अपराजिता -106

अपराजिता -106

“कितना अजीब होता है औरत का जीवन, उसका होकर भी उसका नहीं होता…
जब तक बच्ची होती है, मायके की देहरी में चहकती है, दुनिया भर की ज़िम्मेदारियों से जुदा होती है, तभी तक शायद अपना जीवन जी पाती हैं, लेकिन उस छोटे से समय में उसे खुद को भी भान कहाँ होता है कि ये तो अभी जीवन की शुरुवात भर है..

असली रास्ता तो लम्बा बहुत लम्बा और काँटों भरा है..
अगर उस रास्ते पर साथ चलने वाला जीवनसाथी समझदार है, तब तो रास्ते में आने वाले कांटे भी साथ मिल कर दोनों चुन लेते हैं.. मार्ग में पड़ने वाली धूप भी एक दूसरे की बाँहों में छाँव बन कर ओढ़ लेते हैं, लेकिन अगर जीवनसाथी ही साथ देने वाला नहीं हुआ तो पूरा जीवन व्यर्थ हो जाता है…
फिर तो अगर रास्ते में छाँव भी हो तब भी उस रास्ते को पूरा करने में दिल दुखता है..
रास्ते में फूल भी बिछे हो तो वो भी शूल बन कर दिल में चुभने लगते हैं…
तुझे नहीं समझा सकती मैं की मेरी तकलीफ क्या है ?”

“ऐसा क्यों बोल रही है पूर्वा ? हुआ क्या है ?”

“धोखा हुआ है रेशु.. मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है !”

“मतलब ?”

“मैं जिस प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करती हूँ, वहां के सीईओ ने अपने बेटे के लिए वहीँ देख कर मुझे पसंद किया और मेरे घर वालो ने इतना अच्छा और बड़े घर का रिश्ता बिना जांचे परखें स्वीकार कर लिया..
बिना लड़के के बारे में कोई छानबीन किए, मेरे घर वालों ने मेरी शादी करवा दी उस वक्त तो मैं भी खुश थी, मुझे भी लगा कि अब मेरी भी शादी हो जानी चाहिए..।
एक-एक कर मेरी सारी सहेलियों के घर बस चुके हैं, इसलिए मैं भी अपने उत्साह में यह सोच ही नहीं पाई कि अस्पताल के सीईओ का अचानक मुझ में ऐसा क्या इंटरेस्ट हो सकता है। हालांकि एक बात खटकी थी वह यह की लड़का नॉन मेडिको है, डॉक्टर नहीं है।
    पर मुझे लगा इतने रईस लोग हैं तो प्रोफेशन कोई खास मायने नहीं रखता। दूसरी बात मेरे आस-पास लोगों ने मेरी भाभी ने, मम्मी ने सबने यही समझाया कि ससुर जी का अस्पताल आगे चलकर मेरा ही तो होगा। मुझे भी लगा यह बात तो सच है, और मैंने भी ज्यादा सोचे बिना हां कर दी।
      दो महीने के अंदर अंदर सगाई और शादी हो गई, और मैं ससुराल पहुंच गई। यहां आने के बाद पता चला कि मेरे पति तो मुझसे शादी ही नहीं करना चाहते थे।
  उन पर जबरदस्ती दबाव देकर मुझसे शादी करवाई गयी..।

” क्यों क्या वह किसी और को पसंद करता था? या किसी और से शादी करना चाहता था ?
  देख पूर्वा, मैं इस बारे में ज्यादा तो नहीं कह सकती लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम किसी रिश्ते में बंधे हैं, तो हमें उसे रिश्ते को पूरा वक्त देना चाहिए। हो सकता है उस रिश्ते की खूबसूरती ही इस बात में हो।…

” रेशु अगर वह किसी और को पसंद करता होता, तो भी शायद मैं इतनी नाराज नहीं होती, क्योंकि वैसे में मैं उसे पल भर में छोड़ कर चली जाती।
      लेकिन मैं तो ऐसी मुसीबत में फंसी हूं यार कि मैं इसे छोड़ भी नहीं सकती। मतलब मेरे लिए शादी का यह रिश्ता ऐसा हो गया है जिसे ना मैं उगल पा रही हूं ना निगल पा रही हूं..।”

“क्यों ऐसा क्या हुआ?”

