जीवनसाथी -3 भाग -56

जीवनसाथी -3 भाग -56

जीवनसाथी by aparna

     खाने पीने के बाद रूपा ने सबको कह कर सराफा और कपड़ो के व्यापारियों को अपने महल में ही बुला लिया..
ये वैसे भी महल की पुरानी रीत थी… बड़े से बड़ा दुकानदार भी महल के बुलौवे पर अपना सारा तामझाम समेटे महल चला आता था.. ।

अब हालाँकि हर्ष शौर्य की जनरेशन के लोगो को ये सब पसंद नहीं आता था, लेकिन आज वक्त कम था, और सब आराम भी करना चाह्ते थे। इसलिये रूपा की बात सभी ने मान ली..

बड़े से दीवानखाने में सारा सामान पसरा था और लोग अपनी अपनी सुविधानुसार देख परख रहे थे..

कली के लिए ये सब बहुत नया था… उसकी समझ से बाहर था कि क्या ले क्या नहीं..
वो चुपचाप एक सोफे पर सिमटी बैठी थी..।
लेकिन मीरा बड़ी रूचि लेकर कपड़ो को अलट पलट कर रही थी..

“क्या हम भी शॉपिंग कर सकते हैं.. ?” उसने चेहरे पर मासूमियत लाकर रूपा से सवाल किया..
रूपा को मीरा बड़ी पसंद आयी थी.. उसने बड़े प्यार से हामी भर दी..
रूपा की नजर में किसी लड़की का सबसे बड़ा गुण उसका गोरा उजला रंग था..। रूपा को प्रभावित करने की पहली सीढ़ी यही थी और मीरा चमचमाता कांच थी, जिसे रूपा हीरा समझने की भूल कर रही थी….।

कली के बाजु में मीठी भी थी.. वो अपनी माँ को फ़ोन लगा रही थी, लेकिन निरमा का फ़ोन व्यस्त आ रहा था..

मीठी को व्यस्त देख रियाल उठकर हर्ष के बाजू में चली आई। हर्ष के साथ बैठी रूपा उसके लिए कपड़े पसंद कर रही थी। हालांकि हर्ष की समझ से बाहर था कि रूपा कुछ खास रंगों को उसके लिए क्यों पसंद कर रही है ।
फिर भी अपनी माँ की ख़ुशी के लिए हर्ष कुछ भी कर सकता था। फिर यहाँ तो सिर्फ कपड़े ही पसंद करने थे..।

रूपा बड़े प्यार से उसके लिए सुनहरी ज़री के काम का कपडा देख रही थी। चुन रही थी, और वो मन ही मन अपनी मां के उत्साही चेहरे को देखकर मुस्कुरा रहा था। उसी समय शौर्य उसके करीब चला आया। हर्ष के पीछे खड़े होकर उसने उसके दोनों कंधों पर अपनी बाहें टिका दी..

“क्या बात है रानी मॉम.. मुझे तो लग रहा है आप हर्ष भाई की शादी का जोड़ा पसंद कर रही है..!”

हर्ष ने मुस्कुराकर शौर्य की बांह पकड़ी, और उसे अपने बगल की कुर्सी पर बैठा लिया, धीरे से उसके कानों के पास आकर हर्ष कुछ बोल गया..

” मुझ पर बाद में ध्यान देना, पहले अपनी दोस्त पर तो ध्यान दो। वह बहुत देर से एक कोने में अकेली बैठी बोर हो रही है..!”

“ओह्ह हाँ.. एक्चुली.. वो.. !”

“क्या.. तुम तो ऐसे शर्मीले नहीं थे, अचानक क्या हो गया.. !”

“कुछ नहीं भाई.. मैं मॉम को भेजता हूँ उसके पास.. !”

शौर्य के ऐसा कहते ही हर्ष भी मुस्कुरा उठा..
रूपा ने शौर्य के लिए खरीद रखे कपड़ो से मिलते रंग की ड्रेस देखना शुरू कर दिया, और उसके लिए वो उठ कर वहाँ से दूसरी तरफ चली गयी..

और उसी वक्त रियाल उठ कर हर्ष के पास आ कर बैठ गयी..

“बड़ी सारी शॉपिंग की जा रही है मिस्टर गोल्डन स्पून !”

“आप भी कर लीजिये !”

“मुझे दुसरो के पैसे पर ऐश करने का शौक नहीं है, मीठी की तरह !!”..

रियाल की कही आखिरी पंक्तियाँ सुन कर हर्ष चकित रह गया.. उसने तो सोचा था रियाल नखशिखांत मीठी के प्यार में डूबी हुई है, लेकिन मीठी के लिए उसका ऐसा कहना अजीब था..

