जीवनसाथी 2/52


जीवनसाथी – 2/52

     आश्रम के लोगों से मिल कर राजा साहब और प्रेम निकलने को थे कि गुरु देव ने राजा को बुलवाया और उसके हाथ में एक लाल धागा रख दिया…. उस धागे में एक छोटा सा सोने का त्रिशूल बना था…. लेकिन त्रिशूल की आकृति ऐसी थी कि उसका चुभने वाला भाग किनारे की तरफ पड़ता था….

“इसे अपने बेटे की दाहिनी बाँह में बांध देना अजातशत्रु ! ये हमेशा उसकी रक्षा करेगा !  चिरंजीवी भव !!”

राजा ने गुरुदेव से उस धागे को लिया और प्रणाम कर वहाँ से निकल गया….

“पता नहीं इनकी समस्याएं कब समाप्त होंगी… !”

गुरुदेव के बाजू में खड़ी एक साध्वी बोल पड़ी…..
गुरुदेव ने अपनी बंद आँखों से ही ऊपर आसमान की तरफ देख कर हाथ जोड़ दिये…

“उसकी रक्षा करना महादेव !!!
   ये अभी भी एक मुसीबत से ही लड़ने जा रहा हैं… बस ईश्वर करें सब शुभ हो.. !”

उस साध्वी ने अपने बगल में खड़े गुरुदेव को देख श्रद्धा से ऑंखें बंद कर ली….

प्रेम और राजा वहाँ से निकल कर बाँसुरी के शहर की तरफ बढ़ गए….

*******

    पिया बिना सारी बात जाने वहाँ से बाहर निकल चुकी थी….
   समर रेवन का हाथ पकड़ कर बैठा था.. रेवन ने उस डॉक्टर की तरफ बड़ी उम्मीद से देखा और डॉक्टर मुस्कुरा उठा…
   रेवन ने डॉक्टर को सम्बोधित करते हुए कहना शुरू किया….

” डॉक्टर इन से मिलिये यह समर है ! मेरे बहुत खास  दोस्त हैं ! आज से  कुछ समय पहले मैं इंडिया गई थी उस वक्त इन से मिलना हुआ था और हमारी दोस्ती हो गई थी ! तब मुझे नहीं मालूम था कि हमारी दोस्ती इतना आगे बढ़ जाएगी…
    डॉक्टर यही मेरे बेटे के फादर भी है…. और अब मैं यहीं चाहती हूं कि मेरा बेटा इनके साथ इंडिया में रहे..! मुझे लगता है कि मेरे बाद यही एक इंसान है जो मेरे बेटे की सही देखभाल कर सकते हैं…!”

” क्या आप इस बात पर पूरी तरह से श्योर है..?”

” यस डॉक्टर मैं पूरी तरह श्योर हूं कि मेरे बाद मेरे बच्चे की सही देखभाल सिर्फ समर ही कर सकते हैं..!”

रेवन की बात सुनने के बाद डॉक्टर समर की तरफ मुड़ गए…

” वैसे तो यह आप दोनों का पर्सनल मैटर है, लेकिन क्या मैं यह जान सकता हूं कि आप दोनों अलग क्यों हुए थे..?  यह सब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि जब तक हमें पूरी तरह से इस बात की तसल्ली नहीं हो जाएगी कि हमारे देश में जन्मे बच्चे को आप एक सही माहौल और सही परवरिश दे पाएंगे, तब तक हमारे यहां की सरकार इस बच्चे को आपके साथ जाने नहीं देगी…  बस इसीलिए यह बात जानना चाहता हूं कि आप दोनों अलग क्यों हुए थे..?”

