
जीवनसाथी -2 भाग -71
मेरा नाम सारिका है..! आज से कुछ समय पहले तक मेरी भी जिंदगी बहुत शांत और सुंदर थी ! मैं कॉलेज में पढ़ा करती थी रानी साहेब.. |
लेकिन फिर अचानक मेरी उस शांत और सुंदर जिंदगी को किसी की नजर लग गई..|
कुछ लड़कों ने मेरी जिंदगी नरक बना दी…|
एक रात कहीं से लौटते वक्त उन लड़कों ने मेरे साथ जो दरिंदगी की उसे आज भी सोचकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं… |
मैं आज भी उस दरिंदगी को नहीं भूली हूं, और आज भी शब्दों में बयां करने में मेरी जान निकलने लगती है..!
इतने बड़े हादसे के बाद, मैं सब कुछ भूल कर आगे बढ़ना चाहती थी, लेकिन उन लड़कों ने मुझे जीने लायक ही नहीं छोड़ा था..! मैं वापस कॉलेज जाना चाहती थी अपनी जिंदगी को वापस पटरी पर लाना चाहती थी, लेकिन उन लोगों का खौफ मुझ पर तारी होने लगा था..! और वह भी इस कदर कि मैंने घर से निकलना ही छोड़ दिया था..! इसके बाद मेरी मां के समझाने पर मैं उनकी शिकायत लेकर पुलिस में गयी | लेकिन उन लड़कों का सरगना वहां के बहुत बड़े नेता का बेटा था और वह नेता जी मुझे धमकाने में लग गए..
और उस समय वह आया…|
उस के आते ही वक्त जैसे ठहर कर रह गया | हवाएं उसी की दिशा में बहने लगी और ज़र्रा ज़र्रा उसकी बोली बोलने लगा..|
वह आया तो उन लोगों की तरफ से था, लेकिन जब उसने मुझसे सारी सच्चाई जानी तो मुझे साथ लेकर गया और उस लड़के को मेरे हाथ से गोली मरवा दी… |
उसके इंसाफ करने का तरीका ऐसा था रानी साहेब कि मैं ना चाहते हुए भी तब उसके पैरों में झुक गई | मुझे पता ही नहीं चला उसने मुझे अपने पैरों में झुकने नहीं दिया बल्कि उसने मुझे बताया कि मुझे कहीं पर भी किसी के सामने कभी भी झुकने की जरूरत नहीं है | मेरी जिंदगी में ऐसा कोई बवाल नहीं हुआ जिसके कारण मैं अपना मुंह छुपा कर जीऊँ, क्योंकि मेरे साथ गलत करने वाले दरिंदों को जीने का हक नहीं है..!
और मुझे अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का पूरा हक है..!
नेता जी के बेटे को मारने के बाद मैं अगर वहां रहती तो नेताजी और उनका परिवार मुझे जिंदा नहीं छोड़ता इसलिए उस मसीहा ने रातों-रात मुझे और मेरी मां को वहां से एक सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया!
मैं तबसे उसी जगह पर रहते हुए अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर रही थी..! कुछ दिनों पहले उस के दोस्त का फोन आया मेरे पास! उन लोगों को मेरी मदद चाहिए थी आप की देखभाल के लिए और मैंने बिना कुछ सोचे हामी भर दी.. !
इस वक्त मेरे कॉलेज की भी छुट्टियां चल रही थी, इसलिए मैं उनका काम अच्छे से कर सकती थी | और इसीलिए ज्यादा कोई सवाल पूछे बिना मैं उन लोगों की सेवा करने के लिए यहां चली आई!
आप विश्वास कीजिए, मेरे नाम से लेकर मेरी जीवन की जो कहानी मैंने आपको बताइ है, उसका एक-एक हर्फ़ सच्चाई में डूबा हुआ है और सच कहूं तो इससे ज्यादा मैं कुछ भी नहीं जानती | मुझे बस यह पता है कि आप रानी है… इसका मतलब आप को रानियों की तरह रखना है!
आपको किसी तरह का कोई कष्ट नहीं होना चाहिए!
इससे ज्यादा उन लोगों ने मुझे आपके बारे में भी कुछ नहीं बताया है..!
