गली बनारस की -32

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -32

     लेडीज संगीत की सुरमई सुमधुर शाम शुरू हो चुकी थी…. स्टेज  पर खड़ी सुंदर सी एंकर एक-एक कर सबका अभिवादन करते हुए स्वागत करते जा रही थी…. और उसके साथ ही  अपनी मीठी सी आवाज में लोगों  का उत्साह बढ़ाती हुई उस सुनहरी सी शाम का आगाज़ करने को तैयार थी….
      होटल के स्टाफ द्वारा यह विशेष रूप से तैयारी की गई थी कि कुछ डांस ग्रुप को बुलाकर उनका लेडीज संगीत के लिए पहले से ही कार्यक्रम तय था…
            इसीलिए एंकर के बुलाने पर एक-एक कर अलग-अलग ग्रुप्स आते गए और एक से एक बढ़कर प्रस्तुतियां देते चले गए….
  इन सब के साथ ही बीच-बीच में वो एंकर  कुछ छोटे-मोटे गेम या छोटे-मोटे सवाल करती हुई भी चली जा रही थी… एक डांस प्रस्तुति के बाद अपना माईक लिए पन्ना के पास पहुंच गई और उसने माइक पर कहना जारी रखा….

” जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि यह कोई छोटी मोटी शादी नहीं है! यह बहुत ग्रैंड वेडिंग हो रही है| जिसमें दुल्हन भी प्रिंसेस है और दूल्हा प्रिंस…  तो इसलिए इस ग्रैंड शादी को और भी ग्रैंड बनाने के लिए हम कुछ मीठे मीठे से गेम यहां पर खेलेंगे… तो मैं जो गेम शुरू करने जा रही हूं उसमें मैं एक शब्द दूंगी उस शब्द पर सबसे पहले हमारी दुल्हन गाना गाएगी और उसके बाद उससे मैच करते हुए बाकियों के साथ साथ  दूल्हे को भी  गाना होगा….
     और इसके बाद जिसके जिसके भी पास मैं माइक लेकर पहुंच जाऊंगी उसे उसी शब्द से गाना गाना होगा…. जो भी गाना नहीं गा पाएगा वह हार जाएगा और ग्रुप से बाहर हो जाएगा….
    तो आप सब रेडी है दोस्तों…  चलिए चलते हैं मेरे साथ गानों के  एक सुहाने सफर में…. मैं सबसे पहला शब्द जो पन्ना जी को देने जा रही हूं वह उनकी भावी  जिंदगी से रिलेटेड है… जिनके  साथ अपना सारा जीवन बिताने जा रही हैं उन्हीं के नाम पर मैं पन्ना जी को शब्द देती हूं पिया…
पन्ना जी आपको ‘पिया’ शब्द से गाना गाना होगा…

एंकर ने पन्ना के हाथ में माइक थमा दिया| पन्ना ने  एक नजर साथ बैठे बिक्रम  की तरफ डाली और मुस्कुरा कर सामने की तरफ बढ़ चली…..

        तुम को पिया दिल किया कितने नाज़ से
                नैना लड़ गए भोले
               भाले  कैसे दगाबाज़ से
       तुम को पिया दिल किया कितने नाज़ से…..

एंकर ने पन्ना की तारीफ करते हुए उसी गीत से  एक शब्द पकड़ कर किसी और को दिया और इसी तरह गाते गुनगुनाते ये सफर धानी पर जाकर रुक गया…
   उस तक जो शब्द पहुंचा वो था ‘देर’… धानी को शब्द देकर एंकर उसके  पास खड़ी वक़्त देखने लगी…
धानी के मुहं से शब्द नहीं निकल रहे थे लेकिन उसे गाना तो था ही…. पन्ना ने उसे ऐसी परिस्थिति में फंसा दिया था जहाँ से निकलना मुश्किल था…

   मुहब्बत के दो बोल सुनने न पाए
  वफाओ के दो फूल चुनने न पाये 
  तुझे भी हमारी तमन्ना थी ज़ालिम…..
  बहुत देर से दर पे  आँखे लगी थी
   हुज़ूर आते आते बहुत देर कर दी…….

