गली बनारस की -45

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की… – 45

      साजन घर की तरफ निकल गया क्योंकि  उसे समझ आ गया  था कि आज अनुराग उसे छोड़ने वाला नहीं है…
… जिंदगी में कुछ दोस्त ऐसे भी होने चाहिए वरना जिंदगी बहुत बे मजा और बोरिंग हो जाती है यही सोचते साजन मुस्कुरा कर लिफ्ट से निकला और अपने घर का ताला खोल अंदर दाखिल हो गया….
उसके हाथ मुहँ  धोते तक में ही अनुराग भी पहुँच गया..  दोनों दोस्तों ने मिलकर अपनी पार्टी की छोटी सी तैयारी शुरू कर दी कि तभी डोरबेल बज गई…
साजन ने जाकर दरवाजा खोला,  दरवाजे पर उसके लिए एक पार्सल था ! पार्सल देने वाले ने साजन से साइन लिए और पार्सल उसके हाथ में थमा दिया…

” यह किसने भेजा है?”

साजन उस पार्सल को देखकर आश्चर्यचकित था… उसने सामने  खड़े लड़के से पूछ लिया.. लड़के ने ना में सिर हिला दिया और उसका साइन लेने के बाद वहां से निकल गया..

” मालूम नहीं साहब ! पर गिफ्ट पेड है.. !”

” अच्छा इसका पैसा दिया जा चुका है.. ?”

“जी “

उस लड़के के जाते ही साजन दरवाजा बंद कर उस बड़े से बॉक्स को लेकर अंदर चला आया..
   सेंटर टेबल पर उसे रखने के बाद उसने उसे खोलना शुरू किया….

अंदर एक बहुत खूबसूरत गोल केक था, जिस पर काले रंग का वकीलों वाला कोट बना हुआ था.. इसके साथ ही कुछ छोटे-छोटे प्रॉप भी सजे थे जिनमें किसी में हथौड़ी बनी थी तो कहीं कानून की किताब…
उस केक को देखते ही अनुराग और साजन दोनों के ही चेहरे पर हंसी खेल गई….

” गजब कर दिया गुरु हमें तो लगा था तुम अपना जन्मदिन भूल गए हो, पर तुमने हमें पार्टी देने के लिए अपना केक खुद ही मंगवा लिया…  बहुत-बहुत बधाई हो, जन्मदिन की शुभकामनाएं  दोस्त!”

अनुराग ने  साजन को गले से लगा लिया साजन ने बहुत खुशी से उसे देखा और हंसने लग गया…

“अब हो गया ना, और कितना सरप्राइस दोगे? जब तुम यह पीने पिलाने की पार्टी के पीछे पड़े थे,  तभी हम समझ गए थे कि तुम्हें हमारा जन्मदिन याद है… और अब यह केक भेज कर और एक बड़ा विस्फोट कर दिया तुमने..?”

” अबे यार ये केक वेक का आईडीया हमारा नहीं है, हमने नहीं भेजा है ये.. !”

केक पर सिर्फ हैप्पी बर्थडे वकील साहब लिखा था, भेजने वाले का कोई अता पता ठिकाना उसमें दर्ज़  नहीं था…

” अबे यार ऐसे कैसे किसी के भी भेजें केक को काट ले और खा ले…. कहीं ऐसा हुआ कि यह उन चौधरियों ने किसी षड्यंत्र के तहत भेजा हो  और हमने गलती से ये केक खा लिया और इस में जहर मिला हुआ हो  तो…?”

” बात तो तुम्हारी ठीक है अनुराग,  लेकिन चौधरी हमें केक  भेजेंगे क्यों..?”

” क्योंकि अब तक उन्हें भी पता चल चुका होगा कि, पन्ना मर्डर केस वापस ओपन हो चुका है, और तुम बिक्रम की तरफ से केस लड़ रहे हो… जब वो  लोग तिवारी को रास्ते से हटाने की कोशिश कर सकते हैं,  तो तुम्हारे ऊपर भी हमला ज़रूर करेंगे….
… इसके लिए तुम्हें शुरू से तैयार रहना होगा… बल्कि हम तो कहते हैं कि कल ही चलकर पुलिस प्रोटेक्शन की मांग कर दो..!”

” नहीं अनुराग..!  बल्कि अगर  उन लोगों ने हम पर अटैक कराने की कोशिश की, तो इससे और भी ज्यादा हमें यह साबित करने में मदद मिल जाएगी कि चौधरी यह कतई नहीं चाहते कि कोई भी बिक्रम की तरफ से केस लड़े…
       कहीं ना कहीं वो लोग इस बात को जानते हैं, कि वो  लोग  गलत है, और बिक्रम सही.. और इसीलिए उस बेगुनाह के तरफ से लड़ने वालों को वो नुकसान पहुंचा रहे हैं…”

” बात तो सही है!” 

