
अपराजिता-122
अथर्व कुछ दिनों की छुट्टी लेकर रेशम के गांव आया हुआ था..
आज रेशम की मीटिंग होनी थी, हर माह उन सभी डॉक्टर्स की मीटिंग उनके जिला अस्पताल में हुआ करती थी..
रेशम तैयार हो चुकी थी.. सलीके से बालों को समेट कर उसने पीछे पिन कर लिया था, साडी को सही तरीके से बांध कर वो अब पूरी तरीके से तैयार थी..
रसोई में गुड़िया आलू के पराठो की तैयारी कर रही थी, की रेशम पहुँच गयी..
उसने अपने हाथो से अपने पतिदेव के लिए पराठे तैयार किये और तब तक अथर्व भी तैयार हो कर कमरे से बाहर चला आया..
अब तक रेशम ने नाश्ता लगा दिया था..
“अरे वाह आलू के पराठे ! आओ तुम भी खा लो!”
रेशम ने मुस्कुरा कर पराठे का एक टुकड़ा मुहं में डाला और वापस रसोई में घुस गयी..
कुछ देर में ही चाय लेकर चली आयी..
उसने चाय अथर्व के सामने रखी और अपना कप लेकर बैठ गयी..
वापस उसे कुछ काम याद आ गया, अगला निवाला मुहं में डाले वो फिर वहाँ से निकल गयी!
ऐसे ही चलते फिरते उसने एक पराठा खाया और चाय पीने लगी..
“ऐसे ही नाश्ता करती हो तुम रेशु ?”
रेशम हल्के से मुस्कुरा उठी..
“सुबह बहुत हड़बड़ी होती हैं ना बस इसलिए !”
“गलत बात हैं.. अगर ऐसा ही करती हो तो तुम्हे अपने साथ लेकर चला जाऊंगा!”
“फ़िलहाल तो मीटिंग के लिए निकलते हैं, वरना देर हो जाएगी.. !”
रेशम ने अपनी साडी सही सेट की और वो दोनों निकल गए!
रेशम ने गुड़िया की आज छुट्टी कर दी..!
“हम लोगो को शहर से लौटने में शाम हो जाएगी गुड़िया, अब आज तू मत आना !”
“रात का खाना दीदी ?”
“वो मैं देख लुंगी !”
रेशम ने चाबी अपने पर्स में डाली और अथर्व के साथ गाड़ी में बैठ गयी….
दोनों शहर की तरफ निकल गए!
शहर में जिला अस्पताल में रेशम को उतारकर अथर्व वहां से शहर घूमने निकल गया।
रेशम अपनी मीटिंग के लिए ऑडिटोरियम में दाखिल हो गई। राजेंद्र भी वहां मौजूद था। जिला अस्पताल में काम करने वाले सभी डॉक्टर और उस जिले में आने वाले गांव में पदस्थ सभी डॉक्टर्स की एक साथ ही मीटिंग हुआ करती थी।
जिसमें उन्हें हर एक मरीज तक चिकित्सकीय सुविधा किस तरह मुहैया करानी है, आदि पर विशेष जोर दिया जाता था। गांव में काम करने वाले डॉक्टर को विशेष तौर पर यह सिखाया और समझाया जाता था कि किस तरह भीड़ वाले क्षेत्रों में शिविर आदि का आयोजन करके ज्यादा से ज्यादा संख्या में मरीजों को राहत दिलवाई जा सकती है।
इसी तरह की ढेर सारी उपयोगी अनुपयोगी जानकारी के साथ इन सभी डॉक्टर्स की मीटिंग और ट्रेनिंग हुआ करती थी।
मीटिंग होते होते शाम ढल गई। रेशम बार-बार यह महसूस कर रही थी कि अथर्व ने उसके साथ रहने के लिए छुट्टियां ली है, लेकिन उसकी छुट्टियों के दौरान ही रेशम की मीटिंग और ट्रेनिंग एक साथ पङ जाने से आज का पूरा दिन अथर्व का व्यर्थ चला गया था।
अथर्व बेकार ही शहर में घर से उधर मारा फिर रहा होगा। जैसे तैसे मीटिंग समाप्त हुई और रेशम ऑडिटोरियम से बाहर आकर अथर्व को कॉल कर उसकी प्रतीक्षा करने लगी।
कुछ देर में अथर्व उसे लेने चला आया..
