Bestseller-34

The bestseller – 34

                          ” बेस्टसेलर “

   ” अगर मुझे कोई बेस्टसेलर किताब लिखनी है तो क्या मुझे किसी बेस्टसेलर लिखने वाले लेखक की बलि देनी होगी।”

नंदिनी की आंखें आश्चर्य से फैल गई… उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह हो क्या रहा है? अब तक तो उसे सिर्फ यही  गुनहगार लग रही थी, लेकिन यहां तो कामिनी भी शामिल थी।
आश्चर्य से आंखें फाड़े नंदिनी सामने खड़ी जमना ताई को देख रही थी कि तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया वह चौक के पीछे मुड़ी… उसके ठीक पीछे कामिनी खड़ी थी। वो बस अभी ही वहाँ पहुंची थी।

” तुमने तो सारी कहानी जान ली मिस डिटेक्टिव? पर तुम्हारा वह झंडू बाम अब भी मेरे पीछे पीछे घूम रहा है। बड़ी मुश्किल से उसे चकमा देकर यहां तक आई हूँ।”

नंदिनी आश्चर्य से कामिनी की तरफ देखने लगी।

” तो इसका मतलब यह सारे मर्डर तुमने किए हैं। पर 1 मिनट बच्चियां तो डेढ़ साल से गायब हो रही थी, फिर ऋषिकेश रायसागर का मर्डर तो अभी हुआ है और यह सारी बातें जो जमना बता रही हैं यह तो डेढ़ साल पहले की है ।”

” हां बिल्कुल यह सारी बातें डेढ़ साल पहले की है!’

” तो उस समय तुमने किस साहित्यकार की बलि चढ़ाई कामिनी?”

” अपने ससुर राजऋषि रायसागर की!!!
    जमना से बात करके मुझे उसकी बातों पर विश्वास होने लगा था और मुझे लगा कि अगर यह बात सच है तो बच्चे पैदा करके मां बनने से पहले तो मुझे एक प्रसिद्ध साहित्यकार बनना है।
और बस मुझे एक अच्छे साहित्यकार बनने की धुन सवार हो गई।
मैंने जमना ताई से उस विधि को करने की गुजारिश की।
   जमना ताई जिसे असल में कोई मंत्र तंत्र नहीं आता था वह मुझे बुद्धू बनाते हुए तंत्र साधना में लग गई।
उस समय असल में मुझे भी समझ में नहीं आया था कि यह सच में कोई तंत्र सिद्धि पा चुकी हैं या नहीं मैं इनकी सारी बातें मानती चली गई।
इन्होंने जैसा जैसा कहा था मैंने वैसे ही किया। और ससुर जी की दवाइयो  में कुछ गड़बड़ी करके उनकी तबीयत बहुत खराब कर दी। जिस वक्त वह अस्पताल में भर्ती थे उस समय तंत्र साधना वाली कोई पुड़िया जमना ताई ने मुझे दी कि मैं इसे अपने ससुर जी को खिला दूं ।मैंने पूजा पाठ का प्रसाद कहकर उन्हें खिला दिया। उन्होंने खा भी लिया। और उसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी इत्तेफाक से उस वक्त उनके साथ कमरे में सिर्फ मैं थी।
   उनकी तबीयत बिगड़ी उन्होंने दो-तीन हिचकियां ली और उनकी आंखें पलट गई। वह भगवान को प्यारे हो चुके थे। मुझे लगा कि यह मेरी पहली बलि थी और इसके बाद अब मैं जरूर बहुत प्रसिद्ध लेखिका बन जाऊंगी।
  जमना ताई के कहे अनुसार किसी तरह से मैंने उनके गले की नस से सिरिंज में खून निकाल लिया और ले जाकर जमना ताई के हाथ में रख दिया। उन्होंने एक स्याही  की बोतल में उस खून की दो बूंद डाल दी और वह स्याही मुझे दे दी और कहा इससे लिखना तो अब तुम्हारी कहानियां सफलता के नए आयाम रचेंगी।