“मेरे हस्बैंड मेंटली फिट नहीं है!!


     उनके साथ बहुत सारे इश्यूज हैं। बचपन में कभी वह छत से बहुत ऊंचाई से गिर गये थे, जिसमें उसके दिमाग के अंदरूनी हिस्सों में कुछ ऐसे परमानेंट क्षतिग्रस्त ऊतक बन गए कि उसके उन हिस्सों का पूरी तरह से डेवलपमेंट हो नहीं हो पाया। मैं यह नहीं कह रही कि वह पागल है, लेकिन उन्हे मेंटल इश्यूज हैं। और जिसकी वजह से अब उन्हें छोड़ना भी मुश्किल हो रहा है..।”

“लेकिन यह तो तेरे तलाक के लिए एक अच्छा खासा ग्राउंड बन सकता है।
    पूर्वा तू एक पागल इंसान को झेलने के लिए बाध्य नहीं है। तूने कोई लव मैरिज थोड़ी ना की है, कि अपने पति की देखभाल करना तेरी जिम्मेदारी बन जाए !  शादी से पहले तुझे इस बारे में बताया भी नहीं गया था तो यह एक जायज़ और वाजिब कारण हो सकता है, जिसके आधार पर तू अपने पति से अलग हो सकती है..।”

“तू समझ नहीं रही है रेशु, वह वैसे पागल नहीं है।
   वैसा कोई नुकसान नहीं पहुंचाते वह। तुझे कैसे समझाऊं?
देख हम डॉक्टर्स हैं। हम समझते हैं कि लोगों को अलग-अलग तरीके से मेंटल इश्यूज हो सकते हैं। बहुत से लोग होते हैं जो सामने बहुत सामान्य नजर आते हैं, लेकिन उनके साथ भी कुछ मेंटल इश्यूज होते हैं  जैसे डिप्रेशन होना, हलूसीनेशंस होना, अल्जाईमर, पार्किंसन, एंगर इश्यूज होना।
तो बस इसी तरह की तकलीफ है उन्हें भी।  वह अपनी कमजोरी पर काबू नहीं कर पाते हैं। जैसे अगर उन्हें भूख लग रही है, और उस वक्त उन्हें तुरंत खाने को कुछ नहीं दिया जाए, तो वह हाईपर होने लगते हैं। कभी-कभी इतने हाइपर हो जाते हैं कि टेबल पर से उठाकर प्लेट्स कटलरी फेंकने लगते हैं। इसके अलावा अगर उनका जो टाइम है उस टाइम पर उन्हें बाथरुम खाली नहीं मिले या बाथरूम साफ नहीं मिले, तब भी वह इसी तरह का बिहेवियर करने लगते हैं।
उनके इस नेचर को देखकर पहली बार में मैं बहुत घबरा गई थी।
     इनके नाश्ते का वक्त हो गया था और इन्हे तेज़ भूख लगने लगी थी, इन्होंने नौकर को इशारा किया और नाश्ता माँगा…
   नौकर तेजी से भागता हुआ रसोई में आया, लेकिन जब तक मैंने पराठा प्लेट में निकाला और इन्हें परोसने गई, तब तक में दस मिनट बीत चुके थे…
         इन्होंने मेरे हाथ से पराठा लिया और मेरे ऊपर ही फेंक दिया…
मैं तो स्तब्ध खड़ी रह गई!!
मेरे लिए इनका ये व्यवहार बहुत शॉकिंग था! मेरी सास  तुरंत मेरे पास चली आई, वह मुझे पकड़ कर अपने साथ ले गई, और मेरे ससुर मेरे पति को पकड़ कर दूसरे कमरे में ले गए!
