
मायानगरी – 24
शहर में अजीब लहर उठी थी। चुनाव होकर राजा अजातशत्रु जीत चुके थे और उनकी ताजपोशी होनी थी।
यूँ तो चुनाव होने के पहले ही उस समय की सरकार कई सारे लफड़ों में फंसती नज़र आने लगी थी। इन ढेर सारे मुद्दों में से एक मुद्दा मेडिकल सीट्स पर चलने वाली धांधली का भी था।
दबी छिपी आवाज़ में इस सब में लोग मंत्री जी का भी हाथ बता रहे थे।
उनके किसी दूर के रिश्ते के साले साहब को भी इसी तरह से मेडिकल में सीट दी गयी थी। बातें तो और भी फैल रही थी और उसी वक्त अचार संहिता लग जाने से मंत्री जी ने इन सब बातों को अजातशत्रु के राजनैतिक हथकंडे बता कर बातों को घुमाने की बहुत कोशिश की थी।
चुनाव का समय होने से सभी पार्टियां एक दूसरे के निशाने पर ही थी। एकमात्र राजा अजातशत्रु की पार्टी ही ऐसी थी जिस पर किसी तरह का कोई इल्ज़ाम नहीं था। और फिर जिस रथ का सारथी खुद समर था वो किसी आड़े तिरछे गड्ढे में गिर जाए ऐसा संभव भी नही था।
चुनाव सम्पन्न हो चुके थे और राजा अजातशत्रु ने अपना पदभार ग्रहण कर शपथ ले ली थी। उनका काम शुरू हो चुका था लेकिन साथ ही पुराने मंत्री जी अब अजातशत्रु से खार खाये बैठे थे।
उन पर इल्ज़ामों की ऐसी बरसात हुई थी कि उन छींटों से तरबतर खड़े वो किसी न किसी बहाने राजा अजातशत्रु की यूनिवर्सिटी का नाम मिट्टी में मिलाने का संकल्प ले चुके थे।
और इसकी शुरुवात वो बहुत पहले कर चुके थे।
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वॉल्वो में फ्रेशर्स के साथ बैठे सीनियर्स पार्टी का पूरा माहौल बना रहे थे।
उनकी बड़ी सी गाड़ी शहर से बाहर की ओर निकल चुकी थी। हॉलिडे रिसोर्ट जहाँ पर पार्टी होनी थी वो जगह मायानगरी से लगभग साठ पैंसठ किलोमीटर दूर थी। रास्ता जंगल के बीच से गुजरता था। दोनों तरफ घने हरे पेड़ों के बीच से गुजरती सड़क बहुत खूबसूरत लग रही थी।
हॉलिडे रिसोर्ट काफी बड़ा रिसोर्ट था जहाँ एक ही वक्त पर कई सारे आयोजन हो सकते थे। आज सिर्फ मेडिकल ही नही इंजीनियरिंग वालों की भी पार्टी वहाँ थी।
अभिमन्यु और अधीर वैसे तो थर्ड ईयर के विद्यार्थी थे सो उनका इस पार्टी से कोई सीधा लेना देना नही था। पर उन लोगों को मालूम था कि मेडिकल वाले इधर ही फ्रेशर्स को वेल्कम किया करते हैं इसलिए वो दोनो भी अपनी बाइक में चले आये थे। उनकी बाइक वॉल्वो के पीछे ही थी।
सीनियर मैडम लोग आज जूनियर्स लड़कियों से बड़ी मुहब्बत से पेश आ रही थीं। और हर किसी से प्यार से उनके बारे में चर्चा कर रही थी। किसी से उसके घर परिवार के बारे में बात हो रही थी तो किसी से उसके पहले क्रश के बारे में।
जूनियर लड़कियां भी शरमा कर तो, खुश होकर बातों में निहाल हो रहीं थीं।
झनक और रंगोली एक साथ बैठीं थीं। रंगोली खिड़की के तरफ बैठी थी, और झनक उसके दूसरी बाजू में बैठी थी।
सीनियर मैडम लोगों के खिलते चेहरे देख झनक रंगोली की तरफ खिसक आई…
“आज ये सारी ललिता पवार लोग अचानक निरूपा रॉय कैसे बन गईं?”
