अपराजिता -108

अनिर्वान को वो समय वापस याद आ गया……
अखंड थाने से फरार होकर रेशम के घर पहुँच गया था जहाँ से पुलिस ने उसे पकड़ कर वापस थाने में ला पटका था..
अनिर्वान के थाने में ही पुलिस वालों ने उसे पहुंचा दिया था, और उसे दो चार कड़ी बातें सुना कर अनिर्वान ने सलाखों के पीछे डाल दिया था..
इसके बाद अनिर्वान उस केस फाइल की बारीकी से छानबीन कर रहा था कि तभी विधायक जी की गाड़ी उसके ऑफिस के बाहर आकर रुकी..
दनदनाते हुए विधायक जी अनिर्वान के केबिन में दाखिल हो गए और उनके ठीक पीछे उनका चमचा धीरेन्द्र मौजूद था।
अनिर्वान ने विधायक जी को देखने के बाद उसके पीछे खड़े उसे लड़के को देखा और वापस विधायक जी की तरफ मुड़ गया..
” जी, कहिये सर! आपका यहां आना कैसे हुआ?”
“भरद्वाज, कैसे हो ?”
“बस सर, चल रही हैं ज़िन्दगी, कुछ खुरापात करने में और कुछ रोकने में.. !”
“हम्म.. अच्छा सुनो.. एक विशेष प्रयोजन से आना हुआ हैं हमारा..।
इधर सुनने में आया है कि किसी छात्र नेता ने यूनिवर्सिटी की किसी लड़की की इज्जत पर हाथ डाला है। देखो भारद्वाज हमारे क्षेत्र में यह सब हम सहन नहीं करेंगे…। हमारी अपनी भी बेटी है, इसलिए बहन बेटियों की इज्जत करना हम बहुत अच्छे से जानते हैं।
जिस लड़की की इज्जत पर हमला हुआ है, उससे भी हम पर्सनली मिलकर इस बारे में बात करेंगे कि उस लड़के को छोड़ना नहीं है, जिसने ये काम किया है..।”
” जी सर, मेरी भी यही कोशिश है कि इस काम के पीछे जिसका हाथ है, वह सलाखों के पीछे हो।”
अनिर्वान ने इतना कहकर एक नजर पीछे खड़े धीरेन्द्र पर डाली और उसकी जलती हुई निगाह पङते ही धीरेन्द्र सकपका गया…
” वह लड़का तो पकड़ा गया ना, कोई अखंड सिंह परिहार है.. ?”
” जी हां शक की बिनाह पर एक लड़के को पकड़ा तो है, लेकिन अब तक कोई ऐसा सबूत हाथ नहीं लगा जिससे उस पर आरोप साबित किया जा सके..।
लेकिन यह तो बहुत गलत बात है जिस लड़की के साथ बुरा हुआ, उसके बारे में सोचो।
सबूत की तलाश करते रहोगे और अगर सबूत नहीं मिला तो क्या आरोपी को खुला छोड़ दोगे? आज एक लड़की के साथ किया, कल दूसरे के साथ करेगा। ऐसे तो गुनहगारों को नहीं छोड़ा जा सकता ना..।”
“आप सही कह रहे हैं सर, गुनहगारों को नहीं छोड़ा जा सकता, और मैं पूरी कोशिश करूंगा की असली गुनहगार पकड़ में आ जाए..।”
“फिलहाल जो पकड़ में आया है, उस पर एक्शन लो। हम बस इसीलिए आए थे कि उस जल्लाद लड़के को जिंदा नहीं छोड़ना, कैसे भी हो उसे फांसी की सजा तक पहुंचाना है..।”
अनिर्वान ने विधायक जी के पीछे खड़े धीरेन्द्र को एक गहरी नजर से देखा और विधायक जी की तरफ देखने लगा..
