जीवनसाथी -2/3

जीवनसाथी सीजन 2- भाग 3

    पिया ने अपना पर्स उठाया और  मॉल की तरफ बढ़ गयी..
मॉल की दुकान मीना बाजार उसकी भी पसंदीदा दुकान थीं,  वैसे तो उसका पहनावा ज्यादातर जींस और कुर्तियां या टॉप ही होता था पर क़भी उसे साड़ी या ट्रेडिशनल कुछ लेना हो तो वो यहीं आती थीं..
   वो दुकान तक पहुंची ही थीं की अंदर से दरवाजा खोल कर भावेश बाहर चला आया.. अपने ख्यालों में खोयी पिया को अचानक मिला ये सरप्राइज़ कुछ खास पसंद नहीं आया पर अपने मन के भाव चेहरे पर लाये बिना वो भीतर चली गयी…
   अंदर भावेश की बहन और उसकी मौसी ही बस साथ थे, इतने कम लोगों को देख कर पिया को राहत ही महसूस हुई, वरना अक्सर भावेश के साथ उसके परिवार की लगभग हर औरत मौजूद होती थीं…
  पिया को उसकी मौसी ने अपने पास बैठा लिया.. पिया जहाँ बैठी थीं वहाँ उसके ठीक सामने शॉप का लड़का कपड़े दिखाने के लिए बैठा था और उस लड़के के पीछे की दीवार पर एक लम्बा चौड़ा सा आईना लगा था..
   उस लड़के ने कपड़े दिखाने शुरू किये… एक गहरे नीले रंग की ज़री की साड़ी पिया को थोड़ी पसंद आ रही थीं,  उसे देखते ही उसने अपनी बाँह पर उसका आँचल फैला लिया.. जिसे देखते ही उसके पास बैठा भावेश चहक उठा..

“वाओ बहुत अच्छी लग रही हैं,  तुम्हारी चॉइस बहुत बढ़िया हैं.. “

पिया ने मुस्कुरा कर आँचल यूँ ही फैलाये हुए अपने सामने लगे आईने की तरफ देखा… अचानक उसकी नज़र अपने  पीछे खड़े  समर पर चली गयी.. समर वहीँ हैंगर में लगे कपड़ो को उलट पलट करता देख रहा था,  पर समर की नज़र पिया पर ही थीं.. जैसे ही पिया की नज़र समर पर पड़ी समर ने नाक सिकोड़ कर साड़ी सुंदर नहीं हैं का इशारा कर दिया..
  पिया ने समर को देख कर अपने चेहरे पर ऐसे भाव लाये जैसे उसे समर के वहाँ रहने न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता हो…

  लेकिन वो साड़ी दूर फेंक दी !

  मौसी के दिखाने पर उसने एक हरे रंग की साड़ी का आंचल फैलाया, और फिर न चाहते हुए  भी उसकी नज़र पीछे खड़े समर पर चली गयी.. इस बार भी समर ने वैसा ही मुहँ बना कर उसे साड़ी नहीं पसंद आने का इशारा दे दिया.. एक के बाद एक करते लगभग सात आठ साड़ियाँ पिया ने समर के चक्कर में नापसंद कर दी..
  समर ने उसी वक़्त हैंगर पर लगी रखी दो तीन हलके पेस्टल रंगों की नाजुक खूबसूरत सी  सिल्क साड़ियाँ उठायी और उस दुकानदार के सामने कर दिया…

“क्यों भई ये सब कैसे लगा रहे हो.. !”

“सर प्राइज तो फिक्स हैं,  वैसे आप लेना किसके लिए चाहते हैं,  उस लिहाज से आपको और साड़ियाँ दिखा  दी जाएँगी.. !”

“लेना तो बीवी के लिए ही हैं,  होने वाली बीवी !”

  पिया ने समर की बात सुन यूँ चेहरा घुमा लिया जैसे उसे समर की बातों से फर्क ही नहीं पड़ता,  लेकिन उसके कान पूरी तरह समर की बात पर ही टिके थे.. ..

“सर वाइफ के लिए लेनी हैं तो इतने हलके रंग क्यों देख रहें हैं,  कुछ गहरे रंग देखिये ना,  गहरा हरा,  नीला, मैरून, सलेटी.. !”

“नहीं !उस पर मुझे यहीं रंग पसंद आते हैं.. वैसे तो वो इतनी खूबसूरत हैं की हर रंग और हर ड्रेस उस पर जंचती हैं,  लेकिन मुझे इन्हीं रंगो में वो सबसे ज्यादा प्यारी लगती हैं.. प्यारी बहुत हैं बस जरा गुस्से वाली हैं.. !”

