जीवनसाथी -3 भाग 49

जीवनसाथी -3 भाग 49

जीवनसाथी by aparna

फाइनली जीवनसाथी के तीसरे सीज़न का अर्ध शतक भी लग गया..
जीवनसाथी का यह तीसरा सीजन लिख रही हूं..
पहला सीजन लिखते समय उसकी पूरी रूपरेखा दिमाग में थी और बहुत प्यार से मैंने राजा और बांसुरी की प्रेम कहानी लिखी थी।

दूसरे सीजन को लिखने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। उन दोनों की शादी के बाद शौर्य के पैदा होने पर कहानी खत्म कर दी थी। लेकिन आप पाठकों का प्यार इस कदर जीवनसाथी के प्रति उमड़ रहा था कि मुझे उसका दूसरा सीजन लिखना पड़ा।
लेकिन तब मैंने शौर्य की कहानी के बारे में नहीं सोचा था, और इसलिए एक नया किरदार वासुकी को रचना पड़ा।

वासुकी को रचने के लिए और भी चीज तैयार करनी पड़ी और इस तरह वासुकी दर्श सारिका नेहा और इन सारे किरदारों को एक साथ मिलाकर तैयार हुई जीवनसाथी 2।
जिसे आप सब ने बहुत पसंद किया। जीवनसाथी 2 समाप्त करने तक में यह विचार नहीं आया था कि कभी भी राजा साहब और रानी बांसुरी के बेटे की कहानी भी लिखनी पड़ेगी।
लेकिन जीवनसाथी का दूसरा सीजन लिखते समय आप सब का प्यार इस कदर उमङ कर बरस रहा था कि उस समय यह निर्णय लिया कि इसका तीसरा सीजन शौर्य की कहानी के रूप में आएगा।
लेकिन अगर शौर्य और कली की कहानी भी राजा और बांसुरी जैसे ही लिख देती तो मुझे मजा नहीं आता। इसलिए शौर्य के किरदार को लिखते समय कुछ बातों का ध्यान रखा। कुछ अलग तरीके से उसके किरदार को तैयार किया और साथ ही कली को भी।
   लेकिन आपके दिल दिमाग से राजा बांसुरी का चार्म खत्म ना हो इसलिए राजा साहब जैसी शक्ल सूरत वाला उनका बेटा हुआ और रानी बांसुरी से मिलती-जुलती कली ।
      बाकी कली और शौर्य की कहानी बहुत ही अलग सी रहेगी, प्यार मुहब्बत तो इसमें भी रहेगा, कुछ गलतफहमियां भी रहेगी क्योंकि प्रेम कहानी में ऐसे ही टर्न्स और ट्वीट होते हैं..।

अगर मिलना बिछड़ना और फिर मिलना ना हो तो प्रेम कहानी में मजा कैसा? कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग मोड तो पार करने ही पड़ेंगे ना।

तो आइये चलते हैं जीवन साथी तीसरे सीजन के शानदार अर्धशतकीय एपिसोड की तरफ…

****

  आज का एपिसोड बड़े कुंवर और उनकी लेडी लव के ऊपर रहेगा…

     हर्ष बड़े गौर से मीठी को देख रहा था। मीठी की आंखें झिलमिलाने लगी थी।
ऐसा लग रहा था मीठी जो कहना चाहती है उसे कहने में उसे बहुत तकलीफ हो रही है। और वह इस बात को कह नहीं पा रही है..
हर्ष सोचने लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं मीठी जबरदस्ती किसी रिलेशनशिप में है और इसलिए उसने धीरे से अपना सवाल पूछ लिया..

” एक बात पूछूं , क्या तुम किसी टॉक्सिक रिलेशनशिप में हो..?”

हर्ष के सवाल पर मीठी ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी..

“अच्छा क्या मैं उस लड़के को जानता हूँ ? क्या वो हमारे ही साथ पढ़ा हुआ है ? बोलो मीठी.. ?”

