Bestseller-1

     The
            Bestseller … -1

                         
                          गुमशुदा

     वह गहरी काली सुनसान सी रात थी…… बारिश तेजी से हो रही थी… बीच-बीच में बादल बिजली की चमक अंधियारे रास्ते में उजाला कर जाती थी।
   
      वो तेज़ी से अपनी लैंड रोवर की स्टीयरिंग को इधर उधर घुमाती गाड़ी भगाए जा रही थी।  बारिश इतनी तेज़ थी कि हाथ को हाथ न सूझे। उसे भी इसी कारण रास्ता देख पाने में तकलीफ ज़रूर थी,बावजूद उसकी स्पीड में कोई कमी नही थी।
  
      पुलिस स्टेशन में बाहर के कमरे में ही बैठे पुलिसकर्मी टीवी पर कोई न्यूज़ देख रहे थे। पिछले कुछ समय से शहर से लगभग 5 साल से 15 साल के बीच के उम्र के बच्चे गायब हो रहे थे और यह सिलसिला लगभग पिछले एक डेढ़ साल से  से चल रहा था। अब तक उसी शहर के लगभग ग्यारह बारह बच्चे गायब हो चुके थे। कौन सा “बच्चा तस्कर” गिरोह इसमें शामिल है अब तक उनका कोई सुराग हाथ नही लगा था।

न्यूज़ के बीच में अचानक ही किसी फिल्म का ट्रेलर आया और गाना बजने लगा….

  भीगी सी भागी सी मेरे बाजुओं में समाई
  जोगी सी जागी सी कोई प्रेम धुन वो सुनाए…..

  उसी वक्त अपने केबिन का दरवाजा खोले इंस्पेक्टर शेखर बाहर चला आया …-“कोई और नई खबर?”

“नहीं साहब! सब कुछ वही पुराना चल रहा है।”

“आज कोई एफ आई आर?”

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“नहीं साहब! आज तो कोई केस नहीं आया!” हवलदार इंस्पेक्टर शेखर को बता ही रहा था कि तभी पुलिस थाने की सीढ़ियां चढ़ती वो भीगती भागती सी अंदर दाखिल हुई।
   
  उसकी उम्र यही कोई 30 -31 के बीच की होगी! उसने ब्लू डेनिम के ऊपर व्हाइट टी शर्ट पहन रखी थी। और उसके ऊपर एक लंबा सा श्रग डाला हुआ था। गोरे रंग के साथ आंखें कुछ भूरी छोटी सी थीं। और बाल कंधों तक कटे हुए थे और कुछ बाल उसके माथे पर बिखरे हुए थे।
    बारिश में भीगने से बाल माथे पर जगह-जगह चिपक गए थे जिन्हें हाथों से झाड़ती वह अंदर चली आयीं। उसके आते ही गुशी की एक तेज़ खुशबू का झोंका भीतर धंसता चला आया।

“इंस्पेक्टर साहब मुझे एफ आई आर लिखवानी है।”

“जी बिल्कुल! आइए वहां वो साहब बैठे हैं। वहां पर लिखवा दीजिए।”
 
   वह औरत शेखर की तरफ गहरी आंखों से देखते हुए उस दूसरी टेबल पर चली गई।
       एक नजर देखने पर वह सुंदर मालूम पड़ रही थी।   लेकिन बहुत ध्यान से देखने पर भी शेखर उसे पहचान नहीं पाया था।  शेखर मुड़कर अपने केबिन की तरफ जाने लगा कि उस औरत की आवाज उसके कान में पड़ी…-” सर मेरा नाम कामिनी है। कामिनी ऋषिकेश रायसागर! और मेरे पति का नाम है ऋषिकेश रायसागर।  सर वो दो दिन से लापता है। आज उन्हें घर से निकले हुए 48 घंटे बीत चुके हैं। लेकिन अब तक उनका कोई पता ठिकाना मुझे नहीं मिला। यह रही उनकी तस्वीर और यह उनका ड्राइविंग लाइसेंस।”