   मुझे अचानक कुछ समझ ही नहीं आया कि हो क्या रहा है? कुछ देर बाद पापा जी कमरे में आए और मुझे बैठा कर समझाने लगे…
उन्होंने मुझसे कहा कि अस्पताल में मेरा बिहेवियर देखकर वह मुझसे प्रभावित हुए थे।
उन्हें शुरू से पता था कि उनके बेटे को मेंटल इश्यूज हैं। और उनके बेटे के साथ कोई सामान्य लड़की कभी भी निभा नहीं पाएगी।
        उन्हें बहुत धैर्यवान शांत और सुलझी सी लड़की की जरूरत थी। उस पर सोने पर सुहागा वाली बात यह हो गई कि मैं डॉक्टर भी थी। मैं उनकी बात को और भी बेहतरीन तरीके से समझ सकती थी और इसीलिए अपनी पुत्रवधू के रूप उन्होंने मेरा चुनाव किया।
      और कहां मैं यह सपना देख रही थी कि शायद मेरे सीईओ ससुर मुझे अपने हॉस्पिटल का प्रबंधन देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने मुझे चुना है।
     जबकि वहां मेरे सामने बैठ मेरे ससुर जी मुझे यह कह रहे थे कि, अब तुम्हें अस्पताल आने की जरूरत नहीं। तुम्हें काम करने की जरूरत नहीं। तुम घर पर रहो और पूरा वक्त अपने पति को दो।
हम चाहते हैं कि तुम्हारे साथ बिताए क्वालिटी टाइम के कारण वह सामान्य होने लगे। मैं उनकी बात समझ तो रही थी, लेकिन सच कहूं तो पलक के उस बिहेवियर के बाद मैं बहुत घबरा गई थी। इतने ज्यादा एंगर इश्यूज वाले आदमी के साथ एक कमरा शेयर करना मेरे लिए बहुत खतरनाक था ।
   मेरे ससुर और सास ने मुझे बहुत समझाया बुझाया और आखिर मैं धीरे से मान ही गई…।

“पूर्वा, लेकिन यह तो बहुत बड़े रिस्क की बात है यार, इस तरह से मानसिक परेशानियों में घिरा आदमी तुझे नुकसान भी तो पहुंचा सकता है..।”

“नहीं रेशु, दो-तीन दिन के बाद जब मुझे उनका रूटीन समझ में आ गया, और मैं हर एक चीज को वैसे ही फॉलो करने लगी, तब मुझे समझ में आया कि यह आदमी प्यार करना भी जानता है। और अपने से जुड़े  लोगों से यह इंसान बहुत प्यार करता है..।”

“प्यार करता है? तो क्या तू एक पागल आदमी के साथ जिंदगी भर रह लेगी.. ?”

” तू पलक को पागल कह रही है रेशु?
   तू यह मत भूल कि तेरे साथ भी तो कुछ इश्यूज है ना? आखिर तू भी तो अथर्व के साथ अपने स्पेशल पलों में अनकंफरटेबल हो ही जाती है। अब इस सब में अथर्व का तो कोई दोष नहीं है। बावजूद तुझसे प्यार के कारण वह अब भी तुझे समय दे रहा है। तुझे मौका दे रहा है। सिर्फ इसलिए ना कि तू अपने पास्ट को छोड़कर आगे बढ़ जाए..।
बस वैसे ही मैं भी तो कोशिश कर रही हूं कि पलक धीरे-धीरे ही सही जितना हो सकता है, सामान्य हो जाए।

देख हम डॉक्टर हैं, हम यह बात जानते हैं कि एक उम्र के बाद वैसे भी दिमाग की कुछ कोशिकाएं धीरे-धीरे काम करना कम करने लगती हैं। और उस समय इंसान चीजों को भूलने लगता है। गुस्से से गुस्से वाले इंसान का भी गुस्सा एक उम्र के बाद चला ही जाता है।
    मैं जानती हूं आज नहीं तो कल पलक भी धीरे-धीरे ही सही थोड़ा तो इंप्रूव करेंगे। मुझे ज्यादा कुछ नहीं करना, बस उनके रूटीन का ही तो ध्यान रखना है। इतना तो मैं कर ही सकती हूं। सच कहूं तो जब मेरी हिम्मत टूटने लगी थी, तब एक बार को अथर्व का चेहरा भी दिमाग में घूम गया था, और उस वक्त लगा कि जब वह लड़का होकर इतने धैर्य के साथ मेरी सहेली को संभाले हुए हैं तो मैं भी तो कुछ कर सकती हूं ना।
हालांकि कभी-कभी एकदम टूटने लगती हूं, ऐसा लगता है कि जिंदगी के सफर में अकेले चली जा रही हूं। जिंदगी के इस रास्ते में कांटे भी हैं, और धूप भी है। लेकिन मेरे पास तेरे जैसा हमसफ़र नहीं है, जो मेरा हाथ थाम कर मुझे अपनी मोहब्बत की छांव में ले ले।
    मेरे पैरों मैं बिछे कांटों को फूलों में तब्दील कर दे। लेकिन फिर ऐसा लगता है कि मुझे वह हमसफ़र मिला है जिसकी बांहे थाम कर मुझे उसके सर की धूप को छांव में बदलना है। मुझे उसके पैरों के कांटे बिनने हैं। और अपनी बाहों में थामे हुए उसके साथ जिंदगी के सफर को आसान करने की कोशिश करनी है।
     रेशु एक बात कहना चाहूंगी, तेरी जिंदगी आसान हो सकती है, अगर तू चाहे तो।
    देख सब कुछ हमारे अपने दिमाग का खेल होता है। एक इंसान जो बहुत सी बातें अपनी मानसिक व्याधियों के कारण नहीं भी समझ पाता ना, वह भी अपनी उस जरूरत को बहुत अच्छे से समझ लेता है। मेरे और पलक के बीच पति-पत्नी का संबंध बहुत सामान्य है। और बहुत सामान्य तरीके से आगे बढ़ गया, बस वहीं जहां तू अटक गई।
    इसलिए तुझे कहती हूं कि किसी तरीके से अपने दिमाग के उस काले हिस्से को बिल्कुल खत्म कर दे, और अथर्व के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ जा।
यह खूबसूरत दिन वापस नहीं लौटने वाले हैं…।

कहां उस सादे से गांव में अकेली पड़ी है। इससे अच्छा अथर्व के पास वापस लौट जा यार। उसके साथ उसके हॉस्पिटल को ज्वाइन कर ले।
     8-10 साल प्राइवेट हॉस्पिटल में काम कर तुम लोग इतने पैसे तो आराम से जोड़ लोगे कि एक फाइव स्टार हॉस्पिटल खुद खोल लोगे।
सरकारी नौकरी में रखा क्या है? गांव में ना ढंग की प्रैक्टिस हो पाती है, और ना ही सही एक्सपोजर मिलता है..।”

“लेकिन एक मेंटल पीस तो है पूर्वा कि, उन गरीबों की मदद कर पा रही हूं जो वक्त रहते शहर के अस्पताल नहीं पहुंच पाते..।”

“यह सब कहने की बात है रेशु, देख तेरे पास भी वही मरीज आते हैं जिनके पास प्राइवेट में दिखाने के लिए पैसे नहीं है। क्योंकि उन्हें पता है, मुफ्त की डॉक्टरनी है, जो मुफ्त की दवाई खिलाएगी।
गांव के भी बड़े और राईस लोग एक छींक भी आ जाए ना, तो प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ ही दौड़ते हैं।
उन लोगों के दिमाग में भी यह फितूर सवार है कि फ्री की दवाइयां से वह ठीक नहीं होने वाले, समझी..!!

