जीवनसाथी -3 भाग -15

जीवनसाथी -3 भाग -15

जीवनसाथी by aparna

देखते ही देखते लंदन के इवेंट के 3 दिन गुजर गये…  लेकिन यह 3 दिन कली की जिंदगी में एक नई छाप छोड़ गए।
उसके लिए कई नए सवाल जहां पैदा हुए वहीं उसके मन में घूम रहे कई सवालों के जवाब भी उसे मिल गए…।

कली के लिए आज तक जिंदगी मतलब उसका बड़ा सा आशियाना और कॉलेज का एक कमरा ही था, इससे ज्यादा वह कुछ नहीं जानती थी। लेकिन लंदन के इवेंट का हिस्सा बनने के बाद उसे मालूम चला था कि असल में जिंदगी क्या होती है? वहां आए लड़के लड़कियों से उसने व्यक्तिगत बातचीत की थी और इन बातों में उसे एक बात बहुत पसंद आई थी कि यह ज्यादातर लोग भले ही राज परिवारों से थे लेकिन यह सब के सब अपनी मर्जी से अपने कैरियर पर  मेहनत कर रहे थे..।
  
       यह सभी लोग असल में मेहनती लोग थे। ऐसा नहीं था कि मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा होने के कारण इन लोगों को कभी कुछ करना ना पड़ा हो।

कोरिया के राजपरिवार से आई लड़की जहां अपनी खुद की टेक्सटाइल कंपनी में डिजाइनर का काम करती थी। वही जापान का राजकुमार अपने हीरो के कारोबार में खुद ही ज्वेलरी डिजाइनिंग का काम भी किया करता था.. ।
इन सब को देख कर उसकी आंखें चुंधिया रही थी.. ।

आज इवेंट की आखिरी शाम थी और वह विराट के साथ उनके खास मेहमानों से व्यक्तिगत रूप से मिल रही थी। सब से मिलते-जुलते विराट आगे बढ़ा और परी के पास जाकर खड़ा हो गया। परी अपने विराट काका के गले से लग गई ।
कली आश्चर्य से उन दोनों को देख रही थी।
क्योंकि अब तक उसे विराट का यह परिचय नहीं मिला था कि उसका राज परिवार से भी कोई लेना देना है। अब तक विराट ने कली को सिर्फ यह बताया था कि वह एक शौकिया चित्रकार है और बस इसी में वह काम किया करता है।
परी ने जैसे ही विराट के लिए काका सा शब्द का प्रयोग किया, कली आश्चर्य से विराट को देखने लगी। और विराट ने हंसते हुए परी की बाहों को अपने कंधों के घेरे में ले लिया।

“कली इन से मिलो, यह हमारी भतीजी है परी!  इनका पूरा नाम है राजकुमारी परिधि। लेकिन हम सब बचपन से ही इन्हें प्यार से परी बुलाते हैं।”

विराट की बात सुनकर कली परी की तरफ देख कर मुस्कुरा उठी और उसके बाद उसने अपनी सवालिया आंखें विराट के चेहरे पर गड़ा दी।

” आपने मुझे बताया नहीं कि आप खुद भी राज परिवार का हिस्सा है ?”

विराट कली की बात सुन कर मुस्कुरा उठा।

” सच कहूं तो राज परिवार का होने लायक कोई गुण मुझ में नहीं है।मैं शुरू से ही अपने परिवार से अलग उड़ चुका परिंदा था। मुझे महल के कायदे कानून बचपन से ही कभी समझ में नहीं आए और ना ही मैं महल वासियों की तरह उन बंधनों में बंध कर रह पाता था।
    तुम्हें पता है कली हमारे महल में आज भी ठीक 8 बजे हर किसी के कमरे के बाहर का बड़ा घंटा बजा दिया जाता है, और यह इसलिए है कि अब आप सो कर उठ जाइए।
   ठीक 9 के 5 मिनट पहले आपको नीचे दीवान खाने के डायनिंग हॉल में मौजूद रहना है। हमारे महल का सदियों से यह नियम है कि हम सब साथ बैठकर ही नाश्ता करते हैं। दोपहर के खाने के पहले भी हर किसी के कमरे में एक अलार्म बज जाता है। हमें नियत वक्त पर वहां पहुंचना होता है। शाम के खाने का भी यही हाल है। जब तक हमारी दादी साहब थी हर किसी को इन नियमों का कड़ाई से पालन करना पड़ता था।अब तो ऐसा है कि रूपा भाभी साहब ही महल के महारानी पद पर हैं। पहले मुझे लगा करता था कि वह थोड़ी सी सॉफ्ट होंगी और लोगों को छूट दे देती होंगी लेकिन अब समझ में आता है कि शायद उस जिम्मेदारी से भरे पद पर पहुंचने के बाद लोगों में परिवर्तन तो आ ही जाता है ।
     मुझसे यह घंटों की उठक बैठक नहीं हो पाती, इसलिए मुझे महल में रहना कभी भी पसंद नहीं था। फोटोग्राफी का शौक था, वह एक जगह रह कर पूरा भी नहीं किया जा सकता, बस इसलिए देश विदेश घूमने का मौका मिल गया और लोगों को मेरी तस्वीर पसंद आने लगी..।”