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” आधार कार्ड भी लेकर आई हैं आप?”
   हालांकि शेखर के अलावा वहाँ मौजूद हर एक आदमी उस औरत को पहचानता था।

” हां जी ले कर आई हूं… यह रहा।”

   गुमशुदगी की रिपोर्ट सुनकर शेखर का माथा ठनका। अब तक तो बच्चे ही गुम रहे थे अब आदमी भी ? लेकिन फिर वह अपने केबिन में चला गया। उसने हवलदार को बुलाकर अपने लिए चाय के लिए बोला और कुछ अखबार खोलकर पढ़ने बैठ गया। हवलदार उसके पास चाय लेकर आया और चाय रखकर बाहर बैठी उस औरत के बारे में बताने लगा…;” साहब आपने पहचाना उसे?

” किसे मुरारी?”

” सर गिरधारी !”

  हवलदार आंखें मटका कर बाहर बैठी औरत के बारे में शेखर को पूरी तन्मयता से और रस ले ले कर बताने लगा…..

” यह कामिनी है। बहुत बड़ी लेखिका । सर मारधाड़, डरावनी, क्राइम जादू सभी तरह की कहानियां लिखती है साहब। और क्या गजब का सस्पेंस बनाती है कि पढ़ कर मजा ही आ जाता है।”

“तुम पढ़ते हो इसे?”

नहीं साहब हमारे पास इतना समय कहां हो पाता है? हमारी जोरू पढ़ती है,  हमने उसी से सुना है कि यह बहुत अच्छा लिखती है।”

“और क्या सुना है इसके बारे में?”

“साहब ज्यादा कुछ तो नहीं बता सकते पर इतना जानते हैं कि ये अभी एक बहुत मतलब बहुत ही गज़ब कहानी लिख रही है। उसके बारह भाग प्रकाशित हो चुके हैं साहब और तहलका मचा चुके हैं। अगले भाग के लिए लोग ऐसे टकटकी लगाए हैं कि क्या बताएँ।
अभी तीन साल हुए इन्होंने शादी कर ली साहब। उनके पति बहुत जाने-माने साहित्यकार हैं । ऋषिकेश बाबू। और सुनने में तो यह आया है कि उनसे 30 साल बड़े हैं।”

“30 साल बड़े!!!  यार वो पति कहां से हुआ ? यह तो इसकी बाप की उम्र का हो गया?”

” फिर ? सुनने में तो आया है कि इनके पिताजी की उम्र इनके पति से दो साल कम ही है।

“क्या बकवास कर रहे हो यार दुधारी !”

“सर गिरधारी नाम है सर।”

“हां हां गिरधारी।”

“हम सही कह रहे हैं सर! सुनने में यही आया है कि उन साहित्यकार महोदय जी से शादी करने के बाद इन मैडम की पहली किताब छपी और उसी साल में इन्हें दो-तीन साहित्य के पुरस्कार भी मिल गए और सर एक बात और भी सुने हैं…..

  बाहर से उस औरत की रोने की तेज तेज आवाजें अंदर आने लगी जिससे घबराकर शेखर बाहर निकल आया…-” मैडम आप यह पानी लीजिए।”
उस औरत ने पानी का गिलास उठाया और एक घूंट में सारा गिलास खत्म करके वापस रख दिया।

“आइए आप इधर मेरे केबिन में आराम से बैठ जाइए।”
   वो  उठी और शेखर के पीछे धीमे कदमों से चलती हुई उसकी केबिन में दाखिल हो गयी।

   “अब तफ़सील  से बताइए आपके पति कहां गए थे? क्या आपको उन्होंने कुछ बताया है ? और  जितनी भी उनसे जुड़ी जानकारी वाली बातें आप को मालूम हों आप सारी की सारी मुझे बता सकती हैं।”

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“जी!! हमारे पति हर बुधवार को क्लब जाया करते हैं! उस शाम भी वह क्लब जाने के लिए निकल गए!

“उन्होंने आपसे साथ चलने के लिए नही पूछा?”