“अब जो भी हो, मुझे तो यहाँ काम कर के अच्छा ही लगा रहा.. “

“अथर्व के बिना भी.. ?”

“नहीं.. बस यही एक चीज़ बुरी लगती है..।”

“नहीं रेशु.. तू जानबूझकर भाग रही है अथर्व से। तुझे समझ में आ गया है कि उनके साथ रहते हुए ज्यादा दिन तक तू उनसे अपना अतीत नहीं छुपा पाएगी, और बस इसीलिए तू अपने पति से भागने लगी है। तू मौका ढूंढती हैं अथर्व से अलग रहने का। इसलिए तूने इस नौकरी को ज्वाइन किया है। वरना तो बड़े आराम से अथर्व के अस्पताल में भी जूनियर रेजिडेंट के पद पर काम कर सकती थी। लेकिन तूने उसकी जगह गांव की इस सङी सी नौकरी को चुना..।”

“ऐसा नहीं है पूर्वा।”

“बिलकुल ऐसा ही है रेशु.. मुझे मत बना..।
अभी भी कह रही हूँ… अथर्व के पास लौट जा..।”

उसी समय डिस्पेंसरी के बाहर से कुछ आवाज़ आने लगी, और रेशम ने कोई आया है कहकर पूर्वा का फोन काट दिया।
    रेशम ने जैसे ही आंखें उठा कर दरवाजे की तरफ देखा, वहां से अथर्व आता हुआ दिखाई दिया, रेशम खुशी से अपनी सीट से उछल कर खड़ी हो गई।

“अरे आप यहां..?”

“हम्म.. याद आ रही थी, तो चला आया..।”

अथर्व मुस्कुराकर रेशम की तरफ बढ़ गया।

” अभी तो तुम्हें बैठकर पेशेंट देखने होंगे?”

” नहीं आज तो मैं फ्री हो गई हूं। सुबह ही काफी सारे पेशेंट निपट लिए थे। अब तो बस घर लौटने वाली थी।”

” तो चले?”

अथर्व के ऐसा कहते ही रेशम अथर्व का हाथ पकड़ कर डिस्पेंसरी से बाहर निकल गई…।

*****

कुसुम की हालत ख़राब थी…. उसके दुखो का आरपार नहीं था…
उसे सब कुछ डूबता हुआ सा लग रहा था..।
वो बस अभी यही चाहती थी कि किसी तरह यज्ञ को बचा लिया जाये..।
उसकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे, और हाथ प्रार्थना में जुड़े हुए थे..।
वो जो कभी ना मंदिर जाती थी, ना पूजा पाठ करती थी। आज अपने जीवन के कठिनतम क्षणों में बस भगवान का ही स्मरण कर रही थी..।

उसी समय पुलिस वहाँ चली आयी..

अखंड भी गुमसुम सा एक तरफ खड़ा था…
अनिर्वान उसके पास चला आया..

“मैं माफ़ी चाहता हूँ कि इस कठिन समय में भी मुझे ये पूछताछ करनी पड़ रही है, लेकिन ये मेरे काम का हिस्सा है.. !”

अनिर्वान के ऐसा कहते ही अखंड उसकी तरफ देखने लगा..

अखंड की आंखे उसका चेहरा देखते ही अनिर्वान को कुछ जाना पहचाना सा लगने लगा..

“तुम्हे कहीं देखा है… ऐसा लग रहा, हम कहीं मिल चुके हैं !”

