
जीवनसाथी -3 भाग -89
शौर्य उस लड़के के गले से लगा और उसके कंधे थपथपा कर आगे बढ़ गया….
प्रियदर्शिनी अपने अलग ही एटीट्यूड में थी, उसे इस तरह शौर्य “द प्रिंस” का “कॉमन पीपल” से यूँ घुल मिल कर बात करना पसंद नहीं आ रहा था, और वो सोच ही रही थी कि शौर्य को इस बात पर टोकेगी, तभी बच्चो की एक टोली भाग कर आयी और शौर्य के सामने खड़ी हो गयी…
ये सारे बच्चे लगभग सात आठ साल से लेकर तेरह चौदह के बीच के थे। सभी ने पास के किसी स्कूल का यूनिफॉर्म पहन रखा था, लेकिन उन्हेँ देख कर साफ़ समझ में आ रहा था कि वो बच्चे आसपास की किसी गरीब बस्ती के थे..
शौर्य उन्हेँ देखने लगा और वो सब एक सीध में रुक कर उसे सेल्यूट करने लगे..
“अरे बस बस.. इतना सम्मान क्यों ?”
“भैया आपने पहचाना नहीं हमें ?” उनमे से एक बोल पड़ा..
शौर्य ध्यान से देख कर पहचान गया..
“कैसे भूलूंगा, तुम सब के साथ तो मैंने गाना गया था ना.. उस दिन तुम लोगों को अपने फादर के लिए गिफ्ट लेना था ना.. ले लिया ?”
“ले लिए भैया जी, और पापा को गिफ्ट बहुत पसंद भी आया.. उसके लिए आपको थैंक यु.. !”
“अरे इसमें थैंक्स की क्या बात ? मुझे खुद गाना बहुत पसंद है बस इसलिए तो गाया था !”
“आप बहुत अच्छा गाते हो भैया !”, उन्ही में से एक छोटे बच्चे ने कहा..
“उस दिन जो दीदी थी, आपके साथ वो कहाँ गयी ?” एक छोटी बच्ची ने पूछा और एक गहरी सी साँस लेकर शौर्य ने उस बच्ची का सर सहला दिया..
“वो… वो अपने घर चली गयी.. !”
“पता है भैया, हमारे स्कूल में सिंड्रेला वाली कहानी पर प्ले हो रहा है, उस प्ले में मुझे सिंड्रेला की जगह आपकी वही दोस्त याद आ रही थी.. !”
“हाँ वो सिंड्रेला ही तो थी, जो अपना जादू चला कर वापस चली गयी.. !” शौर्य ने मुस्कुरा कर कहा और उस बड़े बच्चे के बैग में रखे गिटार को देखने लगा..
प्रियदर्शनी को इनमें से कोई बात पसंद नहीं आ रही थी..
“कौन सिंड्रेला, किसकी बात कर रहे हो शौर्य ?”
“कली.. मेरी दोस्त !”
“ओह्ह हाँ शायद हमने उसे महल में देखा था, वहीँ सहमी सहमी सी लड़की ना !”
शौर्य ने प्रियदर्शिनी की तरफ देखा लेकिन कोई जवाब नहीं दिया….
शौर्य की नजर भांप कर उस बड़े लड़के ने गिटार बाहर निकल दिया..
“आज हमारे स्कूल में वार्षिकोत्सव की तैयारी हो रही थी, इसलिए मैंने अपना गिटार भी रखा हुआ है.. उस दिन जैसे बजायेंगे क्या ?”
हँस कर उस पुरानी सी गिटार को शौर्य ने थाम लिया.. वही रोड पर एक किनारे बनी छोटी बाउंड्री वाल पर शौर्य ज़मीन पर पैर टिकाये बैठ गया और गिटार के तार कसने लगा..
तार सही कर उसने वही पुरानी धुन छेड़ दी..
मौसम-मौसम था सुहाना बड़ा
मौसम-मौसम…
मैंने देखा उसे हुआ मैं पागल
बस पलभर में…
आ के बसी है वो मेरे मन में,
उसकी कमी है अब जीवन में,
वो दूर है मेरी नज़रों से
क्यों उसे मैं चाहूँ,
सच कह रहा है दीवाना…
सच कह रहा है दीवाना दिल
दिल ना किसी से लगाना..