  ” पूछा था लेकिन हमें अपनी कहानी पूरी करनी थी इसलिए हम नहीं गए।”

    “अच्छा आप राइटर हैं?  “
शेखर साफ सफेद झूठ बोल गया। उस औरत ने शेखर को अजीब नजरों से देखा, जैसे कह रही हो कि मैं इतनी बड़ी सेलिब्रिटी हूं, और मुझे तुमने पहचाना तक नहीं? पर शेखर  उसके चेहरे के भावों को नज़रंदाज़ कर अपने बालों के आसपास उड़ते मच्छर को भगाता रहा।

” जी क्या वक्त हो रहा था जब आपके हस्बैंड क्लब के लिए निकले?”

“लगभग सात बज रहे थे।”

“इतनी देर से क्लब जाते थे, तो क्या डिनर कर के जाते थे ?

“नहीं! डिनर तो हम रोजाना  साथ में ही करते थे और हमारा डिनर का टाइमिंग है रात में दस बजे। ज्यादातर सर कहीं भी जाएं वह नौ बजे तक घर आ जाया करते थे।”

“तो इस दौरान आप क्या किया करती हैं घर पर? मेरा मतलब घर के काम? खाना वाना ..?

  उसने शेखर की बात अधूरी ही काट दी…

   “जी मैं लिखती हूं। अभी एक पब्लिशर के लिए एक नॉवेल पर काम कर रही हूं।”

  “बहुत बढ़िया!!! तो क्या लिखती हैं आप? मेरा मतलब है जॉनर क्या है आपका?”

     “जी वैसे तो मुझे क्राइम्स थ्रिलर लिखना पसंद है, कुछ हॉरर भी लिख लेती हूं।  लेकिन इन्हें सामाजिक कथाएं पसंद है, इसलिए अभी जिस पब्लिशर के लिए लिख रही हूं उसके लिए मैं फेंटेसी हॉरर स्टोरी लिख रही हूं।”

      शेखर का सर घूम गया!  इन राइटर महोदया को क्राइम लिखना पसंद है । इनके पतिदेव को सोशल पसंद है। लेकिन यह फेंटेसी लिख रही है?  यह माजरा क्या है यह तो पूरा कॉकटेल बना कर छोड़ेगी कहानियों का?
शेखर ने अपने मन के भाव अपने चेहरे पर नहीं आने दिया। उसके लिए कहानियां पढना वैसे भी सिरदर्द था। उसने उससे आगे पूछा …-“फिर बताइए आप क्या कर रही थी?”

” जी इनके जाने के बाद मैं अपने लाइब्रेरी में चली आई।  ऊपर मेरी लाइब्रेरी में मेरी टेबल के पास बैठकर मैं लिखने लगी। मेरी राइटिंग टेबल खिड़की से लगी रखी है सो वहाँ  से मुझे नीचे का नजारा नजर आ रहा था।
     इन्होंने अपने ड्राइवर से कुछ कहा और गाड़ी क्लब की जगह दूसरी तरफ मोड़ ली।  मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, पर मुझे लगा यह शायद मिस्टर जोशी जी को लेने जा रहे हैं।  वह भी इनके साथ अक्सर क्लब जाया करते हैं।  जोशी जी पहले सेना में थे रिटायरमेंट के बाद से यहीं बस गए हैं। “

  “ओके !!! तो मतलब आप हंड्रेड परसेंट श्योर नहीं है कि आपके हस्बैंड जोशी को साथ में लेकर गए या नहीं?

   “जी नही। मैं हंड्रेड परसेंट श्योर नहीं हूं।  बस यह मेरा एक अनुमान था।”

  “ओके!! तो उस रात आपके हस्बैंड वापस नहीं आए तो आप अगली सुबह पुलिस स्टेशन क्यों नहीं आई?”

