
जीवनसाथी 2 भाग -78
पिया तबियत ख़राब होने से घर चली गयी थी..
उसके सास ससुर हरिद्वार घूमने गए हुए थे.. हरिद्वार में ही पिया की बुआ सास रहती थी ! उन्हीं से मिल कर आसपास घूम फिर कर आने का विचार था उनका ! इस वक्त घर पर पिया समर शोवन और नौकर ही थे..
पिया अपनी प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने के लिए इसी समय के इंतज़ार में थी, क्योंकि वो अपनी सास और बुआ सास के सामने कोई बखेड़ा नहीं चाहती थी..
वो घर पहुंची और लाली भाग कर उसके पास चली आई…
“आप आ गयीं भाभी ? हमें लगा था आप महल से ही खा पी कर आएंगी.. !”
पिया ने उस पर एक नजर डाली और ऊपर जाने लगी..
“शोवन कहाँ हैं ?”
“अपने कमरे में हैं, ड्राइंग कर रहा, दीदी उसी के पास बैठी हैं.. !”
पिया को तबियत ज्यादा ही ख़राब लगने लगी थी, इसलिए वो ऊपर चली गयी…
अपने कमरे में जाकर वो चादर ओढ़ कर लेट गयी..
उसने जाने कितने मरीज़ो को ये दवा लिख कर दी थी और उसे इस दवा का प्रभाव भी मालूम था, लेकिन पेट में उठती मरोड़ और कमर में होने वाला दर्द अब उसे पागल करने लगे थे.. वो कुछ देर सो जाना चाहती थी…
लेकिन उसी समय समर वापस आ गया…
वो ऊपर कमरे में आया और पिया को आँखे बंद किये पड़े देख उसने उसके पास जाकर उसके माथे पर अपना हाथ रख दिया….
उसका माथा जल रहा था..
समर के स्पर्श से पिया ने आंखें खोल दी….
पिया का चेहरा पीला पड़ा हुआ था…
उसे यूँ देख समर उसके पास ही बैठ गया..
“क्या हुआ पिया तबियत ख़राब हैं क्या ?”
पिया ने हाँ में गर्दन हिला दी और धीरे से उठ कर बैठ गयी..
“मंत्री जी… मैं बिना किसी लाग लपेट के आपको ये बताना चाहती हूँ कि मैंने ये प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने के लिए दवा खा ली हैं..
मैं जानती हूँ आपको बुरा लगेगा… बुरा नहीं बहुत बुरा, शायद आप मुझसे बात भी करना पसंद ना करें इस सब के बाद…
लेकिन मुझे इस वक्त जो सही लगा मैंने वहीं किया…
समर ढ़ेर सारे सवाल अपनी आँखों में लिए पिया को देख रहा था..
“तुमने ऐसा क्यों किया पिया.. ?”
समर की भीगी हुई सी आवाज पिया को भी अंदर तक भीगा गयी.. वो अब तक जितना मजबूत खुद को रखें हुए थी अचानक ही उसकी मजबूती रेत के महल की तरह ढह गयी…..
समर की भीगी पलकें पिया की आँखों को भी भीगा गयी…
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अपने आँसू पोंछते हुए पिया वापस कहने लगी..
“मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा था समर !! मुझे लगने लगा था कि हम अपने बच्चे के कारण शोवन पर ध्यान नहीं दें पा रहें थे..
पहले ही नयी जगह नए लोग होने से शोवन एडजस्ट नहीं कर पा रहा था..
आपने कभी गौर किया हैं वो सिर्फ आपसे या मुझसे ही बातें करता हैं, बाकी लोगों से तो वो बात भी नहीं कर पाता.. मुझे लगा अगर मैं अपने बच्चे और अपनी नयी ज़िम्मेदारियों में उलझ गयी तो शोवन उपेक्षित रह जायेगा.. !