मैं इस जगह, इस शहर, इस घर, किसी के बारे में कुछ नहीं जानती ! मुझे मेरे घर से लेने के लिए भी उनका एक आदमी अपनी बड़ी सी गाड़ी लेकर आया था..! और लगभग 12 घंटे का सफर तय कर कर के मैं यहां पहुंची हूँ !
यहां आने से पहले तक मुझे यहां किस काम के लिए बुलाया जा रहा है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी !
इसलिए मैंने आते समय रास्तों पर, गलियों पर कोई खास ध्यान नहीं दिया ! और मेरा ज्यादातर सफर रात के समय कटा, जिसमें मैं सो भी गई थी !
मेरी आंख जब खुली तब मैं इस हवेली के अंदर पहुंच चुकी थीं..
अब आप बताइए, मैं आपको क्या बताऊं? जब मैं खुद कुछ भी अच्छे से नहीं जानती | लेकिन हाँ एक बात कह सकती हूं कि, आप बहुत सुरक्षित जगह पर है | और बहुत सुरक्षित हाथों में है | आपकी सेवा करने का हुकुम मुझे जिस से भी मिल रहा है, वह इस दुनिया का सबसे अच्छा आदमी है | मुझे अगर उसके लिए अपनी जान भी देनी पड़ जाए ना तो मैं हंसते-हंसते अपनी जान दे दूंगी..!
आप खाना खा लीजिए क्योंकि जिस दिन आप खाना नहीं खाते उस दिन इस हवेली में रहने वाला कोई भी इंसान खाना नहीं खाता..!”
बांसुरी ने एक ठंडी सी आह भरी और खाने की प्लेट उठाकर अपनी गोद में रख ली…
” नहीं रानी साहेब आपको गोद में थाली रखने की जरूरत नहीं है..!”
सारिका ने तुरंत एक दूसरी टेबल खींचकर बांसुरी के बेड के सामने ही रख दी और उसकी थाली उठा कर उस टेबल पर रख दी |
एक उचित ऊंचाई में रखी उस टेबल पर की थाली से बांसुरी को खाने में आसानी होने लगी | उसने सारिका को देखकर एक धीमी सी मुस्कान दी और अपनी प्लेट में रखे खाने से खेलने लगी |
लेकिन तभी उसे सारिका की कही बात याद आ गई कि, अगर वह ठीक से खाना नहीं खाती तो इस हवेली में कोई इंसान खाना ही नहीं खाता |
चुपचाप मन मारकर बांसुरी अपने राजा साहब को याद करते हुए खाना खाने लगी !
” सुनो… मुझे इस कमरे से बाहर निकलना है.. कम से कम बाहर की हवा धूप तो देख सकूँ ! मुझे भी मेरे हिस्से ही धूप लेने का हक़ है.. !”
“आप अपनी बालकनी में जितना मन चाहें निकल सकती हैं.. !”
“सारिका, मैं समझ गयी हूँ, कि ये सब मेरे लिए ही किया जा रहा इसलिए मैं भागने की कोशिश नहीं करुँगी.. आसपास कोई मंदिर है तो मैं जाना चाहती हूँ… प्लीज़ !”
सारिका ने ये सब सुन कर चुपचाप अपना सर झुका दिया…
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धुंधली सी सर्द शाम बीत रही थी, अपने कमरे के कांच की खिड़की के दूसरी तरफ खड़ा राजा का कांच के दूसरी तरफ फैली सड़क को देख रहा था…
हल्की हल्की सी बर्फबारी शुरू हो चुकी थी… रास्ते के दोनों और की बत्तियां भी जल चुकी थी… शाम के अंधियारे को वो रोशनी दूर करने की नाकाम से कोशिश कर रही थी और उन पर गिरती हल्की हल्की सी बर्फ शाम को और भी ज्यादा सर्द बनाती जा रही थी…
राजा ने एक नजर वही लेटे हुए अपने पिता पर डाली…
उसे आज तक अपने पिता से ढेर सारी शिकायतें थी.. अपनी मां को एक उचित स्थान ना देने की शिकायत, छोटी मां को हर जगह सबसे आगे रखने की शिकायत, अपने ही बच्चों में भेदभाव करने की शिकायत लेकिन इन सबके बावजूद राजा ने आज तक उनके सामने कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की थी..|
उसने हमेशा अपने पिता को एक उचित सम्मान दिया था | जिसके वह अधिकारी थे या नहीं इस बारे में राजा खुद भली प्रकार नहीं समझ पाता था | लेकिन अपने बचपन से लेकर युवावस्था तक उसने कभी अपने पिता के खिलाफ कहीं कोई आवाज बुलंद नहीं की थी | वह तो बस इस रियासत से, इस राज परिवार से, अलग कहीं और चला जाना चाहता था, अपनी साधारण सी जिंदगी जीने के लिए | लेकिन उसके पिता की जिद ने उसे अपनी मर्जी का कुछ भी कभी करने नहीं दिया..
