जीवनसाथी -3, भाग -33

हर्ष और धनुष का काम भी पूरा हो चुका था, वहाँ मीठी और यश भी उनके साथ थे, और चारों ने ही वहाँ अपने काम को बड़ी मेहनत से अंजाम दिया था..
उनकी मेहनत और काम के प्रति लगन देख कर कोई नहीं कह सकता था कि ये बच्चे मुहं में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए रॉयल किड्स हैं..
सुबह समय पर उठ कर सब अपने काम में लग जाते और फिर सीधे शाम को ही उन्हें फुरसत मिलती.. इस सब का अंजाम ये हुआ की हर्ष ने जिस विदेशी कंपनी से हाथ मिला कर सौंदर्य प्रसाधनों की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था, उस कम्पनी ने हर्ष का गले लगा कर स्वागत किया।
और तीस सत्तर की पार्टनरशिप फिफ्टी फिफ्टी की पार्टनरशिप में बदल गयी.. ।
वहां का सारा काम निपटा कर हर्ष और बाकी लोग वापसी करने वाले थे..
वापसी के एक दिन पहले शाम के वक्त वो चारों ही पेरिस घूमने निकल गए..
हर्ष और धनुष पहले भी अपने काम से पेरिस आ चुके थे इसलिए वो जग़ह उन दोनों की घूमी हुई थी, लेकिन मीठी और यश के लिए सब नया था..
मीठी ने इंडिया से पेरिस के लिए निकलते समय ही सबसे साफ-साफ शब्दों में कह दिया था कि, उसे सैक्रे कोएर देखने जरूर जाना है।
“सो कहाँ चले ? वैसे इस वक्त हमारे पास बहुत सारा टाइम है नहीं… !”
“मुझे सैक्रे कोएर जाना है.. !” धनुष ने पूछा
मीठी ने बड़ी उम्मीद से धनुष की तरफ देखा..
“वो तो दूर है, और मुझे वापसी की तैयारियां भी देखनी.. अगर हर्ष जाना चाहे तो तुम दोनो चले जाओ.. !”
मीठी ने हर्ष की तरफ देखा, हर्ष ने धीमे से गर्दन झुका कर हामी भर दी..
“तू भी चलेगा ना ?” मीठी ने यश को देखा..
यश के चेहरे पर थकान नज़र आ रही थी..
“ज़रूरी है क्या, मेरा भी जाना ?”
“नहीं आलसी, बिलकुल ज़रूरी नहीं है.. ! मैं जानती ही थी कि तुम नहीं चलोगे.. !”
मीठी ने अपना छोटा सा लेदर का बैग अपनी पीठ पर टांगा और हर्ष के साथ निकल गयी….
वो दोनों सैक्रे कोएर के लिए निकल गए..
वहां नीचे पहुंचने के बाद मीठी तो उस आलीशान संगमरमर की इमारत की खूबसूरती में खो कर रह गयी लेकिन हल्की धूप की वजह से हर्ष को कुछ प्यास सी लगने लगी थी.. उसने इधर उधर देखा और एक जूस कॉर्नर से दो जूस ले लिए..
यहाँ पेरिस में इन्हे कोई नहीं जानता था,इसलिए ये लोग बेझिझक बिना किसी सिक्योरिटी के घूम रहे थे..
हर्ष ने जूस केन लिया और खोल कर पीने लगा, लेकिन उसे उसका स्वाद कुछ अजीब सा लगने लगा..
“ये जूस कुछ सही नहीं लग रहा… !”
मीठी ने जैसे ही ये बात सुनी चौंक कर हर्ष की तरफ देखने लगी..
“दिखाओ… !”
.उसने हर्ष से लेकर जूस पीकर देखा, उसे भी उसका स्वाद सही नहीं लगा..
जूस कुछ अलग तरह के फलों से बना था..
“ये तो खराब हो गया है.. !”
जब तक हर्ष रोक पाता, मीठी उस दुकान वाले तक पहुँच गयी….
“इतने बड़े टूरिस्ट स्पॉट में सड़ा हुआ जूस बेचते हुए शर्म नहीं आती.. !”
भौचक्का सा दुकान वाला मीठी को देखने लगा..