अगर शोवन हमारा ही बच्चा होता और तब हम दूसरा बच्चा प्लान करते तो वो बड़ी आसानी से उस नए बच्चे से तालमेल बैठा लेता, लेकिन शोवन हमारा बच्चा नहीं हैं !
और फ़िलहाल वो इस बात को जानता हैं..
उसने अपने पिता का चेहरा कभी देखा नहीं.. !
और एक लम्बी बीमारी से लड़ते हुए उसने अपनी माँ को तिल तिल मरते हुए देखा हैं..
जिस उम्र में माँ बाप बच्चे को हर बुरी नजर से बचा कर रखना चाहते हैं… उसे अपने साये में महफूज़ रखना चाहते हैं…
उस उम्र में उसने कितना कुछ झेल लिया हैं.. |
मुझे बस यहीं लगा कि इस वक्त शोवन को हमारे साथ और सहारे की बेहद ज़रूरत हैं, कहीं हमारे बच्चे के आने से शोवन अकेला ना रह जायें इसलिए… |
पिया और कुछ कहती उसके पहले समर ने आगे बढ़ कर उसे अपने गले से लगा लिया….
समर के आँसू बहते हुए पिया का कंधा भिगोने लगे….
पिया ने समर को बाँहों में कस लिया…
उसे भी इस वक्त ऐसे ही किसी सहारे की ज़रूरत थी.. समर तो फिर भी मन से दुःखी और थका हुआ अनुभव कर रहा था लेकिन पिया तो शारीरिक तकलीफ के साथ मन का दुःख झेल रहीं थी…
देखा जायें तो समर से ज्यादा पिया कष्ट में थी, उसने अपने अंदर पल रहें अपने हिस्से को खुद से अलग किया था जो किसी भी माँ के लिए आसान नहीं होता…
उसके आँसू थमने की जगह बहते चले जा रहें थे.. समर उसके बालों पर हाथ फेरता उसे मूक सांत्वना भी देता जा रहा था..
समर को इस वक्त पिया को कुछ भी समझाने के लिए शब्द नहीं मिल पा रहें थे.. अपनी बाँहों की ऊष्मा से ही वो उसे अपने पास होने का आभास दें रहा था…
जब रो धोकर दिल का गुबार थोड़ा निकल गया तब पिया आंखें पोंछती उससे अलग होकर बैठ गयी…
समर ने पिया का चेहरा हाथ में लिया और उसे देखने लगा…
“तुम क्या हो पिया.. ? एक बच्चे के लिए जो मेरी दोस्त का बच्चा हैं जिससे डायरेक्ट तुम्हारा कोई लेना देना भी नहीं उसके लिए तुमने अपने शरीर को इतनी तकलीफ देने का निर्णय लें लिया..
अपने बच्चे को ना पैदा करने का इतना कठिन निर्णय लें लिया… क्या कहूं मैं तुम्हारे लिए.. ?
आज भी तुम्हारे जैसी लड़कियां मौजूद हैं !! आश्चर्य होता हैं इस बात पर !!
आज जब लोग दूसरे के घर लगी आग में अपनी रोटी सेंक कर दूर खड़े तमाशा देखते हैं, और बाद में उस आग का मजाक भी बनाते हैं..
वैसे में तुम जैसे लोग भी संसार में मौजूद हैं, जो एक पराये बच्चे के लिए अपने बच्चे का त्याग कर गयी..
वाकई निराली ही हो तुम !!
सच कहूं तो आज तुम्हारे लिए प्यार और सम्मान और भी ज्यादा बढ़ गया हैं !
आज की महास्वार्थी दुनिया में जहाँ लोगों को अपने स्वार्थ से अलग कुछ दिखाई नहीं देता, वहाँ तुम्हारे जैसी भी लड़की हैं… तुम वाकई दुनिया से अलग हो डॉक्टर साहिबा !!”
और समर ने प्यार से पिया को अपनी बाँहों में भर लिया… पिया भी प्यार से समर की बाँहों में सिमट गयी..
