गली बनारस की -53

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की.. -53

   शाम के वक़्त  अपने कमरे में बैठा साजन एक एक लिंक को जोड़कर देख रहा था…
    कि उसके पास अब कितने गवाह हैं और उनके कितने बयान बाकी है.. तभी उसका ध्यान एकदम से चौधरियों के यहां काम करने वाले सबसे पुराने नौकर पर गया और उसने तुरंत अनुराग को आवाज़ लगा दी….

साजन -” अनुराग सबसे पहले तो हमें इस बात को भी साबित करना है कि, पन्ना हीरक और रत्न की सौतेली बहन थी.. इसके लिए तो चौधरियों के घर की दादी भी हमें यह जानकारी दे सकती है.. ?

अनुराग -” जानकारी तो दे सकती है, लेकिन अदालत में खड़े होकर गवाही नहीं दे सकती | क्योंकि है तो वह भी चौधरी की अम्मा | मानिक चौधरी अपनी मां को अदालत तक जाने नहीं देगा, और अपने ही बेटों के खिलाफ गवाही तो कतई नहीं देने देगा | भले ही यह बात और है कि वह अपनी बेटी से बहुत मोहब्बत किया करता था, बावजूद बेटी के मर जाने के बाद अब दो बेटे ही तो बचे हैं | अगर बेटी के कत्ल के इल्जाम में दोनों बेटे भी जेल चले गए, तो चौधरी के पास बचा ही क्या.. ?”

साजन -” बात तो सही कह रहे हो तुम | अच्छा तुम्हें याद है, बिक्रम की डायरी में जहां पर पन्ना के जीवन का इतिहास लिखा हुआ था वहां पर एक लाइन हमने पढ़ी थी जो हमें याद रह गई.. वह पंक्ति यह थी कि धीरे-धीरे हवेली के सारे पुराने नौकर या तो रिटायर हो गए या फिर गांव चले गए, बस एक पुराने महाराज रह गए हैं, जो अभी हवेली में काम करते हैं | हमें किसी तरह उन महाराज को पकड़ना पड़ेगा…
  और सुनो  यह कमल गुप्ता का भाई चरण दास गुप्ता जो बिक्रम के साथ घूमा करता था, उसे भी एक बार तलब करना पड़ेगा….

अनुराग -” ठीक है तुम कहो तो हम ही पकड़ कर ले आते हैं दोनों को.. !”

साजन -” नहीं आम आदमी इस तरह की पकड़म पकड़ाई में घबरा जाता है, और जो बोलने वाला रहता है उस सच्चाई के अलावा कुछ बोल जाता है | हमें उन महाराज से और चरण दास गुप्ता से भी एकदम ऐसे  मिलना होगा कि उन्हें ये मालूम ही ना चले कि हम वकील हैं और बिक्रम का केस लड़ रहे हैं… क्योंकि महाराज चौधरियों का पुराना नौकर है, इस हिसाब से नमक हलाल होगा | और वह शायद ही उन लोगों के खिलाफ गवाही दे | उसके मुंह से सच्ची बात मालूम चल जाए उसके बाद किसी तरीके से उसे गवाही के लिए भी तैयार करना होगा…

अनुराग -” सही कह रहे हो चलो फिर निकलते हैं.. ! एक बात पूछना चाहते थे तुमसे साजन.. ?जवाब देना न देना तुम्हारे हाथ है.. !”

साजन -“पूछो !”

अनुराग -” तुमने जज साहब को अकेले में ले जाकर सुयश के फ़ोन में मौजूद वह वीडिओ क्यों दिखाया.. मतलब उसका औचत्य नहीं समझ में आया.. !

साजन अनुराग की बात सुन मुस्कुरा उठा… -“अभी इस केस के वक़्त उन वीडियोस को दिखाने का प्रत्यक्ष तो केस में कोई फायदा नहीं है लेकिन इन सारी बातों से जज साहब के दिमाग में ये तो बैठ गया की सुयश किस मिजाज का आदमी है… हालाँकि ये उसका व्यक्तिगत मामला था, लेकिन इन्हे देख कर जज साहब ने जाने अनजाने एक परसेप्शन तो तैयार कर ही लिया होगा की जो आदमी अपनी पत्नी के साथ ऐसा क्रूर हो सकता है वो किस हद तक जा सकता है.. !  हमने जो किया है उसे परसेप्शन बिल्डिंग कहते हैं.. किसी के मिजाज के बारे में दूसरे के दिमाग में इतना भर दो की जब वो आगे उस इंसान  से जुड़ा कोई भी निर्णय लें तो उनके दिमाग में पहले से एक निर्णय पैसिव माइंड में तैयार रहे, हालाँकि हम जानते हैं हमने जो किया वो सही नहीं है लेकिन बहुत बार गलत लोगों से जीतने के लिए गलत बनना पड़ता है.. और फिर यहाँ हम गलत बने नहीं है बल्कि गलत बात की तरफ जज साहब का ध्यान दिलाया है बस, और उसका एक छोटा सा फायदा भी हो गया है.. !”