कली विराट की बात सुन कर मुस्कुरा उठी विराट ने परी की तरफ देखा और शौर्य के लिए पूछ लिया….

“कहां है हमारे फ्यूचर प्रिंस.. ?”

” पता नहीं कहीं आसपास ही होंगे.. !”

परी अपने विराट चाचू को इवेंट में हुई बातचीत बताने लगी और कली धीरे से प्यास लगने के कारण एक तरफ पानी लेने के लिए बढ़ गयी…

इधर-उधर देखती वह जाने किसे ढूंढ रही थी..
लेकिन अचानक उसकी आंखें शौर्य पर जाकर अटक गई। शौर्य एक तरफ किसी लड़के से खङा बातें कर रहा था। उसी वक्त उधर से एक वेटर निकला । उस वेटर के हाथ में ट्रे थी और जिस पर ड्रिंक रखे थे।
वेटर का अचानक संतुलन बिगड़ा और उसके हाथ की ट्रे उसके हाथ से छूट कर गिर पड़ी, लेकिन इसी सबमे उसमे रखा ड्रिंक शौर्य के ऊपर पलट गया…

शौर्य के साथ खड़ा लड़का वेटर पर चीखने लगा, लेकिन उसी वक्त वेटर चकरा कर गिरने को हुआ और शौर्य ने लपक कर उसे थाम लिया… वहीं किनारे पर की कुर्सी पर शौर्य ने उस वेटर को बैठा दिया। शौर्य के साथ का लड़का अब भी वेटर को घूर कर देख रहा था। शायद उसे शौर्य का इस तरह एक वेटर की मदद करना जरूरी काम में नहीं शुमार था। और इसलिए उसे यह बात पसंद नहीं आ रही थी। लेकिन शौर्य ने वेटर को वहां बैठाने के बाद उसकी हथेली पर अपनी उंगलियां रखकर उसकी नब्ज टटोलने की कोशिश की….

वेटर की जांच परख करने से शौर्य को यह महसूस होने लगा कि वेटर की तबीयत खराब लग रही है। और इसलिए उसने बाकी लोगों की परवाह किए बिना उस वेटर को सहारा देकर उठाया और एक तरफ को बढ़ गया। उसी वक्त कली शौर्य से मिलने उसकी तरफ बढ़ रही थी। लेकिन कली जब तक वहां पहुंची तब तक शौर्य वहां से जा चुका था।

शौर्य के साथ का लड़का अपने बाकी दोस्तों की तरफ मुड़ गया। वहां उस वक्त मौजूद हर कोई एक दूसरे से विदा लेने में मशगूल था।

    कली का ध्यान कुर्सी पर रखें एक मोबाइल पर चला गया। कली ने उस मोबाइल को उठाया और जाने क्या सोचकर ऑन कर लिया। उसके दिमाग में तो यही था कि जिसका भी मोबाइल होगा लॉक होगा और जाहिर था कि इस लॉक मोबाइल को देखकर यह जानना मुश्किल होता यह किसका मोबाइल है?  लेकिन वह मोबाइल लॉक नहीं था ।
  फोन खुलते ही स्क्रीन सामने खुल गई। कली के लिए यह बहुत आश्चर्य की बात थी।
     आज के जमाने में भी क्या किसी का फोन अनलॉक हो सकता है? संभव नहीं है! यह कौन है? किसका है? कहीं उस वेटर का तो नहीं? लेकिन तभी कली की नजर स्क्रीन पर दिखती तस्वीर पर चली गई…

स्क्रीन पर वही लड़का नजर आ रहा था, जिसके पीछे कली यहां तक आई थी…” ओह्ह तो ये मिस्टर ड्राइवर का फोन है ! बताओ कितनी अजीब बात है, 3 दिन से यह ड्राइवर मुझसे मिल रहा है। लेकिन आज तक इसने अपना नाम नहीं बताया, आज पूछ लूंगी..!”