  ” एक्चुली बहुत बार ऐसा होता है, कि मेरे हस्बैंड क्लब से सीधा घर वापस नहीं आते।  वह अपने दूसरे घर पर चले जाते हैं। और फिर वह पूरा दिन वहां रहकर उसके अगले दिन घर वापस आते हैं।”

        ” दूसरा घर ? ओके!! मतलब उनका एक दूसरा घर भी है! तो क्या आपने उस दूसरे घर के लोगों से बातचीत की? उनसे पूछा? एक बात और बताइए कि उस दूसरे घर में आपके हस्बैंड के साथ और कौन-कौन रहता है?”

   ” उस दूसरे घर में मेरे हस्बैंड के फादर यानी कि  बेहद जाने-माने साहित्यकार राजऋषि रायसागर रहा करते थे। अभी ढाई साल पहले ही वह गुजर गए!”

   “अच्छा तो अब वहाँ कोई नहीं रहता?”

    “रहते हैं ना! वहां अब भी मेरे पति के छोटे भाई और उनका परिवार रहता है। घर पर ढेर सारे नौकर चाकर हैं।  और वहीं मेरे पति की पहली पत्नी और उनके दोनों लड़के भी वही रहते हैं।”

     ” एक मिनट! एक मिनट! आपके पति पहले से शादीशुदा हैं?”

     “जी !”

   “ओके तो फिर आपने कब उन्हें फोन किय?”

  “फिर उस रात वह क्लब से वापस नहीं आए तो मुझे लगा वह अपनी पहली पत्नी के घर पर चले गए हैं…. इसलिए मैंने ज्यादा खोजबीन करना सही नहीं समझा और मैं अपनी कहानी लिखने लग गई…..

******

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       “सुहास यार इसी बिल्डिंग में तेरा ऑफिस है। 5th फ्लोर पर लिफ्ट लेकर तू उपर चला जा। वहां तुझे सारा मिलेगी । सारी बातें समझा देगी कि तुझे क्या कहा कैसे सेट करना है।”

“ओके! तो तू कब आएगा ऑफिस?”

“आज मार्केटिंग का थोड़ा काम है। तेरे लिए नया सेटअप तैयार करना है ना। उसके लिए केबल्स और बाकी समान लेने जाना है मुझे। तो मैं आधे घंटे में आता हूं तब तक तू चल कर अपना केबिन देख, और सारी सेटिंग कर ले तू अपने हिसाब से जगह देख लेना।”

“ठीक है भाई जल्दी आ फिर।”

सुहास बिना लिफ्ट लिए सीढ़ियों की तरफ आगे बढ़ गया। लिफ्ट में बैठे लिफ्टमैन ने उसे इशारा भी किया। पर उसने मना करके सीढ़ियां पकड़ ली। सुहास को शुरू से ही लिफ्ट में आने जाने में डर लगा करता था। उसे कलोस्टोफोबिया था।  लिफ्ट के अंदर बंद होते ही उसे घबराहट सी होने लगती थी। और इस घबराहट में उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगती थी। और इसलिए दसवां माला भी हो तो भी वह सीढ़ियों से ही जाया करता था । असल में पुरानी दोनों नौकरियां छोड़ने का कारण भी यही था। क्योंकि पहली नौकरी में जहाँ उसका ऑफिस 25वें माले पर था। तो वहीं दूसरी दफा ऑफिस इक्कीसवें माले पर।  और इतना लंबा रोज-रोज सीढ़ियां चढ़ना उतरना उसके लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा था।

