जीवनसाथी 2/53


जीवनसाथी -2 – भाग 53


     समर को मुड़कर जाते देख भारी मन से पिया भी उसके पीछे पीछे आगे बढ़ गई…
समर पिया और अपने बीच की सारी गलतफहमी दूर कर देना चाहता था बावजूद उसे इस वक्त समझ ही नहीं आ रहा था कि वह पिया को किस ढंग से अपनी बात समझाएं, और इसीलिए वह चाहता था कि रेवन खुद अपने शब्दों में सारी सच्चाई पिया के सामने बयां कर दे…
   लेकिन इत्तेफाक से एक के बाद एक ऐसी घटनाएं घटती जा रही थी कि, उसकी और पिया के बीच गलतफहमियां दूर होने की जगह बढ़ती ही जा रही थी…
      रेवन जिस वक्त हिंदुस्तान में थी और समर के साथ थी, उस वक्त भी रेवन समर के लिए क्या सोचती थी इस बात से समर अनजान नहीं था…

लेकिन समर के मन में रेवन के लिए दोस्ती के अलावा और कोई भावना नहीं थी और बस इसीलिए उसने अपनी तरफ से कभी कोई बात आगे नहीं बढ़ने दी…
और शायद उसकी तटस्थता को भांप कर ही रेवन ने  कभी अपने दिल की सच्चाई उसके सामने आने भी नहीं दी थी…

लेकिन आज अपने आखिरी समय में अपनी चंद सांसों को गिनती हुई रेवन जब अपने ह्रदय की भावुकता का वर्णन कर रही थी उस वक्त समर के जी मैं आ रहा था कि वह किसी तरीके से रेवन को मरने से  रोक ले…
  
      इंसान स्वभाव से ऐसा ही होता है जब उसे यह मालूम चलता है कि सामने वाला इंसान टूट कर उसे प्यार करता है तो एक स्वाभाविक थी सद्भावना उस व्यक्ति के प्रति जुड़ ही जाती है..

वैसा ही कुछ समर के साथ भी हो रहा था रेवन के लिए उसके मन में जो सहानुभूति प्रकट हो रही थी उसके पीछे एक कारण रेवन की बीमारी थी तो दूसरा कारण रेवन के मन की भावुकता भी थी…

और ऐसे समय में जब वह अपने मन की उलझन में बुरी तरह से उलझा हुआ था पिया उसकी परेशानियों को समझने की जगह उस पर एक के बाद एक लांछन लगा रही थी!
     हालांकि समर खुद इस बात को समझ रहा था कि इसके पीछे  सारी गलती पिया की भी नहीं थी बावजूद परिस्थितियां ही ऐसी बन गई थी कि दोनों ही अपनी-अपनी जगह लाचार से हो गए थे..

अपने ख्यालों में उलझे समर ने अपनी चाल तेज कर दी और लगभग भागता हुआ सा रेवन के कमरे में प्रवेश कर गया..

उसके पीछे ही पिया भी उस कमरे में दाखिल हो गई.. समर भागकर रेवन के सिरहाने पहुंच गया रेवन की सांसें तेजी से चल रही थी…
    नर्स लगातार रेवन की देखभाल कर रही थी, उसे मॉनिटर करते हुए उसके लिए जरूरी इंजेक्शन तैयार कर रही थी, लेकिन रेवन को अब जैसे इन सारी चीजों की कोई जरूरत नहीं थी…

समर के उस कमरे में आते ही रेवन के चेहरे पर वापस राहत वाले भाग चले आए…
     उसने धीरे से अपना हाथ उठाने की कोशिश की लेकिन अब उसमें इतनी हिम्मत भी बाकी नहीं रह गई थी कि, वह अपना हाथ क्या एक उंगली तक हिला सके..!
     समर वापस भागकर उसके पास पहुंच गया और उसके हथेली अपने हाथ में लेकर वही एक किनारे बैठ गया !
     पिया ने उन दोनों की हथेलियों को एक दूसरे में गुंथा देखा और वापस उसकी आंखों से एक बूंद आंसू टपक पड़ा…
रेवन ने बड़ी मुश्किल से अपनी पलकें पिया की तरफ घुमाई और उसे आंखों के इशारे से ही अपने पास बुला लिया…

