मायानगरी -26

मायानगरी-26

     गेम  पूरे  उत्साह से  आगे  बढ़  रहा  था.. जूनियर  मगन  थे  पर  उन्हें  पता  न था कि सीनियर्स  के दिमाग में क्या खिचड़ी पक रही थी ।
   गेम आगे बढ़ाते अब सिर्फ दस कपल रह गए थे उसी वक्त दो ल़डकियों ने आगे बढ़ कर सबको रोक दिया …

“अब सिर्फ दो मिनट के लिए सभी रुक जाइए .. हम गेम मे एक छोटा सा पॉज लेने वाले हैं ..
वृंदा तुम ऐसा करो इन दस लोगों के नाम नोट कर के रख लो, हमें इस गेम के बाद इन नामों की जरूरत पड़ने वाली है। “.

उसके बाद भूमि मैडम और  शेष सर ने मिल कर उन दसों के नाम लिख लिए जो अगले राउंड तक  गए थे. 
उन दस लोगों में झनक  और रंगोली भी शामिल थे।
    हर एक राउंड के साथ रंगोंली और अभिमन्यु आगे बढ़े चले जा रहें थे। अभिमन्यु जैसा जैसा बोलता जा रहा था रंगोली वैसा वैसा ही करती चली जा रही थी और अब वह लोग टॉप तीन में पहुंच चुके थे. सिर्फ एक कुर्सी बाकी रह गई थी और उसके चारों ओर भागने वाले तीन जोड़े थे तीनों ने एक दूसरे को अंगूठा दिखा कर ऑल द बेस्ट कहा और अगले राउंड के लिए तैयार हो गए।
अगले राउंड के लिए गाना बजना शुरू हुआ

     सात फेरों के सातों वचन
    प्यारी दुल्हनियां भूल ना जाना

    आज मन से बंधी डोर मन की
    तू हुई अब तो अपने सजन की

     एक संजोग है ये मिलन
     लाज इसकी सदा तुम निभाना
     सात फेरों के सातों वचन
     प्यारी दुल्हनियाँ भूल न जाना

गाना शुरू हुआ और उसके साथ ही तीनों जोड़े वापस एक कुर्सी के चारों तरफ घूमने लगे। गाना बजते ही अभिमन्यु के चेहरे पर हंसी खेल गई। उसने दूर बैठे अधीर की तरफ देखा और उसे मोबाइल की तरफ इशारा किया और अपना मोबाइल निकाल कर अधीर को मैसेज करने लगा

”  कसम से यार , यह पागल लोग गाने भी ऐसे बजा रहे है कि पूरी शादी वाली फीलिंग आ रही है।”

” वैसे भी साथ साथ चलते हुए तू पूरी फीलिंग ले रहा है बेटा, मुझे सब पता चल रहा है।”

” अरे धत!! बराबर दूरी बनाकर चल रहा हूं कसम से। तेरी भाभी वैसी की वैसी अनछुआ रखी है। और तू बेटा दूर से बैठे बैठे ज्यादा दिमाग मत चलईओ ।”

“लेकिन तू कदम चला जल्दी-जल्दी।  निकले फिर यहां से।

रंगोली ने अभिमन्यु को घूर कर देखा। उसे ऐसा लग रहा था कि अभिमन्यु मैसेज टाइप करने के चक्कर में देर कर देगा और वह दोनों हार जाएंगे।

गाने को बचते कुछ देर हो चुकी थी और अभिमन्यु को जैसे ही लगा कि गाना बंद हो सकता है, उस के कुछ पहले ही उसने अपनी जेब से 10 का नोट निकाला और धीरे से नीचे गिरा दिया। उसके ठीक पीछे आने वाले कपल मे से लड़का झुक कर नोट उठाने लगा। और उसी वक्त गाना बंद हुआ …सामने वाले को हल्का सा आगे धक्का देकर अभिमन्यु कुर्सी पर बैठ गया।
   रंगोली बैठने को थी लेकिन उसे अभिमन्यु ने दूर से हाथ दिखाकर रोक दिया और वह किनारे खड़ी रह गई और इस तरह इस राउंड में भी अभिमन्यु और रंगोली जीत गए।