अनुराग -“वो क्या ?”

साजन -” हम उस दिन कोर्ट से लौट कर अपने कपड़े और कुछ सामान लेने एक बार फ्लैट गए थे याद है..?

अनुराग -” हाँ !! तब क्या उसकी वाइफ से भी मिल आये ?”

साजन -” हाँ ! और उन्हें ये भी बता दिया की वो किसी  पास के महिला थाने में जाकर रिपोर्ट करें वो भी बिना किसी डर के, क्योंकि उनके सारे वीडियोज़ सुयश के मोबाइल से हमने हटा दिए हैं और उनकी एक फाइल बना कर फ़िलहाल जी ड्राइव पर सुरक्षित रखी है.. अगर उन्हें कहीं किसी महिला पुलिस को दिखाने के लिए सबूत के तौर पर ज़रूरत पड़ी तो वो दिखा सकती हैं.. बाद में डिलीट कर देंगे.. पर फ़िलहाल सुयश के मोबाइल पर कुछ भी नहीं बचा है इसलिए बिना डरे वो अपना कदम उठा सकती हैं.. !”

अनुराग -” लेकिन तुम्हारे पास वीडियो है इस बात से उसे दिक़्क़त नहीं होगी.. !”

साजन -“उन्हीं के नाम से एक फोल्डर तैयार किया और उसमे सारा सब ट्रांसफर करने के बाद हमने उन्हीं से उसका पासवर्ड बदलवा दिया है… अब हमारे पास भी उस फोल्डर का एक्सेस नहीं है !”

अनुराग मुस्कुरा उठा, साजन और अनुराग अमरनाथ को साथ लिए वहां से निकल गए…
    सबसे पहले यह लोग चरण दास गुप्ता के घर पहुंचे इत्तेफाक से उस वक्त गुप्ता जी घर पर ही मौजूद थे | साजन अनुराग के साथ आए अमरनाथ को देखकर गुप्ता जी अचानक से किसी को पहचान नहीं पाए|

“कहिए! किससे मिलना है आप सबको?”

“चरण दास गुप्ता जी, आप ही हैं?”

“जी हां, हम ही हैं आप कौन!”

“बिक्रम राज परिहार को जानते हैं आप ?”

चरण के चेहरे पर चिंता के और घबराहट के भाव नजर आने लगे…

“आप लोग यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं? आप लोग हैं कौन?”

“आप हमारे सवाल पर इतना घबरा क्यों रहे हैं?  हमने एक सामान्य सा सवाल पूछा है आपसे कि, क्या आप बिक्रमादित्य राज परिहार को जानते हैं? जो यहां गंगा परियोजना में इंजीनियर थे? और फिलहाल अपनी ही पत्नी के मर्डर केस की सजा काट रहे हैं, पिछले 3 साल से…!”
चरणदास ने तीनों को घर के अंदर आने को कहा और चुपचाप एक कुर्सी पर मुंह लटका कर बैठ गया…

“अब आप सब को क्या बताएं साहब, पहले दिन से ही हम बिक्रम साहब को बार-बार समझा रहे थे कि इन चौधरियों के लफड़ों में मत फंसिए, लेकिन नई नई नौकरी और उम्र का उबाल ऐसा था कि वह हमारी किसी बात को नहीं सुन रहे थे, और आखिर वही हुआ जिस बात का डर था| फिर भी हम तो यही कहेंगे कि वह बाल-बाल बच गए….”

“मर्डर केस में सजा काट रहा है वह और आपको लग रहा है कि वह बाल-बाल बच गया…!”

“हुजूर!! इन चौधरियों के चक्कर में जो भी फंसा है, ना उसका सीधा ऊपर का टिकट कटा है | हमें तो बिक्रम साहब के साथ रहते हुए हर वक्त यही लग रहा था, कि कब इनका भी ऊपर का टिकट कट जाएगा कोई भरोसा नहीं है, वह तो ऐसा हुआ कि पन्ना मैडम नहीं रही और उनके खून का इल्जाम बिक्रम साहब पर आ गया..”

“तुम्हारे बिक्रम साहब का स्वभाव कैसा था और पन्ना  मैडम का..?”

“साहब अब क्या बताएं आप लोगों को, बिक्रम सर तो एकदम हीरो आदमी थे उनके जैसा सीधा सच्चा ईमानदार इंसान हमने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा | शुरुआत में हमें वह बेवकूफ नजर आ रहे थे, जब वह बार-बार चौधरियों से टकरा जाया करते थे, लेकिन फिर हमें समझ में आया कि यह उनका स्वभाव है | वह हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से जीते थे| अपनी इमानदारी से वह टस से मस नहीं हुए| और उसी के कारण चौधरियों के सामने वह अकेले सीना तान कर खड़े रहे | बस उनकी इसी शेर दिली  पर तो पन्ना मैडम फिदा हो गई और उनकी जिंदगी जहन्नुम बना गई…
    बिक्रम साहब ने जो जो सहा है वह उनकी जगह अगर कोई और लड़का होता तो अब तक गंगा मैया में कूदकर अपनी खुद की जान ले चुका होता….
उनके मलेशिया जाने से पहले तक हम लगभग उनकी परछाई बने उन के हर वक़्त साथ ही थे..
   उनकी हर एक पीड़ा उनके हर एक आंसू के गवाह है…..
    कितना कुछ झेला है उन्होंने, बावजूद हम जानते हैं कि उन्होंने पन्ना मैडम को नहीं मारा | क्योंकि हम यह भी जानते हैं कि उनके संस्कार ऐसे थे कि एक बार पवित्र अग्नि के फेरे लेने के बाद वह अपनी ही पत्नी को अपने हाथों कभी नहीं मार सकते….!”

“अपने ही हाथो नहीं मार सकते, मतलब किसी और को सुपारी देकर मरवा सकते हैं…?”
अनुराग  के सवाल पर चरणदास  चौक पर उसे देखने लगा..

“नहीं साहब ! कभी नहीं, वह अपनी पत्नी को कभी नहीं मरवा सकते ! इस बात की गारंटी हम लेते हैं.. हम तो उनके जीवन के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं ! उन्हें अपने ही मकान मालिक की बेटी से प्यार हो गया था, और प्यार भी ऐसा वैसा नहीं बहुत शिद्दत वाला प्यार था हुजूर दोनों का! दोनों को साथ देख यूँ लगता था जैसे चाँद सूरज कि जोड़ी है… “

“चाँद सूरज कि जोड़ी कब एक हो पायी है गुप्ता जी..?
    चाँद डूबता है तब जाकर सूरज आसमान पर उगता है और सूरज के डूबने पर चाँद खिलता  है.. !”

“वही तो उन दोनों के भी साथ हो गया हुज़ूर…
    दोनों शादी कर लेना चाहते थे, यहां तक कि पन्ना मैडम से शादी होने के 1 दिन पहले तक बिक्रम साहब इसी कोशिश में थे कि वह धानी को लेकर यहां से कहीं दूर भाग जाएं ! लेकिन किस्मत को शायद मंजूर नहीं था! धानी मैडम की सुयश सिंह से शादी हो गई और बिक्रम साहब की पन्ना मैडम से और बस उस शादी के बाद ही मलेशिया जाने से पहले हमें गले लगाकर बिक्रम साहब ने यही कहा कि चरणदास जब भी जो भी काम करना पूरी इमानदारी के साथ करना, क्योंकि काम में झूठ और बेईमानी हमेशा इंसान को गहरे गर्त में डूबा देती है..
      भले ही कुछ पलों के लिए तुम्हें खुशी रुपया धन दौलत सब कुछ मिल जाएगा लेकिन मन की शांति कभी नहीं मिलेगी और जिस रिश्ते में भी जुड़ना ईमानदारी से जुड़ना…
हमने प्यार भले किसी और लड़की से किया और वह भी बहुत शिद्दत से किया…लेकिन शादी किसी और से हो गई और उसे भी हम शिद्दत से निभाने की पूरी कोशिश करेंगे..
    साहब हमने बिक्रम साहब को अपने आंसू पोंछते  देखा था.. कितने भारी कदमों से वह उस हवेली से बाहर निकले थे यह हम अच्छे से जानते हैं | लेकिन हम यह भी जानते हैं कि वह पलट कर कभी अपनी पुरानी जिंदगी में लौटना नहीं चाहेंगे..
हमें भी यही लगा कि चलिए भले ही जबरदस्ती की शादी हुई हो लेकिन अगर पन्ना  मैडम के साथ बिक्रम साहब निभा ले गए तो जिंदगी उनकी स्वर्ग हो जाएगी..  पर किसी को कहां मालूम था उनकी जिंदगी स्वर्ग होने से पहले उनकी पत्नी स्वर्गवासी हो जाएगी और उसी के इल्जाम  में बिक्रम साहब जेल में कैद हो जाएंगे…
  खैर.. !!

“चरणदास  जी आप बिक्रम के काफी खास और करीबी लगते हैं.| हम बिक्रम की तरफ से उसका केस लड़ने वाले वकील हैं, हमारे पास ऐसे तो काफी सारे सबूत और गवाह मौजूद है, लेकिन हम एक बार हवेली के सबसे पुराने नौकर से भी बातचीत करना चाहते हैं| उससे बात करके हो सकता है हमें और भी कुछ क्लू  मिल जाए..! क्या आप इस काम में हमारी मदद कर सकते हैं…?”

“बिल्कुल कर सकते हैं साहब,  हम बिक्रम साहब के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं…|
   हम किसी बहाने से आज ही हवेली में घुसते हैं और हवेली के सबसे पुराने नौकर बिन्दा से बात करके आपको इत्तिला कर देंगे..”

कोशिश करिएगा चरण दास जी की कल तक में ही उनसे मुलाकात हो जाए ! क्योंकि परसों ही केस की तारीख है | अगर हवेली के पुराने महाराज जी से बात हो गई और बात हमारे पक्ष में रही तब समझ लीजिये  कि परसों की तारीख में आपके बिक्रम साहब निर्विरोध रूप से बेगुनाह साबित कर दिए जाएंगे…
  और हाँ आपने जो सारी बातें हमें बताई हैं इनकी गवाही आपको कोर्ट में भी देनी होगी.. मंजूर है ?”

” बिलकुल मंजूर है साहब !”

चरणदास की आंखों में आंसू झिलमिला उठे और वो  आगे बढ़कर साजन के पैरों पर गिर गया…
    साजन ने उसे उठाकर अपने सीने से लगा लिया… साजन के सीने से लगते ही चरणदास भरभरा कर रो पड़ा…
उसे देख कर ही समझ में आ रहा था कि वह बिक्रम से किस कदर जुड़ा हुआ था.. और बिक्रम की बेगुनाही उसे कितना दंश दे रही थी कि उसने अपनी जान की फिक्र किए बिना हवेली में घुसकर नौकर से बात करने को अपनी रजामंदी दे दी थी…

उससे मिलने के बाद साजन अनुराग और अमरनाथ वहां से वापस निकल गए….

****

अगली सुबह साजन के फोन पर किसी अनजान  नंबर से फोन आया… फोन करने वाला चरण दास गुप्ता ही था| उसने दोपहर के समय पुराने मंदिर के पीछे वाले तालाब पर उन्हें मिलने के लिए बुला लिया…
    निर्धारित समय पर साजन अनुराग और अमरनाथ तालाब तक पहुंच गए वहां की सीढ़ियों पर बैठे वह लोग चरणदास का इंतजार कर रहे थे, कि तभी चरणदास एक बहुत बुजुर्ग से आदमी के साथ वहां दाखिल हुआ | उस बुजुर्ग आदमी की उम्र लगभग उन्यासी अस्सी साल लग रही थी, बावजूद वह कद काठी से काफी मजबूत था.. बाल जरूर उसके सारे के सारे सफेद हो चुके थे लेकिन उसकी चाल ढाल में आत्मविश्वास बाकी था…
.. उसके आते ही साजन और अनुराग अपनी जगह पर खड़े हो गए उन्होंने उसे नमस्कार करके अपने साथ सीढ़ियों पर ही बैठा लिया….
… बुजुर्ग आदमी सिर्फ आत्मविश्वासी ही नहीं दृढ़ निश्चयी भी लग रहा था.. थोड़ी बहुत पूछताछ और परिचय देने के बाद ही वह साजन के सामने पूरी तरह से खुल गया और उसने पन्ना के जन्म के इतिहास की सारी बातें वैसी की वैसी दुहरा दी….
   उससे सारी बातें जानने के बाद साजन ने उससे गवाही के लिए पूछा और उसने इस बात पर भी रजामंदी दे दी…

***

अगली सुबह निर्धारित समय पर केस शुरू हुआ.. और शुरू हुआ आरोपों प्रत्यारोपो का दौर.. जो बढ़ते बढ़ते वाद विवाद तक जा पहुंचा.. अदालत कि समझाइश पर साजन और सुयश शांत हुए और फिर केस आगे बढ़ा..
  साजन ने पहले चरणदास को बुला कर बिक्रम के स्वभाव से जुडी सारी जानकारी शानदार तरीके से वहाँ पेश करवाई और फिर उस बुज़ुर्ग पुराने नौकर बिन्दा महाराज को बुला लिया गया… …

  उनसे पूछताछ में पन्ना के जन्म का सारा इतिहास सुनाने के बाद कुछ पल को वो अचानक रुक गया… थोड़ी देर सोचते रहने के बाद अपने मन को कड़ा कर, मजबूत कर उसने अपनी सारी शक्ति जोड़ी और आगे कहने लगा…..