पिया का एक दिल रेवन पर पसीजता जा रहा था…
      आखिर वह एक डॉक्टर थी और मौत की आहट महसूस कर सकती थी.. उसे समझ में आ गया था कि रेवन का आखरी पल आ चुका है!  उसे इस वक्त रेवन पर तरस आ रहा था… 
   उसकी आंख का इशारा समझ कर वह रेवन की तरफ बढ़ने को थी कि तभी उसके अंदर की पत्नी  का स्वाभिमान जाग गया और वह अकड़ कर अपनी जगह खड़ी रह गई..
        एक बार फिर रेवन ने उसे अपने पास आने का इशारा किया और इस बार उसके इशारे को समझकर समर ने जलती हुई आंखों से पिया की तरफ घूर कर देखा…

” वह तुम्हें अपने पास बुला रही है |  अब उसमें इतनी ताकत नहीं बची है कि वह जोर से चिल्लाकर जहां तुम खड़ी हो वहां तक अपनी बात पहुंचा सके…|”

समर की जहर बुझी आवाज पिया के कानों में सीसा पिघला गई…
   समर को एक नजर घूर कर पिया धीमे कदमों से रेवन के पास चली गई….

रेवन ने समर से निगाहें हटाकर पूरी तरह से अपनी नजर पिया पर केंद्रित कर ली..
   उसके चेहरे के भाव बदलने लगे | उसके चेहरे पर आभार प्रदर्शित करने वाले भाव देखकर पिया भी पसीजने लगी…..

” मेरे बच्चे को अपनाने के लिए,  उसे अपना नाम देने के लिए थैंक यू !!”

  रेवन की लरजती सी आवाज सुनकर पिया का रहा सहा धैर्य भी चूक गया.. वह उसका हाथ पकड़ कर उसके पास बैठ गई….

” चिंता मत करो… मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं, तुम्हारे बच्चे की अच्छी देखभाल करूंगी..! और…. !”
पिया अभी और कुछ कहने वाली थी कि  रेवन की सांसे जोर-जोर से चलने लगी कुछ देर बाद ही उसकी सांसे बिल्कुल उखड़ने सी लगी…
    नर्स ने घबरा कर डॉक्टर को आवाज़ लगाने के लिए वहाँ से बाहर की तरफ दौड़ लगा दी…

   नर्स के वहाँ से बाहर निकलते ही समर रेवन को सँभालने की कोशिश में लगा गया.. लेकिन तब तक रेवन ने आँखे पलट दी…

   पिया का डॉक्टरी दिमाग तेज़ी से काम करने लगा… और वो रेवन की हालत देख कर समझ गयी की रेवन वेंट्रिकुलर फेलियर में जा रही है… वो तुरंत अपनी जगह से उठी और उसने रेवन को सीपीआर देना शुरू कर दिया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी…

    पिया ने रेवन की आँखो की प्यूपिल जांची और एक गहरी सी साँस छोड़ कर समर की तऱफ़ देख ना में गर्दन हिला दी…

   समर ने पीड़ा से अपनी आँखे मूंद ली…

आज तक उसके आसपास बहुत से ऐसे लोग थे जो उस से टूट कर प्यार किया करते थे |  उसके माता पिता, उसके रिश्तेदार, उसके दोस्त, स्वयं राजा अजातशत्रु, प्रेम इनके साथ ही उसकी प्राणप्रिया पत्नी पिया… 

           लेकिन आज इस विदेशिनी ने उसे प्यार के कुछ अलग ही मायने  समझा दिये थे……. ..

       अपने छोटे से जीवन में आखिर आज तक रेवन को मिला ही क्या था… उसने प्यार भी किया तो उस इंसान से जिसने उसे दोस्त से अधिक कुछ समझा ही नहीं..!

      रेवन का उसके प्रति निस्वार्थ प्रेम उसके मन को द्रवित कर गया…

समऱ चुपचाप बैठा रेवन के पार्थिव शरीर को देख रहा था और पिया एक तरफ दीवार से सटकर सन्न खड़ी रह गई थी..
   उसी वक्त दरवाजे को धकेल कर डॉक्टर अंदर चला आया…

   डॉक्टर ने आते ही रेवन की आंखें एक बार फिर से जांच करने के बाद उसकी पल्स चेक की और समर के कंधों पर हाथ रख दिया…-”  शी इज़ नो मोर !”

डॉक्टर के पीछे आई नर्स ने वहां रखी फाइल उठाकर मौत का समय और तारीख दर्ज़ करनी शुरू कर दी….
   
    इन सबसे अलग दरवाजे पर एक पांच साल का मासूम नन्हा सा लड़का खड़ा आंखें फाड़े वहां मौजूद लोगों को देख रहा था…..

