जीवनसाथी -3 भाग -47

उस वक्त अस्पताल में एक बार फिर कोहराम मचा और एक के पीछे एक लंबी-लंबी गाड़ियों का काफिला सा जाकर अस्पताल में रुक गया…
चारों तरफ होड़ मच गई! इधर-उधर से आवाज आने लगी और वह आवाजें कली के कानों में भी पड़ने लगी! राजा साहब आ गए, रानी बांसुरी आ गई!
राजा साहब आ गए…
पता नहीं यह नाम सुनते ही कली के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान चली आई! वह फौरन अपनी जगह से उठी और एक तरफ बने वॉशिंग एरिया में चली गई… वॉशरूम में जाकर अपने चेहरे पर ढेर सारा पानी डालकर उसने अपना चेहरा पोछा और बाहर चली आई…
उसका राजा साहब को सामने से देखने का सपना पूरा होने वाला था…
अपनी भीगी पलकों के साथ ही वो उस भीड़ का हिस्सा बन गयी, जो राजा साहब और रानी बांसुरी को देखने खड़ी थी…
वो भी बाकियों के साथ उस रेले को देखने लगी…
उसके साथ ही विक्रम भी खड़ा था….
उसे इस बात का ढांढस था की कोई है उसके साथ…
लेकिन राजा साहब के उधर से गुजरने के साथ ही एक गार्ड ने बड़ी गहराई से उसके बगल में खड़े विक्रम की तरफ देखा और विक्रम ने आँखों ही आँखों में उस इशारे का कुछ जवाब भी दे दिया..
कली आश्चर्य से उस गार्ड और विक्रम की आँखों ही आँखों में होते इशारे देख रही थी..
उसने चेहरा विक्रम की तरफ घुमाया और विक्रम कली को देख मुस्कुरा उठा..
“मैं लिटिल मास्टर का स्पेशल सिक्योरिटी गार्ड हूँ… वो भी नहीं जानते मुझे ! असल में हमारे प्रिंस को अपने साथ गार्ड्स की फ़ौज लेकर चलना पसंद नहीं है… बस इसीलिए वो सबसे पीछा छुड़ा जार भागते रहते हैं… इसीलिए मुझे नियुक्त किया गया था की यहाँ मैं हर कदम पर उनके आसपास नियुक्त रहूं !”
कली मुहं फाडे विक्रम को देख रही थी..
“जब आप मौजूद थे फिर उन्हेँ गोली कैसे लगी ?” कली का दुःख उसके शब्दों में महसूस किया जा सकता था.. विक्रम को भी उस भोली नाजुक सी लड़की ओर तरस आ रहा था.. पर वो भी जानता था की महल के कायदो कानून में ये लड़की उलझ कर रह जाएगी…
उसी समय विक्रम वापस उस गार्ड की तरफ देखने लगा.. उसने इशारे से विक्रम को बुलाया और कली की बात का जवाब दिए बिना ही विक्रम उस रेले में शामिल हो गया…
राजा साहब और रानी बांसुरी को घेर उनके गार्ड्स आगे बढ़ रहे थे..
गार्ड्स ने उन दोनों को इस तरह से घेर रखा था कि उन्हें देखना मुश्किल था! बावजूद राजा साहब की लंबाई इतनी थी कि गार्ड्स से घिरे होने के बावजूद उनका चेहरा नजर आ रहा था!
कली की नजर उन पर टिकी हुई थी! राजा साहब को सामने से देखकर बिल्कुल ऐसा लगा जैसे शौर्य ही सामने से चला आ रहा है..।
आश्चर्यजनक साम्य था, दोनों पिता पुत्र के चेहरे में !!
आज से कुछ दो-चार साल बाद शौर्य बिल्कुल ऐसा ही नजर आएगा! वही चेहरा, वही गोल-गोल बड़ी-बड़ी गाय जैसी आंखें!
