
Gone girl
10– झूठ पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया …..
सारी बातें तय होने के बाद शेखर को कुछ राहत मिलने लगी, सभी अपने अपने घर चले गये, सलोनी शेखर के साथ उसके घर आ गई । वापस आने के बाद सलोनी दोनो के लिये कॉफ़ी बना कर ले आयी।
सलोनी- क्या सोच रहे शेखर?
शेखर- यही कि इन कुछ दिनों में तुमसे एक रिश्ता सा जुड़ गया। सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो तुम अपनी माँ के पास चली जाओगी, फिर कौन शेखर? कैसा शेखर??
शेखर बोल कर मुस्कुराने लगा…..
सलोनी- तुम्हे कभी नही भूल पाऊंगी।आज कल के ज़माने में जब पति ही पत्नि को धोखा दे रहा ऐसे में तुमने मेरी जितनी मदद की है,और कोई नही कर सकता था। और मैं कौन सा हमेशा के लिये आस्ट्रिया जा रही हूँ, पन्द्रह बीस दिन बाद वापस आ ही जाऊंगी, यहाँ आकर मुझे अपना काम भी तो शुरु करना है, मेरे पापा का ससुर जी का सपना ऐसे बेकार नही जाने दे सकती, अभी तो बहुत कुछ करना है शेखर……
….तुम शायद मुझे समझ नही पाये …..मेरा लक्ष्य पैसे या जायदाद पाना नही है….बल्कि उन लोगों को उनके किये की सज़ा दिलाना है……अभी समर के अकाऊंट के पैसे आने के बाद आस्ट्रिया से वापस आ कर मैं उन लोगों से अपने एक एक आंसू का बदला लूंगी……अनन्या और समर को जब तक जेल की सलाखों के पीछे ना भेज दूं मुझे चैन नही मिलेगा।
दो बूंद आँसू ढुलक के गालों तक बहते चले आये जिन्हें बिना पोछे ही सलोनी अपनी चाय पीती बैठी रही….
…..
अगले एक हफ्ते में सब कुछ पर्सि के प्लान के मुताबिक होता चला गया, मधु ने बिल्कुल वैसे ही किया जैसा उसे कहा गया था, पर्सि ने जायदाद के पेपर सलोनी को लाकर दे दिये।
सलोनी के उन पेपर पर साईन करने के बाद पर्सि शेखर मधु सभी ने उसे बधाई दी, अब सारी जायदाद तो नही पर समर के अकाऊंट के 10 करोड़ रुपये सलोनी के हो चुके थे।
चारों ने इसी खुशी में मिल कर पार्टी की।पार्टी के बाद पर्सि और मधु के जाने के बाद शेखर सलोनी को एयरपोर्ट तक छोड़ने चला गया….
शेखर- सलोनी मुझे भूल मत जाना।
सलोनी- कभी नही भूल सकती शेखर! अरे एक मिनट तुमने अपना नम्बर तो दिया ही नही।
मेरे पास तो अब तक फ़ोन ही नही है….,मैं वहाँ पहुंच कर तुम्हे कॉल तो कर सकूंगी….चलो जल्दी से अपना नम्बर दे दो।
शेखर ने मुस्कुराते हुए अपने जेब से पेन निकाल कर सलोनी के हाथ पे अपना नम्बर लिख दिया….सलोनी ने मुस्कुराते हुए उससे बिदा ली और चेक इन के लिये अन्दर चली गई….बाहर खड़ा शेखर उसे हाथ दिखाता खड़ा रहा, उसके नजरों से ओझल होने के दस मिनट बाद खाली खाली मन से वो अपनी गाड़ी में बैठ वापस लौट गया।
………
लगभग एक हफ्ते बाद थाने में अचानक कोई शोरगुल सुन कर शेखर अपनी केबिन से बाहर निकला
शेखर– क्या हल्ला मचा रखा है ये, कौन हैं ये साहब??”
समर– सर मैं समर रायचंद हूं!! और मेरे अकाऊंट से लगभग 10 करोड़ रुपये गायब हुए हैं ।।
शेखर- आईये आप मेरे केबिन में आकर बैठिए, अब पूरी तफसील से सारी बात बताईये,क्या हुआ है?
समर– सर मेरे अकाऊंट से दस करोड़ रुपये गायब हुए हैं, मैं पिछले पंद्रह दिन से अपनी कॉलेज एलुमिनी पे न्यू जर्सी गया हुआ था,अपनी वाईफ के साथ।
अभी 6 दिन पहले वापस आया, तब मेरे लीगल एडवाइज़र का बेटा मेरे पास हमारे अनाथालय के लिये कुछ फंड ट्रांसफ़र के कुछ पेपर्स साईन कराने आया, मैंने थकान के कारण ज्यादा पढ़े बिना ही उनपे साईन कर दिया।
उसी रात से मेरा मोबाइल भी खराब पड़ा था, कल रात मोबाइल बन के आया तब मैनें उसमे मेसेज और मेल देखा कि मेरे बैंक अकाउंट से रुपये गायब हुए हैं ।
शेखर- ये आपके साथ जो बैठी हैं ये कौन हैं,और पिछले हफ्ते आप दोनों कहाँ थे?”
समर- सर ये मेरी वाईफ सलोनी है, और हम दोनो पिछले हफ्ते न्यू जर्सी अमेरिका में थे।
शेखर सोच में पड़ जाता है, पिछले हफ्ते ही सलोनी को लेकर वो रायचंद हाऊस गया था,तो वहाँ जो समर और अनन्या मिले,वो कौन थे?
शेखर– आपके पास कोई पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या driving लाइसेंस तो होगा।
समर अपने और सलोनी के स्कूल लिविंग सर्टीफिकेट से लेकर आधार और बाकी सारे आईडेंटीटी प्रूफ निकाल कर सामने रख देता है….
शेखर– देखिए शायद आप लोगों को याद होगा, दो साल पहले आपके घर पर कोई दुर्घटना घटी थी, जिसके investigation के लिये मैं मेरे एक सीनियर के साथ आपके घर आया था,पर मुझे आप लोगो के चेहरे ठीक से याद नही आ रहे।।
सलोनी– सर दो साल पहले मेरी देवरानी अनन्या की डेथ हुई थी, मुझे याद है उस वक्त पुलिस आयी थी…. कमिश्नर तो मम्मी जी के पहचान के थे….उन्ही से हमारी मुलाकात हुई थी,आप शायद पंचनामा और बाकी कामों में व्यस्त थे।।
शेखर- क्या आप वो पूरा वाकया बता सकती हैं ….
सलोनी- जी अनन्या मेरी कजिन थी,उसकी और अमर की शादी भी हमारे साथ ही हुई, पर उन दोनों की एक दिन भी नही जमी,अमर की हद से ज्यादा पीने की आदत और अनन्या की किटी पार्टी की आदत से दोनो में बहुत झगडे होते थे, उन झगडों के चलते ही एक दिन बहुत बड़ा हादसा हो गया।।लड़ाई के बीच में ही अमर ने गुस्से से वास उठाया जो ऊपर टंगे क्रिस्टल के झूमर से टकरा गया, ये क्रिस्टल झूमर मैं ही जर्मनी से लेकर आई थी, उस झूमर में अन्दर एसिड भरा था, हमने कभी सोचा भी नही था कि ऐसा हो जायेगा…
वो झूमर चटक कर टूट गया और उसका सारा एसिड अनन्या के सर पर गिरा…बेचारी बुरी तरह से जल गई, उसी हादसे के बीच घबराहट में अमर के हाथों गोली भी चल गयी, हालांकि उसने जानबूझ कर अनन्या पर गोली नही चलायी थी, हमने पुलिस के साथ डॉक्टरों को भी बुलाया पर तब तक उसकी डेथ हो चुकी थी, इस घटना के कुछ दिनों बाद अनन्या की मौत के गिल्ट में अमर ने कार में बन्द होकर खुद को आग लगा कर आत्महत्या कर ली।
ये सब कुछ हमारे लिये बहुत दुखद था, वो साल हमारे लिये बहुत बुरा रहा।।
समर- इस घटना के लगभग एक महीने बाद मेरी वाईफ सलोनी के फादर की भी डेथ हो गई…..और उसकी माँ इंडिया छोड़ कर बाहर चली गई।
शेखर– ओह्ह i m sorry ma’am..
शेखर को अब इन लोगों की बातों में विश्वास होने लगा था,फिर भी इतनी जल्दी उसका दिल ये मानने को तैयार नही था कि सलोनी यानी वो लड़की उसे चीट कर के जा चुकी थी, वो सब कुछ जानना चहता था,पर इन लोगों से उस फ्रॉड़ सलोनी के बारे में पूछ ताछ कैसे शुरु करुँ यही सोच रहा था__
शेखर- आप लोगों को किसी पर शक है,कौन आपके पैसे चुरा सकता है।।
समर- शक नही पूरा यकीन है सर!! पर्सि अंकल का बेटा टोनी और ….
