जीवनसाथी- 2/34


जीवनसाथी -2 भाग -34

   दस्तक सुन कर शेखावत खुद दरवाज़े तक पहुँच चुका था…
  इस तरह बाहर से दरवाज़ा खुलने से नाराज़ शेखावत सामने खड़े वासुकी को देख अचानक कुछ समझ नहीं पाया… गुस्से में वो उस पर और मैनेजर पर उबलने वाला था कि वासुकी ने उसे अपने एक हाथ से किनारे किया और तेज़ी से अंदर दाखिल हो गया…

    लेकिन वासुकी ने अंदर जो देखा कि उसका  दिमाग सांतवे आसमान पर पहुँच गया…..
   गुस्से से मुट्ठियाँ भींचता वो पलटा और शेखावत कि तरफ बढ़ गया…

  शेखावत के चेहरे पर अपना घूंसा तानते हुए वो रुक गया… उसके साथ ही आया दर्श भी अंदर कि तरफ बढ़ने को था कि वासुकी ने दर्श के सामने हाथ रख उसे रोक दिया..
  दर्श समझ गया कि अंदर बाँसुरी नहीं हैं…
अंदर आधे अधूरे कपड़ों में पड़ी कोई विदेशी लड़की  जो अब से कुछ देर पहले तक पार्टी में इधर से उधर घूम कर लोगो को ड्रिंक सर्व कर रहीं थीं वासुकी को देखते ही चौंक गयीं थीं…
   और उसे देखने के बाद वासुकी कि नजर उसी खिड़की से नीचे पार्टी में लोगो से मिलती जुलती, बात करती शेखावत कि बीवी पर पड़ गयीं थीं…
   गुस्सा सर पर सवार होने के बावजूद बाँसुरी वहाँ नहीं हैं इसी बात कि तसल्ली थीं उसे और इसलिए उसने शेखावत को मारा नहीं…
  वो वहाँ से निकलने को हुआ कि गुस्से में कांपते शेखावत ने ही उस पर बरसना शुरू कर दिया…

“वासुकी !! अच्छा नहीं किया तूने… तुझे तो अब मैं देख लूंगा.. !”

“अभी देख लें.. देखने लायक हूँ भी मैं.. !”

दाँत पीसते हुए शेखावत ने उसके मुहं पर दरवाज़ा बंद किया और वासुकी वहाँ से निकल गया…

  अब भी उसके मन से चिंता के बादल छंटे नहीं थे… यहाँ नहीं थीं तो आखिर थीं कहाँ बाँसुरी…

वो वापस दर्श के साथ नीचे कि तरफ भागा….
इधर से उधर भागते हुए वो बाँसुरी को ढूँढ रहा था कि तभी गार्डन में पीछे कि तरफ उसे किसी के खिलखिलाने कि आवाज़ आई…
  वो पेड़ पौधे हटाते हुए वहाँ से आगे कि तरफ बढ़ा… कुछ आगे जाकर बाँसुरी अपने मोबाइल को सामने किये वीडियो कॉल पर किसी से बात करने में व्यस्त थीं…
   वासुकी और करीब गया और उसने झांक कर देखा,  दूसरी तरफ स्क्रीन पर राजा साहब कि गोद में बैठा शौर्य था,  जो अपनी मम्मी से कहानी सुने बिना खाना नहीं खाऊंगा कि ज़िद पे अड़ गया था… इसी कारण राजा साहब ने बाँसुरी को कॉल किया था… हालाँकि उन्हें भी मालूम था कि इस वक्त बाँसुरी किसी पार्टी में आई हुई हैं लेकिन शौर्य कि ज़िद के आगे एक पिता को झुकना ही पड़ गया था…
   बाँसुरी बहुत प्यार से शौर्य को कहानी सुना रहीं थीं… और राजा मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था… शौर्य बीच बीच में कुछ सवाल कर लेता और कहानी ट्रैक पर से उतर जाती, लेकिन फिर बाँसुरी कहानी सुनाने लगती…
   वासुकी ने ये देख कर एक गहरी सी राहत कि साँस ली और ज़रा पीछे हट कर खड़ा हो गया… वो ऐसे खड़ा था कि मोबाइल के कैमेरा में भी नजर ना आये..

