जीवनसाथी -3 भाग -69

सभी लोग थाने से निकल कर बाहर आ गए..
सब वहाँ से निकलने के लिए गाड़ियों में बैठने लगे.. हर्ष का ध्यान मीठी पर था….।
मीठी खुद हर्ष की तरफ देख रही थी, लेकिन मीठी को अपनी बाँहों के घेरे में लेकर चलती निरमा का इस बात पर ध्यान ही नहीं था..।
हर्ष इस इंतजार में था कि मीठी बाकी लोगों के साथ उसकी कार में आकर बैठ जाए।
वह अपनी कार से टेक लगाकर खड़ा था, लेकिन निरमा मीठी को पकड़े,साथ लिए हर्ष के सामने से आगे बढ़कर अपनी गाड़ी की तरफ निकल गई। मीठी जाते-जाते भी हर्ष को देखती रही, लेकिन मीठी की मजबूरी थी कि उसके हाथ में कुछ नहीं था। हर्ष भी इस बात को समझता था।
निरमा और मीठी आगे निकल गए। मीठी के एक तरफ निरमा थी, और दूसरी तरफ बांसुरी।
हर्ष को चुपचाप खड़ा देख शौर्य आगे बढ़कर अपनी मां तक पहुंच गया…
“मम्मा अगर आपको सही लगे तो आप और निरमा मासी एक साथ चले जाओ.. मीठी हमारे साथ आ जाएगी !”
बांसुरी ने चुपके से निरमा की तरफ देखा, निरमा ने शौर्य की तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुराया और गाड़ी का दरवाज़ा खोल मीठी को अंदर बैठने बोल दिया..
“सॉरी बेटा.. लेकिन मै भी मीठी को बहुत मिस कर रही थी…. !”
“ओके मासी.. कल सुबह तो हम सब ब्रेकफास्ट साथ में कर सकते हैं न… मीठी आओगी न ?”
शौर्य ने मीठी से पूछा और मीठी अपनी माँ की तरफ देखने लगी..।
“भेज देना नीरू… बच्चे सब आपस में हिले मिले से हैं…। आज सभी लोग परेशान हो गए थे… अब कल कम से कम सब मिल कर साथ ब्रेकफास्ट करते हुए ही सेलिब्रेट कर लेंगे..।
और अगर तेरी छुट्टी हुई तो, तू हम सब के साथ कुलदेवी के मंदिर चलना..।
अभी-अभी रूपा भाभी सा ने मुझसे कहा है कि कल महल की सारी औरतें कुलदेवी पूजा के लिए पहाड़ी वाले मंदिर पर जाएंगी।
हर्ष की सकुशल वापसी के लिए उन्होंने मन्नत मांगी थी..।”
” बांसुरी तू जानती है कि मैं यूनिवर्सिटी से छुट्टी नहीं लेती हूं। वैसे भी इस वक्त काम थोड़ा बढा हुआ है, तो मुझे तो कल जाना पड़ेगा। लेकिन ठीक है मीठी आ जाएगी..।”
“थैंक्स नीरू !”
बांसुरी मुस्कुरा उठी….
“मै निकलती हूँ… शाम हो गयी है.. !”
निरमा के ऐसा कहने पर बांसुरी ने हाँ में गर्दन हिला दी..
निरमा के ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा ली.. अपनी माँ की नजर बचा कर मीठी ने पीछे मुड़ कर देखा, हर्ष अपनी गाड़ी से लग कर खड़ा उसी की तरफ देख रहा था…
मीठी का दिल कैसा तो भी हो गया..
हर्ष की तरसती सी आंखे उसे खुद में उतरती महसूस हो रही थी..
“मीठी.. !” निरमा ने उसका नाम लिया और वो चौंक गयी..
“हाँ माँ !”
“तुम ठीक हो न बेटा !”
“हम्म !”..