शेखर-और कौन? मतलब टोनी क्यों? कौन है ये, पूरी बात बताइये।
समर-
सर टोनी यंग एज का लड़का था, आज से तीन साल पहले जब पर्सि अंकल के लड़के टोनी ने सी ए पूरा किया तब अंकल की इच्छा अनुसार मैने उसे अपने साथ काम पे रख लिया, और उसने अच्छे से काम सीख लिया, एक साल होते होते उसने बैलेंस शीट पर ऐसा चक्कर चलाया कि पूरे दस लाख उसने पार कर दिये, जब मुझे ये बात समझ आई तो मैनें उसे भला बुरा कह कर नौकरी से निकाल दिया, पर अंकल पे तरस खा कर पापा ने उसे वापस काम पे रख लिया, लेकिन फिर उसने मधु से दोस्ती बढ़ा ली …..
शेखर को अब धीरे धीरे सब समझ आने लगा था….
शेखर– ये मधु कौन है,इसका क्या एंगल है ज़रा बताईये
समर– सर मधु के पापा मेरे पापा के ऑफिस में मुनीम हुआ करते थे,मधु के स्कूल कॉलेज की पढ़ाई का खर्चा मेरे पापा ने ही उठाया……
वो इन सारी बातों का एहसान माना करती थी सर, बचपन से हम साथ पढ़े साथ खेले, साथ ही बड़े हुए…..
उसके बाद…
समर की बात के बीच ही उसकी बीवी उठ कर बाहर चली गयी, शेखर ने उसे जाते देख लेकिन रोका नही।
” जी आगे बताइये?”
समर– सर मेरी और मधु की बहुत गहरी दोस्ती हो गयी, इतनी गहरी की किन्हीं कमज़ोर पलों में हम सारी दुनियादारी भूल एक दूसरे में खो गये…लेकिन बाद में मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैने उससे माफी मांग ली, मुझे नही पता था कि वो मुझसे प्यार करने लगी थी।
वो बार बार मुझे खुद को अपनाने की गुजारिश करती लेकिन मैंने उससे कभी प्यार किया ही नही था तो मैं क्या करता, आखिर मैं पढ़ाई के बहाने वहाँ से विदेश चला गया।
उसकी आखरी चिट्ठी मुझे मिली जो उसने खून से लिख कर भेजी थी कि वो मुझे चैन से जीने नही देगी।
इसके बाद सर जब मेरी और सलोनी की शादी हुई तब सलोनी के साथ उसकी विदाई में उसकी पर्सनल हेल्पर बन वो एक बार फिर मेरी ज़िंदगी में आ गयी…..
वो बार बार मुझे रिझाने की कोशिश करती, और मैं हर बार उसे झिड़क देता, एक बार ऐसे ही किसी मौके पर सलोनी के सामने ये सारी झूमा झटकी हुई और मैने गुस्से में उसे तमाचा मार दिया…
उसके बाद कुछ समय वो शांत रही फिर कुछ दिनो बाद शायद मुझे जलाने उसने टोनी से दोस्ती बढा ली और अब उसके फ्रॉड में उसकी पार्टनर बन गयी, ऐसे ही किसी दिन उसने और टोनी ने कुछ पैसों की फिर हेरा फेरी की और जैसे ही पर्सी अंकल को ये सब मालूम हुआ उन्होनें अपने बेटे को हमारे सामने ही तमाचे लगाये और पुलिस को बुला के पुलिस के हवाले कर दिया, हमें अंकल पर बहुत तरस भी आया और हमने जाकर टोनी की जमानत करा दी,पर अंकल ने उसे घर से निकाल दिया,उसके बाद मधु और टोनी हमें नज़र नही आये, फिर अभी इतने दिन बाद अचानक मधु एक शाम घर आई और बहुत रोने धोने लगी,उसने कहा कि उसे अपने किये का बहुत पछतावा है और हम उसे कोई भी छोटी मोटी नौकरी दे दें।मुझे उस पर विश्वास नही था लेकिन सलोनी एक बार फिर उसके जाल में फंस गयी, उसे नौकरी देने के तीसरे ही दिन अंकल का बेटा हमारे घर आया,उस वक्त मैं भी घर पे नही थी,उसने कहा पापा ने कुछ ज़रूरी कागज़ भेजे हैं और मुझ से साईन करा लिये,और चलता बना।
इन सारी बातों के बीच सलोनी आकर बैठ चुकी थी शायद वो मधु और समर वाला हिस्सा वापस नही सुनना चाहती थी, आगे की बात उसने बतानी शुरु की_