उसी वक्त हर्ष ने आकर मीठी को समझना शुरू कर दिया..
“छोड़ो, जाने दो ना.. हम नहीं पिएंगे.. चलो यहाँ से !”
“हम लोग तो नहीं पिएंगे, लेकिन ये ऐसा ख़राब सामान बेच कर तो गलत कर रहा है ना !”
“जाने दो.. हमे क्या ? वो जाने और उसके कस्टमर !”
उन दोनों की बातें सुन कर वो गोरा दुकानदार मीठी से उलझ गया..
वो उन्हें अपशब्द कहने लगा.. उसके अनुसार भारतियों को अंग्रेज़ो का शुक्रगुज़ार होना चाहिए की उन्होंने उन्हें छुरी कांटे से खाना सिखाया, वरना वो लोग जंगलियों की तरह हाथ से खाते थे, और दिशा जंगल को जाया करते थे.. जूस जैसे चीजे तो उनकी डिक्शनरी में कभी शामिल ही नहीं थी.. वो लोग तो बस देसी गाय का दूध दही लस्सी को ही अपना सब कुछ माने बैठे थे..
उसकी फ़िज़ूल बातें सुन मीठी का गुस्सा सांतवे आसमान पर पहुँच गया..
और वो भी उस दुकानदार से उलझ पड़ी..
हर्ष ने जैसे तैसे मीठी को समझा बुझा कर उस दुकानदार से अलग किया और उसे साथ लेकर आगे बढ़ गया..
“इसीलिए इन बद्तमीज़ों पर गुस्सा आता है.. आज हम पढ़ लिख कर कहाँ से कहाँ पहुँच गए और ये आज भी हमे पता नहीं कहाँ समझते हैं.. ?”
“अरे ठीक है.. किसी के कुछ भी सोचने से हम वैसे थोड़े ना हो जायेंगे.. जिसकी सोच जितनी ऊंची है, वह उतना ही सोच सकता है..
उससे आगे बढ़कर उसकी सोचने की क्षमता ही नहीं है, तो इस बात पर उससे नाराज होकर लड़ने से क्या फायदा? ऐसे टॉक्सिक लोगो से दूर रहना ही बेहतर है.. छोड़ो हटाओ, उस बेचारे को तो यह भी नहीं पता कि वह किस से बात कर रहा था? !”
हर्ष ने मुस्कुरा कर मीठी से कहा और मीठी घूर कर हर्ष को देखने लगी..
” क्या मतलब है तुम्हारा? किस से बात कर रहा था?”
“हाँ तो मीठी क्वीन एलिज़ाबेथ से कम है क्या ? उसे नहीं पता की उसका पाला किस से पड़ा है… !”
“मज़ाक उड़ा रहे हो ना ?”
“ना.. मेरी इतनी हिम्मत कहाँ ?”
और हँस कर हर्ष पलट कर आगे बढ़ गया, मुहं घुमा कर उस दुकानदार को एक बार फिर खा जाने वाली नजरो से घूर कर मीठी भी हर्ष के पीछे बढ़ गयी..
उस भवन में ऊपर जाते समय संगमरमरी किनारे पर एक जग़ह पर ज़रा तेज़ किनारा था, जिस पर हर्ष का हाथ पड़ गया, और बस हाथ पड़ने से ही जो रगड़ हुई उससे हर्ष के हाथ से खून निकलने लगा..
खून देखते ही मीठी घबरा गयी..
“अरे ये क्या हुआ ? यहाँ कुछ है ? कोई हेल्प कर पायेगा.. !”
मीठी परेशान सी इधर उधर मदद के लिए देखने लगी.. लेकिन लोग खुद में मगन आगे बढ़ते जा रहे थे..
मीठी ने थोड़ा आगे बढ़ कर देखा लेकिन उसे हर्ष की मदद के लिए कुछ मिल ही नही रहा था..
“मत परेशन हो मीठी, ऐसी भी कोई चोट नहीं लगी है.. ज़रा सा खून है, बह कर रुक जायेगा.. !”
लेकिन मीठी को इस वक्त हर्ष की बात सुनाई नहीं दे रही थी..