“हे भगवान.. मेरा तो दिल सूख गया था… जैसे ही पता चला कि तुम गायब हो, मेरे तो दिमाग का फ्यूज उड़ गया। मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, मैं क्या करूं? रो-रो कर बेहाल हो रही थी। खुद को संभालना, इतना मुश्किल हो रहा था।
मुझे लग रहा था कहां से तुम्हें ढूंढू। पता नहीं क्यों लेकिन बहुत घबरा गई थी मीठी मैं, बहुत ज्यादा।
एक पल के लिए लगा कि मैंने शायद तुम्हें खो दिया, फिर बांसुरी ने मुझे संभाल लिया।
उसी ने मुझे मना कर दिया कि मैं तुम्हारे पापा से कुछ ना कहूं..”
“आपने पापा को नहीं बताया ?”
“नहीं… तुम्हें क्या लगता है वह सहन कर पाते कि उनकी आंखों का तारा कहीं खो गया है। और इतना सहन करके वह अपने काम पर रह पाते?
पूरी दुनिया को आग लगा देते वह, अगर उन्हें यह पता चल जाता कि उनकी मीठी गायब है। मैंने उनसे कुछ नहीं कहा।
इत्तेफाक से ऐसा था कि वह व्यस्त भी थे, और इस बीच में हमारी फोन पर कोई बात भी नहीं हुई। वरना उनसे झूठ बोल पाना, मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाता। मैं चाहती भी नहीं थी कि इस वक्त उनसे बात हो..।”
मीठी प्यार से अपनी मां के पास सरक गई और निरमा के कंधे पर सर रखकर मीठी ने धीरे से आंखें मूंद ली। कुछ देर में ही दोनों अपने घर पहुंच गए।
पिछली रात से मीठी गायब थी, और अब जाकर वह अपने घर पहुंची थी। भूख प्यास से जितना बेहाल थी उतनी ही शारीरिक थकान थी.. लेकिन सब सब के बावजूद हर्ष की आंखे याद आते ही उसके अंदर एक अलग सी ऊर्जा महसूस हो रही थी..।
ऐसा लग रहा था, मौका मिल जाये तो वो सारी रात उसके सामने बैठे उसकी आँखों को देख सकती है..।
घर पहुँच कर वो अपने कमरे में चली गयी..
“मीठी… बेटा मै खाना गर्म कर रही तुम फ्रेश होकर आ जाओ !”
गर्दन हिला कर वो चली गयी…
फ्रेश होकर खाना खा कर वो सोफे पर अपनी माँ के पास ही बैठ गयी..।
धीरे से उसने अपनी माँ की गोद में सर रखा और लेट गयी.. उसके बालों पर हाथ फेरते हुए निरमा उससे बतियाने लगी..
” कैसे कैसे लोग होते हैं दुनिया में, मैंने देखा है जिनके पास जितना ही ज्यादा पैसा होता है उनके ट्रस्ट इश्यूज उतने ही ज्यादा होते हैं..।”
“क्या हुआ मम्मा ?”
” तुझे तो अब तक पता भी नहीं है लाडो, लेकिन तू जानती है? हर्ष की सगाई टूट गई।”
“क्या?”
यह बात सुनते ही मीठी चौंक कर उठ बैठी, और निरमा की तरफ देखने लगी। उसे अगले ही पल समझ में आ गया कि उसने गलत अभिव्यक्ति दे दी हैं, उसने अपने चेहरे में आने वाले भावों को बदला और थोड़ा सा दुख अपने चेहरे पर ले आई।
“लेकिन ऐसा क्यों हुआ? हर्ष की सगाई कैसे टूट गई…?”