“आप भी कहाँ से कम हैं मंत्री जी !! एक लड़की से ऐसी दोस्ती निभाई कि उसने अपने अंतिम समय में अपनी सबसे कीमती दौलत अपनी संतान आपके हाथ सौंप दी.. |
रेवन चाहती तो शोवन के पिता को ढूँढ कर उसके हाथ में शोवन का हाथ दें सकती थी, लेकिन उसने इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी उठाने के लिए आपको कुछ सोच कर ही तो चुना होगा ना.. !
और मैंने भी देखा हैं कि शोवन आपके साथ बहुत खुश रहता हैं.. बस इसीलिए ये निर्णय लें लिया… !
सॉरी मंत्री जी !!”
समर ने एक हलकी सी चपत पिया के माथे पर लगा दी…..
“पागल बच्ची !! “
दोनों एक दूसरे की बाँहों में खोये अपना अपना गम भुलाने की कोशिश कर रहें थे.. पिया की तबियत लगातार बिगड़ती ही जा रहीं थी.. अब उसे पेट में दर्द सा उठने लगा था… और उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव नज़र आने लगे थे..
समर ने उसे वापस बिस्तर पर लेटा दिया…
“तुम आराम करो.. मैं जाता हूँ.. !”
पिया उसे बुलाती उतनी देर में समर नीचे चला गया… पिया ने भी आंखें मूंद ली…
अब उसके चेहरे पर राहत के भाव थे.. उसे इस बात की ख़ुशी थी कि समर ने उसे गलत नहीं समझा था.. और उन दोनों के बीच किसी तरह की गलतफहमी पैदा होने से पहले ही मामला सुलट गया था…
आंखें बंद किये वो धीमे से मुस्कुरा रहीं थी कि, समर और शोवन कमरे में वापस चले आये…
समर के हाथ में एक प्लेट थी जिस पर एक बोल रखा हुआ था…
समर ने पिया के पास खड़े होकर उसके माथे पर हाथ फेरा और पिया ने आंखें खोल दी..
पिया पलंग पर टेक लगा कर बैठ गयी… और समर ने उसके सामने सूप रख दिया..
पिया सूप के साथ समर और शोवन को देख मुस्कुरा उठी..
सूप के आसपास कटलरी शोवन ने बिल्कुल अपने ब्रिटिश अंदाज़ में सेट की थी…
पिया ने समर की तरफ देखा, समर ने सूप का चम्मच पिया की तरफ बढ़ा दिया..
पिया ने शोवन को अपने पास बुला कर बैठा लिया और उससे बातें करने लगी.. शोवन बड़े प्यार से पिया के सवालों के जवाब देने लगा..
पिया सूप पीते हुए शोवन से बातें करने लगी…
खिड़की से छन कर सूरज की किरणें उन दोनों के चेहरे पर पड़ कर उनके चेहरों को रौशनी से भरने लगी और एक किनारे खड़े समर ने उस वक्त का फ़ायदा उठाते हुए अपने कैमेरा पर उन दोनों की ढ़ेर सारी तस्वीरें लें ली…
वो सुहानी सी शाम ढ़लते ढ़लते समर और पिया के सम्बन्धो को और मज़बूती दें गयी…
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सुनील अपनी किसी बिज़नेस मीटिंग से फुर्सत पाकर बाहर निकला ही था कि उसका असिस्टेंट भागा हुआ सा उसके पास चला आया..
“सर मैडम का फ़ोन आया था.. !”
“क्या कह रहीं थी ?”
“उन्होंने आपका वापसी का टिकट करवाने को कहा हैं.. उनका कहना हैं आपको अब इण्डिया से वापस लौट जाना चाहिए.. मुझसे कहा हैं, मैं सीधे टिकट ही बुक कर दूँ, लेकिन मैंने सोचा एक बार आपसे पूछ लेना चाहिए..
“क्या.. ? ये मॉम को क्या हो गया हैं.. ? मुझे अचानक यहाँ से भेजना क्यों चाहती हैं.. ? आखिर मेरे यहाँ से चले जाने से वो अकेली रह जाएँगी ! इतना सारा काम फ़ैला पड़ा हैं यहाँ… !”