धानी के गाने को सुनते हुए बिक्रम की नजरें जमीन पर ही गड़ी  हुई थी… उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी आंख  उठाकर धानी को देखने की, लेकिन दिमाग में उसके अब भी यही चल रहा था कि किसी तरीके से उसे मौका मिल जाए तो वह धानी को लेकर यहां से नौ दो ग्यारह हो जाए…
  उसी बीच ऐंकर उसके पास चली आयी…

” चलिए दूल्हे राजा आपके लिए शब्द है दुल्हनिया ! जल्दी से गा  दीजिये वरना आपकी टीम आउट हो जाएगी.. “

  गाने का मन तो था नहीं लेकिन धानी के उदास चेहरे को देख उसे एक आस  देने के लिए बिक्रम दिल को मजबूत कर गा उठा….

        ले जायेंगे  ले जाएंगे,
     दिल-वाले दुल्हनिया ले जाएंगे
    अरे, रह जाएंगे, रह जाएंगे,
     पैसे-वाले देखते रह जाएंगे को:
        ले जाएंगे, ले जाएंगे …..

     लेकिन इस सबके बीच सुयश को धानी का इस भरी महफिल में गाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था…. कहने को सुयश 25- 26 साल का ही था लेकिन उसकी सोच और विचार बिल्कुल 18वीं सदी के आदमियों की तरह थे….
    उसके  हिसाब से औरतों को घर गृहस्थी  तक ही सीमित रहना चाहिए… उसने बचपन से ही अपने पिता को अपनी मां पर शासन करते देखा था यही हाल उसके घर परिवार की बाकी  महिलाओं का भी था…. और यही बात उसके दिमाग में भी बुरी तरह से बैठ चुकी थी हालांकि उसने अपने पिता को कुछ समय पहले खो दिया था और उसके बाद से उसकी मां अपने भाई के परिवार के साथ रहती थी लेकिन यहां पर भी उसने अपने मामा को मामी पर अत्याचार करते ही देखा था….
     घर परिवार की औरतों में सिर्फ और सिर्फ पन्ना ही ऐसी थी जिसकी परिवार में सुनी जाती थी और वह भी इसलिए क्योंकि वह घर की लड़की थी….
बाकी तो सुयश ने अपनी मां को अपने पिता के हाथों पिटते  हुए भी देखा था, और इसीलिए उस के लिए यह  सब कोई बहुत बड़ी बात नहीं थीं..  इस सबके बीच उसे इसीलिए धानी का इस तरह सबके सामने गाना गाना पसंद नहीं आया… लेकिन वह अपने मन पर काबू करके उस वक्त चुप रह गया….
लेडीज संगीत के रंगारंग कार्यक्रम के साथ ही औरतों के हाथों में मेहंदी लगनी  भी शुरू हो गई और स्टेज  पर एक के बाद एक अलग अलग जोड़ियां आकर परफॉर्म करने लगी…
     लेकिन चौधरी परिवार अब भी पुरानी बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, इसलिए उनके घर की कोई भी औरत स्टेज पर जाकर डांस नहीं कर रही थी.. इस सब के लिए उन्होंने किराए के डांसर बुला  रखे थे….
      जब तक अंदर मेहंदी का कार्यक्रम चल रहा था लड़कों के लिए बाहर गार्डन में अलग से पार्टी का इंतजाम था ढेरों तरह की  विदेशी महंगी शराब वहां सजी हुई थी….
  सभी अपने अपने हाथ में गिलास उठाएं इधर-उधर घूमते हुए  खाते पीते एक दूसरे से बातों में लगे हुए थे…. लेकिन बिक्रम का मन किसी काम में नहीं लग रहा था| उसने हाथ में एक ज्यूस  का गिलास थामा हुआ था, लेकिन वह भी वह पी  नहीं पा रहा था | उसका ध्यान पूरी तरह से अपने पिता पर था, जिन्हें चौधरी साहब ने एक पल को अकेला नहीं छोड़ा था | उसके पिता चौधरी साहब के साथ एक तरफ को बैठे हुए थे और बार-बार पीने के लिए मना कर रहे थे, लेकिन बावजूद चौधरी साहब उनके सामने गिलास पर गिलास पेश  कर रहे थे | आखिर बिक्रम से नहीं देखा गया और वो  उनके पास पहुंच गया…

” चौधरी साहब पापा हार्ट पेशेंट है बहुत ज्यादा ड्रिंक  नहीं कर सकते… उन्हें एक्चुअली रेड वाइन के अलावा कोई भी हार्ड ड्रिंक लेना मना  है..!”