अखंड ने अनिर्वान की तरफ देखा और अपने हाथ जोड़ दिए..
अखंड कैसे इस दबंग पुलिस वाले को भूल सकता था? जिसने उसे बेगुनाह साबित करने के लिए जी जान लगा दिया था..।
अनिर्वान दिन भर में जाने कितने बेकसूरों की मदद कर दिया करता था, लेकिन अखंड के लिए तो वो एक अकेला देवता पुरुष था, जिसने उस समय उसकी मदद की थी, जब सारी दुनिया के दरवाज़े उसके लिए बंद होने लगे थे..।

हालाँकि इस सब के बाद प्रशासन के सुशासन के कारण अनिर्वान को उठाकर किसी बीहड़ में फेंक दिया गया था..।

और उसके बाद अब वापस उसे इस गांव में पटक दिया गया था..।
अखंड ने एकदम से झुक कर अनिर्वान के पैर छू लिए..

“सर… नमस्ते !! हम अखंड है.. अखंड सिंह परिहार !”

अनिर्वान ने एक गहरी सी साँस भरी और अखंड के कंधे थपथपा दिए…

“कैसे हो अखंड ?”
.
“जी ठीक है.. !”

“तुम यहां कैसे ? जिसे गोली लगी है उसे जानते हो क्या ?”

“हमारा सगा छोटा भाई है !”

“व्हाट ?”

“जी !”

“इसे गोली कब और कहाँ लगी ? ये गोली कौन मार सकता है ? कुछ जानते हो इस बारे में ?”

“गांव में तो हमारा कोई ऐसा दुश्मन नहीं है.. बल्कि कहना चाहिए मानौर के साथ साथ आस पास के आठ दस से भी ज्यादा गाँव हमे मानते हैं !”

“देखो अखंड, सारे लोग भले ही मानते हो, लेकिन उनमे एक आध ऐसा भी कोई आ जाता है जो अपने किसी व्यक्तिगत कारण से तुमसे चिढ़ता या जलता हो ! हो सकता है उसी ने तुम्हारे भाई पर निशाना लगाया हो !”

“लेकिन अगर कोई हमारा दुश्मन होगा तो वो हमारे भाई पर निशाना क्यों लगाएगा…? मतलब हमारे भाई को गोली मार कर उसे क्या मिलेगा.. !”
.
“बदला.. रिवेंज !”  अनिर्वान के पीछे खड़ी नेहा बोल पड़ी..

नेहा की आवाज़ सुन अनिर्वान पीछे पलट कर देखने लगा..

“अरे तुम यहां कब आयी ? मतलब क्यों आयी ?”

“सर मेरा बैग आपके ऑफिस में छूट गया था, जिसे लेने मैं पहुंची और उसी वक्त आप यहां के लिए निकल रहे थे, बस मैं भी पर्स उठा कर सीधा भागती चली आयी.. मुझे लगा कोई केस होगा.. !”

“हम्म..

“वैसे सर.. आपको वो आदमी याद है, जिसे दूर्वागंज में आपने पकड़ा था, किसी डॉक्टर के घर से..

“हाँ.. लेकिन क्यों ?”

“सर आपने उस समय उसे भी तो पहचान लिया था…  इस वक्त आप इन्हे भी पहचान गए.. मैं तो बस आपके दिमाग की बलैय्या लेना चाहती हूँ.. क्या याददाश्त है आपकी.. वाह !”..

नेहा के याद दिलाते ही अनिर्वान को दीपक का चेहरा एकदम से याद आ गया…

दीपक के साथ ही उसका मेडिकल की पढाई करने वाला भाई पंकज जो अस्पताल में मृत पाया गया था और जिसका इल्जाम भी अखंड पर लगाया गया था, के साथ ही विद्यार्थी यूनियन का पूर्व छात्र संघ उप अध्यक्ष धीरज भी याद आ गया, जो आज एक महत्वपूर्ण राजनैतिक पार्टी का चमचमाता चेहरा बना बैठा था…

पंकज की मौत का ज़िम्मेदार उसका भाई दीपक, अखंड को मानता था। तो कहीं यज्ञ पर गोली चलाने वाला दीपक ही तो नहीं..?

