गली बनारस की -28

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -28

  गुस्से में तमकती धानी अंदर की ओर चली गई…. उसकी मां भी उसके पीछे-पीछे अंदर चली गई। बारात लगने की रस्म अदायगी चल रही थी। बारात लगने के साथ ही दूल्हे और उसके खास रिश्तेदारों को अंदर ले जाया गया.. और जय माल कि रस्म कुछ ही देर में शुरू हो गई …
    दुल्हन अपनी सखियों के साथ स्टेज पर चली आयी…चारों तरफ से फूलों की बारिश के बीच हीरक और उसकी दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहना दी…
दुल्हन की सखियों के साथ ही धानी की माँ ने धानी को भी धक्के देकर आगे कर दिया था।  बिल्कुल ही अनिच्छा से धानी स्टेज पर चढ़ गई थी लेकिन दुल्हन और उसकी सहेलियों से एक तरफ किनारे वह हाथ बांधे खड़ी थी। वही हीरक के एक तरफ रत्न तो दूसरी तरफ सुयश खड़ा था। रत्न ने आकर सुयश के कान में कुछ कहा और उस की नजर धानी पर चली गई….
धानी को देखने के बाद उसने रत्न की तरफ देख कर मुस्कुरा कर हां में सर हिला दिया और रत्न ने आगे बढ़कर सुयश से हाथ मिला कर उसे गले लगा कर बधाई दे डाली…
जयमाला की रस्म के बाद सुयश स्टेज पर से नीचे उतर कर अपनी मां के पास चला आया उसके आते ही उसकी मां ने उसे सवाल कर दिया…

” कैसी लगी लड़की?”

सुयश इस तरह की बातों में बहुत ज्यादा ध्यान देने वालों में से नहीं था… उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई और चली गई। उसकी मां के यह समझने   की सुयश को लड़की पसंद है उसका इतना सा ही इशारा काफी था । क्योंकि जो लड़का हर समय इस सारी दुनिया से नाराज रहा करता था , उसके चेहरे पर आई एक हल्की सी मुस्कान भी अपने आप में बहुत बड़ी सकारात्मक खबर थी … सुयश की मां खुशी-खुशी यह बात पन्ना की मां को बताने चली गई….

एक के बाद एक रस्में होती चली जा रही थी.. कि इसी  सबके बीच चौधरी साहब ने एक तरफ खड़े होकर माइक पकड़ा और लोगों को संबोधित करने लगे…..
   चौधरी जी माइक पर थे और उनके मेहमान उन्हें सुनने के लिए एक-एक करके उनके आसपास जमा होने लगे थे… धानी भी एक किनारे अपनी मां के पास खड़ी थी कि तभी उसके ठीक पीछे आकर बिक्रम खड़ा हो गया, उसने धीरे से धानी के चेहरे के पास अपना चेहरा झुकाया और उससे बहुत धीमी आवाज में कुछ कहा…

“धानी!! बाहर आओ तुमसे कुछ बात करनी है..!”.

धानी ने चौक कर मुड़ कर देखा उसके ठीक पास ही बिक्रम खड़ा था…. उसके वहां कुछ कहने पर उसके माँ के सुन लेने की पूरी गुंजाइश थी ….और धानी उस वक्त इतनी भीड़ भाड़ के बीच किसी भी तरह का कोई सीन नहीं करना चाहती थी.. उसने एक नजर घूर कर बिक्रम को देखा और चुपचाप वहां से निकल कर एक तरफ को बढ़ गई… बिक्रम ने भी इधर-उधर देखा और धानी के पीछे-पीछे उस कमरे से बाहर निकल गया….

“बोलिए क्या कहना था आपको ?”

