जीवनसाथी -3 भाग -41

वह मुङी और शौर्य की तरफ बढ़ने को थी कि तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ घुमा लिया।
कली जैसे ही उधर घूमी कि उसकी आंखें भय और आश्चर्य से चौड़ी हो गयी…
उसके चेहरे पर किसी ने दुपट्टा डाल दिया !!
कली जब तक उन लोगो को पहचान पाती उन्होंने उसके चेहरे के ठीक सामने रखे दुपट्टे से कली का चेहरा लपेटा और उसे गाड़ी के अंदर खींच लिया..
दूर से शौर्य कली की तरफ बढ़ रहा था, उसने जैसे ही उन लड़को को ऐसा करते देखा वो तेज़ी से उस तरफ दौड़ पड़ा..।
लेकिन तब तक में वो लड़के कली को गाड़ी में खींच कर गाड़ी आगे बढ़ा चुके थे..
शौर्य तेज़ी से भीड़ को हटाते हुए भागने लगा.. उसे भागते देख लल्लन और दुल्लो भी अपनी गैंग को लेकर उसकी तरफ दौड़ पड़े..
शौर्य उस गाड़ी का पीछा करने के लिए एक ऑटो रुकवा रहा था कि दुल्लो पहुँच गया..
“रुकिए भैया जी, हमरा गाड़ी मंगवा रहे हम.. ये टमटम में कहाँ बैठ कर जाइएगा.. !”
“अरे तब तक वो लोग पता नहीं कहाँ पहुँच जाये…? यहाँ कहाँ ढूंढ़ पाउँगा कली को..?
ये पागल लड़की भी, मुझे पागल कर के छोड़ेगी…।”
शौर्य से पल भर का भी इंतज़ार नहीं हो रहा था, वो आगे बढ़ कर एक गाड़ी में बैठने ही वाला था कि दुल्लो कि गाड़ी लिए उसका चमचा चला आया, और उस में लद कर सब के सब आगे बढ़ गए…
गाड़ी कुछ आगे बढ़ने के बाद उनमें से एक ने कली के चेहरे से दुपट्टा हटाया..
और मुहं बाये उसे देखते रह गया..
“अबे… ये तो कोई और निकली ! “
और उसने कली को देख कर हाथ जोड़ लिए..
“माफ़ कीजियेगा दीदी ! हम आपको कुछ और ही समझ कर उठा लाये !”
सामने गाड़ी चलाता लड़का पलट कर नाराज़ होने लगा.. उसने पीछे बैठे उस बौड़म से लड़के के सर पर चपत लगा दी..
“साले दुइ कौड़ी के महंग हो तुम !”
उसने पलट कर उस लड़के को घूरा…
पीछे बैठा वो लड़का झेंप गया.. और सामने वाला उसे घूरता रहा..
“गुरु तनिक सामने देख के चलाई, कहीं भिड भिड़ा गए न तो ससुरा और पंचायत होनी है.. !”
“तुम न साले कुत्ते हो.. न, कुत्ते नहीं गदहे हो साले.. ! तुमको हमरी फुलवा और ई मैडम जी में अंतरो नै दिखा !”
“भैया जी सच कहे तो भौजी का चेहरा हम देखे ही कहाँ है..?
जिस दिन से आप बताये हैं कि आप भौजी से बिहाव करेंगे उसी दिन से हम लक्षमन की तरह भौजी के चरण ही देखे हैं..।
सामने गाड़ी चलाते लड़के ने स्टीयरिंग पर अपना माथा पटक दिया..
“तो का बे, इनका चरन तुमको हमरी फुलवा के चरन सा लगा ?”
“”नहीं भैया जी.. फुलवा भाभी भी यही कलर का डिरेस पहनी रही, और चप्पल भी वही बाटा का रहा, तो बस तनिक भूल होई गयी..।”
“साले तुम्हारी ये तनिक भूल के चक्कर में क्रिमिनल बना के छोड़ दो हमे..।
पीछे एक जीप पीछा कर रहा है हमारा… अब पहिले उसका सामना करेंगे फिर.. ।”
” फिर भैया जी कुछ नहीं करना पड़ेगा.. यह जो पीछे लौंडे लपाटे जीप में आ रहा है ना, सबको देख लेंगे हम। हमरे पास कनपुरिया कट्टा है !”
“तो तुम कैसे जान लिए जी, कि उनके पास कट्टा न होइ !”
“होने दो.. हम तो आपके नाम पे भिड़ जायेंगे !”
“अबे यार एकदम ही बुड़बक हो साले का ? हमरा प्लान फुलवा को यहां से भगा के कानपुर ले जाने का था। वहां ब्याह कर लेते!
अब वह बेचारी अपनी अम्मा और चाची के साथ बहाना मार के आरती देखने आई थी! अब वह वहां खड़ी हमरा इंतजार कर रही थी, और तुमहू किसी और को उठा ले आये..।
अब इन दीदी को हाथ पैर जोड़कर माफी मांग के वापस कर भी दिए, तो जब तक हम लौट के घाट पर जाएंगे तुम्हरी भौजी अपनी अम्मा और काकी के साथ घर लौट जाएगी..! रात बिरात रुके थोड़े न रहेंगी, घऱ जाकर आलू बैंगन और रोटी भी तो सेंकना बनाना है !”
“भैया जी का किया जाये अब ! बिचार कीजिए। “
” हमही सब कर ले, तुम कुच्छो ना करो।
सबसे पहले तो तुम्हारे हाथ पैर बांध कर तुमको गंगा जी में फेंका जाये अब उसके बाद ही हम कुछ सोच पाएंगे.. !”
वो लड़का चुपचाप मुहं बना कर बैठ गया.. !
वहीँ बैठी कली को सारी बात समझ आ गयी थी, लेकिन उसके मुहं में कपड़ा ठूंसा हुआ था। इसलिए वह कुछ कह नहीं पा रही थी।
वह यही कहना चाहती थी कि जीप एक किनारे करके रोक दें और उसे वापस छोड़ दें। लेकिन उसे कुछ बोलने का मौका नहीं मिल पा रहा था…।
और गाड़ी चलाने वाला तेज़ी से गाड़ी भागता जा रहा था..।
वो लोग ब्रिज के बीचोबीच पहुंचे थे कि दुल्लो की गाडी उनसे आगे निकली और घूम कर उन्हें रोकने के लिए उनके सामने आ कर रुक गयी…।
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गाड़ी चला रहे लड़के का नाम छोटे गुड्डू था, उसने खचाक से ब्रेक मारा और पीछे बैठी कली का सर सामने की सीट से ज़ोर से टकराने से हल्का सा कट सा बन गया..
“भैया जी का तरकस चलाये हैं… ये दीदी का खून निकलने लग गया..माथा फट गया है !”
“अबे तो का करे..? ये आजकल के लड़को को साला गाड़ी चलाने का तमीज ही नहीं है, का करे ?बोलो ?”
अब तक में सामने की गाडी से उतर कर लल्लन, दुल्लो और उसकी गैंग उस जीप की तरफ बढ़ने लगे थे…
दोनों ने अपने हाथ में गन रखी हुई थी..
लेकिन शौर्य ने इन सबको एक किनारे करते हुए तेजी से जीप की तरफ दौड़ लगा दी।
दोनों पीछे से आवाज देते रह गये,” भैया जी बच कर, गाड़ी वाले के पास कट्टा उट्टा हो सकता है।”
लेकिन शौर्य को इस वक्त सिर्फ और सिर्फ कली नजर आ रही थी। वह तेजी से वहां पहुंचा, उसके पहुंचने में सामने ड्राइविंग सीट पर बैठा छोटे गुड्डू अपना कट्टा लिए जीप से उतर गया, और उसने कट्टे का निशाना शौर्य की तरफ कर दिया ।
शौर्य ने पीछे की सीट में झांक कर देखा। कली बेसुध से पीछे की सीट पर सिर रखे आंखें मूंदे बैठी थी। उसने कली को आवाज दी, लेकिन हल्की बेहोशी के कारण उसकी आवाज वो सुन नहीं पाई। शौर्य को लगा इन दोनों लड़कों ने कली को किडनैप करने की कोशिश की है..शौर्य का दिल किया दोनों लड़को को कूट पीस के चटनी बना दे लेकिन इस वक्त कली को सम्भालना ज़रूरी था..
दुल्लो वहीँ से गन थामे चिल्लाने लगा..
” साले तुम हो कौन बे, तुम्हरी हिम्मत कैसे हुई हमारी भौजाई को उठाकर ले जाने की..!”
छोटे गुड्डू भी अकड़ में आ गया..
और उससे ज्यादा अकड़ में उसका चेला शंकु आ गया..
“कौन बोला बे, हैं?
किसके जिगर में इतना दम है कि भैया जी से अबे तबे कर रहा !” शंकू फूटा
“हम में.. !” दुल्लो सनका
“हाँ तो, तुम हो किस खेत की मूली बे ?” शंकु इतराया
“हमरे बाबूजी का नाम सुनोगे न तो साले.. अब का बोले ? लेडीज़ लोगो के सामने अच्छा नहीं लगता.. !”