अपनी बात पूरी कर अनुराग ने उस केक  को उठाया और ले जाकर किनारे पड़े डस्टबिन में डालने लगा कि साजन ने उसे रोक दिया…

” अनुराग उसे अभी डस्टबिन में मत डालो…  कल एक बार इस केक  की जांच करवा लेते हैं..”

” यह भी सही है!”

   केक को वहीं छोड़ अनुराग बोतल खोलते हुए साजन के सामने आ बैठा… और दोनों ने अपनी पार्टी शुरू कर दी  !
    लेकिन रह-रहकर साजन का ध्यान उस केक की तरफ चला जा रहा था….
       ‘ हैप्पी बर्थडे वकील साहब!!’ लिखने वाला या वाली आखिर कौन हो सकता था…..

*****

आखिर साजन की मेहनत रंग लाई और केस की तारीख उसे मिल गई….
.. केस वाले दिन वह सुबह ही कोर्ट में अनुराग के साथ पहुंच चुका था…
    अपने पेपर जमा कर तैयार करते अपनी जगह पर बैठे साजन मन ही मन सारे केस को दोहरा रहा था! कि उसे किस ढंग से बिक्रम का पक्ष जज के सामने प्रस्तुत करना है?  कोर्ट केस की सुनवाई सुनने के लिए कुछ चौधरी परिवार के लोग पहले ही वहां पीछे की तरफ बैठे हुए थे….
…. कुछ देर में ही भारी कदमों से चलते हुए चौधरी साहब भी वहां दाखिल हुए और अपने दो सहयोगियों के साथ एक तरफ बैठ गए…

  इसके कुछ देर बाद ही रत्न चौधरी के संग सुयश राणा आत्मविश्वास से भरे लंबे-लंबे डग भरता कोर्टरूम में दाखिल हुआ…

    साजन के सामने से निकलते हुए सुयश ने एक नजर साजन को देखा और अपना चेहरा फेर लिया…. साजन चुपचाप अपनी जगह बैठे  उसे अपने सामने से गुजरते देखता रहा…  सुयश के मुंह फेरने से पहले साजन एक बार मुस्कुरा उठा…  और उसकी मुस्कान देखकर सुयश के माथे पर बल पड़ गये और उसकी भँवे सिकुड़ गई…
   उसने झटके  से वापस साजन की तरफ देखा और साजन ने उसकी तरफ देख कर अपना अंगूठा आगे बढ़ा दिया जैसे उसे केस शुरू करने के लिए उकसा रहा हो…

   अभी उस परिसर में जज साहब दाखिल नहीं हुए थे, सुयश ने अपने सारे पेपर अपनी टेबल पर पटके, और वापस पलट कर साजन की तरफ चला आया.. उसकी टेबल पर जोर से हाथ पटक कर सुयश ने अपना गुस्सा जाहिर कर ही दिया….

” कौन हो भाई तुम..?  कुछ ज्यादा ही होशियारी मार रहे हो..?”

” होशियार हैं, इसलिए होशियारी मार रहे हैं… वैसे हमारा नाम है साजन खंडेलवाल ! और  हम ही आपके खिलाफ खड़े हो रहे हैं, इस केस में!”

” तब तो फिर खैर मनाईये अपनी, क्योंकि जिंदा तो अब आप बचेंगे नहीं…!”

” यह तो वक्त ही बताएगा कि कौन जिंदा बचेगा और कौन नहीं..? क्योंकि हमारी आपकी सभी की सांसो की गिनती ऊपर बैठा वह कर रहा है, आप और हम नहीं..
     और वैसे अब जब आप हमारे सामने खड़े हो रहे हैं केस लड़ने के लिए तब ना चाहते हुए भी कहना ही पड़ेगा… ऑल द बेस्ट !! ” सुयश का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा…

    जज साहब के आने की घोषणा होते ही सुयश वहां से अपनी जगह पर जाकर बैठ गया और कुछ देर में न्यायधीश महोदय वहां पहुंच गए…

उनके आते ही माहौल एकदम से शांत हो गया… सुयश  ने  खड़े होकर अपने केस के बारे में बताना शुरू किया और न्यायधीश महोदय को केस  के बारे में सब कुछ रीकॉल करवाने लगा…..
 
     तिवारी जी की अस्वस्थता के कारण उन्होंने अपनी जगह साजन खंडेलवाल को इस केस में प्रतिवादी की तरफ से उतारा था, इस बात की याचिका उन्होंने पहले ही न्यायाधीश महोदय तक पहुंचा दी थी… और उन्होंने इस बात को स्वीकृत कर लिया था!
        इसलिए सुयश के केस पर प्रकाश डालने के बाद अपनी जगह पर खड़े होकर साजन ने अपना परिचय दिया और न्यायाधीश महोदय को एक बार फिर से इस बात से अवगत करवा दिया…..