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उसके बाद मैंने अपनी किताब बेस्टसेलर का पहला भाग लिखा।
    बहुत डरते हुए मैंने वह भाग लिखा था। वह कहानी अपने आप में पूरी थी, लेकिन पाठकों को इतनी पसंद आई कि वह उस कहानी को बार बार अलग-अलग तरीकों से पढ़ना चाहते थे। प्रकाशक की जिद पर मैंने उस कहानी का अगला भाग लिखना तय किया।
मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात थी की, किताब का वह पहला हिस्सा मेरी सोच से कहीं ज्यादा फेमस हो चुका था। और उसी समय जमना ताई ने एक और तंत्र प्रयोग किया।
   उन्होंने एक बच्ची की बलि देने के बाद मुझे उसके खून से तिलक लगाया और कहा कि मेरी इच्छा जल्दी ही पूरी होगी।
    ये भी एक अजब इत्तेफाक था कि उस रात कई महीनों के बाद ऋषिकेश का मूड अच्छा था और उन्होंने मुझसे बहुत प्यार से बात की। हमारा कोई झगड़ा भी नही हुआ। और हम काफी समय बाद एक अच्छा क़्वालिटी समय साथ में बिता सके
मुझे उस वक्त लगा कि जमना ताई का तंत्र प्रयोग सफल हो रहा है।

   अब हर महीने वो एक बच्ची की बलि देती और उसके खून की बूंद मेरी स्याही की बोतल में टपकाने के साथ मेरे माथे तिलक भी कर  देती।
मुझे लगा जैसे मेरे ससुर अनुष्ठान  किया करते थे, ये मेरा अनुष्ठान था। जिसमे  मैं अपनी कहानियों और साथ ही अपने बच्चे के लिए बलि अनुष्ठान कर रही थी।
   हर महीने मैं कहानी का एक नया भाग लिख कर देती और प्रकाशित होते ही वो भाग बहुचर्चित हो जाता। मुझे लगने लगा कि ये बलियां ही मुझे सफलता दे रही हैं।
ऋषिकेश के स्वभाव में भी बहुत फर्क दिखने लगा था।
 

  ” तुमने सिया की जान भी क्या इसी लिए ली कामिनी?”

“नही !! मैं सिया को मारना नही चाहती थी। पर उस दिन जब मैं अपने यही तंत्र प्रयोग अपनी सहेली सुरेखा को बताने गयी थी तब वहीं पास बैठी सिया ज़ोर जोर से आवाज निकाल कर मुझे बहुत डिस्टर्ब कर रही थी। मैंने उसे एक दो बार मना करने की कोशिश की पर वह मेरी एक नहीं सुन रही थी।
उसी वक्त सुरेखा मेरे लिए चाय और नाश्ता लेने रसोई में चली गई और गुस्से में मैंने सिया का गला दबा दिया।
   वो बस 5 मिनट में एकदम शांत हो गयी। पहले तो मुझे अजीब सा लगा कि मैंने क्या कर दिया लेकिन अब तक मैं बलिया देखकर इस चीज की आदि हो चुकी थी। मैंने सिया की बॉडी को गोद में लिया और तुरंत लिफ्ट लेकर नीचे चली गई। मैंने अपनी कार की डिक्की में उसे डाल दिया और वापस ऊपर चली आई। चाय पीकर सुरेखा से विदा लेकर मैं सिया की लाश लिए  इसी बंगले में चली आई। और उसे लाकर जमना ताई के हवाले कर दिया। इसके पहले क्योंकि हर बार जमना ताई का बेटा ही बलि के लिए बच्चे का प्रबंध किया करता था। इस बार यह काम मैंने खुद किया था जमना ताई ने अपना प्रयोग किया और दो बूंद खून मेरी इंक पॉट में टपका दिया।
    
  ” शर्म नहीं आई कामिनी अपनी सहेली के बच्चे को मारते हुए?”

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   कामिनी ने नंदिनी की बात को अनसुनी कर दिया और अपनी ही रौ में आगे कहती चली गई….