   उसी वक्त भागता हुआ दर्श भी वहाँ आ पहुँचा.. उसे इशारे से वासुकी ने शांत करवाया और उसके भी चेहरे पर बाँसुरी को दूर बैठे देख राहत के भाव चलें आये…

****

    महल से फ़ोन आने के बाद समर थोड़ा ज्यादा ही हड़बड़ी में था.. जल्दी से खाना खत्म कर सबके निकलने के साथ ही वो भी महल के लिए निकल गया…
   
     महल के ऑफ़िस में उसका असिस्टेंट उसका इंतज़ार कर रहा था… उसे चिंतित देख समर उसके करीब पहुँच गया…

“क्या हुआ शलभ ? इतने स्ट्रेस में क्यों हो.. ?”

“सर ! अकॉउंट में बहुत सारी मिस्टेक्स आ रहीं हैं.. !”

“क्या हुआ हैं… ?”

“सर पार्टी कार्यालय के नाम पर इधर पिछले कुछ दिनों से बहुत सारा पैसा निकाला जा रहा है… इस पैसे का हिसाब किताब पूछने पर यही कहा जाता है कि कार्यालय के लिए निकाला गया फंड है..
      पार्टी फंड के नाम पर निकालने में राजा साहब या  किसी के साइन की जरूरत भी नहीं होती और इसीलिए आपकी या राजा साहब या की अनुमति के बिना भी खजांची को पैसे निकाल कर देना पड़ता है.. और उसकी पर्ची निकालने वाला या तो अपने उटपटांग दस्तखत करता है,  जिसे पहचाना नहीं जा सकता या फिर राजा साहब की सील लगाकर ही ले आता है…  
  
  पार्टी फंड के नाम पर मनमाना पैसा तिजोरी से  निकाला जा रहा है और उसका हिसाब पूछने की भी मनाही है…
   कल को युवराज सा हुकुम या राजा साहब अगर हिसाब लेने आ गए तो आपके और हमारे पास कोई हिसाब नहीं रह जाएगा..
   और इस सब के पीछे उन कार्यकर्ताओ को पूरी शह मिली हुई है… !”

” मैं जानता हूं इस सब के पीछे कौन है..?”

शलभ ने समर की बात सुनकर सहमति जताते हुए नीचे सर झुकाया और इसके साथ ही उसने अपनी टेबल की दराज से पीले  रंग का छोटा सा एनवलप  निकालकर समर की तरफ बढ़ा दिया…..

“आपके लिए गुरुदेव के आश्रम से चिट्ठी आई हैं.. !”

समर चिट्ठी का ज़िक्र सुनते ही चिंतित हो गया.. उसने तुरंत शलभ के हाथ से चिट्ठी ली और पढ़ने लगा…

चिट्ठी में ज़्यादा कुछ नहीं था.. बस एक पंक्ति लिखी थीं और वही समर कि चिंता का मुख्य कारण बनी थीं…

“संकट अभी टला नहीं हैं…. राजा से कहो, तुरंत  आकर मिले !”

समर ने कुछ सोचते हुए उस चिट्ठी को अपनी जेब के हवाले किया और बाहर निकलने लगा…

“इन अकाउंट्स का क्या करना हैं सर.. ?”

“आज के बाद मेरे साइन किये बिना पार्टी कार्यालय के लिए कोई कैश यहाँ से नहीं निकलेगा.. !”

समर ने जाते जाते ही कहा और शलभ के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान चली आयी…

ऑफ़िस के बाहर वाले हिस्से में लगभग चालीस कर्मचारी बैठे अपना अपना काम देख रहें थे.. उन लोगो के दूसरी तरफ बने गलियारे को पार कर समर तेज़ी से राजा के ऑफ़िस कि तरफ बढ़ते बढ़ते उस लम्बी चौड़ी सी विशाल गणेश प्रतिमा के सामने पल भर को ठहर गया…

“अब आप ही रास्ता दिखाईये विघ्नहर्ता ! महल इस वक्त चारों तरफ से मुश्किलों से घिरा हुआ हैं.. !”