“सर असली गुनहगार सामने आ जाए और मुझे सबूत मिल जाए की यही गुनहगार है, तो मैं उसे खुद अपने हाथों से फांसी पर लटका दूं। लेकिन जब तक गुनाह साबित नहीं हो जाता, तब तक मैं अखंड को दोषी नहीं मान सकता।
लेकिन हां आप यहां तक आए, आपने उस लड़की के बारे में इतना सोचा, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। आपकी तारीफ में जो भी कहूंगा कम है। आज आपके सामने आपको यकीन दिलाता हूं कि इस घटना के पीछे जो कोई भी है उसका पर्दाफाश करके रहूंगा…।”
अनिर्वान इतना बोलकर अपनी जगह पर खड़ा हो गया। उसने नेताजी के सामने हाथ जोड़ दिए, उसका इशारा समझ कर विधायक जी को भी खड़ा होना पड़ा।
वह यहां अपने ढेर सारे लोगों के साथ आए थे, कि यहां हंगामा करें और किसी तरह अखंड को थाने से निकाल कर बाहर ले जाकर भीड़ के हवाले कर दें।
धीरेन्द्र यही चाहता था कि अखंड एक बार निहत्थे उन लोगों के हाथ चढ़ जाए और फिर भीड़ का बहाना करके वह अपनी सारी जलन अपना सारा द्वेष अखंड पर निकाल लेता। उसे मारपीट कर अधमरा करने की प्लानिंग किए हुए धीरज अपने गुंडो के साथ यहां आया था। लेकिन अनिर्वान के रुतबे के सामने नेताजी की बोलती ही बंद हो गई थी..।
वह क्या-क्या सोच कर आए थे, और क्या बोल गए। उनकी हर एक बात को अनिर्वान ने बड़ी विनम्रता से काट दिया था। वरना उन्होंने सोचा था कि वह एक जबरदस्त ओजस्वी भाषण देंगे और अखंड को अपने हाथ से कॉलर पकड़ कर थाने से बाहर निकाल कर ले जाएंगे, और भीड़ के हवाले कर देंगे।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अनिर्वान अपनी बातों के तीर चलाते हुए नेताजी को उन्हीं के शब्द जाल में फंसा गया था। नेताजी के पास अब यहां से उठकर वापस लौट जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।
उनके हाथ में कुछ बाक़ी नहीं बचा था, यह महसूस कर वह उठ गए, और धीरेन्द्र को साथ लिए वहां से बाहर निकलने वाले थे कि तभी अनिर्वान ने पीछे से जाकर धीरेन्द्र के कंधे पर हाथ रख दिया। धीरेन्द्र ऐसे घबरा गया जैसे सांप उसकी त्वचा को छूकर निकल गया हो।
चौंक कर धीरेन्द्र पीछे पलट गया…
” कहिये !” अकड़ कर धीरेन्द्र ने पूछा
” आपकी तारीफ ?” अनिर्वान पूछ बैठा..
“वाइस प्रेजिडेंट हैं, छात्र संघ के ?”
“प्रेजिडेंट नहीं बन पाए.. इस बात का बुरा तो लगता होगा ?”
अनिर्वान के इस सवाल पर वो चौंक गया..
“आपको ऐसा काहे लग रहा ?”
“पता नहीं, तुम्हारे चेहरे पर लिखा है.. कि तुम हमेशा किसी से हारते आये हो…।”
उसने अपने चेहरे को छू कर महसूस करना चाहा…
“तुम नहीं जान पाओगे, उसके लिए हमारे जैसा दिमाग भी होना चाहिए… और बताऊँ मुझे भविष्य भी दिखता हैं.. !”
धीरेन्द्र ने घूर कर अनिर्वान को देखा और आगे बढ़ गया…
“सुन लो… इस सारे मसले के पीछे जो असली गुनहगार हैं, वो आज नहीं तो कल पकड़ा ही जायेगा..
वो कहावत सुनी हैं ना, कानून के घर देर हैं अंधेर नहीं.. !”