रेशम दरवाज़े पर खड़ी अथर्व की प्रतीक्षा कर रही थी, उसी समय राजेंद्र उसके बगल से गुजर कर आगे बढ़ गया।
राजेंद्र को आज मार्केट जाना था।
उसने सुबह ही भावना से कहा था कि वह शॉपिंग की लिस्ट तैयार रखेगी और आज ही वह इस मीटिंग के चक्कर में फंस कर रह गया था। उसने वहीं से निकलते हुए भावना का फोन मिला लिया।
भावना जैसे राजेंद्र के फोन की प्रतीक्षा में ही थी। उसने लपक कर फोन उठा लिया।
“तैयार हो ?”
“हाँ हम तैयार हैं, और लिस्ट भी तैयार कर ली है, लेकिन.. “
“लेकिन क्या ?”
“सामान तो बहुत सारा है, आज एक ही दिन में फर्नीचर, रसोई का सामान, डिब्बे फल सब्जियां ये सब नहीं बन पायेगा, फिर वापस आकर खाना भी बनाना होगा ना ?”
“क्यों नहीं हो पायेगा? सबसे पहले फर्नीचर की दुकान पर जाकर अपनी पसंद का फर्नीचर ऑर्डर कर देंगे, वो सामान तो दुकान वाले ही घर भिजवा देंगे, उसके बाद राशन फल सब्जियां खरीद कर आराम से बाहर ही खाना खाकर घर लौट आएंगे, क्यूंकि घर लौट कर बनाने में फिर देर हो जाएगी ! ठीक है ?”
“हम्म ठीक है!” भावना हल्के से मुस्कुरा उठी..
जब से राजेंद्र ने कहा था कि घर का सामान लाना है, तभी से वो घर को देख देख कर यही सोच रही थी कि घर के किस कोने में क्या लाकर रखेगी जिससे वो कोना सुंदर हो जाये…
कैसा पलंग होगा, कैसे सोफे होंगे? कैसा गलीचा होगा? यही सब सोचती वो घर को सुबह से बार बार घूम कर देख चुकी थी..
उसके मायके वाले घर पर बहुत ज्यादा सामान था नहीं, बैठने लायक एक पुराना सा बबूल की लकड़ी का मजबूत सा बिना किसी तामझाम वाला सोफा था!
लेकिन उसे कुसुम के घर पर डले सोफे बहुत पसंद थे..
उन्हेँ सोच कर ही वो अपनी सोच पर लजा कर रह गयी.. वो शाही सोफे क्या इस छोटे से क्वार्टर में समा भी पायेंगे?
वो ज्यादा नहीं बोलेगी, डॉक्टर साहब को अपने अनुसार खरीदारी करने देगी, वैसे भी घर उनका है, वही ज्यादा बेहतर समझेंगे..
भावना से बात होने के बाद राजेंद्र मुस्कुराकर अस्पताल की सीढ़ियां उतरकर आगे बढ़ गया.।
उसी वक्त अथर्व की गाड़ी आकर ठीक सीढ़ियों के सामने रुकी और रेशम मुस्कुरा कर अथर्व की तरफ बढ़ गई..
रेशम ने सामने की सीट का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गई। अथर्व ने पिछली सीट पर पड़ा एक बुके उठाया और रेशम को थमा दिया। गुलाबी गुलाबों के बुके को देखकर रेशम के चेहरे पर भीनी सी मुस्कान छा गई।
“यहां से गाड़ी निकाल लीजिए ना।”
“अच्छा तो इतने सारे डॉक्टर्स के बीच अपने पति के हाथों से बुके लेने में शर्म आती है?”
रेशम ने शरमा कर हामी भरी और अथर्व ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। दोनों अस्पताल परिसर से बाहर निकल गये।
“अब बताओ, कहां चलना है?”
अथर्व ने पूछा और रेशम आंखों को छोटी-छोटी कर सोचने का अभिनय करने लगी।
“आप तो निरर्थक सारा वक्त घूम ही रहे थे। अब तो थक गए होंगे। तो हम घर लौट जाते हैं।”
” नहीं अभी घर नहीं लौटेंगे, मैंने तो आज ढेर सारी शॉपिंग की है तुम्हारे घर के लिए। तुम्हारे घर में जिन चीजों की कमी लगी, वह छोटी-मोटी चीज उठा कर ले आया।”
” मेरे घर में तो सारी चीज मौजूद थी, आपने क्या-क्या लिया है?”
“काफी पर्कुलेटर नहीं था, तुम्हारे घर में। मुझे उसकी बहुत जरूरत लगी, वह ले आया। और सैंडविच मेकर लेकर आया हूं। तुम्हारे पास नॉन स्टिक पैन नहीं था, वह ले आया हूं।
सौंफ रखने के लिए अलग से कोई डिब्बी नहीं थी, तुम्हारे पास। और मुझे सौंफ खाने की बहुत आदत है। तो वह भी ले आया हूं।
तुम्हारा फ्रिज बहुत छोटा है और उसमें सामान भी ठीक से रखा नहीं जाता, तो फ्रिज के अंदर रखने वाले बॉक्स लेकर आया हूं। जिससे तुम्हारा फ्रिज तुम ठीक से अरेंज कर सको।
तुम्हारे घर में एक जाला निकालने वाले झाड़ू की कमी थी, वह ले आया हूं। कुछ सफाई का सामान लेकर आया हूं। और बस …”
अथर्व की यह बातें सुनकर रेशम झेंप गई। वाकई वह एक अच्छी गृहस्थान नहीं थी। उसने तो बस जरूरत भर का सामान रखा हुआ था। राशन भी थोड़ा ही था, उसने पलट कर पीछे वाली सीट पर देखा। अथर्व ने भर भर कर रेशम के लिए रसोई का सामान भी खरीद लिया था।
” इतने सारे सामान का मैं क्या करूंगी? मेरा तो 5 किलो आटा भी डेढ़ महीना चल जाता है।”
” जानता हूं तुम बहुत कम सामान रखती हो, लेकिन कभी कोई अचानक आ जाए तो सामान रहना चाहिए। क्योंकि तुम्हारे घर के आसपास कोई ढंग की शॉप भी नहीं है।”
रेशम ने हामी भर दी।
“अच्छा सुनो, अब हम चलते हैं। पहले कोई मूवी देखेंगे, उसके बाद बाहर डिनर करेंगे। और उसके बाद घर लौटेंगे। ठीक है?”
अथर्व के इस प्लान पर रेशम ने मुस्कुरा कर हां की मोहर लगा दी।
और वह दोनों वहां से निकल कर सीधे मूवी थिएटर की तरफ बढ़ गए…
मूवी देख करने के बाद दोनों ने शानदार डिनर किया और वापस घर की तरफ मुड़ गए..
***
अपमान की आग में जलता तुच्छबुद्धि अनंत आखिर षडयंत्रो पर उतर आया..
उसने गाड़ी के ब्रेक्स के वायर इधर उधर कर के गाडी के ब्रेक्स फेल कर दिए..
गुस्से और अपमान में जलता इंसान अपना विवेक खो देता है, उसे ये तक भान नहीं रह जाता कि गुस्से में लिया उसका एक निर्णय किसी की ज़िन्दगी का भी नुकसान कर सकता है।
अपने मामा मामी के घर मामी की तबियत देखने आया अनंत सिर्फ कुसुम के व्यवहार और यज्ञ के थप्पड़ से इतना क्षुभित हो गया कि उन दोनों के जीवन की परवाह किये बिना उसने गाड़ी के ब्रेक्स ख़राब कर दिए। ये तक नहीं सोचा कि उसके इस कार्य का दूरगामी परिणाम क्या हो सकता है।
हो सकता है सिर्फ छोटा एक्सीडेंट हो और और दोनों को चोट बस आये।
लेकिन ये भी संभव था कि उस एक्सीडेंट में दोनों की जान पर बन आये।
लेकिन ये सब सोचने का उसके पास अवकाश कहाँ था?
वो तो अपनी तलब मिटाने गाँजे की तलाश में घर से निकल गया।
अपने काम में सफल होकर वह घर से निकल कर बाहर हाट बाजार की तरफ निकल गया।
***
यज्ञ अपनी गाड़ी की चाबी घुमाते हुए अपनी गाड़ी तक पहुंचा ही था कि अखंड उसके पास चला आया।
” यज्ञ जरा हमें अपनी गाड़ी देना, हम आते हैं।”
“जी भैया, वैसे क्या हुआ भैया? आपकी गाड़ी कहां है?”
“हमारी गाड़ी को कल्लू पोछ रहा है, तुम्हें कहीं जाना हो तो तुम उस गाड़ी को ले लेना। बस पांच मिनट में तैयार हो जाएगी, हमारी गाड़ी भी।”
“ठीक है भैया, आप आराम से जाइए।”
यह कह कर यज्ञ ने अपनी गाड़ी की चाबी अखंड के हाथ में दे दी और अखंड की चाबी अपने हाथ में लेकर गोल-गोल घुमाते हुए अखंड की गाड़ी की तरफ बढ़ गया।
उसने पलट कर अखंड को देखा और उसे टोक दिया
“भैया हो सके तो कल्लू को साथ ले जाओ, गाड़ी वही चला लेगा।”
“अरे नहीं, हम अपनी गाड़ी खुद चला सकते हैं। हम ज्यादा दूर जा भी नहीं रहे हैं। यूनिवर्सिटी में साथ एक लड़का पढ़ता था, उसकी शादी है।
पास वाले गांव में ही है। वही पीछे पड़ा हुआ था कि अखंड भैया आ जाइए, आशीर्वाद दे दीजिए।
बस लड़के के हाथ में एक छोटा सा लिफाफा पकड़ा कर निकल जाएंगे।”
“हम् ठीक है भैया। जैसी आपकी मर्जी।”
यज्ञ अखंड की गाड़ी की तरफ बढ़ गया और अखंड ने यज्ञ की गाड़ी की स्टीयरिंग थाम ली..
गांव से बाहर निकलते ही अखंड ने गाड़ी की स्पीड तेज कर दी थी।
आगे ट्रैफिक भी नहीं था, इसलिए वह सर्राटे से गाडी दौड़ाये चला जा रहा था..
सामने से एक गाडी आते देख उसने गाडी की स्पीड कम करने की कोशिश की लेकिन उसकी गाड़ी की गति कम नहीं हुई..।
उसे लगा शायद गलती से ब्रेक नहीं लगा, उसने पैर पर दबाव बढ़ाया और गाडी धीमी करने के लिए वापस ब्रेक लगाने कि कोशिश की, लेकिन इस बार भी ब्रेक पूरा दबाव डालने पर भी नहीं लगा!
उसने क्लच पर दबाव बनाते हुए वापस ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन इस बार भी ब्रेक नहीं लगा!
गाड़ी तेज़ी से भाग रही थी और वो ब्रेक नहीं लगा पा रहा था!
इतनी तेज़ चलती गाडी में हैंड ब्रेक खींच कर उसे रोकना भी गलत हो जाता.. गाडी तेज़ी से घूम कर पलट सकती थी..
अखंड को समझ में नहीं आ रहा था कि गाड़ी के ब्रेक लग क्यों नहीं रहे हैं..?
वो गाड़ी को रोकने की नाकाम सी कोशिश करता हुआ गाड़ी चलाता जा रहा था…!
उसी वक्त सामने से आती एक बड़ी सी लारी से टकराने से बचने के लिए अखंड ने गाड़ी को तेज़ी से एक तरफ को घुमाया, लेकिन तेज़ी से भागती गाड़ी का वो संतुलन नहीं साध पाया और गाड़ी एक किनारे से आगे लङखङाते हुए बढ गई, और सामने से आती एक कार से हल्के से छू कर आगे निकली और किनारे के एक पेड़ से टकरा कर पलट गयी।
अखंड की गाडी इतनी तेज़ी से पलट कर गिरी की गाडी के अस्थि पंजर हिल गए….