” साहब हमें मालूम नहीं यह बात आप लोगों से कहना चाहिए कि नहीं क्योंकि चौधरी खानदान का हमने नमक खाया है, लेकिन देखा जाए तो हम मानिक चौधरी हुज़ूर के गुलाम हैं, उनके बेटों के नहीं | और इस नाते हमें चौधरी साहब के नमक का फर्ज अदा करना चाहिए… |
   यह उस रात की बात है जब पन्ना बेबी की शादी से 1 दिन पहले शाम के वक़्त  संगीत के लिए हर कोई तैयार हो रहा था, उस वक्त हमसे बड़े बाबू यानी हीरक बाबू ने अपने कमरे में कुछ सामान मंगवाया था, हम रसोई से ट्रे में धर कर सारा सामान उनके कमरे की तरफ जा रहे थे, तभी दरवाजे में घुसने के बाद हम कुछ आवाजों को सुनकर के ठिठक कर खड़े रह गए… हीरक बाबू का कमरा भी बहुत बड़ा है… उनके कमरे में बाहरी कमरे के बाद एक लकड़ी का बड़ा पार्टीशन है जिसके बाद उनका बेडरूम पड़ता है, हम उस पार्टीशन के बाहर तक ही पहुंचे थे  के अंदर से हीरक  बाबू छोटे बाबू और सुयश बाबू की आवाज हमारे  कानों में पड़ी |हमें यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि यह तीनों भाई आपस में मिलकर पन्ना बेबी को मार डालने की योजना बना रहे थे….
हमने उनका खून कैसे करना है,इस पर इनकी क्या  पिलानिंग (प्लान ) है वो बात नहीं सुनी लेकिन जो सुना उससे यही अंदाजा लगा कि वह लोग  खतरनाक योजना के बारे में बात कर रहे हैं…
उनकी बातों में हमें पन्ना को रास्ते से हटा कर उसका इल्जाम किसी के मत्थे मढ़ देने की बात कानों में पड़ी थी… “

साजन -” जब आप यह बात सुन चुके थे, तब आपने मानिक चौधरी जी से इस बाबत कोई शिकायत क्यों नहीं की..?”

बुज़ुर्ग -” हम बहुत छोटे आदमी हैं, घर के नौकर हैं और इस घर में जो चौधरियों की हुकूमत चलती है उसका कोई हिसाब नहीं.. पहले भी अगर किसी नौकर ने कोई आवाज़ उठानी चाही तो उसका गला ही दबा दिया गया.. हुज़ूर अपनी  जिंदगी सभी को प्यारी होती है.. और फिर हम पूरी तरह  से इस बात से इत्तेफाक भी नहीं रख पा रहे थे की पन्ना बेबी के कत्ल की क्या  बातचीत हो रही है…
    वो तो जब पन्ना बेबी नहीं रही तब जाकर समझ में आया की उस रात ये तीनों लोग सच ही उन्हें मार देने की  बात कर रहे थे? और पन्ना को रास्ते से हटाने का  इनका मतलब क्या था.. ?
पन्ना बेबी की जान जाने के बाद हमें इस बात का बेहद अफ़सोस भी हुआ की हम अगर समय रहते चौधरी साहब को बता देते तो शायद पन्ना बेबी को बचाया जा सकता था, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी.. फिर भी हमने एक बार कोशिश भी की लेकिन चौधरी साहब की हालत देखने के बाद हमारी हिम्मत चूक गई और हम चुप बैठ गए… “

“आपके डर के कारण एक लड़की की असमय मौत हो गई..

“जी और इसके लिए हम बेहद शर्मिंदा हैं हुज़ूर, आप चाहें तो हमें इसकी सजा दे सकते है !”…

“प्लान बना कौन रहा था.. ?”

“सुयश बाबू.. ये सारा प्लान इन्हीं का था.. और हीरक बाबू इसमे इनकी मदद करने वाले थे..

क्रमशः

aparna….

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