“तू कुछ नहीं जानती बेटा। जिस वक्त तुम गायब हुई, तब तुम्हारी वह जो दोस्त साथ में थी उसने तुम्हारे गायब होने का सारा इल्जाम हर्ष के ऊपर लगा दिया। उसने हर्ष के साथ जो भी बातचीत की थी उसका कोई वीडियो बनाया था जिसे उसने लाइव कर रखा था। वह लड़की कोई मीडिया रिपोर्टर है, और उसके इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी बहुत सारे फॉलोअर्स है उसने जैसे ही यह सब वायरल किया, उसके फॉलोअर्स ने उन वीडियो को बहुत बड़ी संख्या में शेयर करके बुरी तरीके से वायरल कर दिया।
यह सब देखकर प्रियदर्शनी के पैरंट्स ने सगाई से मना कर दिया।
बेचारी रानी साहब!!
उन्हीं के लिए मुझे बुरा लग रहा था। एक तो उनमें अपने रॉयल होने का एक अलग सा गुरूर है, उन्हें हमेशा लगता था कि उनके हर्ष के लिए लोग आगे से आकर उसका रिश्ता मांगेंगे। लेकिन यहां जरा उल्टा हो गया। प्रियदर्शनी के पैरंट्स ने अपने हाथ खींच लिए, और सगाई तोड़ दी..।”
“सगाई तो भी हुई भी नहीं थी..।”
“हां, लेकिन तय तो थी, होने वाली तो थी।
बस रानी साहब के लिए बुरा लग रहा है। हर्ष के लिए भी अच्छा नहीं लग रहा।
क्योंकि प्रियदर्शनी वाकई बहुत अच्छी लड़की थी। और हर्षवर्धन के साथ उसकी जोड़ी भी बहुत खूबसूरत लग रही थी..।
मै पहुँच तो नहीं पायी थी लेकिन मै उस पुरे कार्यक्रम को महल के एप पर लाइव देख रही थी.. सब कुछ अच्छा लग रहा था..।
बिलकुल किसी फेयरी टेल के समान और अचानक ही सब बिगड़ गया..।
हर्ष भी तो इस बात से दुखी होंगे.. ऐसा करना मीठी, कल सुबह तुम चली ही जाना.. हर्ष से तुम्हारी भी अच्छी दोस्ती है..
सारे दोस्त साथ रहोगे तो उसे अच्छा लगेगा..
एक बात बोलूं, जब इंसान शारीरिक रूप से थका होता है ना तो थोड़ी देर आराम करके सही हो जाता है। लेकिन जब वह भावनात्मक रूप से थका हुआ हो, तो उसे किसी ठौर आराम नहीं मिलता।
एक अजीब सी बेचैनी उसे घेरे रहती है। मैं समझ सकती हूं कि इस वक्त हर्ष कैसा महसूस कर रहा होगा? उसे इस वक्त उसके अपनों की जरूरत है…।”
मीठी अपनी मां को बता नहीं सकती थी कि इस वक्त उसके दिल में कैसे लड्डू फूट रहे थे।
वह तो खुद हर्ष से मिलने के लिए तड़प रही थी। और उस पर सोने पर सुहागा यह हो गया कि हर्ष की सगाई टूट गई।
वरना उसके दिमाग में एक बात यह भी थी कि, वह भले ही हर्ष से अपनी मुहब्बत का इजहार कर दे, लेकिन हो सकता है कि हर्ष प्रियदर्शनी से ही शादी करना चाहे। लेकिन अब तो प्रियदर्शनी भी रास्ते से हट गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका आज का दिन बहुत खराब बीता था या अब बहुत अच्छा बीत रहा था।
लेकिन जो भी था, कल का दिन उसके सपनों का दिन बनने वाला था।
अपनी मां की गुनगुनी बातें सुनते हुए जाने कब मीठी की आंख लग गई। और वह गहरी नींद में सो गई।
उसकी नींद में खलल ना पड़े, इसलिए निरमा वहीं सोफे पर सामने रखे टेबल पर टांगे रखे बैठी रही। दोनों मां बेटी ने उस सोफे पर ही रात काट ली…।
****
अगली सुबह महल से सारी रॉयल लेडिस पूजा की तैयारी करके पहाड़ी वाले मंदिर की ओर निकल गई। युवराज सा उन लोगों के साथ ही गए थे। राजा भी उस वक्त घर से निकला लेकिन किसी को मालूम नहीं था कि वह कहां जा रहा हैं?
