जीवनसाथी -2/74

जीवनसाथी 2/74

अपनी डीएनए रिपोर्ट्स देखने के बाद से ही समर में एक अजब सा बदलाव आ गया था… जाने क्यों उसे  पिया का ऐसे उस पर अविश्वास करना सहन नहीं हो पा रहा था…

   इसकी जगह तो पिया खुद होकर उससे कह लेती कि वो समर और शोवन का टेस्ट करवाना चाहती हैं..|
    बुरा तो तब भी लगता लेकिन मन को समझा कर पिया के विश्वास को जीतने के लिए वो बेहिचक टेस्ट करवाने तैयार हो जाता !

लेकिन अभी जो पिया ने किया था वो कहीं से माफ़ी के लायक नहीं था…
समर ने भी नाराज़गी अख्तियार कर ली और एकदम से चुप सा हो गया…
वो पहले भी अपने काम में व्यस्त रहता था ! अब वापस उसने खुद को काम में डुबो दिया….

इधर पिया भी अपने काम, घर, और शोवन की देखभाल में इतनी व्यस्त हो गयी कि, उसने समर के कम बातचीत करने, और काम से काम रखने पर कुछ विशेष ध्यान ही नहीं दिया… |
   लेकिन ऐसा कब तक चल सकता था… ?
हफ्ता तो बीत गया लेकिन एक सुबह समर नाश्ता करने बैठा ही था कि पिया ने उसे टोक दिया…

“क्या बात हैं? आजकल महल ने आपकी ज़िम्मेदारियाँ कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी हैं मंत्री जी .. ?  ऐसा भी कहीं होता हैं भला ?”

समर ने प्लेट पर ही नज़र गड़ाए हुए जवाब दे दिया..

“तुम्हें कुछ काम था क्या.. ?”

“हाँ काम तो था… मंत्री जी का अपॉइंटमेंट चाहिए था..! अब तो लग रहा शोवन तुम्हारे और मेरे लिए भी हमें तुम्हारे अंकल से अपॉइंटमेंट लेना पड़ेगा !”

शोवन धीरे से अपनी पलकें झपका कर बैठा रहा… समर ने शोवन की तरफ देखा और जवाब भी उसे ही दिया…

“शोवन क्या तुम्हें मैं टाइम नहीं देता हूँ… ?”

शोवन को जाने क्यों लेकिन समर से बहुत प्यार था…वो इन कुछ दिनों में ही समर से बहुत ज्यादा प्यार करने लगा था… दिन भर स्कूल, खेल कूद में बीता लेने वाला बच्चा शाम होते ही बेसब्री से समर का इंतज़ार करने लगता था.. ! अगर कभी काम के कारण समर को लौटने में देर होने लगती तो उसकी आंखें टकटकी लगाए दरवाज़े को ताकती रहती… कि समर कब आएगा ?समर के सवाल पर उसने भारी सी आंखों से ना में सर हिला दिया…

“आप तो मेरे हीरो हैं.. मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूँ.?

“पूछो.. !”

सहमी हुई सी नज़र से शोवन ने सब की तरफ देखा..

“क्या मैं आपको डैड बुला सकता हूँ.. ?”

शोवन के इस सवाल पर पिया और समर एक दूजे को देख कर चौंक गए….
इस बारे में अब तक उन दोनों में कोई बातचीत नही हुई थीं ! यहाँ तक की समर अपनी इच्छा भी पिया को बता नहीं पाया था कि वो शोवन को गोद लेना चाहता हैं !
इसलिए शोवन का पूछा ये सवाल दोनों को ही निरुत्तरित कर गया….

समर बिना कोई जवाब दिये वहाँ से उठ गया… उसने प्यार से शोवन के सर पर हाथ फेरा और अपना सामान लेने अंदर चला गया…

समर ही शोवन को स्कूल भी छोड़ा करता था…..