अनिर्वान के ऐसा बोलते ही पल भर के लिए धीरेन्द्र के चेहरे का रंग उड़ गया, लेकिन उसी समय विधायक जी ने उसे आवाज़ दी और वो तेज़ी से उनके पीछे चला गया..।
पर उस लड़के में जाने ऐसा क्या था अनिर्वान को वो उतना क्रन्तिकारी दिख नहीं रहा था, जितना वो खुद को दिखा रहा था..
विधायक जी के वहाँ से जाते ही अनिर्वान अपने ऑफिस से निकला और थाने की तरफ बढ़ गया..
अखंड को अब भी थाने में रखा गया था.. अगले दिन उसे कचहरी में प्रस्तुत किया जाना था।
अनिर्वान अखंड के सामने पहुंचकर खड़ा हो गया। उसने सलाखें खोली और अंदर चला गया।
उसके अंदर जाते ही बाबूराव साथ में कुर्सी लिए चला आया। उसने अनिर्वान के लिए कुर्सी रख दी। अनिर्वान अखंड के ठीक सामने बैठ गया। अखंड जमीन पर अपने दोनों पांव मोङे चुपचाप बैठा था..
“पूरा नाम बताओ अपना?”
अखंड से अनिर्वान ने सवाल कर दिया। अखंड ने बुझी बुझी आंखों से अनिर्वान की तरफ देखा और अपना नाम बोल दिया -“अखंड सिंह परिहार।”
“उस लड़की के साथ ऐसा क्यों किया तुमने अखंड सिंह परिहार..?”
“हमने ऐसा कुछ नहीं किया है, हम निर्दोष हैं सर..।हमारा यकीन मानिए, हम ऐसे नहीं है।”
अनिर्वान बड़े ध्यान से अखंड को देख रहा था। उसकी आंखें, उसके चेहरे के हाव-भाव हर एक बात को मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से नापता जोखता अनिर्वान अपने अगले सवाल पर आ गया..
“हमारे माथे पर क्या लिखा है कि हम उल्लू हैं, जो हमें तुम कुछ भी बोलकर चला लोगे..?”
अनिर्वान की बात सुनकर अखंड नीचे देखने लगा। उसे समझ में आ गया था कि यहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं है, उस पर जो इल्जाम लगा था वह बहुत भयानक था। और उस इल्जाम से बचने का अब उसके पास कोई उपाय नहीं था। उसके चेहरे की थकान, उसकी टूटन देखकर अनिर्वान ने वापस उसे छेड़ दिया।
“अखंड बाबू अगर सच बोलेंगे ना, तो एक बार फिर भी चांस है कि तुम्हे थोड़ा बहुत बचाया जा सके, लेकिन अगर इसी तरह झूठ बोलते रहे, तो तुम्हें कोई नही बचाने वाला।
चुपचाप मान लो कि उस लड़की के साथ जबरदस्ती किये हो। हम तो यही कहेंगे कि जाकर उस लड़की के पैर पकड़ लो, अगर वह माफ कर देती है तो हो सकता है तुम्हारी सजा थोड़ी कम हो जाए। वरना कोर्ट तक पहुंचाने के पहले ही तुम्हारी सजा का बंदोबस्त हम कर देंगे।”
अनिर्वान की बात सुनकर अखंड चीख पड़ा।
” हम सच कह रहे हैं, हमने रेशम को छुआ तक नहीं है। अरे हम तो उससे प्यार करते थे। लेकिन दूसरी तरफ दिमाग में यह भी चलता था कि वह डॉक्टर है, और हम उसके सामने कुछ भी नहीं। हम तो अपने आप को उसके बगल में खड़ा होने लायक तक नहीं समझते हुजूर। उसे हाथ लगाना, उसे तकलीफ पहुंचाना तो हमारे लिए बहुत दूर की बात है। हम कभी रेशम को तकलीफ नहीं दे सकते। हमने उससे प्यार जरूर किया है, लेकिन हम शुरू से ही यह मान बैठे थे कि वह कभी हमें पसंद नहीं कर सकती, कभी हमारी नहीं हो सकती..।”
” और इसीलिए उससे ज़बरदस्ती कर बैठे ?”