जीतने की खुशी रंगोली के चेहरे पर एक अलग ही चमक ले आयी थी…
   वह पहली बार अभिमन्यु की तरफ देख कर  मुस्कुराने को थी, कि तभी उसे याद आ गया कि अभिमन्यु इंजीनियरिंग वाला लड़का है और उसे ज्यादा भाव देना सही नहीं है । और इसीलिए वह अभिमन्यु के पीछे खड़े अपने क्लासमेट लड़के की तरफ देख कर मुस्कुरा कर उसे बधाई देने लगी..

अभिमन्यु अपने रूखे बालों पर हाथ फेरता मुस्कुराने लगा…. ” बोलो!! जीत हमारे कारण हुई और बधाई किसी और को दी जा रही है।”

” कुछ कहा तुमने?”
आंखें तरेर कर रंगोली ने अभिमन्यु से पूछा …अभिमन्यु उसकी आंखों में झांक कर देखते हुए मुस्कुराने लगा..

” क्या बात है, मेरे दिल की आवाज भी तुम्हें सुनाई देने लगी है आजकल!”

” दिल से सिर्फ लब और डब की आवाज आती है दिल बातें नहीं करता समझे!’

अपने सीने पर हाथ रखकर अभिमन्यु ने एक गहरी सांस ली और ऊपर की तरफ देखते हुए धीरे से रंगोली के कान में कुछ कह गया…

” डॉक्टर से दिल लगाने का यही नुकसान है कमबख्त कभी रोमांटिक नहीं होती!”

” क्या कहा तुमने? मैंने सुना नहीं? रंगोली वापस अभिमन्यु की बात नहीं सुन पाई और अभिमन्यु मुस्कुराते हुए उसकी बात का जवाब देने लगा…

” तुम्हें सुनाने के लिए कहा भी नहीं!”

” कम ऑन कपल्स! सभी जोड़ों में से जीतने वाला जोड़ा है  रंगोली और अभिमन्यु का जोड़ा। तो हमारे इस गेम का गिफ्ट प्राइस जाता है रंगोली और अभिमन्यु को। लेकिन उस प्राइस तक पहुंचने से पहले एक छोटा सा गेम या कह लो रोड़ा हैं  जो आप दोनों को और पार करना है….
   आप दोनों के साथ ही बाकी बचे 9 कपल्स भी यह अगला गेम खेलेंगे, इस गेम में टोटल 3 प्राइस है, जो जीतने वाले तीन कपल्स को दिए जाएंगे इसके अलावा रंगोली और अभिमन्यु का जीता हुआ गिफ्ट प्राइस अलग से..
    अब आप सारे कपल्स एक दूसरे के सामने लाइन बनाकर खड़े हो जाइए…
  कुछ जोड़े ऐसे थे जो दो ल़डकियों के ही थे कुछ दो लड़कों के तो कुछ जोड़ियों में एक लड़का तो एक लड़की थी …
  ये सारे लोग एक पंक्ति में आमने सामने खड़े हो गए …
  उस वक्त एक सीनियर मैडम ने आकार एक ट्रे सामने की जिसमें कुछ रेशमी रुमाल पड़े थे .. वृंदा और उसका साथ देती उसकी दो सखियों ने मिल कर एक पंक्ति के हर एक की आंखों पर पट्टी  बाँध दी …