शोवन का स्कूल अभी ही शुरू हुआ था ! उसे सिर्फ दो दिन हुए थे जाते हुए, और इसलिए अब तक स्कूल बस की जगह वो समर के साथ ही जा रहा था…

समर अपना सामान लेकर आया और शोवन को साथ ले कर जाने लगा, पिया को उसका इस तरह से बात ना करना अजीब तो लगा लेकिन पिया ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया…..

उसकी तबियत भी कुछ नरम गरम सी चल रही थीं…. आजकल बिना वजह थकान सी बनी रहती थीं उसे !
उसने जाते हुए समर को एक बार और टोक दिया…

“सुनिए मंत्री जी ! आज शाम हमें पंखुड़ी और कलेक्टर साहब की शादी में जाना हैं, ज़रा जल्दी आ जाइएगा !”

समर पलट कर खड़ा हो गया…

“कलेक्टर साहब की शादी.. ?”

“हाँ बहुत शार्ट में ही कर रहे हैं… उनका कहना हैं सादी और पारम्परिक शादी करना चाहते हैं वो, जिससे समाज में एक उदाहरण सेट कर सके | हाँ मेरी झल्ली दोस्त का  बहुत मन था कूद फांद वाली शादी का लेकिन वो भी तैयार हो गयी… !”
समर हां में सर हिला दिया …

अभी क्लिनिक के पहले पिया को आर्य समाज मंदिर जाना था, सुबह वहीँ दोनों की शादी होनी थीं और शाम को रिसेप्शन  !

“क्लिनिक से पहले उसकी शादी अटेंड करने ही जाउंगी, और उसके बाद शाम को हम एक साथ रिसेप्शन में चलेंगे !”

“हम्म… !”

समर ने हामी भरी और शोवन को लेकर निकल गया…

स्कूल के सामने पहुँच कर शोवन एक बार को अंदर जाने में झिझकने लगा.. उसका संकोच देख कर समर उसे आम मातापिता की तरह पढाई लिखाई के फायदे गिनाने लगा… !
. शोवन कुछ देर सुनता रहा फिर हाँ में गर्दन हिला कर अंदर चला गया…

वो गेट से अंदर दाखिल होकर सहमते हुए आगे बढ़ रहा था कि उसके पैरों में रस्सी फंसी और वो ज़ोर से गिर गया !
   शोवन को पहले ही आभास था कि ऐसा कुछ हो सकता हैं इसलिए वो धीमे चल रहा था ! इसी वजह से उसे चोट कम आई.. वो खुद को झाड़ पोंछ कर उठ रहा था कि कुछ बच्चे हँसते हुए उस तक पहुँच गए…
   एक प्यारी सी लड़की उसके सामने आकर खड़ी हुई और उस तक हाथ बढ़ा दिया…

  शोवन ने उसे देखा और धीरे से उसका हाथ पकड़ कर खड़ा हो गया… उस लड़की ने शोवन के खड़े होते ही उससे कहा… -” तुम्हारे चेहरे पर धूल लग गयी हैं, पोंछ लो !”

शोवन ने अपने उसी हाथ से चेहरा पोंछ लिया और उसके ऐसा करते ही सारे बच्चे उस पर हंसने लगे…

  उस सुंदर भोली सी शक्ल वाली लड़की का नाम परी था…. उसकी गैंग ने ही शोवन को गिराया था और उसे हाथ दे कर उठाने वाली परी ने अपने हाथ में काली सियाही लगा रखी थीं…
   और उस सियाही वाले हाथ से चेहरा पोंछने के कारण शोवन का चेहरा काला पड़ गया था…
उसे देख कर खिलखिलाते हुए सारे लोग वहाँ से भाग खड़े हुए, बस एक नटखट शैतान सा लड़का वहाँ खड़ा रह गया…

वो लड़का यश था… !

” क्या हुआ?  यह लोग तुम्हें बुली कर रहे हैं ना..?”

“हाँ !”

शोवन ने बड़े भोलेपन हाँ कहा और यश अपनापा दिखाते हुए वहाँ उसके पास चला आया !