अनिर्वान के इस जलते हुए सवाल को सुन पीड़ा से अखंड की आंखों में आंसू छलक आये.. और जाने क्यों अनिर्वान को यह आंसू कहीं से भी बनावटी नहीं लगे… उसी वक्त अखंड को पुकारते हुए सलाखों के सामने दो लोग आकर खड़े हो गए..
अनिर्वान ने पलट कर देखा, उन दोनों लोगों को देखकर अखंड अपनी जगह से खड़ा हुआ और भाग कर सलाखों तक पहुंच गया!
उसने अपने सामने खड़े अपने भाई का हाथ पकड़ लिया, सलाखों के आर पार खड़े दोनों भाई एक दूसरे को देखकर रो पड़े।
हालांकि यज्ञ के बगल में खड़े उसके बाबूजी ने मजबूती से अपने आप को रोक रखा था। उनकी आंखों से आंसू का एक कतरा तक नहीं गिरा। उल्टा अपने गुस्से को जब्त करते हुए वह यज्ञ पर ही भड़कने लगे..
” एकदम ही पगला गए हो क्या, यहां कहां रो रहे हो? चुप हो जाओ दोनों, हम अभी पुलिस से बात करते हैं और अखंड की जमानत करवाते हैं..।”
अनिर्वान ने उन दोनों को देखा और सलाखों से बाहर निकल आया।
ठाकुर साहब अपने साथ कुछ कागजात और एक वकील को साथ लेकर आए थे। अनिर्वान ने बिना कागज देखे वकील की तरफ देखा और इशारे से पूछ लिया कि क्या बात है? वकील ठाकुर साहब की तरफ से अपनी बात रखने लगा।
” देखिए आप बिना किसी सबूत के इस तरह अखंड बाबू को जेल में नहीं डाल सकते। किस आधार पर इन्हें अपने थाने में रखा है, वह आधार प्रस्तुत कीजिए….।”
अनिर्वान ने एक गहरी सी नजर उस वकील पर डाली..
“आपके अखंड बाबू उस कमरे से बरामद हुए जहां एक मेडिकल की छात्रा को अकेले बंद करके रखा गया था। उस लड़की पर जबरदस्ती करने की कोशिश की गई। उस लड़की ने खुद गवाही दी है कि जो लड़का उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था, उसका नाम अखंड सिंह परिहार था। अब इन बातों के बाद क्या और कोई सबूत भी बचता है, जिससे मैं आपके चेहरे पर मारकर आपसे यह पूछ सकूं कि आप किस आधार पर अपने अखंड बाबू को यहां से छुड़ाने आए हैं..?”
“देखिए एसीपी आप ऐसा करके अपने साथ ही गलत कर रहे हैं..।”
“मुझे शौक है खतरों से खेलने का वकील साहब, और आपसे भी यही कहूंगा कि किसी की दौलत और रुतबा देखकर उसका साथ मत दीजिए। हां अगर वह वाकई सच्चा और ईमानदार है तो जरूर उसकी मदद कीजिए। आपसे एक बात और कहना चाहूंगा कि आपके अखंड बाबू अगर वाकई निर्दोष है तो मैं एड़ी चोटी का जोर लगाकर भी उन्हें छुङा लूंगा, लेकिन अगर मुझे यह पता चल गया ना कि यह सब इन्हीं की करनी है, तो फिर माफी चाहता हूं इनका क्या हाल होगा, यह मैं खुद नहीं जानता…।”
अनिर्वान की इस धमकी को सुनकर अखंड के पिता गुस्से में कलबला उठे। उन्होंने जोर से सामने रखी टेबल पर हाथ मारा और खड़े हो गए। लेकिन उनके गुस्से को संभालने के लिए उनका छोटा बेटा यज्ञ उनके साथ मौजूद था।
