
Gone girl-5
दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
“सर जब किसी इन्सान का भरोसा टूटता है ना तो वो सबसे अधिक टूट जाता है क्योंकि तब उसके पास कोई सहारा कोई अपना नही बचता, तब मैं क्या जानती थी कि मेरे खिलाफ क्या षड्यंत्र रचा जा रहा था?”
उस दिन ऑफिस में लंच के बाद समर की तबीयत बिगड़ने लगी, और उसने मुझसे कहा की वो घर जा रहा है, आराम करने। मैने साथ चलने के लिये पूछा तो उसने मना कर दिया, और वो घर चला गया, उसके जाने के बाद अमर भी कुछ काम से ऑफिस से निकल गया।
अभी शाम के 5 बजे थे कि मुझे समर के मोबाइल से कॉल आई, मैने जैसे ही पिक किया उधर से कुछ अजीब सी आवाजें आने लगी, मैने ध्यान से सुनने की कोशिश कि तो मुझे मेरी देवरानी की आवाज़ सुनाई दी,जो कह रही थी कि,,तुम्हारा रास्ते से हटना बहुत ज़रूरी है।।
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया सर, कुछ समझ नही आया, मैनें जल्दी से गाड़ी की चाबियां उठाई और बिना ड्राईवर को लिये ही घर के लिये निकल पड़ी ।
सर मैने जल्दी से गाड़ी की चाबियां ली और बिना ड्राईवर को बुलाये ही घर के लिये निकल पड़ी, वैसे तो मेरा ड्राईवर हमेशा ऑफ़िस के बाहर गाड़ी में ही मेरा इन्तज़ार करता है पर उस शाम मेरे देवर ने ऑफिस से जाते समय मेरे ड्राईवर को किसी काम से कहीं भेज दिया था, और मेरे पास उस समय ये देखने का समय नही था कि वो वापस आ गया या नही।
मैं गाड़ी भगाती चली जा रही थी, तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरी गाड़ी की ब्रेक नही लग रही हैं, ब्रेक में कुछ प्रॉब्लम आ रहा था,मैने भगवान का नाम लिया और गाड़ी अपनी घर की तरफ मोड़ दी, एक्सलरेट करना बन्द किया जिससे गाड़ी की स्पीड मेरे कन्ट्रोल में थी, घर के गेट के अन्दर गाड़ी को डालने के बाद मैनें हैण्ड ब्रेक यूज़ करके गाड़ी रोकी और भागते हुए दरवाजे तक पहुंची।
दरवाजा बाहर से बन्द था, मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि घर के गेट पे खड़ा रहने वाला गार्ड भी गायब था, सिक्योरिटी रुम खाली पड़ा था , और वहाँ की सी सी टी वी स्क्रीन बन्द थी। मैं भागती हुई पीछे की सीढियां चढ़ती ऊपर की तरफ गई, मेरा कमरा ऊपर ही था, मैनें सीढियां चढ़ते हुए सोचा कि समर को फ़ोन कर लूँ, पर तभी ध्यान आया मैं अपना फ़ोन और पर्स गाड़ी में भूल आयी थी।
मेरे कमरे का एक तरफ का दरवाजा कॉमन बालकनी में खुलता था, मैं उस बालकनी से अपने दरवाजे तक पहुंची , मुझे अन्दर से किसी के ज़ोर ज़ोर से लड़ने और चीखने की आवाजे आ रही थी, मैने कान लगाकर सुनना शुरु किया, वो आवाजे मेरे पति समर मेरी देवरानी अनन्या और मेरी सास की थी।अमर शायद चुपचाप बैठा ये सारा तमाशा देख रहा होगा ।।
मेरी सास ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर समर को भला बुरा कह रही थी, उनके अनुसार समर ने ही अपने पिता से कह कर सब कुछ मेरे नाम करवा दिया था,
“मैं सब कुछ समझती हूँ समर,,तूने क्या सोचा मुझे पागल बना देगा, मेरे नाम क्या लिखा तेरे बाप ने, डर्बी के घोड़े,अरे रेस में जितना जीत नही पाती उससे ज्यादा तो उन घोड़ो को पालने का खर्चा है, एक मामूली सा फ्लैट दे दिया मुझे, क्या यही औकात है मेरी?”
समर-आप ऐसा क्यो कह रही हैं मॉम,आपको पापा ने फाईव बी एच के दिया है,बंगलो से कम नही है वो फ्लैट, आप लोग समझने की कोशिश कीजिए, मै और सलोनी इस घर का ही हिस्सा हैं, हम दोनो ने कभी नही सोचा की हम आपको और अमर अनन्या को इस घर से बाहर कर देंगे।”
अनन्या–अभी नही सोचा तो क्या कभी नही सोचेंगे? एक ना एक दिन जब आपके और सलोनी के बच्चे हो जायेंगे आप लोग अपनी फैमिली मे बिज़ी हो जायेंगे तब हमे कौन पूछेगा, अमर तुम चुप क्यों बैठे हो, कुछ कहते क्यों नही?।”
सास –वो कुछ नहीं कहेगा अनन्या !! वो मेरा बेटा है,काम पे यकीन करता है!! अमर मार डालो इसे, और उसके बाद इसकी बीवी को भी।।वैसे भी सलोनी के मरने के बाद ये जायदाद समर की है और समर के मरने के बाद अमर की, तो इन दोनो को आज ही मार दो,किस्सा खतम…
…इनकी मौत को पारिवारिक झगडे का रूप देकर हम कोर्ट कचहरी से भी बच जायेंगे।।
अनन्या-लेकिन मम्मी जी पुलिस को क्या कहेंगे??
सास-पुलिस तो वैसे भी रायचंद की जेब में है, यहाँ का कमिश्नर मेरी जान पहचान का है,कुछ महंगे तोहफो और रुपयों से मैं उसका मुहँ बन्द कर दूंगी,,अमर देर मत करो।
मैं कमरे के चारों ओर चक्कर लगाती अन्दर जाने का तरीका सोच रही थी, इस सारी बात चीत में बार बार समर की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी, जो कभी गुस्से मे उन पर चीख रहा था, कभी रोते हुए गिडगिड़ा रहा था, कभी अपनी जान की भीख मांग रहा था,उफ्फ मेरा समर कितना परेशान था और मैं उसकी कोई मदद नही कर पा रही थी, तभी मैनें बालकनी में रखे एक छोटे मेटल के गमले को उठाया और उससे खिड़की का ग्लास डोर तोड़ दिया, अन्दर का दृश्य देख कर मैं चिल्ला उठी, समर नीचे फर्श पे पड़ा था,और मेरी सास ने एक पॉलीथीन से उसका चेहरा कवर किया हुआ था, समर के हाथ पैर सब बंधे हुए थे, उस पर शायद किसी हथियार या भारी समान से चोट की गाई थी की क्योंकि उसकी सफेद कमीज लाल रंग के खून से भीगी हुई थी।।
उसके पैरों को अनन्या ने कस कर पकड़ रखा था, मेरे खिड़की को तोड़ने की आवाज़ से सब मुझे देखने लगे , सास की पकड़ ढीली पड़ते ही समर ने किसी तरह खुद को छुड़वा कर मुझे कहा कि मैं किसी तरह वहाँ से जान बचा कर भाग जाऊँ, पर मैने ऐसा करने से मना कर दिया, समर मुझे बार बार यही कहने लगा-
समर–सलोनी प्लीज़ भागो तुम यहाँ से, जल्दी जाओ प्लीज़ , मैं खुद को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, तुम जाओ और जल्दी से पुलिस को लेकर आओ, प्लीज़ जाओ सलोनी,तुम्हे मेरी कसम है,जाओ!!! ये लोग तुम्हे भी पकड़ लेंगे।।।
ये सब बस कुछ ही सेकंड में हो गया,,मैं जब तक कुछ समझ पाती , अनन्या मेरी तरफ फुर्ती से आने लगी ,मैं उलटे पैर नीचे भागी, मुझे भी यही लगा की मैं पुलिस और डॉक्टर बुला लूँ तो समर की जान बच सकती है, मैं भागती हुई नीचे आई, नीचे गाड़ी में अपना फ़ोन और पर्स निकालने हाथ डाला तो वहाँ कुछ नही था, मेरा पर्स फ़ोन सब गायब था, मैं हैरान परेशान बाहर की ओर भागी तभी मुझे गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी, मैने मुड़ कर देखा ,एक ज़ोर की चीख की आवाज़ आयी और मै वापस पुलिस स्टेशन की ओर पैदल ही भागी,गेट से बाहर निकल कर मैं जैसे ही मेन रोड पर आयी , एक ट्रक मेरे पीछे चलने लगी, मैं लगातार किनारे भाग रही थी,और वो ट्रक जैसे मेरा ही पीछा करने लगी…..मै समझ गई अगर मैं फुटपाथ से नीचे उतरी तो ये ट्रक मुझे उड़ा के निकल जायेगी।।
ऐसी घबराहट और डर लग रहा था की मैं मेरे पापा को फ़ोन करना भी भूल गई और अब फ़ोन था भी नही मेरे पास, की भागते हुए किसी को मदद मे लिये बुला सकूं, रास्ता सुनसान था , थोड़ी देर में उधर से एक कार निकली , मैने उसे रोक कर लिफ्ट ले ली….
मैं भागते भागते थक चुकी थी, गाड़ी में बैठते ही चैन की सांस लेती इसके पहले ही पीछे से किसी ने मेरी कनपटी पर गन तान दी।।
क्रमशः
aparna..

😲… ये क्या था 🤔बहुत खतरनाक कहानी है ये तो पर भाग लाजवाब था 👌🏻👌🏻👌🏻
Indeed it is good 👌👌