मायानगरी -10

मायानगरी

मायानगरी – 10

    रंगोली सिगरेट हाथ में छिपाए हुए तेज़ कदमों से चलती हुई होस्टल के अपने कमरे में पहुंच गई। उसका पूरा ध्यान इस बात पर था, कि कोई उसे सिगरेट लेकर जाते हुए देख ना ले। पर वह बेचारी इस बात से अंजान थी, कि जिसे नहीं देखना चाहिए था उसी ने उसे देख लिया था। और कुछ ज्यादा ही अच्छे से देख लिया था।

    अपने कमरे में पहुंच कर रंगोली ने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और सिगरेट निकाल कर प्राची के सामने रख दी।

”  छी ये कौन सी ब्रांड ले आयी तुमने मालबोरो? ये भी कोई पीने की चीज है ?तुमने उससे ब्रांड पूछी थी?  मेरा वाला ब्रांड नाम लेकर?”

” रंगोली ने “ना” में सिर हिला दिया।

“मैं नाम भूल गई थी मैंम?’

” एक सड़ी के सिगरेट ब्रांड का नाम याद नहीं रख पा रही हो तुम मसल्स के ओरिजिन इंसर्शन कैसे याद रखोगी? यू डफर !!”

   और कोई उपाय न देख प्राची ने पैकेट से एक सिगरेट निकाली और जला ली। उसका एक कश लेते ही उसके चेहरे के गुस्से वाले भाव बदल गए और वो सुकून से कश भरती आराम से कुर्सी पर पसर गयी।

“हम्म नॉट बैड! एक्चुली इट्स नाइस । थैंक्स रंग …”

प्राची के चेहरे की खुशी देखकर रंगोली के चेहरे पर भी राहत के भाव छलकने  लगे उसने मुस्कुराकर प्राची को थैंक यू बोल दिया।

” अबे थैंक्यू तो ऐसे बोल रही है जैसे खुद बनाकर लायी है। “

   प्राची यह बोल कर वापस गहरे गहरे कश लेने लगी। झनक और रंगोली एक तरफ जाकर बैठ गए कि उसी समय नीचे से मैस की बेल बजने लगी। यानी कि खाना बन चुका था और सबको नीचे जाना था।
    रंगोली को तेज भूख भी लग आई थी, उसने झनक की तरफ देखकर इशारों में ही नीचे चलने की बात पूछी पर झनक ने आंखों से ही उसे यह बता दिया कि अगर सामने सीनियर बैठी है, तो उससे पूछ कर ही नीचे जाया जा सकता है अब दोनों यही सोच कर चुपचाप बैठे थे कि आखिर शेर की गुफा में जाने की हिम्मत कौन करें?
   तु पूछ तू पूछ के चक्कर में समय निकलता जा रहा था और रंगोली के पेट में चूहे फुटबॉल खेल रहे थे। आखिरकार रंगोली के बार-बार मिन्नत करने पर झनक ने हिम्मत  करके प्राची से नीचे खाने जाने के लिए पूछ लिया। प्राची ने बंद आंखों से ही उन दोनों को नीचे जाने का इशारा कर दिया। वह आराम से सामने रखी कुर्सी पर दोनों टांगे फैला कर बैठी हुई थी । सिर को पीछे टिका कर उसने आंखें बंद कर रखी थीं।
   कमरे से बाहर निकलते हैं झनक और रंगोली ने चैन के सांस ली।

“हे भगवान ! ये तो पूरी बॉम्ब है!”

झनक के ऐसा कहते ही रंगोली ने जल्दी से इधर उधर देखा कि कहीं किसी ने सुन तो नही लिया।

“यार मुझे लगता है अपनी रूमी की डेथ से अपसेट है।”

रंगोली की बात पर झनक ज़ोर से हँस पड़ी।

“दुखी होने पर कोई ऐसे सुट्टा फूंकता है?”

“क्यों जब लड़के दुखी होने पर दारू पी सकते है तो मैडम सुट्टा क्यों नही।”

“ओहहो हो मेरी रिबेल ! ये कहीं से भी डिप्रेस्ड नही लग रही,मुझे तो लग रहा इसी ने तो कहीं अदिति मैंम से पंगा तो नही किया जिसके कारण उन्होंने सुसाइड कर लिया।”

“क्या पता? सुबह से ये सब सुन सुन कर अब मन भर गया है। अब तो मुझे डर भी लग रहा है! सुन झनक आज मैं तेरे साथ सो जाऊँ, मुझे अकेले सोने में डर लगेगा ।”

“हम्म सो जाना। चल अब जल्दी मेस में चलें वरना खाना खत्म हो जाएगा।”

  दोनों अपना खाना परोस कर खाने बैठी ही थी कि एक सीनियर मैडम ने सामने आकर बोलना शुरू कर दिया…

“हेय गर्ल्स !! आज की सुबह ने एक बैड न्यूज़ सुनाई लेकिन शाम जाते जाते हमें एक गुड़ न्यूज़ दे गई। आल द गर्ल्स बी रेडी ….
   आप में से कोई गेस कर सकता है,मैं कौन सी गुड न्यूज़ देने वाली हूँ।?”