धानी ने बहुत ही गुस्से में बिक्रम से सवाल किया बिक्रम की समझ के बाहर था की धानी उस पर क्यों नाराज हो रही थी? क्योंकि उसने अब तक पन्ना से धानी के बारे में जो सुना था उससे नाराज तो बिक्रम को होना चाहिए था पर यहां उल्टा ही हो रहा था। बिक्रम यही सोच कर आया था कि पन्ना कि कहीं एक एक बात धानी से पूछ लेगा और उसे विश्वास था कि धानी उससे कुछ भी छुपाए बिना सब सच-सच उसे बता देगी लेकिन यहां तो अलग ही मसला था। धानी खुद उससे मुंह फुलाए बैठी थी जिसका कारण भी बिक्रम को पता नहीं था…

“तुम इतनी बदतमीजी से क्यों बात कर रही हो?”

“तमीज से बात करने लायक आप हैं भी तो नहीं..”

अब बिक्रम का भी पारा चढ़ने लगा था । एक तो खुद धानी ने इतनी सारी बदतमीजी की थी उसके बावजूद बिक्रम बस उससे एक बार पूछताछ करके उसे माफ करने को तैयार था लेकिन यहां धानी बिना अपनी गलती माने या बिना बिक्रम की कोई बात सुने उसके सर पर बैठने को तैयार थी…

“तुमसे सीधी  बात नहीं की जाती क्या? ऐसे अजीबोगरीब जवाब क्यों दे रही हो धानी?”

“क्योंकि हमें समझ में आ गया है कि आप क्या है..?”

“अच्छा और क्या मैं जान सकता हूं कि आपको यह समझदारी आई कब?”

“तो इसका मतलब आपकी नजरों में हम दुनिया की सबसे बड़ी नासमझ हैं..!”

“नासमझ नहीं नीरी बेवकूफ हो तुम..”

“हां तो जाइए ना किसने आपको रोका है कि आप एक बेवकूफ के पल्ले पड़े रहिए। जाइए किसी समझदार और होशियार पन्ना जैसी लड़की से ही शादी कर लीजिए..”

“वह तो मैं कर ही लूंगा क्योंकि अब मुझे भी लगने लगा लगा है कि तुम मुझे डिज़र्व नहीं करती। तुम वाकई एक नंबर की बेवकूफ हो.. तुम्हारा ऊपरी माला पूरी तरह से खाली है…!”

“बेवकूफ है तभी तो आप के बिछाए जाल में फंसा गए वरना…!”

“वरना क्या..? किसी रईस और दौलतमंद लड़के से शादी कर लेती!  जैसे अभी करने जा रही हो..”

“हां बिल्कुल! हमें भी तो हक है और लड़कियों की तरह अपने फ्यूचर को सोचने का! अगर कोई लड़की किसी रईस और दौलतमन्द लड़के को शादी के लिए पसंद करती है तो आप सभी उसे गलत नजरिए से क्यों देखने लगते हैं भई? लड़के भी तो एक खूबसूरत और गोरी चिट्टी लड़की से ही शादी करना चाहते हैं। फिर अगर हमारी कोई डिमांड हो गई तो आपको बुरा क्यों लग रहा है..?”

“मुझे क्यों बुरा लगेगा? बुरा लगने का सवाल ही नहीं उठता! जाओ करो डिमांड और और जहां तुम्हारी डिमांड पूरी हो वहां जाकर शादी कर लो..!”

दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं था और ना ही सीधी बात करने को तैयार था। दोनों ने एक बार भी एक दूसरे से यह पूछ लिया होता कि इतनी नाराजगी का सबब क्या है तो शायद बात इतनी नहीं बिगड़ती। पर एक दूसरे से एक दूसरे का हाल ए दिल जानने की जगह दोनों बस फिजूल का गुस्सा और नाराजगी एक दूसरे पर उड़ेलते रहे और एक दूसरे की फजीहत करते रहे और इस सब में दोनों ही अपने पैरों पर ऐसी कुल्हाड़ी मार उठे कि जिस की चोट दोनों की जिंदगी भर का नासूर बन कर रह गई…
दोनों में से कोई भी झुकने या सामने वाले को सुनने  को तैयार ना था… एक दूसरे पर आरोपों प्रत्यारोपण की बारिश में दोनों लगे हुए थे कि गुल्ली भागती हुई वहां चली आई…

“धानी! तुम यहां क्या कर रही हो ?चलो तुम्हें अंदर बुलाया है !”