समर ने गणपति के सामने माथा टेक कर अपने कदम राजा के दफ्तर कि तरफ बढ़ा दिये…
  राजा के दरवाज़े पर दस्तक दें वो अंदर चला आया… राजा खुद किसी फाइल को देखने में व्यस्त था..

“हुकुम…  गुरु जी का संदेश आया हैं आपके लिए.. !”

राजा ने समर कि तरफ देखा और समर ने अपने जेब से निकाल कर वो पत्र राजा के सामने रख दिया…

पत्र पढ़ कर राजा के चेहरे पर भी चिंता कि लकीरे खिंच गयीं…

“गुरुदेव ने तुरंत बुलाया हैं… !”

“जी हुकुम !”

” ठीक हैं समर, उन्हें सन्देश भिजवा दो कि अगले हफ्ते मैं उनसे मिलने पहुँच जाऊंगा.. ! आज शाम कि उनकी संध्या पूजन के बाद एक बार उनसे फ़ोन में भी बात कर लूंगा… मेरे जाने कि तैयारियों को देख लेना.. मैं और प्रेम.. !

” हुकुम !! मैं भी चलूँगा आपके साथ.. इस वक्त आपके साथ मेरा और प्रेम दोनों का होना ज़रूरी हैं.. !

“तुम रहने दो समर.. ! तुम्हारी अभी अभी शादी हुई हैं..तुम अभी अपने घर परिवार पर ध्यान दो… मैं देख लूंगा.. !”

” हुकुम गुस्ताखी माफ़ करें.. पर आपको अकेले नहीं जाने दें सकता.. !”

“प्रेम अकेले जाने देगा क्या मुझे… ?”i

“फिर भी.. ! मैं साथ चलूँगा.. !”

” ठीक हैं ! आज रात युवराज भैया से भी इस बारे में बात कर लूंगा… बाँसुरी के गार्ड्स से टच में हो ना..
  सिक्योरिटी को लेकर उससे कुछ बात हुई थीं मेरी… तुमसे भी हुई क्या.. ?”

“जी हुकुम ! रानी साहेब वहाँ पूरी तरह सुरक्षित हैं ! वो इस वक्त ऐसी जगह हैं कि कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सकता.. !”

   राजा के चेहरे पर कई रंग आकर चलें गए…

“ठीक हैं समर अगले हफ्ते जाने कि तैयारी कर लो….

*****

  वासुकी अपने ऑफ़िस में बैठा कुछ सोच रहा था कि
दर्श नेहा को साथ लिए वहाँ चला आया…

“क्या सोच रहें हो वासुकी.. ?”

“हम्म ! यहीं सोच रहा था कि प्लान एक्सीक्यूट करने का समय आ गया हैं… नेहा तुम तैयार हो… ?”

नेहा ने वासुकी कि तरफ देखा और फिर दर्श की तरफ देखने लगी… और फिर अपने मन की बात वासुकी से कह बैठी

“लेकिन वासुकी तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हारे इस प्लान के पूरा होने में बहुत सी परेशानियां आ सकती हैं… !”

“जैसे.. ?”

“जैसे किसी ने अगर पहचान लिया तो… ?”

“ऐसे कैसे पहचानेगा.. ? इतने दिन से तैयारियाँ कि जा रहीं हैं… इतना सोच समझ कर सब किया है.. प्लान फेल तो हो ही नहीं सकता… !”

“और इस चेहरे का क्या करोगे… ?”

नेहा ने अपने चेहरे के चारों तरफ उंगली घुमा कर पूछा…

” बदल देंगे…!”

” लेकिन कैसे..?”

” प्लास्टिक सर्जरी से..!”