सब ने एक स्वर में “नो” का राग अलाप दिया…

“कल वो ख़ास दिन है जब खुद राजा अजातशत्रु सिंह हमारी यूनिवर्सिटी में आतें हैं! और हम सब को मोटिवेट करने के साथ ही वेल्कम कर  जातें हैं।
मैं जानती हूं आप में से जूनियर्स को तो अब तक उनके बारे में कुछ खास मालूमात नही होंगे , लेकिन बाकी लड़कियां तो अच्छे से जानती हैं कि राजा अजातशत्रु कितने बड़े लेडी किलर हैं।
    बाय गॉड आज तक इतना खूबसूरत बंदा मैंने अपनी लाइफ में नही देखा। और उन्हें देखने के बाद मेरा मेरे लल्लू बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप भी हो गया। तो लड़कियों अगर तुम लोग ब्रेकअप नही करना चाहती हो तो कल उनकी स्पीच में मत जाना।
   लेकिन अगर उनकी स्पीच नही सुनी तो ये मान लेना कि तुम्हारा जीवन व्यर्थ है। तुमने अपने जीवन का सबसे खुशगंवार पल जिया ही नही अगर तुमने अजातशत्रु को देखा और सुना नही।
   उस आदमी को देख कर मुझे फ़िल्म इंडस्ट्री के सारे खूबसूरती पर लिखे गाने याद आ जातें हैं। तो गर्ल्स कल सब अपनी सबसे खूबसूरत ड्रेस मे सज धज कर असेंबली में पहुंच जाना…
    यूनिवर्सिटी के सेंटर में जो राउंड शेप बहुत बड़ा सा हॉल बना है उसे असेंबली कहतें हैं।
कल वहाँ सारे कॉलेज के बंदे होंगे इसलिए ध्यान से , सब जल्दी पहुंच कर सामने की सीट्स कैप्चर कर लेना। वैसे तो कॉलेज वाइस सीट अलॉटमेंट होते हैं। पर ये इंजीनियरिंग वाले झालूमल और आर्ट्स वाले गोपीनाथ लोग कहीं भी बैठ जाते हैं। इन दोनों कॉलेज की लड़कियों के तो क्या ही कहने। मैथ्स वाली सारी गर्ल्स खुद को “शंकुतला देवी” समझतीं हैं। इन्हें लगता है इन्होंने मैथ्स ले लिया तो रॉकेट उड़ा चुकी हैं,ये अपने सुपिरियारिटी कॉम्प्लेक्स में ही मारी जाती हैं।
        कुछ यही हाल आर्ट्स वाली छोरियों का है। उन सब को लगता है वो सभी अगली यू पी एस सी स्कॉलर हैं सो पढ़ाई लिखाई करें या मत करे खुद को अभी से कलेक्टर कमिश्नर माने बैठी रहती हैं…. और ये सारी लड़कियां हम मेडिकोज को किसी और प्लेनेट का मानती हैं। ये हम से सीधे मुहँ बात नही करती, इसलिए आप लोगों को भी हमारे कॉलेज से बाहर किसी से बात करने की कोई ज़रूरत नही है।
    एटीट्यूड गर्ल्स!! वो कभी मत भूलना।
   यू नो क्लास बेबी। वो मेडिकोज के अलावे कहीं दिखती ही नही। “
  
       वो अभी अजातशत्रु की तारीफ में और भी कसीदे पढ़ने वाली थी कि उसका फ़ोन घनघना उठा और वो फ़ोन उठाये बाहर चली गयी।
   रंगोली ने देखा,सबसे किनारे की एक कुर्सी पर गौरी बैठी चुपचाप अपना खाना खा रही थी। रंगोली को जाने क्यों लेकिन ये छुईमुई सी सीनियर पहले दिन से ही बहुत भा गयी थी।
   बस उसे यही लगता था कि इतनी सुंदर और इंटेलिजेंट होने के बावजूद वो इतना चुप सी क्यों रहती हैं। और झनक तो कह रही थी,उनका कुछ इलाज भी चल रहा है। किसी मेंटल प्रॉब्लम का। पर शक्ल से तो वो मेंटल लगती ही नही। फिर?
    वो अपनी सोच में गुम थी कि झनक ने उसे झकझोर दिया…