अपने ख्यालों में गुम कली ने उस मोबाइल को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी..
किसी के अनलॉक फोन को चेक करना वैसे भी कर्टसी नहीं होती, यही सोचकर उसने फोन को बंद किया और अपने हाथ में थाम लिया।
वह उसी दिशा में आगे बढ़ गई जिस तरफ शौर्य आगे बढ़ा था ।
कुछ दूर जाने के बाद ही उसे एक मेडिकल रूम नजर आने लगा। वह भी वहां चली गई। वहां उसने देखा शौर्य वहां मौजूद डॉक्टर से कुछ बातें कर रहा था। कली कुछ देर तक दरवाजे पर हाथ बांधे खड़ी रही। कुछ देर बाद ही शौर्य वहां से वापस बाहर की तरफ मुड़ गया। दरवाजे के पास पहुंचते ही वो कली को देखकर चौंक गया..

” तुम यहां कैसे?”

“बस… आ गयी ! तुम यहाँ क्या कर रहें हो मिस्टर ड्राइवर ?”

“मैं भी बस ऐसे ही !”

शौर्य ने बातों को गोल घुमा दिया!
कली ने आंखें बड़ी बड़ी कर उसके चेहरे पर टिका दी!

” क्या हुआ तबीयत खराब हो गई है क्या? वैसे भी गरीब घर के लड़के को जब ऐसे राजशाही का खाना मिलेगा वह भी 3 दिन तक तो, पेट तो गड़बड़ होना ही है! पक्का लूज मोशन हो गए होंगे! इसलिए दवा लेने डॉक्टर तक चले आए, है ना..!”

” यार तुम इतनी इंटेलिजेंट बचपन से हो, या कोई स्पेशल कोर्स किया है तुमने?”

” बचपन से इंटेलिजेंट हूं। जब मैं पैदा हुई थी ना तब डॉक्टर ने मेरे चेहरे को देख  मेरी भविष्यवाणी कर दी थी, कि लड़की इतनी ज्यादा इंटेलिजेंट है कि जिस एग्जाम में बैठेगी उसे पहली बार में क्रेक कर लेगी।  क्या है कि मेरा मूड नहीं होता वरना मैं जाने कितने टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन पास कर चुकी होती..!”

” हां ऐसा होता है सुपर टैलेंटेड लोगों का मूड अक्सर उनका साथ नहीं देता है।
वैसे अब मेरा पेट ठीक है। मुझे डॉक्टर साहब ने दवाइयां दे दी और यह बड़े आश्चर्य की बात है कि यहां की सिर्फ एक दवा के डोज से ही मेरा पेट बिल्कुल सही हो गया..!”

कली हंसने लगी उसे तो सच्चाई मालूम थी। लेकिन वो यूं ही शौर्य को छेड़ रही थी। उसे जाने क्यों इस लड़के को ऐसे तंग करने में बड़ा मजा आता था। लेकिन शौर्य वाकई इस बात को नहीं जानता था कि कली यह जानती है कि वह वेटर को यहां लेकर आया है। और उसे चिकित्सा दिलवाने के लिए उसने डॉक्टर से विशेष प्रार्थना भी की है..

असल में राज परिवार में मौजूद मेडिकल हेल्प सिर्फ और सिर्फ राजशाही के परिवार वालों के लिए थी। वहां मौजूद डॉक्टर वेटर को हाथ लगाने के लिए भी तैयार नहीं था.. ।
और तब शौर्य को अपना परिचय देना पड़ा।
वैसे तो वह डॉक्टर भी जानते थे कि वहां मौजूद लड़के लड़कियां किसी न किसी राजशाही से ही ताल्लुक रखते हैं। लेकिन राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का पुत्र होना अपने आप में एक विशेष बात थी।
       
        शौर्य ने जैसे ही अपने पिता का परिचय दिया, डॉक्टर ने उस वेटर को देखने के लिए हामी भर दी। हालांकि डॉक्टर ने शौर्य से यह भी प्रॉमिस ले लिया कि शौर्य बाहर जाकर इस बात को किसी से भी नहीं कहेगा कि उस डॉक्टर ने वेटर की चिकित्सा की है…।

शौर्य धीरे से आगे बढ़ गया कली भी उसके साथ चलने लगी..

