट थमा कर खुद भी उस बोट में जा बैठी।
   पिया की परेशानी शेरी को समझ में नहीं आई और वह भी उसी बोट में जा बैठा।
   उसके यहां तो यह एक बड़ी सामान्य सी बात थी कि बच्चों के झूले, बच्चों की बोट में बच्चों को अकेले ही उनके माता-पिता बैठा दिया करते थे। 5 साल का बच्चा तो काफी बड़ा बच्चा मान लिया जाता था। और वैसे भी बोट में बोट चलाने वाले के साथ एक सेफ्टी गार्ड पहले से मौजूद था। तो ऐसे में अगर शोवन उस बोर्ड में चला भी जाता तो कौन सी बड़ी बात हो जाती? बस यही सोचकर उसने उसे बोट पर बैठा दिया था। वैसे भी उसे लगा कि शायद पिया बोटिंग नहीं करना चाहती होगी। लेकिन पिया की नाराजगी देखकर वह खुद भी सहम गया और इसीलिए चुप चाप पिया के पीछे जाकर वह भी बैठ गया।
      पिया घबराकर शोवन अपनी बाहों में घेरे बैठी थी, लेकिन शोवन को बोट में बैठकर हवा से बातें करने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपनी हथेली बार-बार बाहर निकालकर उड़ते हुए पानी को अपनी हथेली में महसूस कर रहा था। धीरे से शोवन ने अपना सर भी थोड़ा सा झुका लिया और अब बोट के आगे बढ़ने पर जो पानी पीछे उछल रहा था उसकी बूंदे शोवन को अपने चेहरे पर महसूस होने लगी ।
   उन ठंडी बूंदो को अपने चेहरे पर और ज्यादा महसूस करने के लिए वो थोड़ा और ज्यादा झुकने लगा, लेकिन पिया ने उसे पकड़ रखा था और इसीलिए उसने उसे कुछ ज्यादा झुकने नहीं दिया..
     शेरी को धीरे से अपनी भूल समझ में आ गई और वह पिया से बोल पड़ा..

“मुझे माफ कर दो पिया, लेकिन मुझे लगा अगर बच्चा बोटिंग करना चाहता है, तो उसे बोटिंग करने देनी चाहिए बस इसीलिए मैं ने उसे इस में बैठा दिया था.. !’

“लेकिन आपने यह नहीं सोचा कि एक बच्चा अकेले कैसे बोटिंग कर सकता है? ठीक है साथ में एक लाइफगार्ड बैठा है, लेकिन वह एक मां की तरह बच्चे को पकड़कर नहीं बैठेगा? वह तो अपनी जगह ही बैठा रहेगा ना! कहीं शोवन पानी से खेलने के लिए इस तेज बोट से गिर जाता तो?
    आप देखिये बोट कितनी तेजी से चल रही है, ऐसे में अकेले बच्चे को बोट पर बैठाना किसी भी तरीके से सुरक्षित नहीं है.. !
    कोई बात नहीं, बहुत बार आदमी इस तरीके से नहीं सोच पाते हैं..!”

“हम्म!”

कुछ देर बाद वो लोग बोटिंग करके वहां से बाहर निकल गए ! मंदिर के दोनों तरफ ढेर सारी छोटी-छोटी दुकानें थी! जहां छोटे बच्चों के प्रलोभन के लिए बहुत सारे प्लास्टिक के खिलौने, गन, कारें लगी हुई थी! छोटे बच्चे उन सब सामानों को देखकर मचल रहे थे लेकिन शोवन चुपचाप चल रहा था! शेरी ने उससे धीरे से पूछ लिया कि क्या उसे कुछ चाहिए ?और शोवन ने ना में गर्दन हिला दी।
     शेरी ने उससे कहा -“तुम तो बड़े होशियार बच्चे हो तुम्हें इसमें से कुछ भी नहीं चाहिए ?”

   उसकी बात सुनकर  शोवन खुश हो गया। उसने मुस्कुराकर शेरी को उसकी बात का जवाब दे दिया।

” नहीं मेरे लिए टॉयज मेरी मम्मी लाती है। क्योंकि उन्हें पता है कि मेरे लिए कौन से टॉयज हेल्दी हैं और कौन से नहीं? इनमें से ज्यादातर प्लास्टिक के हैं, और मम्मी कहती है प्लास्टिक से हमें नहीं खेलना चाहिए ।ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है।”

” ओह माय गॉड !तुम तो बहुत स्मार्ट बेबी हो!”