उसने फटाफट पीठ पर टांग रखा अपना बैग निकाला और उसमे से फेस टिशू निकाल कर उसी से हर्ष का हाथ साफ करने लगी..
मीठी वैसे बहुत संयमी थी, लेकिन पता नहीं हर्ष के हाथ से बहता खून देख कर वो अपना सारा धैर्य चूक गयी..
हर्ष का हाथ साफ कर उसने अपने जादुई पिटारे से जाने क्या निकाल कर उसे लगा दिया…
हर्ष उसकी तत्परता देख देख कर मुस्कुरा रहा था..
“बस मीठी.. मैं ठीक हूँ.. ऐसी भी कोई चोट नहीं है !”
“लेकिन टिटनस तो लगवाना ही पड़ेगा.. पता नहीं यहाँ कोई डॉक्टर मिलेगा या नहीं ?”
“यहाँ बिना मेडिकल इश्योरेंस के डॉक्टर के पास जाना मुश्किल काम है.. चिंता मत करो, मुझे टिटेनस नहीं होगा, वैसे भी मुझे आयरन से नहीं लगी.. !”
“मुझे नहीं पता.. तुम्हे डॉक्टर के पास चलना ही पड़ेगा.. !”
वो ज़बरदस्ती खींच खाँच कर उसे डॉक्टर के पास ले गयी…
“अरे तुम अपना कोएर देख तो लो… जो तुम देखने की तमन्ना लिए यहाँ आयी हो.. मुझे याद है पेरिस आने के पहले ही तुमने हम सब से कहा था, तुम्हे सेक्रे कोएर देखना है.. और अब यहाँ तक आकर बिना देखे वापस लौट रही हो !”
“देखना था क्यूंकि कॉलेज में कभी किसी ने मुझसे कहा था की सेक्रे कोएर हमारे ताजमहल से ज्यादा खूबसूरत है, और मैंने कहा था ताजमहल से ज्यादा खूबसूरत दुनिया में कुछ नहीं.. !
बस उसी बात को करीब से महसूस करने, देखना चाहती थी.. लेकिन अब नहीं देखना.. !”
“यहाँ तक आकर लौट रही हो.. वो भी बिना देखे ! पता नहीं फिर कब ये मौका मिले ?”
“कोई बात नहीं.. मौका नहीं भी मिला तो कोई शिकवा नहीं, लेकिन अगर इस कट के कारण तुम्हारी तबियत को कोई नुकसान हुआ तो मुझे सहन नहीं होगा.. !”
“पागल हो तुम !”
“हम्म हूँ तो.. !”
मीठी वहाँ से वापस लौट गयी, मुस्कुरा कर हर्ष भी उसके पीछे बढ़ गया..
वो दोनों टैक्सी में सवार वहाँ से किसी डॉक्टर की तलाश में निकल गए…
मीठी के मोबाइल पर लगातार मेसेज बीप आ रही थी..
और वो हर बार मेसेज देख कर बिना जवाब दिए फ़ोन पलट कर रख रही थी..
“एक बार बात कर लो ना.. जिसका भी मेसेज आ रहा, वो बड़ी शिद्द्त से तुम्हे मिस कर रहा ?”
“मिस कर रहा नहीं, मिस कर रही.. मेरी दोस्त है !”
“ओह्ह.. कौन सी ? आई मीन मैं तो ऑलमोस्ट सबको जानता हूँ !”
“ये कॉलेज फ्रेंड है.. निशा !”
“ओह्ह.. मैं नहीं जानता शायद !”
“हम्म.. नहीं जानते… एक्चुली… वो, मेरी.. !”
कुछ दूर जाने पर उन्हें क्लीनिक दिख गया और मीठी अपनी बात कहते कहते रह गयी..
क्लीनिक में डॉक्टर ने देखने के बाद जब डॉक्टर ने भी तसल्ली कर दी कि कोई घबराने वाली बात नहीं है। तब जाकर मीठी के चेहरे पर राहत के भाव आये..
वो दोनों वहाँ से होटल की तरफ बढ़ गए….