  अब रंगोली और उस के आसपास खड़े बाकी लोगों की आंखों पर रुमाल बाँध चुके थे…

” तो  गांववासियों जैसा कि आप सब जानते ही हैं , कहने को तो ये एक रोमांटिक कपल गेम है लेकिन रोमांस का कचरा करने में हम सब ने पीएचडी कर रखी है.. तो अब हम ये जो नया गेम आपको बताने जा रहे हैं उसमें आप सभी को करना ये है कि , जिस किसी पार्टनर  की आँख पर पट्टी बंधी है वो अपने पार्टनर का हाथ थाम कर उसे पहचानने की कोशिश करेगा .. तीन लोग पारी पारी से एक एक blindfold के सामने से गुजरेंगे,  सिर्फ एक बार छू  कर जिसने पहचान लिया वहीं  इस गेम का विनर  होगा…
   आप सबको रूल समझ में आ ही गया होगा.. तो अब हम  गेम शुरू करते हैं… म्यूजिक

  एक बार फिर गाने की धुन गूंजने लगी ….

   छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
     बदला ये मौसम लगे प्यारा जग सारा
    आजा तेरा आँचल ये प्यार से मैं भर दूँ

              प्यार से मैं भर दूँ…
    खुशियाँ जहाँ भर की तुझको नज़र कर दूँ
              तुझको नज़र कर दूँ
    तू ही मेरा जीवन तू ही जीने का सहारा
    छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा…..

   गाने के बोलों के साथ ही रंगोली के दाएं तरफ खड़े लड़के के सामने दो सीनियर मैडम और एक उसकी पार्टनर का हाथ  रख दिया गया.. और उसने गलती से सीनियर मैडम का हाथ पकड़ लिया…
    अब रंगोली की बारी थी उसके सामने सबसे पहले अधिराज ने अपने दोनों हाथ फैला दिए रंगोली ने धीरे से छूकर राइट हैंड को पहचाना और सिर्फ उंगलियों की सहायता से कलाई तक पहुंच कर उसको टटोल कर हाथ छोड़ कर मना कर दिया। अधिराज के हटते ही अभिमन्यु ने मुस्कुराते हुए उसके सामने अपने दोनों हाथ रख दिए.. अभिमन्यु के लेफ्ट कलाई को छूने के बाद उसने धीरे से उसकी राइट कलाई पर हाथ रखा और सिर्फ उंगलियों से ही उसकी कलाई छूने के बाद उसके हाथ को पकड़ कर ऊपर उठा दिया…
    जोर की तालियों के साथ सारे जूनियर रंगोली अभिमन्यु कहकर उन्हें चीयर करने लगे….
   वृंदा मैडम ने रंगोली के आंख पर बंधा रुमाल खोल दिया और आगे बढ़कर बाकी लोगों के सामने यही गेम करवाने  लगीं…
    उन 10 लोगों के जोड़े में एकमात्र रंगोली ही थी जिसने अभिमन्यु का हाथ पहचान लिया था तो इस तरह उस गेम में भी रंगोली और अभिमन्यु ही विजेता बने थे
अधिराज और भूमि उन दोनों के गिफ्ट पकड़कर उनके पास पहुंच गए…
    दोनों को गिफ्ट देने के बाद अधिराज ने अभिमन्यु की तरफ देखा और मुस्कुराने लगा…

“बेटा यह हमारे मेडिको जूनियर्स की फ्रेशर्स पार्टी है और तुम यहां बेगानी शादी में अब्दुल्ला बने नाच रहे हो। उस पर जीत भी रहे हो। और हमारे यहां के गिफ्ट भी उड़ा ले रहे हो। पर अच्छा है कि यह गिफ्ट ऐसा है कि तुझे मिले ना मिले कोई फर्क नहीं पड़ता!

” क्यों भाई ऐसा क्यों? मैं अपनी मेहनत से जीता हूं…मुझे गिफ्ट मिलना ही चाहिए!”

अभिमन्यु की बात पर वहां खड़े सारे लोग मुस्कुराने लगे और वृंदा ने आगे बढ़कर वहां पास रखा माइक रंगोली के सामने कर…..