“लेकिन हमें क्यों बुला रहे हैं अंदर..?”

“जाओ जाओ देख लो शायद तुम्हारे ससुराल वालों का फरमान आया है! हो सकता है तुम्हें अंगूठी पहनाने के लिए बुलाया जा रहा हो….!”

अपने कटे हुए दिल के जख्मों को छुपाते हुए जाने कैसे हिम्मत करके बिक्रम ने धानी से यह कह दिया और धानी ने उसे घूर कर देखने के बाद मुंह फेर लिया और गुल्ली के साथ अंदर चली गई..
   उनके पीछे भारी मन और भारी कदमों से बिक्रम भी अंदर चला गया। धानी के अंदर पहुंचते हैं उसकी मां ने उसे खींच कर अपने पास किया और अपने पास रखे एक बैग से गुलाबी चुनरी निकालकर धानी का सिर ढक दिया…
    उसे एक तरफ से पकड़कर वह थोड़ा आगे ले चली धानी जब तक मे कुछ समझ पाती कि उसके आसपास क्या हो रहा है ? उसने खुद को सुयश के सामने खड़ा पाया। सुयश के साथ ही लग कर उसकी मां खड़ी थी। उन्होंने बड़े प्यार से सुयश का हाथ धानी की तरफ बढ़ा दिया। धानी अपनी मां की तरफ आश्चर्य से देख रही थी कि उन्होंने धानी के हाथ में एक अंगूठी पकड़ा दी…

हाथ में अंगूठी थामें धानी की आंखें छलक आई… उसने  छलकती आंखों से एक बार उस तरफ मुड़ कर देखा जिधर बिक्रम खड़ा था। बिक्रम हाथ बांधे लाचारगी से उसे देख रहा था जैसे आंखों ही आंखों में धानी से कह रहा हो कि धानी अब कोई नई बेवकूफी मत कर देना। हो सके तो यहीं रुक जाओ, इस वक्त सिर्फ तुम्हारे हाथों में हम दोनों का भविष्य है। अगर तुम आज यह गलती कर गई तो मैं कभी कुछ नहीं कर पाऊंगा। दोनों की आंखें मिली और जैसे कुछ पल में ही कुछ पल पहले का सारा गुस्सा पिघल कर बह गया।
        एक प्रेमी दिल की आवाज दूसरे प्रेमी दिल ने आंखों ही आंखों में सुन ली। बिक्रम जो कहना चाहता था और धानी जो सुनना चाहती थी उन दोनों के बीच एक पल में सब कुछ साफ हो गया। थोड़ी देर पहले कि उनकी नाराजगी उनका झगड़ा सब कुछ जैसे वही खत्म हो गया। धानी ने वह अंगूठी वापस अपनी मां के हाथ पर रख दी…
धानी की इतनी हिम्मत तो नहीं थी कि इस ढेर सारी भीड़ के बीच वह कोई तमाशा बनाए इसलिए उसने धीरे से अपनी मां के कान में कहा…

“हम ये सगाई नहीं कर सकते मां..!”

“पगला गई हो क्या? इतने सारे लोगों के बीच में अब क्या तमाशा खड़ा कर रही हो..!”

“आपको जो समझना है, समझ लीजिए लेकिन हम ये शादी नहीं कर पाएंगे…

सामने खड़े सुयश और उसकी मां दोनों के ही मन में एक खटका सा हुआ… सुयश की मां ने आगे बढ़कर धानी की मां का हाथ थाम लिया..

” क्या हुआ बहन जी आपकी बिटिया कुछ परेशान लग रही है..

