अपराजिता -115

यज्ञ की तबियत में सुधार होने लगा था… लेकिन कुसुम को उससे बात करने का मौका ही नहीं मिल पा रहा था..
वो जितना ही उसके आगे पीछे घूमती, यज्ञ उतना ही उसे बच के निकल लेता..
यज्ञ नीचे के कमरे में ही था, कुसुम ऊपर अपने कमरे में..
कुसुम की रात आँखों ही में कट रही थी, चाह कर भी उसे नींद नहीं आ रही थी.. उसकी आँख लगी भी तो भोर के समय..
गुलाबी सी ठण्ड थी, उसने रजाई में खुद को लपेटा और गहरी नींद में सो गयी..
उसने सोचा था सुबह जल्दी उठेगी और यज्ञ के पास पहुँच जाएगी, क्यूंकि नौ बजे से ही उसके मिलने जुलने वाले आना शुरू कर देते थे। कोई अपनी फरियाद लिए आ रहा, कोई कचहरी का मामला ला रहा, किसी की ज़मीन ज़ब्त हुई पड़ी, तो किसी के खेत के रास्ते नहर निकालने का आदेश आया पड़ा.. इस तरह की कइयों समस्याओ का एक ही समाधान था यज्ञ सिंह परिहार..
और एक बार फरियादी या यज्ञ के मित्रों की टोली पहुँच गयी उसके बाद यज्ञ को वहाँ से उठा कर अन्दर लाना कठिन था.. उसके बाद तो यज्ञ का नाश्ता चाय सब बाहर ही पहुँचता था..।
बस यही सब सोच कर कुसुम सुबह जल्दी जाग कर अपने पति के लिए नाश्ता बनाना चाहती थी…
लेकिन भोर के वक्त उसकी आँख लग गयी.. और वो चूक गयी..
उसकी आँख खुली… उसने करवट बदली और घडी पर नजर डाली… सुबह के नौ बज चुके थे..।
वो एक छलांग लगा कर बिस्तर से कूद पड़ी और अगली छलांग में वो बाथरूम के अंदर थी..
फटाफट नहा कर तैयार होकर वो नीचे भागी, लेकिन अब तक दस बज चुके थे..।
घर भर में सब का नाश्ता होकर चूक गया था.. यज्ञ बाबू अपनी पंचायत लगाए बाहर बैठे थे..
वो हांफती दौड़ती रसोई में पहुंची.. वहाँ दोपहर के खाने की तैयारियां शुरू हो गयी थी..
उसकी सास ने पलट कर देखा और हल्के से मुस्कुरा उठी..
“आ गयी बहु.. आज जरा देर कर दी तुमने.. आओ नाश्ता कर लो.. सबने खा लिया !”
“हाँ खा लो.. अगर यहां सुविधा ना हो तो ऊपर तुम्हारे कमरे में भिजवा देते हैं.. !” काकी सास ने जली हुई सी बात कह दी…
और कोई दिन होता तो कुसुम कुमारी पलट कर इससे भी ज्यादा जलता हुआ जवाब देने से पीछे नहीं रहती, लेकिन उसने गुस्सा पी लिया..।
काकी सास तो उससे वैसे ही खार खायी बैठी रहती थी, एक बार कुसुम की सास ने अकेले में बड़े प्यार से उसे समझाया भी था..
“शकुन की लड़कियों का ब्याह हो गया है, एक ही लड़का है वो भी गलत आदतों का शिकार हो रखा है.. बस इसीलिए दुखी रहती है बेचारी.. कभी कुछ उल्टा सीधा कह दे तो दिल पर मत लेना बहु.. उसकी बात एक कान से सुन कर दूसरी से निकाल देना.. !”
इस बात पर कुसुम बिना कुछ कहे चुप रह गई थी लेकिन अब जब से उसमें बदलाव आया था, वो बात बात पर उलझ पड़ने वाली कुसुम नहीं रह गयी थी….
उसे याद आ गया वो समय जब एक बार वो डाक साहब से मिलने भावना के साथ उनकी क्लीनिक पर पहुँच गयी थी और वो किसी महिला की जाँच में व्यस्त थे..
