
अपराजिता -121
उसे मालूम था यज्ञ के लिए उसका घर परिवार नाते रिश्तेदार कितना मायने रखते हैं.. ।
वो समझ गयी कि आज यज्ञ के गुस्से का बम उसी पर फूटना हैं..
वैसे घबरा उठने वाला कुसुम का स्वभाव नहीं था, लेकिन यज्ञ को भी अभी वो जानती ही कितना थी?
वो चुप चाप खड़ी सारी बातें सुन रही थी.. और अनंत जो जी में आये बकता चला जा रहा था.. उसी समय कुसुम के ससुर बोल पड़े..
“एक बात तो है यज्ञ, तुम्हारी बहु जरा सिरचढ़ी तो हैं.. ये सब कहना हमें पसंद नहीं हैं, लेकिन जैसा अनंत बता रहे हैं, उस हिसाब से उसने घर आए मेहमान के साथ बदतमीजी से बात की है! और यह बात ठाकुरों के परिवार को शोभा नहीं देती। हमारे घर की औरतें हमेशा आदमियों के सामने नजर नीचे रख कर बात करती हैं। तुम खुद देख लो आज भी तुम्हारी अम्मा के सिर का आंचल कभी नहीं ढला। तुम्हारी काकी हमारे सामने आती तक नहीं लेकिन तुम्हारी पत्नी अपनी जेठ के सामने सर उघाड़े घूमती है, जैसे कोई शर्म हया नहीं!”
“सही कह रहे हैं मामा जी आप! यह बात भी हमें चुभ गई थी, क्योंकि हमने आज तक अपने घर परिवार में हमेशा संस्कार देखें। हमारे घर में भी मां चाची भाभियां सब सर ढके घूमती है, यहां आपके घर में जब हमने पहली बार कुसुम भौजी को बिना घुंघट के देखा तो हम तो आश्चर्य में पड़ गए कि यह कैसी ठकुराइन है, लेकिन फिर उस समय हमने कुछ कहा नहीं। हमने सोचा छोटा मुंह बड़ी बात हो जाएगी और फिर आपके घर का मामला है, हम कौन होते हैं कुछ भी बोलने टोकने वाले।”
” अरे ऐसा काहे बोल रहे हो अनंत, घर है तुम्हारा।”
“मामा जी हमारा घर होता तो हम पर यूँ आपकी बहुरिया पाबंदी ना लगाती, कि यहाँ ये मत कीजिये, वहाँ वो मत कीजिये..
सच कहें तो अब हमारा यहाँ से मन ही उचट गया, हम सोच रहे आज ही वापस लौट जाये.. !”
अनंत ने बनावटी उदासी चेहरे पर लाकर बोला और ठाकुर साहब यज्ञ पर बरस पड़े..
“और कुछ सुनना बाक़ी हैं अब? या तुम कुछ बोलोगे भी ?”
यज्ञ ने वहीँ से कुसुम को आवाज़ लगा दी. उसने इतनी ज़ोर से आवाज़ लगायी कि कुसुम भी पल भर के लिए सहम गयी….
धीमे कदमों से चलती हुई कुसुम वहां चली आई, वह धीरे से यज्ञ के पास आकर खड़ी हो गई।
यज्ञ ने घूर कर कुसुम की तरफ देखा।
” यह अनंत बाबू क्या बोल रहे हैं?”
कुसुम ने यज्ञ को देखा और वापस अनंत की तरफ देखने लगी। अनंत के चेहरे पर एक शातिर सी मुस्कान दौड़ने लगी। यह वही मुस्कान थी जो कह रही थी कि देख लिया ना ठकुराइन तुम्हारी अकड़ को पल भर में जमीन पर गिरा कर अपने जूते से बिल्कुल वैसे ही मसल दिया है, जैसे सिगरेट के उस टुकड़े को मसला था।
अनंत की मुस्कान कुसुम की आंखों में चुभ रही थी। लेकिन उसने अपने गुस्से को जप्त कर लिया।
” कुसुम हम तुमसे कुछ पूछ रहे हैं, जवाब दोगी?”
यज्ञ की आवाज वापस कुसुम के कानों में पिघले सीसे सी उतर गई। कुसुम ने तड़प कर यज्ञ की तरफ देखा।
” पूछिए क्या पूछना चाहते हैं आप?”
लेकिन वह निर्भीक शेरनी इतने लोगों के बीच भी बिना घबराए गर्दन ऊंची किए खड़ी रही।
यज्ञ ने कुसुम की तरफ देखा
“तुम इस सारी बातचीत पर कुछ कहना चाहोगी? हम जानना चाहते हैं, कि असल में हुआ क्या था?”