समर की बात सुन वो लड़का हँसने लगा… और समर की बात का कुछ जवाब देने जा रहा था की पिया ने उसे टोक दिया…

“आप इसी तरह गप्पे मारते रहेंगे या हम लोगों को भी ढंग का कुछ दिखाएंगे.. !”

“दिखा लो भाई,  तुम इन्हें ही दिखा लो.. अब हमारा साड़ी का मूड बदल गया हैं… कुछ और देख लेते हैं..”
  और समर दूसरी तरफ टँगे कपड़ो की तरफ बढ़ गया… 
  वो लड़का समर की लायी साड़ियाँ समेट कर दूसरी तरफ करने को था की पिया ने उसके हाथ से वो साड़ियाँ खींच ली..

“अगर उन साहब को नहीं लेनी तो क्या इन्हीं में से कुछ देख लूँ.. ?”

“देख लीजिये मैडम,  वो साहब तो दूसरी तरफ कुछ देखने लगे.. “

पिया ने समर की पसंद कर रखी सारी ही साड़ियाँ पैक करवा ली…
   बिल देने के वक़्त पर भावेश ने तुरंत अपना कार्ड निकाल कर आगे बढ़ा दिया, लेकिन पिया ने उसे रोक दिया..

“सॉरी भावेश लेकिन बिल मै खुद दूंगी !”

“, अरे क्यों ? आप हमारी होने वाली वाइफ हैं,  आपके कपडे तो हम ही लेकर देंगे ना.. !”

“मेरे कपड़ो का बिल आप  तब पे करना जब वो आपकी चॉइस के हों,  ये तो फ़िलहाल मेरी पसंद के कपड़े हैं इसलिए बिल मै ही दूंगी.. !”

“तुम्हारी भी कहाँ.. ?ये तो उस सरफिरे से लड़के के पसंद किये कपड़े थे जिन्हे यूँ ही छोड़ चला भी गया वो.. !”

  भावेश की मौसी ने अपनी बात कही और अपने हाथ के बैग्स झूलाती भावेश की बहन के साथ बाहर निकल गयी… भावेश ने अपनी बहन और मौसी का बिल पे किया और पिया का इंतज़ार करने लगा.. पिया ने भी अपना कार्ड आगे बढ़ा दिया..

“मैडम इन कपड़ों का बिल तो पहले ही पे किया जा चुका हैं.. ?”

“अरे लेकिन ऐसे कैसे.. ? फिर मै इन कपड़ों को रख नहीं पाऊँगी.. !  किसने पे किया.. ?”

“वही साहब जिन्होंने पसंद किया था,  बिल के पैसे भी दे गए.. यहाँ हमें लगा आप दोनों साथ ही हैं.. !”

पिया से अचानक कुछ कहते नहीं बना की भावेश ने बात संभाल ली..

“कोई बात नहीं पिया,  हम सामान ले चलते हैं, और उस बन्दे का नंबर भी.. उसके घर जाकर या फ़ोन पर तुम उसे पैसे वापस कर देना..
.. भाई उस कस्टमर का नंबर दे सकते हैं क्या.. ?”

“सर वैसे तो हमारी पॉलिसी के खिलाफ है लेकिन इतना बड़ा ब्लंडर हो गया हैं तो ज़ाहिर हैं वो साहब भी जाने क्या सोच रहे होंगे.. मालूम नहीं कैसे ये गड़बड़ हो गयी की पैसे देने के बावजूद वो साहब अपना सामान छोड़ गए.. हमें वाकई ऐसा लगा था की ये  मैडम उन साहब की बीवी हैं.. !”

पिया ने घूर कर मैनेजर को देखा और उसने अपने कान पकड़ लिए.. -” सॉरी मैडम ! ये रहा उनका नंबर.. !”

पिया ने तो नहीं बल्कि भावेश ने समर का नंबर नोट कर लिया.. और वो दोनों वहाँ से बाहर निकल गए.. बाहर निकलते ही भावेश ने समर को फ़ोन लगा दिया और उससे मिलने की बात भी कह दी..
समर ने मॉल में ही का एक रेस्टोरेंट बता कर उन लोगों को वही बुला लिया…
   पिया भावेश उसकी मौसी और बहन के साथ वहाँ पहुंचे तो समर पहले से वहाँ बैठा उन्ही का इंतज़ार कर रहा था…
  भावेश और समर में कुछ औपचारिक परिचय के बाद  बातें शुरू हो गयी…
भावेश की बहन की नज़रे समर से हट नहीं पा रही थीं और उस पर समर एक से बढ़ कर एक किस्से सुना रहा था.. भावेश ने समर को देखा और कह उठा

“वैसे आपने वहाँ शॉप पर सारा पेमेंट कर दिया था और अपना सामान भी गलती से वहीँ भूल गए… हम लोग बस वही देने आये थे.. ! आप अपना सामान रख लीजिये फिर हम सब निकलते हैं… “

“अरे ऐसे कैसे निकलते हैं.. ? अभी तो मुलाक़ात हुई हैं,  और मै इतना बोर भी नहीं हूँ.. मेरी कंपनी आपको पसंद आएगी,  आइये बैठ कर साथ में कुछ खा पी लेते हैं,  फिर निकल जायेंगे.. !”

