मायानगरी -28

मायानगरी-28

    रंगोली का गया गीत सुनते ही अधीर हंसते हुए बाहर चला गया , और अभिमन्यु सिर झुकाए अपनी प्लेट का खाना कतरने लगा…

    खाना निपटने के बाद अभिमन्यु और अधीर भी वहीं बैठे बाकी के गेम्स देख रहे थे कि अभिमन्यु के फोन पर उसके पड़ोस में रहने वाले भैया का फोन आने लगा..

“हाँ,  ग़ज़ल भैया बोलिए कैसे है आप?”

“हम ठीक है तुम बताओ,  सब ठीक चल रहा ? कल फोन कैसे किए रहे,  हम कल व्यस्त थे,  देख नहीं पाए!”

“भैया अब सिक्स्थ सेम में एक गए हैं,  सोच रहे अब एमबीए के लिए तैयारी शुरू कर दें!”

“हाँ तो और क्या कर दो,  उसमें सोचने वाली क्या बात है ?”

“जी भैया! बस वही थोड़ा गाइडेंस आपसे मिल जाता और कुछ किताबें भी…

“काहे तुम्हारे सीनियर्स नहीं रखते क्या एमबीए की किताबें?”

“अरे कहाँ भैया,  अभी अधिकतर तो खुद तैयारी कर रहे तो कोई अलग से किताब देगा नहीं.. देते भी हैं तो बस पढ़ने के लिए , और फिर कुछ समय में वापस मांग लेते हैं .. और जो कैट सेलेक्ट हो गए उनके फिर यहाँ दर्शन थोड़े ना होते हैं !”

” हाँ बात तो सही कह रहे हो , ठीक है तुम लिस्ट बना कर भेजो , देखते है क्या क्या पडी है हमारे पास .. जो नहीं होगी इधर उधर से जुगाड़ लगा कर भेजेंगे..ठीक है?”

” जी ग़ज़ल भैया , थैंक यू!”

  अभिमन्यु के फोन रखते ही अधीर उसकी तरफ़ देखने लगा ….

“ये कौन हैं , बड़ा अजीब नाम है ग़ज़ल भैया ?”

” पड़ोसी हैं,  मोहल्ले के ही हैं.. बचपन से ही इन्हें, गजलों का बेहद शौक था आठ नौ साल के थे तब से गज़लें सुना करते थे जब इनके पिताजी को पता चला उन्होंने इनकी ठुकाई कर दी, पर इनका ग़ज़ल प्रेम ना छुड़ा सकें … जब ये पंद्रह- सोलह के हुए तब भी इनका प्रेम जस का तस बना रहा…घर पर खूब कुटाई होती पर इनका प्यार और बढ़ता चला जाता .. बाद में हद होने लगी,  इनकी कुटाई का फायदा उठा कर घर पर आया कोई भी मेहमान भी इन पर हाथ साफ़ कर जाता पर इनकी मुहब्बत कमने की जगह बढ़ती गयी और ये मुहल्ले में ग़ज़ल भैया नाम से फेमस हो गए…
   पढ़ाई लिखाई में कुछ खास न थे, होते भी कैसे आधा वक़्त तो इनका गुलाम अली साहब, मेहंदी हसन  अबिदा परवीन की आवाजों में बीत जाता..  पढ़ते भी कैसे,  बाईस के हुए कि इनके फ़ादर ने इन्हें अपनी पुश्तैनी दुकान में बैठा दिया…
  कबाड़ी का काम है इनका.  तो इनके पास मोहल्ले ही नहीं शहर भर का कबाड़ जमा होता है। अब यार तू जानता तो है कि हमारे देश की सबसे बड़ी आयरनी है कि जिन किताबों को हम जरूरत के वक्त अपने सिर के नीचे रख कर सोते हैं, सिलेक्शन होने के बाद हमारी मम्मीयाँ उन्हीं किताबों को कबाड़ी में बेचकर उन पैसों से सोफे के कवर खरीद लेती हैं!
   गजल भैया के पास ऐसे ही एंट्रेंस एग्जाम वाली किताबें इकट्ठी हो जाती हैं, और वह मुझे बिना पैसों के फ्री में पढ़ने के लिए दे देते थे इंजीनियरिंग की तैयारी मैंने इन्हीं की किताबों से की थी। पिछली बार घर गया था तब इनकी दुकान पर बैठा था वही मैंने कैट की एक किताब देखी और तभी मैंने उनसे पूछ लिया था कि भैया जरूरत पड़ने पर मुझे किताबें दे सकते हैं क्या और उन्होंने हामी भर दी थी तो बस वही याद आ गया या की इन्हें  कॉल कर लूं जिससे यह किताब में भेज सकें।

” तू इंजीनियरिंग के बाद एमबीए करेगा?”