“जी वो भारी कपड़े पहनने की आदत नहीं है ना! इतनी भीड़ भाड़ देखकर घबरा गई है! उसका जी घबरा रहा है, जरा तबीयत सही नहीं है। हम बस अभी उसे बाथरूम से मुंह धुलवा कर लेकर आते हैं..”

“कोई तकलीफ है बहन जी तो हम बैठ कर बात कर सकते हैं…!”

“अरे नहीं नहीं आप गलत समझ रही हैं। ऐसी कोनो बात नहीं है हमारी बिटिया जरा शर्मीली है एकदम से लड़के के सामने खड़े होकर इतनी भीड़ भाड़ में अंगूठी पहनाते वो शर्मा जा रही है … हम बस उसे लेकर यूँ गए और यूँ आए…

हां में सर हिला कर सुयश की मां पीछे हो गई और धानी की मां धानी को नाराजगी से घूरते हुए साथ लेकर चली गई । बिक्रम भी उनके पीछे जाने ही वाला था कि किसी ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया..

” इंजीनियर साहब आपको ऊपर छोटे चौधरी ने याद फ़रमाया है…”!

बिक्रम ने पीछे पलट कर देखा चौधरियों के यहां का एक गुंडा उसके पास खड़ा था ..

मुझे कहीं नहीं जाना…

” जाना तो आपको पड़ेगा क्योंकि ध्यान से देख लीजिए इस हाल में कहीं पर भी आपके अब्बा और अम्मा नजर नहीं आ रहे हैं.. इश्क में इतने अंधे ना हो जाइए हुजूर जरा उनका भी ख्याल कर लीजिए..”

बिक्रम ने घूर कर उस आदमी को देखा और हॉल के किनारे से बनी सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊपर चला गया। ऊपर के गलियारे को पार कर कमरे में पहुंचते ही उसने जो देखा कि उसकी आंखें फटी रह गई। कुर्सियों पर उसके माता पिता को बैठा कर उनके मुंह में कपड़ा ठूंस कर उनके हाथ पैर बांध दिए गए थे। और उन दोनों की कनपटी पर गन रखें दो आदमी खड़े थे। उनके ठीक सामने की कुर्सी पर रत्न बैठा था और बैठे-बैठे वह बिक्रम का ही इंतजार कर रहा था…

“आइए आइए दमाद बाबू आपका स्वागत है..!”

“यह क्या बदतमीजी  है।आपने इस तरह से मेरे माता-पिता को क्यों पकड़ रखा है? क्या मैं इसका कारण जान सकता हूं..

“बिल्कुल जान सकते हैं। बल्कि कारण ही तो बताने आपको यहां बुलाया गया है। आप हमारे शहर में आए इंजीनियर बाबू से लेकर दामाद बाबू बनने तक का सफर आपने बड़ी आसानी से तय कर लिया। हमारी बहन के दिलों दिमाग पर आप छा भी गए , लेकिन उसके बाद पलटी मार गए। जब आपने इतराना शुरू किया तो फिर हमें भी टेढ़ी उंगली से घी निकालना पड़ा। वरना अच्छा खासा आपके माता पिता की सेवा जतन में लगे थे। 7 स्टार होटल की सारी सुविधाएं उन्हें अपनी इस हवेली में दिलवा रहे थे। लेकिन आपको मंजूर हो तब ना ?
  आप जैसे लड़कों का यही समस्या है , आप लोग खुद को बिल्कुल दबंग का सलमान खान समझने लगते हैं। आपको लगता है उसका स्टाइल में आप अपने शर्ट के पीछे कॉलर में चश्मा टँगा लेंगे और बस दबंग बन जाएंगे। पर देखे दमाद बाबू फिल्में फिल्में होती हैं और हम आप फिल्मों से अलग होते हैं। अब वहां देखे साउथ की पिक्चर मे तो हर हीरो चमत्कारी होता है। एक पांव जमीन में मारता है और पास पड़ी हुई 4-5 मोटरबाइक हवा में उछल जाती है। पर क्या यह साधारण जिंदगी में संभव है?
    नहीं !! तो बस वही आपको समझा रहे हैं कि अगर आप यह सोचेंगे कि आप किसी फिल्मी हीरो की तरह हमारी बहन को धोखा देकर किसी और लड़की के साथ गुम हो जाइएगा तो सुन लीजिए ऐसा होना मुमकिन नहीं है। और अब क्योंकि पन्ना आपसे मोहब्बत करने लगी है तो आपको उससे शादी करना ही पड़ेगा। अब इसके लिए चाहे हमें कुछ भी करना पड़े हम एड़ी चोटी का जोर लगा देंगे लेकिन आप का ब्याह पन्ना से करवा कर ही मानेंगे…”