शेरी बात सुनकर शोवन मुस्कुरा उठा। थोड़ा आगे बढ़ कर एक छोटी सी टपरी पर गरमा गरम चाय बन रही थी, पिया ने शेरी की तरफ देखा और उससे चाय के लिए पूछा !
   शेरी ने उस काली सी टपरी को देखकर मुंह बना दिया.. उस वक्त उसे चाय पीने का मन तो था लेकिन टपरी का रखरखाव देखकर उसका मन कसैला हो गया,  फिर भी पिया ने दो कप चाय ले ली और एक उसके सामने बढ़ा दी…..

“पीकर देखिए यहां की चाय, आप भी याद रखेंगे..!”

पिया की बात मानकर शेरी ने चाय अपने मुंह से लगा ली.. और वाकई पहले ही घूंट में उसे ऐसा लगा मानो अमृत का स्वाद मिल गया !
    वह आश्चर्य से पिया की तरफ देखने लगा!

” यह तो वाकई बहुत टेस्टी है! ऐसा क्या डालते हैं यह लोग चाय में..?”

“यहां आस-पास कोई ऐसी औषधि मिलती है, जिसका एक छोटा सा टुकड़ा यह चाय में डालते हैं| उसके कारण चाय टेस्टी भी हो जाती है और एनर्जी भी देती है..!”

“हम्म यहां के लोग यह सब बहुत करते हैं..”

“वैसे पिया तुम्हारी उम्र क्या है..?”

शेरी का यह सवाल सुन पिया के माथे पर हल्के से बल पड़ गए!
    अब इसे मेरी उम्र से क्या लेना देना? मैं किसी भी उम्र की हूं, तू मेरे घर पर शादी का रिश्ता भेजने वाला है क्या? मन ही मन सोचती हुई पिया ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा उठी..

” औरतों से उनकी उम्र नहीं पूछते..!’

” लेकिन क्यों..? हम आदमियों को तो अपनी उम्र छुपाने का कोई शौक नहीं होता, हम तो जिस उम्र के होते हैं अपनी वही उम्र बता देते हैं..।”

” हम औरतें भी अपनी असली उम्र बता सकती हैं। लेकिन उन्हें जो हमारी उम्र से हमें जज ना करें। हमारे आसपास अक्सर ऐसा माहौल होता है कि, हमारी उम्र से, हमारे लुक से, हमारे रंग रूप से ,हमारी हाइट से,हमारे कपड़ों तक से हमें सामने वाले लोग जज करने लगते हैं… !
  शायद इसीलिए हम औरतें इतना झूठ बोलती हैं..!”

पिया कि कही गहरी सी बात शेरी को शायद समझ नहीं आई, उसने अपने कंधे उचका दिये..।
    उस चाय की टपरी के ठीक सामने बच्चों के लिए छोटा सा गार्डन बना हुआ था। शेरी शोवन को गोद में लिए वहां चला गया। पिया अपनी चाय बैठकर पीती रही। और शेरी शोवन को अलग-अलग झूलों में घुमाता रहा।
    वहां पर और भी कपल थे जो अपने बच्चों को उस गार्डन में खिला रहे थे। वही शोवन के साथ झूले में बैठी एक बच्ची की मां ने शेरी को देखा और मुस्कुरा कर उससे कह दिया…

“आपका बेटा बिल्कुल आप की तरह दिखता है…!”

उस औरत की बात सुनकर शेरी चुप रह गया। शोवन खेलने में मग्न था ,इसलिए उसका ध्यान इस बात पर नहीं गया । लेकिन शेरी के ठीक पीछे पहुंच चुकी पिया के कान में यह बात पङ गई, और उसके दिल में जलन की एक हल्की सी लहर उठकर थम गई..

“वापस चलें..?”

पिया के सवाल पर शेरी ने हामी भरी और शोवन को झूले से उठाने के लिए आगे बढ़ गया। लेकिन शोवन अब भी झूले की जिद कर रहा था। उसकी जिद देखकर पिया ने उसे झूलने की इजाजत दे दी।
     झूले के ठीक पास में और बेंच पड़ी थी पिया वही जाकर बैठ गई। कुछ सोचकर शेरी भी पिया के पास आकर बैठ गया..।

“पिया तुमसे कुछ कहना चाहता हूं ?”

पिया आंखें फाड़े शेरी की तरफ देखने लगी। जब से वह शेरी के साथ यहां आई थी, वह लगातार इस बात को नोटिस कर रही थी कि शेरी बाकी लोगों की नजर बचाकर उसे बार बार देख लेता था। पिया का एक मन यह कह रहा था कि शेरी की नजर उसके लिए गलत नहीं है। लेकिन दूसरे ही पल उसके मन में यही बात

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