“मतलब ?”

“मतलब ये कि वो आपसे आपके रॉयल ब्लू ब्लड के कारण ही जुडी है, वरना मुझे तो आपमें ऐसी कोई खूबी नजर नहीं आती !”

“आपको नजर नहीं आती, क्यूंकि आपका नजरिया ज़रा अलग सा है.. बाकी खूबियां खुद की मैं क्या गिनाऊँ, मेरे साथ साथ रहो मुझे जान जाओगी !”

“ओह्हो.. क्या बात है.. लाइन मार रहे हो मुझ पर मिस्टर गोल्डन स्पून !”

“ज़रूरत नहीं है.. क्यूंकि लड़कियों के लिए बचपन से दिल में इज्जत की भावना रही है… हमारे यहाँ यही सिखाया गया है कि हर किसी का सम्मान करना चाहिए..
बाकी बची लाइन मारने की बात, तो मुझे कभी ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी.. !”

“हम्म खुद ही लड़कियाँ लट्टू हो जाती है तुम पर, ये कहना चाह्ते हो ?”

हर्ष मुस्कुराने लगा..

“सबकुछ तो आप खुद कह दे रही है.. मेरे कहने के लिए बाकी क्या बचा ?”

“वाओ ये जेंटलमेन स्माइल, ये सॉफ्ट ऐटिट्यूड, ये कल्चर्ड बिहेवियर, इनके जलवे कहीं और दिखाना.. मैं जानती हूँ तुम जैसे लड़के आखिर में चाह्ते क्या हो..।
कितना भी दोस्ती का परपंच ओढ़ लो, आखिर में लेकर तो तुम मीठी को भी अपने बिस्तर तक ही जाना चाह्ते हो.. !”

हर्ष के माथे पर बल पड़ गए.. उसे रियाल की ये आखिरी बात बिलकुल पसंद नहीं आयी..
उसकी समझ से बाहर था कि इस लड़की को उससे आखिर समस्या क्या थी..

“तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है ?”

“अब आये ना लाइन पर.. अब तक आप आप बोल कर जो मुखौटा अपने चेहरे पर लगा रखा था, अब हटा है चेहरे से.. सुन लो मिस्टर रॉयल ब्लड तुम्हारी उस सोच को कभी पूरा नहीं होने दूंगी.. !”

“किस सोच को ?”

“मीठी को अपने कमरे तक लेकर जाने की तुम्हारी ख्वाहिश कभी पूरी नहीं होगी.. !”

हर्ष ने बड़े गौर से रियाल को देखा..

“चुनौती स्वीकार ली.. !”  हर्ष ने हल्के से मुस्कुरा कर कहा… और रियाल आंखे फाडे उसे देखने लगी…

“व्हाट ? क्या,कौन सी चुनौती ?”

“मीठी को अपने कमरे तक क्या अपने दिल, अपनी रूह तक लेकर जाऊंगा…
और प्रॉमिस करता हूँ तुमसे, मीठी को अपनी बाँहों में उठा कर तुम्हारे सामने से अपने कमरे तक लेकर जाऊंगा… मिस बैड टेम्पर !”

रियाल ने एक तरफ की भौंह को ऊपर कर ध्यान से हर्ष की तरफ देखा..

“मुझे चैलेन्ज कर रहे हो ?”

“तुमसे तो मेरी कोई प्रतिस्पर्धा ही नहीं… एक्चुली मीठी के लिए मेरे साथ रेस में कोई खड़ा ही नही है… तुम ज़बरदस्ती इस रेस का हिस्सा बनने पर आमादा हो, मैं क्या कर सकता हूँ.. !”

” तो ठीक है मिस्टर गोल्डन स्पून, तुम भी देखते  रह जाओगे, मैं तुम्हारे इस राजमहल में तुम्हारी नाक के नीचे से मीठी को अपने साथ ले जाऊंगी और तुम कुछ कर भी नहीं पाओगे। मेरे इमोशंस के सामने मीठी ऐसे बह जाएगी कि वह मुझे छोड़ ही नहीं पाएगी…!”

” अपने ऊपर विश्वास होना चाहिए लेकिन जब आत्मविश्वास घमंड में तब्दील होने लगता है ना तो इंसान कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, सिर्फ एक झटका लगने की देर होती है वह वहां से फिसल कर ऐसे नीचे गिरता है कि सीधे कमर टूटती है।
इसलिए तुम्हारे लिए तुम्हारे कमरे में रात को दूध के साथ कैल्शियम की दवा भी भेज दूंगा ।
क्योंकि जल्दी ही तुम्हारी भी, अकड़ और  कमर टूटने वाली है, मिस ओवर एरोगेंस ….!”