” बाबूजी ऐसा मत कीजिए, यह इनका ऑफिस है। और वह सही कह रहे हैं। हमें भैया को निर्दोष साबित करने की कोशिश करनी है, इस तरह का आचरण करके हम अखंड भैया के लिए ही गड्ढा खोद रहे हैं।”
यज्ञ ने गहरी सी सांस भरी और अनिर्वान की तरफ मुड़ गया।
” सर हम इनके छोटे भाई हैं, यज्ञ सिंह परिहार! हम आपसे बस यह जानना चाहते हैं कि इस केस में हम कैसे अपने बड़े भाई की मदद कर सकते हैं? मतलब अगर उस अकेले अंधेरे कमरे में भैया ही उस लड़की के साथ मौजूद थे, और वह लड़की बार-बार इनका नाम बता रही है तो ऐसे में हमारे लिए यह साबित करना बहुत मुश्किल हो जाएगा कि अखंड भाई ने यह काम नहीं किया..।”
यज्ञ की बात सुनकर अनिर्वान का गुस्सा जरा ठंडा पड़ गया और उसने धीरे से हां में गर्दन हिला दी।
” वैसे यज्ञ बाबू आप कैसे इतने विश्वास के साथ कह सकते हैं कि यह हरकत आपके भाई ने नहीं की..।”
“एसीपी साहब हमें अपने भाई पर खुद से भी ज्यादा भरोसा है। हम सच कह रहे हैं अगर ब्रह्मा भी आकर हमसे कह दे ना कि भैया ने किसी लड़की की बेइज्जती की है तो हम कभी नहीं मानेंगे। हम मानते हैं कि भैया की रुचि राजनीति में है, और राजनीति में अपना करियर स्थापित करने के लिए वह विद्यार्थियों को भड़काना, अपनी तरफ मिलाने के लिए उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देना और इस तरह के राजनीतिक छुटपुट हथकंडे अपनाते हैं, लेकिन लड़कियों के लिए उनके मन में बहुत इज्जत है। हमारे घर में खुद हमारी दो बहने हैं..।
हमने बचपन से अपनी बहनों का बहुत सम्मान किया है। और इस बात को समझते भी हैं कि जैसे हमारी बहन है, वैसे सामने वाली लड़की भी किसी ने किसी की बहन होगी।
हमारे भैया वाकई किसी लड़की के साथ ऐसा नहीं कर सकते सर। किसी तरीके से बस हमारी इतनी मदद कर दीजिए कि हम भैया की पक्ष में सबूत और गवाह इकट्ठे कर सके..।”
अनिर्वान एक बार फिर सोच में गुम हो गया था। अपनी कुर्सी पर बैठे रिवाल्विंग चेयर को इधर से उधर घूमाते हुए उसका दिमाग लगातार काम कर रहा था और उसके सामने बैठा यज्ञ निर्निमेश पलकों से अनिर्वान को देखते हुए मन ही मन प्रार्थना कर रहा था कि काश सामने बैठा यह बंदा किसी तरीके से उसके भाई को बचा ले…
अनिर्वान को इस तरह विचारों में गुम देखा ठाकुर साहब भी जरा ठंडे पड़ गए थे। अब तक तो उन्हें लग रहा था कि वह अपना रुतबा और धन दौलत दिखाकर, रिश्वत देकर अपने बेटे को छुड़ा ले जाएंगे। लेकिन यहां का माहौल ऐसा नहीं था। वह भले ही शहर के सबसे बड़े वकील को अपने साथ लाए थे, लेकिन उस वकील के तर्कों कुतर्कों को अनिर्वान ने हवा में उड़ा दिया था…
अनिर्वान कुछ सोचने में मग्न था। अचानक वह अपनी जगह से खड़ा हुआ, और अखंड के पास पहुंच गया।
” अखंड सिंह परिहार जरा इधर सुनना।”
अखंड तुरंत उस के पास चला आया।
” जी कहिए।”
” तुम ठीक से याद करके बताओ कि तुमने रेशम को छुआ था?”