” अब तुम्हें यह राज बताना पड़ेगा रंगोली के आखिर तुम कैसे अभिमन्यु का हाथ पहचान गयी?क्योंकि इस  रेस में भाग लेते समय तुम लोगों के हाथ नहीं पैर बांधे थे..’

  ” यह तो बहुत सिंपल था मैम। इसके राइट हैंड में काले धागे में एक रुद्राक्ष बंधा हुआ है।  बस मैंने जो भी हथेली मेरे सामने आई, उसके राइट हैंड की कलाई पर रुद्राक्ष ढूंढा और मुझे समझ में आ गया कि कौन सा हाथ किसका है!”

रंगोली की बात सुन अभिमन्यु के चेहरे पर एक तिरछी सी मुस्कान आ गई उसने अपने बालों पर हाथ फेरते हुए रंगोली को देखकर हल्के से अपना सर झुका लिया… वह वहां से अधीर की तरफ बढ़ने को था कि अधिराज ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया…

” अरे हीरो हीरालाल अपना गिफ्ट तो देख लो”

” अब क्या देखूँ गिफ्ट? आपने तो मुझे गिफ्ट से बर्खास्त कर दिया है। तो आप अपने ही बच्चों में से किसी को दे दीजिएगा।”

” ठीक है सोच ले।  वैसे एक बार गिफ्ट देखने के बाद शायद  नहीं बोलेगा।”
    इसके बाद अधिराज ने रंगोली के हाथ में थाम रखे पैकेट को लिया और उसे वही सबके सामने खोल दिया उस पैकेट में एक शौपिंग गिफ्ट वाउचर था।

” देख ले भाई अभिमन्यु प्लैनेट फैशन में शॉपिंग करने का मौका मिल रहा है, अब तू इस गिफ्ट को सरेंडर करेगा या यूज करेगा यह तेरे ऊपर है।

अभिमन्यु ने जाकर अधिराज के हाथ से प्यार से वो शॉपिंग वाउचर ले लिया.. एक बार उसे देखने के बाद उसने वह वाउचर रंगोली के हाथ में रख दिया और बाकी सभी की तरफ मुड़कर एक छोटा सा ऐलान कर दिया..

” मैंने सिर्फ मस्ती में इस गेम में भाग ले लिया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस गिफ्ट पर मेरा अधिकार है। इसीलिए यह गिफ्ट मैं रंगोली को ही दे रहा हूं।  वह मेरी जगह पर जिसके भी साथ जाना चाहे जाकर शॉपिंग कर सकती है।”

  रंगोली के हाथ में वह कार्ड रखते हुए वह जाने लगा और जाते-जाते बहुत धीमे से बोल गया…
”  जिंदगी भर मैंने ही शॉपिंग करानी है तुम्हें, तुम्हारे कार्ड पर मैं क्या शॉपिंग करूं?”

” क्या?क्या बोला तुमने?”

” तुम्हारे सुनने के लिए नहीं बोला,  जाओ एंजॉय  करो…”

मुस्कुरा  कर अभिमन्यु  अधीर की तरफ़ बढ़ गया…

“चलिए फ़कीरपूर के जाहिल राजकुमार,  आपको  फुर्सत तो मिली , अब चलें वापस?”

” अधीर तू अक्सर अपने नाम को चरितार्थ  कर देता है भाई .. इतना अधीर न बन  अगर हम चलें गए तो प्राची की  फटफटी कौन ले जाएगा…”

“क्यों  ये सारे मेडिकल वाले तेरे  ससुराल वाले हैं केरी जो अब सबके काम तू ही करेगा ?”

“ये भी कोई पूछने की बात है बे …”

“साले तुम अब किसी काम के नहीं रहे हो बे …

“अधीर बाबु वो शेर सुना है आपने..
    जब भी आता है मेरा नाम तेरे नाम के साथ
     जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं…”

  शेर पढ़ने के बाद अभिमन्यु ने अपने रूद्राक्ष को एक बार चूम लिया….
  