राजा अपने गार्ड्स के साथ थाने की तरफ बढ़ गया। राजा का स्वभाव ही ऐसा था कि उस के लिए गलत करने वाले व्यक्ति के बारे में भी वह गलत नहीं सोच पाता था। उस के लिए किसी को सजा देने का तरीका ज्यादा से ज्यादा यही था कि वह उससे बात करना ही बंद कर दे। बस इससे ज्यादा वह किसी को भी शारीरिक कष्ट देने के पक्ष में नहीं रहता था।
वह लड़की भले ही राजा का नाम खराब करने के उद्देश्य से महल में घुसी थी, बावजूद वह थी तो एक लड़की ही। उन्ही के बेटे की हम उम्र या ज्यादा से ज्यादा चार-पांच साल बड़ी।
ऐसे में उस लड़की का रात भर थाने में पड़े रहना, राजा को सुहा नहीं रहा था..
थाने में एक बार फिर राजा साहब के पहुंचने से तहलका मच गया। थाना प्रभारी के सामने जाकर राजा बैठ गया। और उसने उस लड़की से मिलने की इच्छा जाहिर कर दी। इस वक्त देखा जाए तो गन रखने के अलावा और कोई चार्ज वानी पर नहीं लगा था।
क्योंकि मीठी की किडनैपिंग के बारे में राजा ने किसी तरह की शिकायत फिलहाल दर्ज नहीं की थी। राजा के कहने पर वानी को राजा से मिलवाने बुला दिया गया। राजा वानी से अकेले में मिलना चाहता था। वह दोनों अब आमने-सामने थे। सामने बैठी वानी को देखने के बाद राजा ने कहना शुरू किया…
“वानी तुम्हारी जो भी परेशानियां है, मैं उन्हीं के बारे में तुमसे बात करने आया हूं। देखो वानी, मैं समझता हूं कि हर एक इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लग सकता। अगर मैं कुछ लोगों को बहुत अच्छा लगता हूं, तो कुछ को बहुत ही बुरा भी लगता हूंगा।
क्योंकि इस दुनिया में हर एक इंसान की अपनी खूबी होती है। और जरूरी नहीं कि उसकी वह खूबी हर किसी को पसंद आए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह नापसंद करने वाला इंसान गलत है ।
तुम समझ रही हो कि मैं क्या कहना चाहता हूं?
मेरा कहने का तात्पर्य यही है कि अगर तुम और तुम्हारे पिता मुझे नहीं पसंद करते तो इसका यह मतलब नहीं हो जाता कि तुम दोनों गलत हो।
इसका दूसरा पहलू यह है कि अगर तुम दोनों को मैं गलत लगता हूं, या तुम मुझे पसंद नहीं करते, तो उसका यह मतलब भी नहीं कि मैं गलत हूं।
खैर मेरी बात समझना तुम्हारे लिए शायद मुश्किल होगा। क्योंकि तुम मुझे अपने पिता का गुनहगार मानती हो, और इसलिए जब तक तुम्हारे दिमाग से यह बात नहीं निकलेगी, तुम मुझे हमेशा गलत समझोगी।
और सच कहूं, तो मुझे अपने बारे में सफाई देने का शौक नहीं है!!