“सर बुरा मत मानियेगा, लेकिन शायद वो चाहती ही नहीं कि आप यहाँ रहें.. !”
सुनील ने घूर कर उसे देखा और अपने ऑफ़िस से निकल गया.. उसका असिस्टेंट भी उसके साथ ही निकल गया…
सुनील जिस रस्ते से होकर अपने घर कि तरफ जा रहा था उसी रास्ते पर वो बंगला भी पड़ता था जहाँ उसे उस दिन बाँसुरी के होने की झूठी जानकारी मिली थी..
कुछ सोच कर उसने गाड़ी उसी तरफ घुमा दी…
गाड़ी चलाते हुए उसने अपनी माँ को फ़ोन लगा दिया.. उसकी माँ उससे बात कर रहीं थी तभी उनका दूसरा फ़ोन घनघना उठा…
दूसरी तरफ से जो भी था उसने बाँसुरी के महल से निकलने की जानकारी दी और सुनील की माँ ने उसे मार डालने का हुक्म दें दिया…
सुनील दूसरे फ़ोन में सारी बातें सुन रहा था…
आश्चर्य से उसकी आंखें फटी रह गयी.. वो अपनी माँ को रोकना चाहता था, लेकिन रोक नहीं पाया..!
वो भी बदले की आग में दहक रहा था, लेकिन जबसे उसने बाँसुरी को देखा था उसे जान से मारने के संकल्प से डिग गया था…
और उसकी माँ उसकी बात समझे बिना वासुकी और बाँसुरी दोनों के प्राण लेने पर आमादा थी…
“वासुकी तो हैं ही लीचड़ इंसान, उसे तो जीने का कोई हक़ नहीं लेकिन बाँसुरी…
खिली कलि सी लगने वाली वो लड़की जिसकी ज़िन्दगी में आ जायें उसका तो किस्मत का ताला खुल जायेगा.. उस बात को समझे बिना मॉम उसकी भी जान की दुश्मन बनी बैठी हैं… !”
मन ही मन सोचते हुए सुनील ने गुस्से में फ़ोन पटक दिया… |
लेकिन उसी वक्त उसकी नज़र उस हवेली की छत पर पड़ी और उसे लगा पल भर को उसकी आंखें झपकना भूल गयी..
उसे लगा सामने बाँसुरी खड़ी हैं..
वो उसे ध्यान से देखने के कोशिश में था कि तभी बाँसुरी पीछे पलट गयी…
सुनील गाड़ी रोक कर खड़ा हो गया…
वो इस प्रतीक्षा में था कि शायद बाँसुरी वापस मुड़ जायें लेकिन कुछ देर बाद बाँसुरी वहाँ से चली गयी…
सुनील से रहा नहीं जा रहा था.. उसने गाड़ी उसी हवेली की तरफ घुमा ली…
हवेली के मुख्य द्वार पर सुनील की गाड़ी खड़ी थी, और वहाँ खड़े गार्ड्स ने उसे अंदर जाने से रोक दिया था… |
वो गाड़ी से उतर कर उन गार्ड्स को अपने अंदर जाने के लिए अनुनय करने लगा… |
साढ़े छैः फुटिये कद्दावर गार्ड्स और उनके हाथ में लम्बी लम्बी गन देख कर उसकी उन्हें धमकाने की हिम्मत नहीं थी… और इसलिए अपने शब्दों में भरसक मिठास भर कर वो उन लोगों को ऊलजलूल कहानियाँ सुना कर उनसे अंदर जाने की इजाज़त मांग रहा था…
आखिर उसमे से एक गार्ड ने उसे वहीँ लगी एक मशीन के पास लें जाकर खड़ा कर दिया…
उस मशीन में उसकी तस्वीर खींची और अंदर दर्श के ऑफ़िस में लगे कैमेरा स्क्रीन पर नज़र आने लगी…
सारिका उसी वक्त दर्श के लिए कॉफ़ी लेकर आई थी..
