जीवनसाथी -3 भाग -57

लेकिन कली को सत्तर में साडी बड़ी महंगी लगी.. वैसे भी वो अपने डैडा की तय की हुई लिमिट से आगे बढ़ चुकी थी..
इसलिए उसने साड़ी एक तरफ रखी और हाथ झाड़ कर उठ खड़ी हुई.. इधर उधर नजर मार कर उसने मीठी को ढूंढा, और उसके पास चली गयी..
उसके जाने के बाद शौर्य वहाँ आया और उस साड़ी को हाथ में लेकर हल्के से मुस्कुरा उठा….
मीरा ने ढेर सारा कुछ पसंद कर के बटोर लिया था, उसे लग रहा था जैसे उसका जैकपोट लग गया है…
महल पहुंचने के बाद उसकी ख़ुशी का ठिकाना ना था..
असल में देखा जाये तो उसे ये मालूम था कि शौर्य राजकुमार है, लेकिन उसका ऐसा शानदार महल होगा ये उसने भी नहीं सोचा था..।
सारा कपडा मार्केट, सारा सराफा, महल के दीवानखाने में मौजूद था। लोगो की भीड़ थी बावजूद दीवानखाना पूरा भरा नहीं था..।
उसकी भव्यता में चार चाँद लग गए थे..।
शाम का कार्यक्रम महल के ही एक दूसरे दीवानखाने में होना था, जिसका नाम एमरेल्ड था..
उसकी साज सजावट शुरू हो चुकी थी… इधर से उधर भागते लड़के सजावट में लगे हुए थे.. शहर से इवेंट ऑर्गेनाइज़र की टीम आयी हुई थी..।
ये सारी तैयारियां देख देख कर मीरा की आंखे चुंधिया रही थी.. वो यहाँ आकर सब भूल चुकी थी..।
उसका असली नाम क्या है ? उसे शौर्य के पीछे क्यों लगाया गया है ? उसके यहाँ आने के असली उद्देश्य क्या है ? वो सब भूलभाल कर महल की सुंदरता और भव्यता में खो गयी थी…
वो इधर उधर देखती हुई घूम रही थी कि उसे किसी का फ़ोन आने लगा…
उसने लपक कर फ़ोन उठा लिया..
“क्या कर रही हो.. ?” दूसरी तरफ से किसी के गरजने की आवाज़ आयी..
“हम्म… अहम्म.. वो.. बस !” मीरा की ज़बान लड़खड़ा गयी..
“तुम बस खुद के लिए ही सोचती रहो.. ? तुम्हे ये सब करने भेजा गया है क्या ? जैसे तैसे तो महल तक पहुंची हो, अपना काम तो याद रखो.. अगर भूल रही हो तो हमें याद दिलाना आता है.. समझी ?”
“हाँ.. जी.. हम समझ गए !”
“समझ जाओ उसी में बेहतरी है.. वरना अगर हम समझाने पर आये ना, तो कहीं की नहीं रहोगी.. क्यूंकि फिर हम महल वासियो को तुम्हारी सच्चाई समझा देंगे और फिर बैठी रहना अपना चांदी का मुहं लेकर.. !”
मीरा का मुहं लटक गया, दूसरी तरफ से फ़ोन पटक कर काट दिया गया…
वो सूनी सूनी आँखों से अपने कमरे की तरफ जा रही थी की सामने से एक नौकर आता दिखाई दिया.. वो एक ट्रॉली टेबल को धक्का देता आगे बढ़ रहा था।
मीरा उसे और उसकी टेबल को देखने लगी.. उस नौकर ने बाइज्जत पूछ लिया..
“आपके लिए कुछ ले आये मैडम ?”
” क्या मिलेगा अभी ?”
“मैडम ये होटल थोड़े ना है.. यहाँ तो हर वक्त हर चीज़ मिलती है.. आप हुक्म फरमाए ?”
“चीज़ बॉल्स.. पोटेटो फ्राइज.. !” मीरा ने धीरे धीरे कहना शुरू किया और उस लड़के ने उतने में ही आधा झुक कर उसे प्रणाम किया और अभी लाते हैं कह कर चला गया.. !
“सुनो हमारा कमरा मालूम है ना ?”
“जी.. !”
दो मिनट पहले ऑफ हुआ मीरा का मूड सही हो गया और मीरा झूमती सी अपने कमरे में चली गयी..
अब तक सभी अपने अपने कमरों में चले गए थे.. मीठी के साथ रियाल भी कमरे में चली आयी थी..
मीठी अपने हाथ में अपनी ड्रेस लिए बैठी थी.. उसे वो सुनहरी सी ड्रेस बड़ी प्यारी लग रही थी.. रियाल उसके पास आ बैठी..
“मीठी.. एक बात पुंछू ?”
“हम्म.. !”
“तुम मेरे साथ खुश तो हो ना ?”
रियाल के सवाल पर मीठी उसे देखने लगी..
“ऐसा क्यों पूछ रही तुम ?”
“बस ऐसे ही.. मुझे लगता है बहुत से लोगो को हमारी दोस्ती खटक रही है !”
“मतलब ?”
“अच्छा एक बात बताओ.. ये हर्ष कैसे हैं नेचर के !”
“अच्छा है.. बल्कि बहुत अच्छा है.. !”
मीठी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
जो रियाल को ज़रा भी पसंद नहीं आयी..
“अच्छे तो लग ही रहे, लेकिन लड़कियों के मामले में ?”
“हाँ रियाल उस मामले में भी.. मैं बचपन से हर्ष को जानती हूं। आज तक कभी उसने किसी लड़की के साथ बदतमीजी से बात तक नहीं की। किसी की बेइज्जती नहीं की। बहुत समझदार और संस्कारी है वह..!”
“यही हद से ज्यादा मीठापन खल जाता है मुझे.. पता नहीं क्यों भरोसा ही नहीं होता !”
“नहीं ऐसी कोई बात नहीं.. हर्ष जैसा दिखता है वैसा ही है भी..! कोई बनावट नहीं, कोई मिलावट नहीं.. बिलकुल प्योर सोल !”
“बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी की शिकार हो तुम मीठी.. !”
“क्या मतलब ?”
“क्या बताऊँ.. खैर जाने दो !”
“बोलो ना रियाल, क्या हुआ ?”
“तुम मेरी बात को समझोगी नहीं.. और शायद नाराज़ भी हो जाओ !”
“बोलो प्लीज़.. क्या हुआ ?”
“मुझे ऐसा लगा जैसे हर्ष…
“क्या.. ? क्या लगा तुम्हे.. रियो प्लीज़ बोलो ?”
“मैं उस वक्त हर्ष के पास जाकर बैठी थी ना..
“हाँ.. तो ?”
“उस वक्त बातचीत के दौरान मुझे लगा वो बार बार बिना वजह मुझे छूने की कोशिश कर रहा है..!”
“इम्पॉसिबल !”
“मुझे पता था, तुम मुझ पर विश्वास नहीं करोगी.. इसीलिए नहीं बताना चाह रही थी….
रियाल की आँखों में आंसू छलक आये..
“आई एम् सॉरी मीठी.. अगर मेरी बात तुम्हे बुरी लगी तो..
उसने रोते हुए अपने आंसू पोंछ लिए..
उसके आंसू देख मीठी परेशान हो गयी..
“अरे रियो.. मेरा वो मतलब नहीं था बेबी… आई एम् सो सॉरी.. मैं जानती हूँ तुम गलत नहीं हो, बस ये कहना चाहती हूँ कि तुम्हे हर्ष के बारे में ग़लतफ़हमी हो रही है.. !”
“काश ये ग़लतफ़हमी ही हो.. लेकिन मुझे यही लगा कि..
उसने मुझे बार बार यहाँ रुकने भी कहा। मेरे कंधो पर, मेरी उंगलियॉं पर उसका हाथ फिसल रहा था.. !”
“वैसे ऐसा उसने कभी किया तो नहीं, किसी के साथ, लेकिन.. देखो हो सकता है वो तुम्हे कम्फर्टेबल करना चाहता हो कि तुम्हारे मन से महल को लेकर डर हट जाये.. !”
सिसकते हुए रियाल मीठी से चिपक गयी.. और मीठी उसे बाँहों में भर कर उसकी पीठ सहलाने लगी..
“शांत हो जाओ रियाल, तुम्हे गलफहमी ही हुई है !”
“काश ये मेरी ग़लतफ़हमी ही हो.. बस मुझे यहाँ अकेले छोड़ कर तुम कहीं मत जाना मीठी.. मुझे अकेले डर लगता है..
वो और भी ज्यादा मीठी में सिमट गयी और मीठी ने उसे खुद में समेट लिया….
कुछ देर में ही उनके दरवाज़े पर दस्तक हुई और हेल्पर्स चाय के साथ स्नेक्स रख कर चले गए..
शाम हो रही थी और अब उन लोगो को शाम की पार्टी के लिये तैयार होना था…
मीठी के कमरे के लैंड लाइन पर बांसुरी का फ़ोन भी आ गया था कि वो लोग तैयार होकर उसी के कमरे में आ जाए.. ।
कली लंच के बाद अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी थी.. वो अब तक अपने आप को समझा नहीं पा रही थी.. उसके मन में अब भी उथल पुथल मची हुई थी….
उसके दिमाग में डैडा ने भी खलबली मचाई हुई थी..
उसने सरु को फ़ोन लगा लिया..
“कली… बेटा कैसी है ?”
“मैं तो ठीक हूँ सरु, आप कैसी हो ?
“मैं भी ठीक हूँ मेरा बच्चा, लेकिन यहाँ कुछ ठीक नहीं !”
“क्या हुआ ?”
“कल शाम काका नहीं रहे !”
“ओह्ह… कैसे ?”
“उम्र भी हो चली थी और तबियत भी नहीं सुधर रही थी…मैं तो जबसे यहाँ आयी तभी से उनकी तबियत बस बिगड़ती ही चली जा रही थी.. इसलिए तो तुमसे बात भी नहीं हो पा रही थी…।
मुझे तुम्हारी भी बहुत चिंता हो रही थी, लेकिन जब मैंने देखा की तुम्हारा दोस्त कौन है, तब मन में राहत आ गयी..।
खैर.. हम लोगो ने बहुत कोशिश की पर काका को बचाया नहीं जा सका..। आज उन्हेँ बरी भी कर दिया..। बस अब दो एक दिन में मैं भी वापस लौट आउंगी.. !”
“सरु.. आप ठीक तो है ना ?”
“मैं ठीक हूँ कली….. पता है जब तुम पैदा हुई उस वक्त हम सबने तुम्हारे अलग अलग नाम रखे थे.. काका ने तुम्हारा नाम सबा रखा था.. लेकिन फिर रानी साहब के दिए नाम ..
सरु भावुकता में बहती कली के सामने वो सब बोल गयी जो आज तक कली से छिपाकर रखा था..
“क्या सरु ? कौन रानी साहब ?”
“नहीं नहीं.. कुछ नहीं.. अच्छा सुनो.. अभी कहाँ हो तुम ?”
“सरु.. यही तो बताना था आपको, कि मैं रियासत में आयी हुई हूँ…।
जो लड़का मेरे साथ था ना जिससे आपकी वीडियो कॉल पर बात भी करवाई थी, वो असल में रियासत का राजकुमार है.. !”
“जानती हूँ !”
“लेकिन कैसे ?” आश्चर्य में डूबी कली पूछ बैठी…
“काका की तबियत नहीं सुधर रही थी, तब डॉक्टर्स ने उन्हेँ बड़े अस्पताल ले जाने को कहा..।
यहाँ दून में राजा साहब का एक बड़ा सा अस्पताल है.. हम सब वहीँ लेकर गए थे काका को…। वहीँ राजा साहब के बेटे राजकुमार शौर्य प्रताप बुंदेला की आदमकद तस्वीर लगी देखी थी मैंने.. उस तस्वीर को मैं पल भर ठहर कर देखती रह गयी थी..।
ऐसा लगा जैसे इस चेहरे को मैं जानती हूँ.. वो तो बाद में याद आया..
कहते कहते सरु एक बार फिर रुक गयी.. आज क्या हो रहा था उसके साथ… वो बार बार राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी का ज़िक्र कर बैठती थी….।
अपने आप को संभाल कर सारिका ने बोलना शुरू किया..