” मैं वाकई सुपर इंटेलिजेंट हूं, लेकिन सच कहूं तो कभी घमंड नहीं किया। पता नहीं क्यों मुझे किसी बात का घमंड ही नहीं होता। जबकि देखो मैं कितनी ज्यादा खूबसूरत हूं। मेरा फिगर परफेक्ट मॉडल जैसा है। बाल मेरे एकदम रेशमी है। मेरे चेहरे से ही नजर आता है कि मैं कितनी कोमल ह्रदय की स्वामिनी हूं। इतना ही नहीं दिमाग तो मेरा इतना तेज चलता है कि, मैं …..अब छोड़ो क्या अपनी तारीफ करूं?  लेकिन पता है मेरे साथ क्या होता है..?”

” क्या होता है?”

शौर्य ने कली की तरफ देखकर सवाल पूछ लिया हालांकि उसे कली की बातें सुनकर हमेशा ही हंसी आने लगती थी। कली ने बड़े भोलेपन से शौर्य को देखा और जवाब देने लगी।

” मेरे साथ यह होता है कि मुझे मिलने वाले लोग अक्सर  बुद्धू किस्म के होते हैं। वह अपनी चीज इधर-उधर रख कर भूल जाते हैं। और बहुत देर तक उन्हें होश भी नहीं रहता कि उनका फोन कहां है?”

कली ने जैसे ही फोन के बारे में कहा, शौर्य को तुरंत अपने मोबाइल की याद आ गई। उसने अपनी शर्ट के साथ-साथ अपनी पैंट्स की जेब की तलाशी लेनी शुरू कर दी। लेकिन उसे अपना मोबाइल नहीं मिला तो घबराकर इधर-उधर देखते हुए उसी कुर्सी की तरफ बढ़ गया..। मुस्कुरा कर कली भी उसी तरफ बढ़ गयी..

वहाँ पहुँच कर शौर्य इधर उधर अपना फ़ोन ढूंढने लगा, और तब कली ने उसका फ़ोन अपने पास से निकाल कर उसके सामने रख दिया..

“यहीं ढूँढ रहें थे ना मिस्टर ड्राइवर !”

शौर्य ने हाँ में सर हिलाया और लपक कर अपना फ़ोन हाथ में ले लिया..

“ये तुम्हें कहाँ मिला ?”

“वहीं जहाँ तुमने छोड़ दिया था.. !”

एक गहरी सी साँस भर कर शौर्य ने अपना मोबाइल अपने पास कर लिया..

“जब फ़ोन की इतनी चिंता है तो इस पर लॉक क्यूँ नहीं लगाया है ?”

” मेरी जिंदगी में ऐसी कोई बात ही नहीं जिसे मैं किसी से भी छुपा कर रख सकूं। मैं जो हूं, जैसा हूं, मेरे जानने वालों के लिए बिल्कुल वैसा ही उनके सामने हूँ, तो फिर मोबाइल में लॉक क्यों लगा कर रखूं।
हां मोबाइल गुमने पर जरा परेशान हो गया था। क्योंकि अगर मेरा मोबाइल खो जाता तो मेरी मॉम बहुत परेशान हो जाती। दिन भर में एक बार उनसे बात करना मेरे लिए बहुत जरूरी है। यू नो दैट पजेसिव मॉम टाइप, वह भी बहुत पज़ेसिव है मेरे लिए.. ।
बस वही जरा सी टेंशन हो गई थी कि अगर फोन खो गया और मॉम ने कॉल किया तो फिर वह बहुत ज्यादा परेशान हो जाएंगी..।”

” अपनी मॉम से बहुत प्यार करते हो ना..! उन्हें देखे बिना, उनसे बात किए बिना रह नहीं सकते ना?”

” ऑब्वियसली, आई मीन कौन रह सकता है अपनी मॉम से बात किए बिना, उन्हें देखे बिना..!”

“मैं रहती हूँ.. !”

“क्यों ?”

“मेरी मॉम भगवान के पास चली गयी है ना, एक मासी माँ थी वो भी कहीं गुम हो गयी हैं.. इण्डिया में !”

“ओह्ह…..!”

इससे ज्यादा शौर्य  से कुछ कहा नहीं गया क्योंकि सॉरी बोलना उसकी आदत में शुमार नहीं था। हां उसे कली के लिए बुरा जरूर लगा लेकिन उसके चेहरे से ही यह भाव नजर आ गए। वह कुछ बोल नहीं पाया। कली ने उसे देखा और हल्के से मुस्कुरा उठी..