समर ने रेवन की तरफ देखा, रेवन की आंखें समर से बहुत कुछ कह रही थी.. बहुत सी बातें ऐसी थी जो वह डॉक्टर की उपस्थिति में खुलकर समर से नहीं कह सकती थी ,लेकिन समऱ भी आखिर समर थ!!
   वो रेवन की आंखों की भाषा कैसे ना समझ पाता…
 
       वो जिसने राजा अजातशत्रु पर आने वाली मुसीबतों को कोसों दूर से सूंघ कर उन मुसीबतों के आने के पहले ही उनका तोड़ निकाल रखा हो,  उस चाणक्य के दिमाग को कमतर आंकना सही नहीं था…

डॉक्टर को भरोसा दिलाना जरूरी था कि रेवन जो कह रही है उसकी एक एक बात सच है..
   और इसलिए समऱ ने भी रेवन की कही बात पर अपनी मुहर लगानी शुरू की… और इत्तेफाक से उसी वक्त बाहर से अपना रोना-धोना तमाम कर पिया अंदर चली आई…

   पिया बहुत खामोशी से दरवाजे के पास तक चली आई… समर की पीठ दरवाजे की तरफ थी ! वह रेवन की तरफ मुंह करके बैठा था और उसके ठीक सामने पलंग की दूसरी तरफ डॉक्टर हाथ बांधे खड़ा समर को प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहा था…

” जी डॉक्टर रेवन सही कह रही है ! यह कुछ सालों पहले इंडिया आई थी और उस वक्त इसका और मेरा मिलना हुआ था…
एक घटना के दौरान हमारा आपस में मिलना हुआ था और फिर इत्तेफाक से दो तीन दफा आपस में टकराने के बाद हमारी दोस्ती हो गई ! लेकिन हम दोनों ही इस बात से अनजान थे कि हमारी दोस्ती सामान्य दोस्ती से कुछ ज्यादा गहरी थी, और फिर हमें मालूम ही नहीं चला कि कब हमारी दोस्ती इतनी खास हो गई…!
मैं रेवन से शादी करना चाहता था, लेकिन उस वक्त रेवन अपने किसी खास मकसद से वापस लौट गई ! इसके बाद भी हम दोनों के बीच दोस्ती कायम थी…
    लेकिन समय के साथ हम दोनों अपने अपने कामों में व्यस्त होते चले गए… रेवन का बेटा हुआ तब उसने मुझे बताया था और मैं उस वक्त इस से मिलने भी आया था…!
     लेकिन उस वक्त तक रेवन अकेले ही इस बच्चे को बहुत प्यार से पाल रही थी… हम उस वक्त भी शादी कर लेना चाहते थे, लेकिन मेरी पारिवारिक मजबूरियों के कारण मैं इंडिया नहीं छोड़ सकता था…!
               ऐसे ही रेवन अपनी मजबूरियों के कारण नीदरलैंड्स नहीं छोड़ सकती थी…!
    और इसीलिए हम दोनों ने यही तय किया कि जिस वक्त हमें सही लगेगा हम एक दूसरे के साथ हो जाएंगे…!
.. और साथ ही यह भी तय किया कि तभी जिंदगी के किसी मोड़ पर अगर हम दोनों में से किसी को भी एक दूसरे की जरूरत पड़ी तो हम सबसे पहले एक दूसरे को ही याद करेंगे और अपने सारे काम छोड़ कर एक दूसरे की मदद के लिए तुरंत चले आएंगे…!”

” इसका मतलब आपने भी अब तक शादी नहीं की..?”

डॉक्टर के सवाल पर समर कुछ कह पाता उसके पहले ही पिया पलट कर वापस बाहर निकल गयी…

” इन सारी बातों से पहले मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि, रेवन की तबीयत कैसी है और क्या उसमें सुधार की…
मेरा मतलब है, वह कब तक ठीक होकर अपने घर जा सकती  है ! “

” देखिए मिस्टर समर !! मैं आपको किसी तरह की गलतफहमी नहीं देना चाहता !! रेवन के पास अब ज्यादा वक्त नहीं है…!  आप इनके पास रुके मैं आपके बेटे को लेकर आता हूं..!”

समऱ ने चुपचाप हां में सिर हिला दिया और डॉक्टर के वहां से बाहर निकलने का रास्ता देखने लगा..