” यह तो वक्त ही बतायेगा कि किसकी कमर टूटेगी और किसका बचपन का ख्वाब टूटेगा..!”

” चलो तुम इतना तो मानती हो कि वह मेरी बचपन की मुहब्बत है। पर देखो कैसा अजब इत्तेफाक है, तुमने इतने कम समय में मेरी आंखों में वह देख लिया जो आज तक मीठी नहीं देख पाई।
   या शायद तुम्हारे कारण वह जानबूझकर देखना नहीं चाहती। पर मैं जानता हूं एक दिन तुम ही हमारी मुहब्बत की गवाह बनोगी… !

वो फूलों सी आयी, मुझे बाग़ कर गयी..
मेरे हर नापाक इरादे को पाक कर गयी.. !!

खैर तुम्हे मेरे अल्फ़ाज़ समझ में नहीं आये होंगे.. है ना ?”

रियाल ने हर्ष के हाथों पर अपना हाथ रख कर थपथपाया और हर्ष ने बदले में उसकी हथेली थाम कर गर्मजोशी से हाथ मिला लिया..
रियाल के चेहरे का रंग बदल गया…।

उसने ज़रा पीछे बैठी मीठी की तरफ देखा। इत्तेफाक से मीठी उस वक्त हर्ष और रियल की तरफ ही देख रही थी, रियाल ने मीठी को देखने के बाद हर्ष के हाथ से जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया और उठकर मीठी की तरफ हाथ हिला दिया। असल में मीठी दो तीन बार अपनी मां को फोन लगा चुकी थी, लेकिन उसके फोन से उसकी मां का फोन नहीं लग रहा था। वह दूर बैठी रियाल और हर्ष को बात करते देख ही रही थी।

वह सोच रही थी कि उठकर उन लोगों के पास चली जाए, उतनी देर में बांसुरी मीठी के पास चली आई। और आते ही मीठी के बालों पर प्यार से हाथ फेर कर मुस्कुराकर वह मीठी और कली के पास बैठ गई।

    “मीठी, निरमा का कॉल आया था। उसे अचानक अपनी यूनिवर्सिटी के काम से बाहर जाना पड़ रहा है। और वह शायद आज रात तक नहीं आ पाए। उसके फोन में नेटवर्क का इशू हो रहा था, इसलिए वह तुमसे बात नहीं कर पाई। आज सुबह से यूनिवर्सिटी में वह बहुत व्यस्त थी, और इसीलिए तुमसे मिलने भी नहीं आ पाई।
वह खुश थी कि तुम मेरे पास हो, और उसने मुझसे यही कहा है कि आज रात तुम यहां महल में मेरे पास रह सकती हो।
    अब तो खुश हो ना, अब तो निश्चिंत होकर रुक सकती हो।”

मीठी ने हामी भर दी। कली भी जाने क्यों लेकिन खुश हो गई। उसे मीठी के साथ रहना पसंद आ रहा था।

     शौर्य तो वैसे भी इतने बड़े महल में उसे छोड़कर गायब ही हो गया था। बांसुरी अपने हाथ में लंबे-लंबे पार्टी गाउंस लेकर आई थी।
     एक बॉटल ग्रीन था और दूसरा सुनहरा था। उसने उन दोनों के सामने उन पार्टी गाउंस को फैला दिया।

” अब इसमें से तुम दोनों अपनी पसंद का चुन लो। वैसे यह दोनो मुझे बहुत पसंद आए थे। इसलिए मैं तुम दोनों के लिए उठा कर ले आई। बाकी वहां पर बहुत सारे फैले पड़े हैं। तुम लोग जाकर अपनी पसंद का भी देख सकती हो..।”

कली और मीठी दोनों ही मुस्कुरा कर रह गए। दोनों ने एक दूसरे को देखा और दोनों के मुंह से एक साथ एक ही बात निकली।
  ” पहले आप पसंद कर लीजिए।” दोनों हंस कर रह गई बांसुरी ने एक नजर दोनों पर डाली और फिर कहा

” मैंने जिसके लिए जो लाया था, उसे दे देती हूं।
बाकी तुम दोनों की मर्जी।”

बांसुरी ने सुनहरे गाउन को मीठी के कंधे पर डाल दिया और गहरे हरे बॉटल ग्रीन गाउन को कली के कंधे पर डाल दिया..

“अब तुम दोनों देख लो, तुम दोनों को यह गाउन पसंद आते हैं या नहीं?”