   ” ये पहली सीढ़ी थी अधीर,  सोच के देख जो मेरे हाथ का रूद्राक्ष याद रखती है , वो मेरी यादों को कितना सम्भाले रखती है।।”

“अबे ओये मिर्जा ग़ालिब की सौवीं संतान  अब बस कर , कितने शेर सुना सुना कर पकायगा ?”

दोनों बातेँ करते वहाँ से बाहर निकल गए..
   उन दोनों के वहां से बाहर निकलने के बाद एक बार रंगोली  ने उसे पलट कर देखा और मुस्कुरा  कर अगले गेम की ओर  बढ़  गई….

*****

  नेता जी के भतीजे के ढेर सारे हंगामे के बाद अस्पताल की इमरजेंसी में बैठकर पंखुड़ी और मृत्युंजय उसकी केस फाइल तैयार कर रहे थे कि उसी वक्त शेखर ने दरवाजे पर दस्तक दी उसे देखकर मृत्युंजय को लगा कि यह भी कोई नेता जी का ही रिश्तेदार है और बिना आगे पीछे जाने मृत्युंजय उस पर बरस पड़ा….

” आइए अब आप भी आ जाइए, आप भी उस लड़के के चचेरे ममेरे भाई होंगे जो हम डॉक्टरों की कॉलर पकड़कर या फिर हमारे माथे पर अपनी गन रखकर हम से उसका इलाज करवाने आए होंगे..

” जी मैं समझा नहीं आप कहना क्या चाहते हैं क्या मैंने आप लोगों को डिस्टर्ब कर दिया?

मृत्युंजय का भड़का हुआ रूप देखकर शेखर को एकाएक कुछ समझा नहीं और वह पंखुड़ी से अंदर आने की इजाजत के लिए दरवाजे पर ही खड़ा उसे देखता रह गया..

” अरे आप बाहर क्यों खड़े हैं ?प्लीज अंदर आइए।।
  जय इनसे मिलो, यह हमारे शहर के नए डीएम है। अपनी बेटी के एडमिशन के लिए आए हैं । और शेखर जी यह मेरे कॉलीग है डॉ मृत्युंजय…”

” आई एम सो सो सॉरी कलेक्टर साहब,  आइए प्लीज बैठहै वह आज क्या है कि एक नेता जी के भतीजे यहां पर एडमिट हुए हैं तो बस सुबह से उन्होंने ही हमारे दिमाग का दही कर रखा है…
   आई एम एक्सट्रीमली सॉरी।

” कोई बात नहीं.. मैं बस इधर से गुजर रहा था तो सोचा एक बार आपसे मिलता चलूं।”

शेखर ने पंखुड़ी को देखकर कहा और पंखुड़ी मुस्कुरा उठी..

” हां मैंने मैनेजमेंट कोटा में एडमिशन के लिए सारी बातें पूछ रखी हैं आप एकाध हफ्ते में आकर अपनी बेटी का एडमिशन करवा सकते हैं।”

मृत्युंजय आंखें फाड़े पंखुड़ी और शेखर को देख रहा था..

” एक्सक्यूज मी? पंखुड़ी, अभी तुमने क्या कहा? किसका एडमिशन? इन की बेटी का? आई मीन इन्हें देखकर तो लग ही नहीं रहा कि इनकी शादी भी हुई होगी और उनकी बेटी भी है?१
   बुरा मत मानिए का कलेक्टर साहब एक बात पूछ सकता हूं?”

” हां जी बिल्कुल पूछ लीजिए।”

” आप भी संतूर से नहाते हैं क्या?”