“अभी तो भूख भूख चिल्ला रही थी,और अब इतने से चांवल भी ऐसे चुन चुन कर खा रही जैसे मोती खा रही हो। तुझे बस भूख लगती है लेकिन तुझसे खाना खाया नही जाता बल्कि तेरा खाना तुझे खाता है।”

  रंगोली ने झनक को घूर कर देखा और जल्दी से अपना खाना खत्म करने में लग गयी।

  दोनों ने मेस में खाने के बाद प्राची के लिए भी प्लेट
परोस ली और दूसरी प्लेट से ढक कर ऊपर ले गयी।
उन दोनों  के ऊपर पहुंचते में प्राची सो चुकी थी।
   उन दोनों ने खाना टेबल पर रख दिया और एक ही बिस्तर में सोने की तैयारी करने लगी।

   सोने के पहले उन दोनों को ही दूध पीने की आदत थी, रूम पर ही इंडक्शन पर दूध गर्म कर रंगोली ने दो बड़े कप में निकाल लिया, और बाहर बालकनी में खड़ी झनक के पास पहुंच गई।
   उन लोगों का कमरा हॉस्टल में उस तरफ था जहाँ से रोड साफ नजर आती थी। ये वही रोड थी जहाँ की टपरी से कुछ देर पहले वो सिगरेट लेकर आई थी।
  रास्ते पर अब भी चहल पहल थी। रंगोली ने एक कप झनक के हाथ में थमा कर दूसरा खुद अपने मुहँ से लगा लिया….

उसी वक्त खाना खा कर टहलने के नाम पर अभिमन्यु ने अधीर को फिर निशाना बनाया था और उसे साथ लिए मेडिकल के सामने के रास्ते ही को नाप रहा था।
   वो दोनो वापस टपरी पर पहुंचे ही थे कि कालूमल जो टपरी का मालिक था ने अपने दोनो हाथ जोड़ दिए…

“अब दुकान बंद कर चुके हैं। अब कोई सिगरेट सुट्टा पान बीड़ी तम्बाकू गुटखा नही मिलेगा।”

“अरे चाहिए भी नही दादा। हम लोग तो बस टहल रहे हैं।”

कालूमल अनुभवी आदमी था, जब से मायानगरी खुली थी तब से उसके सामने अपनी गुमटी जमाये बैठा था। उसने एक नज़र मेडिकल गर्ल्स हॉस्टल की तरफ देखा और वापस उन दोनों को देखने लगा।

“हाँ क्यों नही। फर्स्ट ईयर में जब नए नए एडमिशन होतें हैं ना तब तुम जैसे बहुतों को टहलने की आदत लग जाती है। और छै महीना बीतते ये आदत कब गायब हो जाती है तुम्ही को नही पता चलेगा बचुआ।”

“अरे ओ कक्का! अढ़ाई साल से देख रहे हो फिर भी इत्ता बड़ा इल्ज़ाम ?
   कभी देखे हो किसी लड़की को घुमाते।”

“बेटा कोई घूमने वाली मिले भी तो? वरना घुमाओगे किसे? “

“इतना अंडर एस्टीमेट भी मत करो कक्का! जलवा है हमारा। “

  कालूमल गर्दन हिलाता अपनी बाइक में बैठ कर निकल गया…

“अभि ये भी हमारी असलियत जानता है बे। चल अब वापस चले ,भाभी जी लगता है सुट्टा मार के सो गयीं। वो गाना है ना मेरे दादा जी के ज़माने का वो भाभी जी पर फिट बैठता है…

     मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
     हर फिक्र को धुँए में उड़ाता चला गया…!

अभिमन्यु ने घूर कर अधीर को देखा…

“किस किस ज़माने के गाने याद हैं बे तुझे और सिचुवेशन के हिसाब से फिट फाट भी कर देता है।”

“हाँ फिर?”