ये विचार दिमाग में आते ही अनिर्वान ने अपने साथ आये कॉन्स्टेबल को लिखित औपचारिकताएं फटाफट पूरी करने को कहा और वहाँ से निकल गया..।

“बाबूराव… ये दीपक की पूरी कुंडली निकलवाओ.. ये अभी अभी पकड़ में आया था, इसलिए ये खुद सामने से जाकर तो गोली नहीं चलाएगा…।
इसकी कॉल लॉग निकलवाओ.. पता तो चले इस दीपक से किस किस का घर प्रकाशित हो रहा है..।
जिस वक्त यज्ञ पर गोली चली, उसके दो दिन पहले से लेकर अभी तक का दीपक का पता ठिकाना निकालो..।
ये आदमी उस वक्त कहा था, क्या कर रहा था, किस किस से मिला, एक एक डिटेल्स चाहिए मुझे.. !”

अनिर्वान तेज़ी से चलते हुए अपनी बात कह कर अपनी गाडी में आ बैठा.. उसने अपने गॉगल्स निकाले और आँखों पर चढ़ा लिए….

उसके गाड़ी में बैठते ही दरवाज़े के पास आकर नेहा खड़ी हो गयी..

“रुकिए मिस्टर एसीपी.. मैं एक बात कहना चाहती हूँ.. !”

“कहो !”

“वो आपके ऑफिस में एक क्लर्क है ना… वो क्या नाम है उसका..

अनिर्वान भौंवे तरेर कर नेहा को देखने लगा..
और बाबूराव नेहा का पूछा हुआ नाम सोचने लगा..

“हरी राम.. !”

“ऊँहुँ… अरे वो क्या नाम है उसका.. वो गाना है ना..
दिल का भवँर करे पुकार, प्यार का राग सुनो प्यार का राग सुनो रे… हो हो हो….

इस गाने को सुन कर अनिर्वान और बाबूराव दोनों एक दूसरे को देखने लगे.. क्यूंकि इस गाने में आया कोई नाम उनके दफ्तर में कार्यरत नहीं था..

“पराग… पराग है ना !”

“पराग का इस गाने से क्या तालुक्क ?” अनिर्वान ने भौंह चढ़ा कर पूछा..

“प्यार का राग एक साथ बोलिये पराग सुनाई देगा.. बस मुझे याद आ गया नाम..
हाँ तो मैं कह रही थी उस बन्दे के पास एक डिब्बा छोड़ कर आयी हूँ… स्पेशली आपके लिए.. ले लीजियेगा.. याद से..
बाबूराव जी.. याद दिला दीजियेगा ना..।

“जी मैडम.. !” मुस्कुरा कर बाबूराव ने हामी भरी और उसे घूर कर अनिर्वान ने गाड़ी आगे बढ़ा दी…

***

बहुत वक्त बीत चुका था… लेकिन ऑपरेशन थियेटर का  द्वार खुल ही नहीं रहा था..
आखिर कुसुम की प्रतीक्षा को विराम मिला और ऑपरेशन थियेटर का दरवाज़ा खोल कर डॉक्टर बाहर चला आया..

“गोली निकाल ली गयी है… लेकिन खून थोड़ा ज्यादा ही बह गया, इसलिए अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि कब तक होश आएगा, लेकिन अब वो खतरे से बाहर है.. !”

इतना सुनते ही कुसुम जो अब तक सांस रोके बस यज्ञ की खैर कुशल सुनने की प्रतीक्षा में खड़ी थी, ढह गयी…

क्रमशः..