“कोई बात नहीं ये तो मेरी डेस्टिनी थी.. इसमें तुम क्या कर सकते हो ? अच्छा एक बात बताओ, 3 दिन से हम साथ हैं, मिलजुल रहे हैं। और बड़ी अजीब सी बात है कि मुझे तुम्हारा नाम भी नहीं पता। तुम्हारा नाम क्या है..?”

“हे प्रिंस !”

उसी वक्त परी ने दूर से शौर्य को आवाज़ लगा दी..

“आ रहा हूँ !”

कह कर शौर्य कली की तरफ घूम गया..

“ओह तो प्रिंस नाम है तुम्हारा ? अच्छा तरीका है। बन नहीं सकते, तो क्या हुआ नाम तो रख ही सकते हैं।
    प्रिंस तुमसे मिलकर ठीक लगा।  वैसे तुम इंडिया वापस लौट रहे हो तो अब तुम्हारी और मेरी मुलाकात होने के कोई आसार नहीं हैं, लेकिन फिर भी औपचारिकतावश कहा जाता है ना…. फिर मिलेंगे !”

कली ने अपना हाथ शौर्य के सामने बढ़ा दिया..
शौर्य ने भी धीरे से कली के हाथ को थाम लिया। दोनों को ही एक दूसरे का हाथ थाम कर यूं लगा जैसे हाथ मे सिर्फ हाथ नहीं, बल्कि उनके जन्मों का सहारा है।
दोनों के ही शरीर में सरगम सी बज उठी और ऐसा लगा जैसे उनके चारों तरफ एक मधुर संगीत गूंजने लगा हो।

चौंक पर कली ने हीं पहले अपना हाथ पीछे खींच लिया। शौर्य ने अपनी हथेली से अपने बाल सहला लिए और वापस मुड़ गया।
    कली भी उस मोड़ पर से वापस दूसरी तरफ मुड़ गई और बाहर निकल गई।
और इस तरह वह 3 दिन की छोटी सी मुलाकात एक मीठी सी याद दोनों के सीने में छोड़कर गुजर गई।

उस वक्त उन दोनों को कहां पता था कि उन दोनों के हाथों की रेखाएं आगे कितने अजीब मोड़ लाकर उन दोनों को मिलवाने वाली है….

*****

शौर्य मुड़कर चला जा रहा था कि जाने क्या सोचकर वह वापस एक पल के लिए पलटा और ठीक उसी वक्त कली भी उस ड्राइवर को एक नजर देखने के लिए पलट गई। दोनों की नजरें एक बार फिर मिली  और दोनों ही अपनी इस बेवकूफी पर झेंप कर रह गए।
    उसी वक्त शौर्य का मोबाइल बजने लगा। उसने मोबाइल की तरफ देखा। इंडिया से मीरा का फोन आ रहा था। शौर्य का उठाने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन उसने फोन उठा लिया। उसके फोन उठाते ही दूसरी तरफ से मीरा चहक उठी।

”  हेलो शौर्य! कैसे हो? आज तो तुम्हारे इवेंट का आखिरी दिन था ना? और कल तुम मेरे पास पहुंच जाओगे। बेबी आई मिस यू सो मच.. !”

इतनी सब लाड़ की बातें सुन कर भी शौर्य का मन मीरा की तरफ नहीं झुक पाता था। बावजूद अपने स्वभाव के कारण वो उसकी बातें काट भी नहीं पाता था.. ।

कुछ थोड़ी बहुत औपचारिक बातों के बाद आखिर मीरा असली मुद्दे पर चली आई।

” शौर्य बेबी कुछ पैसे चाहिए थे मुझे..!”

“लेकिन अभी क्यूँ.. दो दिन पहले ही दिये थे ना ?”

” अच्छा अब तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है। 2 दिन पहले दिए थे और अगर मैं यह कह रही हूं कि मुझसे खर्च हो गये और मुझे वापस पैसे चाहिए तो तुम मुझसे सवाल करोगे? बस यही दिन तो देखना बाकी रह गया था। लंदन जाते ही भूल गए ना अपनी प्रिंसेस को।
चलो कोई बात नहीं, अभी भी मेहनत कर रही थी कल से ओवरटाइम कर लूंगी..!”

“मेरा कहने का ये मतलब नहीं था !”