” हां बिजनेस के गुर सीखने के बाद बिजनेस करना चाहता हूं!”

” अभी बिजनेस करने के लिए गुर सीखने की क्या जरूरत है बिजनेस तो बस हो जाता है…!

” मानता हूं भाई के बिजनेस बस हो जाता है लेकिन वह उनसे होता है जिनके खून में बिजनेस खुला होता है अपन तो यार पंडित घर में पैदा हुए पढ़ने पढ़ाने के अलावा और एक छोटी सी सरकारी नौकरी के अलावा ना हमारे बाप दादा ने कुछ किया और ना हमारी पीढ़ी कुछ करना चाहती हैं बस वही डर रहे की सोच पढ़ लो एक छोटी सी नौकरी कर लो घर परिवार चला लो इतने में ही सिमट कर रह जाते हैं लेकिन मुझे ऐसा नहीं करना..

” पर बिजनेसमैन बनने के लिए तो पैसा लगेगा वह कहां से लाएगा?”

” बिजनेस जमाने के लिए पैसा कहां से लाना है कैसे लाना है यही सब जानने के लिए तो एमबीए करना चाहता हूं..

” एमबीए की पढ़ाई भी सस्ती नहीं है भाई पढ़ाई तो महंगी है..

” इसीलिए तो सेलेक्ट होना है अहमदाबाद के कॉलेज के लिए.. टॉप ट्वेंटी में रहा तो पढ़ाई फ्री हो जाएगी मेरी ,किताबें भी..

” सपने तो काफी बड़े-बड़े देख रखें है भाई तूने!”

” बस दुआ कर के मेरे सपने पूरे हो जाए। कोशिश तो कहीं से कम नहीं करनी मुझे, बाकी फिर ऊपर वाले की मर्जी।”

दोनों आपस में बैठे बातें कर रहे थे कि अंदर से वापस शोरगुल की आवाज बाहर तक आने लगी….

   ” चलो देखते हैं क्या चल रहा है अंदर..”
 
अधीर के कहने पर अभिमन्यु भी उसके साथ खड़ा हो गया और दोनों अंदर हॉल की तरफ बढ़ गए….
हॉल के बीचोबीच जगह खाली छोड़ कर चारों तरफ कुर्सियां लगी थी और एक तरफ़ सीनियर और दूसरी तरफ़ जूनियर बैठे थे।
   यह गेम जूनियर्स की तरफ से सीनियर के लिए था.. गेम का पूरा सेटअप बनाने के बाद 45 जूनियर लड़के लड़कियां सामने चले आए और उन्होंने सीनियर्स को रूल्स बताने की शुरू किए अभिमन्यु और अधीर भी हॉल में एक तरफ पीछे जाकर टेबल पर चढ़कर बैठ गया वहां से सारा गेम साफ साफ नजर आ रहा था…
जनक ने माइक लेकर सीनियर्स को गेम के रूल्स बताना शुरू किया…

” डियर सीनियर जैसा कि आप जानते हैं ये एक आसान लेकिन कॉम्प्लिकेटेड गेम है इस गेम का नाम है…never have i ever …
  इस गेम में आप सारे लोग एक साथ पार्टिसिपेट कर सकते हैं। आप कुल चौतीस लोग हैं, आप लोगों को आमने सामने हमने आधा-आधा बांट कर बैठा दिया है। अब मैं अपने पास वाली मैडम के हाथ में माइक दूंगी, और वह कोई भी ऐसी बात हमें बतायेंगे जो इन्होंने आज तक अपनी लाइफ में कभी नहीं की… अगर आप में से किसी ने भी वह काम पहले किया हुआ है तो आप लोग इस सर्कल से उठकर बाहर चले जाएंगे.. और इसका मतलब आप गेम से आउट हो चुके हैं।
      जो भी लोग सर्कल में रह जाएंगे उनके अंदर रहने का यह मतलब होगा, कि उन्होंने वह काम कभी नहीं किया। इसके बाद चांस दूसरी टीम को दी जाएगी.. और इस तरह से एंड में जितने लोग अंदर बचेंगे वह इस गेम के विनर होंगे…
   गेम बहुत ही आसान है तो अब मैं माइक हमारी सीनियर ” देख इन्हें लगता है सबको
                बना ले इन्हें प्रेमिका
                पर ये हैं सबसे न्यारी
                हमारी मैडम भूमिका ” को देने जा रहीं हूँ “

