
gone girl
Gone girl:
2 — मेरी आवाज़ ही पहचान है…
लड़की–जी इंस्पेक्टर साब मैं रायचंद हाऊस से उनकी बड़ी बहु अनन्या रायचंद बोल रही हूँ, कहिये क्या कहना चाहतें हैं आप।”
शेखर — आप पक्का उनकी बड़ी बहू बोल रहीं हैं, आई मीन क्या मैं आपके पति का नाम जान सकता हूँ।”
” बेशक जान सकतें हैं मेरे पति का नाम है समर रायचंद और मैं हूँ उनकी धर्मपत्नी अनन्या समर रायचंद।”
शेखर –बडी बहु?? जी देखिए हो सकता है मुझे कुछ गलत फहमी हुई हो ,पर मेरे खयाल से उनकी बड़ी बहु का नाम तो सलोनी था ना।।
अनन्या–सॉरी सर आपको गलतफहमी ही हुई है,,मैं अनन्या समर रायचंद उनकी बड़ी बहु हूँ, उनकी छोटी बहु का नाम सलोनी था,जिसने दो साल पहले खुदकशी कर ली थी, अब वो इस दुनिया में नही है सर,एक मिनट आपने अपना क्या नाम बताया??
शेखर –इंस्पेक्टर शेखर सिंह!!
अनन्या–हाँ शेखर सिंह !! सर आपको याद कैसे नही आप ही ने तो दो साल पहले पंचनामा तैय्यार किया था,फिर पूरे 8 महीने तक आपने मुझे और मेरे पति को कितने चक्कर लगवाये थे पुलिस थाने के,,लगभग एक साल पहले ही आपने केस क्लोज़ किया और आज अचानक फिर आपको क्या हो गया?
शेखर -मुझे तो सब याद था मैडम !!! पर आज यहाँ एक औरत आयी है जो खुद को सलोनी रायचंद कह रही है,,मुझे नाम तो याद था,पर ये खुद को समर रायचंद की बीवी और अपने आप को रायचंद की बड़ी बहु बता रही,इसिलिए आपको फ़ोन किया…
और वैसे भी मैने आपसे केस की ज्यादातर पूछताछ फ़ोन पर ही की थी, और आपका जब भी थाने आना हुआ इत्तेफाक से मुझसे कभी मिलना हुआ ही नही , आप तो अक्सर कमिश्नर सर से मिल कर जाते थे, खैर …इसलिये मुझे आपका और आपके पतिदेव का चेहरा ज़रा याद सा नही आ रहा।
अनन्या–क्या सलोनी जिंदा है?? what rubbish?? hows it possible? वो कोई झुटी मक्कार लड़की है सर? अब हमारे इमोशंस से खेलना प्लीज़ बन्द कीजिए,उस लड़की को वहीं से रफा दफा कर दीजिये,,चाहे तो उसे वहाँ से भगाने का मुआवज़ा आपको भिजवा दिया जायेगा।।
शेखर–dont worry madam, मैं खुद इसे निपटाने की कोशिश कर रहा हूँ, आपको हुई तकलीफ के लिये माफी चाहता हूँ ।।
इतना किसी से सुनने की आदत शेखर को भी नही थी लेकिन ये रईस लोग ना वर्दी देखते ना पोस्ट…थोड़ी झुंझलाहट के साथ शेखर अब सलोनी यानी उस दुसरी लड़की की ओर मुखातिब हुआ…
शेखर–मैडम आप क्यों झूठ बोल रही हैं पता नही, पर आप मर चुकी हैं, मेरा विश्वास कीजिए….
सलोनी– what? मैं आपके सामने जिंदा बैठी हूँ, और आप कह रहे , मै मर चुकी हूँ, मैं जिंदा हु सर, प्लीज़ मेरी पूरी बात सुनिये,मैं आपको सब कुछ बताती हूँ ।।
शेखर–सॉरी मेरा मतलब है सलोनी मर चुकी है ,और आप सलोनी का नाम धर के जाने क्या फ्रौड करना चाहती हैं ।
सलोनी –मै कोई फ्रॉड नही कर रही, आप मेरी बात सुनिये तो सही , प्लीज़ मेरी बात मान जाइये, मैं जिंदा हूँ ।।
शेखर- ठीक है ,मै आपकी बात मान लेता हूँ,अब आप आराम से पूरी बात बताईये।”
शेखर समझ गया था ये लड़की इतनी जल्दी टलने वाली नही है , बाहर बारीश भी रुकी नही थी सो घर भी नही जा सकता था उसने सोचा आज टीवी की जगह लाइव क्राईम पैट्रोल देख मतलब सुन लिया जाये, उसने हवलदार को दो कप चाय लाने का इशारा किया और आराम से अपनी कुर्सी पर बैठ सामने वाली की बात सुनने लगा।
सलोनी- देखिए सर मै आपको शुरु से बताती हूँ ।।आज से 3 साल पहले मेरी शादी हुई थी।।
मेरे पापा का अहमदाबाद में गहनों और हीरों का व्यापार था, मैने जब अपना स्कूल खतम कर लिया तब मुझे जुलरी डिसाइनिंग के कोर्स के लिये पापा ने मेरे चाचा के पास अमेरिका भेज दिया, वही एक जुलरी डिसाईन कोंफ्रेंस में मेरी मुलाकात समर से हुई, और हमारी दोस्ती हो गई,वो भी वहाँ ऐसे ही किसी कोर्स को सीखने आया था,उसका भी हीरों का ही कारोबार था।।
वो वहाँ पन्द्रह दिन रहा, इंन पन्द्रह दिनो में हमारी दोस्ती कुछ और गहरी हो गई,वो हमारे घर भी आया चाचा चाची से उसकी मुलाकात हुई,और उसके बाद वो इंडिया वापस लौट गया।।
हमारे बीच कभी प्यार का इजहार नही हुआ,कुछ दिनो बाद इंडिया से पापा का फ़ोन आया कि उन्होनें एक बहुत बडे खानदान में मेरी शादी की बात पक्की कर दी है,मै चाचा जी लोंगो के साथ इंडिया आ गई, घर पे सारी तैय्यारियाँ हो चुकी थी ,मैने माँ से कहा भी कि “मैं ऐसे कैसे बिना देखे हाँ बोल दूँ,“
तब माँ ने कहा ,”आज शाम लड़का और उसका छोटा भाई तुमसे मिलने आयेंगे अगर तुम्हें लड़का पसंद नही हुआ तो तुम मना कर देना ,और अगर तुम्हारी हाँ हुई तो कल ही सगाई हो जायेगी।” माँ ने एक बात और बताई मेरी बुआ की लड़की से उस लड़के के छोटे भाई की शादी तय हुई थी,और हम दोनो की सगाई की तैय्यारियाँ घर पर की जा रही थी।।
शाम को जब लड़का और उसका भाई मुझे देखने आये तो मेरे आश्चर्य और खुशी का ठिकाना नही रहा ,क्योंकि ये लड़का वही समर था जिससे मैं अमेरिका में मिल चुकी थी।।हम एक दूसरे से वापस मिल कर बहुत खुश हुए,,मैने उससे पूछा कि ये सब कैसे किया?? तब उसने मुझे कहा कि “इंडिया आने के बाद हीरा व्यापारी धनराज कोठारी को ढूंढना बिल्कुल भी मुश्किल नही था,उनका यानी तुम्हारे पिता का पता ठिकाना मिलते ही मैनें अपनी माँ से तुम्हारे बारे में बात की और तुम्हारे घर रिश्ता भेज दिया ,,तुम्हारे घर वालों को भी कोई एतराज नही हुआ।और हमारी बात लगभग पक्की हो गई,अब सब कुछ तुम्हारे निर्णय पे था,मुझे तुम पे भरोसा था कि तुम भी प्यार भले ना करो पर पसंद तो मुझे करने ही लगी थी,और देखो मेरा यकीन सच साबित हुआ।।”
बस इसके अगले दिन मेरी समर से और अमर की अनन्या से सगाई हो गई,और बस उसके 21दिन बाद हम दोनो जोड़ों की शादी हो गई ।।
शेखर–wait a minute मैडम आपका कहना है कि अनन्या आपकी देवरानी बनी जो आपकी cousin थी।।”
सलोनी–जी हाँ सर अनन्या ही मेरी देवरानी बनी ,पर मुझे इसी एक बात से खुशी नही मिल रही थी, अनन्या जाने क्यों बचपन से हर बात पे मुझसे प्रतियोगिता करती थी,चाहे पढ़ाई हो,एक जैसे कपड़े हो जूते हो,सब में ।।मुझे मेरे पापा जो चीज़ लाकर देते वही चीज़ पाने के लिये वो अपने पापा से जिद पे अड़ जाती, उसके पापा का करोबार डूब चुका था ,इसिलिए वो मेरे पापा के साथ ही काम कर रहे थे और बुआ लोग हमारे आलिशान घर में हमारे साथ ही रहते थे।।
मेरी और अनन्या की शादी एक ही मुहूर्त पर हुई और हम दोनो साथ साथ बिदा होकर ससुराल पहुंच गई, घर घर नही महल था, बिल्कुल वैसा ही जैसे किसी बड़े कारोबारी का होता है….,घर पे नौकरों की फौज थी…..,मुझे और अनन्या को कोई असुविधा ना हो इसलिए हमारे लिये एक एक पर्सनल हेल्पर थी।।
मेरी हेल्पर अकसर मेरे साथ रहा करती और खूब बाते किया करती थी…उसी ने मुझे कुछ अजीब बातें उस घर के बारे मेँ बताई ,जिनमें से एक बात ये थी कि मेरी सास असल में मेरे ससुर जी की दुसरी पत्नि थी और समर उनका बेटा नही था….
क्रमशः
aparna..

बहुत अच्छा पहला भाग👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
कहानी बहुत सस्पेंस भरी है ऐसा लग रहा 😊, चली मैं अगला भाग पढ़ने 😊🙏🏻।
दिलचस्प कहानी हॆ हमेशा की तरह