यज्ञ के ऐसा पूछते ही अनंत हड़बड़ा कर खड़ा हो गया।
” हमने जब सब कुछ बता दिया, तो उनसे पूछने का क्या मतलब?”
यज्ञ ने घूर कर अनंत की तरफ देखा और वापस कुसुम की तरफ देखने लगा।
” कुछ बोलोगी भी?”
कुसुम ने हां में गर्दन हिलाई और अपने ससुर की तरफ देखते हुए तन कर खड़ी हो गई।
“बाबूजी हम सच में नहीं जानते कि आपके घर के नियम कायदे क्या है? अभी हमें इन सब नियमों को मानने में वक्त लगेगा। हम जिस परिवेश में, जिस घर में रहे हैं, जहां पले बढे हैं, वहीं के संस्कार हमारे अंदर है। और इसलिए हमने गलत बातों को चुप रहकर सहन करना नहीं सीखा। हां जहां तक हम सहन कर सकते हैं, सह लेते हैं, जब बात हमारे ऊपर होती है।
लेकिन अगर किसी और के ऊपर कोई ज्यादती हो रही हो तो वह हमसे सहन नहीं होती।
हो सकता है आपकी नजर में हमने गलत किया हो, लेकिन अनंत बाबू का अम्मा जी के कमरे में बैठकर सिगरेट पीना हमें सहन नहीं हुआ। जिस वक्त अम्माजी का ऑपरेशन हुआ था, उस वक्त डॉक्टर ने साफ हिदायत दी थी कि अम्मा जी को किन चीजों से हमें बचा कर रखना है। और उन चीजों में सिगरेट का धुआं भी शामिल था। हम उन बातों को भूले नहीं है। और अम्मा जी के स्वास्थ्य के साथ हम किसी को भी खिलवाड़ करने का मौका नहीं दे सकते।
उनके ऑपरेशन को अभी दिन कितने हुए हैं? दो दिन पहले तो छुट्टी करवा कर घर लेकर आए हैं। उन्हीं के सामने बैठकर अगर उनके मुंह पर धुआं छोड़ते हुए अनंत बाबू ही क्या हमारे खुद के पति भी सिगरेट पिएंगे तो उन्हें भी हम कमरे से बाहर निकलने का रास्ता दिखा देंगे।”
उस ने अपनी बात कहने के बाद यज्ञ की तरफ देखा और यज्ञ एक ठंडी सी सांस भरकर नीचे देखने लगा…
” हमारे घर परिवार के लिए सिगरेट और शराब कोई ऐसी बड़ी बात नहीं है बहू कि, जिसके लिए तुम घर आए मेहमान को चार बातें सुना दो।”
जाने क्यों लेकिन ठाकुर इंद्रभान सिंह भी अपनी इस बहू के सामने ज्यादा देर तक अकड़े नहीं रह पाते थे, उन्होंने भी कुसुम की बात सुनने के बाद शांति से ही अपनी बात उसके सामने रख दी…
“हम जानते हैं बाबूजी, इस घर परिवार के लिए सिगरेट और शराब कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। सिर्फ इस घर के लिए क्या, हमारे घर में भी इन सब बातों का चाल चलन था। हमारे बाबूजी, हमारे बड़े भैया भी सिगरेट पिया करते थे। लेकिन इस वक्त मामला दूसरा था।
अम्मा जी का ऑपरेशन हुआ है बाबूजी, और इसलिए इस वक्त उन्हें बहुत परहेज से, बहुत संभाल कर रखने की जरूरत है। अम्मा जी की तबीयत की सारी जिम्मेदारी हमने अपने ऊपर ली हुई है। और माफ कीजिएगा लेकिन उनकी तबीयत से हमारे रहते कोई भी खिलवाड़ नहीं कर सकता।
अम्मा जी को जितना करना था, उन्होंने कर लिया। अब उनके सुख चैन से, आराम करने के दिन है। इसलिए हम चाहते हैं वह आराम करें, और एक अच्छी स्वस्थ जिंदगी गुजारे। उनके कमरे के आसपास अब कोई भी सिगरेट नहीं जलाएगा।”
कुसुम ने साथ खड़े यज्ञ पर नजर डाली और वापस अपने ससुर को देखने लगी।
” क्या अब हम वापस जा सकते हैं बाबूजी?”