दूसरी गाड़ी में बैठे लोगो के इस भयानक हादसे को देख रोंगटे खड़े हो गए।
गाड़ी चलाते इंसान को, दुर्घटना की भयंकरता ने चालक को रुकने पर मजबूर कर दिया।
वो गाडी जिससे अखंड की गाडी की टक्कर हुई थी, आगे जाकर रुकी और गाड़ी से उतर कर दोनों लोगो अखंड की गाड़ी तक भागते चले आये।
अखंड की गाड़ी पलटी हुई थी और लहूलुहान अखंड गाड़ी में बेहोश पड़ा था।
उस दूसरी गाडी से उतर कर अखंड तक पहुँचने वाले अथर्व और रेशम थे!
गाड़ी में झांक कर देखने के बाद अथर्व ने रेशम की तरफ पलट कर देखा…
“रेशम, बड़ा भयानक एक्सीडेंट हुआ हैं.. हमें इस आदमी को अस्पताल लेकर जाना होगा !”
रेशम ने हाँ में गर्दन हिला दी..
रेशम सामने चली आयी.. अथर्व ने गाड़ी का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, और दरवाज़ा एक तरफ से लटक गया..
अखंड का चेहरा खून से लथपथ था..
अथर्व ने अखंड की गर्दन पर उँगलियाँ रखी..
“ये ज़िंदा हैं ! आओ इसे बाहर निकालने में मदद करो रेशु! देखो इसे देख कर डर मत जाना!”
रेशम ने हामी भरी और अथर्व के पास चली आयी..
अथर्व ने रेशम की मदद से अखंड को खींच कर बाहर निकाला और उसे अपनी गाडी कि पिछली सीट में डाल कर वो लोग शहर के अस्पताल की तरफ निकल गए!
क्रमशः

Kismat bhi kya khel khelti hai.resham aur akhand is tarah milenge kisne socha tha aur yajyn aur kusum bach jayenge
शुक्र है की अंखड़ को सही समय पर अथर्व और रेशम ने देख लिया और अस्पताल के लिए लेकर निकल गए। अब शायद रेशम और अखंड का आमना सामना हो। शानदार भाग 👌👌😊
राजेंद्र और भावना लग पड़े है अपनी गृहस्थी जमाने 😊दूसरी तरफ अथर्व ने भी रेशम की गृहस्थी का छोटा मोटा सामान इकठ्ठा कर लिया, रेशम तो हमारी झल्ली सी है पर अथर्व को जो जो कमी लगी वो सब खरीद लाया। अनंत बदला लेने के चक्कर में ये क्या कर गया कुत्ता…गाड़ी के ब्रेक्स फेल कर दिए,अब किसी को तो नुकसान होना ही था यज्ञ नहीं तो अखंड का एक्सीडेंट हो गया ये तो अच्छा हुआ समय पर रेशम और अथर्व ने देख लिया और हॉस्पिटल ले गए।
रेशम और अखंड का अब सामना होग़ा, देखते है आगे क्या होता है 😊🙏🏻।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
🙏🙏🙏🙏🙏about sayad atharav aur resham ki galat fahmi door ho jayegi
Mam aparajita ka next part kab aayega, bahut interesting mod par aakar kahani ruk gai hai, resham aur akhand ab aamne samne aayenge. Dono ke bich ki galatfahmiyan dur hogi ya badhegi ye janne ke liye bekarar hai. Wese anirvan aa gayya hai to ummid hai ki galatfahmiyan dur ho jaye. Please next part jaldi dijiye.
Bhut badhiya
Outstanding part👌👌👌👌
🤗👍 badiya part.
Ab kahani dilachasp mod pe h…. Sayad ye accident hi jariya bnegi resham Or akhand ki jindagi k dor ko suljhane ki..