उसी वक्त रंगोली बालकनी में दो बड़े कप थामे प्रकट हुई।

“माँ कसम अभि!!  तुम्हे देख कर सदा सुहागन वाली फीलिंग आ रही है बे। मतलब बस नाम लिया और शैतान सी हाज़िर हो गईं भाभी। अबे लगता है सुट्टे के साथ के लिए वाइन भी जुगाड़ रखी हैं बेटा।
   मज़े रहेंगे तुम्हारे। अफलातून मियां,और बेवड़ी बीवी। “

“अबे चुप करो यार, ये कप में कॉफी भी हो सकती है ना। जब बोलोगे ज़हर ही बोलोगे। अब अगर ये बेवड़ी निकली न तो इसका सारा ठीकरा तेरे सर पर फोडूंगा। “
.”भाई हम सच बोलतें हैं एकदम खरी खरी। बुरा तुम्हे। लगा गया तो हम क्या करें।

“हाँ मेरे ट्रुथ लवर,चल अब दर्शन तो मिल ही गए देवी जी के। अब वापस चलतें हैं।”

  दोनों वहाँ से अपने हॉस्टल की तरफ बढ़ गए।

*******

अगली सुबह पूरी यूनिवर्सिटी राजा साहब की अगुआई की तैयारियों में लगी थीं।
  यूनिवर्सिटी के कई भाग शुरू हो चुके थे, लेकिन अब भी कुछ भागों में कुछ काम बाकी होने से उनका शुभारम्भ नही हो।पाया था। उन्हीं में से एक काम था सेंट्रल लाइब्रेरी का।
  इस बार राजा अजातशत्रु के आने के दो मुख्य प्रयोजन थे। एक तो हर साल की तरह वेल्कम स्पीच देनी ही थी,दूसरा सेंट्रल।लाइब्रेरी का शुभारंभ भी करना था।
   पाँच मंजिला सेंट्रल लाइब्रेरी में अलग अलग फ्लोर पर अलग अलग तरह की किताबों के साथ ही दूसरी मंजिल पर डिजिटली किताबें पढ़ने के लिए लगभग पचास कम्प्यूटर्स आमने सामने एक पंक्ति में सजे रखे थे।
   किसी गरीब बच्चे को कभी किताबो की कमी से पढ़ाई दुष्कर न लगने लगे यही सोच कर उस लायब्रेरी में हर वो किताब मौजूद थी जिसे विद्यर्थी सबसे ज्यादा पसन्द  करते थे।

   राजा साहब के ऊंचे ऊंचे कट आउट्स लगे हुए थे। बीच में कहीं कहीं रानी बांसुरी , युवराज ,विराज आदि के भी लगे थे।
  लेकिन सबसेअधिक संख्या में राजा के ही कट आउट्स लगे थे।

   एक एक कर विद्यार्थी असेंबली हॉल की तरफ बढ़ने लगे थे। और सब की नजरें आज यूनिवर्सिटी की साज सज्जा पर टिकी जा रहीं थी।
  लेकिन झनक के साथ उस तरफ बढ़ती रंगोली की नज़रे सिर्फ एक ही पर टिकी थीं, राजा अजातशत्रु सिंह पर….

“ये किसके कट आउट्स लगें हैं झनक ?”

“अरे पागल यही तो राजा साहब हैं। हमारी यूनिवर्सिटी के मालिक, अरे इन्ही की बीवी के नाम पर तो हमारा कॉलेज है। आर बी ए एस मेडिकल कॉलेज यानी रानी बांसुरी अजातशत्रु सिंह मेडिकल कॉलेज।”

“ओहहो अच्छा तो ये सच के राजा रानी हैं?”

“हाँ तो और क्या? तूने क्या सोचा था?”

“अरे मैं तो सोचती थी या तो ये लोग मर चुके होंगे या फिर बहुत ज्यादा बूढ़े होंगे।”

“चुप पागल। मरे उनके दुश्मन, उन्हें तो सौ साल जीना है अभी। “

  रंगोली की नज़रे नही हट रही थीं…

“अबे पलक भी झपक ले वरना फ्लेबाइटिस हो जाएगा। “

झनक की बात सुन रंगोली झेंप गयी…

“झनक यार लड़के भी इतने खूबसूरत होतें हैं?”

“हाँ फिर? और एक तू ही ऐसे नही पगलाई है,बाकी लड़कियों का भी कुछ कुछ यही हाल है समझी। अभी तो बस होर्डिंग्स देखें है बेटा, अब कुछ देर में तो साक्षात दर्शन होंगे। “

“मेरे पेट में तो सोच कर ही तितलियां उड़ रहीं है कि मैं इस इंसान को सामने से देखने वाली हूँ।”

  रंगोली की इस बात पर झनक ने मुस्कुरा कर उसका हाथ पकड़ लिया

थोड़ी ही देर में अफरातफरी का माहौल हो गया। हर तरफ राजा जी आ गए का शोर मचने लगा और रंगोली के दिल की धड़कने उसके ही कानो तक खट खट करती पहुंचने लगी…..

क्रमशः

aparna….

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments