बेसब्रियां-30

बेसब्रियां दिल की… -30


    मासी के घर के सामने पहुँच कर अक्षत ने गाड़ी रोक दी…
सिम्मी गाड़ी से उतरी और अंदर चली गयी…
अक्षत गाड़ी से निकल कर कुछ देर बाहर खड़ा रहा लेकिन सिम्मी वापस नहीं आई और फिर अक्षत भी वहाँ से वापस निकल गया…

उसका मन कड़वाहट से भर गया था.. उसने अपनी समझ में आज तक सिम्मी से कभी कोई ऐसी बात नहीं कहीं थी जिससे वो इस कदर रूठी बैठी रहे…
पता नहीं किस पूर्वाग्रह से त्रस्त ये लड़की अपनी ही धुन में मगन उसका दिल तोड़ गयी थी..
अक्षत का मन अचानक वहाँ से उचाट हो गया था… वो भी सीधा अपने फ्लैट पर चला गया….

धरा ने यूँ अचानक सिम्मी को आया देखा और पूछ लिया..

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“कैसी थी पार्टी ?”

“ठीक थी मासी… बड़े लोगों की पार्टी और कैसी रहेगी, वैसी ही थी.. !”

“हम्म तू थकी सी लग रहीं है, जा आराम कर लें !”

सिम्मी को इस वक्त वाकई आराम की ज़रूरत भी थी.. वो आराम करने चली गयी… कमरे में आकर भी उसे आराम नहीं मिल रहा था.. एक अजीब सी बेचैनी ने उसे घेर रखा था !
अक्षत ने उससे अपने दिल की बात कहीं थी, उसने ये कहा था की वो सिम्मी से शादी करना चाहता है..
और उसकी बात पर गौर किये बिना सिम्मी उससे उलझ पड़ी.. आखिर किस बात पर वो इतना नाराज़ हो गयी..
क्या सिर्फ निम्मी और श्लोक वाली बात की नाराज़गी थी या कुछ और.. ?
वो बैठे बैठे सोच में डूब गयी..
उसने बहुत बदतमीज़ी से अक्षत से बात की थी… वो उसकी जगह खुद को रख कर सोचने लगी..
अगर उसी की तरह का जवाब अक्षत ने उसे दिया होता तो शायद वो उसका मुहँ तोड़ देती लेकिन वो बेचारा चुपचाप उसकी सारी जलीकटी सुनता चला गया.. !
और इस से ज्यादा वो कर भी क्या सकता था, लेकिन सिम्मी ने बदतमीज़ी की सारी हदें पार कर दी..
अगर इतने ख़राब ढंग से मना ही करना था तो एक बार उससे निम्मी और श्लोक की बात पूछ तो सकती थी ! हो सकता है वो खुद किसी ग़लतफ़हमी का शिकार रहा हो ? लेकिन सच्चाई जानने की जगह उसे उल्टा जवाब दे दिया..
लानत है सिम्मी !! किसी का गुस्सा किसी पर उतार दिया..
असल में तो उस समय दिल दिमाग में ये बात चल रही थी की मिसेज़ सूद की बेटी की शादी अक्षत से तय हो रखी है और उसी जलन में अपने अंदर उबलते गुस्से को सिम्मी ने अक्षत पर निकाल दिया..

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और वो चुपचाप सब सुन कर निकल गया !!
उसे ऐसे स्वभाव का तो सिम्मी ने नहीं सोचा था… बल्कि वो तो इतना पैसे वाला होने के बावजूद इतना धैर्यशाली निकला और सिम्मी खुद.. क्या कर बैठी थी वो..?
सोच सोच कर खुद पर ही उसे नाराज़गी सी होने लगी थी.. कुछ समझदारी से भी तो काम ले सकती थी ? लेकिन उस वक्त उसकी अक्ल घास चरने गयी थी… !
बस उसने खुद मान लिया था की अक्षत पैसे वाला है तो बेदिल और बेपरवाह भी होगा !
पर ज़रूरी तो नहीं की ये सच हो !

अपने मन में घुमड़ते विचारों में उलझी सिम्मी सोचते सोचते गहरी नींद में डूब गयी…

अगली सुबह वो उठ कर नीचे आयी तब तक में धरा मासी अपना कोई ड्राफ्ट तैयार कर रहीं थी.. उसे देखते ही वो मुस्कुरा उठी..

“चाय लोगी ? लें आऊं ?”

“मैं बना लूंगी, आप अपना काम कर लीजिये !”

वो रसोई में चली गयी और धरा उसे अपने काम के बारे में  बताने लगी…

“सिम्मी कल मुझे खनूजा पैलेस जाना है.. यहाँ मुंबई गुजरात हाइवे पर है.. मैंने सुना है बेहद शानदार है !
मुझे उस पैलेस पर असल में कुछ आर्टिकल  लिखना है अपने जर्नल के लिए !”

“खनूजा पैलेस.. ? ये तो पहली बार सुना है मैंने ?”

“हाँ ! क्योंकि ये कोई हिस्टोरिकल पैलेस नहीं है, ये उन्हीं अक्षत राज के दादा जी का बनवाया पैलेस है ! सुना है जब उन्होंने बनवाया था, तब महल में लगी चीज़े लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गयी थी.. क्योंकि उस समय वहाँ मौजूद चीज़ो में से ज़्यादातर चीज़े यहाँ नहीं मिलती थी.. विदेशो से मंगवा कर उन्होंने अपना महल बनवाया था.. यहाँ के लोगों में बहुत प्रसिद्ध है..
तुम चलना चाहोगी ?”

“ठीक है.. मैं भी चलूंगी !”

सिम्मी को एक उम्मीद सी हुई कि शायद अक्षत वहाँ एक बार फिर मिल जाये.. और उसे अपनी ही सोच पर ताज्जुब होने लगा..
वो आखिर चाहती क्या थी.. ?
एक तरफ तो उसके प्रोपोज़ल को मना कर दिया, दूसरी तरफ उसकी एक झलक पाने को तरस रहीं ? 
अपने ही मन से मजबूर सिम्मी चुपचाप अपनी चाय लेकर बैठ गयी…

चाय पीकर उसने निम्मी को फ़ोन लगा लिया…

फ़ोन पर निम्मी बहुत खुश नज़र आ रहीं थी, उसका शिमला का सेशन समाप्त हो चुका था और आज शाम उन सबकी मुंबई वापसी थी…
वो टॉप थ्री में जगह बनाने में सफल रहीं थी.. और मुंबई में फाइनल होना था.. उसकी बातें सुन कर सिमरन भी मुस्कुरा उठी..
उसे उसी बात से तसल्ली हो रहीं थी कि गुमसुम सी निम्मी में कम से कम इस प्रतियोगिता के कारण जीने की ललक तो आ गयी….

लेकिन उसे खुद को क्या हो गया था, अक्षत का प्रोपोज़ल मना करने के बाद घड़ी भर भी उसे चैन नहीं मिला था…!
सोचते सोचते अब लगने लगा था जैसे उसके दिमाग की नसें फट जाएँगी…
उसने अपना मोबाइल उठाया और सोचा एक बार अक्षत को फ़ोन लगा लेना चाहिए…
ज्यादा कुछ नहीं बोलेगी बस अपने दुर्व्यवहार के लिये माफ़ी मांग कर फ़ोन रख देगी….

अपने फ़ोन को हाथ में लिए वो अक्षत का फ़ोन लगाने जा रहीं थी, लेकिन उसका दिल इतने ज़ोरों से धड़कने लगा की उसे लगा उसका दिल शरीर से बाहर निकल आएगा..
उसने खुद को संभाला और वापस अपने फ़ोन को देखने लगी..

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“क्या हुआ सिम्मी ? तबियत ख़राब है क्या ?”

अपनी मासी की बात पर उसने ना में गर्दन हिला दी…

“मैं ठीक हूँ मासी… थोड़ा खुली हवा में साँस लूँ तो अच्छा लगेगा !” और ये बोल कर वो बालकनी में चली आई..

उसे लगने लगा काश बाहर कहीं एक झलक अक्षत दिख जायें तो उसके दिल को करार आ जायें..
उसे खुद पर खीझ सी होने लगी… क्या ज़रूरत थी इतना कुछ सुनाने की…?
रह रह कर अब उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था लेकिन अब उसके हाथ से चीज़े निकल गयी थी…

कुछ देर बाद मासी और मौसा जी अपने काम पर निकल गए और वो दरवाज़ा बंद किये यूँ ही लुढ़क गयी..
टीवी पर चैनल बदलते बदलते उसे कहीं भी कुछ अच्छा नहीं लग रहा था..| 
नहाने गयी तो शावर के नीचे घंटो खड़ी रहीं.. सर पर गिरती पानी की बुँदे कुछ राहत दे रहीं थी..

नहा कर उसे थोड़ा ठीक लगने लगा था..
उसने मन ही मन कुछ तय किया और अक्षत से मिलने उसके ऑफ़िस के लिए निकल गयी…
.ज्यादा कुछ नहीं कहेगी बस अपने बर्ताव के लिए माफ़ी मांग कर वापस आ जायेगी !
.वैसे भी वो जितना जेंटलमेन है, वो उसे किसी तरह से भी अपमानित तो नहीं ही करेगा, इतना विश्वास तो है उस पर !!