समर की बात पर भावेश ने पिया को देखा..

“नहीं वो.. कहीं इन्हें देर ना हो जाये.. क्यों पिया जी.. ?”

पिया ने भावेश को देख कर कंधे उचका दिए.. और कुर्सी खींच कर बैठ गयी…

मन ही मन वो बहुत  कुढ़ रही थीं.. पहले जब क़भी वो समर के साथ डेट पर जाने की सोचती थीं,  उसी वक़्त इस पागल सनकी को कोई न  कोई काम आ पड़ता था और अब देखो कैसे फुरसतिया बैठा हैं,  जैसे कोई काम न हो.. ! अब कहाँ गया इसका महल और महल के लोग.. ?

समर ने भावेश और बाकी लोगों की तरफ देख कर सभी से पूछ लिया..

“क्या लेंगे आप सब.. मुझे तो सिज़्लर लेना पड़ेगा,  वो असल में मेरी वाईफ़ी को बहुत पसंद हैं,  अब उसके साथ रहते रहते मुझे भी पसंद आने लगा हैं.. आप लोग अपना ऑर्डर बता दीजिये.. !”

सभी अपना ऑर्डर देने लगे,  भावेश ने पिया से भी पूछ लिया.. -” आप क्या लेना पसंद करेंगी पिया जी !”

“मुझे भूख नहीं हैं, आप लोग लीजिये,  मै बस कॉफ़ी लुंगी.. !”

समर ने तब तक में वेटर को बुला कर सभी का कहा ऑर्डर दे दिया था… सभी के ऑर्डर के साथ ही उसने एक कड़क फ़िल्टर कॉफ़ी भी ऑर्डर कर दी…

“फ़िल्टर कॉफ़ी चाहिए थीं क्या तुम्हें.. ?”

भावेश के सवाल पर पिया ने उसे घूर कर देखा.. -“आज तक जब भी बाहर आये हैं फ़िल्टर कॉफ़ी ही तो पी हैं मैंने.. !”

“ओह्ह सॉरी पिया जी,  शायद हमारा ध्यान नहीं गया.. “

पानी पीते हुए समर को अचानक खांसी सी आ गयी.. असल में वो पिया की झल्लाहट देख कर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था..
  भावेश ने पिया से ध्यान हटा कर समर पर ध्यान लगा लिया…

“क्या अजब इत्तेफाक हैं,  आज पहली ही बार आपसे मिलना हुआ हैं और लग रहा जैसे हम बरसों से आपको पहचानते हैं.. !”

“बिलकुल, ऐसा ही कुछ मुझे भी लग रहा.. !”

“वैसे करते क्या हैं आप ?”

“बस यहीं मत पूछिए.. मेरे काम से परेशान होकर ही तो मेरी बीवी मुझसे रुठ कर मुझसे दूर जा बैठी हैं.. अब सोच रहा हूँ काम धाम सब छोड़ कर उसे मना लेता हूँ.. !”

“आप जैसे इंसान से भी कोई रुठ सकता हैं भला.. ?बड़ी बेवकूफ़ होंगी जो आपसे रुठ गयी.. ?” 

  भावेश की बहन ने ऑंखें नचा कर कहा और समर को ज़ोर से हंसी आ गयी..

“नहीं बेवकूफ़ तो हरगिज़ नहीं हैं.. बहुत प्यारी हैं बस गुस्से वाली थोड़ी ज्यादा हैं.. गुस्सा हमेशा उसकी नाक पर रहता हैं,  बस इसलिए जरा नाराज हो गयी हैं,  पर मुझे यक़ीन हैं मै उसे मना ही लूंगा.. !”

  इन सब की बातों के बीच पिया अपनी जगह पर खड़ी हो गयी उसने भावेश की तरफ देखा..

“मै वाशरूम से आती हूँ.. !” और वो वहाँ से बाहर निकल गयी..

उसके निकलने के कुछ पांच मिनट बाद ही समर ने अपना फ़ोन निकाला और कान से लगाए बाहर निकल गया.. जाते जाते उसने भावेश को दो मिनट में वापस आ रहा हूँ का इशारा कर दिया…

समर तेज़ क़दमों से बाहर निकल कर वाशरूम की तरफ जा रहा था की पिया की आवाज़ उसके कानों में पड़ी…

“उधर किस तरफ जा रहे हैं मंत्री जी.. मै इधर हूँ !”

