जीवनसाथी- 2/37


जीवनसाथी -2 भाग -37

वहां से गुजरने के बावजूद भीड़भाड़ के कारण शेखर पंखुड़ी को नहीं देख पाया और पंखुड़ी बच्चे और उसकी मां को अपनी गाड़ी पर बैठाते हुए वहां से गुजरते हुए शेखर को नहीं देख पायी….
    दोनों ही अनजाने में एक दूसरे से विपरीत दिशा की तरफ आगे बढ़ गए…

  पंखुड़ी गाडी भगाती हुई अस्पताल पहुँच गयी… उसने तुरंत स्ट्रेचर में बच्चे को डालकर उसे इमरजेंसी की तरफ ले गई….
   बच्ची को नॉर्मल सेलाइन की ड्रिप लगाने के बाद पंखुड़ी ने नर्स को कुछ ज़रूरी दवाएं बताने के बाद उस  बच्ची की मां की तरफ रुख किया…

” इस बच्चे की उम्र क्या है.. ?”

” जी 12 या 13 साल होगी.. !”

” 12 की है या तेरह  की सोच कर बताइए.. ?”

” इससे क्या फर्क पड़ता है मैडम 1 साल का ही तो अंतर है.. !”

” आपकी नजर में फर्क नहीं पड़ता होगा लेकिन एक डॉक्टर की नजर में फर्क पड़ता है..  12 साल की उम्र में वह टीन ऐज नहीं है और तेरह की उम्र को है जो उसकी अर्ली प्यूबर्टी की ऐज है..  ऐसे में बहुत सारे शारीरिक बदलाव भी लड़कियों और लड़कों में पाए जाते हैं इसे इसीलिए उस उसकी समस्या क्या हो सकती है यह समझने की कोशिश कर रही हूं और आप तो उसकी मां है आपको पता नहीं है कि उसके असल उम्र क्या है.. !”

” पता है ना 12 साल की है मैडम.. !”

” नाम क्या है बच्ची का.. ?”

” हम सब तो गुड्डू बोलते हैं.. !”

” बचपन में कोई नाम तो रखा होगा.. गुड्डू के अलावा.. !!

” नहीं मैडम हम गरीब लोगों के यहां 4 तरह के नाम नहीं रखे जाते.. !”

” ओके मैं इसका ब्लड ग्रुप और बाकी चीजें भी चेक करवा रही हूं और मुझे आपकी भी कुछ जांच करवानी पड़ेगी.. !”

” काहे को मैडम मेरी क्या जांच करवानी है मैं तो एकदम फिट है.. !”

” परेशान मत होइए सर ब्लड टेस्ट करना है और कुछ नहीं.. !”

उस औरत के चेहरे पर अब घबराहट के लक्षण साफ साफ नजर आ रहे थे,  और उसके घबराहट को पंखुड़ी भांप  चुकी थी…
लगभग 10 मिनट बीते होंगे कि बच्ची को होश आ गया…
पंखुड़ी तुरंत उस बच्ची  के पास पहुंच गई…

” अब कैसी तबीयत है बेटा.. ?”

बच्ची ने धीरे से हमें गर्दन हिला दी वह परेशान हाल इधर उधर शायद  अपनी मां को ढूंढने का प्रयास कर रही थी !

” अपनी मां को ढूंढ रही हो ना यही है वो.. !

नजर फेर कर पंखुड़ी इधर-उधर उसकी मां को ढूंढने लगी लेकिन अब वह औरत वहां मौजूद नहीं थी पंखुड़ी तुरंत अपनी जगह से उठी और तेज कदमों से उस कमरे से बाहर निकल गई…
ब्लड टेस्ट के नाम पर वह औरत डर के मारे बाहर बढ़ रही थी कि पंखुड़ी ने उसे आवाज लगा दी..

” अरे रुकिए आप कहाँ भागी चली जा रही है इधर सुनिए आप की बेटी को होश आ गया है..

आखिरी पंक्ति सुनते ही वह औरत अपनी जगह पर खड़ी हो गई और वापस मुड़कर पंखुड़ी की तरफ देखने लगी लेकिन उसके चेहरे पर अब भी राहत के भाव नजर नहीं आ रहे थे पंखुड़ी ने उसे इशारे से अपने पास बुलाया लेकिन वह औरत वही स्थिर  खड़ी रही…

पंखुड़ी ने उस औरत के पीछे मुख्य द्वार पर खड़े गार्ड को धीरे से इशारा किया और गार्ड उस औरत की तरफ बढ़ कर चला आया…
गार्ड को अपने इतने करीब आते देख कर वह औरत थोड़ा और घबरा गई और मजबूरी में पंखुड़ी की तरफ आगे बढ़ गई…

” आप अस्पताल से भाग क्यों रहीं थी यह जानते हुए भी कि आपकी बेटी यहां पर एडमिट है आप उसे हम सब अनजान लोगों के बीच अकेले छोड़कर चली जा रही थी.. ?”