” अब तक मेरी कहानी के 12 भाग प्रकाशित हो चुके थे और कुल जमा 10 बच्चियों को हमने बलि के लिए प्रयोग किया था। 10 बच्चियों के साथ एक मेरे ससुर जी कुल मिलाकर 11 बलिया देने के बाद मैंने 12 सफल भाग लिख लिए थे। तेरहवा भाग भी मैं लिख चुकी थी, लेकिन प्रकाशित करने से पहले मैं थोड़ा सा घबराई हुई थी। क्योंकि इतने सारे सफल भाग लिखने के बाद एक लेखक के मन में असफलता का डर बहुत बुरी तरह से बैठ जाता है। हमेशा उसे यही लगता है कि पता नहीं अगला हिस्सा पढ़ने वालों को कैसा लगेगा? बस यही डर मेरे अंदर भी बैठा हुआ था …और इसीलिए मुझे कहानी का आखिरी भाग लिखने में बहुत वक्त लग रहा था। मुझे उसका कोई अंत ही समझ में नहीं आ रहा था।
   मैं कभी कुछ लिखती कभी कुछ।
     कभी लिखा हुआ ड्राफ्ट फाड़ कर फेंक देती।
ऐसे ही दिन बीत रहे थे प्रकाशक मुझे फोन कर कर के जल्दी करने की सलाह दे रहा था, लेकिन मैं आगे बढ़ ही नहीं पा रही थी।
   ऐसे ही एक बुधवार की शाम थी, जब मैं अपनी टेबल पर बैठे लिखने की कोशिश कर रही थी। ऋषिकेश को क्लब जाना था उसने मुझसे पूछा मेरे मना करने पर वो नीचे उतर गया। मैंने खिड़की पर से देखा कि वह गेट तक गया और फिर वापस आ गया लेकिन उसी समय मेरे दिमाग में कहानी का प्लॉट तेजी से रेंगने लगा और मैं जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाती हुई लिखने लगी कि उसी समय कमरे से ऋषिकेश ने अंदर प्रवेश कर लिया…

” सुनो मैं सोच रहा हूं तुम भी मेरे साथ चलो।”

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  मैंने उसी वक्त उन्हें उनकी दवा के साथ एक और दवा दी जिससे उनकी धड़कन पर असर हो और वो ज़रा जल्दी नींद में चले जाएं… उन्होने एक बार फिर मुझे साथ चलने को पूछा…

” मैं नहीं जा सकती, मुझे लिखना है।

” हद करती हो कामिनी । जब देखो तब तुम्हें लिखना है। तुम्हारे लिखने का कोई टाइम टेबल है कि नही? और मैंने नोटिस किया है जब मैं घर में होता हूं तब जरूर तुम्हें लिखना होता है। अरे जब मैं घर में नहीं हूं तब क्या करती हो? उस समय क्यों नहीं लिखती?”

“उस समय अपने बॉयफ्रेंड के साथ गुलछर्रे उड़ाती हूँ। और कुछ?”

  एक झन्नाटेदार थप्पड़ कामिनी का गाल रंग गया..

“क्यों ऐसा क्या गलत कह दिया मैंने? तुम सवाल ही ऐसा करते हो। अरे खुद भी तो लेखक हो, तुम खुद इस बात को जानते हो कि सारा वक्त दिमाग इतना एक्टिव नहीं होता कि हम लिख सकें। लिखने के लिए एक समय चाहिए होता है, मूड चाहिए होता है। दिमाग भी तो चलना चाहिए या बस ऐसे ही कुछ भी लिखती चली जाऊँ।
   अगर कोई आम आदमी मुझसे यह सवाल करता कि जब मैं नहीं होता हूं तब क्या करती हो तो मुझे समझ में भी आता कि उसे नहीं पता है कि एक लेखक क्या होता है?  लेकिन जब एक लेखक ही दूसरे लेखक से यह सवाल करें तो मैंने जो जवाब दिया है वैसा ही जवाब मिलेगा।”

” देख रहा हूं आजकल कुछ ज्यादा ही ज़बान चलाने लगी हो।

” तुम्हारे हाथ चलाने से तो मेरी जबान जलाना ही बेहतर है।

ऋषिकेश का हाथ एक बार फिर उठा लेकिन इस बार उसने उसका हाथ पकड़ लिया।
   उसके हाथ को पीछे मरोड़ कर उसने उसे एक तरफ को जोर से धक्का दे दिया।
       मालूम भी नहीं चला कि धक्का इतना तेज था  कि ऋषिकेश संभल नहीं पाया और पलंग के पाटे से जाकर उसका सिर टकरा गया।
   उसे इतनी ज़ोर की चोट लगी कि ज्यादा खून बहने से वह वहीं बेहोश हो गया। मैंने देखा सामने जमना ताई का लड़का खड़ा था।

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” क्या जरूरत थी इन्हें इतनी जोर से धक्का मारने की अगर कुछ हो गया तो?”