उन लोगों के ठीक पीछे बैठी उनकी एक क्लासमेट चहक उठी…
“आज हमारा इंडिपेंडेंस डे है ना! जब अंग्रेज भारत छोड़ कर गए थे तब वो सब भी आलोक नाथ बन गए थे। बस वही स्ट्रेटजी है इनकी। “
“हम्म वैसा ही कुछ लग रहा है! “
“चलो भई गर्ल्स एंड बॉयज़ आज तक रैगिंग में आप लोगो ने बहुत गाने सुनाए हैं हमें, अब आज हम लोग सुनाएंगे… चल अधिराज शुरू हो जा।
तुम लोगो को पता भी है कि नही की तुम्हारे सबके अधिराज सर हमारे कॉलेज के कुमार सानू हैं।
वृंदा की इस बात पर एक सीनियर लड़का खड़ा हो गया…
“अरिजीत के ज़माने में तू अधिराज को कुमार सानू बता रही है। ऐसे बोलेगी तो वो नही गायेगा।”
“हाँ अधिराज!! नही गायेगा तू? यार जो भी कहो लीजेंड तो कुमार सानू ही है!”
“मेरी नज़रों में तो असली लीजेंड किशोर दा हैं, वैसे कुमार सानू भी भी हमें दिल अज़ीज़ हैं तो आज मैं कुछ किशोर दा का ही गीत सुनाता हूँ।”
“अरे अधिराज प्राची नही दिख रही?
भूमि ने अधिराज को अकेले देख सवाल कर दिया। हालांकि हर कोई जानता था कि प्राची अधिराज की सिर्फ दोस्त है।
” वो कहाँ कहीं भी आती जाती है,लोगों से घुलना मिलना उसके स्वभाव में नही है।”
अधिराज के ऐसा बोलते ही वृंदा बोल उठी…
“हां यार!! अजीब सी तो है वो! थोड़ी पागल थोड़ी सनकी। पता नही कैसी डॉक्टर बनेगी?”
“दो पैग लगा कर ऑपरेशन करेगी, और क्या? हम लोग मरीज़ों को बोलेंगे नशा पत्ती छोड़ दो, और वो मैडम बोलेंगी एक सुट्टा मार और सारे गम भगा।”
वृंदा के आसपास बैठी बाकी लड़कियां हंसने लगी लेकिन रंगोली का मन जाने क्यों बुझ सा गया। उसे पता नही क्यों यूँ लगता जैसे प्राची खुद को ऊपर से जैसा दिखाती है वैसी असल में है नही। लेकिन वो किसी से ये बात कह नही पाती थी।
अधिराज का भी मन खट्टा हो गया। उसे वृंदा और भूमि की ये बातें पसन्द नही आई थी। और वो जो कुछ देर पहले तक गाने के मूड में था उठ कर चुपचाप आगे की सीट पर जा बैठा।
उसे बाहर जाते देख वृंदा ने भूमि को आंख से इशारा किया और धीरे से फुसफुसा उठी…” अधिराज नाराज़ हो गया यार! मतलब कुछ है क्या?”
“हो भी सकता है , तभी तो उसके सुट्टे का इंतज़ाम करता रहता है। खैर छोड़ न। किसी जूनी को ही पकड़ते हैं। “
भूमि की बात मान कर वृंदा ने अपने एक सहपाठी को इशारा किया और वो सामने चला आया…
“हाँ तो भई रामगढ़ के वासियों, ये बताओ कि आप लोगों में से बसंती कौन है?
सारे जूनियर ध्यान से उस सीनियर की बात सुनने लगे…
“अबे यार इतना ध्यान से सुन रहे मैं कोई एब्डॉमिन के पार्ट्स नही समझा रहा , ये पूछ रहा कि आप में से कौन खुद से सामने आकर गाना गायेगा।
किसी को आगे आते न देख उस सीनियर ने अनस की ओर उंगली घुमा दी..
“अनस साहेब आप बड़े खूबसूरत दिखते हैं। एकदम चॉकलेट बॉय सरीखे। कुछ सुना दो यार प्यार भरा गीत। “
“सर मैं ? मैं कहाँ सर?रैगिंग के टाइम पर गाना मजबूरी था , अब गाया तो सबके कान से खून निकल आएगा।”
“अरे नही भाईजान !! मेडिकोज सीनियर्स के कान से खून निकाल सकने वाला जिगरा अभी किसी जूनी ने नही पाया है सो गाओ बिंदास गाओ। जितना बुरा गाओगे उतना आशीर्वाद पाओगे। अगर किसी लड़कीं के लिए कोई सॉफ्ट कॉर्नर है तो आज गा के इज़हार भी कर सकते हो।”
अनस अपने सीनियर की ये बात सुन कर शरमा गया फिर धीरे से एक झलक उसने रंगोली की तरफ देखा। वो खिड़की से बाहर देख रही थी, उसका ध्यान अनस पर था ही नही।
अनस ने गले को साफ किया और धीरे से गाने लगा..
“मासूम चेहरा, नीची निगाहें
भोली सी लड़की, भोली अदायें
न अप्सरा है, न वो परी है
लेकिन यह उसकी जादूगरी है
दीवाना कर दे वो,
एक रँग भर दे वो
शरमा के देखे जिधर
घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही,
रस्ते में है उसका घर …
अनस बहुत मीठी सी आवाज़ में गाता रहा और उसका गाना सुन कर रंगोली भी उसकी तरफ देख बाकी लोगों की तरह उसे चीयर करने लगी।
उसे हंसता मुस्कुराता देख अनस दुगुने जोश से गाता रहा।
और सीनियर मैडम उसे देख देख एक दूसरे को इशारे कर मुस्कुराती रहीं।
उस गाने के बीच ही वृंदा अधिराज के पास जा बैठी..
“यार अधिराज, तू बुरा मत मानियो यार। हम प्राची के लिए बस मजाक कर रहे थे। वी वेर नॉट सीरियस बडी रियली?”
अधिराज चुप बैठा रहा। वृंदा ने अधिराज की बाँह पर अपना हाथ रख कर उसे भरोसा दिलाने की कोशिश की।
” सच कह रहीं हूँ। तू अब मूड मत ऑफ कर। आज फ्रेशर्स का दिन है। तू ऐसा गुमसुम हो जाएगा तो चलेगा कैसे। हमारा हीरो ही रहेगा दुखी तो हम कैसे करेंगे जूनियर्स को सुखी?”
“अरे बस कर मैं ठीक हूँ। “
“ठीक है तो चल फिर। हमारे साथ पीछे बैठ और जुनीज़ का जवाब दे । किसी और गाने से।।
“मतलब तुझे मुझसे गाना गवाना था इसलिए इतनी सब माथा पच्ची की ना? “
वृंदा दोनो कान पकड़ कर मुस्कुराने लगी। अधिराज ने उसके माथे पर एक चपत लगायी और उठ कर पीछे की तरफ बढ़ गया।
उसी वक्त बस ड्राइवर ने अचानक गाड़ी में ब्रेक लगा दिया..
” अरे क्या हो गया काका?गाड़ी कैसे बीच जंगल में रोक दी?”
ड्राइवर ने कोई जवाब नही दिया। बस का दरवाज़ा खुला और बस में प्राची भी चढ़ कर चली आयी।
प्राची को ऐसे अचानक आया देख सारे सीनियर्स जूनियर्स सभी उसी की ओर देखने लगे।
आज पार्टी में सीनियर लड़कियों का ड्रेस कोड साड़ी था। प्राची ने सुबह तो जाने से मना कर दिया था। जबकि पिछले चार दिन से अधिराज उसे इसी पार्टी में साथ चलने के लिए मना रहा था। लेकिन सुबह तक प्राची का मन ही नही हुआ और उसने मना कर दिया था।
पर अचानक ही रंगोली झनक के निकलने के बाद उसका मन हुआ और वो मोरपंखी रंग की साड़ी पहन कर बाल खुले कर तैयार हुई और अपनी बुलेट निकाल वहाँ से निकल गयी।
उसने रंगोली की फ़ोन से डेस्टिनेशन फॉलो किया और तेज़ी से गाड़ी भगाती आखिर बस तक पहुंच गई।
साड़ी में खुले बालों के साथ जब वो अंदर आयीं तो बाकियों के साथ एकबारगी अधिराज भी उसे देखता रह गया। उसे देखते ही वृंदा आगे बढ़ कर हाथ पकड़ प्राची को अपने साथ पकड़ कर ले आयी।
प्राची को वृंदा का यूँ हाथ पकड़ना पसन्द तो नही आया पर अधिराज की समझाइश याद रख उसने उसे कोई जवाब नही दिया।
प्राची को देख रंगोली के चेहरे पर भी मुस्कान खेल गयी।
अधिराज ने उसे एक नज़र देखा और गाना शुरू कर दिया…
” मैंने हारा मैं तेरा सारा मैं
मीठा मीठा तू खारा खारा मैं
तेरा सारा मैं सारा मैं
मैंने हारा मैं तेरा सारा मैं
मीठा मीठा तू खारा खारा
मैं तेरा सारा मैं सारा मैं …..
अधिराज ने गाना खत्म किया ही था कि बस में तालियां बजने लगीं।
तालियों के बीच मुस्कुरा कर सबका अभिवादन करने के बाद अधिराज प्राची के पास आ बैठा..
“कैसे आयीं हो यहाँ तक?”
“बुलेट से !”
“व्हाट? साड़ी में बुलेट कैसे चला ली?
प्राची ने अपनी साड़ी थोड़ी सी उठायी और उसके पैरों में पहन रखे शूज़ नज़र आने लगे। वो अपने शूज़ दिखा कर मुस्कुराने लगी और अधिराज ने अपने दोनों हाथों से अपना सिर थाम लिया…
“अजूबा हो तुम, पूरी अजूबा। साड़ी के नीचे स्पोर्ट्स शूज़ कौन पहनता है यार! “
“मैं पहनती हूँ क्योंकि मैं बाकियों से अलग जो हूँ।”
“हाँ वो तो तुम हो।”
बातों ही बातों में रिसोर्ट आ गया। और वो सारे लोग वहां उतरने लगे।
प्राची उतरी और एक तरफ आगे बढ़ गयी और उसी वक्त पर अभिमन्यु बुलेट में वहाँ दाखिल हुआ और पार्किंग की तरफ़ बढ़ने लगा, उसे देख प्राची ने आंखें झपक कर उसे थैंक्स बोला और वो धीरे से सिर झुका कर मुस्कुरातें हुये आगे बढ़ गया। उसके पीछे ही अधीर भी अपनी बाइक भगा कर पार्किंग की ओर बढ़ गया।
रंगोली और झनक ने भी ये देख लिया। दोनो ने एक दूसरे को देखा….
“ये ड्रीमगर्ल कहीं तेरे पति का डायरेक्शन ईस्ट की ओर न मोड़ दे।”
झनक की बात पर रंगोली उसे चौन्क कर देखने लगी..
“डोंट टेल मी, की तुझे मेरा ये जोक ज़मझ नही आया? अबे यार, उसका नाम प्राची है प्राची मतलब ईस्ट डायरेक्शन! अब समझ आया?”
“ओह्ह ये मतलब था तेरा?”
“थैंक गॉड तुझे ए बी सी डी आती है वरन वो सिखाने में पता नही मेरा कितना खून जल जाता।
वो लोग हंसती हुई अंदर हॉल में दाखिल हो गईं।
क्रमशः
aparna …

Mayanagri k 250 se baad wale new episode lab aayenge
Please continue keeziye story Ko
जी बहुत जल्दी शुरू हो जाएगी मायानगरी भी
Beautiful
पहले सारे पार्ट्स पढ़े हैँ लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा है पहली बार पढ़ रही हूँ अगले भागों की प्रतीक्षा रहेगी