मीठी ने आंखें उठाकर हर्ष की तरफ देखा।
वह जब जब हर्ष की आंखों में झांकती थी, हर्ष मंत्रमुग्ध सा उसे देखता रह जाता था।
ऐसा लगता था मीठी के प्यारे से चेहरे को बाहों में भरकर उसके माथे पर अपने प्यार की मुहर लगा दे।

लेकिन वह, यह भी समझ रहा था कि मीठी के दिल दिमाग पर इस वक्त कोई और छाया हुआ है। और इसीलिए वह उस सच को करीब से जानना चाहता था। अगर मीठी यही बात बहुत खुशी से बताती तो शायद हर्ष का दिल उस लड़के का नाम सुनने के पहले ही टूट चुका होता।
लेकिन मीठी जिस तरह गुमसुम होकर उदासी से यह बात बता रही थी, कहीं ना कहीं हर्ष के दिल में अब भी आशा की एक किरण मौजूद थी।
     हो सकता है मीठी किसी गलत रिलेशनशिप में हो और इसीलिए इतनी उदास हो..।

” हर्ष तुम उसे जानते हो..?”

“कौन है वो ? बताओ.. जल्दी बोलो क्या नाम है उसका ?”

पल भर के लिए मीठी ने अपनी आंखें बंद कर ली। ऐसा लगा वह अपनी सारी हिम्मत समेट रही है, उस एक नाम को हर्ष को बताने के लिए। जिसे आज तक उसने अपनी मां को भी बताने की हिम्मत नहीं की ।
  मीठी ने धीमे से अपनी आंखें खोली और एक बार फिर हर्ष की तरफ देखने के बाद अपनी उंगलियों से खेलने लगी। उसने अपने गले को जरा सा साफ किया और बोलना शुरू किया..

” हर्ष उसका नाम रियाल है…!”

“रियाल ? ये नाम तो पहली बार सुन रहा हूं.. मुस्लिम है क्या लड़का ?”

“नही… पारसी है..! और मेरे साथ पढ़ती थी! वह हॉस्टल में रहा करती थी, मैंने उसकी फर्स्ट ईयर में बहुत मदद की थी और तब से वह मुझसे काफी जुड़ गई..!”

” तुमसे जुड़ गई मतलब… रियाल लड़की है..?

“हम्म… !”

हर्ष ने एक गहरी सी सांस भरी और अपने बालों पर अपने हाथ फिराते उस जगह से खड़ा हो गया।
   वो उठकर मीठी से जरा दूर जाकर खिड़की पर खड़ा हो गया। होटल की वह खिड़की खुली हुई थी और उसे खिड़की के पार पेरिस का नजारा साफ-साफ नजर आ रहा था।
      इस वक्त उसे कैसा लग रहा था, यह वही समझ सकता था। उसके पैरों तले जमीन खिसक गई थी।
   उसे लगा था कि उसका मुकाबला किसी उसी के जैसे लड़के से होगा, अगर मीठी किसी और लड़के को पसंद करती होती तो हर्ष मीठी को अपनाने के लिए प्रयत्न करने की सोच भी सकता था।
लेकिन उसका मुकाबला किसी लड़के से नहीं बल्कि एक लड़की से था।
तो इसका मतलब मीठी के मन में लड़कों के लिए वह जज्बात, वह एहसास है ही नहीं।

   अब तो सारा मामला ही खत्म!!

   मीठी किसी कीमत पर कभी भी उससे प्यार कर ही नहीं सकती। अब वाकई हर्ष का दिल दुखने लगा था। उसने अपनी आंखें बंद की और वही खिड़की पर दोनों हाथ फैला कर खिड़की की चौखट पर हाथ रखे हुए बाहर देखने लगा कि तभी मीठी आकर पीछे से हर्ष से चिपक गई।

    उसने अपने दोनों बाजू हर्ष के इर्द-गिर्द लपेट लिए। मीठी के ऐसा करते ही हर्ष चौक गया।
उसके सारे शरीर में करंट दौड़ गया।