कली को वह रंग बहुत पसंद आ रहा था। उसने बांसुरी की तरह देखा और बड़ी विनम्रता से उसे आभार व्यक्त कर दिया।

” थैंक्स मैम।”

बांसुरी ने प्यार से मुस्कुरा कर उसे देखा और मीठी की तरफ देखने लगी। बांसुरी को बचपन से ही मीठी से बहुत ज्यादा लगाव था…
बांसुरी को मीठी में हमेशा उसकी मां निरमा और उसके पिता प्रेम की ही झलक मिलती थी, और उन दोनों से ही बांसुरी का रिश्ता बेहद गहरा था। निरमा जहां उसकी सबसे खास सहेली थी, वहीं प्रेम राजा साहब का सबसे अभिन्न मित्र था। उन दोनों का अंश मीठी उसके लिए इसीलिए बहुत खास थी।

मीठी को हमेशा बांसुरी ने अपनी बेटी माना था। शौर्य और मीठी उसके लिए सगे भाई बहन जैसे ही थे। बस जाने किस घड़ी उसके दिमाग में एक बात आ गई थी कि काश हर्ष और मीठी का विवाह हो सकता।
अगर ऐसा हो जाता तो उसकी प्यारी मीठी हमेशा के लिए उसके इस महल का हिस्सा बन जाती। लेकिन वह जानती थी कि ऐसा होना असंभव है।

    रूपा और युवराज सा कभी भी अपनी रूढ़ियों को एक तरफ कर आगे बढ़ने के इच्छुक नहीं थे। युवराज सा तो फिर भी एक बार हर्ष की खुशी के लिए शायद मान भी जाए ,लेकिन रूपा के लिए यह सोचना असंभव था और इसीलिए बांसुरी ने इस रिश्ते की तरफ से अपना मन हटा लिया था।
वह जानती थी कि रूपा ने प्रियदर्शनी को हर्ष के लिए चुन लिया है, और प्रियदर्शनी किसी भी एंगल से हर्ष के समकक्ष ना हो ऐसा नहीं था। हर्ष और प्रियदर्शनी एक साथ खड़े होने पर बिल्कुल “मेड फॉर ईच अदर” वाला कपल ही नजर आते थे। और यही सोच कर बांसुरी ने अपने मन के विचारों को कहीं दूर धक्का दे दिया था।

    मीठी को देखते हुए बांसुरी की आंखों में हल्की सी नमी चली आई। लेकिन फिर उसने खुद को यह सोचकर मना लिया कि जब मीठी और हर्ष के मन में ही एक दूसरे के लिए कोई भाव नहीं तो वह क्यों दुखी हो रही है? उसने दूर बैठे हर्ष पर नजर डाली, वह रियाल के साथ बातों में मग्न था। बांसुरी अभी कुछ और सोचती कि उसके पहले शौर्य ने उसे आवाज दे दी। वह भी अपनी जगह से खड़ी हो गई..

“अब मैं जाती हूं शौर्य के पास.. उसने जरूर चार पांच शर्ट पसंद करके रखी होगी, मैं उससे यही कहती हूं कि जब तुझे पसंद आ रही है तो ले ले, लेकिन नहीं वह पहले मुझे छठवाएगा। मैं दो या तीन पसंद करूंगी और उसके बाद वह उन सारी कमीजों को उठा कर ले आएगा अजीब पागल बच्चा है मेरा..।”

बांसुरी उठ कर चली गयी..
लेकिन जाते-जाते वह अपने साथ कली और मीठी को भी लेकर चल पङी।

    “तुम दोनों भी अपनी पसंद से कुछ ले लो। यह तो मेरी पसंद का तोहफा था तुम्हारे लिए। तुम दोनों को जो भी पसंद हो, वह चुनकर हेल्पर के हाथ में दे देना..।”

कली और मीठी भी कपड़ों की उस भीड़ भाड़ में जाकर बैठ गई।

कली कपड़ों को अलट पलट कर देखने लगी। लेकिन मीठी का दिमाग हर्ष और रियाल की तरफ ही लगा हुआ था। वह उठकर धीरे से उन लोगों के पास चली आई। वह जैसे ही उन लोगों तक पहुंची, रियाल ने हाथ बढ़ाकर मीठी का हाथ थाम लिया..।

मीठी उन दोनों के बीच की कुर्सी पर बैठने जा रही थी कि रियाल ने उस कुर्सी को अपनी तरफ खींच लिया..
मीठी का हाथ थामे हुए उसने उसे वहाँ बैठाया और उसके बैठते ही उसकी हथेली चूम ली..
रियाल ने ऐसा करने के बाद हर्ष की तरफ देखा, हर्ष उसे ही घूर रहा था..
लेकिन मीठी रियाल की इस हरकत पर हर्ष के सामने कट कर रह गयी…..