मृत्युंजय की बात पर तीनों खुल कर हंस पड़े। शेखर कुछ देर तक पंखुड़ी को देखता रहा फिर धीरे से उसने पंखुड़ी से पूछ लिया…

“डॉक्टर साहब अगर आप फ्री हैं तो क्या हम पास ही में कॉफी शॉप है बरिस्ता वहां कॉफी पी सकते हैं।”

पंखुड़ी ने एक नजर मृत्युंजय को देखा मृत्युंजय ने धीरे से हां में सर हिला दिया…

” तुम जाओ आराम से, मैं यहां संभाल लूंगा।”

जय  से आश्वासन पाते ही पंखुड़ी ने अपना पर्स उठाया और शेखर के साथ बाहर निकल गई अस्पताल से बाहर निकलते पंखुड़ी ने एक राहत की सांस ली..

” वैसे सच कहूं तो मुझे कॉफी की बहुत जरूरत महसूस हो रही थी… आज इतनी फाइट की है मैंने कि सर में दर्द हो गया।”

” अच्छा अस्पताल में लड़ना भी सिखाया जाता है क्या।”

” एक्जेक्टली अस्पताल में लड़ना ही तो सिखाया जाता है… इतनी अजीबोगरीब बीमारी होती हैं, उससे हम डॉक्टर ही नहीं यहां पर पहुंचे मरीज भी लड़ते ही हैं अपनी जान बचाने की लड़ाई तो कभी अपने परिजनों के स्वास्थ्य की लड़ाई… अस्पताल लड़ाई का मैदान ही तो है ।
   लेकिन आज यहां पर सच्ची वाली लड़ाई हो गई किसी नेता का भतीजा आया बेहोश हाल में.. अब उसके चेले उसे छोड़े तब तो उसका इलाज करूं… वह लोग ऐसे घेर कर उसको खड़े थे की मैं उन लोगों के बीच में  उसका इलाज कैसे करती ?
   बस यह बात बोलते ही  सारे लोग भड़क उठे.. एक तो मुझे मार ने ही  चला आ रहा था, लेकिन जय ने उसे थप्पड़ रसीद कर दिया । तब से माहौल थोड़ा बिगड़ गया था लेकिन अब ठीक है नेताजी ने डांट लगा कर सारे लोगों को वहाँ से फ़िलहाल  भगा दिया.. लेकिन मैं जानती हूं रात में वो लोग यहां रुकने आएंगे ही और फिर से हंगामा होगा।”

” आप कहे तो कुछ प्रोटेक्शन भिजवा दूं?”

” अरे नहीं नहीं जरूरत नहीं है। वैसे भी हमारे डॉक्टर का ड्यूटी रूम थर्ड फ्लोर पर है …वहां तक मरीज जनरली आते नहीं हैं।”

” आपको भी नाइट ड्यूटी करना पड़ता है?”

” हां नाइट ड्यूटी तो हर एक डॉक्टर की लगती है… मुझे भी करनी पड़ती है … नाइट ड्यूटी का यह फायदा होता है कि यहां पर अच्छे से पढ़ाई हो जाती है..

” मतलब कैसे?”

” अपने रूम पर तो मैं रात में टीवी ही देखती रहती हूं यहां ड्यूटी रूम में टीवी है नहीं तो नाइट का राउंड निपटाने के बाद किताबें खोलकर पढ़ने के अलावा और कोई चारा ही नहीं बचता।”

” लेकिन आपने तो कहा था फिलहाल आप एमडी करना नहीं चाहती तो फिर पढ़ने से क्या फायदा?”

” अरे कभी तो  करूंगी ना आगे की पढ़ाई , तब काम आएगी..

” वाओ वेरी ऑप्टिमिस्टिक। वैसे कौन सी कॉफ़ी लेंगी आप।

“कैरेमल मोचा लाटे, और आप क्या लेंगे..”

“डेथ बय चाकलेट .”

“ओह ये तो मुझे भी बहुत पसंद है।”

“तो तुम ये ले लो ,मैं दूसरा  ले लूँगा..

बातों ही बातों में सुनहरी धूप ढ़लने लगी  थी …

क्रमश:

aparna….

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