“क्यों कर रही हो मीठी ऐसा? मैं समझता हूं, तुम्हें मुझे छूकर कुछ महसूस नहीं होता होगा, लेकिन मैं तो लड़का हूं। मुझे तो महसूस हो रहा है।
फिर तुम मुझसे दूरी क्यों नहीं रखती हो?”
मन ही मन यह सब सोचते हुए हर्ष ने पलट कर मीठी को खुद से दूर किया और उसके चेहरे को देखते हुए उसे कहने लगा।

” मैं समझता हूं मीठी तुम्हारे प्यार को भी, और तुम्हें भी। और मैं तुमसे प्रॉमिस करता हूं कि, तुम्हारे घर पर प्रेम काका और निरमा काकी को मनाने की जिम्मेदारी मेरी है। मैं उन दोनों को तुम्हारे इस रिलेशनशिप के लिए मना लूंगा!”

मीठी गहरी नजरों से हर्ष को देख रही थी। लेकिन अब भी मीठी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी।

” क्या हुआ तुम अब भी दुखी क्यों हो?  तुमने अपने रिलेशनशिप के बारे में मुझे बता दिया, मैंने तुमसे प्रॉमिस भी कर दिया कि मैं तुम्हारी मदद करूंगा ।
अब तो तुम्हें खुश होना चाहिए ना।”

” मैं खुश नहीं हूं हर्ष, क्योंकि मैं कंफ्यूज हूं ।”

“कंफ्यूज हो? लेकिन क्यों?”

“एक्चुअली रियाल मुझसे प्यार करती है, बहुत ज्यादा। मैं भी उसे प्यार तो करती हूं, और मैंने शुरुआत से उसे कहा था कि मैं उसे बहुत प्यार करती हूं। लेकिन मेरा प्यार वैसा नहीं है, जैसा रियाल को चाहिए।
आई मीन वह चाहती है कि मैं और वह रिलेशनशिप में रहे। पर मेरी तरफ से ऐसा कुछ नहीं है।
    आई मीन… मैं तुम्हें क्लियर नहीं कर पा रही हूं। मैं उसे प्यार करती हूं, मैं उसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन…

हर्ष के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान छा गई। उसे उसकी मनचाही मुराद मिल गई थी। उसे समझ में आ गया था कि उसकी भोली सी मीठी किस बात के कारण इतनी परेशान है।
   हर्ष ने एक गहरी सी सांस ली और अपनी मुस्कान छुपाते हुए मीठी के चेहरे को अपनी बड़ी-बड़ी हथेलियों में थाम लिया। उसकी आंखों में लगातार देखते हुए वह उसे दिलासा देने लगा..

” सुनो मीठी, बहुत बार ऐसा होता है कि हम अपने ही रिलेशनशिप में कंफ्यूज हो जाते हैं। हमें समझ में नहीं आता क्या सही है, क्या गलत? लेकिन प्यार का कोई रूप कभी गलत नहीं होता।
      तुम अपने और रियाल के रिश्ते को वक्त दो। धीरे-धीरे तुम्हें खुद समझ आ जायेगा, और जिस दिन तुम दोनों अपने रिश्ते में एक मैच्योरिटी को पा जओगी, उस दिन तुम दोनों के दिमाग से सारी उलझने भी दूर हो जाएंगी। “

“यही तो प्रॉब्लम है हर्ष कि, रियाल के दिमाग में कोई उलझन है ही नहीं।
      शी इज़ वेरी क्लियर, उसे पता है कि उसे क्या चाहिए और क्या नहीं।
लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है। मुझे रियाल के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है। हम साथ में पढ़ते हैं, हमारी पसंद ना पसंद एक जैसी है। हम दोनों ढेर सारी बातें करते हैं। शॉपिंग करते हैं। वहां तक तो सब ठीक है। लेकिन जैसे ही उसकी बातों का सिलसिला बदलता है, और वह कुछ अलग सी बातें करने लगती है, तब मैं थोड़ा ऐम्बेरेस होने लगती हूं। और अपनी यह समस्या मैं किसी से नहीं कह सकती।
यहां तक की रियाल से भी नहीं।”