केस शुरू होने पर सुयश ने एक बार फिर से अपनी तरफ से सबूत के तौर पर हीरक को सामने बुलाया…

.. वहीं दूसरी तरफ बिक्रम को भी पुलिस वाले अपने साथ लाकर खड़ा कर चुके थे…
    साजन ने एक नजर बिक्रम पर डाली, और उसके बाद हीरक की तरफ बढ़ गया.. अब तक सुयश उससे पिछली बार की तरह सारी बातें पूछ चुका था और हीरक ने इस बात की गवाही दी कि जिस वक्त वह कमरे में पहुंचा उस वक्त बिक्रम के हाथ में गन थी और वही बेड पर पन्ना की खून से लथपथ लाश पड़ी मिली थी….

अब सब कुछ साजन के हाथ में था… साजन बड़े आराम से चलते हुए हीरक के सामने पहुंच गया…

साजन – “क्या हम यह मान ले कि, आप जो भी कहेंगे सच कहेंगे और सच के सिवा कुछ नहीं कहेंगे..!”

हीरक -“जी हां!! हम जो कहेंगे सच कहेंगे सच के सिवा कुछ भी नहीं कहेंगे!”

साजन -” कैसे मान लिया जाए?  हो सकता है कि आप हमारे सामने यह प्रतिज्ञा ले, लेकिन मन ही मन उस कसम को तोड़ दे..!फिर ?”

हीरक ने गुस्से में सुयश की तरफ पलट कर देखा और फिर जज महोदय की तरफ देखने लगा..
साजन भी मुस्कुराकर सुयश की तरफ देखने लगा और वापस हीरक  की तरफ मुड़ गया….

साजन -” ध्यान से और अच्छी तरह सोच विचार कर बताइएगा हीरक जी, कि जिस वक्त आप कमरे में पहुंचे, आपके कमरे में घुसने का एंगल क्या था ?
  जिस वक्त आप कमरे में घुसे उस वक्त बिक्रम कमरे में किस एंगल पर खड़ा था ?
   पलंग के पास था या दूर था?  पलंग पर बैठा हुआ था? या खड़ा था? और इसके साथ ही ध्यान से सोच कर यह भी बताइए कि बिक्रम ने  कौन से हाथ में गन पकड़ रखी थी…?”

हीरक  के माथे पर बल पड़ गए… उसने न्यायाधीश महोदय की तरफ देख कर कंधे उचका दिए..

हीरक -” अब यह सब कौन याद रखता है न्यायाधीश महोदय?”

साजन -”  वो याद रखता है, जो इतने बड़े हत्याकांड का चश्मदीद गवाह होता है…|
      और उस पर भी अगर हत्या अपनी सगी बहन की होती है तो..?
       हां अगर इस हत्याकांड में कहीं आपका भी हाथ होगा, तो जरूर आप बातों को भूल सकते हैं… या घुमा सकते हैं |
    या फिर कोर्ट को गुमराह कर सकते हैं| लेकिन अगर आप वाकई  चश्मदीद गवाह हैं, तो आपको वह सारी बातें एक फिल्म की तरह तुरंत याद आ जानी चाहिए जो आपने उस वक़्त देखी थी. …

..    हम मानते हैं कि हर किसी का दिमाग हमारी तरह पैना और शार्प नहीं हो सकता, लेकिन फिर भी कोशिश कीजिए, तो आप एक-एक बात सिलसिलेवार हमें बता पाएंगे..!”

   हीरक -” हम जब कमरे के सामने से गुजरे, कमरे का दरवाजा खुला हुआ था…
    हम अपनी पत्नी को लेकर अंदर दाखिल हुए… हमें लगा जैसे अंदर बैडरूम से कुछ आवाजें आ रही हैं | और इसीलिए हम उस आवाज़ को  जांचने के लिए भीतर चले गए..
   तब हमने देखा कि बिस्तर पर हमारी बहन पन्ना की लाश पड़ी थी ! उसके चारों तरफ ढेर सारा खून बिखरा पड़ा था ! और उसके पास बैठे बिक्रम ने हाथ में गन पकड़ी हुई थी..!”

साजन  -” अच्छा अब आप यह बताइए कि आप उसके कमरे के सामने से गुजर क्यों रहे थे?  क्योंकि जैसा हमें पता चला है पन्ना का कमरा कॉरिडोर में अंतिम कमरे के ठीक पहले वाला था, यानी कि पन्ना के कमरे के बाद एक और कमरा था और उसके बाद वह कॉरिडोर बंद हो जाता था | इसका मतलब वहां से क्रॉस होकर आप कहीं और नहीं जा सकते थे..! हम ठीक कह रहे हैं ना ?”