” उस शाम मैं जब वापस आई तब तक समर सो चुके थे,जबकि सिर्फ 8 बजा था,तभी मुझे लगा कि इन्होनें कुछ ज्यादा ड्रिंक कर लिया होगा, और उस दिन के बाद से मधु भी वापस दिखाई नही दी,मैनें उसे कॉल किया तो उसने उठा कर कहा,तबीयत ठीक नही ,चार पांच दिन बाद आ जाऊंगी, पर आज पूरे छै दिन बीत गये ना वो आई ना टोनी।।कल रात इनका फ़ोन ठीक होने के बाद जब मेसेज आया तब पता चला कि इन दोनों ने मिल कर हमारे साथ कितना बड़ा फ्रॉड कर दिया।।
ओहह तो असली मास्टर माइंड मधु है,,शेखर ने मन ही मन सोचा,तो फिर वो लड़की कौन थी जो सलोनी बन के आई थी।।
शेखर- क्या आप मुझे मधु और टोनी की कोई फोटो दिखा सकतें हैं ।।
सलोनी- वैसे तो मधु फोटो नही लेने देती थी पर उसकी एक फोटो मेरी शादी के समय की है, मैं मोबाइल पे दिखाती हूँ ।
सलोनी के मोबाईल पे गुलाबी लह्ंगा पहने खुले बालों और बहुत हल्के मेक’प में शर्माती सी खड़ी नाज़ुक सी खूबसूरत लड़की को देख शेखर चौंक गया
“अरे ये तो वही सलोनी है, तो ये असल में मधु है, इसने और टोनी ने मिल के ये सारा प्लान बनाया।
टोनी ही नकली दाढ़ी मूंछ लगा कर पर्सि बन कर शेखर को मिला ,और बाकी के सारे किरदारों जैसे नकली मधु और नौकर चाकर को इन लोगों ने किराये पे बुलाया।।जब मधु बन के रायचंद हाऊस जाने का वक्त आया तब नकली सलोनी ही वहाँ गई और बाद में पार्टी के समय नकली मधु को बुला लिया।
उफ्फ इतना गहरा षड्यंत्र। इतना शातिर बदला!
शेखर– आप लोगों ने पर्सि से बात की?
समर- हाँ सबसे पहले उन्हीं से बात की, उन्होनें कहा कि उन्होनें कोई पेपर साईन करने को अपने बेटे के हाथ से नही भेजे थे। बल्कि वो खुद पिछले हफ्ते गोआ अपनी बहन के घर गये हुए थे।।
शेखर को अब सारी बातें साफ साफ समझ आ गई।।जब पार्सि अपने घर में नही था,समर सलोनी अपने घर पे नही थे,उसी समय का फायदा इन दोनों ने उठाया और इतना गहरा षड्यंत्र रच लिया,शेखर को समझ आ गया था,कि उस दिन नकली सलोनी को एयर पोर्ट छोड़ने वो अकेला क्यों गया,क्योंकि टोनी को अपना भेस बदल कर एयरपोर्ट पहुंचना था।।
उस दिन वो नकली सलोनी यानी मधु वहाँ से अकेली नही उड़ी बल्कि दस करोड़ और अपने प्रेमी टोनी को भी ले उड़ी , ढूँढने पर नकली मधु और बाकी के नौकर चाकर तो मिल जायेंगे लेकिन ये सब सिर्फ भाड़े के टट्टू से ज्यादा कुछ नही,और इनसे मधु और टोनी की कोई खोज खबर नही मिलने वाली,फिर भी केस तो दर्ज करना ही था।।
अपनी बेवकूफी पे मुस्कुराते हुए शेखर ने केस दर्ज कर लिया,और समर को सांत्वना दी कि वो जल्द ही उसके पैसे दिल वाने की कोशिश करेगा,जबकि शेखर अच्छे से समझ गया था,कि एक बार इंडिया से बाहर भागा चोर कभी पकड़ में आया है? चाहे माल्या हो या टोनी।।
भोली बातों पे तेरी दिल को यक़ीं
पहले आता था अब नहीं आता …..
इति!!
aparna…

😄😄😄वाह वाह वाह 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻बहुत खूब 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻मजा आ गया पढ़कर और मतलब कुछ तो असर होने लगा है मुझपर आपका अपर्णा.., पिछले भाग मे ही कुछ कुछ लोचा समझ आ गया था पर सच मे इंस्पेक्टर की तो 😄😄बेचारा….।
बहुत खूबसूरत, लाजवाब कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐💐
Very thrilling and crisp story.But it feels incomplete.please continue the story.
दिमाग घूम गया मेरा तो
Bahut hi badia kahani tony aur madhu donon hi shatir nikle unki chaal inspector shekhar bhi nahin samajh saka
achcha
बेहद कसी हुई छोटी कहानी मज़ा आ गया Dr साहिबा