मैं इस चीज को पूरी भव्यता से स्वीकार करता हूं। जो लोग मुझे गलत मानते हैं, उन्हें पलट कर मैं कभी अपने बारे में कुछ नहीं कहता।
मैं कहता हूं चलो इसी बात पर खुश हो लो। अगर मुझे गलत साबित करके, या मेरे बारे में चार लोगों से गलत बात करके ही तुम्हें आत्मिक खुशी मिल रही है, तो तुम उस खुशी में खुश रहो।
आखिर किसी न किसी वजह से मैं तुम्हारी खुशी का कारण तो बना।
अभी भी फिलहाल मैं तुम्हें कोई प्रवचन देने नहीं आया हूं ।
तुमसे बस यही कहने आया हूं कि तुम्हें जो इंसान ब्लैकमेल कर रहा था, उसके बारे में पता करवाने के लिए मैंने अपने आदमियों को भेज दिया है। और अब जल्द ही पता चल जाएगा कि तुम्हें परेशान करने के पीछे कौन है?
बस यही कहने आया हूं कि किसी से भी डर कर रहने की तुम्हें जरूरत नहीं है।
तुम्हारी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हम सब लेते हैं…।
वानी चुप बैठी थी.. ।
वो वाकई जाहिल गंवार थी। उसे राजा साहब की सच्चाई और भलमनसाहत भी दिखावटी लग रही थी..।
सच ही है, जो जैसा होता है, वो दुनिया को वैसे ही देख पाता है..।
वानी के मन में अपार कालिख थी, तो उसका चश्मा कैसे उसे एक साफ सुथरे इंसान को देखने देता..?
अपने चश्मे से राजा साहब को देखती वानी अब भी जली भुनी ही बैठी थी..।
” वानी तुम मेरे महल में एक अतिथि के तौर पर आई थी, मेरे महल का रिवाज है कि हम अतिथियों का अनादर नहीं करते।
बस तुम्हारा जिस ढंग से महल से निकलना हुआ, वह बात मुझे खटक गई। मेरी दादी साहब आज अगर जिंदा होतीं, तो ऐसा कभी नहीं होने देतीं। हम लोगों के कुछ नियम कायदे होते हैं, जिन्हें हम पूरी शिद्दत से निभाते हैं। इसलिए तुमसे कहना चाहता हूं कि आज का नाश्ता हमारे महल में करोगी तुम।
नाश्ते के बाद तुम्हें वापस पूरे सम्मान के साथ यहां ला कर वापस छोड़ दिया जाएगा…..।”
राजा ने अपनी बात ख़त्म की और खड़ा हो गया..।
उसके साथ ही पुलिस वाला अंदर आया और राजा की बात का मान रखते हुए चार पुलिस वालों की निगरानी में वानी को महल भेज दिया गया..।
राजा भी उसके साथ महल वापस लौट आया..।
तब तक महल के सारे लड़के खाने की टेबल पर पहुँच चुके थे..।
मीठी भी महल का नियम जानती थी, इसलिए वह भी सही वक्त पर वहां पहुंच चुकी थी।
सारे लोग ठीक उसी वक्त पहुंच कर बैठे थे कि राजा अपने साथ वानी को लेकर वहां दाखिल हो गया। राजा ने आते ही सबसे अपने विचार कह दिए..
” वानी महल में एक अतिथि के तौर पर दाखिल हुई थी, लेकिन महल से जाना एक क्रिमिनल के तौर पर हुआ, बस यही बात मुझे पसंद नहीं आ रही थी। और इसलिए मैंने वानी को नाश्ते पर बुलाया है।
वह यहां तुम सबके साथ बैठकर नाश्ता करेगी, और उसके बाद महल के कायदों के अनुसार ही उसे यहां से विदा कर दिया जाएगा।”
राजा ने अपनी बात कहने के बाद हर्ष की तरफ देखा। हर्ष ने धीमे से गर्दन झुका कर हामी भर दी।
महल की सारी औरतें जा चुकी थी।
और इस वक्त सिर्फ हर्ष शौर्य यश परी धनुष मीठी कली और मीरा ही वहां मौजूद थे। उन सबके साथ वानी भी बैठ गयी..
राजा भी अपनी कुर्सी पर बैठ गया.. उसने खाना शुरू किया और बाकियों ने उसके पीछे..