ऊपर को घूमी हुई पलकें! वही सुतंवा नाक, और बिल्कुल किसी ग्रीक गॉड जैसा चौड़ा सुंदर चेहरा…।
बालों के रखने का तरीका जरूर बाप बेटे का बहुत अलग था। जहां शौर्य के माथे पर उसके बाल बेतरतीबी से इधर-उधर गिरे रहते थे, चेहरे पर हल्की-हल्की दाढ़ी रहती थी। वहीं राजा साहब के बाल बिल्कुल उनके पद की गरिमा को बनाते हुए जेल लगाकर सलीके से सेट किए हुए थे..।
चेहरा सद्य:स्नाता किशोरी की त्वचा सा चिकना चमक रहा था! उनके प्रशस्त ललाट पर आँखों के ठीक बीचोबीच एक पुराने ज़ख्म का लम्बा सा निशान था, जो बिलकुल महादेव की तीसरी आंख सा नजर आता था..।
ये निशान भी ठाकुर साहब का दिया निशान था..।
एक बार रानी रूपा ने कहा भी था.. -“कुमार आप इस निशान की सर्जरी करवा कर इसे मिटा क्यों नहीं देते ?”
“भाभी सा कुछ स्कार शरीर पर ही नहीं मन पर भी बन जाते हैं और उन्हेँ किसी भी प्लास्टिक के उपयोग से हटाया नहीं जा सकता..
ये स्कार भी रहने दीजिये, ये मुझे याद दिलाता है की हर किसी पर आंख मूँद कर भरोसा नहीं करना चाहिए !!
लोग अपना बन कर कैसे पीठ में छुरा चलाते हैं ये जाना है मैंने… और ऐसे गद्दारों को जानने की ये कीमत फिर भी छोटी ही है !”
“बात तो सही है कुमार लेकिन.. !”
“अरे अब क्या लेकिन.. कौन सा मेरी शादी नहीं हुई जो आप इस स्कार के कारण परेशान हो रही है.. आपकी देवरानी को मैं हर रूप में पसंद हूँ… चाहे तो पूछ लीजिये !”
वहीँ बैठी बांसुरी ने मुस्कुरा कर अपने हाथों से अपने पति की बलैय्या लेकर अपने कान के पास अपनी उँगलियाँ चटका ली थी…
रूपा उन दोनों को देख मुस्कुरा उठी थी..
वैसा कोई निशान शौर्य के चेहरे पर नही था….
उसका चेहरा बिलकुल साफ़ था आज के शब्दों में कहें तो फ्लॉलेस…
कली अपलक राजा साहब को देख रही थी.. लेकिन राजा साहब का ध्यान कहीं नहीं था..!
उलझे हुए से वो तेज़ी से कदम बढ़ाते चले जा रहे थे..
अपने एक हाथ में उन्होंने अपनी पत्नी का हाथ थाम रखा था..।
रानी साहब गार्ड्स से घिरे होने के कारण बाहर से देखने पर नजर नही आ रहीं थी.. …
लेकिन वो दोनों ही लोग तेज़ी से चले जा रहे थे..
अस्पताल का स्टाफ राजा साहब और रानी सा की एक झलक पाने को बेक़रारा हुआ जा रहा था..।
लेकिन सिर्फ चुने हुए स्टाफ को ही अंदर आने की अनुमति थी…
बाकि लोग एकदूसरे पर गिरते पड़ते झांक झांक कर दूर से ही राजा रानी की झलक पाने को बेताब हुए जा रहे थे..।
राजा साहब और रानी सा उस कॉरिडोर से होकर तेज़ी से निकल गए और कली वहीँ एक तरफ खड़ी रह गयी…
एक खुशबु का भीना सा झोंका उसे छूकर गुज़र गया..।
राजा साहब और रानी सा के आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और चाकचौबंद हो गयी थी..।
अब तो लग रहा था, एक परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता। आखिर राजा साहब का बेटा अस्पताल में भर्ती था।
विजय राघव गढ़ रियासत का राजकुमार था वहां। उसे ऐसे कैसे बिना सुरक्षा के रखा जा सकता था…।
भले ही पिछले चार दिन से महल का राजकुमार अपनी सिक्योरिटी को चकमा देकर अकेला घूम रहा था, लेकिन अब जब उसका पता ठिकाना मिल चुका था, तब ऐसे में उसकी सुरक्षा का पूरा दायित्व उन गार्ड्स पर आ चुका था….
