
ऋतु बदली,फागुन आया
मन सबका जिसने भरमाया
महुआ महका टेसू फूले
आई बहारें भंवरे डोले
कलियों पर जब दिल है आया
मन सबका जिसने भरमाया।
ऋतु बदली,फागुन आया
रंग वासन्ती वसंत लाया
गाल गुलाबी कंचन काया
जिसने जैसा रंग लगाया
मन सबका जिसने भरमाया।
ऋतु बदली,फागुन आया
भेद भूल अब लोग मिले हैं
रंग बिरंगे चेहरे खिले हैं
भंग की तरंग से मन लहराया
मन सबका जिसने भरमाया
ऋतु बदली,फागुन आया
ढोल नगाड़े बाज रहे हैं
मस्ती में सब नाच रहे हैं
फगुए की ताल ने सबको नचाया
मन सबका जिसने भरमाया।
ऋतु बदली,फागुन आया
डॉ रश्मि लता मिश्रा
बिलासपुर

वाह, वाह वाह अति सुन्दर कविता इसका पाठ सुनने में और अच्छा लगता, bahut khub…💐👌🙏
वाह… 👌🏻👌🏻👌🏻बहुत खूबसूरत कविता 😊👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