ये देख कर ही उसका तन मन सुलग उठा था, वो कुछ बोलती उसके पहले ही डाक साब ने भावना से कह कर उसको चुप करवा दिया था..
यह बात याद आते ही कुसुम के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान चली आई। कितनी पागल थी वह, कितनी बेवकूफ।
उसने धीरे से अपने माथे पर हाथ मार लिया। वाकई उसमें समझ ना के बराबर थी। लेकिन भावना बहुत समझदार थी, बहुत ज्यादा। भावना की याद आते ही उसका भावना से मिलने का मन करने लगा। लेकिन फिलहाल वह रसोई में थी और उसे यज्ञ से मिलने का बहाना चाहिए था।
उसने धीरे से अपनी सासू मां की तरफ देखा,
” अम्मा जी इन्होंने नाश्ता कर लिया।”
“हां बहू उसने आज सुबह आठ बजे ही खा लिया था, उसकी पूरी मंडली जोआ जाती है। उसके बाद इस लड़के को चैन कहां? इसलिए हमने कहा तुम पहले खा पी कर अपना काम खत्म करो।”
कुसुम को समझ में नहीं आया वह और क्या करें? अपनी नाश्ते की प्लेट उसे यूं लग रहा था जैसे मुंह चिढ़ा रही हो….।
वो अपनी प्लेट पकडे रसोई में एक तरफ बैठ गयी..।
उसका खाने में मन नहीं लग रहा था, जैसे तैसे वह एक-एक निवाला मुंह में डाल रही थी कि तभी उसका फोन बजने लगा, उसने फोन उठाया उसकी भाभी का फोन आ रहा था..।
“कैसी हो कुसुम ?”
“हम ठीक है.. आप कैसी है भाभी ?”
” हम भी ठीक हैं, अच्छा सुनो कल गिट्टू का जन्मदिन है। जानती तो हो हम हर साल गिट्टू का जन्मदिन कितने प्यार और धूमधाम से मनाते हैं। इस बार भी सोचा था, कुलदेवी के मंदिर में भोग भंडारा करवाएंगे तुमसे आते बन जाएगा ना..?”
“हाँ भाभी.. बिलकुल आ जायेंगे.. आप पूछ काहे रही.. आदेश कीजिये !”
” अरे नहीं नंद रानी अब दूसरे घर की हो गई हो ना। इसलिए आदेश कैसे कर सकते हैं? पूछना ही पड़ेगा। दूसरी बात यह है कि तुम्हारे भैया पूरी तरह से पलंग पर ही पड़े हैं। उनका तो हिला डुलना असंभव है, इसलिए सारी तैयारी हमें ही देखनी होगी।
यज्ञ बाबू आ पाएंगे ना ? उन्हें तकलीफ तो नहीं होगी। एक बार उनसे पूछ कर हमें बता देना… किस समय पर आ पाओगे, वह बता देना तो यहां से बाबूजी गाड़ी लेकर तुम्हें लीवाने आ जाएंगे..!”
” अरे बाबूजी को आप परेशान ना करें, इनके साथ खुद ही चले आएंगे ना..!”
” घर की बेटियों को मायके बुलाने के लिए सम्मान से लेने जाना पड़ता है, हमारी प्यारी नंद रानी। अभी एक दो बार तो लेने जाना ही पड़ेगा, जिससे आपका मायके की तरफ का रास्ता खुल जाए। उसके बाद आप बेधड़क अपने उनके साथ कभी भी आ सकती है। तो एक बार आप यज्ञ बाबू से पूछ कर समय बता देना। फिर हम बाबूजी को भेजते हैं। और सुनिए अगर हो सके तो आप दोनों आज ही रात में आ जाइए। कल सुबह से मंदिर के भोग भंडारे की तैयारी में लगना पड़ेगा ना..।
” ठीक है भाभी हम इनसे बात करके आपको बताते हैं..।”
कुसुम भाभी के बुलावे पर खुश हो गई। मायके जाना हर लड़की को हमेशा ही पसंद होता है, उस पर भाभी ने आज ही रात को बुलवाया था। मायके जाने पर तो यज्ञ को उसी के कमरे में उसके साथ रुकना पड़ेगा। और फिर वह मन भर कर यज्ञ से बातें कर पाएगी। फोन रखकर वह धीमे-धीमे मुस्कुरा रही थी कि उसकी सास ने टोक दिया।
“क्या हुआ कुसुम? किस का फोन था?”
