
जीवनसाथी -3 भाग -85
वो सर्द नज़रों से अपनी लाड़ली को उन के लोगों के बीच हँसते खिलखिलाते देख कर स्तब्ध खड़ा था..
वासुकी को सामने खड़ा देख कली स्तब्ध थी.. उसका दिल दिमाग जैसे जम गया था.. उसने अब तक जो कुछ भी अपने डैडा को बताया था, वो सारा झूठ उसके डैडा के सामने आ चुका था..
“क्या हुआ कली, उतरो ना, इसी ट्रेन से वापस लौटना है क्या ?”
उसके पीछे खड़े शौर्य ने कहा और कली चौंक गयी.. वो धीरे से नीचे उतर गयी.. उसके ठीक पीछे शौर्य भी उतर गया..
कली धीमे कदमो से चलती हुई वासुकी तक पहुँच गयी, वो वासुकी के सामने आकर खड़ी हो गयी, उसने अपनी डरी डरी आँखों से वासुकी को देखा, वो उसे ही देख रहा था..
उन आँखों में ना कोई शिकायत थी ना गुस्सा, लेकिन जो भी था वही देखने कि हिम्मत कली को नहीं हो रही थी..
उसी वक्त शौर्य कली के पास चला आया..
“अपना हैंडबैग वहीँ सीट पर भूल गयी थी तुम.. लो रखो !”
शौर्य ने कली का हैंडबैग उसके कंधे पर लटकाया और उसका चेहरा उसकी ठुड्डी से थाम कर अपनी तरफ घुमा लिया..
वैसे शौर्य कभी कली से ऐसे बात नहीं करता था, एक जायज दुरी वो हमेशा बनाये रखता था, लेकिन आज शायद वो कुछ ज्यादा ही खुश था बस इसीलिए उसने कली के चेहरे को छू लिया, लेकिन आज गलत वक्त पर गलत बात हो गयी..
सामने खड़े वासुकी ने कली पर से नजर उठा कर शौर्य की तरफ देखा…
शौर्य आश्चर्य से कली को देख रहा था…
“ये कौन है कली ?”
शौर्य ने वासुकी को देखते हुए सवाल किया..
“तुम कौन हो ?” वासुकी ने शौर्य के सवाल पर अपना सवाल पूछ लिया..
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“डैडा… ये शौर्य है, शौर्य ये मेरे डैड हैं !”
वासुकी अब भी अपनी बडी बड़ी आँखों से शौर्य को घूर रहा था..
कली से उसका परिचय सुनते ही शौर्य ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया..
“आपसे मिल कर अच्छा लगा सर !”
“अभी हम मिले ही कहाँ? वैसे मुझे अच्छा नहीं लगा !” एक एक शब्द को चबाते हुए बोल कर वासुकी ने कली की तरफ देखा.. -“चले ?”
कली ने बस धीमे से गर्दन हिला दी..
वासुकी ने उसका बैग उठाया और आगे बढ़ गया..
वासुकी जिस दिशा में आगे बढ़ रहा था उस दिशा में दो कदम आगे बढ़कर सारिका खड़ी थी। उसकी आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे, उसने कली को देखा और कली के पीछे खड़े राजा अजातशत्रु के छोटे रूप को देखा और कुछ देर के लिए उसे देखती रह गई। कली सारिका के पास आई और उसके गले से लिपट गई। सारिका ने भी उसे प्यार से बाहों में भर लिया।
“आई एम सॉरी कली, हमें तुम्हें छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। तुम्हारे डैडा बहुत ज्यादा नाराज हो गए हैं।”
कली ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी। वासुकी उन दोनों के पास से आगे निकल चुका था। उसने पलट कर उन दोनों की तरफ देखा और चलने का इशारा कर दिया। सारिका और कली एक दूसरे का हाथ थामे वासुकी के पीछे-पीछे निकल गए।
कुली ने सारा सामान उठा रखा था वह भी उन लोगों के पीछे बढ़ गया..
कुछ आगे बढ़ने के बाद कली धीरे से पलट गई। उसने देखा शौर्य वहीं खड़ा उसे निहार रहा था। शौर्य ने जैसे ही देखा कि कली उसकी तरफ देख रही है, शौर्य ने अपना हाथ हिला दिया।
कली ने धीरे से अपनी तीन उंगलियां हिला कर उसे बाय कहा और वापस सीधे घूम गई। शौर्य खाली-खाली आंखों से कली को जाते देखता रहा। इस पल के पहले उसे मालूम ही नहीं था कि कली अचानक उसे छोड़ कर चली जाएगी। वह जब तक साथ थी, वह हर वक्त या तो उसका मजाक बनाता रहता था, या उसकी बातों को नजर अंदाज करता रहता था। उसने कभी सोचा ही नहीं था कि कली अचानक ऐसे जा भी सकती है।
जब महल से कली गुस्से में निकली और उसके पास धनुष और विक्रम का फोन आया, तब वह एकदम से हड़बड़ा गया था। उसे समझ में आ गया था कि किसी बात पर कली उससे नाराज हो गई है, उसे खुद पर इतना भरोसा भी था कि वह कली को चुटकियों में मना लेगा। विक्रम को कली के पीछे भेज वह भी तुरंत स्टेशन के लिए निकल गया था।
हालांकि इस स्टेशन पर वह ट्रेन नहीं पकड़ पाया था। लेकिन ठीक अगले स्टेशन पर उसने ट्रेन को पकड़ लिया था, और जैसा उसने सोचा था कली की नाराजगी भी उसने सिर्फ बातों ही बातों में दूर कर दी थी। लेकिन उस वक्त भी उसके दिमाग में यह बात ही नहीं आई कि कुछ पलों के बाद कली उसे छोड़कर चली जाएगी।
वह जानता था कि कली लंदन में रहती है, इसका मतलब उसके डैडा उसे सीधे लंदन लेकर जाने वाले थे? एक ठंडी सी आह भर कर वह उसे जाते देखता रहा और उसके देखते-देखते कली उसकी आंखों से ओझल हो गई..
” हम कहां जा रहे हैं डैडा ?”
कली ने ही हिम्मत करके वासुकी से यह सवाल पूछ लिया। सारिका की तो कुछ भी पूछने की हिम्मत ही नहीं थी। बाहर टैक्सी में बैठा दर्श उन लोगों का इंतजार कर रहा था। वासुकी ने टैक्सी में बैठते ही एयरपोर्ट चलने के लिए टैक्सी ड्राइवर को कहा और एक बार फिर अपनी चुप्पी में डूब गया। उसने पहली बार कली के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया था।
कली ने दर्श की तरफ देखा। दर्श उसे देखकर हल्के से मुस्करा उठा।
” तुम ठीक हो ना बेटा?”
दर्श के सवाल पर कली मुस्कुरा उठी,-” मैं एकदम ठीक हूं चाचू..।”
सारिका ने भी धीरे से दर्श की तरफ देखा। लेकिन दर्श ने सारिका को बुरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
दर्श मुंह फेर कर खिड़की से बाहर देखने लगा। कुछ पलों में ही उनकी टैक्सी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही थी।
कली वापस अपनी हिम्मत जुटा दर्श से पूछ बैठी
“दर्श चाचू हम अभी कहां जा रहे हैं..?”
“वापस जा रहे हैं कली लंदन..!”
कहीं ना कहीं कली का मन उसे पहले ही बता चुका था कि उसके डैडा उसे वापस लेकर ही जाने वाले हैं। फिर भी मन के किसी कोने में एक छुपी हुई आस थी कि हो सकता है डैडा उसके दोस्तों से मिलने के लिए रुक जाए।
लेकिन दर्श का जवाब सुनते ही वह आस भी टूट गई। कली के चेहरे पर एकदम से उदासी छा गई। आज जाने क्यों लेकिन उसके डैडा का उससे नाराज होना, उससे नहीं बोलना उतना नहीं खल रहा था जितना शौर्य के साथ छूट जाने का दुख उसे सता रहा था…।
स्लेट पर खींची एक लाइन को बिना काटे बिन मिटाए अगर छोटा करना है, तो उसके ठीक बगल में उससे बड़ी लाइन खींच देनी चाहिए।
बस वैसा ही कुछ कली के साथ हो रहा था। आज तक उसके डैडा उसके लिए सब कुछ थे। उसकी पूरी दुनिया, उसका ब्रह्मांड, उसके डैडा थे।
उनके चेहरे पर हंसी देखने के लिए जाने वह दिन भर कितने स्वांग रचती थी कि किसी तरह उसके डैडा मुस्कुरा दें।
अगर किसी बात पर उसे लगता था कि डैडा नाराज है तो वह पूरा दिन उसका अच्छा नहीं बीतता था और वह किसी भी तरीके से अपने डैडा को मना कर ही रहती थी। लेकिन आज उसे पता था कि उसके डैडा नाराज है, बावजूद शौर्य का साथ उसके हाथ से छूट गया था।
और वह दर्द उसके लिए इतना बड़ा था कि आज डैडा की नाराजगी भी एक किनारे हो गई थी।
उसका एक मन कह रहा था डैडा के गले से लगकर माफी मांग ले और रो-रो कर उन्हें शौर्य के बारे में सब कुछ बता दे। लेकिन दूसरी तरफ उसकी हिम्मत भी चूकती जा रही थी।
वह जिस भंवर में फंसी हुई थी उससे अब उसका निकलना मुश्किल ही था…।
कुछ पलों में उनकी टैक्सी एयरपोर्ट पहुंच गई।
सारा समान उतार कर वह सभी लोग एयरपोर्ट के अंदर चले गए। वहां जाने के बाद वासुकी ने सारिका और कली को उनके टिकट्स दे दिए..
” दर्श हमारी फ्लाइट रात में है, तो तब तक इन दोनों के साथ तुम रेस्ट रूम में रुको। मैं कुछ जरूरी काम निपटा कर आता हूं…!”
“मैं भी साथ चलता हूँ अनिर ?”
“नहीं.. अब इन्हे अकेले नहीं छोड़ना !”
वासुकी की कही यह बात सारिका और कली दोनों के दिलों को तार-तार कर गई।
कली को समझ में आ गया था उसने अपने डैडा का भरोसा खो दिया था। उसे इस बात का भी दुख था कि हमेशा अपने डैडा को अपनी उंगलियों में नचाने वाली कली आज उनकी आंखों में हमेशा हमेशा के लिए अपना स्थान खो चुकी है।
वासुकी ने दर्श को सामान सौंपा और अपना मोबाइल जेब से निकाल कर लंबे-लंबे डग भरता वहां से बाहर निकल गया…
तेज़ कदमों से चलता हुआ वासुकी एयरपोर्ट से बाहर निकल गया, उसने वहां से बाहर निकल कर किसी को फोन लगा लिया..
“हेलो कौन बोल रहा है ?”
“वासुकी बोल रहा हूँ.. अनिरुद्ध वासुकी !”
“भरद्वाज सर.. आप ? कहाँ है ? क्या इण्डिया में हैं आप ?”
“हम्म आज रात वापस लौटना है, तुमसे एक काम है ?”
“आप हुकुम कीजिये बॉस !”
“एक लड़के के बारे में पता करना है…
इसके बाद वासुकी उस आदमी को शौर्य के बारे में बताता चला गया, और उस आदमी ने वासुकी को यह तसल्ली दी कि वह जल्द से जल्द उस लड़के के बारे में सब कुछ पता करके बता देगा।
यह लड़का उस वक्त वासुकी के साथ काम कर रहा था जिस वक्त वासुकी ने अपना खुद का भेष बदल हुआ था। और वह अनिर्वान भारद्वाज के नाम से इंडिया में रह रहा था। उस समय यह अनिर्वान का सबसे विश्वास पात्र मुखबिर था। जिसने जाने कितनी बार अनिर्वान की मदद की थी। हालांकि उसकी मदद के पीछे भी एक बहुत बड़ा और गहरा राज छुपा था..
वह लड़का खुद वासुकी के ढेर सारे अहसानो के तले दबा हुआ था और वह मन से वासुकी को पूजता था। इसलिए उसके लिए वासुकी का कोई काम करना किसी तीर्थ के दर्शन के बराबर था।
और इसलिए अपने लोगों के साथ वह शौर्य के बारे में सब कुछ पता करने में जुट गया। वासुकी को कहीं चैन नहीं मिल रहा था। वह कली के इंडिया आने से इसी बात से डरा हुआ था कि उसकी भोली कली कहीं किसी गलत लड़के की बातों में ना आ जाए, और आज उसे उन लोगों के साथ देखकर वह सकते में आ गया था।
जिस ढंग से हंसते खिलखिलाते वह सभी लोग ट्रेन से उतर रहे थे, उससे साफ जाहिर था की कली के साथ उन सब की काफी अच्छी दोस्ती थी। हालांकि वासुकी अब तक उन लोगों को पहचान नहीं पाया था कि वह सभी राज परिवार के बच्चे हैं। लेकिन उनके साथ मौजूद सहायकों और सिक्योरिटी को देखकर वासुकी को इतना समझ में आ गया था कि यह बड़े घर के बच्चे हैं। और इसीलिए वासुकी का दिमाग और भी ज्यादा खराब हो गया था…
वो वहीँ बाहर एक कैफे में जाकर बैठ गया था, वो अपने मुखबिर के फ़ोन का इंतज़ार करता बैठा था..
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कली का अचानक ऐसे चले जाना वहां मौजूद सभी के लिए बहुत बड़ा धक्का था। कली के जाते ही हर्ष तेजी से शौर्य के करीब चला आया।
“शौर्य यह आदमी कौन था, और कली अचानक ऐसे कैसे चली गई। “
“हर्ष भाई वह कली के डैडा थे.. वह कली को लेने आए थे..।”
“लेकिन यह कौन सा तरीका होता है उसे लेकर जाने का। हम सबसे एक बार मिलते तो सही..?”
“मुझसे मिलकर गए हैं..।”
“क्या कह रहे थे ?”
“कह रहे थे, मुझसे मिल कर अच्छा लगा उन्हेँ.. !”
“हम सब से भी मिल लेते.. और अच्छा लगता !” यश बोल पड़ा..
यश और धनुष आगे बढ़ गए.. विक्रम पहले ही हेल्पर्स के साथ गाड़ियों की तरफ बढ़ गया था..
हर्ष, शौर्य के कंधे पर हाथ रखे धीरे धीरे चलने लगा..
“कहाँ गए है ये लोग?”
“पता नहीं भैया, कुछ कहा नहीं उन्होंने.. पर मुझे लगता है वापस लंदन ही जायेंगे !”
“अरे हम सब से बिना मिले ही चले गए.. रुको मैं कली को कॉल कर लेती हूँ.. !”
मीठी ने कहा और कली का नंबर लगा दिया..
ये वही समय था जब कली सरु और डैडा के साथ टैक्सी में बैठी थी…
उसका फ़ोन बजने लगा, और सामने बैठे वासुकी ने हल्की सी गर्दन घुमाई और डर से कली ने फ़ोन काट दिया..
“फ़ोन नहीं उठाया उसने, बल्कि काट दिया !”
मीठी ने हर्ष की तरफ देख कर कहा..
“कोई बात नहीं.. बाद में लगा लेंगे.. इतने दिनों बाद पेरेंट्स से मिली है, तो शायद उन्हेँ समय देना चाहती होगी !”
वो सब लोग वहाँ से निकल गए..
आगे तो शौर्य भी बढ़ गया था, लेकिन अचानक ही उसे बहुत थकान सी लगने लगी थी..
ऐसा लग रहा था जैसे उसका कोई हिस्सा स्टेशन पर ही छूट गया है… और वो अब उस हिस्से को खुद से जोड़ नहीं पा रहा है..
उसके आसपास सारे उसके अपने लोग थे, लेकिन अब उसका किसी बात में मन नहीं लग रहा था..
***
लगभग डेढ़ दो घंटे में उस मुखबीर का वासुकी को कॉल आ गया..
“बोलो चरण !”
“सर,आप जिनके बारे में पता करवा रहे हैं, वो कौन है जान कर आप चकित रह जायेंगे.. !”
“बताओ कौन है !”
“सर आप सोच भी नहीं सकते कि वो आम से नाम वाला लड़का कौन है.. !”
“तुम बताओगे भी, या बस यूँ ही पहेलियाँ बुझाते रहोगे.. !”
“सर उस लड़के का नाम है शौर्य… !”
“आगे पीछे कुछ तो बताओ.. !”
“बता रहा हूँ सर… उनका पूरा नाम है राजकुमार शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला !”
वासुकी के माथे पर बल पड़ गए.. -“कौन ?”
” विजयराघवगढ़ रियासत के छोटे राजकुमार शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला, महामहिम राजाधिराज आजातशत्रु सिंह बुंदेला के इकलौते बेटे हैं यह..!”
एक गहरी सी साँस भर कर वासुकी ने पीड़ा से आंखे मूँद ली..
जिन बातों जिन यादों से दूर भगाने के लिए वह सब कुछ समेट कर लंदन चला गया था, आज इतने साल बाद वही यादें वही बातें उसके सामने आकर इस तरह से खड़ी होगी उसने सोचा नहीं था।
कली के साथ शौर्य की दोस्ती उसने सपने में भी नहीं सोची थी। उसे लगा था लंदन में पली बढी कली की शादी वह अपने हिसाब से किसी अच्छे से लड़के से कर देगा।
अपने घर के ठीक बगल वाले घर को भी वासुकी ने इसीलिए खरीद रखा था कि कली को शादी के तोहफे के तौर पर वह घर दे देगा। जिससे उसकी नाजों पली बेटी उसकी आंखों के सामने रहे।
दामाद को अपने घर पर रखने के वह पक्ष में नहीं था। क्योंकि इससे उसके दामाद के स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती थी। बस इसीलिए उसने अपने घर के ठीक बगल वाले बंगले को खरीद रखा था, लेकिन आज..
हालांकि कली ने वासुकी को शौर्य से दोस्त कहकर ही मिलवाया था, लेकिन कली के इतने ढेर सारे दोस्तों में पहली बार उसकी नजर किसी लड़के पर ठहरी थी।
और उसे देखकर यह महसूस हुआ था कि यह कली का सिर्फ दोस्त नहीं है, कोई और लड़का होता तो शायद एक बार को कली की खुशी के खातिर वह मान भी जाता, लेकिन शौर्य के साथ वह कली का भविष्य कभी नहीं सोच सकता…।
एक गहरी सी साँस भर कर वो अपनी जगह से उठा और लम्बे लम्बे डग भरता एयरपोर्ट के अंदर चला गया…
क्रमशः..
“

Acchi or bahut hi Khubsurat n manbhavani kahani.
❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
Waiting for next part of jeevansathi
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
Madam next part kab post karoge??
Madamji jeevansaathi ke 85 ke baad waale part bhi jaldi daalo comments to bhar bhar ke kar diye maine ab agla part chahiye matlab chahiye😂😂
हम जिस चीज से सबसे ज्यादा भागते हैं वही चीज हमारे पीछे आती है इस बात को बिल्कुल सही सिद्ध किया है वासुकी के डर ने।
वासुकी नहीं चाहते थे कि महल के लोगों से किसी भी तरीके से वह मतलब रखें पर आज देखोराजा अजात शत्रु सिंह बुंदेला जी का बेटा ही कली का वह खास दोस्त निकला जैसे क ली बहुत चाहती है अब बासुकी पता नहीं क्या करेगा मुझे डर लग रहा है कहीं कली को कोई दिक्कत ना हो इस बात से।
mam raja ji to nahi hai wo
unke hairs to aapne shoulder tak likhe the just like kgf look
ye to mujhe mithi n harsh lag rahe h
Hiii
Love it as always humesa intzaar mai rhte hai kb shorya or kali se mulakaat krayegi ap