उनका झुकाव शुरू से ही विराज की तरफ अधिक था, और यह नजर भी आता था | बावजूद उन्होंने राजपाट संभालने के लिए युवराज या राजा में से ही किसी एक को चुनना सही समझा था | और इसके पीछे का कारण भी यही था कि युवराज और राजा ही सही मायनों में उस गद्दी के उत्तराधिकारी थे..|
उसे इसी बात का दुख हमेशा रहा कि उसके पिता ने कभी भी किसी एक बात पर अपने आप को टिकाए क्यों नहीं रखा ? अगर वह विराट से अधिक स्नेह करते थे तो उसे ही पूरे सम्मान के साथ उत्तराधिकारी बना देते फिर किसकी मजाल थी जो उनके सामने उनके लिए इस निर्णय के खिलाफ खड़ा हो पाता ? लेकिन अपने प्रेम को एक तरफ रख कर उन्होंने उस वक्त यही सोचा कि उनके बाद उनकी गद्दी को कौन अच्छे से संभाल सकता है ? लेकिन उनके इस निर्णय ने राजा की तो पूरी जिंदगी बदल दी..
वो अपने बचपन में अपने बचपन को भरपूर जीना चाहता था | वह जो उसे नसीब नहीं हुआ | छोटी उम्र में मां का साथ छोड़ जाना उसे उम्र से पहले ही बडा कर गया | अपने सपनों को मारना उसने उसी दिन सीख लिया था |
युवावस्था में आने के बाद भी कभी भी वह अपनी इच्छा अनुसार ना पढ़ पाया और ना ही जी पाया..!
आज तक बांसुरी से शादी के अलावा उसकी किसी ज़िद को राजमहल नहीं पूरा किया था… बांसुरी से शादी के बाद भी वो बीवी बच्चों के साथ सामान्य जीवन जीना चाहता था… लेकिन वह भी कहां पूरा हो पाया..!
आज उम्र के इस पड़ाव पर अपने पिता को इस तरह मृत्यु शैया पर पड़े देख उसे उन पर तरस आ रहा था…| आदमी कितना भी बलशाली हो, लेकिन अपना वक्त बीत जाने के बाद उससा बेचारा कोई नहीं रह जाता !
आज भले ही उसके पिता दूसरों की मदद के मोहताज हो गए थे लेकिन उन्होंने अपनी सारी जिंदगी अपने हिसाब से जी..!
लेकिन उसने..?
और सिर्फ उसने ही नहीं उससे जुड़े हर एक इंसान ने अपनी जिंदगी में सिर्फ कड़ी परीक्षाएं दी, चाहे बांसुरी हो या शौर्य…|
आज भी बांसुरी से इतनी दूर रहना कितना मुश्किल लग रहा था यह वही समझ सकता था…|
” बांसुरी तुम्हारे बिना जीना ऐसा लगता है जैसे खुद के बिना जी रहा हूं… साँसे तो ले रहा हूं लेकिन जीवन नहीं मिल रहा…|
ऐसा नहीं कि तुमसे दूर होकर जिंदगी में कोई कमी बाकी है, लेकिन अगर तुम ही साथ नहीं तो इन सारी चीजों का भी मैं क्या करूं…|
एक तुम इन सारी कमियों पर पूरी थी… और तुम्हारे बिना यह सब कुछ अधूरा है..|
पता नहीं हमारी जिंदगी की परीक्षाएं कब खत्म होंगी… |
लेकिन आज एक बात का प्रॉमिस करता हूं तुमसे बांसुरी कि, मैं मेरे पिता की तरह अपने बेटे के साथ सख्ती नहीं बरतूंगा ! वह जो करना चाहेगा अपनी जिंदगी में वह सब कुछ कर पाएगा | उसे मेरी तरह कभी भी खोखले नियम कायदों में बंध कर अपना जीवन बर्बाद करने नहीं दूंगा…
वो अपने हिसाब से जिएगा अपने हिसाब से रहेगा जो करना चाहेगा वो सब कुछ करेगा…
शौर्य और बांसुरी की याद आते ही राजा की आंखें मुस्कुराने लगी | उसने अपना फोन निकालकर वक्त देखा और तुरंत बांसुरी को फोन मिला लिया…
बांसुरी उसी वक्त हाथ मुंह धो कर बाथरूम से बाहर आई थी | उसके फोन पर वीडियो कॉल आता देख उसने फोन उठा लिया | दूसरी तरफ राजा था, राजा ने बांसुरी को देखा और बांसुरी ने राजा को…
” क्या कर रही थी..? बिजी थी क्या..?”