लेकिन कुछ देर में ही राजा के लिए किसी का फ़ोन आ गया और राजा को वहाँ से उठ कर अपने ऑफिस की तरफ जाना पड़ गया..।
उसने जाने से पहले धनुष और शौर्य की तरफ देखा और उन्हेँ आँखों से ही इशारा कर दिया कि कोई भी वानी को परेशान नहीं करेगा..
उन दोनों शैतान लड़को ने भी हामी भर दी..
“शौर्य तुन फनी का कोई मजाक नहीं उड़ाओगे !”
धनुष ने कहा और शौर्य धीरे से हंस पड़ा.. -“फनी नहीं ये शनि है !” दोनों लड़के खुद में हंस रहे थे, उनकी बात और किसी को सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन
वानी को ये सब पसंद तो नहीं आ रहा था।
लेकिन सर पर गन ताने खड़े पुलिस वालों के सामने वो कुछ कर भी नहीं सकती थी..।
खुद का मजाक आखिर उसी ने बनाया था !
सब नाश्ता कर रहे थे, लेकिन मीठी का पूरा ध्यान हर्ष पर ही था।
हर्ष भी बीच-बीच में सब की नजर बचाकर मीठी को देख लेता था।
उन दोनों की आंख-मिचौली, वैसे वहां किसी से छिपी हुई नहीं थी। लेकिन सब जानबूझकर ऐसे बने हुए थे जैसे किसी को कोई खबर ही नहीं।
वानी यह देख-देख कर और भी ज्यादा जलभुन रही थी। उसे इन सब प्यार मुहब्बत भरी बातों पर विश्वास ही नहीं था…।
उन दोनों को देखकर जल भूनकर कोयला होती वानी ने धीरे से अपनी प्लेट के पास से फोर्क नीचे गिरा दिया। उसके बगल की कुर्सी पर ही मीठी बैठी थी। मीठी ने अपनी सैंडल उतार रखी थी, और अपने पैर टेबल के नीचे लगे लकड़ी के पार्टीशन पर टिकाए हुए थे।
फोर्क उठाने के लिए झुकी वानी ने जानबूझकर फोर्क के नुकीले हिस्से को मीठी के पैरों के ठीक नीचे की तरफ जमीन पर रख दिया। और उठकर खाने लगी।
कुछ देर में ही मीठी ने अपने पैर जमीन पर रखे, और फोर्क उसके पैर में बुरी तरीके से चुभ गया..।
मीठी हलके से चीख पड़ी और हर्ष तुरंत अपनी कुर्सी से उठ कर चला आया..
“क्या हुआ मीठी.. ?”
मीठी ने नीचे की तरफ इशारा कर दिया..।
फोर्क नुकीला था और अब भी मीठी के पैर में चुभा हुआ था..।
मीठी धीरे से नीचे झुकी और उसने अपने पैर को उठाने की कोशिश की।
धनुष शौर्य और कली भी उसके आसपास आ गए थे। लेकिन कोई कुछ मदद कर पाता, उसके पहले ही हर्ष जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया।
उसने अपने एक पैर पर मीठी का तलवा रखा, और बहुत धीरे से उस फोर्क को निकाल दिया। फोर्क को निकालते ही खून तेजी से बहने लगा। उस खून को रोकने के लिए हर्ष ने अपने अंगूठे से वहां दबाव देना शुरू किया। लेकिन खून रुक नहीं रहा था।
हर्ष ने आंखें उठाई और बगल की कुर्सी पर बैठी वानी की तरफ घूर कर देखा।
वानी आंखों ही आंखों में हर्ष को यह समझा गई कि यह फोर्क उसी का रखा हुआ था।
हर्ष ने गुस्से में उसकी तरफ देखा और फिर मीठी की तरफ देखकर कहने लगा..