“अम्मा जी हमारी भाभी का फोन था। हमसे पूछ रही थी कि हम और ये आज वहां जा सकते हैं क्या? कल गिट्टू का जन्मदिन है, और हर साल हम सब गिट्टू का जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाया करते थे। अब इस बार चंद्रा भैया तो बिस्तर पर पड़े हैं, तो भाभी को अकेले ही सारा इंतजाम देखना होगा। बिट्टू के जन्मदिन पर हर साल भोग भंडारा होता है, हमारी कुलदेवी माता के मंदिर में।
लगभग पूरा गांव भंडारे का प्रसाद लेने आता है। इसलिए थोड़ी ज्यादा तैयारी लग जाती है। अम्मा जी हम जा सकते हैं ना..?”
“हां, इसमें भी कोई पूछने की बात है? बिल्कुल जाओ बल्कि यज्ञ का भी मन बदल जाएगा। सारा दिन घर पर ही कचहरी लगाए बैठा रहता है। बैठे-बैठे बात करते हुए भी तो ऊब होने लगती है। थोड़ा बाहर निकलेगा उसका भी मन बहलेगा..।”
“हम एक बार इनसे भी पूछ लेते हैं..।”
“हां पूछ लो, वैसे मना नहीं करेगा..।”
कुसुम मुस्कुरा कर रसोई से बाहर निकल गई। आंगन को पार कर वह बाहर वाले कमरे के दरवाजे तक पहुंच गई। वहां पर्दा लगा हुआ था, और दरवाजे की ओट की हुई थी। दरवाजे के पास ही घर का नौकर खड़ा था। कुसुम को आते देखकर वह सर झुकाए खड़ा हो गया। कुसुम ने उसे देखा और आदेश दे दिया
“जरा छोटे ठाकुर साहब को बुलाना !”
“जी हुकुम ” वो भीतर चल गया.. लगभग चालीस बयालीस लोग उस कमरे में बैठे थे.. सबकी बातों का शोर बाहर तक आ रहा था..
कुछ अपनी फरियाद लेकर आये थे, तो कुछ सिर्फ गपोष्ठी थे और मुफ्त की चाय और नाश्ते के लिए वहाँ जमे पड़े थे..
नौकर ने अंदर जाकर यज्ञ को बता दिया कि कमरे के बाहर कुसुम खड़ी है.. यज्ञ वहाँ से उठ कर भीतर चला आया..
“क्या हुआ ? ” कुसुम ऐसे कभी उसकी बैठक के बीच नहीं आती थी… उसे अचानक आया देख वो भी हैरानी से उसे देखने लगा..
” सुनिए हमारी भाभी का फोन आया था, गिट्टू का कल बर्थडे है। और उसका बर्थडे हम सब मिलकर बहुत धूमधाम से मनाया करते थे। भाभी ने आपको और हमें बुलाया है। इसलिए हम आपसे पूछने आए थे क्या हम दोनों वहां जा सकते हैं?”
यज्ञ को कुसुम के इस बदलाव को देखकर अंदर ही अंदर बेहद खुशी हो रही थी। कुछ दिन पहले की कुसुम होती तो बिना उससे पूछे अकेली ही अपना सामान उठाएं मायके के रास्ते चल पङी होती।
लेकिन आज बड़े अदब से उससे आज्ञा लेने के लिए खड़ी थी। यज्ञ ने बिना कुछ ज्यादा सवाल किये बस धीमे से हां में गर्दन हिलाई और मुड़कर वापस जाने लगा कि कुसुम ने वापस उसे आवाज लगा दी।
” सुनिए छोटे ठाकुर।”
वो जाते जाते रुक गया… उसे कुसुम का खुद को छोटे ठाकुर बुलाना बहुत प्यारा लगता था। आंखें बंद कर उसने इस शब्द को अपने अंदर महसूस किया और वापस पीछे मुड़कर उसे देखने लगा।
लेकिन अपने चेहरे पर अपनी ख़ुशी आने नहीं दी उसने..
“अब क्या हुआ?”
” भाभी ने आज रात ही हमें बुलाया है, आज रात में वहाँ चल सकते हैं ना?”
” आज रात क्यों? कल सुबह भी तो जा सकते हैं..!”
“भैया की तबियत सही नहीं है ना… भाभी और बाबूजी को सब अकेले ही करना पड़ेगा.. कल सुबह से कुलदेवी मंदिर में.. “
वो पूरा बोल भी नहीं पायी और यज्ञ “ठीक है चलेंगे” बोल कर अंदर चला गया..!
कुसुम ने एक गहरी सी साँस भरी और ख़ुशी से अपने कमरे में सामान रखने चली गयी…
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अनिर्वान कैफे में बैठा था, नेहा उसके साथ थी और उन दोनों के सामने बैठी थी गीता.. जो अपने बारे में सब कुछ बताना शुरू करने जा रही थी..
अनिर्वान ने पुलिस द्वारा प्रयोग में लाया जाने वाला रिकॉर्डर निकाल कर बाहर रखा और गीता को अपनी बात शुरू करने का इशारा कर दिया..
” सर मैं शुरू से सारी बात आपको बताना चाहती हूं! मेरे पिता राजनीति में हैं, इसलिए मैंने बचपन से घर पर राजनैतिक परिवेश देखा था.. ।
इसी माहौल में मैं पली बढी थी। मैं अपने घर की इकलौती लड़की थी। इसलिए मेरे पिता चाहते थे कि मेरा होने वाला पति आगे चलकर उनके करियर को चार चांद लगाए। यानी कि उनकी वसीयत को आगे बढ़ाता रहे। वह अक्सर घर पर इस बारे में जिक्र किया करते थे।
मैं जिस कॉलेज में थी, वहां यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष के रूप पर अखंड का चुनाव हुआ था…। अखंड से हमारी मुलाकात कॉलेज के यूथ फेस्टिवल के दौरान ही हुई थी। वह अपनी तरफ से हर एक छात्र की मदद ही कर रहा था। वह लड़का ऐसा है कि उससे पहली बार मिलने के बाद ही आप उसके फैन बन जाते हैं। यह मेरे साथ भी हुआ।
मुझे अखंड पहली बार में ही बहुत भा गया था। उसका व्यक्तित्व उसकी सच्चाई ईमानदारी मेरे दिल पर छाती चली गई, और मैं उसे पसंद करने लगी। अखंड हमारी यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष था। उसने धीरेंद्र को बहुत तगड़े वोट्स से हराया था। देखा जाए तो धीरेंद्र के भी काफी सारे चमचे थे, लेकिन अखंड के व्यक्तित्व के सामने वह अपनी चमक बराकरार नहीं रख पाया…।
वह दोनों ही अक्सर मेरे घर आया करते थे। मुझे अखंड भाने लगा था, लेकिन मैं नहीं जानते थे कि मेरे पिताजी को धीरेंद्र ज्यादा पसंद था। धीरेंद्र मेरे पिता के बहुत खास दोस्त का बेटा था, और शायद इसीलिए वह उसे थोड़ा ज्यादा महत्व देते थे। वह हमेशा से चाहते थे कि छात्र संघ का अध्यक्ष धीरेंद्र बने। लेकिन अखंड का चुंबकीय व्यक्तित्व धीरेंद्र से हर बार बाजी मार ले जाता था…।
और फिर वह हुआ जिसके बाद मुझे पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि मुझे अखंड और धीरेंद्र में से अखंड को चुनना है…।
क्रमशः

कुसुम का ये बदलाव यज्ञ के साथ साथ हमें भी बहुत भा रहा है। कुसुम कुमारी को मायके जाने की और यज्ञ के साथ समय बिताने की बहुत खुशी हो रही है। बहुत ही प्यारा भाग 👌👌😊
Bahut hi achhi story mayanagri KB aayegi
bahute badhiya chal rahi hai kahani…kusum kumari ki jaan ab yagya main hi atak gayee hai …aur yagya uske poore maje le raha hai.