” कुछ खास नहीं..! आप महल में रहते नहीं, तो वक्त काटने के लिए इधर-उधर घूमते रहते हैं.. वैसे अब पिता साहब की तबीयत कैसी है..?”
” ठीक है ! पहले से काफी आराम है, लेकिन अब भी उनकी भूलने वाली आदत नहीं गई है..! अल्ज़ाइमर बहुत ज्यादा बढ़ गया है उनका |
इसके साथ ही लंग्स का जो ऑपरेशन होना था, उसे भी डॉक्टर ने थोड़ा और पीछे सरका दिया है..!”
” आप भी अपना ध्यान रखिएगा ! आप अकेले से पड़ गए हैं वहां पर !
ऐसे ही सुबह बात हुई थी, रूपा भाभी कह रही थी कि युवराज भाई साहब भी आपके पास आने की तैयारी कर रहे हैं !”
” अरे क्यों आ रहे हैं ? मैंने उन्हें पहले ही मना किया था कि मैं यहां डैड का ख्याल रखने के लिए हूं ! वहां महल में भी तो तुम सब को उनकी जरूरत है..!’
” यहां हम सबका ध्यान रखने के लिए बहुत सारे लोग हैं, लेकिन आप वहां पर बिल्कुल ही अकेले पड़ गए हैं | दो-चार नौकरों के साथ रहने से यह नहीं हो जाता कि आपके साथ बहुत सारे लोग हैं | आपको भी तो भावनात्मक संबल की जरूरत है..! हमारी ऐसी हालत नहीं होती तो हम ही आपके पास आ गए होते..!”
राजा मुस्कुराकर नीचे देखने लगा…
उसने पलकें उठाई और बांसुरी को देखा और उसके ठीक पीछे पलंग पर बैठ कर अपने में मगन कुछ खेलते शौर्य पर राजा की नजर पड़ गई…
” जरा शौर्य की तरफ स्क्रीन करना..!”
” जी अभी कर देते हैं..!”
बांसुरी ने शौर्य के सामने स्क्रीन कर दी और खुद भी उसके साथ बैठी मुस्कुराने लगी.. शौर्य को बांसुरी ने प्यार से अपनी बाहों में संभाल रखा था और शौर्य बांसुरी के कंधे से टिक कर सामने स्क्रीन पर अपने पिता को देख कर चहक उठा..
” हे डैड ! हाउ आर यू ?”
अपने सामने मुस्कुराते चेहरे को देखकर राजा के चेहरे पर भी लंबी सी मुस्कान छा गई..
राजा का ही तो बचपन का प्रतिबिम्ब था शौर्य ! वही माथा, वही गहरी आंखें, वही नाक यहाँ तक की मुस्कुराने पर उसके होंठ भी वैसे ही एक तरफ को उठ जाते जैसे राजा के…
कितना ज्यादा मिलता था शौर्य का चेहरा राजा से !
” हेलो चैंपियन..? मैं ठीक हूँ, कैसा है मेरा बेटा?”
” जस्ट लाइक यू..!”
” और होना भी चाहिए आखिर बेटा किसका है..!”
राजा ने मुस्कुराकर शौर्य की बात का जवाब दिया और पास बैठी बांसुरी की तरफ देखने लगा..
” इसे हिंदी भी बोलना सिखाओ..! रियासत के स्कूल में सिर्फ इंग्लिश सिखाई जा रही है क्या ..?”
बांसुरी ने मुस्कुराकर ना में गर्दन हिला दी.. …
” जी रूपा भाभी साहब की अप्वॉइंट की हुई एंगलो इंडियन ट्यूटर का कमाल है..