     रुई के सफेद गोले सा गोलगुथना अंग्रेज बालक अपनी ब्रिटिश तर्ज पर पहली बार अपने पिता से मिलने आ रहा था इसलिए पूरी तरह से सूट-बूट और जूतों से लैस होकर आया था लेकिन वह  बच्चा नहीं जानता था कि आज वह भले ही अपने पिता से पहली बार मिलने वाला था लेकिन अपनी मां को वह हमेशा हमेशा के लिए खो चुका था…

सबसे पहले पिया की ही नजर दरवाजे पर खड़े उस बच्चे पर पड़ी…
    उसी वक्त अपनी गहरी नीली आंखों को झपकते हुए उस बच्चे ने भी पिया को देखा…
और पिया के अंदर की औरत बिना मां के उस बच्चे को देखकर पिघल गई   ….

वह धीरे से अपने आप को संजो कर उसकी तरफ कदम बढ़ाने को थी कि उसी वक्त डॉक्टर ने  दुखी और उदास बैठे समर के कंधे पर हाथ रखकर उसे दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया…

मुड़कर दरवाजे की ओर देखते ही समर उस बच्चे को देखकर अपनी जगह से खड़ा हो गया और जब तक पिया उस बच्चे तक बढ़ पाती, उसके पहले ही समर ने आगे बढ़कर इस बच्चे को अपने सीने से लगा लिया…

पिया जहां खड़ी थी वही स्तब्ध खड़ी रह गई…..

उसके सामने एक बाप अपने बेटे को पहली बार देख रहा था ! उससे पहली बार मिल रहा था ! लेकिन कैसा आश्चर्य था कि समर का बेटा होने के बावजूद उस लड़के का रूप रंग दूर-दूर तक समऱ से बिल्कुल भी नहीं मिल रहा था !
    शायद पूरी तरह से अपनी अंग्रेजन मां पर गया था बच्चा…

एक गहरी सी सांस लेकर पिया ने एक बार मुड़ कर रेवन को देखा और अपने हिंदुस्तानी संस्कारों के कारण उसकी पार्थिव देह की तरफ देख कर हाथ जोड़ दिए…..

    उस कमरे का वातावरण, वहां की हवा भारी सी होने लगी थी और इसके साथ ही सबके मन भी भारी होने लगे थे…
    डॉक्टर ने समर के पास जाकर उसके हाथ में बच्चे का हाथ सौंप दिया…

“हमें जल्द से जल्द बॉडी का फ्यूनरल करना होगा.. आप अगर अपने कोई रिचुअल्स करना चाहें तो कर लीजिये… !”

समर ने ना में सर हिला दिया.. -” रेवन यहीं की है और आप लोग जो सही समझे वो कर दीजिये.. !  मेरे ख्याल से इतने छोटे बच्चे के सामने कुछ भी करना सही नहीं होगा ! इसलिए हम लोग इसे लेकर यहां से निकल जाते हैं ! आप लोग फ्यूनरल कर लीजिये ..!”

समर ने अपने मन की बात कही ही थी कि, पिया वहाँ पहुँच गयी…

” हाँ डॉक्टर ! एक छोटी सी रस्म करनी होगी.. !”

समर आश्चर्य से पिया की तरफ देखने लगा… पिया ने बिना समर की तरफ देखें ही अपने पर्स में हाथ डाला और सिंदूर की स्टिक निकाल कर समर की तरफ बढ़ा दी……

  ” मुझे नहीं पता आप दोनों किस तरह के रिश्ते में बंधे  थे.. ? लेकिन अगर आप दोनों का एक बच्चा है तो, मेरे हिसाब से उन्हें जाते-जाते आपके नाम का सिंदूर अपने माथे पर लगाने का हक भी बनता है..! “

” लेकिन पिया यह ठीक नहीं है !  रेवन हमारे भारत की नहीं है! उसके संस्कार, उसका धर्म, कुछ भी मेरे जैसा नहीं है ! इसलिए यह सब करने की मुझे कोई जरूरत नहीं लगती..!”

” जरूरत है..! आप दोनों के बीच जो भी रिश्ता रहा हो मेरे हिसाब से तो आप रेवन के बच्चे के बाप है…
   एक औरत और आदमी का इससे बढ़कर करीबी रिश्ता और कुछ नहीं हो सकता कि उनके रिश्ते से उनका एक बच्चा भी हो जाये…
    इसलिए मेरे कहने पर ना सही, लेकिन उस बच्चे के लिए उसकी मां की मांग में सिंदूर डाल दीजिए…!”