Very beautiful story 👌🏻👌🏻
Khushi hai… Kusum Or yagya ke beech badhti najdikiyon ki…. Resham ki zindagi ke unsuljhe pahluon ke suljhane ke ummed ki….. Khubsurat hai….. niji zindagi ki muskilon…. Drd… Or bhi bhut kuch ke karan jab mn ashant chl rha ho… To aapki kahaniyon se hi sukun or khushi ke do pal mil jaana….
Humari zindagi me na sahi… Kahani me to sab kuch sahi ho rha hai😊
Apki is kahani ko mene bahot dino bad padha
Is kahani me pata nahi kya khas bat hai
Jo iska intezar rehta hai padhne k liye
Isko mene pratilipi pe padhna shuru Kiya tha aur shuru me apne ye bhi mention Kiya tha ki choti si kahani hai
Isliye me choti kahani hai jaldi khatam ho jayegi esa karke padhna shuru Kiya lekin bad me esa laga k ye kahani chalti hi jaye kabhi khatam hi na ho
Kai dino tak pratilipi pe kahani nahi aai to mene apki post padhi to usse pata chala ki ab aap ne pratilipi chod Diya hai aur apne kahani apne vlog me dal rakhi hai
Fir mene apki is kahani ko dhundh nikala
Itni Khushi Hui ki kya hi kahe ki muje kahani adhuri chodni nahi padegi
So so happy
Thank you so much ki apne kahani continue ki hai
Baki story to jabardast hai
Bahot likh liya
kya pata aap padhe ki nahi mere comment ko is liye Aaj itna hi
धन्यवाद मैम
बहुत खूबसूरत भाग अपर्णा👌👌
कुसुम धीरे धीरे संस्कारी बहु बनने की ओर अग्रसर भई आज काकी सास को जवाब नहीं दिया गुस्सा पी गई🫢😄👏👏👏👏
भाभी का फोन आया कुसुम कुमारी खुश हो गई कि अब तो यज्ञ बाबू के साथ रुकने को मिलेगा😘😘छोटे ठाकुर कितना प्यारा लग रहा था उसके मुंह से💗💗💗💗यज्ञ बाबू भी मजे ले रहे कुसुम को तड़पा कर😃😃
काहे सताए काहे को रुलाए💗💗
राम करे तुझको नींद न आए💕💕
गीता अब धीरे धीरे सारे राज खोलेगी और धीरेंद्र के गुनाह सामने आयेंगे। अनिर्वान बहुत कड़ी सजा दिलवाना उस धीरेंद्र को तुम।अखंड निर्दोष साबित नहीं होगा जब तक रेशम की निगाहों में तब तक न रेशम आगे बढ़ पाएगी न ही अखंड।अखंड के लिए भी कोई लेकर आना जो उसके रेगिस्तान से सूखे दिल में प्रेम की फुहार बनकर बरसे😍😍
हमेशा की तरह बेहतरीन पार्ट👌👌❤️❤️
Very interesting story kusum tusi Kamal kerte ho ab to Kum bolne Lage ho or jali Kati bhi sahane lage ho
देखिए हमारे कुसुम कुमारी कितनी बदल चुकी है।
ना जली कटी सुनने से जलन लग रही है, और ना किसी बात का बुरा लग रहा है, अब तो हर और उन्हें बस यज्ञ ही यज्ञ दिख रहा है।
मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा। सच् तो है कुसुम कुमारी यज्ञ की तरह बनती जा रही है।
दोनों के जीवन में ढेर सारी खुशियां आ जाए हम तो बस यही चाहते हैं।
इधर अनिर्वान बाबू, धीरेंद्र की जन्म कुंडली खंगालने में लगे हुए हैं बस अब सही कड़ियां मिलती जाए और उनकी जंजीर पूरी हो जाए और यह जंजीर जाकर पड़े उसे धीरेंद्र प्रजापति के गले में।
ऐसा कुत्ता बना कर घूमाना इस प्रजापति को की कुत्ते भी भोकना भूल जाए।
👏👏👏very nice part..kuşum Rani ke man mai bhi Yagya ke pyaar ka deep kalbe laga dekhkar achcha laga👏👏