हर्ष को अब जाकर मीठी की समस्या समझ में आ रही थी।

    मीठी वाकई परेशान थी।

    कोई इंसान जब आपसे टूट कर मोहब्बत करता है, तब आप चाह कर भी उसे धक्का देकर खुद से दूर नहीं कर सकते। जब सामने वाला बार-बार आपके सामने अपनी मुहब्बत की दुहाई दे, तब आप उसे जमाने की दुहाई नहीं दे सकते।
आपको उसे संभालना ही पड़ता है।
ऐसे समय में आपकी मदद को वह आपकी कमजोरी या आपकी मुहब्बत मान बैठे तो, उसमें आपकी गलती कैसी? ये एक ऐसा मसला हो जाता है जहाँ दोनों में से कोई गलत नही होता..

   बस वैसा ही कुछ मीठी के साथ हुआ था..

” मीठी तुम क्या शुरू से मुझे तुम्हारी और रियाल की रिलेशनशिप के बारे में बता सकती हो ?”

“हां जरूर!  मैं जब कॉलेज फर्स्ट ईयर में गई, तब रियाल से मेरी पहली मुलाकात हुई थी..
रियाल  क्लास में एक तरफ चुपचाप बैठी थी..
मुझे तो तुम जानते ही हो! शुरू से ओवर कॉन्फिडेंट रही हूँ..  और हंसने बोलने वाली हूं!
   मां के कारण कॉलेज में भी मुझे थोड़ा स्पेशल फील करवाया जाता था! बस इसीलिए मैं सबसे बातचीत किया करती थी।
     सीनियर्स भी मेरी रैगिंग नहीं करते थे। पहली बार रियाल को मैंने क्लास रूम में एक तरफ चुपचाप बैठे देखा था।
दो-तीन दिन वह वैसी ही नजर आई। मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसने मुझे कोई ठीक-ठाक रिस्पांस नहीं दिया।
     फिर एक दिन मैं कॉलेज से वापस लौटने के लिए निकल रही थी, तभी किसी की घुटी से चीख मुझे सुनाई पड़ी। मैं तुरंत लाइब्रेरी की तरफ गई। वहां पर कुछ सीनियर्स रियाल की रैगिंग ले रहे थे। वह लोग रैगिंग में रियाल के साथ मेरी क्लास के एक लड़के को खड़े करके दोनों को सजा दे रहे थे।
रियाल को यह सजा दी गई थी कि उसे उस लड़के के चेहरे को चूमना था। रियाल के लिए यह करना बहुत मुश्किल हो रहा था।
     उसने अपने आप को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन परेशान सी रियाल बहुत जोर जोर से रोने लगी..
उसका नर्वस ब्रेकडाउन हो गया। और वह रोते-रोते वहीं गिर पड़ी।

उसकी इस हालत को देखकर सारे सीनियर्स वहां से भाग गये। वह लड़का भी रियाल को कुछ समझ नहीं पाया और तब मैं वहां पहुंच गई।

    मैंने रियाल को पानी पिलाया, उसे बैठाया और उसे समझाने की कोशिश करने लगी। रियाल इतनी परेशान थी कि वह मुझसे लिपट गई और मुझसे लिपट कर वो सिसक सिसक कर रोने लगी।
मैंने उसे दिलासा दिया और फिर अपनी गाड़ी में उसे साथ लिए उसके हॉस्टल उसे छोड़ने चली गई।
    वहां पर जब उसे छोड़कर मैं निकल रही थी, तब उसके रूम के आसपास रहने वाली लड़कियों ने रियाल के बारे में यह बताया कि वह जरा अजीब सी लड़की है। किसी से जल्दी बातचीत नहीं करती, और ना ही घुलती मिलती है।
         मुझे लगा थोड़ी एकांत प्रिय होगी। मुझे इस बात से कोई एतराज नहीं था। अगले दिन से मैंने यह ठान लिया कि मैं रियाल को उसके एकांतवास से बाहर निकाल कर रहूंगी। और बस मैंने रियाल से दोस्ती कर ली।