” इनका जब मन करता है आपको मारतें है, पीटते हैं   और आप चुपचाप सह लेती हैं । इतना ही नही ये जब देखो आपकी कहानियों का भी मजाक बनाते हैं जैसे सिर्फ एक ये ही साहित्यकार हैं और बाकी सब गंवार। मुझसे आज देखा नहीं गया और मैंने उन्हें उनके किए की सजा दे दी। वैसे अगर इन्होंने आपकी कहानियां पढ़ी होतीं तो कभी आपके साथ ये सुलूक नही करते। हिम्मत ही नही होती।”

” पागल हो तुम ! अब क्या होगा , ये सोचा भी है? अब अगर यह होश में आए तो यह मुझे जरूर जान से मार डालेंगे ,क्योंकि इन्हें लगेगा तुमने मेरे कारण गुस्से में इन्हें  मारा है और यह तुम्हारे और मेरे बीच गलत शक करेंगे जबकि ऐसी कोई बात ही नहीं है।”

” मैं तो आपको दीदी मानता हूं। अगर यह आपके और मेरे ऊपर शक करेंगे तो मैं इनका गला दबा दूंगा।।”

” तो अभी ही दबा दो वरना एक बार होश में आने के बाद ये मुझे और तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।

   जमना ताई के लड़के ने वही किया जो मैंने कहा था उसके उन्हें मारने के बाद मैंने एक सिरिंज से उनकी भी खून की नस से खून की दो बूंद निकाल ली और मुस्कुरा कर अपनी इंक पॉट  में डाल ली। जानती हो उस इंकपोट की इंक से ही मैंने तेरहवाँ और आखिरी भाग लिखा था।और वह भी अपने पुराने भागों की तरह ही बहुत सफल रहा।”

  “, आपकी बाकी की सफलता की कहानी आप हमें और आराम से बैठकर सुना सकती हैं कामिनी मैडम जी।”

  शेखर की आवाज सुनते ही कामिनी चौक पर पीछे मुड़ी… सीढ़ियों पर शेखर और उसकी टीम खड़ी थी।

” चलिए हमारी पर्सनल ब्योमकेश बक्शी के कारण हमें भी आपकी सारी लाइव कमेंट्री सुनने को मिल गयी। और हमने सब कुछ रिकॉर्ड भी कर लिया है ,तो कामिनी जी आपने और जमना ताई ने जो यह गदर मचाया है इसका एक-एक हिसाब आपको थाने चल कर देना होगा।

” लेकिन आप यहां कैसे इंस्पेक्टर शेखर?”

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” भाई हम इतने भी बड़े झंडू बाम नहीं है। हमारी होने वाली शरीके हयात ने और हमने सुबह ही यह डिसाइड कर लिया था कि हम आप पर नजर रखने के लिए आप के कार्यक्रम में शामिल होंगे और हमारी प्यारी नंदू यहाँ बर्न्स में आएगी।
    नंदू हमेशा एक घड़ी पहनती है जिसमें कैमरा और वॉइस रिकॉर्डर मौजूद है। उसने यहां आकर कैमरा ऑन कर दिया था। जिसे मैंने अपने मोबाइल पर लिंक कर रखा है, मैं अपने मोबाइल की स्क्रीन पर इस घर का एक एक हिस्सा देख पा रहा था। जैसे ही नंदू उस तहखाने की सीढ़ियां उतरने लगी मैं आपके कार्यक्रम से उठकर निकल गया । मेरी टीम के 2 लोग उस वक्त भी वहां मौजूद थे।
   बस उसके बाद तो कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है ।क्योंकि अपनी गाड़ी में ड्राइव करते वक्त भी मैं जमना ताई और नंदू की सारी बातें सुन रहा था। जब आप ने एंट्री मारी तब भी मुझे सब कुछ पता था और आपने और मैंने लगभग साथ साथ ही इस घर में एंट्री की थी। लेकिन मैं पीछे छुप कर आ रहा था जिसके कारण आपने मुझे देखा नहीं।
  बस इतने सब में एक बात समझ नहीं आई कि जब आपको मालूम चल चुका था कि जमना ताई तंत्र-मंत्र कुछ भी नहीं जानती फिर आपने उसे रोका क्यों नहीं और बच्चियों का मर्डर होने क्यों दिया?”