  भूमि मैडम की तारीफ करने के बाद झनक ने माइक भूमि मैडम के हाथ में पकड़ा दिया….
    भूमि कुछ देर के लिए माइक पकड़े सोच में पड़ गई फिर अचानक उसे ख्याल आया और मुस्कुरा कर अपनी बात कहने लगी…

“never have i ever trip anywhere सोलो…”

   कुछ देर तक सब भूमिका की बात को सोचते रहे फिर लगभग पांच सात लोग उठ कर जाने लगे…

” क्या हुआ सर? आपने लगता है बहुत सारे सोलो ट्रिप कर रखी है।
      जो भी यहां इस सर्कल से बाहर जाएगा, उसे अपने बाहर निकलने के पहले यह बताना पड़ेगा कि उन्होंने ये अनुभव कहाँ लिया है ?”

निकलने वाले लोग मुस्कुराकर सोच में पड़ गए फिर माइक लेकर सभी ने उन उन जगहों का नाम बता दिया जहां वह अकेले ट्रेवल कर चुके थे…
   लड़कियों की तरफ से भूमिका के यह कहने पर लड़कों में से 7 लोग आउट हो चुके थे और अब लड़कियों का पलड़ा भारी था तभी झनक ने माइक लेकर लड़कों की तरफ बढ़ा दिया…..
   वो सीनियर स्मार्ट था उसने माईक हाथ में लिए और मजाकिया अंदाज  में कहने लगा…

” मैंने आज तक ब्रेल लिपि नहीं पढ़ी …”

उस सीनियर के इस स्मार्ट मूव पर सीनियर ल़डकियों हूट करने लगी.. जाहिर सी बात थी कि उनमें से भी किसी ने शायद ही कभी ब्रेल पढ़ा हो …. अब लड़कियों के छूटने की बारी थी और ऐसा हुआ कि 17 लड़कियों में से 11 लड़कियां उठकर एक किनारे हो गई..
   जूनियर ताली बजाने लगे क्योंकि 11 लड़कियों के जाने का यह मतलब था कि बाकी बची 6 लड़कियां ब्रेल लिपि जानती थी…
   सीनियर लड़कों के कहने पर वृंदा ने उठकर ब्रेल लिपि के कुछ सिंबल बना कर उन लोगों को दिखा दिया और जूनियर की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वृंदा मुस्कुराते हुए अपनी जगह पहुंच गई…..
    झनक ने अबकी बार वृंदा के हाथ में माइक पकड़ा दिया।..
कुछ देर सोचते रहने के बाद वृंदा ने आगे बढ़कर कह ही दिया….

” मैंने आज तक किसी को लाल गुलाब नहीं दिया..”

   लड़कों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। वह लोग एक दूसरे का चेहरा देखने लगे लड़कों की टीम में सिर्फ 10 लोग बाकी थे और यह बात वृंदा ने ऐसी बोली थी जिसका सबूत खुद सामने बैठे लड़कियां थी । आखिर पांच लड़के उठकर सर्कल से बाहर चले गए।
  एक बार फिर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा .. अब एक बार फिर लड़कों की पारी थी झनक ने माइक एक सीनियर लड़के के हाथ में पकड़ा दिया…

उसने थोड़ी देर सोचने के बाद माइक अपने सामने लिया और लड़कियों की तरफ एक बहुत कठिन सवाल फेंक दिया…

” मैंने आज तक सामवेद नहीं पढा!”