उस दिन भी यही गीत था, लेकिन साथ देने वाली बगल में खड़ी थी। और हर एक शब्द के साथ ताल मिलाती वो उस गाने को कामयाब कर गयी थी। आज वो नहीं थी और उसकी कमी ने इस गाने को अजब सी मनहूसियत में डूबा दिया..
गाते गाते शौर्य को लगा, उसके गले में आकर रुलाई घुटने लगी है..
वो पूरा गीत नहीं गा पाया… लेकिन उसके चुप होते ही सारे बच्चे एक सुर में उसका साथ देने लगे..
आज तो ये बच्चे भी उसे बहुत अपने से लग रहे थे। क्यूंकि किसी दिन ये सब कली की मौजूदगी का हिस्सा थे, और आज इन सब की मौजूदगी कहीं न कहीं कली की याद का मीठा सा झोंका बन लहरा रही थी…
उन बच्चो ने शौर्य को घेर लिया..
प्रियदर्शिनी एक तरफ खड़ी रह गयी और शौर्य उन सारे बच्चो के गले से लग गया..
वही पास में आइसक्रीम पार्लर था, वो उन बच्चो को वहाँ ले गया.. सबको उनकी पसंद की आइसक्रीम दिलवाने के बाद वो बाहर आया तब तक प्रियदर्शिनी वहाँ से गायब हो चुकी थी..
ज़रा सा इधर उधर देखने के बाद बिना ज्यादा ध्यान दिए वो अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया..
गाड़ी का पिछला दरवाज़ा खोलते ही वो आश्चर्यचकित रह गया.. प्रियदर्शिनी गाड़ी में बैठी थी..
“अरे तुम यहाँ ? मैंने इधर उधर तुम्हे ढूंढा था !”
“वो तो मैंने यहाँ बैठे देख लिया कि तुम कितना परेशान थे, मुझे वहाँ न देख कर !” व्यंग से प्रियदर्शिनी के होंठ टेढ़े हो गए, लेकिन शौर्य अभी कली के ख्यालों के जिस सांतवे आसमान पर था, उसे प्रियदर्शिनी की बात से कोई फर्क नहीं पड़ा।
वो बड़े आराम से अपनी जगह पर बैठा और गाडी आगे बढ़ाने कह दिया..
“सो.. तुम्हे घर छोड़ दूँ ?”
“तुम तो मुझसे पीछा छुड़ाना चाह रहे हो ?”
“अरे.. नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं.. तुम्हे ऐसा क्यों लगा ?”
प्रियदर्शिनी ने मुहं चढ़ा लिया..
“आजकल खूबसूरत लड़के भाव बहुत खाते हैं.. !”
उसकी इस बात को सुन कर शौर्य ने कुछ नहीं कहा… बस मुस्कुरा कर रह गया…
उसका मोबाइल बजने लगा, धनुष का फ़ोन था.. !
“बिज़ी हो ?” धनुष ने पूछा..
“नो नॉट एक्जैक्टली !”
“फंसे हुए से लग रहे हो !”
“हम्म.. !”
“फ़ोन को स्पीकर में डाल सकते हो !”
“अहमम… अच्छा !”
शौर्य ने फ़ोन स्पीकर में डाल दिया..
“शौर्य ध्यान से सुनो, यूएस क्लाइंट्स के साथ जो मीटिंग है उसमे तुम्हारा होना बहुत ज़रूरी है, असल में बुंदेला के हर एक मेजर शेयरहोल्डर का मीटिंग में होना ज़रूरी है। वो चौहान एन्ड कम्पनी के शेयर्स वाली कॉल है.. सो जितनी जल्दी पहुँच सकते हो पहुँच जाओ !”
“हम्म आता हूँ !”
“कितना वक्त लगेगा ?”
“लगभग पन्द्रह मिनट !”
“कम फ़ास्ट.. अभी मीटिंग शुरू होने में दस मिनट बाकी है.. मैं पांच दस मिनट और एक्सटेंड करने की कोशिश करूँगा ! आ जाओ !”