” मैडम मुझे इंजेक्शन और खून खराबे से बहुत डर लगता है.. !”

” इन सब से तो हर किसी को डर लगता है कौन सा इंसान है दुनिया में जो शौकिया इंजेक्शन लगवाता है या खून खराबा करता है बताइए मुझे, और एक माँ तो अपने बच्चे के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाती है आप कैसी मां है कि सिर्फ इंजेक्शन के डर से अपनी बच्ची को अकेला छोड़कर भागने को तैयार हो गई एक बात सच सच बताइए यह आपकी सगी बेटी है या नहीं.. ?”

” कैसी बात कर रही है मैडम मेरी जान का टुकड़ा है मेरी बेटी.. !”

” और अपनी जान के टुकड़े को ऐसे एक सरकारी अस्पताल में छोड़कर भागी जा रही थी आईये  अपनी बेटी से मिल लीजिए…

पंखुड़ी उस औरत को लेकर बच्चे के पास चली आई बच्ची के पास उसे बैठाकर पंखुड़ी ने एक नर्स को इशारे से कुछ कहा और कुछ देर में ही नर्स उस औरत के ठीक बगल में आकर खड़ी हो गई..

” अपनी बाँह सामने कीजिए.. !

नर्स की बात पर औरत पंखुड़ी की तरफ देखने लगी…
पंखुड़ी ने नर्स को धीरे से जाने का इशारा कर दिया नर्स ने एक हाथ उस औरत के कंधे पर रखा हुआ था उसने धीरे से अपना हाथ हटाया..  और पंखुड़ी की तरफ देख कर बाहर निकल गई…

” चलिए ठीक है आपका ब्लड टेस्ट नहीं कर पा रहे हम लोग लेकिन बच्ची के कुछ टेस्ट करवाने बहुत जरूरी हैं इसलिए इसका सैम्पल ले लिया है… !

पंखुड़ी का ध्यान बराबर उस माँ बेटी की जोड़ी पर था उसने नर्स को इशारा कर उन दोनों के लिए कुछ खाने पिने का सामान मंगवा लिया था…
  कुछ देर बाद बच्ची की ड्रिप निकलने के बाद पंखुड़ी ने उसके सामने कुछ फल और सैंडविच की प्लेट मंगवाकर रख दी.. साथ ही एक ग्लास दूध भी… उस औरत के लिए भी खाने की प्लेट के साथ चाय मंगवा दी..
उन लोगो को पंखुड़ी बड़े ध्यान से देख रही थी… बच्ची बहुत नफासत से सैंडविच खा रही थी, बीच बीच में साथ रखें टिश्यू से वो मुहं भी साफ़ कर लिया करती थी…..
  
   पंखुड़ी ने बच्ची को देखते हुए उससे सवाल कर लिया…

“बेटा तुम्हारा नाम क्या है.. ?”

” ज़ारा.. !”

उसका जवाब सुनते ही पंखुड़ी को अपना मनचाहा जवाब मिल चुका था… इतनी देर से उस माँ बेटी की अजूबा जोड़ी को देखती बैठी पंखुड़ी को पहली ही बार में लगा था की ये बच्ची इस औरत की नहीं हो सकती…
  रंग रूप कद काठी तो अलग बात थी, हाव भाव से भी वो दोनों बिल्कुल भी एक सी नहीं थी…..

“जी मैडम, इसका बाप इसका नाम ज़ारा रखा था… लेकिन हम सब तो इसको गुड्डू ही बोलते है.. वही नाम प्यारा लगता है… !”

पंखुड़ी ने उसकी माँ की तरफ देख कर हाँ में सर हिलाया और अपना मोबाइल निकाल कर कहीं फ़ोन करने लगी….

पंखुड़ी के पास शेखर का नंबर सुरक्षित था… उसने उसे फ़ोन लगा दिया…

“शेखर जी ! आपसे एक ज़रूरी काम था, क्या आप मेरे अस्पताल में आ सकतें है.. वो भी पुलिस के साथ.. !”

“हाँ ज़रूर.. वैसे बात क्या है… ?”

“आप आइये, फिर बताती हूँ.. !”

पंखुड़ी और अस्पताल के बाक़ी स्टाफ ने उस औरत पर से नजर नहीं हटाई, हालाँकि अब उस औरत के चेहरे की घबराहट काफ़ी बढ़ गयी थी…..

  कुछ ही देर में शेखर कुछ पुलिस वालों के साथ अस्पताल चला आया….
  आते ही उसने पंखुड़ी से मिल कर उसे यहाँ बुलाने का कारण पूछ लिया…

“हाँ… आप क्या बता रही थी… मुझे यहाँ क्यों बुलाया आपने.. ?”

“जी मैं आज एक काम से फाटक चौक से गुज़र रही थी, तब वहाँ भीड़भाड़ देख कर मैं रुक गयी… पास जाकर देखा तो यह बच्चे बेहोश पड़ी थी मैंने इसे होश में लाने की कोशिश की और जब देखा कि यह कमजोरी के कारण बेहोश हुई है तो मैं उसे उठाकर अस्पताल लाने लगी उसी वक्त यह औरत वहां भागती हुई चली आई और इस बच्ची को अपनी बेटी बताने लगे मुझे पहली नजर में ही इस मां बेटी की जोड़ी को देखकर शक होने लगा था कि औरत झूठ बोल रही है मैं उस बच्ची और इस औरत को एक साथ अस्पताल ले आए हालांकि यह औरत मेरे साथ यहां आना नहीं चाहती थी यहां पहुंचने के बाद भी इस औरत का नाटक बदस्तूर जारी था कि वह किसी तरीके से अपनी बेटी को यहां से लेकर भाग खड़ी हो लेकिन जाने क्यों मुझे धीरे-धीरे इस औरत की हरकतें देखकर इस बात का यकीन होने लगा था कि इस बच्चे को इस औरत और इसके भीख मांगने वाले गैंग ने जरूर कहीं से किडनैप किया है और उससे ज़बरदस्ती  भीख मंगवाने का काम कर रहे हैं…
  
शेखर के साथ आए हुए पुलिस को देखकर बहुत बुरी तरह से घबरा गई थी और जिस वक्त पंखुड़ी शेखर से बातें कर रही थी बाकियों की नजर बचाकर उस औरत ने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे धर दबोचा और पकड़कर शेखर के सामने ले आए शेखर ने जब एक दो बार कड़क आवाज में उससे सवाल किया तो वह रोते हुए सब कुछ उगल बैठी…

वह बच्ची अब भी बिस्तर पर बैठी सकते में थी…..
वह फटी फटी आंखों से उस औरत को देख रही थी और कभी पंखुड़ी को उसे यकीन नहीं आ रहा था कि उसकी सच्चाई इस तरीके से पुलिस के सामने आ सकती है…
उस औरत को पुलिस के पकड़ने के बाद पंखुड़ी और शेखर उस बच्ची के पास चले आए पंखुड़ी ने बहुत प्यार से उसके माथे पर हाथ फेरते हुए उससे उसके घरवालों के बारे में पूछना शुरू किया हालांकि लड़की को ज्यादा कुछ याद नहीं था..
बच्ची के अनुसार जब वह 5 या 6 साल की थी तब मंदिर के पास से कोई उसे चॉकलेट का लालच देकर ले गया और दो-तीन दिन की यात्रा के बाद उसे यहां लाकर छोड़ दिया गया था…
यहां वह एक ऐसे घर में रहती थी जहां उसके जैसे चार पांच बच्चे और थे जिनके साथ लगभग छैः सात  मर्द और औरतें रहा करते थे.. यह कोई पुराना पड़ा गैराज था जिसमें इन लोगों ने अपना अड्डा बना रखा था….
बच्चे के बताने पर उस अड्डे का पता ठिकाना शेखर ने पुलिस वालों को बता दिया और उन लोगों को उसी वक्त छापा डालने के लिए वहां भेज दिया…
बच्ची अब भी बहुत घबराई हुई थी क्योंकि पंखुड़ी ने जब उससे यह सवाल किया कि वह भीख मांगने की जगह किसी भी इंसान से मदद क्यों नहीं मांगती थी तो जो जवाब उस बच्चे ने दिया वह सुनकर पंखुड़ी क्या शेखर की भी आंखों में आंसू आ गए…
उस बच्ची के साथ साथ वहां मौजूद जितने भी बच्चे थे उन सब को बहुत डरा धमका कर रखा गया था उनमें से अगर कोई भी किसी सामान्य इंसान से अपनी असली पहचान बताकर मदद मांगता हूं तो पकड़े जाने पर उनके साथ रहने वाले बड़े लोग उनके साथ बहुत बेरहमी से पेश आते थे कई बार जलती हुई सलाखें उनके हाथों पर रख दी जाती थी रोटी सेकने वाले चिमटे से उनके पीठ को जलाया जाता था और न जाने कितने तरह के टॉर्चर बच्चों को झेलने पड़ते थे.. इसी डर से वह बच्चे सच बोलना ही भूल गए थे और उन लोगों ने इस तरह से भीख मांगने को ही अपनी नियति मान ली थी वह सारे लोग यह भूल चुके थे कि उनका कोई असली घर बार भी था इनमें से बहुत से बच्चे ऐसे थे जिन्हें सिर्फ 2 या 3 साल की उम्र में ही किडनैप करके इस गिरोह के द्वारा यहां पहुंचा दिया गया था…
उनमें से अधिकतर को तो अपना असली नाम भी याद नहीं था जारा को अपना नाम याद रह गया था क्योंकि उसे अपना यह नाम बेहद पसंद था…

     शेखर ने तुरंत ही अपने लेवल पर कुछ एक लोगों को फोन कॉल किया और कुछ जानकारियां इकट्ठी करने लगा उसने फोन रखने के बाद पंखुड़ी को बताया कि कुछ आसपास के राज्य ऐसे थे जहां से विगत कई वर्षों में बच्चों की गायब होने  की खबरें आई थी लेकिन यह बच्चे कहां गए इनका क्या हुआ इस बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल सकी थी लेकिन…

उस औरत को पकड़कर पुलिस के हवाले किया जा चुका था इसके अलावा अड्डे पर छापामारी करने के बाद वहां से बरामद लोगों को भी लेकर पुलिस की टीम थाने पहुंच गई थी…
शेखर ने उन लोगों को जरूरी इंस्ट्रक्शन देने के बाद वहां के पुलिस कमिश्नर से सारी बातें तय की और उसके बाद पंखुड़ी की तरफ मुड़ गयी…

” फिलहाल के लिए इस बच्चे को बाल सुधार गृह में रखवा देता हूं और जैसे ही उसके माता-पिता का पता चलेगा वह इसे आकर ले जाएंगे..!”

पंखुड़ी ने हा में गर्दन तो हिला दी लेकिन जाने क्यों उसे उस बच्चे पर बहुत ममता आने लगी थी और उसे इस तरह भेजने का मन नहीं कर रहा था…

” शेखर जी अगर बुरा ना माने तो इस लड़की को मैं अपने साथ ले जाऊं..? जैसे उसके माता-पिता के बारे में पता चलेगा आप मुझे इन्फॉर्म कर दीजिएगा मैं इसे उनके साथ भेज दूंगी..!”

” आर यू श्योर.. ? आपको कोई दिक्कत तो नहीं होगी? आप खुद दिन भर अस्पताल में रहती हैं ऐसे में इस बच्ची का अकेले रहना कि ठीक होगा..?”

” मैं इसे अपने साथ अस्पताल ले आया करूंगी..!  यह मुझे बहुत डरी सहमी सी लग रही है इस वक्त पर अगर इसे बाल सुधार गृह भेजा जाता है तो कहीं वहां के बच्चों के साथ  का इस पर कोई गलत असर ना पड़ जाए.. आप इस बात को समझ सकते हैं कि बाल सुधार गृह में भी ऐसे बच्चे ही भेजे जाते हैं जिनमें सुधार की जरूरत होती है..!”

” ठीक है पंखुड़ी जी जैसा आपको ठीक लगे, लेकिन इसे आपके पास रखने के लिए कुछ फ़ॉर्मेलिटीज़ की ज़रूरत पड़ेगी… वो मैं पूरी करवा दूंगा…
      मैं एक बात कहना चाहता था, आप बहुत निडर है और बहुत ही सशक्त लड़की है…  ज्यादातर लड़के भी ऐसे केस देखकर अवॉइड कर जाते हैं, लेकिन आपने आगे बढ़कर उस बच्चे की मदद की… पूरी तरह से उन दोनों मां बेटी पर नजर रखते हुए मुझे सही समय पर बुलाया और एक बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने में हमारी पुलिस की बहुत मदद की है…. इस सब के लिए धन्यवाद !!”

पंखुड़ी मुस्कुरा कर रह गयी…
शेखर अब भी उसके सामने चुपचाप खड़ा था,  दोनों ही अब चुप खड़े थे.. आखिर पंखुड़ी ने ही बात आगे बढ़ाई….

क्रमशः

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