  उसके ऐसा कहते हैं लड़कियां भी एक दूसरे को देखने लगी क्योंकि उनमें से किसी ने भी कभी वेद नहीं पढ़े थे एक-एक कर सब उठकर सर्कल से बाहर चली गई और अकेली प्राची वहां बैठी रह गई…
उसे बैठे देख सामने बैठे लड़के उसे वोट करने लगे और उससे जवाब तलब करने लगे प्राची ने जनक के हाथ से माइक ले लिया और बोलना शुरू किया…

” सामवेद ही क्यों मैंने ऋग्वेद यजुर्वेद अथर्व वेद और सामवेद चारों ही वेद पढ़े हैं.. और सिर्फ वेद ही नहीं उनके उपवेद उनके प्रणेता ब्राह्मण ग्रंथ कल्प व्याकरण निरुक्त चंद ज्योतिष सब कुछ पढ़ा है मैंने ऋग्वेद वह वेद है जिसमें श्लोक मंत्र हरी चाय आदि दी गई है गायत्री मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद में ही सबसे पहले मिला था सामवेद वह वेद है जिसमें गीत संगीत से जुड़ी जानकारी लिखी है यजुर्वेद वह वेद है जिसमें कर्मकांड पूजा पाठ हवन आदि के तरीकों का वर्णन है और अथर्ववेद आयुर्वेद के बारे में ज्ञान देता है!”

प्राची की बात सुन सामने बैठे सभी लड़के ही नहीं सारे जूनियर भी आश्चर्यचकित रह गए…

रंगोली ने जनक को कोहली से मारा और झनक में जैसी रंगोली की तरफ देखा रंगोली ने प्राची की तरफ दिखाकर वेरी गुड का साइन अपनी उंगलियों से बनाकर झनक को दिखाया..

” समझ गई मैं, तू तो और ज्यादा फैन हो गई होगी इस बेवड़ी की!”

जनक की बात सुन रंगोली के चेहरे पर हल्की सी नाराजगी उभर आयी, और वह वापस ध्यान से गेम देखने लगी….
अब 1 टीम में प्राची अकेली थी और लड़कों वाली टीम में 5 लड़के थे…
   जनक ने आगे बढ़कर माईक प्राची के हाथ में दे दिया…

” मैडम आपकी टीम में आप अकेले बचे हैं हम आपको ऐसा कोई सवाल करना है जो आपने कभी नहीं किया लेकिन इन पांचों लोगों ने कभी न कभी जरूर किया हो और तभी आप और आपकी टीम जीत सकते हैं वरना आपके पास वापस कर लोगों को मौका मिलेगा और कहीं मैं उन्हें ऐसी कोई बात कह दी जो आपने एक बार ही सही लेकिन की जरूर हो तो आप आउट हो जाएंगे..

प्राची ने मुस्कुराकर झनक  को देखा और माइक हाथ में लेकर बोलने से पहले सामने बैठे अधिराज और बाकी लड़कों को देखने लगी ….
   और फिर धीरे से गला साफ करके उसने बोलना शुरू किया…

” मुझे आज तक कभी किसी से प्यार नहीं हुआ!”

  प्राची की बात सुन सामने बैठे लड़कों के चेहरे का रंग उड़ने लगा… एक एक कर चार लड़के अपनी जगह से खड़े होकर सर्कल कल से बाहर आ गए…
अब आमने सामने बस अधिराज और प्राची बैठे थे, लोगों में खुसुर-पुसुर शुरू हो गई कि अब पक्का अधिराज ड्रिंक्स या ड्रग्स से जोड़कर सवाल करेगा और प्राची को हरा देगा..प्राची भी मुस्करा रही थी,  वो भी शायद जानती थी कि अब उसे बाहर जाना ही है…
रंगोली के चेहरे पर उदासी तैरने लगी थी..कि अधिराज ने अपना सवाल पूछ लिया…

“मैंने आज तक गुंडों की पिटाई नहीं की…!”

उसने कहना शुरू किया ही था कि प्राची अपनी जगह से खड़ी हो गई , पर उसका कहा वाक्य सुनते ही उसने आश्चर्य से इधर-उधर देखा, अब माईक उसके पास था..उसने धीमे से कहा..-” मैंने पिटाई की है!”
  उसके ऐसा कहते ही सारे जूनियर तालियां बजाने लगे और प्राची को गेम का विजेता घोषित कर दिया गया…
   अधिराज भी मुस्करा कर अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिये और सर्कल से बाहर निकला गया …

प्राची को क्राउन पहना का उसे जूनियर सम्मानित करने लगे और अधिराज मुस्करा कर पीछे बैठे अभिमन्यु की तरफ़ बढ़ने लगा…

“हार गया अपना भाई..!”

अधीर की इस बात पर अभिमन्यु  अपने हाथ अपने बालों पर फिराते हुए मुस्कुराने लगा…

“और हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं….”

क्रमशः

aparna….

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