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शौर्य के गार्ड्स और मीरा के पहुंचने से पहले शौर्य और कली वहाँ से निकल गए थे…
मौसम सुहाना हो चला था, और वो अपनी मौज में बनारस के रास्ते पर निकल चुके थे।
शहर की भीड़ भाड़ से आगे बढ़ते ही कली ने गाड़ी के कांच नीचे कर दिए ।
“अरे अरे यह क्या कर रही हो? एसी चल रहा है ।”
“तो क्या हुआ? मुझे बाहर की ठंडी हवा चाहिए, एसी की हवा में तो इतनी देर से बैठे हैं। मुझे न नेचुरल चीज़े पसंद आती है।”
” तुम ना बहुत ज्यादा फिल्मी हो। तुम्हें ऐसा नहीं लगता?”
” मैं जानती हूं कि मैं बहुत ज्यादा फिल्मी हूं। तुम्हें पता है अपने पैदा होने के बाद मैं पहली बार हिंदुस्तान आ रही हूं।
मैं हिंदुस्तान की नागरिक भी नहीं हूं..मैंने हिंदुस्तान सिर्फ टीवी पर ही देखा था..
और सबसे ज्यादा मूवीज़ में, इसलिए मुझे इंडियन सिनेमा से बहुत बहुत लगाव है !”
“हम्म, वो तो तुम्हारी हर बात पे नजर आता है.. !”
शौर्य ने अपने बालों पर हाथ फेरा और धीरे से उसने अपनी तरफ का ग्लास चढ़ा दिया..
“सुनो प्रिंस, इस मौके पर मुझे एक बहुत पुराना गाना याद आ रहा है..
“अब गाओगी भी क्या ?”
“हाँ.. क्यों नहीं.. मुझे गाना भी बहुत पसंद है.. !”और कली ने गाना शुरू कर दिया…
दो दीवाने शहर में,
रात में और दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढते हैं
एक आशियाना ढूँढते हैं…
दो दीवाने शहर में, रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढते हैं एक आशियाना ढूँढते हैं ..
इन भूलभुलैया गलियों में,
अपना भी कोई घर होगा ,
अम्बर पे खुलेगी खिड़की या,
खिड़की पे खुला अम्बर होगा …..!
“मुझे नहीं लगता की ये गाना हम पर सूट करता है, क्यूंकि मेरे पास तो मेरा घऱ.. ।”
कहते कहते अचानक शौर्य चुप हो गया..
“बोलो.. बोलो ना.. क्या गलत गाया है.. सही तो गा रही..। देखो, घऱ तो मेरे पास भी है। लेकिन वह कायदे से देखा जाए तो मेरे डैडा का है। और मैं बिल्कुल अपने डैडा और ममा जैसे बनना चाहती हूं।
उन्होंने सब कुछ अपनी मेहनत से जोड़ा। उन्हें कुछ भी विरासत में नहीं मिला। मेरे पास विरासत की हवेली है, लेकिन मैं अपनी मेहनत से अपना एक छोटा सा घर बनाना चाहती हूं।
तुम जानते हो प्रिंस, मैं बहुत रईस घर की लड़की हूं। तुम्हें भी कभी-कभी लगता होगा ना कि मैं क्यों अपना घर अपने,डैडा को छोड़कर यहां से वहां भटक रही हूं। लेकिन सच कहूं तो मेरी इस इच्छा के पीछे छिपा असली कारण शायद में भी नहीं समझ पाती हूं। खैर मैं चाहती तो बहुत कुछ हूं, लेकिन जानती हूं कि इन कुछ दिनों में सब कुछ कर पाना मुश्किल है।
लेकिन फिर भी कुछ चीज तो मैं पूरी करके ही लौटूंगी..!”
“जैसे.. ऐसा कोई एक सपना बताओ, जो तुमने जागती आंखों से सबसे ज्यादा देखा है..।”
” राजा अजातशत्रु से मिलना..!”
काली की इस बात को सुनकर शौर्य पल भर को उसे देखता रह गया और वापस मुड़कर अपना ध्यान उसने सामने दिख रहे रास्ते पर लगा दिया..
” चलो ठीक है, तुमसे प्रॉमिस करता हूं तुम्हें यहां से लौटने के पहले राजा साहब का ऑटोग्राफ दिलवा कर रहूंगा..!”
“सच्ची.. ?”