डॉक्टर वहां से बाहर निकल गया ! उसी वक्त दूर बैठी    पिया ने एक बार फिर यह सोचा कि वह अकेले में समर और रेवन से उनकी बीती जिंदगी के बारे में सवाल करेगी…
         वो जैसे ही कमरे में आने को थी कि उसी वक्त समर उठकर कमरे के दरवाजे तक गया, क्योंकि वह सिर्फ इसी बात का इंतजार कर रहा था कि डॉक्टर कमरे से निकले और वह रेवन से सारी सच्चाई जान सके…
    उसने डॉक्टर के निकलते ही  दरवाजा अंदर की तरफ खींचा और चिटकीनी लगा दी.. उसी वक्त इत्तेफाक से पिया दरवाजे के बाहर पहुंच चुकी थी.. उसे यूं लगा जैसे समर ने उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया हो….
   वो गुस्से से भरी वापस पलट कर चली गयी…

” रेवन अब सब सच सच बताओ..!”

रेवन को अब बात करने में भी बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह समर को अपनी सारी सच्चाई बता देना चाहती थी |  उसने बहुत आस के साथ अपनी हथेली समर की तरफ बढ़ा दी और समर ने आगे बढ़कर उसकी हथेली थाम ली | वह उसके ठीक बाजू में बैठ गया और उसके सिर पर बहुत प्यार से हाथ फेरने लगा…

” मेरी तरफ से मैं तुम्हें प्रॉमिस करता हूं रेवन, तुम्हारे बच्चे को अपना बच्चा मान कर पालूंगा | उसे कभी कोई कष्ट नहीं होगा..!”

” थैंक्यू समर !!  मैं जानती थी कि  तुम मेरी मदद जरूर करोगे..!”
   मैंने अपनी सारी जिंदगी में कुछ और कमाया हो या ना कमाया हो,  तुम्हारे जैसा एक सच्चा दोस्त जरूर कमाया है..!
तुम यह भी अच्छे से जानते हो कि जब मैं इंडिया आई थी तब मैं तुमसे मिलने के बाद और तुम्हारी दोस्ती के बाद धीरे-धीरे तुमसे प्यार करने लगी थी…!
मुझे आज भी वह रात याद है | और मैं अपनी आखिरी सांस तक उस खूबसूरत सी रात को नहीं भूल सकती…|

   हमारी दोस्ती की वो खास रात जिसके बाद मुझे वापस लौटना था…

   उस शाम मैंने तुम्हे  डिनर पर इनवाइट किया था… अपने होटल में और तुम अपने कामकाज जल्दी निपटा कर मुझसे मिलने के लिए और मेरा इनविटेशन मानने के लिए वहां डिनर के लिए आ गए थे…|

  समर तुम वाकई हीरा हो… |
   मैंने मेरी जिंदगी में तुम्हारे जैसा लड़का नहीं देखा.. उस रात जब डिनर के लिए मैंने मेरे कमरे में तुम्हें बुलाया तो तुम कितना चौक गए थे !  तुम चाहते थे हम नीचे हॉल में डिनर कर लें…
    लेकिन मैं अपने रूम में सिर्फ तुम्हारे साथ कैंडल लाइट डिनर करना चाहती थी…
उस वक्त जब मैंने तुमसे कहा कि मैं तुम्हारे साथ डांस करना चाहती हूं तब तुम कितना शरमा गए थे.. तुम्हें याद है..!”

दिमाग में चल रही बेशुमार परेशानियों के बीच भी समर के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान खेल गई…

“हाँ रेवन !! मुझे याद है.. !”

” मैं डांस करते-करते ही वाइन पी रही थी और तुम मुझे पीने से मना भी कर रहे थे कि मेरा लीवर खराब हो जाएगा..!  तुम्हें याद है तुम अक्सर मेरे पीने की आदत पर मुझे ताने दिया करते थे कि, इतना मत पियो  रेवन एक दिन लीवर इस कदर जवाब दे जाएगा कि  लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचेगा.. और देखो समर आज वह ऑप्शन भी नहीं बचा..!
    तुम जानते हो समर, उस रात में क्यों इस कदर पी रही थी क्योंकि मुझ में बिना नशे के तुम्हें प्रपोज करने की हिम्मत नहीं थी !