कॉफ़ी का कप हाथ में पकड़े दर्श ने इशारे से सारिका को पास बुलाया और सुनील का चेहरा दिखाने के साथ ही सीसीटीवी केमेरा में दिखाई देते सुनील की तरफ ऊँगली घुमा दी…
“ये देखो !! ऐसे खतरा मंडरा रहा हैं बाहर ! और तुम रानी साहेब को बाहर घुमाने लें जाना चाहती थी.. !
उन्हें फ़ोन देना चाहती थी.. !
ये जो आदमी बाहर खड़ा हैं, ये रानी हुकुम का सबसे बड़ा दुश्मन हैं.. !
ये उनकी जान का प्यासा हैं.. ! और ये सिर्फ उनकी जान लेने विदेश से यहाँ तक चला आया हैं.. !
अब समझ में आया कि रानी साहेब को सात तालों में बंद क्यों कर रखा हैं.. !”
सारिका झेंप कर रह गयी..
“हमें क्या मालूम.. ? हमें तो आप लोगों ने कुछ भी नहीं बताया ? बस आज तक जो करने कहा, हम करते रहें.. ! अगर हमें भी थोड़ा बहुत ही सही बता दिया होता तो, हम ऐसा बवंडर थोड़े ना करते.. !”
“रानी साहब को जूस दे दिया.. ?”
“हाँ दे दिया, लेकिन उन्होंने पीने से मना कर दिया हैं..! उनके बारे में भी तो सोचिये.. वो अपने घर परिवार से दूर यहाँ पड़ी हुई हैं, भले ही उनकी सुरक्षा के लिए किया हैं, लेकिन उन्हें बता कर भी तो किया जा सकता था ना ऐसा.. ?”
” तुम्हें लगता हैं कि, उन्हें बता कर उनके घर वालों से दूर रखना आसान होता.. ? कोई भी औरत अपने पति बच्चे से अपनी मर्ज़ी से अलग नहीं रह सकती.. |
भले ही उसकी जान पर बन आए.. वो उनके साथ रहते हुए मौत को चुन लेगी लेकिन उनसे अलग रह कर ज़िन्दगी कभी नहीं चुनेगी और खास कर रानी साहेब जैसी औरत.. |
जो अपने करीबियों के लिए अपने प्राण भी संकट में डाल सकती हैं… |
इसीलिए इन्हें कुछ भी नहीं बताया गया हैं.. |
बात इतनी छोटी नहीं हैं सारिका !!
तुम्हें अभी उनकी तकलीफ नजर आ रहीं हैं, लेकिन जिस दिन वो अपने घर परिवार के साथ होंगी उस दिन ये सारे काले दिन उनके लिए एक बीती याद बन कर रह जायेंगे..
उनके जीवन में उनका प्रेम उनका सूर्य बन कर फिर चमकेगा.. !
इस वक्त बस यह ध्यान रखना हैं कि हमारे कारण उन्हें किसी तरह का कोई कष्ट ना हो.. !”
“आप और काका उनसे छिप कर क्यों रहते हैं ?”
“हम जो कर रहें हमें उतना ही करने की इजाज़त हैं.. हमें उनके सामने ना जाने का आदेश हैं, इसलिए हम नहीं जाते !”
“मतलब कल को रानी साहेब यहाँ से चली भी जाएँगी और आप लोग उनसे मिलेंगे भी नहीं ! उन्हें कभी मालूम ही नहीं चलेगा कि आप लोग उनकी रक्षा के लिए क्या कर रहे थे.. ?”
दर्श ने बिना कोई जवाब दिये ना में सर हिला दिया..
“हर एक की किस्मत रानी साहेब के दर्शन करने की नहीं होती.. ! हमें उनकी सेवा के लिए भेजा गया हैं और हम वहीं करेंगे ! आशा करता हूँ, अब तुम्हारे सारे सवालों का जवाब तुम्हें मिल गया होगा.. और अगर नहीं भी मिला तो इससे ज्यादा मैं किसी सवाल का जवाब नहीं दूंगा !”