पता नहीं मुझ में उसे क्या नजर आया, रियाल भी मुझसे जुड़ गई।
अब वह क्लास रूम में अपनी बगल की सीट मेरे लिए रखने लगी। हम दोनों साथ बैठने लगे। मैं पढ़ाई में भी उसकी मदद कर दिया करती थी। एक बार उसे शॉपिंग के लिए जाना था, तब मैं ड्राइवर अंकल के साथ अपनी गाड़ी लेकर गई, और उसे शॉपिंग करवा दिया।

हम अब ज्यादातर समय साथ में रहने लगे। लेकिन मुझे धीरे-धीरे समझ में आया कि उसके मन में कोई ग्रंथि पल रही है, जिसके कारण वह बहुत परेशान रहती है।

    फिर वैलेंटाइन डे आया। उस दिन रियाल बहुत खुश थी। वह मेरे लिए गिफ्ट लेकर आई थी, एक टेडी बियर और एक चॉकलेट भी।
उसने यह सारा सामान मुझे देखकर मुझे प्रपोज कर दिया।

उसने कहा कि वह मुझसे प्यार करती है। उस वक्त मुझे उसकी भावनाएं समझ में नहीं आई, और मैंने उसका प्यार स्वीकार भी कर लिया। हमारी दोस्ती और गहरी होती गई। हालांकि हमारे क्लास की ही कुछ लड़कियां हम दोनों का मजाक भी उङाया करती थी। लेकिन मैं उन लोगों के मजाक को हवा में उड़ा देती थी।

फिर धीरे-धीरे मुझे समझ में आने लगा की रियाल मेरे लिए बहुत पजेसिव होने लग गई है।
मैंने उसे समझाने की कोशिश की, कि एक न एक दिन हम दोनों को अलग होना ही पड़ेगा।
मेरा अपना परिवार है, तुम्हारा अपना परिवार है। कल को तुम्हें तुम्हारे घर वापस लौटना होगा। तब कैसे रहोगी, और उस समय उसने कहा कि वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगी। वह मुझसे शादी करना चाहती है।

मैं आश्चर्य से उसे देखते रह गई। मैंने पूछा शादी ही क्यों, तो उसने कहा साथ रहने को और कोई उपाय भी तो नहीं है।

अगर हम दोनों को साथ रहना है तो हमें शादी ही तो करनी पड़ेगी।
उस वक्त मुझे उस पर थोड़ा गुस्सा आने लगा और मैंने उसकी बात काट दी।

मैं उसे एक तरफ करके अपनी जगह से खड़ी हो गई। मैं उसके कमरे से निकलने वाली थी कि वह आकर मुझसे लिपट गई और मुझसे माफी मांगने लगी। लेकिन उस वक्त मुझे पता नहीं क्या हो गया था, मुझे रियाल की हरकतों पर गुस्सा आ गया, और मैं उसे धक्का देकर उसके कमरे से निकल गई।

मैं घर आ गई लेकिन दो-तीन घंटे बाद ही रियाल के कमरे के बाजू में रहने वाली शीना का मेरे पास कॉल आया। शीना ने मुझे बताया कि रियाल ने अपने हाथ की नस काट ली है।
मुझे इसी बात का डर था, क्योंकि रियाल अवसाद की मरीज रह चुकी थी।
मुझसे मिलने के बाद उसकी दवाइयां छूट गई थी। उसे अब डिप्रेशन की दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती थी। उसे नींद की दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती थी।

जिस बात का मुझे डर था, वही हुआ था। मैं भागती हुई वापस हॉस्टल पहुंची। अब तक हॉस्टल के डॉक्टर ने उसके तिमारदारी शुरू कर दी थी। प्राथमिक इलाज के बाद वह ठीक हो गई थी, और उसे उसके कमरे में भेज दिया गया था।

मैं भी उसके साथ उसके कमरे में चली आई। उस रात मां को फोन करके मैंने कह दिया कि मुझे थोड़ा ज्यादा पढ़ाई करनी है और इसलिए मैं आज गर्ल्स हॉस्टल में ही रुकूंगी। मां को इस बात के लिए मनाना बहुत मुश्किल था।