“हम्म.. !”
. कली मुस्कुरा कर रह गई।
गाड़ी आगे बढ़ रही थी। रास्ते पर उन दोनों का ही ध्यान एक बुजुर्ग आदमी पर पड़ा।
वह आदमी जरा झुक कर एक लकड़ी की सहायता लेकर खड़ा था, और शौर्य की गाड़ी को देखकर आगे बढ़ाने के लिए हाथ दिख रहा था।
लेकिन शौर्य की गाड़ी रफ्तार में थी और वह एकदम से गाड़ी रोक नहीं पाया और गाड़ी आगे बढ़ गई।
कली के मन में यह विचार आया कि शायद शौर्य अपने मालिक की इस महंगी सी गाड़ी में उस गरीब बुजुर्ग को शायद बैठना नहीं चाहता होगा, इसलिए कली ने कुछ नहीं कहा। लेकिन थोड़ा आगे बढ़कर शौर्य ने गाड़ी को रोक दिया। और रिवर्स गियर में चलते हुए वापस उस बुजुर्ग तक ले गया।
उसके पास पहुंचकर शौर्य ने कांच नीचे किया और उस बुजुर्ग से सवाल कर दिया..
” क्या हुआ दादा, यहां इस सुनसान सड़क पर क्या कर रहे हो..!”
” बस रास्ता देख रहा था कि कोई मुझे आगे मेरी मंजिल तक पहुंचा दे कुंवर सा..।”
” इसी रास्ते में आगे जाना है क्या? तो आओ पीछे बैठ जाओ, आप भी..!”
वह बुजुर्ग आदमी धीरे से दरवाजा खोलकर पीछे बैठ गया और उसके बैठते ही शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ा दी..
” यहां इस सुनसान सड़क पर अकेले क्या कर रहे थे बाबा जी ?”
कली ने पूछा लेकिन उस बुजुर्ग आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया। कली ने दोबारा थोड़ा तेज आवाज में पूछा और तब उस बुजुर्ग आदमी ने वही पहले वाला जवाब दे दिया। कली मुस्कुरा कर शौर्य को देखने लगी और बहुत धीमी आवाज में फुसफुसाकर उससे कहने लगी..
” जब रास्ते में अकेले इन्हें खड़े देखा तभी मेरा मन कर रहा था कि तुमसे कहूं कि गाड़ी रोक कर इन्हें लिफ्ट दे दो। लेकिन फिर मुझे लगा पता नहीं तुम अपने मालिक की गाड़ी में किसी को लिफ्ट देना चाहोगे या नहीं ?”
शौर्य ने कली की तरफ देखा और बिना कुछ बोले बाहर देखने लगा, उसी वक्त अगले तीराहे पर एक ट्रक तेजी से दूसरी दिशा से आया। लेकिन वक्त रहते शौर्य की नजर उस ट्रक पर पड़ गई और उसने एकदम से गाड़ी की स्पीड बढ़कर तेजी से गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।
अगर एक सेकंड की भी चूक हो जाती तो शौर्य की गाड़ी उस लंबी चौड़ी ट्रक के नीचे बुरी तरह से कुचली जाती।
कली की आंखों के ठीक सामने यह सारी घटना हुई और वह घबरा कर रह गई। उसका कलेजा मुंह को आ गया।
उसकी आंखें घबराकर फैल गई।
वह तो अच्छा था कि दोनों ने ही सीट बेल्ट लगाई हुई थी। वरना कली आगे लगे कांच से जाकर जरूर टकरा जाती।
कुछ देर तक अपने को संभालने की कोशिश करने के बाद कली ने शौर्य की तरफ देखा..
” तुम ठीक हो?
“हम्म, और तुम ?”
” मैं ठीक हूं। बाबा जी आप ठीक हैं ? कली ने मुड़कर उस बाबा की तरफ देखा और उन्होंने धीरे से हां में गर्दन हिला दी..