उसकी आवाज़ सुनते ही समर रुक गया.. उसने पिया की तरफ देखा और तुरंत उसका हाथ पकड़ कर पास ही रुकी लिफ्ट की तरफ ले गया..
  लिफ्ट में उस वक़्त कोई नहीं था.. लिफ्ट के अंदर पिया को खींच कर समर ने लिफ्ट में सबसे ऊपरी मंज़िल का बटन दबा दिया..

” ये क्या बदतमीज़ी हैं.. ?”

“ये बदतमीजी नहीं प्यार हैं.. !” और समर ने पिया को खींच कर अपने सीने से लगा लिया..

“पागल हो गए हैं क्या.. ? बाहर भावेश और उसका परिवार क्या सोचेगा मेरे बारे में.. ?”

“अगर उनके सोचने की तुम्हें परवाह होती तो तुम मेरी पसंद की हुई साड़ियाँ उठा कर नहीं ले जाती.. ?”

“वो तो ऐसा था की वो साड़ियाँ मुझे भी पसंद आ गयी थीं.. !”

“जैसे मुझे तुम पसंद आ गयी हो.. !”

समर पिया के चेहरे पर झुकने को था की अपने मन को मजबूत कर पिया ने उसे खुद से दूर धकेल दिया..

“आज चाहे खुद से दूर कर लो डॉक्टर साहिबा,  लेकिन कितने दिन इन बाँहों से दूर रह पाओगी.. आना तो तुम्हें इन्हीं बाँहों में हैं.. !”

“ये सारी बातें आप दूर खड़े रह कर तमीज़ से भी कर सकते हैं.. !”

“दूर खड़े रह कर तमीज से बात करनी होती तो तुम्हें यहाँ लिफ्ट में क्यों लेकर आता भला.. !”

“जब इतनी ही मुहब्बत थीं तो मुझे खुद से अलग होकर जाने क्यों दिया.. उसी वक़्त रोक क्यों नहीं लिया.. ?”

“उस वक़्त की मुश्किलें तुम भी जानती हो पिया.. !हुकुम का चुनावी कैरियर दांव पर लगा था,  रियासत में इतनी बातें एक साथ चल रही थीं,  विराज अपने  लोगों को लेकर अलग जाने की धमकी दे रहा था.. इस सब के बीच..

” बस मै ये महल पुराण सुनने के लिए यहाँ नहीं खड़ी हूँ… मुझे उसी वक़्त ये समझ में आ गया की हमारा कोई भविष्य नहीं हैं.. !”

और पिया ने लिफ्ट का दरवाजा खोल दिया.. समर ने उसकी बाहें पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच कर उसे वापस अपनी बाँहों में ले लिया…

“भविष्य तो तुम्हारा यहीं हैं मेरी बाँहों में,  चाहे कितनी तरकीब लगा लो लेकिन इस भावेश में इतना आवेश नहीं हैं की मेरी पिया को झेल सके.. !”

पिया ने समर को खुद से दूर किया और अपनी सांसो को संभालती वहाँ से निकल कर रेस्टोरेंट में पहुँच गयी…
भावेश और बाकी लोग खाने में व्यस्त थे.. उसने जाते ही अपना पर्स उठाया और वहाँ से निकलने लगी..

” सॉरी भावेश जी, अस्पताल से फ़ोन था एक जरुरी केस आ गया हैं,  मै निकलती हूँ,  बाद में मिलते हैं.. !”

  पिया ने मौसी जी को नमस्ते किया और वहाँ से निकल गयी.. अपनी आँखों के आँसू वो सबको दिखाना नहीं चाहती थीं…
  लाख कोशिशों के बावजूद उसकी आँखों से आँसू बरसने लगे… और वो उन्हें पोंछती वहाँ से बाहर निकल गयी.. उसके जाते ही समर वहाँ आ बैठा और भावेश से बातों ही बातों में उसका नंबर लेकर उसे अपना नंबर भी दे दिया…

  समर भी उठने को था की उसका फ़ोन घनघना उठा.. फ़ोन महल के ऑफिस से था.. उसे महल तुरंत बुलाया गया था…
  राजा साहब उससे कुछ जरुरी बातें करना चाह रहे थे.. राजा अजातशत्रु का नाम आये और उसके बाद समर कहीं वक़्त बर्बाद करता बैठा रहे ये तो  संभव ही न था..
वो तुरंत ही उन लोगों से विदा ले कर महल के लिए निकल गया…

राजा साहब को ज्यादा प्रतीक्षा करवाना उसके लिए सही नहीं था इसलिए तेज़ी से गाड़ी भगाता समर महल की तरफ बढ़ गया…

क्रमशः

aparna…..

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