अखंड ने ना में गर्दन हिला दी।
” ठीक से सोच समझ कर बताओ अखंड? क्योंकि अगर तुमने वाकई उसे नहीं छुआ है तो मैं उस लड़की का शारीरिक परीक्षण करवा के उसके हाथों, चेहरे गले और गर्दन पर से ट्रेस निकलवाने की कोशिश करूंगा। आजकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। अगर तुमने उसे नहीं छुआ है तो तुम्हारे निशान उसके शरीर पर कहीं भी नहीं मिलेंगे और अगर कहीं भी छुआ है तो याद करके बता दो। क्योंकि अगर मैंने एक बार परीक्षण करवा लिया और तुम्हारे हाथों के निशान उसके शरीर पर मिल गये तो यह तुम्हारे खिलाफ एक सबूत तैयार हो जाएगा..।”
“हमें याद है सर हमने उसे नहीं छुआ। बस उसका दुपट्टा उठा कर उसके ऊपर डाला था और सिर्फ उसके गालों पर से उसके आंसुओं को पोछा था वह भी रुमाल से..।”
“ठीक हैं.. ।”
अब भगवान से यह प्रार्थना करो कि उसके शरीर पर पाए जाने वाले निशान में तुम्हारे हाथों के निशान ना हो। बस एक मात्र यही कड़ी है जो सबूत के तौर पर तुम्हारे पक्ष में काम करेगी, वरना और किसी तरीके से तुम्हें नहीं बचाया जा सकता, और एक बात और याद रखना अखंड सिंह परिहार..।”
अनिर्वान बोलते बोलते रुक गया..
“हम समझ गए, आप क्या कहना चाहते हैं। यही ना कि अगर हमारे हाथ के निशान उसके शरीर पर पाए गए तो आप हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे, हम खुद मरने को तैयार हैं सर, अगर निशान मिल गए..!”
अनिर्वान को अखंड की आंखों में जाने क्यों बेगुनाही नजर आ रही थी.. वह वापस लौट कर वहां से बाहर निकल गया..!
अनिर्वान वहां से निकाल कर सीधे अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर से मिलकर उसने रेशम की परीक्षण वाली फाइल को वापस मंगवा लिया। रेशम की शारीरिक परीक्षा में जितनी भी बातें शामिल थी उन सबको ध्यान से देखने लगा..
रेशम के शरीर पर पाए जाने वाले ह्यूमन ट्रेस में अखंड की उंगलियों के निशान नहीं पाए गए.. ।
और अनिर्वान का यक़ीन पक्का हो गया..।
क्रमशः

Bharosa tha ki jahan Anirwan hai waha anyay to nahi hoga…lekin tab to Akhand jail se begunah sabit hoke nikal gya…par resham to aaj b usi ko gunahgar Manti…..ab dekhna hai Resham ko Kab clear hota sari sacchai…..beautiful part👌👌
Khani pd kr jase Jaan aa jati h dee.
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Nice part
आप लिखिये और हम आपको पढ़ते रहें कहाँ कब कैसे इस बात का कोई मतलब नहीं है 👍💐
आपका स्वागत है मैम
Shandar part
Mujhe bhi Rona aa gaya Akhand ki hàlat par. Resham ne Akhand ke alawa kisi aur ko na dekha tha toh wo bhi kaise kah deti ki Akhand nahi tha. Sari paristhitiyan Akhand ke khilaf thi .
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐♥️♥️♥️💐💐♥️♥️💐👌🏻👌🏻
Bahut hi badiya part 👌👌👌👌
बेहद शानदार भाग 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻 अखंड के बेगुनाही के सबूत कैसे मिले और वो कैसे बाहर निकला। सब कुछ लाजवाब था हमारे इंस्पेक्टर जैसे बहादुर और ईमानदार ऑफिसर मिल जाएं तो समाज का भला होगा।
Behtareen part ❣️💕❣️💕
Bahut bahut badhiya part..
Wah superb part lage raho anir babu
Very nice part of the story and very interesting 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