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Nisha
Nisha
1 year ago

Bus yajyn thik ho Jaye toh sukoon mile.jarur in sabke pichhe dipak hi hai.neha jhooth nahi bol rahi

Priya Gupta
Priya Gupta
2 years ago

Nice part…ab ye case anirvaan ke pass hai toh jaldi hi sab saaf ho jayega…isi bahane kusum ke Maan mein yagya ke liye Jo pyar tha o samne aa gaya…

Manish Gupta
Manish Gupta
2 years ago

Keep going ✍️✍️👌👌🥰🥰😍😍

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago
Reply to  Manish Gupta

Very nice n interesting and Bahtareen n Lajabab and Shandaar n Jaberdast part

Ruchi Maheshwari
2 years ago

बहुत इंतजार कराया डाक्टर साहब

सलोनी
सलोनी
2 years ago

क्या लिखती है आप पढ कर यहाँ वहां भटकता मन जैसे सीधे रास्ते पर आ जाता है। रेशम की सखी की बात कितने सही लगी। उन्होंने छोड़ना नही निभाना चुना।कहानी आगे बढ़ रही है।ओर अच्छी जा रही है।

dhruvees.ethnic
dhruvees.ethnic
2 years ago

thank you soo much Aparna…

Apne apne followers k bare mai sochha bahot shukriya

Rita c
Rita c
2 years ago

aaj apki story padh kr man ko Shanti milli thanks mam

poorna sharma
poorna sharma
2 years ago

सबसे पहले तो आपको बहुत बधाई और मेरी शुभकामनाएं
इतने समय बाद आपकी कहानी पढ़ कर दिल को जो सुकून मिला, use aap samajh bhi nahi sakti..

Shweta
Shweta
2 years ago
Reply to  poorna sharma

thank you soo much for this part 💗

Hani
Hani
2 years ago

बहुत बहुत धन्यवाद ma’am…इस कहानी के आगे का भाग देने के लिए 🙏
भगवान से प्रार्थना है की आपकी जो भी समस्या है प्रतिलिपि के साथ वो जल्द ही सुलझ जाए…..और आपकी सारी कहानियां हम सभी को मिलती रहे…🥰
सभी भागों की तरह आज का bhi भाग शानदार raha😊

Jyoti Gupta
2 years ago

Story bhut achchhi

Rashmi
Rashmi
2 years ago
Reply to  Jyoti Gupta

mam yahan to notification aate nahi ya subscribe kerne ka option hai… Mam aise gayab na hua kijiye.. pls 🙏

anupammishrabsp
anupammishrabsp
2 years ago
Reply to  Rashmi

Subscribe karne ka option hai ..free hai..jiske baad notification milega

Anjana2006
2 years ago

सबसे पहले आपको धन्यवाद कहानी को देने के लिए 🙏🏻🙏🏻

बहुत ही बेहतरीन पार्ट 👌🏻👌🏻

आज के भाग में दो अलग-अलग पत्नियों की मनोदशा को बहुत ही बेहतरीन तरीके से आपने दर्शाया है! पति-पत्नी का रिश्ता एक दूसरे से साँझा होता है, दोनों हर कदम पर एक-दूसरे का साथ निभाते हैं चाहे उनके जीवन में कितनी भी मुश्किलें आए!

आज हमें दो जोड़ियों की खबर मिली है! जिसमें पूर्वी ने रेशम को समझाने की कोशिश की है , देखते हैं रेशम कैसे अपने और अथर्व के रिश्ते को संभालती है! दूसरी ओर यज्ञ की खतरे से बाहर होने की बात सुनकर कुसुम को कुछ आराम का एहसास हुआ है! कुसुम किस तरह से अपने ठाकुर साहब की देखभाल करती है देखने लायक होगा!

नेहा ने अर्निवान को बातों-बातों में अखंड और उसके दुश्मनों के बारे में हिंट भी दे दिया ! देखने लायक होगा टिफिन में नेहा ने क्या -क्या बनाकर भेजा है और उसे खाने के बाद अर्निवान का रिएक्शन क्या होता है!

अगले भाग की प्रतीक्षा में एक लालची पाठिका 🙂🙂