” मेरे कमरे में फर्स्ट एड बॉक्स रखा है, अगर तुम्हें दिक्कत ना हो तो मैं तुम्हें अपने कमरे में ले चल सकता हूं?”
मीठी अचानक से इस प्रस्ताव पर कुछ कह नहीं पाई। उसके दिल में घंटियां बजने लगी।
उसने धीरे से हामी भर दी।
हर्ष ने झुक कर बड़े प्यार और नजाकत से मीठी को अपनी गोद में उठा लिया। उसे अपनी गोद में उठाकर उसने वानी की तरफ देखा और फिर बोल पड़ा..
” मैं मीठी को अपने कमरे में लेकर जा रहा हूं।”
वह पलटा और तेज तेज कदम भरता हुआ वहां से अपने कमरे की तरफ चला गया।
कली भी मीठी के पीछे जाने को थी कि शौर्य ने उसे रोक लिया..
“उन दोनों को जाने दो.. !”
“लेकिन.. मीठी तकलीफ में होगी !”
“हाँ तो तकलीफ की दवा साथ ही जा रही है.. तुम टेंशन मत लो !”
“लेकिन हर्ष सर..क्या वो मेडिकल भी जानते है ?”
भोली कली के दिमाग का बल्ब हमेशा फ्यूज़ ही रहता था..
“इस वक्त मीठी को जिस दवा की ज़रूरत है, वो हर्ष भाई ही जानते हैं.. !”
मुस्कुरा कर शौर्य अपनी कुर्सी खींच कर बैठ गया..
“चलिए.. अब आपके वापस चलने का वक्त हो गया है !”
पुलिस वालों ने वानी से कहा और खून का घूंट पीकर वानी अपनी जगह पर खड़ी हो गयी..
” साबित करके दिखाओ की मीठी के किडनैपिंग के पीछे मेरा हाथ था।
उसका मेरे कमरे से मिलना इस बात का सबूत नहीं है कि मैंने उसे किडनैप किया था..।
अपने आप को बहुत बड़ा जेम्स बॉन्ड समझते हो ना, मिस्टर धनुष तुम्हारे तीर तो अब मैं निशाने पर लगाऊंगी..!”
वानी मुड़ कर चली गयी..
“गज़ब का आत्मविश्वास है भाई… इस मनी में दम नहीं पर हम किसी से कम नहीं.. !”
यश ने ज़रा तेज़ी से ये बात कही और धनुष और शौर्य ठहाका लगा कर हँस पड़े..
जाते जाते भी वानी के कानो में ये सब पड़ गया और वो अपने गुस्से को ज़ज़्ब करती चली गयी..
क्रमशः

कहानी में यह रोचकता आई हुई है कि हर्ष और मीठी साथ हो गए हैं, वानी खार खाए बैठी है लेकिन कली अभी साइड लाइन पार है राजा ने बड़ा दिल दिखाया, क्या है इसके पीछे का मकसद यह पढ़ना रोचक रहेगा। धनुष अपना तीर निशाने पर लगाकर रहेगा, वह कौन है, कौन है इन सब के पीछे…. नाईस पार्ट दीदी 👍💐🙏
ओह्ह स्यापा😲इतना बढ़ा षड्यंत्र हर्ष के खिलाफ और रियाल किसी के कहने पर ये सब कर रही थी पर वो है कौन जो रियाल से ये सब करवा रहा है 🤔।वो जो कोई भी है वो जानता है रियाल की असलियत उसे पता था रियाल अपनी बाप की मौत का बदला लेना चाहती है और वो राजा आजातशत्रु से नफ़रत करती है, मीठी और धनुष सुरक्षित है यही सबसे अच्छी बात है, वैसे भी धनुष और समर के रहते कोई राजा और राजमहल के किसी सदस्य का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता, अब इंतज़ार है असली गुनेहगार के सामने आने का।
बहुत लाजबाब भाग 👌👌👌🙏🏻।