राजा साहब और बांसुरी अंदर दाखिल हो गए..।
“आ गए आप.. ?
आइये आइये राजा साहब.. देखिये आपके साहबज़ादे का क्या हाल है..।
ये है आपकी सिक्योरिटी.. ?
वो तो हमने ढूंढ़ लिया लिटिल मास्टर को, वरना आपके निकम्मे प्रेम बाबू की निठल्ली सेना किसी काम की नहीं.. !”
अपूर्व अपना ज़हर उगलता खड़ा था…।
बीच बीच में अपनी छोटी कुटिल आँखों से वो शौर्य की तरफ देख भी लेता था..
राजा साहब और रानी सा के अंदर आते ही उसने बोलना शुरू कर दिया था, पर उसकी बकवास बिना सुने ही भाग कर बांसुरी अपने शहज़ादे के पास पहुँच गयी और उसे अपने गले से लगा लिया..
शौर्य भी अपनी माँ के गले से लगा सुकून की साँस लेने लगा..
राजा साहब उसके पास पहुँच कर चुपचाप उसके बालों पर हाथ फेरते खड़े थे..
बांसुरी की आँखों से लगातार आंसू गिर रहे थे….।
शौर्य भी अपनी माँ को रोते देख रोने को हो रहा था, लेकिन उसने मुश्किल से सही अपनी रुलाई रोक रखी थी…
उसे मालूम था उसकी माँ उसे रोते नहीं देख सकती.. !
राजा साहब ने उसके माथे पर फैले बालो पर अपना हाथ फेरा और उससे मुखातिब हुए..
“कैसे हो चैम्प ?”
“ठीक हूँ.. !”
शौर्य ने छोटा सा जवाब दिया और चुप हो गया..
बांसुरी धीरे से उससे अलग हुई और उसके बारे में पूछताछ करने लगी… !
पर अपने बेटे की हालत देख उसके आंसू रुक नहीं रहे थे..!
पता नहीं ब्रम्हा ने किस कलम से, कैसी तकदीर लिखी थी उसकी..!
हर वक्त पति के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता के साथ अब अपने बेटे के स्वास्थ्य सुरक्षा की चिंता भी उसके रात दिन का सरदर्द बन गयी थी…!
उसने धीमे से शौर्य का माथा चूम लिया..!
“आज डिस्चार्ज तो कर देंगे ना ?” बांसुरी ने वही खड़े डॉक्टर से पूछा और डॉक्टर के बदले जवाब दिया अपूर्व ठाकुर ने !
” हां हां कैसे नहीं करेंगे? अस्पताल का एक पूरा हिस्सा शौर्य के साथ महल चला जाएगा! आप चिंता ना करें रानी हुकुम !”
” नहीं नहीं, मुझे ऐसी भी कोई जल्दी नहीं! अगर डॉक्टर मना करेंगे तो मैं हॉस्पिटल में भी शौर्य के साथ रह सकती हूं…!”
” आप इतना क्यों सोच रही हैं हुकुम कीजिए बस!”
अपूर्व ने ऐसा बोलकर डॉक्टर की तरफ देखा और डॉक्टर ने हामी भर दी.. !
“माँ… आपसे कुछ कहना है.. !”
शौर्य ने बांसुरी की तरफ देखकर कहा..
बांसुरी ने प्यार से उसके माथे पर हाथ फेरा और पीछे पलट कर बाकी सब की तरफ देखने लगी! एक-एक करके सारे ही लोग बाहर निकल गए!
राजा साहब जानते थे, उनका इकलौता राजकुमार उनसे बहुत पर्दादारी करता है…
वह अपनी मां से जितना घुला मिला था, उनसे उतना ही दूर था! और इसलिए उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए राजा साहब भी कमरे से बाहर निकल गए!
मुश्किल से पांच सात मिनट के भीतर ही बांसुरी भी बाहर निकल आई..
राजा साहब ने इशारे से बांसुरी से पूछा और बांसुरी ने ना में गर्दन हिला दी, और राजा साहब और बाकी लोगों को कमरे में भेज दिया।
अपूर्व ठाकुर का माथा ठनका जरूर, लेकिन इस वक्त वह राजा साहब और उनके बेटे को अकेले नहीं रहना देना चाहता था। इसलिए राजा साहब के साथ-साथ वह भी शौर्य के कमरे में दाखिल हो गया। बांसुरी कमरे से बाहर दूसरी तरफ निकल गई….