”  अगर तुम इसी तरह इन लोगों से डरते रहे तो ये लोग तुम्हें यूँ ही डराते रहेंगे..  इसलिए इन लोगों की शिकायत कर दो..?”

” टीचर के पास?”

  शोवन के इस सवाल पर यश ने ना में गर्दन हिलाई और एक तरफ को अपनी उंगली घुमा दी… ..

” वहां वो बैठती है, जिसके सामने इन लोगों की एक नहीं चलती | अगर इनकी शिकायत तुमने उसके पास कर दी ना तो फिर यह लोग उसके डर के कारण कभी तुम्हें बुली नहीं करेंगे..!”

शोभन आश्चर्य से आंखें फाड़े यश की तरफ देखने लगा | और यश ने उसे अपने साथ चलने का इशारा कर दिया, शोवन चुपचाप यश के पीछे चल पड़ा ! कुछ दूर जाने के बाद असेंबली स्टेज की सीढ़ियों पर बैठी हुई मीठी नजर आने लगी | उसके आसपास कुछ बच्चे और भी थे जो उससे अपनी अपनी शिकायतें बता रहे थे, और वह एक-एक कर सब की शिकायतें सुनकर उनका निपटारा कर रही थी |  उसी वक्त यश शोवन को लेकर वहां पहुंच गया…

” मीठी इसे परी की गैंग परेशान कर रही है..!”

” अच्छा इधर आओ सामने!”

मीठी ने शोवन को ध्यान से देखा और उससे पूछताछ करने लगी….

” ये चेहरे पर इतना सारा काला रंग कहां से आ गया..?”

” उस लड़की ने अपने हाथ पर कलर लगा रखा था जो मेरे हाथ पर लगा और उससे मेरे फेस पर..!”

” ओ हो हो….इस ब्रिटिश नूरानी चेहरे का कचरा कर दिया परी ने…
नाम क्या है तुम्हारा?”

” शोवन!”

” शोवन तुम उस बाथरूम में चले जाओ!  वहां पर अपने आप को क्लीन कर लो, उसके बाद मैं तुम्हारी मदद करती हूं… ओके!!”

हां में गर्दन हिलाकर शोवन उस बाथरूम की तरफ बढ़ गया उसने नल खोला और आंख बंद किए हुए अपने चेहरे पर ढेर सारा पानी डालने लगा…
आंख बंद होने के कारण उसे मालूम ही नहीं चल सका कि वह गहरे काले पानी से ही अपना चेहरा धोने की कोशिश कर रहा था…
उस पानी के छींटे जगह-जगह उसकी कमीज को भी रंग गए…
उसने अपनी आँखे खोली और अपनी बंदरनुमा  शक्ल देख कर उसे रोना आ गया !
   पहले तो चेहरे के कुछ हिस्सों में ही कालिख लगी थी लेकिन अभी पूरा चेहरा काले कोलतार से पुता हुआ दिख रहा था |  इसके साथ ही उसकी सफेद शर्ट की भी दुर्गति बन गई थी…|

वहां से बाहर निकला कि तभी मीठी परी और यश के साथ उनके गैंग के सारे बच्चे शोवन पर हंसने लगे उसी समय एक कड़क हुए रोबीली सी आवाज वहाँ गूंज उठी !! और मीठी के साथ बाकी सारे बच्चे सहम कर रह गये  यह आवाज़ हर्ष की थीं !…

” मीठी तुम्हारा फिर शुरू हो गया..? जैसे ही स्कूल में कोई भी नया बच्चा आता है, तुम लोग अपना  गेम शुरू कर देते हो..?
यह कोई तरीका होता है वेलकम करने का? मीठी, ऐसे ही चलता रहा ना तो अब मैं नीरु आंटी से जाकर तुम्हारी शिकायत कर दूंगा..!”

“ओह्ह ओह्ह… मैं तो बहुत डर गयी हर्ष !!”