सुबह से सारा माहौल ऐसा बन गया था कि अब समर को थकान सी लगने लगी थी उसके सिर में दर्द हो रहा था…
    ऐसा नहीं था कि उसने आज तक किसी की मौत नहीं देखी थी…
    लेकिन इतने करीब से एक ऐसी लड़की को अपनी आखिरी सांसें लेते हुए देखना जिसने अपनी सारी जिंदगी उसके नाम कर दी, समर के लिए बहुत कठिन हो रहा था…. !
       वह जोर-जोर से चिल्ला कर रोना चाहता था… अपने अंदर के सारे दर्द को बहा देना चाहता था ! लेकिन इस वक्त उसका रोना ना तो पिया को सहन होता और ना उस बच्चे को..!

    समर सिर्फ रेवन से जुड़ी  सहानुभूति के कारण अपने अंदर इतनी पीड़ा और कष्ट महसूस कर रहा था लेकिन उसके बहते आंसू पिया के मन में बैठी शक की दीवार को और भी पुख्ता कर जाते और बस इसीलिए अपने आंसुओं को अपने अंदर दबाए समर का सर अब दर्द से फटने लगा था….

” मैं वापस होटल जाना चाहता हूं.. तुम्हें जो करना है तुम कर लो..!”

” एक बार अपने बच्चे की मासूम सूरत देख लीजिए… क्या इसके बाद भी आप उसकी मां को उसके सिंदूर का हक नहीं देंगे..!”

समर के लिए उस वक्त पिया को मनाना बेहद मुश्किल था !
          वो जिस परिस्थिति में फंसा था, डॉक्टर नर्स और बाकी सारे स्टाफ के सामने वह किसी भी तरह का सीन क्रिएट नहीं करना चाहता था | अगर वह यहां पिया को अपने और रेवन की रिश्ते की सच्चाई बताना शुरू कर देता तो फिर रेवन के बच्चे को अपने साथ ले जाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो जाता, और इसीलिए ना चाहते हुए भी उसने पिया के हाथ से ली  सिंदूर की स्टिक को खोलकर रेवन के माथे पर एक सीधी रेखा सी खींच दी….

ऐसा करते हुए पल भर को उसके हाथ कांप कर रह गए…
    क्योंकि वह जानता था कि यह सच्चाई नहीं है ! लेकिन पिया मानने को तैयार नहीं थी….!

उसने सिंदूर  पिया को वापस करने के लिए उसकी तरफ बढ़ाया और पिया ने उस स्टिक को लेकर रेवन की हथेली खोलकर उसमें रख दिया….

एक बार फिर रेवन की तरफ देखकर पिया ने अपने दोनों हाथ जोड़े और अपना पर्स समेटकर उस कमरे से बाहर निकल गई….

डॉक्टर ने समर को अगले दिन शाम के वक्त वापस उसी हॉस्पिटल में बुला लिया..
    क्योंकि रेवन के बच्चे के सारे कागजात तैयार करने में डॉक्टर को इतना समय लगना ही था…

डॉक्टर ने उसी वक्त वहां रेवन का डेथ सर्टिफिकेट तैयार करके समर के हाथ में रखा और रेवन का चेहरा एक बार फिर समर को दिखाने के बाद उसकी बॉडी को वहां से बाहर ले गए….

भारी और थके कदमों से समर उस बच्चे का हाथ पकड़े वहां से बाहर निकल गया…..

वह बच्चा चुपचाप डॉक्टर की नसीहत मानकर समर के साथ चला जा रहा था…

शायद रेवन की जिस दिन से तबीयत बिगड़नी  शुरू हुई थी…
   उस दिन से उसने अपने बच्चे को समझाना सिखाना शुरू कर दिया था और इसीलिए सिर्फ 5 साल की उम्र में भी शोवन बहुत ही ज्यादा समझदार और सुलझा हुआ था….

समर की टैक्सी बाहर ही खड़ी थी….

पिया पहले ही जाकर टैक्सी की पिछली सीट में बैठ चुकी थी ! समर जब टैक्सी के पास पहुंचा तब उसने बच्चे के लिए पिछली सीट का दरवाजा खोला और खुद आगे जाकर बैठ गया…

उस बच्चे के पिछली सीट में आकर बैठते ही पिया ने एक नजर उस बच्चे को देखा और गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई…
समर जिस तरफ बैठा था, उधर पहुंचकर पिया ने समर के कांच पर दस्तक दी और समऱ ने कांच नीचे उतरवा दिया…-” क्या हुआ?”