   सुहास एक हैकर था जो लीगली इस काम को किया करता था। सॉफ्टवेयर में इंजीनियरिंग करने के बाद उसने सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी अमेरिका से कुछ एडवांस कोर्स किए हुए थे। और इसीलिए इंडिया वापस आते ही उसके सामने थाली पर नौकरियां छप्पन भोग सी परोसी मिली उसे।  लेकिन वह बंदा अपनी सुविधा अनुसार ही नौकरी चुना करता था। यह तीसरी नौकरी थी जहां पांचवें फ्लोर पर ऑफिस होने के कारण ही उसने इस नौकरी को मंजूरी दे दी थी।
   2 दिन पहले ही उसका इंटरव्यू हुआ था और इंटरव्यू पैनल उससे बातें करके उससे इस कदर प्रभावित हुआ कि उन्होंने अगले दिन ही उसे जॉइनिंग पर बुलवा लिया था। हालांकि उसने अपने घर जा कर सामान लेकर आने के लिए 1 दिन और मांग लिया था इसलिए आज के दिन वह ज्वाइन करने आया था।
    5वें फ्लोर पर पहुंच कर उसने देखा दाहिने साइड में बड़े बड़े अक्षरों में ग्रीन डॉट यानी उसका नया ऑफिस नजर आ रहा था । कांच के उस बड़े से दरवाजे को खोलकर वह भीतर दाखिल हुआ। एक गोलाकार रिसेप्शन डेस्क के पीछे बैठी लड़की ने मुस्कुराकर उसका अभिवादन किया। वह जाकर उसके पास खड़ा हो गया। उसने अपने लैपटॉप बैग से अपना जॉइनिंग लेटर निकाला और उसके सामने रख दिया। उस लड़की ने अपने चश्मे को ठीक करते हुए उसका जॉइनिंग लेटर देखा और उसे ध्यान से पढ़ने लगी …;” पी सुहास श्रीराम!!  आप वहां उस गलियारे में अंदर घुस जाईये। तीसरे नंबर पर लेफ्ट हैंड के डोर को नॉक कीजिएगा आपको अंदर बुलवा लिया जाएगा। आपकी जॉइनिंग वही होनी है।”

‘हां’ में सिर हिला कर उसे “थैंक यू” बोल कर वह आगे बढ़ गया। वह लड़की उसके अजीबोगरीब हुलिए को देखते हुए सोच में पड़ गई कि इतने बड़े ऑफिस में जो इंटरनेशनल लेवल पर क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन से जुड़ा हुआ है वहां यह अजीब सा लड़का क्या कर रहा है?

    घुटनों तक की अपनी ब्राउन कार्गो पैंट कि हर जेब में कुछ ना कुछ रखे हुए और अपनी जेनिथ की झक्क सफेद टीशर्ट के पीछे लैपटॉप बैग को टांगे हुए कंधे तक लंबे घने बालों और बेतरतीब दाढ़ी वाला सांवला सलोना सा  वह दक्षिण भारतीय लड़का अब उस तीसरे नंबर के कमरे के बाहर खड़ा था…” क्या मैं अंदर आ सकता हूं।”

   “यस कम इन” अंदर से एक छोटा सा जवाब सुनकर उसने दरवाजा पूरा खोल दिया । टेबल के पीछे रिवाल्विंग चेयर पर बैठी लड़की सारा उसे देख कर खड़ी हो गई…-” वेलकम सुहास! आइए आज आपकी जॉइनिंग है और आपकी जॉइनिंग मैं हीं लेने वाली हूँ।
    आपने अब तक जितना देखा वह हमारे ऑफिस का एक हिस्सा था। इस गलियारे में कुल जमा दस कमरे हैं जो आमने-सामने पांच पांच की कतार में बने हुए हैं । यहां से निकल कर हम एक हॉल में जाएंगे। वहाँ हॉल में छोटे-छोटे क्यूबिकल्स हैं जिनमें अलग-अलग लोगों ने अपना अपना सेटअप डाला हुआ है। हॉल में  चारों तरफ से कांच की खिड़कियां है जो काफी बड़ी-बड़ी हैं।  आप आराम से पूरे हॉल को देखकर अपने सेट करने के लिए जगह देख सकते हैं आइए मैं आपको वहाँ में ले चलती हूं।”

  सारा सुहास को लेकर उस हॉल में चली आई। हॉल बहुत बड़ा था और उसकी एक तरफ की पूरी दीवार सिर्फ कांच की बनी थी जहां अलग-अलग लोगों के सेटअप लगे हुए थे। सबसे किनारे पर एक क्यूबिकल खाली था। सारा सुहास को लेकर वहां चली आई….-” यह सबसे किनारे का है, इसलिए आप आराम से यहां बैठ कर अपना काम कर सकते हैं।”
     फिर उसने उस कांच की दीवार के पास जाकर उस खिड़की को खोल दिया…-” वह देखिए सामने वह इमारत नजर आ रही है?”