स्कूल के बाद रोज शाम 1 घंटे वह सारे बच्चों को एक साथ जमा करके बातचीत करना, खाना-पीना इन सब के सलीके सिखाया करती है | और सच कहें तो हमे यह सब बहुत बोरिंग लगता है | लेकिन रूपा भाभी साहब की बात हम काट नहीं सकते, इसलिए कुछ कहा नहीं और फिर यहाँ के सारे बच्चे सीख रहे हैं तो शौर्य को भी भेजना जरूरी है | वैसे हमारा बस चलता तो हम तो इस नन्ही सी जान को इतनी सारी पचड़े में फंसने ही नहीं देते, लेकिन रूपा भाभी साहब के सामने हमारी एक नहीं चलती | वह कमरे में आकर हाथ पकड़कर शौर्य को अपने साथ ले जाती हैं..!”
” जानता हूं.. ! जब से ये पैदा हुआ है, रूपा भाभी सा का इससे कुछ ज्यादा ही मोह है.. !
और शायद तुम्हें याद भी होगा, हर्षवर्धन के बाद जब वह दोबारा मां बनने वाली थी तब तीसरे महीने में उनका अबॉर्शन हो गया था और उनके अबॉर्शन के कुछ समय बाद ही तुम्हारी खुशखबरी सुनने में आई थी | तभी उनकी किसी खास नौकरानी ने उनसे कह दिया था कि जो बच्चा आपके पेट में खराब हुआ है वही बांसुरी रानी सा के पेट से पुनरजन्म लेने वाला है| बस यह मजाक में कही बात उनके दिमाग में बैठ गई सी लगती है..!
पर कोई बात नहीं इससे कोई नुकसान थोड़ी ना है | वह हमारे शौर्य को थोड़ा ज्यादा ही प्यार कर लेती हैं | और सच कहूं तो उनके सानिध्य में जब हमारा शौर्य रहता है तो मैं भी थोड़ा निश्चिंत हो जाता हूं ! क्योंकि मुझे पता है वह कभी इसे बिगड़ने नहीं देंगी..!”
” यह बात तो आप सही कह रहे हैं, साहेब क्योंकि जब कभी यह रूपा भाभी साहब के साथ रहता है तो, बहुत खुश रहता है | और हम भी इसे उनके पास छोड़ कर आराम से घूम फिर पाते हैं..!”
” कहां घूम रही हैं आप आजकल..?
” कहीं नहीं बस यूं ही..! नौकरी करने की इतनी आदत हो गई थी कि सरकारी दफ्तरों की खुशबू में मन बसने लगा था..
अब उसके बाद सारा वक्त महल में पड़े पड़े चारपाई तोड़ना अच्छा नहीं लगता.. ऐसा लगता है कोई तो काम का काम करें | लेकिन इस महल में किसी काम के काम की जगह ही नहीं है..!”
” बहुत फ़्रस्टेट हो रही हो महल में रहते हुए तुम..?”
” अरे नहीं ऐसी भी कोई बात नहीं है… यह शौर्य है ना इसके साथ मन लगा रहता है…|”
” तबीयत कैसी है तुम्हारी..? चलने फिरने में थोड़ा सम्भला करो..?
” आप कब आएंगे वापस? अगर दो-तीन महीने लगाकर वापस आते हैं, तब तो यह बच्चा पैदा भी हो चुका होगा..!’
बांसुरी खिलखिला कर हंस पड़ी और उसकी हंसी सुन राजा के चेहरे पर भी राहत वाली हंसी चली आई…
” चलो अब मैं फोन रखता हूं अपना और शौर्य का ख्याल रखना..!”
हां में सर हिला कर बांसुरी ने फोन कट कर दिया….
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पिया अस्पताल में बैठी अपना काम कर रही थीं कि उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई… उसने बिना आंखें उठाये ही अंदर आने की इजाज़त दें दी…
” हेलो मैडम !!लगता है बहुत ही बिजी हो..?”
पिया के ठीक सामने मुस्कुराते हुए पंखुड़ी खड़ी थी..
पिया ने उसे देखा और बैठने का इशारा कर दिया..
” नहीं ऐसा कुछ खास नहीं..! तू सुना कैसी है ?बड़े दिनों बाद तुझे मेरी याद आई !”
” हां तेरे लिए एक सरप्राइज था मेरे पास..!”
” क्या? ऐसा क्या हैं ?
पिया की आंखें चमकने लगी और पंखुड़ी ने अपने पर्स से एक सफेद एनवेलप निकालकर पिया की तरफ बढ़ा दिया…
” खोल कर देख..!”
पिया ने आश्चर्य से उस पेपर को खोला और पढ़ने लगी और जैसे-जैसे पिया आगे बढ़ती गई उसकी आंखें आश्चर्य से चौड़ी होती गई | उसने पूरा पेपर पढ़ने के बाद पंखुड़ी की तरफ देखा और विस्मय से वापस पेपर की तरफ देखने लगी…
” लेकिन यह सब तूने किया कब..?”
” बस कर लिया ! लेकिन माफी चाहती हूं कि तुम से बिना पूछे किया !
मेरी अब तक शादी नहीं हुई, इसलिए रिश्तो की उलझन को कैसे संभाला जा सकता है मैं ठीक से नहीं जानती | लेकिन जब जब तुझे परेशान देखती थी, ना तो दिल से यही आवाज उठती थी कि काश किसी तरह मैं तेरी मदद कर सकूं | और इसलिए मैंने सोचा कि अगर तू तैयार नहीं है तो क्या हुआ शोवन और समर का डीएनए टेस्ट मैं तो करवा ही सकती हूं | इस बात के लिए समर की रजामंदी मैंने ले ली थी |और शोवन जब अस्पताल में भर्ती हुआ, उस समय उसके इलाज के दौरान मुझे मौका मिल गया कि मैं उसके ब्लड सैंपल से उसका और समर का डीएनए मैच करवा कर देख लूँ ! मुझे पता नहीं क्यों अंदर ही अंदर इस बात पर पूरा यकीन था कि शोवन समर का बायो लॉजिकल बेटा नहीं है | लेकिन फिर भी मैं अपने शब्दों से तुझे यह नहीं समझा पा रही थी और मैं जानती थी कि समर के अलावा और कोई भी तुझे इस बात को नहीं समझा पाएगा | लेकिन बहुत बार पति पत्नी के रिश्ते की नाजुक डोर सिर्फ बातों के कारण ही उलझ कर टूट भी जाती है..!
मैं जानती हूं कि समर बहुत काबिल इंसान है | अपनी प्रोफेशनल लाइफ में वह बहुत सक्सेसफुल है, लेकिन पति के तौर पर वह कैसा है यह मैं नहीं जानती थी | और इसीलिए मुझे तेरी मदद करने का यही एक आसान तरीका नजर आया |
मुझे लगा अगर तुझे बता दूंगी तो तुझे उम्मीद हो जाएगी और कहीं तेरी उम्मीद टूट गई तब उस सुरत मे तेरा बिखरना तय था, बस इसीलिए तुझे बिना बताये ही ये सब करवा लिया और आज मैं बहुत खुश हूं कि मैंने यह टेस्ट करवा लिया | अब तेरे सामने यह सबूत है कि शोवन समर का बेटा नहीं है..!”
” सच कहूं तो इसकी जरूरत नहीं थी..! लेकिन हां एक बात यह भी है कि आज भले ही मैंने समर की बातों को मान लिया था लेकिन हो सकता है जिंदगी के किसी मोड़ पर शायद मैं वापस उसके लिए सोचने लगती…
लेकिन आज सब कुछ साफ़ हो गया…
वैसे एक बात बता.. मेरी झल्ली सी सहेली कब से इतनी समझदार हो गई….? इतनी गंभीरता, इतनी समझदारी तुझ में अचानक आई कैसे..?”
” बस ऐसे ही हैं हम..?”
” वरना हर वक्त अपने दिमाग में खाने को लेकर घूमने वाली मेरी प्यारी सी सहेली इतनी दूर तक सोचने लगी कि कहीं मेरा शादीशुदा रिश्ता खराब ना हो जाए ! इसके लिए अपने स्तर पर जाकर इतना सारा प्रयास भी कर लिया…? वैसे अब दिख रहा है कि मैडम जी शादी के लिए बिल्कुल तैयार हो गई है….!”
पंखुड़ी ने एक हल्की सी मुस्कान दी और अपना फोन लेकर वहां से उठने लगी कि पिया ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया…
“कहाँ निकल रही है.. चल साथ में कॉफ़ी पीते हैं.. !”
“नहीं यार आज घर जल्दी जाना है..!”
” क्यों ऐसा क्या हो गया?”
” अब तुझसे क्या छुपाऊं..? मम्मी के भेजे रिश्तो को नापसंद करते करते अब मैं भी थक गई हूं ! और मम्मी भी..! अब यार किसी से तो शादी करनी है ना इसलिए इस बार मैंने बिना देखे ही हां बोल दिया है..!
वह बंदा आज अपनी मम्मी के साथ मेरे फ्लैट पर आ रहा है, इसीलिए मम्मी भी कल रात से ही मेरे पास आ गई है..!”
” ओके !! तो यह बात है..! मैडम जी को देखने आज लड़का आने वाला है..?”
“हम्म !”
” ओये और तेरे उस बंदे का क्या हुआ..? वह जो तुझे एक किसी डेटिंग ऐप में मिला था..?”
” यार उस से चैट हो रही थी लेकिन जब भी हमारा मिलने का डिसाइड हुआ हम मिल ही नहीं पाए | कभी वह बिजी रहता था, कभी मैं | और फाइनली मुझे लगा कि शायद वो शादी में इंटरेस्टेड नहीं है..!”
“यह भी तो हो सकता है कि वह सच में बिजी हो..! वैसे उसके और तेरे विचार, खयालात काफी कुछ मिलते-जुलते थे.. है ना !”
” हां कुछ बातें मिलती थी तो कुछ नहीं मिलती थी | लेकिन उसके साथ कंपैटिबिलिटी मुझे सही लग रही थी | लेकिन आगे कुछ बढ़ नहीं पाया.. इसीलिए तो अब मुझे समझ में आ गया कि भगवान जी ने मुझे श्राप दे रखा है की, पंखुड़ी चाहे तू कितना भी फड़फड़ा ले तेरी शादी तेरी मां की मर्जी से ही होगी |
बस इसीलिए हाथ जोड़कर भगवान के सामने मैंने भी इस बात को स्वीकार कर लिया कि आप मुझे मम्मी की ही मर्ज़ी से चलाना चाहते तो यही ठीक है…
मैं अब मम्मी की पसंद से शादी करूंगी..!”
” वैसे मुझे लगा था कि, कलेक्टर साहब से तेरी बात कुछ जम रही है..!”
” अरे कहां यार ? उसका तो मुझे कुछ समझ में नहीं आता था.. ! इतनी बार मुलाकात हुई, इतनी सारी बातें हुई, लेकिन मजाल है बंदा कभी तो कुछ कह दे !
कभी तो मेरी किसी बात की तारीफ कर दे | उसकी किसी बात से लगा ही नहीं कि, उसे मुझ में जीरो परसेंट भी इंटरेस्ट होगा ! तो बस इसीलिए बात बढ़ते बढ़ते रह गई..!
मुझे बंदा पसंद था, लेकिन मैं खुद से होकर कैसे प्रपोज करूं यार ? इसलिए सोचा जाने दो हमारी किस्मत में नहीं है कलेक्टर वलेक्टर..!”
” कोई नहीं… जो तेरी किस्मत में होगा वह कहीं नहीं जाएगा और जो किस्मत में नहीं होगा वह आकर भी चला जाएगा | इसलिए धैर्य रख!
चल मैं भी तेरे साथ चलती हूं तुझे रेडी होने में हेल्प कर दूंगी..!”
” क्या बात है मैडम पिया… आज आपको मेरी हेल्प करने कि कैसे सूझी… !”
” भाई तुम्हारे एहसान भी तो बहुत है मुझ पर | मेरी सगाई वाले दिन घूम घूम कर इतनी सारी शॉपिंग करवा दी मुझे |
मेरा ब्राइडल करवा दिया |सब कुछ तो करवाया यार तूने और क्या मैं तेरे लिए इतना सा काम नहीं कर सकती..?
चल अब फटाफट घर चलते हैं ! मैं तुझे रेडी करने में मदद करती हूँ… !
दोनों सहेलियां अपना-अपना बैग उठाए अस्पताल से बाहर निकल गई…
लेकिन बातों ही बातों में पिया उस डीएनए टेस्ट वाले पेपर को अपने पास रखना भूल गई और वह वही उसकी टेबल पर पड़ा रह गया…
क्रमशः
aparna…..