तुम तो जानते हो, मां मुझे अपनी आंखों से पल भर के लिए ओझल नहीं होने देती। फिर डैडी ने मॉम को मना लिया।

      और जब रात में हम दोनों साथ थे तब रियाल ने अपनी दर्द भरी कहानी मुझे सुनाई…
    उसके रिश्तेदार ने उसके साथ बचपन में बहुत गलत किया था। उसके  फूफा जी थे जो उसे बचपन में एब्यूज किया करते थे…।

जब उस छैः साल की बच्ची ने इस बात का विरोध किया, तो फूफा जी ने उसके मुंह पर थप्पड़ लगाकर उसे चुप करा दिया। और कहा कि अगर उसने इस बारे में किसी भी घर के बड़े से कुछ भी बताया तो वह उल्टा उसे ही बदनाम कर देंगे।
    छोटी थी वह डर गई। बहुत घबरा गई, और उसकी हिम्मत चूक गई ।
   लेकिन उसके फूफा जी की हिम्मत बढ़ती गई।

उन्होंने फिर उसके साथ गलत काम करना शुरू किया और तब बहुत हिम्मत करके उसने अपनी मां से यह बात कह दी। वह जब अपनी मां से कह रही थी, तब उसके पिता ने सारी बातें सुन ली, और उन्होंने आकर रियाल को ही दो तमाचे जड़ दिए।

रियाल इस बात से खामोश सी हो गई ।
बहुत खामोश!!  लेकिन वह डरने लग गई। वह सारी मर्द जात से ही डरने लग गई।
उसके साथ गलत करने वाले उसके फूफा जी और उसके साथ हुए गलत को बढ़ावा देने वाले उसके खुद के पिता उसकी जिंदगी के दो महत्वपूर्ण पुरुषों ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी थी…

और बस यही से उसके डिप्रेशन की शुरुआत हुई।
     वो तो अच्छा हुआ कि उसकी मासी उसके घर आई थी और उन्होंने उसकी अजीबोगरीब हालात देखकर उसे अपने साथ ले जाने की बात उसकी मां से कही, उसकी मां भी यही चाहती थी की रियाल इस घर से कहीं दूर चली जाए।
     और उन्होंने उसकी मासी के साथ उसे भेज दिया। तब से रियाल अपनी मासी के साथ ही रहा करती थी।

छुट्टियों में अपनी मां के पास जाती, लेकिन वह उसके बाद से कभी भी अपने पिता के सामने जाने में भी कतराने लगी।

उस रात जब रियाल ने अपनी जिंदगी का यह हिस्सा मेरे सामने रखा, तब मुझे उस पर बहुत तरस आने लगा। और मैंने उसे अपनी बाहों में भरकर सांत्वना देनी शुरू कर दी।

    रियाल मुझे बहुत प्यार करती है। क्योंकि उसे लगता है इस पूरी दुनिया में सिर्फ मैं हूं जो उसे समझ सकती हूं। और इसीलिए वह…

  मैं क्या बताऊं हर्ष, वह मेरी कितनी केयर करती है। कितना सोचती है मेरे लिए।
मेरे पहुंचने से पहले वह मेरे लिए सीट तैयार रखती है। क्लास में जो भी नोट्स तैयार होते थे, वह सब वह मेरे लिए रेडी रखती थी।
क्लास रूम के प्रोजेक्ट्स वह तैयार करती थी। मेरे असाइनमेंट वह लिखती थी। मेरा हर काम मुझसे पहले वह करके देती है।
      मेरी पसंदीदा चीजे उसने बनानी सीख ली, क्योंकि मुझे वह खाने में पसंद है।
मैं बाहर का ना खाऊं इसलिए वह अपने हॉस्टल में सब कुछ बनाकर मेरे लिए लाने लगी।

मेरे पसंद के रंगों से उसने अपने कमरे को भर दिया है। उसकी इतनी पजेसिवनेस देखकर मुझे डर लगता है।