दर्श ने अपना चेहरा स्क्रीन पर गड़ा दिया और खुद में बड़बड़ाती हुई सारिका बाहर निकल गयी..
“कल क्या होगा किसे पता ? खुद में इतने आत्ममुग्ध हैं कि खुद ही सब सोचें बैठे हैं.. !
हो सकता हैं कल आपकी भी किस्मत खुल जायें और रानी साहेब आपके साथ बैठ कर शाही डिनर का लुत्फ़ उठाये.. !”
“अरे ओ हैरी पॉटर की चाची.. ज्यादा कल्पना लोक में मत उड़ो, जितना कहा हैं उतना करो.. और सुनो आज डिनर में रिसोटो पकाना हैं.. समझ गयी.. !”
उसकी बात सुन कर दर्श ने जवाब दें दिया और वो अपनी जीभ काट कर रह गयी… बावजूद उसका बड़बड़ाना चालू रहा…
“हफ्ते में चार दिन तो ये आदमी रिसोटो ही पकवाता हैं,…पता नहीं हिंदुस्तानी हैं या इटेलियन !!”
“इटली में ही पढाई की हैं.. इसलिए वहाँ का खाना इतना पसंद हैं मुझे.. !”
एक बार फिर दर्श का जवाब सुन सारिका फटाफट वहाँ से बाहर निकल गयी…
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सुनील की माँ का इशारा मिलते ही एक आदमी ने अपने हायर किये आदमी को फ़ोन मिला दिया..
और उस आदमी ने एक ट्रक ड्राइवर को फ़ोन लगा दिया..
ट्रक ड्राइवर बस इसी मौके के इंतज़ार में था.. पिछली बार भी उसका शिकार उसके तक पहुँचने से पहले ही आधे रस्ते से वापस लौट गया था और इसलिए इस बार उसे अपने ट्रक के चक्कों के ख़ून से रंगने का बेसब्री से इंतज़ार था…
एक बार अगर किसी इंसान को ख़ून करने की लत लग जायें तब उसके दिल दिमाग में ख़ून करने का नशा काबिज़ होने लगता हैं…
उसके दिमाग में अलग से कुछ परिवर्तन होने लगते हैं…
पहली बार भले ही किसी से गलती से गैर इरादतन हत्या हो सकती हैं, लेकिन कोई जानबूझ कर ऐसी गलती बार बार नहीं दुहराता !
यानी सिर्फ जो लोग यह कहते हैं कि वह पैसों के लिए किसी इंसान की जान ले सकते हैं वह असल में झूठ कहते हैं !
किसी इंसान को मार देना उसकी जान ले लेना एक अलग तरह का पागलपन है..!
सामान्य इंसान कभी सिर्फ पैसो के लिए ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा करने वाला इंसान सामान्य के दर्जे में नहीं आते…
किसी का ख़ून करने की क्रूरता इंसान को इंसानियत से अलग कर देती हैं…
वह कातिल होता है, उसे मालूम होता है कि वह सामने वाले की जान लेने वाला है..
और उसकी जान लेने के बाद उसके पीछे उसके परिवार जनों को रोता छोड़ देगा..!
ऐसे हत्यारे एक तरह से सेडिस्ट होते हैं, इन्हें दूसरों को दुखी देखकर रोता कलपता देखकर अजीब सी खुशी मिलती है… सुकून मिलता है…
इनके दिमाग के उस हिस्से को आराम मिलता है जो सामने वाले को तकलीफ पहुंचा कर खुश होता है..!
ऐसा ही कुछ उस ट्रक ड्राइवर के साथ था.. !