साजन ने अपनी बात पूरी करने के बाद दो अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरें कोर्ट के सामने सबूत के तौर पर पेश की| जिसमें साफ दिख रहा था कि  पन्ना का कमरा कॉरिडोर के अंतिम  हिस्से में था और उस हिस्से में कमरे के बाद वह कॉरिडोर बंद हो जाता था…

    जज साहब ने उस सबूत को देखने के बाद अपनी पुस्तिका में कुछ नोट किया और उन तस्वीरों को अपने पास रख लिया

हीरक -” जी आप ठीक कह रहे हैं.. हम असल में पन्ना और बिक्रम को खाना खाने के लिए बुलाने आ रहे थे..!”

साजन -” चलिए  यह भी ठीक है कि रात दस बजे आप पन्ना और बिक्रम को खाना खाने के लिए बुलाने  जा रहे थे…
     लेकिन एक बात बताइए, आपकी बहन की भी नई नई शादी हुई थी! वह अपने पति के साथ हनीमून मनाने गई हुई थी ! ऐसे में अगर आपको उसके कमरे का दरवाजा बाहर से खुला दिखा तो, क्या आपको कमरे में घुसने से पहले दस्तक नहीं देनी चाहिए थी? आपने दस्तक तो दी नहीं उल्टा आप अपनी पत्नी को लेकर और होटल के स्टाफ को भी लेकर अंदर दाखिल हो गए…
   वैसे अगर हम बिक्रम की जगह होते तो हमारे बैडरूम  में बिना दस्तक दिए अंदर आने के लिए आप पर केस ठोंक देते..
     अब इसके बाद अगर आपको बेडरूम से किसी भी तरह की कोई आवाज आ भी रही थी, तो भई वो एक पति-पत्नी का कमरा है | और आप भी शादीशुदा है तो एक शादीशुदा जोड़े के कमरे से आने वाली आवाज़ों का बखूबी मतलब जानते होंगे, ठीक तरीके से समझते ही होंगे |
     बावजूद आपने बाहर से किसी तरह की आवाज़ दिए बिना अंदर जाने की सोची कैसे.. ?   क्या आपका फर्ज नहीं बनता था, कि आप अपनी बहन को बाहर से ही आवाज दें कर पुकार ले…
   किस ज़माने में रह रहे हैं आप जो अपनी ही बहन के बैडरूम में घुसते  चले गए…… “

हीरक -” अरे ऐसी वैसी आवाज़ थोड़े ना थी जो वहां रुकते.. ?”

साजन -” तो कैसी कैसी तरह की आवाज़ थी..? बताइये… जरा ध्यान से सोच कर बताइये की कैसी आवाज़ आपने सुनी.. “

हीरक -“वो कुछ थोड़ी अलग सी थी.. जैसे…  अब क्या कहें हम बता नहीं पा रहे, लेकिन कुछ तो थी.. !”

साजन -” आप  बता इसलिए नहीं पा रहे क्योंकि कोई आवाज थी ही नहीं…
    यह सब आपका प्री प्लान था कि, पन्ना को मारने के बाद आप बाहर कहीं छिप जायें और जब बिक्रम वहां पहुंच कर अपनी पत्नी की लाश देख कर घबराहट में वही पड़ी गन उठा ले, तब आप इस ढंग से पहुंचें कि बिक्रम घबराकर गन पकड़े हुए आपके, आपकी बीवी और एक स्टाफ के सामने नजर आए… और आप उन दोनों को भी अपने साथ साथ चश्मदीद गवाह बना कर पेश कर सकें की बिक्रम ने ही खून किया है…”

हीरक -” यह गलत है जज साहब! यह वकील हम पर झूठा इल्जाम लगा रहा है..!”

साजन -” झूठा इल्जाम हमने नहीं बल्कि आप लोगों ने लगाया है… और आपके  झूठे इल्जाम के कारण एक बेगुनाह आदमी 3 साल से जेल की कठोर  सजा भुगत रहा है…
          लेकिन जैसे भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं वैसे ही कानून के यहां भी भले देर हो लेकिन अंधेर नहीं…
   कानून हमेशा इस तरह से न्याय करता है कि भले चार  गुनहगार छूट जाए, लेकिन कोई बेगुनाह कभी फांसी के फंदे पर ना चढ़े….
..   माननीय न्यायाधीश महोदय से हम विनम्रता से निवेदन करते हैं कि बिक्रम की बेगुनाही साबित करने के लिए हमें कुछ वक्त की जरूरत है… और अगर हो सके तो हफ्ते भर का समय हमें कुछ सबूत जुटाने के लिए देने की महान कृपा करें…

क्रमशः

aparna……

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