दुल्लो गरजा
“अबे का लेडीज़ लोग लेडीज़ लोग लगा रखा है.. एक ही लेडीज़ हैं यहाँ ! तो बोलो बताओ, अपना परिचय दो !” शंकु फिर कूद पड़ा..
“बाबूजी विधायक है हमारे,कानपुर मैथा से ! और हमारा नाम है..
दुल्लो अपना नाम लेता उसके पहले उसके चेले सुर से सुर मिला कर दिलकश भैया यानी दुल्लो भैया का जयकारा लगा उठे..
“रसूलाबाद वाले प्रिंस भैया जी के लड़के हो का ?” अबकी बार शंकु को किनारे ठेल कर छोटा गुड्डू सामने चला आया..
“हाँ उन्ही के लड़का हैं.. काहे ?”
“अबे गुरु… चीन्हे नहीं हम को !” मुस्कुरा कर गुड्डू आगे बढ़ने लगा.. दुल्लो इधर उधर देखने लगा..
“अबे हम हैं… अमरौधा वाली फुफु हैं न आपकी, उनकी नन्द के लड़का है.. छोटे गुड्डू नाम है हमरा.. ! बीए ग्रेजुएसन किए हैं। कम्पटीसन का तैयारी चल रहा है हमरा!”
इन दोनों की मेल मुलाकात को एक तरफ रख शौर्य अब तक में हल्की बेहोश से पड़ी कली के पास पहुंच चुका था..
उसके चेहरे पर पानी की बूँदे डाल वह उसे होश में लाने की कोशिश कर रहा था।
शौर्य बहुत परेशान हो गया था। कली के गालों को थपथपा कर वह उसे जगाने की कोशिश कर रहा था कि कली ने आंखें खोल दी।
शौर्य के चेहरे पर परेशानी के भाव झलक रहे थे। कली ने उसे इतना परेशान देखा और कुछ पलों के लिए देखती रह गई।
अपने सामने शौर्य को देखकर उसे भी राहत सी मिल गई, और वह जहां बैठी थी वहां से थोड़ा सरक गई। शौर्य ने उसे बाहर बुलाया लेकिन कली ने ना में गर्दन हिलाकर शौर्य को अंदर बुला लिया..।
” चलिए निकालिए प्रिंसेस मैडम, अब क्या इसी गाड़ी में आपको अपना महल बनाना है?”
“सुनो मिस्टर ड्राइवर.. यह दोनों लड़के मुझे गलती से किडनैप करके ले आए। यह जो गाड़ी चला रहा था ना वह किसी फुलवा को लेकर जाना चाहता था। दोनों शादी करने के लिए भाग रहे थे, और इसके चेले ने कन्फ्यूजन में मुझे उठा लिया। लेकिन एक बात बताओ तुम क्यों इतना घबरा गए..?”
” घबराता नहीं तो क्या करता? तुम्हें एकदम से दो लड़के उठा कर अपने साथ ले जाने लगे। मेरा बस चलता तो मैं दोनों को गोली मार देता.. !”
“क्यों.. ? ” कली ने शौर्य की आँखों में झांकते हुए कहा और शौर्य भी कुछ पलों के लिए उसकी आँखों में खोने सा लगा..
“क्यों क्या क्यों… ऐसा ही हूँ मैं मददगार किस्म का..।”
“अच्छा, मतलब अगर लल्लन को कोई किडनैप करता, तब भी ऐसे ही भाग दौड़ के पहुँच जाते.. !”
“और नहीं तो क्या ? कहा न, मैं ऐसा ही हूँ.. बहुत अच्छा !”
“ये बात तो सच है कि तुम बहुत अच्छे हो.. !”
“पर लगता है तुम्हे ये दोनों चम्पक बड़ा पसंद आ गए हैं। इसलिए इनकी गाड़ी से निकलने का मन नहीं कर रहा तुम्हारा !”
शौर्य के ऐसा कहते ही कली ने हँस कर अपने माथे पर हाथ मारा, और वहाँ से बाहर निकल आयी..
अब तक में गुड्डू और दुल्लो का राम भरत मिलाप हो चुका था.. दोनों अपनी पुरखौती वंशावली की बेल में खिले फूलों के नाम लेते पहचानते जा रहे थे..।
“अरे तुम उसे जानते हो ?” “हाँ उनसे वहाँ मिले रहे” आदि इत्यादि बातों में लगे दोनों अपनी अपनी गन अंदर करना भूल ही चुके थे कि उधर से पुलिस पेट्रोलिंग गाडी निकली…
पुलिस वालो को लगा बनारस के किन्ही दो छुटभैये नेताओ का कुछ कांड चल रहा है, लेकिन हाथ में मौजूद कट्टा, अलार्म सा लगा और पुलिस रुक गयी..
पुलिस वाले “काहे बे अब का कांड कर दिए हो ?” कहते हुए उन लोगो तक आये और सबकी कॉलर पकड़ पकड़ कर उन्हें अपने साथ थाने ले गए..
लल्लन अब तक में बच बचा कर शौर्य और कली तक चला आया था, और वहीँ से वो लोग वापस लौट गए..
टैक्सी में लल्लन सामने की तरफ बैठा था और शौर्य और कली पीछे..
शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, और कली के में भी..
शौर्य मुस्कुरा रहा था, क्यूंकि कली को खोने के बाद वो बहुत डर गया था।
उतने सारे डर पर उसकी जीत हुई और कली उसे वापस मिल गयी थी..।
कितना बावरा सा हो गया था वो पल भर में… वो खुद इस बात को समझ नहीं पा रहा था कि उसे क्या हो गया था…।
कली के वहां से गायब होते ही वह पागलों की तरह बेचैन हो गया था। उसे ऐसा लगने लगा था, जैसे हर किसी को जोर से धक्का देकर खुद से दूर कर दे, और तेजी से भाग कर कली के पास पहुंच जाए। और जब कली को जीप में पिछली सीट पर पड़े देखा तो उसे लगा कली को उठाकर कसकर अपने सीन से लगा ले।
और उसे कहीं ना जाने दे।
लेकिन अब वह इस सोच में था कि वह ऐसा सोच क्यों रहा था?
कहीं ऐसा तो नहीं कि कली उसे पसंद आने लगी थी। हां पसंद तो पहले ही नजर में आ गई थी। लेकिन क्या सच में उसे कली से प्यार होने लगा था। लेकिन वह तो प्यार मुहब्बत में पड़ने वाला लड़का ही नहीं था। उसे तो इन चीजों से बड़ी नफरत होती थी…।
लेकिन आज कली के पल भर उसके साथ न रहने से उसे सारा संसार बेरंग नजर आने लगा था..।
लेकिन कली तो कुछ दिन बाद इण्डिया छोड़ कर वापस चली जाने वाली थी, हमेशा के लिए.. अपने डैडा के पास..
लेकिन तब वो क्या करेगा ?
क्या जी पायेगा, इस पागल बेवकूफ सी लड़की के बिना !
उसने मुड़ कर कली की तरफ देखा, वो आंखे बंद किये सीट के पीछे सर टिकाये मुस्कुराती हुई गाड़ी में चलता गाना सुन रही थी..
प्यार में होता है क्या जादू
तू जाने या मैं जानूँ….
रहता नहीं क्यूँ दिल पर काबू
तू जाने या मैं जानूँ
प्यार में होता है…
गुनगुन करता क्यों फिरता है,
कोई भँवरा बागों में…
क्यों होती है फूल में खुशबू
तू जाने या मैं जानूँ
प्यार में होता है…!
शौर्य ने कली को डिस्टर्ब नहीं किया.. लेकिन अब वो थोड़ा चिंतित होने लगा था.. ।
अब तक वो कर क्या रहा था.. ?
उसकी ज़िन्दगी का मकसद क्या था ?
बस ऐसे ही अपने डैड के पैसो को उड़ाना? कभी किसी गरीब को उठा कर दे देना तो कभी मीरा पर लाखों उड़ा देना..?
क्या वो ये सब सही कर रहा था..?
कली उससे छोटी थी।
वो भी एक बड़े बाप की औलाद थी, बावजूद कितना सम्भल कर, सोच कर खर्च किया करती थी..।
कितना जूनून था उसमे, अपने सपनो को साकार करने का..।
इसी के लिए तो अपने डैडा से झूठ बोल कर वो यहाँ तक चली आयी थी,और उसके सपने भी कोरे हवा में उड़ने वाले सपने नहीं थे..।
पैसे वाले घऱ की होने के बावजूद वो अपने लिए खुद कमाना चाहती थी, अपने पैरो पर खड़ा होना चाहती थी। और अपने हर सपने को अपने बलबूते पूरा करना चाहती थी..
वैसे ऐसे ही गुण तो उसके बड़े भाई में भी थे..
हर्ष !!
हर्ष तो चलो बड़ा और समझदार था, लेकिन यश धनुष मीठी और शोवन.. उसके आसपास का हर रॉयल किड अपने आप में अनोखा नहीं था क्या ?