समर का सवाल सुनकर पिया ने एक नजर पीछे उस बच्चे की तरफ देखा और समर की तरफ बिना देखे ही अपना रुखा सा जवाब दे दिया…

” अपने बच्चे के साथ तुम पीछे बैठो,  मैं उसके साथ नहीं बैठूंगी..!”

अब तक रेवन के माथे पर सिंदूर लगवाती, उस बच्चे की तरफ भावुकता से देखती पिया को अचानक यह क्या हो गया, सोचते हुए समर ने धीरे से दरवाजा खोला और पीछे की सीट पर जाकर बैठ गया…

गुस्से में उबलती पिया सामने की सीट पर बैठ गई…. उसने आंख मूंदकर सीट के पिछले हिस्से से अपना सिर टिका लिया..

     वह खुद भी कहां समझ पा रही थी कि, उस पर क्या बीत रही है.. ? अंदर रेवन के पार्थिव शरीर को देख देखकर वो जिस भावुकता में डूबी जा रही थी, वही भावुकता अभी कुछ पलों के लिए एकदम से बदलकर उसे पत्थर बना गई….

असल में पिया के साथ यह हो रहा था कि जब जब वह रेवन को या उस बच्चे को अकेले देखा करती, तब वह पूरी तरह से उन दोनों के साथ एक सहानुभूति  सी महसूस करने लगती थी…
       लेकिन जैसे ही समर को रेवन या उस बच्चे के साथ देखती, उसके अंदर की औरत की जलन उसकी भावुकता पर हावी होने लगती ! और उस वक्त वह सिर्फ एक औरत नहीं एक पत्नी एक प्रेमिका बन जाती…

और इसीलिए अभी भी उस बच्चे के ऊपर ढेर सारी सहानुभूति होने के बावजूद जब उसने समर के हाथों में बच्चे का हाथ देखा तो उसकी जलन, उसकी मानसिक भावनाओं पर हावी हो गई और गुस्से में अपनी सीट से उतर कर वो सामने बैठने के लिए चली गई…

अपने गुस्से को पार लगाने के लिए अब उसे बार-बार समर को जली कटी सुनाने में ही सुकून मिल रहा था…
          लेकिन यह सुकून भी उसे ठंडक देने की जगह अंदर ही अंदर जला कर राख कर रहा था…

अपने ही विचारों से परेशान होने लगी थी पिया ! उसे लगने लगा था कि क्या जिंदगी ऐसी ही चलने वाली है…?

  लेकिन अभी की परेशानियों से जूझती पिया के दिमाग से जाने कैसे यह बात निकल गई थी कि रात कितनी भी गहरी अंधकार से भरी हो, सूरज को दबा या छुपा नहीं पाती..
     और अपना वक्त आने पर सूरज अपनी किरणों को बिखेरते हुए संसार में उजाला कर ही देता है….!

पिया को मालूम नहीं था कि आज जिस बच्चे से जलन के कारण वह अपने पति के लिए मन ही मन कुंठा द्वेष और वैराग्य से भरने लगी थी वही बच्चा एक  दिन उसकी जान बन जाने वाला था….

एक गहरी सी  सांस छोड़कर समर ने  टैक्सी वाले को वापस होटल की तरफ ले चलने की आज्ञा दी और खुद भी सीट के पिछले हिस्से से टिक कर आंखें मूंद कर बैठ गया…

उसके ठीक बगल में बैठा शोवन  चुपचाप अपनी नीली आंखों से टुकुर-टुकुर बाहर की दुनिया को गाड़ी की खिड़की से देख रहा था…..

उसे मालूम भी नहीं था कि उसकी पिछली जिंदगी यही छूटती जा रही थी और और साथ ही छूट जाने वाला था उसका अपना देश उसकी मां और उसके लोग..!

*****

वासुकी अपनी गाड़ी भगाते हुए माइंस की तरफ बढ़ता जा रहा था और इसके साथ ही वह फोन पर दर्श से बातों में भी लगा हुआ था ! उसे बांसुरी की सुरक्षा की बेहद चिंता सता रही थी…

    दर्श बांसुरी के पीछे था इसलिए दर्श को वह नेहा को जगाने के लिए नहीं भेज सकता था ! इसलिए उसने काका को फोन लगाया और उन्हें तुरंत नेहा के पास पहुंच कर तैयार होने कह दिया…

” काका आप तुरंत नेहा के फ्लैट पर पहुंचे और उसे उठाकर उसे ठीक से समझा दीजिए उसका काम 2 दिन बाद नहीं आज बल्कि अभी से ही शुरू हो जाएगा..!”