“अगर मैं मना कर दूं तो..!”

“तो आप से बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा ?”

इतना कह कर रत्न ने पन्ना के माता-पिता की कुर्सियों के ठीक बीच में निशाना लगा कर एक गोली चला दी…

“यह हमारा निशाना चूका नहीं है जानबूझकर ऐसा निशाना लगाए हैं कि गोली इन दोनों के बीच से कहीं छूकर बस निकल जाए …अगली दफा आप कहिए की आप पन्ना से शादी नहीं करना चाहते , एक गोली लगेगी आप के बाप के पैर में।  उसके बाद फिर से कहेंगे कि आप पन्ना से शादी नहीं करना चाहते हैं, अगली गोली लगेगी आपकी मां की पैर में…. उसके बाद की गोलियां लगेंगे इन दोनों के बाजू में उसके बाद की गोलियां लगेंगी इन के सीने में, सो इस तरह से तड़प तड़प कर आप इन्हें…

” बस करो शर्म नहीं आती एक परिवार को इस तरह से ब्लैकमेल करते हुए?  आखिर तुम लोगों को जबरदस्ती मेरी शादी पन्ना से करवा कर क्या मिल जाएगा? क्या तुम लोग यह सोचते हो कि पन्ना से शादी करने के बाद मैं यह सब भूल जाऊंगा,  और उसे माफ कर दूंगा और अपना लूंगा..!”

“अपनाना तो पड़ेगा ही हुजूर ,क्योंकि जिस तरह से शादी करवा रहे हैं उसी तरह से आपको अपनी बहन को अपनाने पर भी मजबूर कर देंगे..!”

“मान लो पन्ना से शादी करने के बाद मैंने आत्महत्या कर ली तो…?”

“पन्ना से शादी कर ली तो आपने खुद ब खुद आत्महत्या कर ली हुजूर ।
   उसके बाद आप आत्महत्या करने के लायक भी नहीं बचेंगे । अब यह बताओलेबाजी से जरा हमें माफ कीजिए क्योंकि नीचे हमारे बड़का भैया के फेरे फिर रहे हैं और उनकी फेरे पूरे होने से पहले हमको आपको उसके लिए तैयार करना है …जिस सगाई के लिए हमारी बहन पिछले 2 घंटे से ब्यूटी पार्लर की तिजोरी भर कर आई है…. अगर आपने एक और शब्द कहा तो यह जो गोली अभी इन दो कुर्सियों के बीच से निकली थी अब दाहिनी तरफ की कुर्सी वाले के पैर में निशाना पाकर सरसराती हूं निकल जाएगी…..

“बेटा तुम हमारी चिंता मत करो तुम वही करो जो तुम्हें सही लगता है इस तरह की जोर जबरदस्ती की शादी में कुछ नहीं रखा है…!”

अपने पिता की बात सुन बिक्रम की आंखें छलक आई वह बुरी तरह से मजबूर हो चुका था। अभी कुछ देर पहले जहां वह धानी को इशारे से सगाई करने के लिए मना कर रहा था। वहीं अब वह खुद ऐसे रिश्ते में बंधने को मजबूर हो चुका था जिसमें बंधे बिना अब उसकी मुक्ति का कोई रास्ता नहीं बचा था…

क्रमशः

aparna

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments