Gone girl -7

Gone girl

Gone girl-7

      आदतन तुम ने कर दिए वादे 
      आदतन हम ने ए’तिबार किया …

शेखर–सेम हेयर सलोनी जी!! मुझे भी माजरा समझ नही आ रहा, अब ये माजरा रायचंद हाऊस जा कर ही सुलझेगा , कल सुबह आप और मैं रायचंद हाऊस जायेंगे और समझने की कोशिश करेंगे की आखिर सच क्या है।

      सलोनी और शेखर दोनो की कहानियां समाप्त हो चुकी थीं …..शेखर ने देखा इसी सारी किस्सगोयी में सुबह के छै बज चुके थे, वो सलोनी से वहीं थाने में ही हाथ मुहँ धो लेने की गुजारिश करता है और वापस दोनो के लिये चाय मँगवा लेता है।
     हाथ मुहँ धोकर सलोनी को भी कुछ राहत सी लगती है….. दोनो चाय पीकर रायचंद हाऊस के लिये रवाना हो जाते हैं ।

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शेखर- सलोनी जी इतनी सुबह क्या रायचंद हाऊस जाना सही रहेगा, i mean अभी घर के सारे लोग सो रहे होंगे ना?

सलोनी–सर मैं तो दो साल से भटक रही हूँ, मैंने बहुत लम्बा इन्तजार किया है, लेकिन अब ये चंद मिनट भी काटना मुश्किल हो रहा है, मैं चाहती हूँ आप मेरे देवर देवरानी से सारी बात उगलवा लें और उन्हें समर की मौत की सज़ा दिलवा दें सर!
बस इसके बाद मैं हमेशा हमेशा के लिये अपनी माँ के पास चली जाऊंगी।

शेखर–हम्म !!

दोनों बातें करते हुए रायचंद हाऊस पहुंचते हैं,वहाँ गेट पर मौजूद सिक्योरिटी गार्ड के पास शेखर अकेला जाता है ,वहाँ मौजूद कैमेरा में शेखर का फोटो खिंच जाता है और घर के अन्दर लगे स्क्रीन पर दिखाई देता है, इसके बाद शेखर वहाँ के गार्ड के पास अपना नाम और आने का कारण दर्ज करवाने लगता है।।
     और कोई समय होने से फोटो अन्दर दिखते ही अन्दर से भेजने का अप्रूवल आ जाता था, पर इतनी सुबह किसी के ना जागने के कारण अप्रूवल में समय लगता है, तब शेखर के डराने पर गार्ड तुरंत घर के मालिक को उनके पर्सनल नम्बर पर फ़ोन लगाता है, फ़ोन में बात होने के बाद मेन गेट खुल जाता है और शेखर अपनी जीप लेकर अन्दर जाता है।।

    शेखर और सलोनी घर के अन्दर प्रवेश करते हैं,एक नौकरानी आकर उन्हें हॉल में बैठा कर चली जाती है।।

शेखर–सलोनी जी क्या आप इस नौकरानी को पहचानती हैं?

सलोनी–नही सर ,शायद मेरे जाने के बाद ये काम पे लगी होगी, वैसे गार्ड भी नया था, उसे भी मैं नही जानती।।

अभी वो दोनो बात कर रहे होतें हैं कि वहाँ रायचंद हाऊस की मालकिन सलोनी और अनन्या की सास आती हैं।

शेखर–नमस्ते मिसेस रायचंद!! दो साल पहले आपके घर पे जो वारदात हुई थी उसी सिलसिले में कुछ बातचीत करने आया हूँ ।

शेखर इस बात से आश्चर्यचकित हो जाता है कि सलोनी जिसे अपनी सास बता रही उस औरत ने एक बार भी सलोनी की तरफ ध्यान नही दिया। तभी सीढियों पर से उस घर की बहु उतरती चली आती है।

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“नमस्कार इंस्पेक्टर साहब !!! कल आपने फ़ोन किया तब मैंने ही फ़ोन रिसीव किया था,,मैं घर की बड़ी बहु सलोनी रायचंद हूँ,और ये रहे मेरे पति समर रायच्ंद।”

  वो औरत स्टडी में से निकल के आते एक आदमी की तरफ इशारा कर उनसे शेखर का परिचय कराती है,जिसे देख सलोनी अपनी जगह पर खड़ी हो जाती है

सलोनी–समर !! तुम जिंदा हो,और अनन्या तुम्हें क्या हो गया है?
  ,तुम क्यों खुद को सलोनी बुला रही हो? सलोनी तो मैं हूँ..और मैं जिंदा हूँ ।
   सलोनी भाग कर जा के समर के गले से लग जाती है, थोड़ी देर के लिये सभी चकित रह जाते की ये क्या हो रहा है।। वापस सलोनी शेखर से कहती है__”सर मैं सलोनी हूँ और आपसे जो भी कहा सब सच था,बस ये समझ नही आ रहा कि समर जिंदा कैसे बच गया।

समर–ये क्या बकवास है?  कौन हो तुम? मैं तुम्हे नही जानता,….इंस्पेक्टर साहब ये मेरी बीवी सलोनी है(अनन्या की तरफ इशारा कर के कहता है) और ये मेरी माँ है,हम तीन लोंगो का छोटा सा परिवार है बस, इस लड़की को मैं नही जानता,जाने कौन है कहाँ से आयी है?

सलोनी–समर तुम्हें क्या हो गया,? मुझे पहचान क्यों नही रहे, प्लीज़ समर क्या गलती हुई मुझसे जो ऐसी सज़ा दे रहे हो।
तुम नही जानते उस दिन मेरे साथ क्या क्या हुआ, मैंने कितना कुछ झेला है इन दो सालों में, जिंदा रही तो बस इसलिये की इन लोगों से तुम्हारी मौत का बदला ले सकूँ ।।

समर–सर ये कौन पागल है?  ,जब मैं जिंदा हूँ तो मेरी मौत का बदला क्यों लेना?।देखिए सर पैसे वालों के बहुत से दुश्मन बन जाते हैं, लोग तरह तरह से उनसे रुपये ऐंठना चाहतें हैं…..ये भी कोई जालसाज लड़की है…आप प्लीज़ इसे यहाँ से लेकर जाइये।।

शेखर–हम्म देखिए मिस्टर समर कौन जालसाज है, ये देखना परखना हमारा काम है…हम भी आपका ज्यादा समय खराब नही करना चाहते, देखिए अभी दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा…क्या आप अपनी शादी का एलबम हमे दिखा सकतें हैं..

समर–अरे सर जब मैं कह रहा हूँ कि ये मेरी बीवी है तब भी आप यकीन नही कर रहे,एलबम की क्या ज़रूरत है।।

अनन्या–कोई बात नही समर ,इन्हें तसल्ली कर लेने दीजिये, सर मैं एल्बम लेकर आती हूँ ।।

अनन्या ऊपर जाकर एल्बम लेकर आ जाती है, इंस्पेक्टर शेखर और सलोनी दोनों उस एल्बम को देखते हैं,एलबम में हर कहीं सलोनी की जगह अनन्या खड़ी मुस्कुराती होती है, सलोनी उस अलबम को देख कर चकरा जाती है, तभी शेखर समर से घर के सारे नौकरों को बुलाने कहता है, सभी नौकर वहाँ आकर खड़े होते हैं और शेखर के पूछने पर सभी सलोनी को पहचानने से इन्कार कर देते है,सभी एक स्वर मे अनन्या को ही सलोनी बताते हैं ।

सलोनी– इंस्पेक्टर साहब भले ही ये लोग मुझे नही पहचानने का नाटक कर रहे हों पर एक कोई ऐसा है यहाँ जो मुझे पहचान लेगा।।

अनन्या-  इंस्पेक्टर साहब आप सुबह सुबह हम लोगों का टाईम वेस्ट कर रहे हैं,क्यों इस पागल लड़की के चक्कर में पड़ें हैं,आप भी जाइये हमे भी हमारा काम करने दीजिये।।

सलोनी एक बार फिर अपने पति समर और अपनी सास से मिन्नतें करती है कि वो लोग उसे पहचान ले,लेकिन दोनो ही उसे पहचानने से इन्कार कर देतें हैं,और उल्टा भला बुरा कहने लगते हैं ।।

सलोनी– इंस्पेक्टर साहब मेरे पास एक पालतू कुत्ता था ,मफिन !! वो अभी भी होगा , वो मुझे नही भूल सकता , सर प्लीज़ उसे बुलाने को कहिये इन लोगों से।।

शेखर समर की तरफ देखता है और कहता है की अगर घर में कोई कुत्ता है तो उसे लेकर आईये, समर एक नौकर की तरफ इशारा करता है, नौकर वहाँ से निकल कर किनारे की एक बालकनी में चला जाता है,कुछ देर बाद वो लीश से बान्ध कर एक कुत्ते को लेकर आता है।

सलोनी मफीन को पहचान कर उसकी तरफ आगे बढ़ती है ,पर मफीन भी सलोनी को नही पहचानता और उस पर बुरी तरह से भौंकने लगता है।।

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अनन्या- इंस्पेक्टर साहब अब तो सब कुछ प्रूव हो गया,या अभी भी आपको कोई सबूत चाहिये, सुबह सुबह हम सबका दिमाग खराब कर दिया आप लोगो ने।।

शेखर– मिस्टर समर रायचंद मैं माफी चाहता  हूँ कि,आपको परेशान किया।
   अब मैं यहाँ से जाता हूँ ,उम्मीद करता हूँ कि आप सब ने जो कहा सच ही कहा है, और आगे मुझे आप लोगो को परेशान करने का मौका ना मिले।।

समर- जी धन्यवाद इंस्पेक्टर साहब।।

सलोनी को लेकर शेखर वहाँ से निकल जाता है, तभी सलोनी को कुछ याद आता है, और वो वापस मुड़ कर घर के अन्दर जाने लगती है,तब शेखर उसे रोक देता है।।

शेखर– रुक जाइये सलोनी जी,,वहाँ अन्दर आपको कुछ नही मिलेगा।।

सलोनी- सर एक बात तो रह ही गई, इन लोगों से मुझे मेरी माँ का नम्बर चाहिये था, असल में पापा के जाने के बाद माँ आस्ट्रिया मामा जी के पास चली गई, मामा जी का नम्बर मेरे मोबाइल पे था जो मोबाईल के साथ ही खो गया, अब मैं क्या करूंगी सर?? कहाँ जाऊंगी??

शेखर को भी सलोनी पर तरस आने लगता है।।

शेखर- चलिये मैं आपको किसी सुरक्षित जगह पर छोड़ देता हूँ,जैसे किसी वीमेंस हॉस्टल में या आश्रम में,जहां आप comfertable हो।।और अगर आपको बुरा ना लगे तो मैं आपको कुछ रुपये भी दे देता हूँ ।।

सलोनी– अरे नही सर,आपकी बात का बुरा क्यों मानूंगी, आपने तो मेरी बहुत मदद की है, मुझे रुपयों की चिंता नही है,वो तो मेरे पास मेरे पहने हुए कुछ जेवर थे हीरों के, जिन्हें बेच कर मैनें रुपयों का इन्तजाम कर लिया था, बस रहने के लिये किसी सेफ जगह की तलाश है, हॉस्टल सही रहेगा सर।।मुझे अब इन लोगों से कोई उम्म्मीद नही है,आप बस किसी तरीके से मुझे मेरी माँ का नम्बर दिलवा दीजिये,जिससे मैं उनके पास चली जाऊँ,, वैसे भी समर जिंदा है,तो अब बदले वाली भी कोई बात नही रही।। ऐसा बोलते हुए सलोनी रोने लगती है,उसे रोते देख शेखर को भी बुरा लगता है।।सुबह के 8 बजे वो एक वर्किंग वीमेंस हॉस्टल के सामने रुकते हैं,शेखर अन्दर जाके कुछ बात करता है फिर वापस आ जाता है।।

शेखर- सलोनी जी आपके पास कोई पहचान पत्र नही है ,इसलिये ये लोग आपको रखने को अभी फिलहाल तैयार नही है,,मैं भी बिना परिचय पत्र के आपकी मदद नही कर सकता ।क्योंकि कल को आप किसी आंतकवादी संगठन का हिस्सा हुई तो मेरी तो नौकरी पे बन जायेगी।

शेखर तो अपनी बात कह कर हँसने लगता है लेकिन सलोनी यह मज़ाक सह नही पाती, उसकी आंखों से दो बूंद आंसू ढुलक पड़ते हैं, उसे देख शेखर को अपनी गलती का एहसास होता है और वो उसके सामने एक प्रस्ताव रख देता है__

शेखर- सलोनी जी फिलहाल तो आप मेरे घर चल सकती हैं,वहाँ आपको बहुत सुविधा होगी,ऐसा तो नही कह सकता, पर हाँ जब तक आपकी माँ का नम्बर ना लाऊँ, आप वहाँ रहिये और फिर आपको आपकी माँ के पास भिजवाने का इन्तेजाम कर दूंगा।।

सलोनी के पास भी और कोई चारा ना होने से वो चुपचाप शेखर के साथ उसके घर चली जाती है।

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क्रमशः

aparna..

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Krish Poddar
Krish Poddar
11 months ago

Behtreen story

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