वासुकी कि बात पर नेहा उसे घूरने लगी…

” यह कोई फिल्म नहीं है वासुकी मेरी जिंदगी है… माना कि तुम इस बात का पूरी तरह से फायदा उठा रहे हो कि मैं तुमसे प्यार करती हूं.. लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि तुम मेरी शक्ल ही बदल दो, और तुम्हें क्या लगता है सिर्फ शक्ल बदलकर अगर तुम मुझे वहां भेज भी देते हो… तो मेरी आवाज, बातचीत करने का तरीका, चलने फिरने का तरीका, देखकर क्या वह लोग मुझे पहचान नहीं जाएंगे…?”

” आखिर इतने दिन से मैं तुम पर मेहनत क्यों कर रहा हूं नेहा…? तुम्हें क्या लगता है, तुमसे मेरी पहली मुलाकात इत्तेफाकन हुई थी…?”

” नहीं मैं जानती हूं मुझे दर्श ने कांटेक्ट किया था.. और उस वक्त मुझे तुम से जुड़ी बहुत ही भावुक सी कहानी भी सुनाई थी कि मानसिक रूप से परेशान दर्श साहब के दोस्त को किसी खास दोस्त की जरूरत है..!

” हां वहां तक तो ठीक था लेकिन दर्श ने तुम्हें यह सब कहने के साथ साथ तुम्हारा फ्रेंडबुक का प्रोफाइल मेरे सामने भी खोल कर रख दिया था.. और तुम्हारी तस्वीरें देखकर ही मैंने दर्श को तुम्हें बुलाने के लिए कहा था ! वरना मेरी मर्जी के खिलाफ कोई लड़की मेरी कमीज पर अपनी ड्रिंक गिरा दें और फिर टिशू से खुद साफ करने लगे इतना तो मैं किसी को अलाउ नहीं कर सकता ..! किसी की इतनी ज़ुर्रत नहीं की मुझे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ छू लें..
तुम्हें क्या लगा था तुम्हारी ड्रिंक मेरी कमीज पर गिरी, तुम मेरे पीछे-पीछे जेंट्स टॉयलेट तक चली आई..  उसके बाद मैंने तुमसे इतनी ढेर सारी बातें भी कर ली.. तुम्हें लगा इन सब के पीछे तुम्हारी कॅरिज़मेटिक परसनैलिटी है… ?
    इस सब के पीछे जो कारण था, वो वही था जो आज तुम्हारे सामने आ चुका है…!”

नेहा एक ठंडी सी सांस छोड़ कर चुप रह गई….
वासुकी से क्या कहती कि वह भले ही दर्श के कहने पर मोटे पैसों के लालच में वासुकी की जिंदगी में आई ज़रूर थी, लेकिन पहली बार वासुकी से मिलते ही वह पूरी तरह से उसके प्यार में पागल हो गई थी..
   और हर एक गुजरते दिन के साथ उसका वासुकी के लिए यह प्यार पागलपन में बदलने लगा था और अब तो हालत यह थी कि अगर वासुकी उसे आदेश दे दे कि वह पहाड़ी पर चढ़कर नीचे छलांग लगा दे, तो  नेहा हंसते-हंसते वो भी कर जाती….
     बस उसे अफसोस किसी बात का था कि उसका इतना ढेर सारा प्यार भी वासुकी को नजर क्यों नहीं आता… ? वासुकी की आंखों में क्यों बांसुरी का चश्मा चढ़ा था… ?

” नेहा मैं मानता हूं यह कोई फिल्म नहीं है, यह कोई टीवी सीरियल भी नहीं है.. लेकिन असल जिंदगी में ऐसी बातें होती हैं इसीलिए यह बातें फिल्मों और टेलीविजन का हिस्सा भी बनती है…!
मैं तुम्हें किसी तरीके के दबाव में नहीं रखना चाहता…. मुझसे अंधा प्यार करने के एवज में मैं तुम्हारी जिंदगी  गर्त नहीं कर सकता इसलिए आज आखरी बार पूछ रहा हूं…
क्या तुम अपने होशो हवास में मेरे इस प्लान में शामिल होने की सहमति देती हो… ?
और अगर तुम मेरे प्लान में शामिल होने की सहमति देती हो तो तुम्हें मेरे तैयार करवाएं इन दस्तावेज़ों पर दस्तखत करने होंगे…
         जिससे कभी बाद में अगर तुम किसी मौके पर जाकर मुकर जाओ तो प्लान फेल होने से पहले मैं तुम्हें मार सकूँ… !”

नेहा ने यह सुन कर अपनी आंखें बंद कर ली
.    उसके मन की पीड़ा सिर्फ वही समझ सकती थी… आज की नेहा और कुछ सालों पहले की नेहा में बहुत अंतर आ चुका था…
        उसकी महत्वाकांक्षा भी छोटी नहीं थी, वह अपने हिसाबों की जिंदगी जीना चाहती थी,अपने घर से दूर..
      इसीलिए वह अपने सपनों को पूरा करने इस नए शहर में आई थी.. उसका लक्ष्य ढेर सारे पैसे कमाना था ! एक राजसी जिंदगी जीना था, और इसी सबके लिए उसने कुछ एक बार अपनी इज्जत का सौदा भी किया हुआ था…!

कभी ऑफ़िस कि तरक्की के लिए बॉस के साथ अपने जिस्म का सौदा तो कभी किसी क्लाइंट के साथ…
  उसके लिए ये सब नया नहीं था लेकिन अपनी  25 साल की जिंदगी में उसे प्यार पहली बार वासुकी से ही हुआ था..

उसे क्या पता था कि उसे ऐसे निर्मोही से प्यार हो जाएगा जो वो अपना सर पत्थर पर भी पटक ले तब भी उससे प्यार नहीं कर पाएगा…

दोनों ही अपने आप में निराले थे… और दोनों में से कोई भी पीछे हटना नहीं चाहता था…

   ना वासुकी बांसुरी को भुलाने को तैयार था और ना नेहा वासुकी को भूलने को तैयार थी और उसके प्यार में पूरी तरह सराबोर नेहा अपना खुद का सही गलत सोचे बिना वासुकी जो कर रहा था सब कुछ मानने को तैयार थी..

” लाओ किन पेपर्स पर साइन करना है…?”

दर्श चौक कर नेहा को देखने लगा..

” नेहा मैं यही कहूंगा कि तुम एक बार सारे पेपर्स को ध्यान से पढ़ लो, देखो तुम्हें मैं यहां लेकर आया था इसलिए जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी जिम्मेदारी मुझ पर है..!”

” नो दर्श ऐसा कुछ नहीं है… मैं यह सब सोचने समझने के लिए पर्याप्त समझदार हूं ! मैं मेरी जिंदगी की जिम्मेदारी खुद लेती हूं,पच्चीस की हूँ, कोई बच्ची नहीं हूँ मैं ! मेरी जिंदगी में आज तक जो भी हुआ है, सही या गलत उसकी जिम्मेदार पूरी तरह से मैं हूं ! मैंने सिर्फ 19 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था मॉडलिंग के लिए… 
   मेरी कुछ ऐसे फोटोस अखबारों और मैगजींस में आए कि मेरे माता-पिता ने हमेशा के लिए मुझ से नाता तोड़ लिया और उसके बाद मुंबई की चकाचौंध में काम पाने की शर्ट मैंने मंजूर नहीं की और जगह जगह से ठोकरे खाने के बाद मैं मॉडलिंग भी कंटिन्यू नहीं कर पाई…
   अपनी आबरू उन भेड़ियों के बीच तो बचा ली लेकिन मुझे ऐसे झूठे आरोपों में फंसाया गया की उस शहर को छोड़ने के अलावा कोई मेरे पास और कोई चारा न बचा…
माँ बाप पहले ही रिश्ता तोड़ चुके थे, इसलिए घर भी नहीं बचा और अपना जीवन आगे बढ़ाने के लिए मुझे यहाँ आना पड़ा…
      मेरी किस्मत मुझे इस शहर में लें आयी…यहाँ मुझे मेरी खूबसूरती का फायदा मिला और एक अच्छी जॉब और अच्छी सैलरी मिल गई…
    लेकिन अनजाने में ही सही मेरे बॉस के चेहरे के पीछे भी वही भेड़िया छिपा निकला जिससे मैं बचती फिर रहीं थीं… मुंबई से जिस आरोप से बचकर भागी थीं वो जाने कैसे मेरे बॉस को पता चल गयीं.. और उसने उस बात का पूरा फायदा मुझसे उठा लिया…
   
     आज तक सब कुछ मैंने अपने हिसाब से किया है अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी है…

      लेकिन अब पहली बार है कि मैं किसी और की खुशी के लिए कुछ करना चाहती हूं.. और यकीन मानो दर्श ऐसा करने में अगर मेरी जान भी चली गई ना तो  मुझे इस बात की खुशी ही होगी…!”

वासुकी ने एक ठंडी सांस भरी और अपनी दराज़ से निकाल कर एक फाइल नेहा के सामने रख दी..

” ध्यान से पढ़ लो….इस  काम में आगे बहुत खतरा है..!”

” खतरों से खेलने के लिए, तुम मेरे साथ रहोगे ना..!”

” मैं कैसे…?  मैं अगर तुम्हारे साथ रहूंगा, तो यहां कौन रहेगा..?”

” मैं तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ने को तैयार हूं.. तुम्हारी मर्जी के मुताबिक अपना चेहरा तक बदलवाने को तैयार हूं, तुम जो बनाना चाहते हो वह बनने को तैयार हूँ..
   अपनी जिंदगी किसी और की जिंदगी से बदलने को तैयार हूं, और तुम मेरी इतनी सी शर्त पूरी नहीं कर सकते…
वैसे भी तुमने शुरूआत में ही कहा था कि यह कुछ सालों का मसला है और उसके बाद प्लान सक्सेसफुल होते ही हम सब अपनी अपनी जगह वापस लौट जाएंगे!”

वासुकी ने धीरे से हां में सर हिला दिया..

” ठीक है मैं कोशिश करूंगा कि तुम्हारे साथ मौजूद रह सकूं…
     लेकिन वादा नहीं कर सकता कि मैं हर वक्त तुम्हारे साथ मौजूद रहूँ..
क्योंकि मुझे यहां भी देखना तो पड़ेगा ही..!”

” मैं साइन करने के लिए मैं तैयार हूं वासुकी साहब, लेकिन साइन करने से पहले मेरी शर्त आपको पूरी करनी पड़ेगी…… बोलिए मंजूर है ?”

वासुकी ने धीरे से हां में सर हिला दिया…

*****

पिया आईने के सामने खड़ी अपने बाल संवार रहीं थीं कि समर ने आकर पीछे से उसे अपनी बाँहों में भर लिया…

“अब तक नाराज़ हो.. ?”

समर के सवाल पर पिया ने न में सर हिला दिया..

“पर शक्ल पर तो अब भी बारह बजे हैं ?”

“हाँ तो क्या करूँ.. ? जिसका पति लंच के बाद ये कह कर काम पे जाएं कि बस दो घंटे में वापस आ जाऊंगा और रात दो बजे वापस आये उसकी बीवी को तो ख़ुशी से गाने गाते फिरना चाहिए.. हैं न.. !”

“यार काम ही ऐसा फंस गया था… क्या करूँ.. ?”

“तो जाओ न काम ही करो… !”

“अच्छा सुनो न… शाम को एक सरप्राइज़ हैं तुम्हारे लिए… तुम्हारे दराज़ में कुछ रखा हैं तुम्हारे लिए…  लेकिन अभी मत देखना.. शाम को अस्पताल से आने के बाद उसे खोलना.. !”

चौंक कर पिया समर कि तरफ मुड़ गयीं…

“क्या हैं… ?”

“अरे कहा तो सरप्राइज़ हैं… ! शाम से पहले तुम कुछ मत देखना… !”

पिया के माथे को चूम कर समर ने उसे कस कर गले से लगा लिया, कुछ देर यूँ ही खड़े रहने के बाद वापस उसके गाल चूम कर वो बाहर निकल गया… -” जल्दी आ जाओ.. तुम्हें अस्पताल छोड़ते हुए मैं निकलूंगा.. !!

अलमारी कि तरफ बढ़ती पिया मन मसोस कर कमरे से बाहर निकल गयीं…

अस्पताल में उसका सारा दिन बस यही सोचते गुजर गया कि समर ने उसके लिए क्या सरप्राइज सोच कर रखा है…
        मन ही मन उसे गुदगुदी भी हो रही थी कि जाने उसके मंत्री जी ने उसके लिए क्या सोचा है..? वैसे तो मंत्री जी ऑलराउंडर है !  हर क्षेत्र का उन्हें कूट-कूट कर ज्ञान है ! चाहे वकालत की बात हो, बिज़नेस की बात हो या अकाउंट्स की..
     और तो और रियासत के सारे काम, सारी मुश्किलें भी चुटकियों में हल कर दिया करते है, बस एक रोमांस के मामले में जरा अनाड़ी साबित हो गए हैं…
    शादी को  4 दिन बीत चुके थे लेकिन एक ढंग की किस तक नहीं हुई थी दोनों हस्बैंड वाइफ के बीच…
अपने मन में समर के बारे में सोचते हुए ही पिया मुस्कुराने लगी और सामने बैठी नर्स ने उसे मुस्कुराते देखकर अपनी बाजू वाली नर्स को इशारा कर दिया…
आज शाम के समय अस्पताल और उसके स्टाफ ने भी पिया के लिए एक छोटी सी पार्टी अरेंज की थी…
वह सभी लोग अपने तरीके से पिया को बधाई देना चाहते थे…
शाम की ओपीडी निपटाने के बाद पिया ने जैसे ही अपना पर्स उठाया और अपने केबिन से बाहर आई  उसकी आंखें आश्चर्य से फटी रह गई…
..  उसके दरवाजे के बाहर से लेकर मेन डोर तक रास्ते में गुलाब की पंखुड़ियां बिछी हुई थी.
    छोटे-छोटे गुलाबी और सफेद बलून अस्पताल की दीवारों पर सजे हुए नजर आ रहे थे…
    ओपीडी केबिन के से लग कर ही फार्मेसी थी जहां बहुत बड़े-बड़े शब्दों में एक पोस्टर सजा हुआ था जिसमें पिया और समर को बधाइयां लिखी हुई थी…
  पिया वहां मौजूद सारे लोगों को देखकर खुश हो रही थी कि सारे स्टाफ ने एक साथ तालियां बजाते हुए उसके लिए बधाई गीत गाना शुरू कर दिया…

Congratulations And celebrations..
When she  tell everyone that she’s in love with he
Congratulations
And jubilations….

      वह जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई.. एक एक नर्स उसके पास आकर उसे तोहफा देती चली गयी…
    वहां पिया के कुछ मरीज भी मौजूद थे | कुछ छोटे बच्चे थे जो अस्पताल के गार्डन से ही फूल तोड़ कर उसके लिए ले आए थे |  सारे गिफ्ट हाथों में थामे मुस्कुराती हुई पिया मुख्य द्वार तक पहुंची थी कि, उसे रोक कर दोनों नर्स उसके लिए एक शानदार केक लेकर आ गयीं…

    रिसेप्शन की एक तरफ बने टेबल पर केक सजा कर रख दिया गया और सारे स्टाफ ने पिया को बीच में खड़े करके उसे चारों तरफ से घेर लिया…
पिया केक काटने जाने वाली थी एक नर्स ने उसे आगे बढ़कर रोक दिया…

” मैंम बस 5 मिनट रुकिए, एक स्पेशल गेस्ट का इंतजार करना है..!”

पिया को लगा शायद कुछ सीनियर डॉक्टर भी आने वाले होंगे इसलिए वो रुक गई, लेकिन 5 मिनट बीतते ही अपने शानदार अंदाज में समर वहां चला आया…
अपने व्यस्ततम कार्यक्रम से भी समय निकालकर समर पिया की पार्टी में शामिल होने चला आया था.. और इसलिए पिया उसे देखकर बेहद खुश थी..
    समर  जैसे ही पिया के पास आया, दोनों ने एक साथ छुरी को हाथ में लिया और सामने रखा केक काट दिया..
      केक काटते ही उन लोगों के ऊपर ढेर सारे गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश होने लगी…

अस्पताल में उस वक्त ड्यूटी में मौजूद सारा स्टाफ और कुछ एक मरीज भी मौजूद थे… सारे ही लोग उन लोगों पर दुआएं बरसाते हुए तालियां बजाने लगे…

पिया ने मुस्कुराकर अपने पास खड़ी सीनियर सिस्टर की तरफ देखा और जाने की अनुमति मांगने ही वाली थी कि समर ने उसे आगे बढ़कर उसे रोक दिया…

” अरे रुको अभी पार्टी खत्म कहां हुई है..?”

पिया आश्चर्य से समर की तरफ देखने लगी, क्योंकि उसे इस पार्टी के बारे में वाकई कुछ मालूम नहीं था…
उसी वक्त समर ने फोन निकालकर किसी को फोन किया और बस 5 मिनट में बाहर से कैटरिंग वाले वेटर  हाथों में खाने पीने का सामान लिए अंदर दाखिल होने लगे…
           उन लोगों को आते देखकर वहां मौजूद सारा स्टाफ भी चौक गया, क्योंकि इसके बारे में उन्हें भी कुछ मालूम नहीं था….
   असल में पिया का स्टाफ पिया को एक छोटी सी पार्टी देना चाहता था, और इसके लिए उन्होंने समर से बात करके समर को भी शाम के वक्त बुला लिया था |  पिया के स्टाफ का बस इतना ही प्लान था कि छोटा सा केक कटवा कर पिया को अपनी तरफ से गिफ्ट दे देंगे और वह लोग चाहते थे कि केक कटिंग के समय पिया के साथ समर भी मौजूद हो…
    स्टाफ से बात होने के बाद समर ने हामी भर दी कि वह बिल्कुल वक्त पर वहां पहुंच जाएगा, लेकिन इसके साथ ही समर ने अपनी तरफ से स्टाफ के  लिए खाने-पीने का भी प्रबंध कर लिया था जिसके बारे में उसने स्टाफ को भी नहीं बताया था…

पिया को जैसे ही उस सीनियर नर्स ने यह सारी बातें बताई, पिया भावुक हो गयीं… उसे नहीं लगा था कि समर उसके काम और उसके लोगों को इतना अधिक महत्व देगा… 
         उसे आज तक यही लगता था कि समर के लिए उसका काम ही महत्वपूर्ण है और बाकी दुनिया एक तरफ है !
     लेकिन आज जिस तरह से समर ने पिया के छोटे से अस्पताल और उसके स्टाफ के लिए पार्टी अरेंज की थी.. पिया यह सब देख कर बहुत भावुक हो गई थीं …
उसकी आंखें भरने को थी कि समर ने आकर कंधों से उसे अपनी तरफ समेट लिया…

”  नो वाईफी अभी रोना नहीं है…!  अब जाकर तो हमारी जिंदगी में खुशियों भरे दिन आए हैं..  इसलिए  इन दिनों को एंजॉय करो, और हाँ रातों को भी..!”

शरारत से मुस्कुराते हुए समर ने पिया को देखकर धीरे से अपनी एक आंख दबा दी और पिया मुस्कुराकर नीचे देखने लगी…

” तुम बात बात पर शर्मा क्यों जाती हो..?”

पिया ने ना में गर्दन हिला दी..

” सुनो..! तुम शाम के जिस सरप्राइज़ की बात कर रहे थे, वो यही था..?”

” एक्चुली..!! यह सरप्राइज की शुरुआत है.. यह पहला सरप्राइज था!  और इसके आगे भी तुम्हारे लिए ढेर सारे सरप्राइस बाकी है… तो अब हम यहां से चलते हैं..! सबसे पहले तो हमें अपने रूम पर जाना है, चेंज करना है और उसके बाद तुम्हारे लिए एक अगला सरप्राइज़ वेट कर रहा है..!”

पिया ने मुस्कुरा कर समर की तरफ देखा और अपने स्टाफ से एक बार फिर मिल कर वो दोनों बाहर निकल गए….

*****

क्रमशः

aparna…

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