धनुष ने फ़ोन रख दिया, शौर्य ने मुस्कुरा कर फ़ोन बंद किया और तभी उसका ध्यान प्रियदर्शिनी पर चला गया.. वो उसे घूर रही थी..
“क्या हुआ ?”
“व्हाट क्या हुआ ? मैं सिर्फ चार दिन के लिए आयी हूँ और तुम मुझे लगातार अवॉयड किये जा रहे हो ? अब तुम्हे ऑफिस भी जाना है। सुबह से देख रही हूँ, बात बात पर एक ही बात कह रहे हो तुम्हे छोड़ देता हूँ ! अगर यही करना था तो कल ही मना कर देना था, मैं नहीं आती ना !”
“तुम तो अपनी मौसी से मिलने आयी हो ना ?”
“ओह्ह शटअप शौर्य ! मुझे समझ में आ गया है तुम मुझे अवॉयड कर रहे हो! क्यों कर रहे हो ऐसा ? क्या मैं तुम्हे पसंद नहीं.. कल तुमने ही तो वीडियो कॉल पर हामी भरी थी रूपा आंटी के सामने.. वरना मुझे क्या शौक लगा था तुमसे मिलने चले आने का..
पिछली बार के हादसे के बाद घर पर सब डरे हुए से हैं। इसलिए सब चाह्ते थे कि हम दोनों थोड़ा वक्त एक दूसरे के साथ बिता ले, बस इसीलिए मेरे फादर ने मुझे यहाँ आने की परमिशन दी। लेकिन तुम तो ऐसे भाव खा रहे हो जैसे तुम्हे मुझसे कोई लेना देना ही नहीं !”
“हाँ तुम्हे सही लग रहा, मुझे एक्चुली तुमसे कोई लेना देना नहीं !”
पल भर के लिए शौर्य को लगा कली उसके कान में आकर गुनगुना गयी…
एक बार फिर उसे अपने पास महसूस कर वो हल्के से मुस्कुरा कर रह गया।
वो लड़का जिसे कभी बात बात पर गुस्सा आ जाता था, अपने एंगर इश्यू और डिप्रेशन के लिए जो लड़का दवाये लिया करता था, आज एक बौड़म सी लड़की की बेसर पैर की बोझिल बातें सुन कर भी मुस्कुराता बैठा था।
ना उसे प्रियदर्शिनी पर गुस्सा था ना नाराज़गी।
वो बस अपनी धुन में मगन था, एक भीनी सी जादू भरी खुशबु की दुनिया में डूबा सा..
ये मुहब्बत का असर था !
“ऐसा कुछ नहीं है प्रियदर्शिनी, मेरी वाकई बेहद ज़रूरी मीटिंग है.. तुम चाहो तो तुम भी ऑफिस चलो.. हमारा ऑफिस भी देख लेना !”
“सच ?”
“हम्म ! हाँ लेकिन मीटिंग अटेंड करने नहीं मिलेगी तुम्हे.. बाहर मेरे या हर्ष भाई के केबिन में इंतज़ार कर सकती हो, तो चलो..।
वैसे हमारा ऑफिस है भी खूबसूरत.. तुम्हे अच्छा लगेगा !”
“ओके चलो फिर !”
ड्राइवर को ऑफिस की तरफ निकालने का बोल कर शौर्य ने अपने ज़रूरी डॉक्युमेंट्स देखने के लिए मोबाइल खोला ही था कि उसकी नजर धनुष के भेजे मेसेज पर चली गयी..
” मुसीबत से जान बचा ली ना ?” धनुष के मेसेज को पढ़ शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
“मुसीबत ऑफिस आ रही, वहीँ सम्भालना !”
शौर्य ने मेसेज टाइप किया और बगल में बैठी प्रियदर्शिनी की तरफ देखा.. वो उसे देख मुस्कुरा उठी.. !
शौर्य उसे साथ लेकर ऑफिस पहुँच गया..