हर्ष ने रियाल को देख एक ठंडी सी साँस भरी और मीठी से कुछ पूछने को था कि उसके पहले रियाल बोल पड़ी..

” मीठी तुम्हारे फ्रेंड हर्ष जी तो वाकई रॉयल ब्लू ब्लड है। देखो ना इतनी देर से मुझे इतनी अच्छी कंपनी दे रहे हैं। बार-बार पीछे पड़े हुए हैं कि इन इतने महंगे कपड़ों में से मैं कुछ पसंद कर लूं। और मुझे कुछ पसंद ही नहीं आ रहा। यह भी कह रहे हैं कि मैं यहीं रुक जाऊं… अब मैं तुम्हारे बिना तो रुकूंगी नहीं.. लेकिन ये मानने को तैयार नहीं हैं.. कहते हैं, मैं उनकी भी मेहमान हूँ….।”

रियाल मुस्कुरा रही थी, हर्ष चकित सा उसे देख रहा था की तभी मीठी बोल पड़ी..

“हाँ रियाल, मुझे भी यही रुकना है.. आज मम्मा को यूनिवर्सिटी के काम से बाहर जाना पड़ गया है.. उन्होंने मासी को कॉल किया था कि मुझे अपने साथ महल में रुकवा ले..

रियाल के चेहरे पर भाव आये और चले गए…

उसने हर्ष की तरफ देखा, हर्ष मुस्कुरा कर मीठी की तरफ देख रहा था..

“बचपन से महल से जुडी हो फिर भी, यहाँ रुकने के लिए इतना सोचती हो.. ! हम सब को ख़ुशी होगी तुम्हारे रुकने से !”

“और मेरे रुकने से ?” रियाल ने हर्ष की आँखों में झांक कर पूछा..

“तुम्हारे रुकने से भी ख़ुशी ही होगी.. आखिर मीठी की दोस्त हो !”

हर्ष को उसी वक्त उसकी माँ ने पुकारा और वो वहाँ से उठ कर चला गया..

***

कली ने पतली शिफॉन की साड़ी हाथ में थाम रखी थी.. हलकी पीच रंग की साड़ी पर उसी रंग से फूल बने थे.. साड़ी बहुत सुंदर दिख रही थी..

कली के हाथ में उस साड़ी को देख साडी दिखाने वाले भैया ने उस साड़ी की तारीफ कर दी..

“देख लीजिये बेबी जी.. गज़ब का सामान हाथ में रखा है आपने.. बिलकुल मक्खन मलाई सा कपड़ा है.. गाल पे लगा के देखिये, कितना रेशम सा एहसास होगा..
दाम भी सही है.. ज्यादा तो हम लगाते ही नहीं.. और आप महल वालो के लिए एकदम सही दाम में है.. सिर्फ सत्तर में.. !”

“सत्तर.. ?”

“सेवेंटी बेबी जी.. !”

“सेवेंटी व्हाट ?”  कली के लिए हिंदी की गिनती उतनी कठिन नहीं थी जितनी दुकानदार की बातों के लच्छे… उसे लगा मात्र सत्तर रूपये में साड़ी कैसे मिल सकती है, की तभी उस दुकानदार ने बम फोड़ दिया..

“ओनली सेवेंटी थाउज़ंड !”

कली की आंखे चौड़ी हो गयी.. -“रियली ?”

“यस बेबी जी.. ! आप कपडा देखो, कितना शानदार है.. !”

लेकिन कली को सत्तर में साडी बड़ी महंगी लगी.. वैसे भी वो अपने डैडा की तय की हुई लिमिट से आगे बढ़ चुकी थी..
इसलिए उसने साड़ी एक तरफ रखी और हाथ झाड़ कर उठ खड़ी हुई.. इधर उधर नजर मार कर उसने मीठी को ढूंढा, और उसके पास चली गयी..

उसके जाने के बाद शौर्य वहाँ आया और उस साड़ी को हाथ में लेकर हल्के से मुस्कुरा उठा….

क्रमशः

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

हर्ष और रियाल का तला तम तला तम चल रहा है, मीठी को बांसुरी पसन्द करती है, लेकिन रूपा, पर रूपा भी क्या करेंगी जब लड़का ही मीठी पर फ़िदा है, शौर्य ने साड़ी ले ली है पर रूपा को मीरा जमी, छी, पर भाग अच्छा था दीदी…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