डरने का अभिनय करती हुई मीठी जोर से खिलखिला कर हंसने लगी और वहां से अपने गैंग को लेकर दूसरी तरफ निकल गई..!
   हर्ष ने शोवन को साथ लिया और वाशरूम की तरफ बढ़ गया,  उसने जाते-जाते स्कूल की आया बाई को भी बुला लिया था..
स्कूल की एक दो टीचर्स भी हर्ष की मदद के लिए वहां चली आई उन लोगों ने यह सब देखा और वह लोग समझ गए कि यह सब मीठी परी और उन लोगों की गैंग का किया धरा है…

शोवन का हाथ मुहँ धुलवा कर उसे स्कूल की तरफ से एक दूसरी ड्रेस पहना दी गई…

” यह राज महल की नई जनरेशन तो बिल्कुल बवाल है..!”

” सही कह रही है मिस कुसुम आप ?  इन बच्चों को हम डाँट मार भी नहीं सकते ?
  राजमहल के बच्चे हैं, रियासत की भावी पीढ़ी है..!  और इनकी शैतानियां देखो, शैतान को भी अपनी नानी याद आ जाएगी इन बच्चों की शरारते देखकर ! ले देकर एक हर्ष ही समझदार और सुलझा हुआ हैं, बाकी तो सारी राक्षसों की फ़ौज हैं..!”

” जाने यह राज महल की औरतें क्या खाकर ऐसे बच्चे पैदा करती हैं..?”

” सच कह रही हैं आप ! एक तो इन लोगों की उम्र देखो इतने छोटे हैं अभी, फिर भी दिमाग कितना तेज चलता है ! कब किसे कैसे परेशान करना है इन लोगों को यह सब पता हैं !
  शैतानियां करने में तो यह अच्छे-अच्छे शैतानों के कान काट जाते हैं लेकिन वही पढ़ाई करते समय सब के सब डब्बा गोल हैं..!”

” इनकी शैतानी टुकड़ी का एक और सरगना भी तो है शौर्य ! आप उसे कैसे भूल गए ?  छोटा पैकेट बड़ा धमाका है वह!
   सुना है कि रानी बांसुरी फिर से प्रेगनेंट है..!”

” हे भगवान मतलब फिर से कोई राक्षस प्रकट होने वाला है..!”

” राक्षस या राक्षसी पता नहीं..?”

दोनों टीचर धीमे-धीमे बच्चों और राज महल की बुराई में लगी थी, ज्यादा जोर से भी नहीं कह सकती थी क्योंकि स्टाफ रूम में हर तरफ सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था !

हालांकि कितनी भी बुराई कर लें, यह सारी टीचर्स उन बच्चों पर अपनी जान छिड़कती थी और यह उनकी आपस की प्यार की बातें थी..!

हंसते बोलते हुए उन लोगों ने वहां एक किनारे बैठे शोवन को चॉकलेट मिल्क शेक पकड़ाया और अपनी अपनी क्लास लेने के लिए स्टाफ रूम से निकल गई…

*****

सुनील की मां ने सुनील के फोन पर दूसरी बार फोन किया था और सुनील ने फोन नहीं उठाया था इसलिए परेशान होकर सुनील की माँ ने उसके असिस्टेंट के मोबाइल पर कॉल कर दिया..

” सुनील कहां है ? फोन क्यों नहीं उठा रहा है..?”

” फॉरेन डेलीगेट्स के साथ उनकी कोई मीटिंग चल रही है मैम !  उनका फोन उनके ऑफिस में ही रखा है और वो दूसरे हॉल में मीटिंग लें रहे हैं !”

” ठीक है, वो जब भी मीटिंग से फ्री हो, उसे यह बता देना कि उसके दोनों शिकार में से एक पर हमारी नजर पड़ चुकी है और हम आज उसका शिकार करने वाले हैं !

बस इतना कहकर सुनील की मां ने फोन रख दिया..!