ऑफिस में पहुँचते ही उन लोगो का सामना सबसे पहले मीठी से हुआ.. दोनों लड़कियाँ एक दूसरे को देख नाराज़ सी हो गयी..
ना प्रियदर्शिनी ने मीठी का अभिवादन किया ना मीठी ने प्रियदर्शिनी का..
“मीठी, प्रियदर्शिनी का ध्यान रखना, किसी चीज़ की ज़रूरत लगे तो देख लेना.. मैं अभी आया !”
शौर्य इतना बोल कर एक बड़े से लकड़ी के दरवाज़े को खोल अंदर बने गोलाकार कॉन्फ्रेंस रूम में दाखिल हो गया…
मीठी उसे साथ लेकर गेस्ट वेटिंग लॉउन्ज में चली आयी..
ऊपर गेस्ट लिखा पढ़ कर उसकी त्योरियां चढ़ गयी..
“हम यहाँ के गेस्ट नहीं है… शौर्य से शादी के बाद यहाँ के ओनर रहेंगे हम !”
“शौर्य से शादी के बाद ना ? अभी वक्त है उसमे !”
मीठी ने जवाब दिया और उसे बैठने का इशारा कर दिया..
वेटिंग लॉउन्ज में बहुत आलीशन व्यवस्था थी.. बड़े बड़े नरम मुलायम कुशन से भरे काउच थे, एक तरफ खूबसूरत सा झूला पड़ा था.. बहुत बड़ा सा स्मार्ट टीवी रखा था.. और एक तरफ की दीवार पर पूरी तरह से कांच लगा था… जिसके पीछे पूरा का पूरा विदेशी सेलर सजा था !
लेकिन ये सब देखे बिना ही प्रियदर्शिनी पलट गयी.. और ठुमक कर शौर्य के केबिन में पहुँच गयी… शौर्य का केबिन भी शानदार था!
एक शानदार चमड़े के बनी ऊँची कुर्सी और टेबल के अलावा एक छोटा कबर्ड और दो चार कुर्सियां ही थी.. उन कुर्सियों पर घंटा भर बैठने का सोच कर भी प्रियदर्शिनी को कांटे लग गए..
“ना टीवी ना फ्रिज, कैसे काम करेगा शौर्य इस केबिन में !”
“काम करना है इसलिए ही तो ना टीवी लगाया है ना फ्रिज ! ये सारे लड़के अपने काम को लेकर ज़िम्मेदार है.. काम के वक्त सिर्फ काम!
हालाँकि शौर्य का आज पहला दिन है ऑफिस में, लेकिन वो पहले भी कई बार बोर्ड मीटिंग्स में हिस्सा लेने आ चुका है ! काबिल तो बहुत है बस आज तक जाने किस फिराक में था कि ऑफिस ही नहीं आता था..
लेकिन अब आज से रोज़ आएगा..
आओ गेस्ट रूम में चले !”
प्रियदर्शिनी मन मार कर मीठी के पीछे निकल गयी….
****
कली वासुकी के साथ लंदन पहुँच गयी…
एक सूनापन सा मन में लिए वो आखिर वापस अपने घर पहुँच ही गयी।
बहुत दिनों से बाहर रहने के बाद घर पहुँचने पर जो उल्लास होता है, वो नदारद था।
वो बस घर पहुंच गयी थी.. लेकिन उसका मन उसकी आत्मा वो भारत में ही छोड़ आयी थी..
अपनी विशाल अट्टालिका में पहुँच कर वासुकी एक बार फिर अपने खोल में दुबक गया।
उसके रोज़ के काम, रोज़ के मिलने मिलाने वाले शुरू हो गए..
सरु भी अपनी गृहस्थी में रम गयी..
पूरा दिन इसी सब में निकल गया.. शाम में सरु दर्श की पसंद का खाना बना रही थी, उसी वक्त दर्श रसोई में चला आया..
अपने लिए पानी लेकर वो निकल रहा था कि सरु ने उसे आवाज़ लगा दी..
“सुनिए दर्श !”
वो रुक गया..
“आप हमसे नाराज़ हो गए हैं ना.. लेकिन हमारी बात तो सुन लीजिये !.”