“फिर क्या था तुम्हारा मतलब..? तुम अच्छे से जानते हो मेरे दादा जी की तबीयत इतनी खराब रहती है। उनके हॉस्पिटल का खर्चा ही इतना ज्यादा है। 1 दिन का 10 से 15000 लगता है। अब इसमें तुम बताओ कि कैसे मुझे पैसे पूरेंगे।
उनके हॉस्पिटल के खर्चे के अलावा उनकी दवाइयों पर खर्च होता है,उनके टेस्ट पर खर्च होता है.. ।
मैं भी क्या करूँ ? तुम्हें क्या लगता है मुझे बार-बार तुम्हारे सामने हाथ फैलाना अच्छा लगता है? लेकिन क्या करूं, मेरे पास भी तो कोई और रास्ता नहीं है। अगर मैं ठीक-ठाक कमाने लगती तो कभी तुम्हारे सामने हाथ नहीं फैलाती। इसलिए तो तुम्हारे पीछे पड़ी थी कि तुम्हारे भाई के ऑफिस में मुझे मॉडल का काम मिल जाए।  एक मॉडलिंग असाइनमेंट भी मिल गया तो दो-तीन महीनों का खर्च तो मेरा निकल जाएगा। और उसके बाद एक के बाद एक मॉडलिंग असाइनमेंट मिलते जाने से मेरा घर खर्च मैं खुद उठा लूंगी। लेकिन तुम्हारे भाई ने भी अभी मुझे कहां नौकरी दी है? अभी तो 10 दिन की ट्रेनिंग पर रखा है उसके बाद उस ट्रेनिंग में से सिर्फ 7 लोगों को सेलेक्ट किया जाएगा और उन्हें पैरिस ले जाया जाएगा..

शौर्य के लिए हर्ष के खिलाफ कुछ भी सुनना बेहद नागवार था। उसके लिए हर्ष दुनिया का सबसे सही, सच्चा और ईमानदार लड़का था और इसीलिए हर्ष जब, जो भी निर्णय लेता था उसके सारे निर्णय शौर्य को आंख बंद करके मंजूर होते थे। और बस इसीलिए उसने मीरा की बात पूरी सुने बिना ही अपना सवाल दाग दिया।

” कितने पैसे डाल दूं ?”

मीरा खुशी से चहक उठी। लेकिन अपने आवाज की गंभीरता उसने बदलने नहीं दी।

“डेढ़ दो लाख ठीक है।”

” दो लाख डाल रहा हूं। कुछ कम लगे तो फिर बता देना।”

शौर्य ने फोन रखा और तुरंत मीरा के अकाउंट में रुपये  डाल दिए..
मीरा इस वक्त हर्ष के ऑफिस के पांचवें फ्लोर पर उसी हॉल में मौजूद थी, जहां उसकी बाकी मॉडल्स के साथ वर्कशॉप चल रही थी। आज उन लोगों को मेकअप के टिप्स देने के लिए भारत की सबसे बड़ी ब्यूटीशियन मेहनाज हुसैन आई हुई थी…

मेहनाज ने 10 मिनट के लेक्चर के बाद एक छोटा सा ब्रेक उन लड़कियों को दिया था और उसी बीच में मीरा ने शौर्य को फोन करके पैसे मंगवा लिए थे। लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि दूर खड़े धनुष की आंखें मीरा पर टिकी हुई थी…

क्रमशः

aparna

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

बहुत अच्छा भाग दीदी मीरा की सच्चाई एक दिन सामने आएगी शौर्य का हालांकि घ्यान है भी नहीं और कली तो हर पल नई होती जा रही है, बहुत अच्छा भाग रहा दीदी…💐🙏👌

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत खूबसूरत भाग👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बेशक शौर्य पर अपूर्व मामा ने गलत बातों का पर्दा डाल दिया हो, बेशक अपूर्व ने पूरी कोशिश की उसे राजा और बांसुरी के खिलाफ करने की पर.. राजा और बांसुरी का खून कभी गलत हो ही नहीं सकता, बस कुछ समय के लिए राह भटक जरूर गया है शौर्य पर अपने संस्कार वो अभी भी नहीं भुला तभी तो वो वेटर की help करने लगा।
कली ने अपनी तारीफ खूब की 👏तारीफ के काबिल भी वो।
मीरा जैसी लड़कियां तो लड़कों को लूटने का हुनर खूब जानती है पर कब तक वो शौर्य को ऐसे लुटती रहेगी आज तो धनुष ने भी देख लिया, अब तो गयी मीरा 😃।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻।