अपराजिता -98

अपराजिता -98

“दुनिया नहीं जानती ना कि मैं डर रही हूं। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, यह दाऊ साहब के आदमी आकर मुझे मार डालेंगे।
बस इतना ही ना, और जब मर ही गई रहूंगी, तो फिर तो किसी बात की अनुभूति ही नहीं होगी।

और तब तो सारा डर भी मेरे साथ ही मर जाएगा ना..।

” आज तक कभी तुम्हारे जैसी लड़की नहीं देखी मैंने..!”

“थैंक यू, और कभी देखेंगे भी नहीं! क्योंकि मैं मेरे जैसी एक ही हूं। मेरे माता पिता ने भी मेरे बाद किसी को पैदा ही नहीं किया !!
अब मेरे जैसी कोई आएगी तो वह मेरी बेटी ही होगी..!”

“अच्छा शादी भी तय हो रखी है तुम्हारी.. !”

“नहीं… अभी तो बहुत उम्र बाक़ी है शादी के लिए.. ! आपको ऑफिस के लिए देर नहीं हो रही ?”

“हम्म हो तो रही है.. तुम क्या करने वाली हो, आज दिन भर ?”

“कुछ खास प्लान तो नहीं है !”

“तो फिर साथ ही चलो.. मेरे वर्कस्टेशन पर ही तुम्हें ढेर सारी खबरें मिलेगी..!”

“पक्का ?”

“हाँ.. !”

“बस पांच मिनट दीजिये, मै रेडी होकर आती हूँ !”

नेहा चहकती हुई ऊपर चली गयी और अनिर्वान मुस्कुरा कर अख़बार के उस हिस्से को, जहाँ उस एडिटर पर एक महिला पत्रकार द्वारा झूठा इल्जाम लगा कर उसके चरित्र पर धब्बा लगाने की कोशिश करी की झूठी खबर छपी थी को जला दिया और कचरे के डिब्बे में उस जलते टुकड़े को फेंक दिया..!

ऊपर जाती नेहा की नजर ऊपर जाते जाते अनिर पर पड़ गयी और वो मुस्कुरा कर अंदर चली गयी..

*****

रेशम दो दिन की छुट्टियां मना कर वापस आ गयी थी… उसे अथर्व को छोड़ कर आने का मन नहीं था, लेकिन काम भी ज़रूरी था…
वो कब तक छुट्टी लेकर बैठ सकती थी…

मन भारी था, अथर्व को छोड़ कर आते हुए उसका दिल फूट फूट कर रोने का कर रहा था, लेकिन अब भी उसके और अथर्व के बीच संकोच की एक महीन सी रेखा थी, जिसके कारण न वो उसके सामने खुल कर हँस पाती थी.. न खुल कर रो पाती थी..

जाने क्या क्या सामान बांध दिया था, उसकी सास ने चलते समय…।
आलू, करेले, कच्चे केले के घर में बने चिप्स, आलू, चावल के पापड़, चकली और भी बहुत कुछ !!
अथर्व भी उसके लिए दो नयी ड्रेस ले आया था..
सगाई अच्छे से निपट चुकी थी..!

अब उसके फ़ोन पर एक और नया रिश्तेदार उसकी कॉन्टेक्ट लिस्ट का हिस्सा बन चुका था,और वो थी उसकी देवरानी..।।

ढेर सारी खट्टी मीठी यादो की पोटली संभाले वो वापस आ गई थी।
         वो सुबह सुबह डिस्पेंसरी के लिए तैयार हो रही थी की उसके दरवाज़े पर दस्तक होने लगी….

गुड्डी रसोई में काम कर रही थी, वही दरवाज़ा खोलने चली गयी..

“दीदी, कुछ औरतें आई है आपसे मिलने !”

“ठीक है.. उनको बैठा.. मै आ रही !”

बालों को पोनी में बांध कर अपने हाथ में घडी बांध कर वो बाहर चली आई..
सामने जलसो गांव की औरतें बैठी थी..
रेशम को देख सब खड़ी हो गयी..

“डॉक्टर दीदी.. हम सब मानौर के सरपंच के यहाँ जाना चाह्ते हैं.. आप भी साथ चलेंगी न ?”

“मानौर के सरपंच क्या सच में इसमें, हमारी मदद कर सकते हैं ?”

“हाँ दीदी.. उनका बहुत रसूख है… उनकी बात टालना  हमारे मर्द लोगो के लिए आसान नहीं होगा.. और हमारे गांव के ज्यादार लोग उन्ही के खेतों में और फैक्ट्री में काम करते हैं..!
उन्होंने जो एक बार कह दिया, उसे टालना इन लोगो के बस की बात नहीं है..!
बहुत अच्छे है सरपंच जी..!
हमारे गांव भी आ चुके हैं.. हमारे गांव में स्कूल नहीं था.. बच्चियों के लिए स्कूल खुलवाने का प्रस्ताव उन्होंने ही बना कर भेजा है..
सरपंच पद पर आते ही उन्होंने सबसे पहले हमारे गांव के सभी तालाब पोखरे के पानी की सफाई करवाई..।
हर किसी के अनाज भंडारण के लिए अपना गोदाम खुलवा दिया.. उनके कितने उपकार गिनवाए आपको दीदी..?
ऐसे भले इंसान है, लगता है साक्षात राम कलजुग में चले आये हैं..।”

एक के पीछे अब दूसरी बोलने लगी…

“आप एक बार हमारे सब के साथ चल कर उनसे बस इतना कह दीजिये कि हमारे गांव और आसपास का ठेका बंद करवा दे…।
और इन आदमियों को न पीने के लिए बोले..।
बस.. उनकी बात कोई नहीं काट सकता.. !”

“ठीक है चलिए…. !”

अपनी साड़ी को आईने के सामने एक बार सही कर के रेशम ने अपना बैग उठाया और उन औरतों के साथ बाहर निकल गयी..
कुछ आगे बढ़ने पर उन्हें सवारी गाड़ी मिल गयी..

वो सभी लोग मानौर के सरपंच से मिलने निकल गए..

*****

रात कुसुम के कमरे की खिड़की खुली रह गयी थी.. ठंडी हवाएं कमरे में बहने लगी थी… आधी रात के वक्त कभी अचानक तेज़ ठण्ड से कुसुम की नींद खुल गयी..
उसे खिड़की बंद करने का ध्यान तो नहीं आया, लेकिन वो पलंग के पास पहुँच कर ओढ़ने के लिए कुछ ढूंढने लगी….

सोफे पर लेदर था जिसके कारण सोफा और ठंडा लग रहा था..
उसने पलंग पर सोये पड़े यज्ञ की तरफ देखा, वो एक किनारे गहरी नींद में सोया पड़ा था…
एक तकिये को अपनी बाँहों में जकड़े हुए और दो तकिये सर के नीचे रखे !

उसके चेहरे के पास झुक कर कुसुम ने ध्यान से देखा, वो वाकई गहरी नींद में सोया हुआ था..
निश्चिन्त होकर कुसुम उसके बाजू में थोड़ी जगह छोड़ कर लेट गयी, और अपने कंबल पर ऊपर से यज्ञ की कंबल भी डाल ली.. तब जाकर उसकी ठण्ड कुछ कम हुई…
और वो भी गर्माहट पाकर गहरी नींद सो गयी..
उसे यज्ञ की नींद देख कर लगा था कि, इतनी गहरी नींद में सोया यज्ञ सुबह उसके पहले उठने से रहा…।
  वो उसके उठने के पहले अपना सामान समेट कर सोफे पर खिसक जाएगी…।

   कुछ देर बाद यज्ञ की बांह कुसुम के कमर के इर्द गिर्द चली आई.. चौंक कर उसकी नींद खुल गयी..।
उसने पलट कर देखा यज्ञ अब भी गहरी नींद सोया हुआ था.. नींद में तकिया समझ कर उस पर हाथ रख लिया होगा, ये सोच कर कुसुम ने उसका हाथ उठा कर हटाने की कोशिश की।
लेकिन नींद में सोये आदमी का वजन इतना बढ़ जाता है, इसका उसे भान नहीं था..।
एक दो बार कोशिश के बाद जब वो नहीं हटा पायी तो थोड़ा और खुद में सिमट कर सो गयी…।
यज्ञ की बांह में उसके घर से शादी में तोहफे के तौर पर दिया मोटा सोने का ब्रेसलेट था.. जिस पर उसके भाई ने बड़े चाव से यज्ञ और कुसुम के नाम के पहले अक्षर खुदवाये थे..
उन्हेँ देख कर एक हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर चली आई.. उन अक्षरों पर अपनी ऊँगली फेर कर धीरे से वो यज्ञ की पतली लम्बी उंगलियों पर अपनी उँगलियाँ फेरने लगी..
उसके पीठ पीछे लेटे यज्ञ के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई…
लेकिन दोनों को ही मालूम नहीं चला की दोनों ही जाग रहे थे… !
कुछ देर बाद दोनों ही गहरी नींद सो गए..

सुबह यज्ञ तैयार हो रहा था, कि कुसुम भी नहा कर कमरे में चली आई…।
वो अपने बालों को खिड़की पर खड़ी धूप में सुखाने की कोशिश कर रही थी…।

यज्ञ ने उसे देखा और बालो पर कंघी फेरते हुए कुछ गुनगुनाने लगा..

“रात का नशा अभी
आँख से गया नहीं

तेरा नशीला बदन
बाहों ने छोड़ा नहीं,
आँखें तो खोली मगर
सपना वो तोड़ा नहीं,
हाँ वही वो वही
सासों पे रखा हुआ तेरे होंठों का
सपना अभी है वही….

कुसुम को लगा था,यज्ञ को उसका उसके बगल में आकर सोना मालूम नहीं चला होगा, क्यूंकि वो सुबह उठ कर वापस सोफे पर सो गयी थी.. ।
लेकिन शायद वो गलत थी..।

उसे मालूम चल गया तभी तो बेशरम ऐसे ऐसे गाने गा रहा..
कुसुम ने उसे बिलकुल ही अनदेखा किया और नीचे चली गयी..।
मुस्कुरा कर यज्ञ भी हँसता खिलखिलाता नीचे चला आया.. !

****

अखंड आंगन में बैठा चाय पी रहा था…. उसकी अम्मा उसकी पसंद का नाश्ता बना रही थी..
यज्ञ भी उसी के साथ आकर बैठ गया.. दोनों भाई अपने कारोबार पर कुछ चर्चा भी कर रहे थे..।

उसी समय उनकी काकी आँखों के आंसू पोंछती रसोई से बाहर निकलने लगी.. रसोई में अंदर जाती कुसुम ने उन्हेँ टोक दिया..

“क्या हुआ काकी जी… आप रो क्यों रही.. ?”
यज्ञ और अखंड भी कुसुम की आवाज़ सुन उस तरफ देखने लगे.. काकी बिना कुसुम की बात का जवाब दिए चली गयी..।
कुसुम की सास ने आकर “कुछ नहीं बस वीर के लिए परेशान है ” कह कर उसके हाथ में आलू के पराठे का डोंगा पकड़ा दिया..

“लेकिन क्यों ?” कुसुम का सवाल हवा में कहीं खो गया क्यूंकि उसकी सास रसोई के अंदर चली गयी थी और काकी सास आंगन के पिछले हिस्से में…

कंधे उचका कर कुसुम अखंड और यज्ञ की तरफ बढ़ गयी… उन दोनों की प्लेट में पराठे परोस कर वो रसोई में घुस गयी..

“सुनो, हम ये अचार नहीं खाते.. प्लेट से निकाल दो !” 

अखंड ने कुसुम से कहा और कुसुम ने पूरी विनम्रता से हाँ में गर्दन हिला कर एक चम्म्च से अचार उठा लिया..

“कुछ और लेंगे आप भाई साहब.. कैचप या चटनी ?”

“नहीं बस ये दही काफी है !”  अखंड ने नीचे देखते हुए ही बोल दिया..

“जी ठीक है !” बड़े प्यार और इज्जत से अपने जेठ की बात का जवाब देकर कुसुम कुमारी अंदर चली गयी.. और यज्ञ हल्का सा मुस्कुरा कर रह गया..

सारे संसार से प्रेम से बोल लेगी, बस हमारे सामने ही नागिन बन कर जहर उगलना है.. !! सोच कर उसे हंसी आ गयी..

उसी समय बाहर तेज़ गति से जीप में ब्रेक लगने से ऊँची सी आवाज़ हुई जो अंदर तक चली आई..
अखंड और यज्ञ दोनों का ध्यान उस तरफ चला गया..।

बाहर अपनी जीप से लड़खड़ाते हुए वीर उतरा.. उसके दो दोस्तोँ ने उसे सहारा देकर उतारा..।
पिछले दो दिन से वो घर पर बिना बताये गायब था, इसलिए उसकी माँ आज सुबह से सुबक रही थी.. ।

वीर अपनी गाड़ी से उतरा और घर की तरफ बढ़ रहा था की चार पांच औरतों के साथ रेशम भी वहाँ पहुँच गयी..।
रेशम को देख वीर उसके सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया..।

लड़खड़ाते हुए वो उसे देखते हुए बोलने लगा..

“क्या बात है मैडम… ?”

वीर के पास से गाँजे और शराब की मिली जुली सी तीखी गंध उठ रही थी… रेशम ने अपना चेहरा ज़रा पीछे कर लिया और उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया..

“बोलिये न.. आपकी मदद कैसे कर सकते हैं ?”

अब भी वो चुप ही रही..

वीर के दोस्त उसे संभालने की कोशिश में लगे थे..
वो लोग उसे पकड़ कर अंदर ले जाना चाहते थे, लेकिन अपनी लटपटी जबान से वो कुछ का कुछ बोलता, रेशम के सामने से जाना नहीं चाहता था…।

बाहर से कुछ आवाज़े अंदर भी जा रही थी.. अखंड उठने लगा कि यज्ञ उठ कर खड़ा हो गया..

“आप नाश्ता कीजिये भैया, हम देख कर आते हैं.. !”

यज्ञ बाहर चला आया…।
वीर का लटपटाना और रेशम का उससे बच कर इधर उधर होना देख यज्ञ सब समझ गया..
उसे रेशम का चेहरा बड़ा जाना पहचाना सा लगा…

“जी कहिये.. !”

वो रेशम के सामने चला आया…
उसने पलट कर वीर को अंदर ले जाने का इशारा कर दिया..

“जी मै डॉक्टर रेशम हूँ.. दूर्वागंज में काम करती हूँ.. हम सब को किसी ज़रूरी काम से सरपंच जी से मिलना था.. !”

यज्ञ के पीछे ही बाहर निकलते अखंड ने घर के गलियारे से पहचानी सी आवाज़ सुनी और झांक कर देखा तो बाहर रेशम खड़ी थी…।

उसकी जान हलक में अटक गयी..।

रेशम यहाँ कैसे.. ?

वो पल भर को इसे देखता रह गया…
रेशम को साड़ी में उसने पहली बार देखा था… उसकी पलके जैसे झपकना भूल गयी थी…।
कितनी प्यारी कितनी मासूम लग रही थी वो..।

उसके एक हाथ में सोने का पतला कड़ा और दूसरे में घडी बंधी थी.. बाल पीछे रबर से बांधे थे उसने..।
फिर भी एक दो ज़िद्दी लटे उसके माथे चली आ रही थी..
जिन्हे बातो के बीच में वो अपने कानो के पीछे सरकाती जा रही थी..
बीच बीच में एक दो बार उसने अपने होंठो पर जीभ फेरी…
अखंड ने तुरंत घर के नौकर को बुला कर बाहर पानी ले जाने कहा…

नौकर हामी भरता अंदर जाने लगा.. -” सुन बोतल वाला लेकर जाना.. सीलबंद बोतल वाला !”
.
“जी भैया जी !”

कह कर वो चला गया…

यज्ञ अब तक रेशम से जान पहचान निकाल चुका था, वो रेशम के साथ उन सब औरतों को साथ लिए अंदर आ रहा है, ये देख कर अखंड की साँस रुक गयी..।

अगर रेशम को पता चल गया की वही मानौर का सरपंच है तो क्या होगा ?

क्रमशः

aparna…

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Nisha
Nisha
1 year ago

Resham khud ko sambhal nahi payegi akhand ko dekhkar

Meera Patel
Meera Patel
2 years ago

अब लेदर का सोफा है तो ठंडा तो होगा ही , खिड़की बंद करना इसलिए याद नही आया की हमारी कुसुम कुमारी न थोड़ी खुराफाती है , ऐसे कैसे यज्ञ को आराम से फैले हुए सोए देख सकती थी ?? सोचा होगा मेरा भी कमरा है , बिस्तर भी मेरा है , और ये महाराज तकिए की पूरी बारात लेकर आराम से सोए और में ठंड में सिकुड़कर !! 🤨🤨🤨💡💡 और फिर घुस गई बिस्तर पर और बाद में यज्ञ के कंबल के अंदर भी , और ये सब वो अच्छे से जान कर मज़े से सो रहा है , या सता रहा है 🤭🤭🤭🤭
आए कतेई बवाल है ये ठाकुर क्या मन के भाव गानों में गुनगुना जाता है 😍🥰😘😘
अंखंड बाबितो आलू पराठा और दही ही खाकर मस्त है और अपनी शेरनी को सब से ऐसे मितभाव से बतियाते देख थोड़ी जल रही जान यज्ञ बाबू की 🤣🤣🤣
अंखड़ बाबू का दिल का हाल क्या होगा जब उसने रेशम को अपने घर देखा , और वो भी उनसे ही मिलने आई , अब कुसुम कुमारी को और एक बात जान ने को मिलेगी , और पानी बोतल वाला सील पैक मंगवाया जा रहा है भाई वाह ! जलसे है !! 🤭😅👌👌