“मुझे कोई सफाई नहीं सुननी सारिका.. तुम जानती हो अनिर का दर्द क्या है ? अगर उसकी ज़िन्दगी यूँ उलझी नहीं होती, अगर नेहा इस तरह बेमौत नहीं मरती तो शायद अनिर भी एक सामान्य इंसान हो पाता..।
वो क्यों कली के लिए इतना डरता है जानती तो हो..। और उसके बाद तुमसे इतनी बडी चूक हुई.. तुम्हे उसे छोड़ कर जाना ही नहीं था।
और अगर काका से मिलने जाना इतना ज़रूरी था, तो कली को साथ लेकर जाना था।
तुम जानती भी हो, कली किसके महल में रह रही थी.. राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के !”
“जानती हूँ ! बाद में पता चला मुझे भी !”
“पहले क्यों पता नहीं था तुम्हे ! बस इसी बात की नाराज़गी है सारिका.. तुम खुद को मेरी जगह रख कर देखो, उसके बाद बोलना क्या मैं या अनिर गलत हैं? नेहा की मौत के बाद अनिर इस कदर पागल नहीं होता अगर उसे नेहा की बॉडी मिल जाती.. वो अपनी प्रेमिका, अपनी पत्नी का, अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया।
वो आंखे भर कर उसे निहार नहीं पाया, अपने भरे मन और आंसुओं के साथ उसे अंतिम विदाई नहीं दे पाया, अगर वो ये सब कर पाता तो शायद वो भी एक आम आदमी बन पाता।
लेकिन महल वालो ने उससे उसका ये हक भी छीन लिया। उन लोगो ने सिर्फ नेहा को ही नहीं छीना बल्कि उससे जुडी उसकी हर याद को छीना है, अनिर से..
दर्श और भी कुछ कहता रहा और सारिका आगे बढ़ कर दर्श से लिपट गयी..
“हमें माफ़ कर दीजिये दर्श.. प्लीज़ माफ़ कर दीजिये, आगे से कभी कोई गलती नहीं होगी हमसे !”
दर्श ने धीरे से उसके बालों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.. सारिका के आंसू बह बह कर दर्श की कमीज़ भिगोते रहे..
शाम ढलने लगी थी, उसी वक्त घर की डोरबेल बजी..
घर में मौजूद नौकर ने दरवाज़ा खोल दिया….
डोरबेल की आवाज़ से दर्श और सारिका भी बाहर चले आये..
कली के सारे दोस्त उससे मिलने चले आये थे..
उन सबको देख कर दर्श मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया, सारिका भी आंखे पोंछ कर रसोई में उन बच्चो के लिए कुछ खाने का लेने चली गयी..
अब तक सीढ़ियों से झांक कर कली भी उन सबको देख चुकी थी..
लपक कर वो भी नीचे आ गयी… रीना ने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया..
डेरिक भी धीमे से आगे चला आया..
कली उन सबके गले से लग गयी..
एकदम से अपने सारे दोस्तों को शौर्य के बारे में सबकुछ बता देने को वो लालयित हो उठी, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया..
“सरु.. हम लोग मेरे कमरे में जा रहे.. आप स्ट्राबेरी शेक वहीँ भेज देना !”
“ओके जाओ बच्चा… मैं कुकीज़ भी भेज दूंगा !” दर्श ने कली का माथा चूम कर कहा और सारिका की मदद करने रसोई में चला गया..
वो अपनी टोली लिए ऊपर चली गयी..
“चल दिखा क्या क्या लेकर आयी है.. जाते समय तो बहुत सारे वादे किये थे तूने !”
रीना चहक कर बोली, और उसकी बात सुन कली रुआंसी हो गयी..
वो जो सब सोच कर गयी थी, वैसा कुछ हुआ ही कहाँ.. वो तो हिंदुस्तान से झोली भर भर कर खुशियाँ बटोरने गयी थी, कहाँ खुद ही लुट कर चली आयी..