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कली समझ चुकी थी कि अब उसका शौर्य से दुबारा मिलना सम्भव नहीं है…!
महल के सारे लोग यहां जमा हो चुके हैं। ऐसे में उस जैसी साधारण लड़की से शौर्य मिलना भी क्यों चाहेगा?
हां उसका सपना जरूर एक झटके में पूरा हो गया था। और बस इसी बात की तसल्ली करके अब उसे यहां से लौटना होगा। भारी मान और थके कदमों से कली चुपचाप अस्पताल की सीढ़ियां उतरकर बाहर चली आई थी।
लल्लन ने उसे रोकना चाहा लेकिन वह समझ गई थी कि अब उसके रुकने का कोई फायदा नहीं है।
वह धीमे-धीमे कदमों से अस्पताल से बाहर की तरफ निकल रही थी कि तभी उसे अचानक याद आया कि उसने लल्लन को पैसे तो दिए नहीं। वह वापस मुड़ी और लल्लन के पास चली गई। अपना बैग खोलकर उसने बिना गिने ही मुट्ठी भर नोट निकाले और लल्लन के हाथ में रख दिये..
“अरे जिज्जी, इन पैसों की जरूरत नहीं है।”
” कैसे जरूरत नहीं है लल्लन भैया? आपने बहुत मदद की है हमारी ।”
“आपको जिज्जी कहा है। आपसे और मेहमान जी से हम रुपया थोड़ी ना लेंगे। अरे कमाने के लिए हमारे पास और भी तरीके हैं। आपसे तो अब रिश्ता बन गया जिज्जी। “
“नहीं लल्लन भैया, यह रुपए रख लीजिए प्लीज..।”
वो और कुछ नहीं बोल पायी…
कली की भीगी हुई सी पलकें देख लल्लन मना नहीं कर पाया और उसने वह रुपए रख लिए!
गुड्डन को घर जाने में देर हो रही थी, इसलिए उसने पहले ही उसे भेज दिया था! अब लल्लन समझ गया था उसका भी वहां रुकने का कोई औचित्य नहीं था..
उसने भी विक्रम को गार्ड्स में शामिल होता देख लिया था.. वो और कली समझ चुके थे, इतनी देर से उनके साथ घूमने वाला वो साधारण सा दिखने वाला असाधारण डील डौल वाला लड़का शौर्य का बॉडी गार्ड था… !
लल्लन ने एक नजर उधर खड़ी गार्ड्स की फ़ौज पर डाली, उसे विक्रम दुःख गया..
विक्रम दूर से उन दोनों को ही देख रहा था..
लल्लन ने अपना हाथ उसे देख कर हिला कर उससे विदा ली और कली के साथ ही निकल गया ….
विक्रम ने एक ठंडी सी आह भरी और अपनी टोली में शामिल हो गया!
कली की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे.. वह धीमे-धीमे चल रही थी!
मन ही मन यह प्रार्थना करते हुए कि काश कोई चमत्कार हो जाए और वह एक बार शौर्य को देख सके!
उस वक्त लल्लन के फोन पर उसके घर से कॉल आने लगा और वह बात करते हुए आगे निकल गया! उसके जाने के बाद कली कुछ देर के लिए वहीं बगीचे पर पड़ी एक बेंच पर बैठ गई।
वह जाना तो चाहती थी, लेकिन उसके पैर जवाब दे गए थे। उसके शरीर का रोम रोम उसे शौर्य से मिलने के लिए पीछे धकेल रहा था। लेकिन…
क्रमशः

लेकिन, लेकिन क्या…. क्या वह लल्लन के मेहमान जी से मिल पाएगी, मेहमान जी… मीठा एहसास, मेहमान जी के साथ 🥰, राजा भी स्पेस रखता है और राजकुमार ने अपनी मां से कया कहा, क्या कली और शौर्य मिलेंगे, पढ़ने को तैयार कुमार, नाईस पार्ट दीदी 💐🙏
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