” ठीक है अनिऱ.. मैं निकलता हूं और जाते-जाते घर के दरवाजे पर डाले ताले की चाबी वहीं छोड़ दूंगा..!”

” काका अभी इतना वक्त नहीं है कि आप घर पर ताला डालते फिरे..! आप…  आप.. जैसे बैठे हैं वैसे ही उठिए ! ना आपको कपड़े बदलने की जरूरत है, ना चप्पल जूते!
    सीधे गाड़ी निकालिये और नेहा के फ्लैट की तरफ भगा दीजिए…!”

” ऐसा क्या हो गया अनिऱ?  सब कुछ ठीक तो है ना ?”

” अगर सब कुछ ठीक होता तो, मैं आपको इतनी अर्जेंटली नेहा के पास पहुंचने नहीं कहता..!  उसे कहियेगा उसे लेने के लिए लोग निकल चुके हैं.. आप उसे अपने साथ गाड़ी में लेकर मैं जो एड्रेस आपको मैसेज कर रहा हूं वहां पहुंचा दीजिएगा…!”

” अनिऱ.. !”

काका की आवाज की नमी वासुकी को भी समझ में आ रही थी…-” क्या हुआ काका”

”  वो तुझसे बहुत प्यार करती है… उसे अकेला मत छोड़ना..!”

” उसे अकेला ना छोड़ना पड़े इसलिए किसी से कहे बिना अपने प्लान में थोड़ा सा चेंज किया है..! आप चिंता मत कीजिए, वह जहां भी रहेगी मैं उसके आसपास ही रहूंगा… लेकिन जब मैं यहां नहीं रहूंगा तो आपको और दर्श को पूरी शिद्दत के साथ उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना होगा..!”

” तुम चिंता मत करो बेटा..!”

काका ने आज पहली बार वासुकी को बेटा कहकर पुकारा था और इस बात से वासुकी भी थोड़ा भावुक हो गया….

उसकी गाड़ी अब हवा से बातें कर रही थी और जल्द ही  उसे अपने सामने भागती दर्श की गाड़ी नजर आने लगी….

उसी वक्त उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया… जिसमें लिखा था 10 मिनट में पहुंच जाएंगे…

उस मैसेज को पढ़ने के बाद वासुकी ने परेशानी से दर्श की गाड़ी की तरफ देखा और अपनी गाड़ी की गति और तेज कर दी…

वासुकी चाहता था कि वह दर्श की गाड़ी पार करके बांसुरी की गाड़ी तक पहुंच जाए और ड्राइवर के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर उन्हें वापस उनके घर की तरफ मोड़ ले..!
      लेकिन यह हो नहीं पाया !

   वासुकी जब तक दर्श की गाड़ी के बगल में पहुंचा…. तब तक में बांसुरी की गाड़ी पूरे वेग से माइंस वाले इलाके में दाखिल हो गई..
       इत्तेफाक से यही वह समय था जब शेखावत ने ब्लास्ट के लिए ओके किया और उसके आदमियों ने माइंस में बिछा रखी बारूद में चिंगारी दे दी….

     एक जोर का धमाका हुआ और इसके साथ ही सिलसिलेवार लगे हुए बारूद पर धमाके पर धमाके होते चले गए…
    बांसुरी की गाड़ी जो धमाके के वक्त अपना संतुलन खो चुकी थी थोड़ा आगे बढ़ी और एक दूसरे धमाके के साथ ही गाड़ी हवा में तेजी से ऊपर तक उछल कर नीचे गिर गई….

   दर्श की गाड़ी के बाजू से आगे बढ़ते हुए वासुकी को दर्श ने रोकने की कोशिश करने के लिए उसके फोन पर फोन लगाना शुरू किया…
लेकिन वासुकी ने अपने फोन पर ध्यान दिए बिना अपनी गाड़ी भी बारूद के ढेर में जहां सिलसिलेवार ब्लास्टिंग शुरू हो चुकी थी अंदर बढ़ा दी…..

उसकी नजरों के सामने ही बांसुरी की एसयूवी हवा में ऐसे उछल गई जैसे बच्चों के खेलने का कोई खिलौना हो…. और वासुकी अपनी लाल लाल आँखों से ये दृश्य देखता रह गया….

क्रमशः

aparna

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