वो कहाँ आगरा जाकर ताजमहल खरीद पायी थी सबके लिए, लेकिन तभी उसे वो शाम याद आ गयी।
दिल्ली में एक शाम जब मार्किट से कुछ सामान लेकर शौर्य और कली वापस लौटे थे, तब घर पहुँचने के बाद कली ने कॉफी बनायी और दोनों के लिए लेकर चली आयी थी..
कॉफी पीते हुए वो बोल पड़ी थी..
“पता है प्रिंस, मेरे सारे दोस्त चाह्ते थे, मैं इण्डिया से उनके लिए खूब तोहफे लेकर जाऊं.. मैंने भी कह दिया, आगरा से सबके लिए छोटे ताजमहल लाऊंगी, लखनऊ से चिकन के कुर्ते लाऊंगी, बनारस से स्पेशल मिठाइयां लाऊंगी !”
“ओह्ह ओह्ह.. इतना सब आप खरीदेंगी कब कली मैडम ?”
“जब इन सब जगहों पर घूमने जाउंगी !”
“और अगर ना जा पायी तब ?”
“हम्म, तब का तो सोचा नहीं !”
“यहाँ दिल्ली में भी सब मिलता है !”
“चलो हटो.. मैंने सुना है, दिल्ली वाले दिल्ली के बाहर कुछ सोचते ही नहीं.. तुम्हारा भी वही हाल है.. तुम्हारी दुनिया ही दिल्ली है !”
“हाँ वो तो है !”
उस शाम के दो दिन बाद जब सारे लोग महल जा रहे थे, तब शौर्य ने उसे एक बड़ा सा बैग लाकर दिया था..
“कली इस बैग को अपने साथ रखना !”
“ठीक हैं शौर्य, लेकिन इसमें है क्या ?” कली बैग को खोलने लगी थी और शौर्य ने लपक कर उसके हाथ थाम लिए थे, एक झुरझुरी सी दोनों के शरीर में दौड़ गयी और शौर्य ने उसका हाथ छोड़ दिया..
उस कम्पन को महसूस करने के बाद जब दोनों सामान्य हुए तब कली ने सवालिया नजर से शौर्य को देखा तो शौर्य हल्के से मुस्कुरा उठा..
“जब लंदन चली जाओगी, तब इस बैग को खोलना !”
कली को आज अचानक वो बात याद आ गयी..
उसने अपना कबर्ड खोला और उस बैग को निकाल कर बाहर ले आयी.. उसने बैग का चेन खोला और उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान चली आयी…
क्रमशः

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️
सुंदर रचना 👌🏻👌🏻
Itna ghahra rista jud chuka hai dono ka ki ab duriyan mayne nahi rakhti.dil toh ek dusre ke pass hi chhut gaya hai.in kuch dino me kali ne jo rang shaurya par chadhaya hai wo jaldi hi sar chadh kar bolega aur kali wo toh pahle hi kaid hai uske pyar me .bus mauka milne ki der hai.super part mam 😘😘😘😘😘😘😘🥰🥰🥰🥰🥰👌👌👌👌👌
Next part bhi de do bahut din se intezar kar rahe
आ गया है नेक्स्ट पार्ट
Kya शौरी ने सब के लिए तौफे लिए थे ? , कली की यूं याद आना हमारी आंखों के कोने भी भिगो गई, और ये प्रिया ये तो इतने साफ साफ बहाने दिख रहे है फिर भी पीछा नहीं छोड़ रही , मुझे तो केसर की याद आ गई 😕
ये बहेना तो ऑफिस भी आ धमकी है ,😅 धनुष का इसे तो मीठी ही संभाल लेगी , आखिर उसके हर्ष को जो छीन ने वाली थी , 🤭
दर्श ने आज बताया की नेहा की बॉडी नही दी गई थी अनीर को पर जहा मुझे याद है , अनिर नेहा की बॉडी को लेकर चुप के से भाग गया था हॉस्पिटल से , पर आगे पता चलेगा , की बात क्या हुई थी !!
👌👌👌👍
very nice part…waiting for the next part..
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍
बहुत अच्छा, खूबसूरत, लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
Lekin vasuki neha ko le gaya tha,aisa shayad aap e likha tha ..agar nahi lagaya tha to neha jinda he .
Nice part
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