” हां हां ठीक है तुम जाओ बहु।”
उन्होंने उसे जाने की इजाजत दे दी। कुसुम यज्ञ के पास से होकर गुजरते हुए थम गई।
उसने यज्ञ की तरफ देखा, यज्ञ अब भी गुस्से में था और जमीन की तरफ देख रहा था। कुसुम धीमे से आगे बढ़ गई और यज्ञ वही थम कर रह गया… ..
कुसुम अंदर चली गयी थी…
यज्ञ का भी अब उठ कर अंदर जाने का मन कर रहा था, लेकिन वो संकोच में जा नहीं पा रहा था.. उसे लग रहा था कैसे अपने पिता से बोल कर वो जाये..
इसी उहापोह वो वहीँ बैठा रह गया..
शाम ढलने लगी थी..
ठाकुर परिवार में घर के बाहर के बड़े आंगन में एक तरफ मंदिर बना हुआ था।
मंदिर के ठीक बाहर तुलसी का चौरा था। अक्सर यज्ञ की मां ही शाम के समय हाथ मुंह धोकर तुलसी के चौरे पर दीपक रखा करती थी। और उसके बाद दोनों देवरानी जेठानी मिलकर शाम की आरती मंदिर में किया करते थे।
जिस दिन से शशिरूपा की तबीयत बिगड़ी थी यह काम शकुन करने लगी थी। आज जाने क्यों लेकिन कुसुम का मन अस्थिर सा था। हाथ मुंह धोकर आज वह तुलसी में दिया बाती करने चली गई।
बगीचे में ढेर सारे फूल पौधे लगे हुए थे। मंदिर में रोशनी जला दी गई थी। लेकिन तुलसी चौरे के पास उतना प्रकाश नहीं था। शाम का धुंधलका चारों तरफ छा गया था। ऐसे में जब कुसुम तुलसी पर दिया बाती कर रही थी, उसी वक्त अनंत अंदर से निकलकर बाहर चला आया। मस्ती में झूमता हुआ इधर-उधर देखते हुए वह कुसुम तक पहुंच गया। कुसुम की इस वक्त उसकी तरफ पीठ थी। कुसुम आंखें बंद किया तुलसी के पौधे के सामने हाथ जोड़ मन ही मन कुछ प्रार्थना कर रही थी कि उसके ठीक पीछे पहुंचकर अनंत खड़ा हो गया।
अनंत ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और जलाकर उसके कश लेने लगा। अनंत ने पहला कश लिया और धुंआ कुसुम की तरफ ही छोड़ दिया।
कुसुम को महसूस हुआ कि उसके आसपास कहीं जलने की बू आ रही है। लेकिन रास्ते के किसी और तरफ से आ रही होगी, यह सोचकर वह आंखें मूंदे खड़ी रही।
दोबारा फिर अनंत ने कश लेकर धुंआ कुसुम की तरफ छोड़ दिया।
कुसुम की आंखें खुल गई, उसे समझ में आ गया कि उसके पीछे खड़ा अनंत उसके साथ बदतमीजी कर रहा है।
आरती के थाल को तुलसी के चौरे पर रखकर गुस्से में कुसुम पीछे पलट गई।
उसके ठीक सामने खड़ा अनंत मुस्कुरा रहा था। उसकी दो उंगलियों में सिगरेट अब भी फंसी हुई थी। उसने सिगरेट गोल-गोल घूमा कर कुसुम को दिखाई और उसे चिढ़ाने लगा।
एक बार फिर उसने जोर का कश खींचा और अब वह धुंए को कुसुम के चेहरे पर छोड़ने ही वाला था कि पीछे से उसके कंधे को पकड़ कर यज्ञ ने जोर से अपनी तरफ घुमाया और एक तमाचा खींचकर उसके गालों पर रसीद कर दिया।
तमाचा इतनी जोर से लगा कि अनंत जमीन पर गिरते गिरते बचा। उसके हाथ से छिटक कर सिगरेट नीचे गिर गई। कुसुम ने उस लीचड़ इंसान को देखा और यज्ञ की तरफ देखने लगी।
कुसुम की आंखों में गुस्से से आंसू उभर आए। यज्ञ ने कुसुम की तरफ देखा और वापस अनंत की तरफ देखने लगा।
” यह क्या बदतमीजी कर रहे थे अनंत? तुम्हें क्या लगता है हमें नजर नहीं आता?”
” क्या बदतमीजी कर दी हमने ?”
“कुसुम पूजा कर रही है, और तुम उसके ऊपर धुआं छोड़ रहे हो।”
” किसने कहा हम भौजी पर धुआं छोड़ रहे थे?”