हर कोई अपनी ज़िंदगी को अपने ढंग से जीने की जद्दोजहद में लगा था, और अपने ढंग से जीने के लिए अपने पैसो को खुद कमाना चाहता था..।
.एक वो ही सबसे अलग थलग सा क्यों हो गया था..?
सोचते सोचते उसे उसकी माँ की याद आने लगी..
उसने बांसुरी को फ़ोन लगा लिया..
लेकिन बांसुरी के फ़ोन उठाने पर वो जी भर कर बात नहीं कर पाया, जाने क्यों उसका गला अपनी माँ की आवाज़ सुन कर रुंधने लगा था..
उसकी माँ ने ज्यादा कुछ नहीं बस इतना कहा -” बेटा घऱ आ जा तेरी बहुत याद आ रही” और भावुक होकर शौर्य ने फ़ोन रख दिया…
घाट के दूसरी तरफ खाने पीने के लिए लल्लन ने गाड़ी घुमवा ली, लेकिन शौर्य ने वापस घाट पर जाने का मन बता दिया और एक बार फिर गाडी घाट की तरफ मुड़ गयी…
वहाँ पहुंच कर कली ने आंखे खोल दी..
“हम वापस घाट पर आ गए.. ?”
हाँ में लल्लन और शौर्य दोनों ने गर्दन हिला दी..
वो लोग सीढ़ियां उतर कर बजरे पर जाने लगे..
कली आगे चल रही थी….शौर्य उसके ठीक पीछे था..
आज के पुरे दिन में कितना कुछ बीत गया था..
उसे अचानक प्रिंस के बेटे दुल्लो का ध्यान आ गया.. वो वहाँ पुलिस स्टेशन में फंसा होगा..
उसने लल्लन से अपनी मंशा ज़ाहिर की..
“अरे भैया जी फिकर नॉट.. अपने दुल्लो भैया अपना परिचय देंगे और तुरंत छूट जायेंगे, और अब तो वो दोनों भी आपस में रिश्तेदार निकले..।”
हामी भर कर शौर्य आगे बढ़ गया..
बजरे पर किनारे बैठी कली पानी में बहते दीपक देखती मंत्रमुग्ध सी बैठी थी,और शौर्य कली को देखता बैठा था….
लल्लन उन दोनों को देख देख कर मुस्कुरा रहा था, कि तभी कहीं दूर से एक गोली चली और शौर्य के कंधे को भेदती निकली गयी…
एक धीमी सी आवाज़ हुई और शौर्य झटके से गिर गया.. कली की चीख निकल गयी.. वो लड़खड़ाती हुई शौर्य के पास पहुंची और लल्लन की तरफ देख तुरंत बजरा वापस मोड़ने कहा और शौर्य के चेहरे को थपका कर उसे जगाने की कोशिश करने लगी..
क्रमशः
aparna…

इस भाग को पढ़ा था पर कमेंट नहीं आया है, पर यह भाग पढ़कर मुझे अच्छा लगा है दी, किसने गोली चलाई पढूंगा जल्द ही, उत्तम भाग दीदी…💐🙏
ये किसने गोली चला दी, गोली कांड भाग में प्रेम भी है, एहसास भी है, याद भी है, समझाइश भी है और ख्याल भी है, जिसमें सवाल है पर यह कौन दुश्मन आ गया है जो धाय से गोली चला गया, पढूंगा अगला भाग तब समझ आएगा, बेहतरीन भाग दीदी 👌👌👌💐🙏
एक छोटा सा हादसा या गलतफ़हमी से कली की किडनैपिंग, दो दिलों को करीब ले आई ♥️। उस समय मेरे मन में भी गाना बजने लगा 😊,,, दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके चुपके 💞😍।शौर्य को आज एहसास हो रहा उसने अपने अब तक के जीवन में क्या किया, क्या कमाया शायद कुछ भी नहीं, जबकि महल के सारे बच्चे अपनी अलग पहचान बनाने में लगे है और सफल भी हो रहे। कली का शुभागमन हो गया शौर्य के जीवन में अब सब अच्छा ही होगा 😊।
ओह्ह.. ये क्या हो गया 🙄, शौर्य का दुश्मन कौन 🤔गोली किसने मेरी या फिर निशाना कोई और था??।
पुरानी यादें ताज़ा हो गई।
डॉक्टर साहिबा…आजकल आप अपने पाठकों का मन टिकने नहीं देती हो, अब हम यही सोचते रहेंगे…जबतक अगला भाग नहीं आएगा।
इंतजार रहेगा अगले भाग का 🙏🏻।