” बहुत पहले बचपन में एक यूरोपियन हॉरर कहानी पढ़ी थी… डील विद डेविल…
बस दिमाग के किसी हिस्से में वह कहानी हमेशा से मौजूद थी।और मुझे लगता था कि शायद ऐसा सच होता होगा जैसा यूरोपियन कहानियों में लिखा जाता है कि शैतान को आप कोई भी चीज भेंट करके उससे मनचाही चीज वापस पा सकते हो।
मुझे भी लगा कि जमना ताई को भले तंत्र-मंत्र ना आता हो। लेकिन हो सकता है कि शैतान को हम जो भेंट चढ़ाते हैं उसके बदले में शैतान हमें सच में कोई फल दे दे। और मेरे साथ इत्तेफाक से हुआ भी ऐसा कि हर एक बलि के बाद मेरी किताब फेमस होती गयी। ऋषिकेश के स्वभाव में भी फर्क पड़ता गया और मुझे लगा शायद 10 महीने बीतने के बाद मुझे यह खुशखबरी भी मिल ही जाए। “

” हद है  मैडम!! एक पढ़ी-लिखी राइटर होने के बावजूद आप ऐसे अंधविश्वासों को हवा देती हैं.. इन पर खुद भी विश्वास करती हैं और इन्हें बढ़ावा भी देती हैं। आप का कुछ नहीं हो सकता ।
   वैसे कहना तो यह चाहिए कि अब आपका जो भी होगा थाने में ही होगा… तो चलिए हमारे साथ….

नंदिनी के पेट में अब भी एक सवाल  कुलबुला रहा था

” कामिनी बस मुझे यह बता दो कि तुमने ऋषिकेश की डेड बॉडी मेरी गाड़ी में क्यों डाली?”

नंदिनी के सवाल पूछते ही शेखर आंखें फाड़े नंदिनी की तरफ देखने लगा। क्योंकि उसे अब तक नहीं मालूम चला था कि नंदिनी की गाड़ी में किसी वक्त ऋषिकेश रायसागर की लाश घूम रही थी।

” हर सवाल का जवाब नहीं दिया जाता नंदिनी। कुछ कहानियां ऐसे ही छोड़ दी जाती है…
    अपने अनगिनत सवालों के साथ।
खुली और ऐसी कहानियों को ओपन एंड कहा जाता है… जिसमें पाठक अपनी मर्जी से अंत तय कर लेते हैं….
….. वैसे कहा जाए तो ऐसी कहानियों के कोई अंत होते भी नही…

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इति।

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Kavita
Kavita
1 year ago

क्या गजब लिखतीं है आप डॉक्टर साहिबा, बहुत खूब
कहानी के अंदर कहानी का भी अलग ही मजा आया
हमेशा ऐसे ही लिखती रहें

Siya
2 years ago

Nind uda di apne to jab tk kahani puri nhi hui m so nhi payi. Kya gajab lajawab fabulous awesome or jitna b bolu kam h mam apki lekhni super hai. Aise hi majedar kahani likhte Rahe. Apki Kalam bus Jeevan bhar Aise hi jadu karti Rahe. Subhkamnaye

Shushma Priya
Shushma Priya
2 years ago

ग़ज़ब मतलब ग़ज़ब…. पूरी कहानी एक साथ पढ़ गई मैं. ग़ज़ब की पर्तें थी, उलझती सुलझती सी. मज़ा आ गया पढ़कर. ऐसे ही लिखती रहें.