अपने मन को कड़ा कर उसने टैक्सी ली और अक्षत के ऑफ़िस का पता बता कर निकल गयी…

उसके ऑफ़िस के सामने पहुँच कर उसकी आंखें फटी रह गयी… कई एकड़ में फ़ैला उसका ऑफ़िस बाहर से किसी शानदार मॉल सा लग रहा था… |
अंदर जाने पर उसे मालूम हुआ की उस बीस मंजिला इमारत में ढ़ेर सारे अलग अलग ऑफ़िस किराये पर दिये गए थे…
उसी की सांतवी मंजिल पर खनूजा का ऑफ़िस था..

एक गहरी सी साँस भर कर वो लिफ्ट में दाखिल हो गयी… सांतवी मंजिल पर लिफ्ट के रुकते ही उसका दिल वापस ज़ोरों से धड़कने लगा..

पता नहीं क्या पहन कर आया होगा, हालाँकि उस पर तो हर रंग जमता है.. जैसे भी रहता है लुभावना ही लगता है.. |
      वो लिफ्ट में लगे कांच में अपने आपको देखने लगी.. वह भी ठीक ही लग रही थी, अपने चेहरे को हर तरफ से देखकर उसने बालों को थोड़ा सा माथे पर ठीक से समेट कर पीछे किया और एक गहरी सी सांस भरकर खड़ी हो गई..!
मन ही मन सोचती और खुद की ही सोच पर झेंपती हुई सिम्मी कांच का भारी भरकम दरवाज़ा खोल अंदर चली आई..
अंदर रिसेप्शन पर दो लड़कियां बैठी थी…

सिम्मी संकुचित सी उनके पास पहुंच गयी… अभी वो कुछ पूछने ही वाली थी की बाहर कहीं से राहुल उसी वक्त भीतर चला आया..

“अरे सिमरन, तुम यहाँ कैसे ?”

मर गयी… इसका तो ख्याल ही नहीं रहा था.. अब इससे क्या बहाना मारुं ? सोचेगा इसके बिलियनेयर भाई के पीछे पड़ गयी हूँ…

“वो राहुल जी… दरअसल इधर से निकल रहीं थी तो सोचा आपका ऑफ़िस देख लूँ.. !”

“अच्छा ?” राहुल को सिम्मी के मुहँ से ये बात जमी नहीं उसकी भौंह में बल पड़ गए..

“आइये फिर… मेरे केबिन में चलते हैं… अक्षत तो कल आधी रात की फ्लाइट से लंदन निकल गया !”

उफ़ एक और वज्रपात !!

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पीड़ा के अतिरेक से सिम्मी ने आंखें मूंद ली…

“ओह्ह अचानक कैसे ?”
.
“अचानक कहाँ ? उसे तो निकलना ही था.. कल की उसकी टिकट्स बुक थी.. पार्टी से निकल कर वो घर नहीं लौटा ना…! कल पार्टी में इसीलिए तो बहुत खुश था वो, उसका ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसके लिए इन्वेस्टर से मिलने गया है…
बहुत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग के लिए गया है ! अगर सब सही हुआ तो अक्षत सबसे यंग और सक्सेफुल बिज़नेसमैन के अवार्ड का हक़दार हो जायेगा !”

सिम्मी ये सब सुनती सोच में डूबती जा रहीं थी..

राहुल उसे अपने साथ अंदर ले गया… अपना केबिन, अक्षत का केबिन, स्टाफ के क्यूबिकल्स, स्टोर रूम, मीडिया रूम, कैंटीन हर जगह घुमाने के बाद राहुल उसे अपने साथ अपने केबिन में ले गया..

“आपके लिए कॉफ़ी मँगवाऊं ?”
.
“नहीं… अब वापस जाउंगी.. काफ़ी देर हो  गयी..!”

“ऐसे कैसे.. बिना कॉफ़ी पिए नहीं जाने दूंगा.. !
.उसने दोनों के लिए कॉफ़ी मंगवा ली और इधर उधर की बातें बताने में मगन हो गया…
सिम्मी के कान में उसकी कोई बात नहीं पड़ रही थी, वो तो वहाँ टेबल पर रखी राहुल और अक्षत की फोटो में खोयी हुई थी…

जैसे तैसे अपनी कॉफ़ी गुटक कर वो वहाँ से भाग निकली…

बाहर निकल कर उसने राहत की साँस ली और अपने घर की तरफ मुड़ गयी…

जाने क्यों लेकिन अक्षत के ऑफ़िस में घूमने के बाद उसकी खुशबू, उसके उँगलियों की छाप हर जगह महसूस करती अब वो काफ़ी हल्का महसूस कर रहीं थी…
हलकी सी सही लेकिन उसके चेहरें पर मुस्कान लौट  आयी थी ….

क्रमशः

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aparna

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