“झूठ बोलने की जरूरत नहीं है। हमने सब कुछ वहां खड़े-खड़े देख लिया था। इसलिए उस समय नहीं आए, क्योंकि हम जानना चाहते थे कि तुम्हारी बदतमीजी कहां तक जाती है?
इसी वक्त, इसी वक्त निकलो यहां से।”
” अजीब पागल हो यज्ञ।कुछ देर पहले तुम्हारी बीवी मामी के कमरे से निकाल रही थी, अब तुम यहां आंगन से निकाल रहे हो?”
“हमारी बीवी तुम्हें सिर्फ कमरे से निकाल रही थी, हम तुम्हें इस घर से निकलने बोल रहे हैं। ज्यादा बोलोगे तो हम बाबूजी से जाकर तुम्हारी शिकायत कर देंगे। और फिर तुम जानते हो कि तुम्हारा क्या होगा? इसलिए अगर अपनी ज्यादा फजीहत नहीं चाहते हो तो चुपचाप अपना सामान बांधो और इसी वक्त यहां से निकल जाओ।”
” यह तुम अच्छा नहीं कर रहे हो?”
” हम क्या कर रहे हैं, हम जानते हैं, तो बस यहां से निकल जाओ।”
” छोड़ेंगे नहीं साले तुमको।”
अनंत ने भद्दी सी गाली दी, और मुड़कर जाने लगा।
यज्ञ ने कुसुम की तरफ देखा,
” तुमने बताया क्यों नहीं था कि ये ऐसी बदतमीजी कर रहा है।”
कुसुम ने यज्ञ की तरफ देखा और जाते हुए अनंत की तरफ देखने लगी।
” इस जैसे घटिया इंसान से निपटने के लिए हमें इसकी शिकायत लगाने की जरूरत नहीं है ,अगर आप यहां पहुंचे नहीं होते ना तो हमारा तमाचा उसका काल बन गया होता।”
” अच्छा तो आप कहना चाह रही है कि आपकी उसे मारने की इच्छा हमने दबा दी।”
“और नहीं तो क्या?” कुसुम हल्के से मुस्कुरा उठी। आंखों में छलकते आंसू के साथ उसके चेहरे की मुस्कान बड़ी लुभामानी लग रही थी।
यज्ञ ने बड़े प्यार से उसे देखा
“आप कहे तो रोक लेते हैं उसे, पकड़ कर ले जाते हैं। जी खोल के तमाचे लगा लेना।”
” नहीं वो इस लायक भी नहीं है कि, उसे छूकर हम अपने हाथ गंदे करें। आपने जो सबक दिया है वह हमेशा याद रखेगा।”
“और आपने जो सबक दिया ना, वह भी याद रखेगा यकीन है।”
यज्ञ ने कुसुम से कहा फिर वापस उससे पूछ लिया।
“चलिए आपको लॉन्ग ड्राइव पर लेकर चलते हैं।”
कुसुम ने शरारत से यज्ञ की तरफ देखा
“सच में पूछ रहे हैं?”
” हां भई, सच में पूछ रहे हैं। घर के लिए थोड़े फ्रूट्स वगैरह भी ले लेंगे और घूम कर भी आ जाएंगे।”
“हम कपड़े बदल कर आते हैं।” कुसुम ने कहा और धीरे से यज्ञ के बगल से होकर आगे बढ़ गई।
यज्ञ ने जाती हुई कुसुम की कलाई थाम ली।
” सुनिए थोड़ा जल्दी कीजिएगा।”
” हम भी जल्दी करेंगे, क्योंकि अम्मा जी को आठ बजे तक खाना परोसना है।”
मुस्कुरा कर कुसुम वहां से निकल गई।
उस बगीचे के थोड़ा बाहरी तरफ खड़े अनंत ने यह सारी बातें सुन ली थी। उसका चेहरा अपमान से काला पड़ा हुआ था।
इस वक्त बदले की आग में वह बुरी तरह से जल रहा था।
बदले की आग में जलते इंसान के साथ सबसे बुरी बात यही होती है कि उसे सही और गलत का फर्क नजर नहीं आता। इस वक्त अनंत को यह नहीं समझ में आ रहा था कि वह गलत है, और कुसुम और यज्ञ सही है। उसे बस यह लग रहा था कि यज्ञ ने कुसुम का साथ देकर उसका अपमान कर दिया है। और इस अपमान का बदला इन दोनों से वह लेकर रहेगा।
आगे बढ़कर उसने यज्ञ की गाड़ी खड़ी देखी और उसके सर पर शैतान सवार हो गया। उसने गाड़ी के बोनट को खोलकर कुछ ऐसा जोड़ घटाव किया की गाड़ी के ब्रेक लगने में असफल हो जाए…।
क्रमशः