    सुहास ने हां में सर हिलाया।

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    “जैसा कि आप जानते हैं सुहास हम इस वक्त जिस एरिया में है यह साइबरहब कहा जाता है। इस शहर की सारी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी यहीं पर आसपास ही हैं। वह सामने 19 मंजिला बड़ी सी बिल्डिंग आपको नजर आ रही है। इस बिल्डिंग का नाम है ओशेरी।  इसमें भी छोटी-बड़ी कई मल्टीनेशनल कंपनीयो का ऑफ़िस है जो यहाँ काम करती हैं। इनमें से एक कंपनी है रेनबो मल्टीनेशनल। रेनबो काफी बड़ा नाम है, बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है। यूरोप अमेरिका कोरिया चाइना जापान जर्मनी बर्लिन कोई ऐसी जगह नहीं है जहां इनके ऑफिस नहीं है। अभी कुछ सूत्रों से हमें जानकारी मिली है कि कुछ यंगस्टर लड़के और लड़कियां जो कई टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के लिए काम करते हैं वह फिलहाल रेनबो में घुस गए हैं। और यह अभी से नहीं कई सालों पहले से इनकी वेब नेटवर्किंग चल रही है। हमें यहां से उन पर नजर रखनी है।
आज का दिन तो सुहास आप यहां बैठकर उस ऑफिस और उस बिल्डिंग की सारी डिटेल्स निकाल लीजिए। जिससे आपको पता चल जाए कि किस मंजिल पर कौन सा ऑफिस है? उसके बाद कल परसों में आपको रेनबो ऑफिस भेजने का कोई उपाय किया जाएगा! वहां जाकर आप एक बार देख लीजिएगा कि आप कहां कैसे क्या सेट कर सकते हैं? जिससे आप उनके सिस्टम को यहां बैठे-बैठे हैक कर सकें! एक बार आपने उनके सिस्टम को क्रैक कर लिया उसके बाद आप उनके सारे एंप्लाइज की डिटेल्स यहां बैठकर हमें निकाल कर दे सकते हैं। और आपको अच्छे से समझ में आ जाएगा कि उनमें से कौन हमारे काम के हैं जिन्हें चावलों से कंकर की तरह चुनकर निकाल फेंकना है। और एक बात ये लोग पूरे ऑफिस से ऐसे घुले मिले हैं कि बिना इनका डेटा निकाले हम उन्हें पहचान नही सकते। कम्पनी भी इस बारे में कुछ नही जानती ।”

सुहास ने हां में सिर हिलाया और खिड़की से बाहर देखने लगा….. सुहास को उधर देखते छोड़कर सारा वहां से अपने केबिन की तरफ जाने लगी…-” तुम्हारे लिए कुछ भेजूं? कॉफी और एनीथिंग एल्स?”

  ” कॉफी भेज दीजिए, वन सिंगल फिल्टरकॉफी!”

     हाँ में सिर हिलाकर सारा वहां से चली गई । सुहास ने अपने लैपटॉप बैग खोला और कुछ बहुत छोटा सा लेंस जैसा कुछ निकाला। उसने इधर उधर देखा की कोई उसे देख तो नही रहा फिर अपने चश्मे को निकाल कर उसने उसकी एक तरफ के ग्लास के पास उस पारदर्शी से लेंस को फिट किया और फिर चश्मा आंखों पर लगाकर खिड़की पर खड़ा हो गया।
   सारा ने उसे बताया था की चौथी मंजिल पर रेनबो का ऑफिस है । वह ध्यान से वहां देखने लगा…

  लेकिन यह क्या दिख रहा था सामने?