“अरे परिहार है ये, ठाकुरो में सबसे ऊँचे…  और हम ठाकुर यानी कि शेर, और शेर को क्या लेना  और क्या नहीं लेना  ! तुम आजकल के बच्चे भी कुछ समझते नहीं हो बस कुछ भी बोलने चले आते हो..! जाओ जाओ तुम अपना दोस्तों के साथ एंजाय करो !”

   बिक्रम अभी और कुछ बोलने ही  वाला था कि तभी अंदर से गुल्ली उसके पास चली आयी…

” जीजू पन्ना जिज्जी आपको भीतर बुला रहीं.. !”

“क्यों ?”

“हमें क्या मालूम ?आप ही पूछ लीजिये…. “

बुझे मन से बिक्रम अंदर चला आया, उसे अंदर जाते देख सुयश भी अपना आधा खाली गिलास वहीँ छोड़ अंदर चला गया….

” क्या हुआ पन्ना ! तुमने बुलाया मुझे.. !”

“हाउ क्यूट ! पहले आप हमें आप कह कर कितने आदर से बुलाया करते थे पर वो बहुत फॉर्मल लगता था.. अब जब से आप हमें तुम बुलाने लगे हैं, और भी प्यार आने लगा है आप पर इंजीनियर साहब !”

“इसी बकवास के लिए बुलाया था ?”

” हाय!! और यह इतना रुड  होकर जब आप हमसे बात करते हैं ना तो सच में ऐसा लगता है  आप को चूम लें..!”

“वापस जाऊं.. ?”

” नहीं,  बैठिये हमारे पास..  हम आपकी होने वाली दुल्हन है और आप हमारे पास नहीं बैठ रहे…!”

” हमारे तरफ शादी से पहले दूल्हा दुल्हन इस तरह साथ नही बैठते | एक दूसरे को शादी के बाद ही देखते हैं, शादी से पहले एक दूसरे के साथ बैठना शुभ नहीं होता..!”

” हाय कोई जहर ला दो,  हम खा कर मर जाएं आपकी इस अदा पर |  कहां तो एक तरफ हमें धमकी देते हैं अंगूठी पहनाते समय कि हमें मार डालेंगे और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि बात करना शुभ नहीं होता आप चाहते क्या इंजीनियर साहब?”

” मैं बस तुम्हें नहीं चाहता हूं पन्ना!! यह बात क्यों नहीं समझ रही हो? प्लीज मेरी मजबूरी समझो, मैं तुमसे बिल्कुल प्यार नहीं करता,  मेरे साथ शादी के बंधन में बंध कर तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा!”

” हाय कितने सच्चे और ईमानदार हैं आप,  और आप की यही इमानदारी हर बार हमारा दिल लूट कर ले जाती है…  ऐसा आपको लगता है कि हमें कुछ नहीं मिलेगा लेकिन आप हमारे साथ रहेंगे, 24 घंटे हमारे सामने रहेंगे, वही हमारे लिए सब कुछ है | दूसरी बात हमारे देश में बहुत सारी अनचाही  शादियां होती हैं… ज्यादातर लड़कियों की ही होती है कि उनकी मर्जी के बिना कोई भी लड़का उनके सर पर थोप दिया जाता है|  हमें लगता है इतिहास में हम पहली औरत होंगे जो अपनी मर्जी एक लड़के पर थोप कर उससे शादी कर रहे हैं…
   पर कोई नहीं,  आप यह मान लीजिए कि हम उन सब औरतों का बदला ले रहे हैं, जिनके ऊपर अनचाही शादी थोपी जाती है..”