बिल्कुल सही किया यज्ञ ने बल्कि दो तीन चमाचे और मारने चाहिए थे अंनत को। मगर आखिरी की पंक्तिया पढ़कर ड़र लग रहा है पता नही अंनत ने क्या कर दिया यज्ञ की गाड़ी मे।मैम प्लीज यज्ञ और कुसुम को कुछ मत होने देना।🙏🙏
🙏🙏
एक पल के लिए मैं भी डर गई कि कहीं यज्ञ..कुसुम को गलत ना समझ ले पर कुसुम अडिग थी, सच्ची थी और अनंत झूठा और सबूत के साथ पकड़ा भी गया 😊,। यज्ञ… दो चार और लगा अनंत को कुत्ता, मुआ 😏।
ओहो…long ड्राइव 🚗पर ये क्या 🙄😲मुए कुत्ते ने ये क्या कर दिया ब्रेक fail कर दी गाड़ी की 🤦🏻♀️। अब क्या होग़ा 🤔।
Bada hi dhoort kism ka insaan hai ye Anant abki ise aisi saza dijiye ki zindagi bhar pachhtaye ki kis sherani ko chhed Diya isne . Awesome part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
लोग बदले की आग में इतने अंधे हो जाते हैं कि उन्हें सही गलत का कोई भान ही नहीं रहता. इस कारनामे के बाद भी वो घर से ना निकल कर यज्ञ की गाड़ी का ब्रेक फेल कर दिया है.
मुझे लगा था कि यज्ञ बिना पूरी बात जाने कुसुम को कुछ नहीं कहेगा. अब ही तो नजदीक आने की बारी आयी थी इनकी और इस करमजले के कारण पता नहीं क्या होगा.
ज्यादा कुछ मत करायिए अपर्णा जी… थोड़ी बहुत चोट पहुँचा कर बस रोमांस दिखाइए.
Ma’am Mai aapki bohpt Badi fan hun…jabse yaha kahaniya shuru hui Maine toh pratilipi open kaarna hi chodh diya sirf aspke liye jaati thi waha..lekin ma’am ab aprajita thoda kheech rahj hai story lag raha hai…wahi wahi ghum rahi haj aage nahi badh rahi… baar baar accidents hospital yahi sab…sirf thoda bhavna and doctor Saab ki kahahi jarasi aage badhi….baaki resham kusum inspector akhand sab waise hai hai…
Mai complaint nahi kar rahi bas ek feedback…ho sake toh kahaniyon me padav bhi dikhaye taaki aage ke liye padhne ko curiosity ho …chapter khatam hote hoge lagta hai bas fir yahi baat chit n all…
Thanks for ur feedback
कहानी जैसी सोची है, वैसे ही लिख रही हूँ.. धन्यवाद आपका
है महादेव,,, ये क्या मुसीबत आ रही अब फिर सै,, बेचारा यज्ञ अभी ठीक हुआ और अम्मा जी बीमार,,, और अभी तक सब नॉर्मल हुआ भी नहीं के इस अनंत नाम की मुसीबत आ गईं,, अब कया होगा
कुसुम के नाम आज की समीक्षा….
हाल जमाने का अक्सर यही होता है
होतीहै सबकी खबर बस खुद से बेखबर होता है ।
उसे नींद नहीं आती है मलमल के बिछौनों पर भी
पर शिकायत वो ईंट के तकिए पर चैन से क्यूं सोता है।
रहता है स्वाभिमान इंसा में ,वही आवाज में उतर आता है
होता है जब कोई सच से भरा हुआ तब वो यूँ ही अड़ के खड़ा होता है।
जानते रहे सब कि क्या सही है और क्या गलत
पर सच को सच कहने से ज्यादा उनका अहम बड़ा होता है ।
रात आती है अंधेरों की परछाइयां लेकर,
लेकिन आने वाला प्यार भरा हुआ सवेरा भी तो होता है ।
माना मुश्किल नहीं है किसी से निभाते रहना
मगर हर एक बात का एक दायरा होता है।
धुंधलका हटा है फिर एक बार उन दोनों के दरम्यां
रफ्ता रफ्ता यूँ ही तो मुहब्बत का आगाज होता है ।
वाह, वाह
वाह शानदार
Fantastic fabulous and beautiful part