सुनील के असिस्टेंट को यह अब तक नहीं मालूम चला था कि सुनील अब बांसुरी को नहीं मारना चाहता है ! उसे भी यही लग रहा था कि सुनील वासुकी और बांसुरी को मारने के बाद ही इंडिया से वापस लौटेगा | इसलिए  सुनील की मां के कहे वाक्य को सुनकर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आये… |
   सुनील और उसकी गैंग का काम जिस तरीके का था वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर किसी के मरने जीने से कोई खास असर नहीं पड़ता था, इसलिए सुनील के असिस्टेंट के लिए वासुकी और बांसुरी भी सिर्फ ऐसे इंसान थे जिनका मरना ही उन लोगों को लाभ दे सकता था..!
सुनील इस वक्त बहुत ज्यादा व्यस्त था इसलिए उसने  उसे कुछ भी बताना जरूरी नहीं समझा..!

*****

अनिर्वान भारद्वाज किसी क्रिमिनल केस की फ़ाइल देखता बैठा था कि तभी उसका दूसरा फोन बजने लगा !उसका मोबाइल टेबल पर पड़ा था… मोबाइल पर रिंग टोन बजती सुन कर बाबूराव ने झटके से मोबाइल उठा कर अनिर्वान की तरफ बढ़ा दिया | लेकिन उतने में ही उसे समझ आ गया कि ये वाला मोबाइल नहीं बज रहा हैं…
अनिर्वान ने अपनी शर्ट की अंदरूनी जेब से अपना छोटा सा दूसरा मोबाइल निकाला और कान पर लगा लिया..

“एबी ! कहाँ हो इस वक्त ?”

” वर्क स्टेशन पर हूँ, वर्किंग मोड ऑन हैं !”

” रानी साहब को वापस लाने का वक्त आ गया हैं ! चीफ ने कहा है, उनकी जान को जिस से असली खतरा था और इस सारे कांड के पीछे जो था उसका असली चेहरा सामने आ चुका हैं…. !
  अब उसे हमसे कोई नहीं बचा सकता ! हम सोच भी  नहीं सकते थे कि इस सब के पीछे का मास्टरमाइंड कौन होगा..?”

“कौन हैं वो… ?”

“किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि राजा अजातशत्रु की हत्या के षड्यंत्र के विफल हो जाने पर वो इस कदर इंतकाम की आग में जल कर पागल हो जायेगा कि रानी साहब की जान का दुश्मन बन बैठेगा…
  बाकी बातें मिलने पर की जाएँगी, बस अभी ये समझ लो कि हम जिस वक्त के इंतज़ार में रानी साहब को छुपा कर रखें हुए थे वो आ गया हैं…
   हमारा शिकार अपने बिल से बाहर आ गया हैं !
और मजे की बात ये हैं कि उसे ये लग रहा कि वो अपना शिकार करने के लिए बाहर निकला हैं, लेकिन उसे  ये नहीं मालूम कि उसके सामने हमनें सिर्फ उसे अपने जाल में फंसाने के लिए मेमनी बांध रखी हैं !”

अनिर्वान चुपचाप सारी बात सुन रहा था….

“अब तुम्हें बस ये करना हैं कि…

सामने मौजूद आदमी कुछ और कह पाता उसके पहले अनिर्वान बोल पड़ा…

” मैं जानता हूँ मुझे क्या करना हैं…. मेरे रहते ना ही रानी साहब को आंच आएगी और ना उनकी परछाई को ! आप निश्चिन्त रहें !
   रानी साहब को लेने मुझे ही जाना होगा या आप जायेंगे !”

“रानी साहब को वहाँ से ऐसे निकालना होगा कि उन्हें ये समझ ना आये कि उनकी सुरक्षा के लिए मैंने ही उन्हें वहाँ रखा था… क्योंकि पूरी बात जाने बिना वो नाराज़ हो जाएँगी और बात बिगड़ सकती हैं, इसलिए मेरी जगह तुम ही उन्हें वहाँ से निकाल कर लाओगे….
  बस ये आखिरी काम पूरा होते ही तुम अपनी असल ज़िंदगी में लौट सकतें हो वासुकी !”

अनिर्वान ने हाँ कह कर फ़ोन बंद किया ही था कि उसका दूसरा फ़ोन बजने लगा…

अबकी बार मोबाइल पर महल का ऑफिशियल नंबर नज़र आ रहा था…
अनिर्वान ने जैसे ही फ़ोन उठाया उधर से पंकजा की घबराई सी आवाज़ आने लगी…

“हैलो सर जी, हम पंकजा बोल रहे हैं.. !”

“बोलो पंकजा, इतनी घबराई हुई क्यों हो ?”

“सर… आपको तो पता ही होगा महल के लोग दादी सा के बारसे की पूजा पाठ के लिए गए हुए हैं… रानी हुकुम बस नहीं गयी… !”

“क्यों ?”

“उन्होंने सुबह बड़ी रानी से कहा कि उनकी तबियत ख़राब हैं, और ज़बरदस्ती सबको भेज दिया.. सिर्फ हमें ही रोकें रखा और अब शाम ढलने पर उन्होंने गज़ब कर दिया हैं.. !”

” अब क्या किया उन्होंने  ?”अनिर्वान अपना माथा पकडे बैठ गया…

“वो लीना मैडम से मिलने निकली हैं, वो भी अकेले.. !”

अनिर्वान एक झटके से अपनी जगह पर खड़ा हो गया… उसे समझ आ गया था कि पंकजा भी इस बात को समझ रही हैं कि लीना का नाम लेकर रानी साहब उसी से मिलने आती हैं !
  बेचैनी से पहलू बदल कर उसने पंकजा को फटकार लगा दी..

“तुमने उसे मेरा मतलब उन्हें अकेले निकलने कैसे दिया.. !”

“सर  महल से निकलते समय मैं और ड्राइवर दोनों साथ थे लेकिन महल से आगे बढ़ते ही उन्होंने ड्राइवर को और इस बार मुझे भी गाड़ी से उतार दिया और गाड़ी तेजी तेजी से आगे बढ़ा ली |  मैंने इसीलिए आपको फोन किया है, सर !.
   अगर इस वक्त महल में से किसी को भी फोन करूंगी या राजा साहब को फोन करूंगी तो अच्छा नहीं लगेगा पता नहीं महल के सारे लोग रानी साहब के बारे में क्या सोचे, इसलिए मुझे लगा कि मुझे आपको बताना चाहिए..!
आप प्लीज उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दीजिए! इधर से निकलने वाली कोई खाली गाड़ी मिलती है तो मैं भी आपके ऑफिस तक पहुंच रही हूं..
जिससे कि रानी साहब के साथ मैं वापस लौट सकूं, क्योंकि हो सकता है कि राज महल के लोग भी वापसी कर रहे हो | वह सब सुबह से गए हुए हैं और अब उनकी वापसी का वक्त हो गया  | है अगर महल में रानी साहब नहीं मिले तो राजा साहब बहुत नाराज हो जाएंगे..!”

अनिर्वान ने कष्ट से अपनी आंखें मूंद ली | उसे पंकजा की बातें समझ में आ रही थी | वह समझ गया था कि पंकजा ने इस बात को साफ साफ महसूस कर लिया था कि रानी साहेब का झुकाव उसकी तरफ है, और वह उसी से मिलने के लिए बार-बार उसके ऑफिस में चली आती है..|
    लेकिन यह बात अगर राज महल में किसी भी अन्य व्यक्ति को या राजा साहब को मालूम चल गई तो रानी साहब के लिए अच्छा नहीं होगा !

मन ही मन कुछ सोच कर वो अपनी जगह से उठा और गाड़ी की चाबी उठाये बाहर निकल गया, तभी उसका फ़ोन एक बार फिर बजने लगा.. !

” सर आपके ऑर्डर से सुनील के साथ-साथ उसके असिस्टेंट का भी फोन टैप कर रहे थे…
अभी अभी जो रिकॉर्डिंग आई है उसे आपको भेजा है मैंने ! मुझे किसी गड़बड़ की आशंका लग रही है आप एक बार सुन लीजिएगा..!”

  अनिर्वान ने रानी बांसुरी की सुरक्षा के लिए बड़े सख्त
इंतज़ाम कर रखे थे, और उनमें से एक कदम ये था कि  अनिर्वान का एक आदमी सुनील की गैंग में मौजूद था ! जो वहां के पल-पल की खबर अनिर्वान को दिया करता था | इसके साथ ही उसने सुनील और उसके दो-तीन असिस्टेंट के फोन को हैक करके उसका असेस दर्श को दे रखा था | जिससे दर्श अपने सिस्टम पर सुनील और उसके लोगों की बातचीत सुनकर उसे  रिकॉर्ड कर सकता था और इसीलिए सुनील के द्वारा फोन पर की सारी बातचीत दर्श और अनिर्वान तक पहुंचती रहती थी..
आज भी सुनील की माँ ने उसके असिस्टेंट से जो भी  बातचीत की थी, वह सारी बातें दर्श के पास पहुंच चुकी थी | जहां से दर्श ने उसे अपने एक आदमी के ज़रिये  अनिर्वान के मोबाइल पर भिजवा दिया था…

दर्श बांसुरी की सिक्योरिटी के लिए उनके साथ जिस हवेली में था उसके आसपास उन लोगो ने जैमर्स लगा रखें थे… कोई भी बाहरी व्यक्ति मोबाइल  नेटवर्क के जरिए उन लोगों तक ना पहुंच जाए इसलिए दर्श भी अपना मोबाइल बंद ही रखता था और इसलिए दर्श सीधे तौर पर अनिर्वान से बात नहीं करता था!

लेकिन अब उसे भी यह आदेश मिल चुका था कि रानी बांसुरी के वनवास की समाप्ति का समय आ चुका है और अब उन्हें यहां से ससम्मान विदा करने का वक्त आ गया है!

यह सुनकर हवेली में दर्श, काका और सारिका तीनों ही बहुत खुश थे  लेकिन इस बात को उनमें से किसी ने भी रानी बांसुरी से नहीं कहा था….

वैसे भी उन तीनों को इस सबके पीछे कौन था क्या था और क्यों रानी बांसुरी को यहां रखा गया था इसके बारे में सारी बातें मालूम नहीं थी ! वह लोग सिर्फ वासुकी की बात मानकर अपना कर्तव्य निभा रहे थे!

****

इधर फोन पर रिकॉर्डिंग सुनते ही अनिर्वान का पारा उबलने लगा…
उसे समझ में आ गया कि महल से निकली रानी पर  खतरा मंडरा रहा हैं और वो तेज़ी से से अपनी गाड़ी की तरफ भागा…
उसे अब अपने पास आये दोनों फ़ोन की लिंक समझ आ गयी थीं….

जिस तरह शेर शिकार के लिए निकले उसके लिए  बकरी को उसके निशाने पर बांध कर उसे ललचाया जाता हैं, उसी तरह महल से रानी के निकलने के बारे में भी किसी ने उस तक खबर ज़रूर पहुंचा दी है… !

इसका मतलब रानी की जान को खतरा है…

दिमाग में ये ख्याल आते ही बेचैनी से अनिर्वान गाडी को और तेज़ भगाता हुआ महल वाले रास्ते की ओर बढ़ने लगा……

रात का अँधेरा गहराने लगा था… तेज़ी से गाडी भगाती हुई वो अपने में मगन आगे बढ़ी जा रही थीं…
उसने अपनी पसंद का ट्रैक लगाया हुआ था…

यारा तेरे सदके इश्क़ सिखा
मैं तो आयी जग तज के इश्क़ सिखा
जब यार करे परवाह मेरी
मुझे क्या परवाह इस दुनिया कि
जग मुझपे लगाए पा

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