   उसकी खुशी के लिए मैंने यह स्वीकार लिया है कि मैं उसके साथ रिलेशनशिप में हूं।”

अपनी बात खत्म करने के बाद मीठी ने हर्ष की तरफ देखा।

” हर्ष क्या मैंने कुछ गलत किया? अगर रियाल की जगह कोई लड़का होता, तब भी शायद उसका मेरे प्रति इतना पागलपन देखकर मैं उसके प्यार को स्वीकार कर लेती। भले ही मेरे मन में उसके लिए वह भावनाएं न हो, तब भी, तो क्या रियाल लड़की है, सिर्फ यह सोचकर उसे छोड़ दूं।”

हर्ष को इस वक्त मीठी की बात का कोई जवाब नहीं सूझा। उसने मीठी की तरफ देखा और धीरे से हां में गर्दन हिला दी।

“नहीं मीठी, तुमने कुछ गलत नही किया। तुम सही हो। लेकिन एक बात सोच कर देखो, अगर तुम्हारी भावनाएं रियाल के लिए वैसी नहीं है, जैसी रियाल की हैं तुम्हारे लिए है, तो तुम दोनों की जिंदगी का आगे का सफर बहुत कठिन हो जाएगा।
आज जरूर तुम्हें उस पर तरस आ रहा है, और इसलिए तुम उसके साथ रिलेशनशिप को कबूल कर रही हो। लेकिन कल यही रिलेशनशिप तुम्हारे लिए टॉक्सिक हो जाएगी। और तुम इस बंधन से बाहर निकलने के लिए तड़पने लगोगी।
मेरे ख्याल से तो रियाल तुमसे सच्चा प्यार करती है। इसलिए उस किसी मुगालते में रखना सही नहीं है। लेकिन बाकी सारी तुम्हारी मर्जी। तुम जो चाहे वह करो। तुम्हारे हर निर्णय में मैं तुम्हारे साथ हूं।”

“मुझे मालूम था हर्ष, और कोई मेरा साथ दे या ना दे, लेकिन तुम जरूर मेरा साथ दोगे।”

मीठी मुस्कुरा कर हर्ष के गले से लग गई, और हर्ष की सांस रुक गई।
पल भर के लिए वह सन्न रह गया।

क्या करती है यह पागल लड़की!! इसे भले मुझसे मुहब्बत नहीं है तो क्या हुआ? मुझे तो है। मैं तो महसूस कर सकता हूं हर एक चीज।

और फिर हर्ष ने धीरे से मुस्कुराते हुए मीठी को खुद से अलग कर दिया।

उसे खुद से थोड़ा दूर कर वह खड़ा हुआ और पानी का गिलास उठाकर मिठी के लिए ले आया।

” मुझे तो लगा था तुम्

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

मीठी…. है! पर है ही नहीं, वह सहारा है लेकिन उसकी आदत बन गई है, हर्ष तो प्यार करने लगा है, मुझे तो लगा था निरमा जैसा इसका सच है क्या! पर वह दौर गुज़र गया। जीवनसाथी २ में वासुकी नेहा है राजा जी के समधी समधन, पढूंगा कभी पूरे मन, अभी नाइस पार्ट दीदी…💐👍💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत भावुक कर देने वाला भाग कली और बांसुरी एक दूसरे के आमने सामने है,कली का वही ममता भरी खुश्बू का एहसास होना और बांसुरी का कली में खुद का अक्स देखना एक अलग ही समा बंध गया और मुस्कान के साथ आंखे खुशी से भर आयी मेरी भी।पर समय का झीना पर्दा उन बीच आ गया और दोनों ही एक दूसरे को नहीं पहचान पाए। इंतजार रहेगा उसके पल का ज़ब कली अपनी मासी माँ को और बांसुरी अपनी कल को पहचानेगी 😊।
मीठी…. ये कौन आ गया इतनी प्यारी जोड़ी के बीच 🤔।
देखते है अगले भाग में।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌🙏🏻।