वो एक पेशेवर मुजरिम था ! वो सुपारी किलर था ! यानी कि पैसे लेकर लोगों को जान से मार दिया करता था ! लेकिन अपने काम के प्रति उसका जुनून ऐसा था कि अगर उसने अपना काम पूरा नहीं किया तो वह लिए हुए पैसे वापस कर दिया करता था | पहले भी उसे रानी साहेब को मारने की सुपारी दी गई थी, और उसे जगह और समय सब कुछ बता दिया गया था | वह अपनी ट्रक में बैठा उनकी गाड़ी गुजरने का इंतजार कर रहा था, लेकिन आधा घंटा बीत जाने के बाद भी जब महल की तरफ से कोई गाड़ी नहीं आई …
तब उसने परेशान होकर अपनी ट्रक रास्ते पर उतार दी थी !
कुछ दूर आगे जाने के बाद भी जब उसे दिए गए नंबर की गाड़ी उसकी तरफ आती नजर नहीं आई तो, परेशान होकर उसने अपने मालिक को फोन घुमा दिया था ! और तब उसे पता चला कि रानी साहेब आधे रास्ते से महल वापस लौट गई थी | तब गुस्से में खीझता हुआ वह भी ट्रक मोड़ कर अपने दारू के अड्डे पर पहुंच गया था | और अपने दिमाग में चलने वाली जलन को बुझाने के लिए दारू में उसने खुद को डूबा दिया था…
वह उस आदमखोर की तरह हो चुका था जिसके मुंह को खून का स्वाद मिल गया था… और इसीलिए वह जब तक रानी साहेब को मार नहीं देता उसे चैन नहीं मिल रहा था..
आज के फ़ोन के बाद अपनी चाक चौबंद तैयारी के साथ वो निकल गया था, बतायें गए पते पर…
उसने एहतियातन अपने साथ एक छोटा खंजर और एक गन भी रखी हुई थी..
उसके दिल दिमाग की खुनी भूख कई दिनों से नहीं मिटी थी और इसलिए आज उसका उत्साह अपने चरम पर था….
***
सुनील को समझ आ गया था कि इस हवेलीनुमा अभेद्य किले को भेद कर अंदर जाना नामुमकिन हैं.. और इसलिए गार्ड्स से बहस करने की जगह वो अपनी गाड़ी में जा बैठा और उसने गाड़ी वापस घुमा ली.. |
थोड़ा आगे जाने के बाद उसने गाड़ी घुमाई और हवेली के पिछले हिस्से में मोड़ ली…
उसे दूर से ही वहाँ भी गार्ड्स नजर आ गए.. और उसने अपनी गाड़ी को दूर पेड़ो की छाँव में खड़ा कर दिया..
और खुद गाड़ी से अकेला ही उतर गया…|
ड्राइवर को उसने गाड़ी में छोड़ दिया था.. |
गाड़ी से उतर कर हवेली पर नज़र किये वो पेड़ो के झुरमुट से छुपता छुपाता आगे बढ़ रहा था कि एक लम्बी सी मर्सिडीज़ बेंज एस फोर आकर उसके सामने खटाक से रुक गयी…
डेढ़ करोड़ की गाड़ी अपने सामने देख वो आश्चर्य से उस गाड़ी की तरफ देखने लगा..
तभी गाड़ी का पिछला दरवाज़ा खुला और काली फॉर्मल पेंट्स पर अपनी चिरपरिचित सफ़ेद कमीज़ पहने एक कलाई में रुद्राक्ष और दूसरी में राडो धारण किये राजा उतरा और अपने निराले ही अंदाज़ में सामने खड़े सुनील को देख कर मुस्कुरा उठा…
“क्या बात हैं ? कुछ परेशान लग रहे हैं आप……? क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूं..?”
सुनील ने राजा अजातशत्रु की तस्वीरें देख रखी थी… लेकिन उसे आभास नहीं था कि अजातशत्रु उसके सामने इस तरह से भी आ सकते हैं ! इसलिए उसे लगा कि यह कोई जाना पहचाना सा व्यक्ति जरूर है, लेकिन कौन है यह सुनील नहीं समझ पाया…
राजा की बात