    उसे तो यह सॉफ्टवेयर ऑफिस नजर ही नहीं आ रहा था! उसने अपनी आंखों पर जोर देना शुरू किया और धीरे-धीरे उसे सब कुछ साफ- साफ नजर आने लगा।
    यह किसी बहुत बड़े पुराने से हॉस्पिटल का एक छोटा सा हिस्सा नजर आ रहा था। उसे नर्सेज केबिन नजर आ रहा था जहां पर तीन-चार नर्स बैठी हुई कुछ पेपर वर्क करने में लगी थी। एक नर्स फोन पर बात कर रही थी। कुछ मरीज इधर उधर चलते फिरते नजर आ रहे थे। एक तरफ एक हॉल नजर आ रहा था जहां परदों की ओट की गई थी और बहुत से मरीज अलग-अलग मशीनों से लैस सो रहे थे। देख कर ऐसा लग रहा था कि यह किसी आईसीयू का इनडोर है। पूरा हॉल अंधियारा सा था। एसी हॉल होने के कारण कोई खिड़की दरवाज़ा नही खुला था। कुछ मरघिन्नी सी रोशनी वहाँ जलबुझ रही थी जिससे माहौल और भी मातमी हो रहा था।
  नर्सेज स्टेशन के दूसरी तरफ एक लंबा सा कॉरिडोर था जिसमें बहुत सारे कमरे एक दूसरे के सामने बने हुए थे। उन कमरों को देखती उसकी नजर आगे बढ़ती जा रही थी। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि वो खुद उस अस्पताल में मौजूद है। उसके आस पास से होकर जाने वाले मरीज़ कुछ अजीब से पीले लग रहे थे और हद से ज्यादा कराह रहे थे।
   वो आगे बढ़ रहा था कि कॉरिडोर के अंत में बना एक कमरा अचानक खुला और एक दुबला सा लड़का कमरे से लगभग भागता हुआ सा निकला और उस तक आकर रुक गया। चेहरे पर अजीब पीलापन और मुर्दनगी लिए वो खाली खाली आंखों से उसे घूर रहा था। आँखे जैसे किसी कोटर में धंसी हुई थी।। आंखों के नीचे गहरा कालापन था। बाल अजीब से उलझे हुए थे कि तभी उसने अपने एक हाथ से अपने बालों को पकड़ा और खींच लिया,बिना किसी ज़ोर ज़बरदस्ती के उसके सिर के कुछ बाल उसके हाथ में आ गए और उसने वो हाथ आगे बढ़ा दिया। सुहास उसे देख कुछ समझ पाता कि वो लड़का कॉरीडोर के दरवाज़े की तरफ खींचता चला गया। उस दरवाज़े से उसके चिपकते ही उसके पेट से खून की धार बहने लगी।
   सुहास ने उसे पकड़ने के लिए जैसे ही उसकी तरफ भागना शुरू किया, कॉरिडोर का दरवाज़ा खुला और वो लड़का उस चौथी मंजिल से नीचे गिर पड़ा।

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       चौन्क कर सुहास ने आंखें मली और एक बार फिर ध्यान से देखने की कोशिश करने लगा कि उसकी आंखों के ठीक सामने आकर वो वापस खड़ा हो गया… “प्लीज़ हेल्प मी। मुझे बचा लो वरना मैं मर जाऊंगा।”
   
      सुहास को एकदम से ऐसा लगा कि वह लड़का उसके चश्मे के ठीक सामने खड़ा है। सुहास उसे अपने हाथ से दूर करने की कोशिश करने लगा। उसने हाथ बढ़ा कर उस लड़के को एक तरफ करने की कोशिश की तभी उस लड़के ने सुहास के कंधों पर अपना हाथ रख दिया। कलबला कर सुहास ने उसका हाथ झटकने को अपना हाथ उठाया कि देखा उसके टेबल पर कॉफी रखकर चपरासी खड़ा था…-” साहब आपकी कॉफी! फिल्टर कॉफी बनाने बोला था ना आपने इसलिए टाइम लग गया। मैं दो बार आपको आवाज़ दिया आप नही सुने तभी आपको टच किया साब। “

   सुहास के माथे पर पसीने की बूंदें छलक आई थी। उसने गहरी सांस भरी और बाहर की तरफ देखा..
अब ना वह लड़का नजर आ रहा था ,और ना ही वह अस्पताल की डोरमेट्री।  उसने अपना चश्मा उतार के नीचे रखा और अपनी कुर्सी पर बैठकर कॉफी की सिप लेने लगा….