“फिर उसी रात में तुमने वीडियो कॉल किया था.. याद है ना ! उस वीडियो कॉल में जब मैंने तुम्हारे साथ राजकुमार को देखा तो पल भर के लिए मैं आश्चर्यचकित रह गई थी। क्योंकि दिखने में तो वह लड़का बिल्कुल प्रिंस शौर्य की तरह नजर आ रहा था। लेकिन तुम उसका परिचय एक ड्राइवर के तौर पर करवा रही थी।
तभी मुझे समझ में आ गया कि तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है।
और तुम्हारे साथ मौजूद प्रिंस इतना भोला और अच्छा है कि उसने तुम्हारी गलतफहमी दूर भी नहीं की। तभी मुझे समझ में आ गया था कि तुम सुरक्षित हाथों में हो। वैसे भी राजा साहब के परिवार का इतना नाम है यहां कि, उनके परिवार के किसी भी सदस्य के साथ अगर कोई इंसान है तो वह दुनिया के सबसे सुरक्षित हाथों में है।
बस इसीलिए मैं भी तुम्हारी तरफ से निश्चित हो पाई थी।
मैंने काका की जी जान से सेवा की है कली, लेकिन फिर भी उन्हें बचा नहीं पाई। लेकिन एक बात कहना चाहती हूं कली।
मैं तुम्हें आज दिल से थैंक्स कहना चाहती हूं। क्योंकि अगर तुम इंडिया आने का प्लान नहीं बनाती तो मैं कभी वापस अपने गांव नहीं लौट पाती।
मैं कभी भी काका के अहसानो को उतारने की यह छोटी सी कोशिश नहीं कर पाती। मेरे कठिन समय में काका ने बिल्कुल एक पिता की तरह मेरा ध्यान रखा था। और उनके अंतिम समय पर मैं उनके पास बिलकुल एक बेटी की तरह पहुंच कर उनकी सेवा कर पाई। सिर्फ तुम्हारे कारण ।
अगर तुमने इंडिया आने की जिद नहीं की होती तो, मैंने कभी सोचा भी नहीं था इंडिया वापसी के बारे में। मेरी प्यारी कली थैंक यू सो मच।
मैं जल्दी ही तुम्हारे पास वापस आ जाऊंगी, और उसके बाद हम वापस लौट जाएंगे इंडिया की मीठी-मीठी यादें साथ लिए..।”
कली मुस्कुरा कर रह गयी..
” एक बात बताओ तुम्हारे डैडा को पता है कि तुम कहां हो इस वक्त..?”
” सरू, मैंने उनसे पूछा था कि मैं अपने दोस्तों के साथ एक रियासत में जाना चाहती हूं। लेकिन उनका जवाब मुझे ठीक-ठाक समझ में नहीं आया। शायद डैडा इस बात से खुश नहीं है…।”
“ओह्ह… ठीक है, मैं भी एक बार उनसे बात कर के देखती हूँ… दर्श से भी बात करनी है..।
कल से उनका फ़ोन नहीं लग रहा.. !”
“फ़ोन नहीं लगा रहा ?” कली आश्चर्य में डूब गयी..
“सरु… कहीं ऐसा तो नहीं की डैडा इण्डिया आने के लिए वहाँ से निकल गए हैं !”
यह बात दिमाग में आते हैं कली के साथ-साथ सरू के चेहरे पर भी परेशानी के भाव ऊभर आये।
वह दोनों ही अच्छे से जानती थी, वासुकी का इंडिया आना मतलब क्या था ।
कली घबराई हुई सी थी कि उनके कमरे में दस्तक हुई।
मीरा अपने पलंग पर बैठकर तरह-तरह की चीजे ठूंस रही थी, उसे खाने से ही फुर्सत नहीं थी……।
उसे इस तरह खाते देख कली को हंसी आ गयी..।
वैसे तो मीरा लम्बी छरहरी गोरी सुंदर थी, लेकिन उसका खाना देख कर कोई कह नहीं सकता था कि वो मॉडल बनना चाहती है..।
कली ने फ़ोन रखा और दरवाज़ा खोलने चली गयी..
दरवाज़े पर महल का हेल्पर खड़ा था.. उसके हाथ में एक डिब्बा था जिसे बड़ी खूबसूरती से पैक किया गया था…
“ये आपके लिए है !”
उसने डिब्बा कली की तरफ बढ़ा दिया..
“मेरे लिए.. लेकिन किसने भेजा.. ?”
उस लड़के ने मुस्कुरा कर डिब्बा कली के हाथ में पकड़ा दिया..
कली ने डिब्बा लिया और अंदर चली आयी.. बड़े खूबसूरत आसमानी रेशमी कपड़े में उस डिब्बे को बांध कर ऊपर से चांदी के रंग की ज़री और मोतियों से पैक किया गया था..
उसे डिब्बे की खूबसूरत पैकिंग देख कली मोहित हुई जा रही थी।
लेकिन उसके हाथ में डिब्बा देखकर मीरा भी एक छलांग लगाकर कली के पलंग में पहुंच गई
“सो ब्यूटीफुल! यह किसने भेजा है?”
कली ने मीरा की तरफ देखकर मुझे नहीं पता का इशारा कर दिया।
” तुम्हें कैसे पता कि तुम्हारे लिए हो सकता है? मेरे प्रिंस ने मेरे लिए भेजा हो शायद। “
मीरा ने कली को छेड़ते हुए कहा।
कली ने डिब्बे को सीधा कर मीरा की तरफ घुमा दिया उसमें एक छोटी सी गुलाब की कली लगी हुई थी, और उसके साथ ही फॉर कली लिखा था।
मीरा वहां से उठकर अपने हाथ धोने चली गई। उसके हाथ धोकर आते में कली ने उस डिब्बे को खोल लिया था। उसके अंदर वही खूबसूरत सी साड़ी थी, जिसे देखकर कली ने छोड़ दिया था ।
कली को वह साड़ी बहुत पसंद आई थी, लेकिन उसकी कीमत सुनकर कली ने उसे नहीं खरीदा था। और अब वह साड़ी उसके हाथ में थी।
कली ने अपने दोनों हाथों में साड़ी को लेकर अपने गालों से लगा लिया। उसकी रेशमी मुलायमियत में कली खोने लगी।
साड़ी के साथ ही एक छोटी सी पर्ची बाहर छिटक कर चली आई। कली ने उस पर्ची को उठाया और पढ़ने लगी
“कली यह मत सोचना कि इस तोहफे को तुम्हें देकर मैं तुम्हारा एहसान उतार रहा हूं। पिछले चार-पांच दिन जो मैं तुम्हारे साथ दिल्ली में गुजार कर आया हूं, उन दिनों का कोई बदला मैं जिंदगी भर नहीं चुका सकता।
किसी कीमत पर भी नहीं। वह सारी बहुत बेश कीमती यादें हैं,जो मेरे ज़हन में हमेशा बसी रहेंगी। मेरी जिंदगी में आने वाली तुम वह पहली लड़की हो, जिसे यह नहीं मालूम था कि मैं प्रिंस हूं।
महामहिम राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का इकलौता बेटा शौर्य हूं।
और इसके बावजूद तुमने मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने दी। ना मेरे खाने पीने में और ना मेरे पहने ओढने में। इसीलिए एक बार फिर कह रहा हूं कि इसे मेरा एहसान मत समझना।
यह बस एक छोटा सा,टोकन ऑफ फ्रेंडशिप है। हमारी दोस्ती की शुरुआत के लिए,
कली मुझसे दोस्ती करोगी…?”
शौर्य!!
कली ने प्यार से उस पर्चे को अपने गालों से लगा लिया..
“क्या है ये ? किसने भेजा ?”
मीरा हाथ धोकर धमक पड़ी.. कली ने उसे देखते ही उस पर्चे को छुपा लिया..
“नहीं किसी ने नहीं.. वो.. बस !”
मीरा ने एक उचटती सी नजर उस साड़ी पर डाली और घडी पर वक्त देख अपना लम्बा चौड़ा सा मेकअप बॉक्स खोल कर तैयार होने बैठ गयी..
शाम को पार्टी थी और हर कोई उस पार्टी में जाने के लिए उत्साहित था..।
लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि उस पार्टी में कितना कुछ बदलने वाला था..
क्रमशः
aparna…

क्या होने वाला है यह जानने को उत्सुक बैठा हूं दीदी, कली को दोस्ती का प्रस्ताव मिला है पर वासुकी भी आ रहा है सारू भी पहुंच ही जायेगी, क्या होने वाला है, किसने भेजा है मीरा को, क्या है राज इस बड़ी हवेली में पढूंगा अंतराल पर, लेकिन उत्तम भाग रहा दीदी…💐🙏
पार्टी में क्या क्या बदलने वाला है, क्या है राज मीरा का किसने भेजा है उस चोरनी को और रियाल मीठी को पाने के लिए झूठ का सहारा क्यूं ले रही है, इन सारी बातों का राज खुलेगा अगले भाग में पर यह अच्छा भाग रहा दीदी 💐🙏
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