” जब इतनी ही बड़ी क्रांतिकारी हो, और औरतों का दर्द इतना समझती हो, तो धानी के ऊपर सुयश को क्यों थोप रही हो? वो किसी भी एंगल से धानी  के लायक नहीं है! क्या तुम्हें नजर नहीं आता?”

अब तक मुस्कुराती बैठी पन्ना के चेहरे का रंग बदलने लगा और उसकी आंखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे….

” आपका यूं धानी का पक्ष लेना यही नापसंद है हमें..
सख्त नापसंद ! उस लड़की को देखते ही खून.. खैर छोड़िये, सुयश भाई बहुत अच्छे हैं और धानी को बहुत प्यार करेंगे.. ये आपको खुद अपनी नज़रों से देखने मिल जायेगा.. हनीमून पर उनके कमरे के सामने  वाला कमरा हमारा ही होगा.. अब खुश !”

पन्ना की बात सुन बिक्रम की आँखों में खून उतर आया….
     उसका गुस्सा इतना तेज बढ़ गया कि उसे खुद पर काबू रखना मुश्किल होने लगा था | उसने अपने दोनों हाथ उठाये और पन्ना का गला दबाने लगा… इतनी जोर से वह पन्ना का गला दबा रहा था कि पन्ना की आंखें बाहर आने लगी… वो जोर जोर से आवाज निकाल कर बिक्रम को खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बिक्रम के सर पर जैसे भूत सवार था…. उसे आज और  कुछ नजर नहीं आ रहा था | उसे सिर्फ यह दिख  रहा था, कि उसे पन्ना की जान लेनी है…
..  तभी उसकी आंखों के सामने पन्ना के दोनों हाथ चले आए | पन्ना अपना हाथ दिखाते हुए उसे रोकने की कोशिश कर रही थी |और पन्ना के हाथों में लगी मेहंदी में बिक्रम को अपना नाम दिखा नजर आया….. तभी जैसे उसे होश आ गया उसने अपने चेहरे को झटका दिया और सामने देखा,  पन्ना सामने बैठे मुस्कुरा रही थीं…

” किस सोच में डूब गए थे आप, कहीं हमारा गला तो नहीं दबा रहे थे, सपने में… ! खैर छोड़िये, चलिए हमें खाना खिला दीजिये, देखिये ना हमारे हाथ में मेहँदी लगी है… !”

“खुद खा लो.. !”

“लेकिन कैसे.. ? अच्छा जरा उधर देखिये.. !”

पन्ना ने बिक्रम को उस तरफ इशारा कर दिखाया जिधर धानी बैठी थीं.. उसके भी हाथ में मेंहंदी लगी थीं और उसके पास बैठा सुयश उसे खाना खिला रहा था…
   धानी का कुछ खाने का मन नहीं था, लेकिन बिक्रम के पीछे अंदर आये सुयश ने जब पन्ना की खाना खिलाने वाली बात सुनी तो, वो भी धानी के पास जाकर बैठ गया और खुद ही उसे खिलाने की पेशकश कर दी… धानी ने मना भी किया लेकिन सुयश को ना सुनना पसंद ही नहीं था..

” अब जब हम तुम्हें खिलाने आ चुके हैं तो बिना कोई नाटक किये चुपचाप मुहं खोलो और खा लो.. “

“लेकिन हमें भूख नहीं है !”

“भूख नहीं है, तब भी खाना पड़ेगा बेबी | हम तुम्हारे हस्बैंड हैं, और हमारा कहा तुम्हारे लिए ब्रम्हवाक्य होना चाहिए | हम तुम्हारे ब्रम्हा हैं आज से.. |”

धानी ने अपनी बड़ी बड़ी ऑंखें उसकी तरफ उठा कर देखी और उसका मासूम चेहरा देख एक पल को सुयश भी अपनी कठोरता पर शर्मिंदा हो गया ….