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  कॉफी पीते पीते भी उसका दिमाग उसी तरफ दौड़ रहा था कि आखिर कुछ देर पहले उसे जो नजर आया था वह क्या था?  क्या एक बार फिर उसे वही उलझने सताने लग गई थी?  क्या वह अब तक अपनी उन परेशानियों से मुक्ति नहीं पा सका था।
   पर उन तांत्रिक बाबा ने तो कहा था कि जब तक गले में ये काला धागा बंधा रहेगा तब तक तुम्हें आत्माएं आकर परेशान नही करेंगी।
    बेचैनी से उसका हाथ अपने गले पर चला गया… ये क्या वहाँ तो कोई धागा नही था। मतलब कल जब वो घर पर सामान लेने गया था तब ऊंचाई पर की उस खील में फंसकर उसका धागा ही खुल कर गिर गया था। जिस तरफ उसने व्यस्तता के कारण ध्यान नही दिया था।
  
  आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों होता था कि इस संसार से गए हुए लोग उससे मिलने जब तब चले आया करते थे। उसने परेशान होकर अपने लैपटॉप बैग से एक गोली निकाली और एक सांस में पानी की बोतल के साथ गोली को गटक गया। कॉफी लेकर उसने एक सिप ली और आंखें मूंद कर अपने सिर को कुरसी के पीछे टिका दिया।

क्रमशः

aparna…..


 
   

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CHANDER MITTAL
CHANDER MITTAL
1 year ago

प्रेम विषय पर लिखने के लिए मशहूर डॉक्टर साहिबा ने हॉरर भी लिखा ये शायद मुझे नहीं पता था ! अपने जीवन में कभी हॉरर नहीं पढ़ा ! पर अब पढ़ना पड़ेगा ! कहानी सस्पेंस थ्रिलर के साथ साथ हॉरर भी है, एक मिक्स वेज या दुसरे शब्दों में कहें तो कॉकटेल कहानी है ! एक मशहूर लेखिका, उम्रदराज पति, अब इस उम्र में गायब होकर कहाँ जायेगा! दूसरी पत्नी के पास तो है नहीं ! देखते हैं कहाँ मिलता है ! और आप सुहास बाबू जैसा खतरनाक काम करते हो वैसे ही खतरनाक सपने भी आएंगे ! पहले ही भाग से मोह लिया कहानी ने तो ! पर दिल कड़ा करके पढ़नी ही पड़ेगी क्यूंकि अब उत्सुकता हो गयी है ! भाई को कुछ हो गया तो इलाज भी डॉक्टर बहन को ही करना पड़ेगा….

Jayshree Bhargava
Jayshree Bhargava
1 year ago

मैं आपको बात नहीं सकती डॉक्टर साहिबा जब ये कहानी मैंने पहली बार पढी तब उसे समय कामिनी में मुझे आपकी झलक दिखी क्योंकि जिस एक्सपर्टीज के साथ कमीनी ने अपनी कहानी लिखी थी वह सारी खूबियां मैं हमेशा आप में देखती हू, कहानी सिर्फ मेरी फेवरेट ही नहीं बल्कि मेरे दिल के बहुत करीब है ।
और यह मेरी दिली ख्वाहिश है कि आपको अपनी कहानियों के लिए बेस्ट सेलर नेशनल अवार्ड मिले 🙏🏻🙏🏻

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Very nice kahani bahut bahut pyari

Suman Thakur
Suman Thakur
2 years ago

Very nice story 👏👏👏

Raj Kumar
Raj Kumar
2 years ago

Intresting start 💐💐💐💐💐