” अजीबो गरीब मोड जीवन में आते रहेंगे लेकिन राजकुमार तुम घबराना नहीं। हो सकता है, एक बार को तुम्हें लगे कि तुम्हें आगे बढ़ने की जगह थम जाना चाहिए। रुक जाना चाहिए, और अपने कदम पीछे ले लेना चाहिए।
लेकिन याद रखना कि तुम्हें थमना नहीं है, और सतत आगे बढ़ते जाना है। चाहे कितने भी बड़े तूफान आए लेकिन तुम जर्रा नहीं हो जो, वह तूफान तुम्हें उड़ा ले जाए..
बाबा जी की बात सुनकर कली पलट कर बड़े ध्यान से उन्हें देखने लगी..
उनकी वेशभूषा, झुकी हुई कमर और सफेद बालों के अलावा उनके चेहरे पर कहीं पर भी बुढ़ापे के कोई निशान मौजूद नहीं थे। कली ने उनकी बात का समर्थन किया और वापस सीधे मुड़ गई..
” सुनो प्रिंस किसी ढाबे में गाड़ी रोक देना। थोड़ा रुक कर फ्रेश हो लेते हैं..।”
” इस एक्सीडेंट से घबरा गई हो क्या..?”
” नहीं डरी तो नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है अब हमें ब्रेक लेना चाहिए। हम बहुत देर से लगातार चल रहे हैं..।”
” ओके।”
कुछ आगे बढ़ने पर ही शौर्य को अपनी तरफ के रास्ते पर ही एक ठीक-ठाक ढाबा नजर आने लगा, और उसने गाड़ी उस तरफ घूम कर रोक ली।
दोनों ही गाड़ी से नीचे उतर गये। उतरते समय शौर्य ने पीछे बैठे बाबा जी को भी साथ चलकर चाय पी लेने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
उन्होंने कहा तुम दोनों पी कर आओ, मैं यहीं तुम्हारा इंतजार करूंगा।
वह दोनों वहां से उठकर ढाबे की तरफ चले गए। ढाबे में चाय के लिए बोलने के बाद दोनों एक टेबल पर बैठ गए, जहां से शौर्य को अपनी कार साफ नजर आ रही थी। शौर्य ने वेटर से कहकर कार में बैठे बाबा जी के लिए भी चाय भिजवा दी।
लेकिन वेटर जैसा गया था वैसा वापस लौट आया वापस आने के बाद उसने वह चाय का प्याला शौर्य और कली की टेबल पर रख दिया..
” साब वहां गाड़ी में तो कोई नहीं है..।”
“ऐसे कैसे कोई नहीं है। अभी तो हम लोग उतर के आए हैं। और वह दादाजी पीछे ही बैठे थे, ध्यान से देखो..।”
“नहीं साहब, मैं सच कह रहा हूं। वहां कोई नहीं है।”
उस लड़के के पास ज्यादा बातें करने का वक्त नहीं था। ढाबे पर बहुत सारे कस्टमर उसका इंतजार कर रहे थे। और इसलिए वह अपने हाथ पोछता वहां से आगे बढ़ गया और शौर्य आश्चर्य से कली और कली शौर्य को देखने लगी कि आखिर 2 मिनट के भीतर भीतर वह बाबा जी उनकी आंखों के सामने से ही कैसे और कहां गायब हो गए..?
क्रमशः

भाग ३३ का कमेंट दर्ज़ नहीं हो पाया था शायद, लैपटॉप से पढ़कर कमेंट किया था, बहुत बढ़िया लगा था मीरा हर्ष का साथ पढ़ना और उससे भी अच्छा लगा बाबाजी कली और शौर्य की बातें पढ़ना…💐🙏
tyah part laptop par padha hai di, parrt last me bahut hi rochak ho gya hai bahut hi mza aYA PADHKE MITHI aur harsh ki chemistry aur fir babaji in the climax, wonderful part di….
बांसुरी के साथ साथ मैं भी हर्ष और मीठी की जोड़ी बनाना चाहती हूँ पर… रूपा भाभी ने तो गड़बड़ कर दी पर जोड़ियाँ तो रब बनाता हैना, इनकी भी जोड़ी को रब ने ही बनाई है।
चलो बनारस 😊महादेव की नगरी 😊शौर्य और कली के साथ,।
ये बाबा जी कौन थे 🤔 जो भविष्यवाणी कर गए और गायब भी हो गए।
देखते है आगे क्या होता है,,
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।