    तुम अपने हर एक काम में इतने ब्रिलियंट इतने परफेक्ट और इतने शार्प हो कि मुझे कभी नहीं लगा था कि तुम मेरी जैसी लड़की को पसंद भी करोगे….. लेकिन तुमने मुझसे दोस्ती की और जब तक मैं इंडिया में रही हर कदम पर मेरी हेल्प करते रहे, मुझे प्रोटेक्ट करते रहे.. !
       और बस उसी सब में कब मुझे तुमसे प्यार हो गया मुझे पता ही नहीं चला ! और वैसे समर इसमें मेरी कोई गलती भी नहीं क्योंकि तुम हो ही ऐसे कि कोई भी लड़की सिर्फ आधा घंटा तुम्हारे साथ बिता भर ले तो उसे तुमसे बेइंतेहा प्यार हो जाएगा…

उस दिन भी डांस के बाद मैंने अपनी सारी हिम्मत समेट कर तुमसे अपने दिल की बात कह दी थी…
       मैं तुम्हारे गले में अपनी बाहें डालकर झूल गई थी…तुम्हे शायद लगा कि मैं अपना होश खो रही हूँ, लेकिन मैं तब भी होश में थी..

तुम चाहते तो उस दिन मेरे साथ कुछ भी कर सकते थे शायद मैं दिल ही दिल यह चाहती भी थी कि तुम कोई मनमानी पूरी कर लो…
     लेकिन तुमने मेरी मदहोशी का कोई फायदा नहीं उठाया !  मुझे चुपचाप उठाकर मेरे पलंग पर लेटा दिया और मेरे पास एक छोटा सा नोट छोड़कर कमरे से बाहर निकल गए…

     यू आर सो प्योर !!  सो पायस समर..!!

काश !! मैंने अपना सारा संकोच त्याग कर तुमसे शादी करने की जिद पकड़ ली होती तो आज तुम्हारे साथ बिताई कुछ मीठी यादें तो अपने साथ लेकर जाती…
खैर उसके अगले दिन सुबह तुमने मुझे फोन किया और महल में इनवाइट किया ! राजा साहब और रानी बांसुरी से मिलने के बाद तो मैं वाकई आश्चर्यचकित थी  कि क्या सारी मैग्नेटिक पर्सनालिटीज़ इंडिया में ही आकर बस गई है…

तुम सभी से बहुत प्रभावित होकर और  तुम्हारी मीठी यादें संजो कर मैं वापस चली गई.. ! मुझे पता था कि इस जन्म में तो तुम मुझसे कभी प्यार नहीं कर सकते.. जाने क्यों मैं समझ चुकी थी कि तुम्हारी जीवन साथी बनने की योग्यता मुझ में नहीं है…!

मैं तुम्हें छोड़ कर अपने दिल पर पत्थर रखकर यहां वापस तो चली आई थी लेकिन यहां किसी काम में मेरा मन नहीं लग रहा था ! और तब तुम्हें भुलाने के लिए मैं एक बार फिर खुद को शराब में डूबोने लगी…

     और ऐसे ही एक पब में मेरी मुलाकात नॉस्त्रे से हुई…!

वह फ्रेंच शेफ था और यहां अपने किसी कुकिंग कोर्स को करने के लिए आया हुआ था…
उस रात शराब के नशे में नॉस्त्रे को मैं अपने साथ अपने कमरे में ले गई.. और उसे कुछ देर के लिए समर मान लिया…

    नशे में बहक गई थी मैं..या शायद तुम्हारे नाम पर बहक जाना चाहती भी थी !
     लेकिन यहां पर यह सब बहुत सामान्य सी बात है..!

उसके लिए भी यह एक बहुत सामान्य सा वन नाइट स्टैंड ही था..

     अगली सुबह मैं जब सो कर उठी तो वह मेरे किचन में हम दोनों के लिए कॉफी बना रहा था… उसे देखते ही मुझे पिछली रात की सारी बातें याद आ गई.. लेकिन उस वक्त मेरा उससे कुछ कहने और सुनने का मन नहीं था… !
   वह खुश था बहुत खुश था और वह मेरे साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता था लेकिन जाने क्यों मेरे दिमाग में सिर्फ तुम छाए हुए थे..!
मेरे लिए तो वह नास्त्रे के साथ बीती हुई रात भी समर के साथ बीती रात ही थी… और मैं उस रात को सिर्फ तुम्हारी वजह से ही याद रखना चाहती थी..

मैंने नास्त्रे को अपना नंबर नहीं दिया और उससे दूर जाने के लिए मैं उससे बिना कुछ कहे पैरिस चली गई… मैंने वहां अपना काम शुरू कर लिया..
फ्रीलांसर काम कर रही थी कि तभी एक ऑफिस में अच्छी ओपनिंग मिली और मैंने वहां जॉब ज्वाइन कर ली..

    नास्त्रे से फिर कभी मिलना नहीं हुआ..! और उस रात को गुज़रे 3 महीने बीत गए…
     मैं तुम्हारी यादों और अपने काम में इस कदर व्यस्त थी कि पीरियड के मिस होने पर भी मेरा ध्यान नहीं गया !
     लेकिन अब शरीर में कुछ बदलाव होने लगे थे… थोड़ा सा भी कुछ करने पर बहुत ज्यादा थकान होने लगी थी | कुछ भी खाने पीने का मन नहीं करता था | कभी अचानक सब कुछ अच्छा लगने लगता और कभी सब कुछ वीरान सा लगने लगता था…
अचानक किसी शाम तुम्हारी इतनी याद आती कि मैं अकेली रोती रह जाती थी….कभी घंटो तुम्हे याद कर मुस्कुराने लगती थी…..

फिर मुझे लगा कि मैं पागल होने लगी हूं ! और मुझे किसी  साइकेट्रिस्ट को दिखाना चाहिए…

    ऑफिस में मेरी एक कलीग थी उसने मुझे एक डॉक्टर का नंबर दिया और मैं उससे मिलने गई…. साइकेट्रिस्ट बहुत समझदार थी, उसने मेरी जांच की और कुछ ब्लड टेस्ट लिख कर दिए |  मुझे लगा मुझे तो मानसिक रूप से परेशानी है फिर यह ब्लड टेस्ट क्यों करवा रही हैं ?  लेकिन मैंने अपनी डॉक्टर की बात मानी और ब्लड टेस्ट करवा लिए | उन टेस्ट के रिजल्ट के समय उस डॉक्टर ने मुझे बताया कि मैं साढ़े 3 महीने की प्रेग्नेंट हूँ !

    मेरा काम और रूटीन ऐसा था कि मुझे खाने पीने का कभी होश ही नहीं रहता था | जिसके कारण मेरा हीमोग्लोबिन भी बहुत डाउन हो गया था | ऐसी स्थिति में डॉक्टर ने एबॉर्शन के लिए मना कर दिया | उसने कहा अगर मैं अबो्र्टिव पिल्स लेती हूं तो मेरी जान को खतरा हो सकता है…|

   और वैसे सच कहूं तो मैं इस बच्चे को मारना भी नहीं चाहती थी ! जाने क्यों मुझे यह नास्त्रे का नहीं तुम्हारा ही बच्चा लग रहा था…
     उस रात भले ही मेरे शरीर के साथ नास्त्रे था, लेकिन मेरे दिल दिमाग पर तो तुम ही छाये हुए थे.. !

    और फिर मुझे अपने इतने गहरे डिप्रेशन के बीच 1 महीने सी उजाले की रेखा नजर आने लगी… मेरा बच्चा..!!

   मैंने उसी वक्त तय कर लिया कि मैं इस बच्चे  को जन्म दूंगी और उसकी सिंगल पैरंट बन  कर उसकी परवरिश करूंगी !  यह मेरे लिए तुम्हारी निशानी के तौर पर मेरे साथ जिंदगी भर चलेगा..!

और सच कहूं समर तो वाकई तुम्हारी यादों से अपना दिल हटाने में इस बच्चे ने मेरी बहुत मदद की…!

प्रेगनेंसी के बाकी बचे दिन बहुत प्यार से गुजर गए और फिर यह नन्हा सा फूल मेरे हाथों में आ गया…
उसके आने से मेरी जिंदगी संवर गई.. मुझे लगा अब मुझे किसी की जरूरत नहीं है…
     मैं और मेरा बच्चा हम दोनों ही एक दूसरे के लिए काफी है!

    सच कहूं तो यह बच्चा मेरे लिए तुमको भूलने की दवा की तरह था और वाकई उसके आने के बाद मैं धीरे-धीरे तुम्हें भूलने लगी…

      कभी-कभी लगता है प्यार किसी पुरानी शराब के नशे की तरह होता है…
    जब चढ़ता है तो इस कदर चढ़ता है कि अपने आप में सब कुछ डुबो देता है और जब उतरता है तो पूरी तरह सब कुछ भुला देता है…!

    सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था… मेरी जिंदगी बहुत हसीन हो गई थी…
  कि उसी बीच मेरी तबीयत खराब रहने लगी… बहुत जगह डॉक्टरों को दिखाया लेकिन मर्ज़  कहीं पकड़ में ही नहीं आया और तब मैं यहां चली आई…

यहां कुछ समय तक भर्ती रहने के बाद मेरी बीमारी पकड़ में तो आई लेकिन यह समझ में आ गया कि इलाज काफी महंगा था… धीरे-धीरे सारी जमा पूंजी इसी में खर्च होने लगी और तब मुझे अपने इकलौते बेटे शोवेन की चिंता होने लगी…
    मुझे लगा अगर मेरी सारी कमाई मुझ पर ही खत्म हो गई तो मेरे बेटे का क्या होगा… लेकिन मेरे पास और कोई ऑप्शन भी नहीं था..! उसी वक्त मुझे याद आया कि मेरे पास मेरे पेरेंट्स का छोड़ा आखिरी तोहफा भी तो था..

मेरे माता-पिता का एक पुराना घर था  नीदरलैंड्स में..!
वह घर उन्होंने अपने जीते जी ही मेरे नाम कर रखा था और यही बात मेरे चाचा को बहुत समय तक मालूम नहीं थी |  उन्हें लगता था कि मेरी परवरिश के साथ ही वह उस घर के भी मालिक बन जाएंगे | लेकिन जब उन्हें यह बात पता चली  कि वह घर उनका नहीं है, तब उन्होंने मुझे बहुत परेशान करना शुरू कर दिया था |और उसी समय मुझे उनका साथ छोड़कर चाइल्ड केयर में कुछ समय के लिए रहना पड़ा था…
बताने के लिए तो बहुत सारी बातें हैं समर, लेकिन फिलहाल मेरे पास वक्त नहीं है !  चाइल्ड होम में भी मैंने काफी कष्ट झेले..! यहां की सरकार बच्चों के लिए काफी अच्छे नियम बनाती है और समय-समय पर ऐसे सारे चाइल्ड होम की देखरेख भी करती है,  बस इसीलिए मुझे वहां से निकलने का मौका मिल गया…!

15 साल की छोटी उम्र से ही मैं अपने खर्चों के लिए कमाने लग गई थी.. इसके अलावा सरकार की तरफ से जो जेब खर्च मिलता था वह भी पर्याप्त होता था..!  मेरी पढ़ाई अच्छे से पूरी हो गई और अपनी थीसिस करने के लिए मैं इंडिया भी आ सकी.. वापस लौटने के बाद एक बार फिर मेरी नौकरी लग ही चुकी थी और उसी समय मेरे पिता के एक पुराने दोस्त जो कि वकील भी थे मुझसे मिलने आए और उन्होंने मुझे मेरे पिता के पुराने घर से जुड़े कागज मुझे सौंप दिये.. !

    उस घर के कागज आज भी मेरे पास है, जिन्हें मैंने अपनी बीमारी के वक्त अपने बेटे के नाम कर दिया..!

यहां रहते हुए साल भर पूरा हो गया था और जब डॉक्टरों से मुझे यह पता चला कि मेरी जिंदगी की उम्मीद बहुत कम है तब मुझे शॉवेन की बहुत चिंता होने लगी..
    मुझे यह तो पता है कि मेरे बाद उस घर को बेचकर भी शोवेन आराम से अपनी जिंदगी बसर कर सकता है ! उसके पास इतने पैसे रहेंगे…
   लेकिन अकेले जिंदगी बसर करने के लिए वह अभी बहुत छोटा है…
    वह सिर्फ 5 साल का है..! इतनी छोटी उम्र में अगर उसे अभिभावक नहीं मिले तो उसे भी मेरी तरह चाइल्ड होम में रहना पड़ेगा.. मैं यह नहीं जानती कि उसकी किस्मत मेरी तरह होगी या नहीं.. ?
     चाइल्ड होम में बच्चों को जिन तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है मैं अपने बेटे को उन तकलीफ में नहीं देखना चाहती …

मेरे दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर कोई भी ऐसा नहीं है जिसके ऊपर मैं इतना भरोसा कर सकूं कि मैं अपनी नीदरलैंड्स की कोठी और अपने बेटे को उसके सुपुर्द कर सकूं.. बस इसीलिए मैं परेशान थी |

उस परेशानी के वक्त मुझे अचानक तुम याद आ गए…|

मैं जानती हूं समऱ,  मैंने तुम्हें परेशान कर दिया लेकिन मेरे पास और कोई ऐसा नाम नहीं था जो मेरे बच्चे को संभाल सके..!
अगर डॉक्टर को यह सारी बातें बताती तो वह तुम्हें हरगिज़ मेरा बेटा नहीं लें जाने देते ! उन्हें यह लगता कि तुम बच्चे की वसीयत के लालच में उस बच्चे को अपना रहे हो जबकि सच्चाई मैं जानती हूं कि तुम क्या हो..?

मैं जानती हूं मेरी वजह से तुम्हारी जिंदगी खराब हो सकती है इसलिए तुमसे रिक्वेस्ट करती हूं कि जाओ अपनी वाइफ को बुला कर ले आओ मैं उसे भी सारी सच्चाई बता देना चाहती हूं..!
     मैं जानती हूं तुमने अपनी वाइफ को भी मेरे बारे में बताया ही होगा और इसीलिए वह तुम्हारे साथ इतनी दूर मेरे बच्चे को लेने चली आई…
      मैं बहुत खुश हूं समऱ कि तुम्हें बिल्कुल तुम्हारे  लायक पत्नी मिली है, और मैं भगवान से यही प्रार्थना करूंगी कि तुम और तुम्हारी पत्नी सदा एक दूसरे के साथ बेहद खुश रहो… !

    मैं जानती हूं तुम्हारे साथ रहने वाली औरत तुम पर दिलों जान से फ़िदा होगी…
    तुम्हारी वाइफ बहुत लकी है समऱ.. !”

पिया का जिक्र आते ही समर के दिमाग में एकदम बिजली सी कौंधी, वो तो रेवन कि सच्चाई जानने कि उत्सुकता में पिया को भुला बैठा था !.
     उसे लगा इस वक्त पिया को भी यहां मौजूद होना चाहिए था जबकि वह यहां नहीं है….

समर एक झटके से अपनी जगह पर खड़ा हो गया…

” रेवन मेरा वेट करना,  मैं बस अभी गया और पिया को लेकर आया!  मैं चाहता हूं कि तुम एक बार उसके सामने भी अपने बच्चे की हकीकत बयान कर दो..!”

” हां बिल्कुल समऱ !  मैं तो यही चाहती थी कि मैं तुम दोनों से अपने मन की बात कर सकूं, लेकिन पिया यहां मौजूद नहीं थी.. तुम उसे लेकर आ जाओ मैं तुम्हारा इंतजार… कर रही हूं..!”

बात करते-करते रेवन की सांसे अटक रही थी…

समर कमरे का दरवाजा खोलकर तेजी से बाहर निकल गया….

अस्पताल के बगीचे में एक बेंच पर बैठी थी पिया  चुपचाप जमीन को घूर रही थी..
      उसे पता भी नहीं था कि उसकी आंखों से आंसू बहते चले जा रहे थे | समर लगभग भागते हुए पिया के पास पहुंचा और उसके कंधे पर हाथ रख दिया |  पिया ने गुस्से से समर की तरफ देखा और उसका हाथ झटक दिया…

” पिया !!  प्लीज.. मेरे साथ रेवन के कमरे में चलो..!”

” क्यों ?  अब क्यों आए हो मुझे बुलाने..?  जब दोनों पुराने प्रेमियों ने मन भर कर प्यार भरी बातें कर ली तब मेरी याद आई है..?”

” पिया प्लीज यह सारी जली कटी बाद में सुनाते रहना.. मैं सब कुछ सुन लूंगा.. इस वक्त मेरे साथ चलो..!”

” नहीं जाना मुझे…! तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाना..!”

” पिया !!..प्लीज.. तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं.. एक बार रेवन से बात कर लो तुम्हारी सारी गलतफहमी दूर हो जाएगी..!”

” अच्छा !!  मेरे मुंह पर तुमने दरवाजा बंद कर दिया… अकेले रेवन का हाथ पकड़ कर बातें कर रहे थे और मुझसे कहते हो मेरी गलतफहमी दूर हो जाएगी..
    ऐसा ही था तो गलतफहमी पैदा ही क्यों होने दी ! न पहले दिन ही सारी बातें साफ-साफ क्यों नहीं कह दी.. !
और अगर कोई ऐसी सच्चाई है जो रेवन मुझे बता सकती है तो वह सच्चाई तुमने क्यों नहीं बताई..? जब वह तुम दोनों के बीच की सच्चाई थी!
    क्या मैं यह जान सकती हूँ, मिस्टर समर सिंह..!!”

” तुम सब कुछ जान सकती हो….
   बस इस वक्त इतनी सी बात मान लो कि, मेरे साथ रेवन के पास चलो..!”

” इतनी भी तबीयत खराब नहीं लग रही है उसकी कि, वह आज के आज मर जाए..!”

“पिया….”  ज़ोर से चिल्लाते हुए समर का हाथ उठ गया… लेकिन उसने अपना हाथ रोक लिया…

एक गहरी सी सांस भर कर समर दूसरी तरफ देखने लगा और पिया की आंखों से आंसू बहने लगे…

” अपना हाथ रोक क्यों लिया.. ? जब मुझे मारने के लिए उठाया था तो मार ही देते…
   बस यही तो बचा था हम दोनों के बीच !  शादी को महीना नहीं बीता है समर और तुम मुझ पर हाथ उठाने चले आए…! बस यही प्यार था हमारा…!
    साफ साफ नजर आ रहा है समऱ कि तुम रेवन से कितना प्यार करते हो..? उसके लिए मेरे मुंह से इतनी सी बुरी बात सुन नहीं पाए और अब भी चाहते हो कि  मैं तुम दोनों के रिश्ते की सच्चाई उससे जाकर सुनूँ….. .
तुम्हारी यह भीगी हुई लाल-लाल आंखें, तुम्हारे यह तेवर, तुम्हारे यह बिगड़े हुए मिज़ाज़… सब कुछ कह रहे हैं कि तुम दोनों के बीच क्या था…?”

” पिया मुझे मजबूर मत करो कि मैं यहां सब के बीच तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हे खींचते हुए रेवन के पास लेकर जाऊं..! मेरे पास तुम्हारे हर इल्जाम का जवाब है,  लेकिन वह जवाब आज के पहले मेरे पास नहीं था ! बस इसीलिए मैं चाहता था कि तुम यहां तक मेरे साथ आओ!
     अगर यह सारी सच्चाई जो अभी रेवन से मुझे पता चली है, पहले मालूम होती तो मैं इंडिया में ही तुम्हें सब कुछ बता चुका होता…
   पिया!!  प्लीज… समझने की कोशिश करो…. कभी-कभी हमारी जिंदगी किसी ऐसे मोड़ पर आ जाती है कि हमारी जिंदगी में घटने वाली बातें मुट्ठी से फिसलती रेत की तरह हो जाती हैं… जिन्हें हम कितना  भी कसकर हाथ में बांधने की कोशिश करें लेकिन वह हाथ से फिसल ही जाते हैं…
बस समझ लो ऐसा ही कुछ हुआ है मेरे साथ…

” मुझे ऐसे छलने के बाद भी इतनी बड़ी-बड़ी बातें कैसे बना ले रहे हो समर..!”

” मैं खुद वक्त के हाथों इस कदर छला गया हूं,  मैं किसी और को क्या छलूंगा पिया ?
    अगर तुम नहीं जाना चाहती तो तुम्हारी मर्जी लेकिन, फिर भी एक बार मेरे साथ लिए उन सात फेरों के लिए ही बूंद भर भी विश्वास कर सको हमारे रिश्ते पर तो प्लीज मेरे साथ चलो…!”

समर भारी कदमों और भारी मन से वहां से मुड़कर रेवन के कमरे की तरफ बढ़ गया….
   ना जाने क्या सोचकर पिया भी चुपचाप उठकर उसके पीछे चली गई….

क्रमशः…

aparna…..

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