” सुनो धानी तुम बहुत सुंदर हो और उतनी ही नाजुक भी,  प्लीज़ तुमसे  रिक्वेस्ट कर रहे की हमें क़भी गुस्सा मत दिलाना |  हम तुम्हें बहुत प्यार से रखेंगे, हाँ हमारा प्यार करने का तरीका जरूर अजीब हैं|  लेकिन हम सच में तुमसे प्यार करने लगे है | और हम तुम्हें किसी से नहीं बाँट सकते..
     एक बात और, आज तुमने सबके सामने गाना गया, ये बात हमें कतई पसंद नहीं आयी.. तुम हमारी बीवी बनने जा रहीं हो सुयश सिंह राणा की..  और इस दुनिया  में कोई और इतना खुशकिस्मत नहीं हो सकता जो हमारी बीवी का गाना सुन सके ..
आई बात समझ में.. हमें दुनिया भर के सामने तुम्हारा गाना नाचना ज्यादा हंसना बोलना ठुमकना ये सब बिलकुल पसंद नहीं हैं… “

सुयश अपनी बात कहते कहते धानी  को खाना खिलाते भी जा रहा था… वह अपनी बातों में ऐसे मगन था कि वह बड़े बड़े  निवाले धानी के मुंह में डालता जा रहा था और धानी ठीक से चबाएं बिना जल्दी-जल्दी निगलती जा रही थी, उसे सुयश की बातें सुनकर डर लगने लगा था और आख़िर कटहल की सब्जी का निवाला उसके मुहँ में अटक गया और उसे खाँसी आने लगी….

” अरे सॉरी सॉरी बच्चा !! वो हम हड़बड़ी में खिलाते चले गए.. “

उसने जल्दी से पानी का गिलास उठा कर धानी के मुंह से लगा दिया…. पानी पीकर धानी को थोड़ा सा आराम लगा और उसने धीरे से प्लेट  सरका कर खाने के लिए मना कर दिया…

” कोई बात नहीं, तुम आराम करो.. !”  धानी के बाजु में बैठा सुयश धानी की ही प्लेट से बचा हुआ खाना खाने लगा की तभी वहाँ गुल्ली और उसका भाई गुड्डू चले आये….

” अरे सुयश भाई ! आप और जूठा खाना ? आपने तो आज तक किसी का जूठा नहीं खाया.. ?फिर आज कैसे.. ?”

” हाँ फिर,  बीवी हैं यार हमारी ! और जब इतनी क्यूट सी बीवी हो तो उसका जूठा हम खा सकते हैं,  चलो तुम दोनों फूटो यहाँ से…

” बात तो सही हैं आपकी,  भाभी जी हैं बहुत सुन्दर और क्यूट, इनके हाथ देखो लगता हैं जैसे संगमरमर के बने हों.. !”

गुड्डू के एक दोस्त ने जैसे ही कहा सुयश का थप्पड़ उस का जबड़ा हिला गया…

” बेटा आज बोल दिए तो बोल दिए.. आइंदा हमारी बीवी की तरफ आंख उठा कर देखा या कुछ ऐसा वैसा बोला तो तुम्हारा सीधे ऊपर का टिकट काट देंगे.. ! समझे !”

उस लड़के के मुहँ से खून छलक आया, गुड्डू ने उसे हाथ का सहारा देकर उठाया और उससे माफ़ी मांगते हुए उसके साथ आगे बढ़ गया.. वो लड़का गुड्डू  का हाथ आपने कंधे से हटा कर ” पागल हैं साला तेरा भाई ” बोल कर वहाँ से बाहर निकल गया…

धानी ने डरी हुई आँखों से सुयश को देखा, सुयश ने धानी को देख एक मुस्कान दे दी…

” इसे मत मार दीजियेगा प्लीज़ !”

“हम्म, नहीं मारेंगे !! पर सुनो,  तुम कोशिश करना की पूरी बाँहों के कपडे पहना करो.. किस किस को मारते रहेंगे तुम्हारे कारण !

बाहर डीजे पर बजते गाने को गुनगुनाता हुआ सुयश प्लेट रखने चला गया…

    तितली दबोच ली मैंने, ज़िंदगी ख़याल की तेरे,
    सारे जहान की रंगत, मुट्ठी में आ गई मेरे….
    ज़िंदगी ख़याल की तेरे, हँसता हुआ चमन दे-दे
   शिक़वे शिक़ायतों का दम,दामन ग़मों को भी दे-दे

क्रमशः

aparna……

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