अपराजिता -44

अपराजिता -44

   कॉलेज और आसपास ये बात फ़ैल गयी थी कि पंकज की, अखंड ने ज़बरदस्त धुनाई की है..
पंकज और उसके दोस्त उस बात को इस तरह फ़ैला रहे थे कि पंकज का जिस लड़की के साथ अफेयर चल रहा था उसी मेडिकल की लड़की पर अखंड की भी नजर थी.. ।

अखंड परिहार ने अपनी गुंडई और दबंगई दिखाते हुए पंकज को कई बार उस लड़की से अलग रहने की चेतावनी दी थी, लेकिन पंकज अपनी गर्लफ्रेंड के साथ अखंड का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। और इसीलिए उसने अखंड के खिलाफ आवाज उठाई थी। अखंड एक नामी गुंडा था, इसलिए उसने अपने लड़कों के साथ मिलकर पंकज को बुरी तरह से पीट दिया था। पंकज अपने दोस्तों के साथ इस तरह की बातें फैला कर खुश हो रहा था। लेकिन वो नहीं जानता था कि उसके इस बात को फैलाने का फायदा धीरेंद्र प्रजापति किस तरह उठाने वाला है?

पंकज अस्पताल में अपने बेड पर पड़ा अपने दोस्तों के साथ हंसी मजाक में लगा हुआ था कि तभी दीपक उससे मिलने चला आया।
दीपक को पंकज के कारनामों के कारण बार-बार गांव से उससे मिलने आना पड़ता था। दीपक भी सीधा सच्चा आदमी नहीं था।
   उसका भी जमीन धंधे का काम था और वह मुख्य रूप से चंद्रभान के लिए काम किया करता था, लेकिन थोड़ी बहुत खेती खार उसने भी जोड़ रखी थी। चंद्रभान के ज्यादातर पैसों का कारोबार दीपक ही देखा करता था और उसी कारोबार में छोटी-मोटी हेरफेर करके उसने भी थोड़ा बहुत रुपया जोड़ लिया था।
गांव में अपना नाम ऊंचा बनाए रखने के लिए वह चाहता था कि उसका छोटा भाई किसी तरीके से डॉक्टर बन जाए। इसीलिए वह उसे जबरदस्ती डॉक्टरी पढ़ाने के लिए शहर भेज चुका था। लेकिन अंदर का खून बदला तो नहीं जा सकता।
पंकज भी आखिर था तो दीपक का ही भाई। हेरफेर करना जालसाजी करना चालबाज  करना उसके खून में था। वह कैसे बदलता ?
वह तो वैसे भी डॉक्टर बनना चाहता ही नहीं था। उसका तो मन बस इसी बात पर था कि किसी तरह से पेपर खरीद कर पास हो जाए और नाम के आगे डॉक्टर लगाकर अपने भाई को अपना सर्टिफिकेट सौंप दे। जिसको लैमिनेट कराकर उसके भाई साहब अपने घर की परछी में टांग कर अपना सीना चौड़ा कर सकें।

दीपक इस महीने दूसरी बार पंकज से मिलने आ रहा था और इसलिए उसका दिमाग उस पर बहुत उखड़ा हुआ था.. ।

अस्पताल पहुंचते ही दीपक ने सबसे पहले पंकज को एक थप्पड़ लगाया। पंकज अपना गाल सहलाते हुए दीपक को सवारिया नजरों से देखने लगा ।

“अब क्या करते भैया ?”

“हम साले तुमको हम यहां पढ़ने दे रहे हैं, और तुम हो कि लैला मजनू वाला किस्सा लिख रहे हो। जिस लड़की का नाम लेकर तुम ऐसे बदनाम हो रहे हो, क्या वाकई इस लड़की के साथ तुम्हारा कुछ चक्कर है.. ?
साले तुम कतई जाहिल गंवार हो, हम तुम्हें 100 बार समझा चुके हैं कि प्यार मोहब्बत जो करना है, जिस लड़की के साथ करना और जितना करना है, सब यही कॉलेज में करके और सब कुछ छोड़ छाड़ कर घर लौटना।
क्योंकि बेटा शादी तो हम तुम्हारी अपनी ही जात बिरादरी में करेंगे ।
अपनी जात से बाहर जाकर शादी करने कि सोचे भी ना, तो कसम अम्मा कि हम भूल जाएंगे कि तुम हमारे सगे छोटे भाइ हो।
    ऐसा तुम्हारी टांग तोड़ेंगे ना कि घर से निकलने के लायक नहीं रह जाओगे, और जिस लड़की के साथ मुंह काला करवा रहे हो ना उस लड़की को तो हम सीधा मौत के घाट उतार देंगे।
इसलिए बार-बार समझा रहे हैं जो करना है यही कर करा कर भूल कर घर लौट ना। किसी लड़की को शादी करने का वादा देकर नहीं आना समझे.. ।”

“अरे दीपक भैया ऐसी कोई बात नहीं है। आप समझते कहां है हमको?
वह लड़की बस एक बार फर्स्ट ईयर में थोड़ा ज्यादा ही रोल मार गई थी हमारे सामने, बस उसी का छोटा सा बदला ले लिये.. !”

” ऐसा क्या रोल मार गई थी बे.. ?”

“अरे कुछ नहीं.. फर्स्ट ईयर में जब हम लोगों को वेलकम पार्टी मिलने वाला था तो सीनियर सब लोग एक ही बस में हम उनको लेकर गए थे। यह खिड़की के पास बैठी थी। बाजू की कुर्सी पर बैग रखकर बैठी ,हम पहुंचे हम बोले उठा लो बैग,हम बैठ जाएंगे, तो कहने लगे हमारी सहेली आने वाली है। आप दूसरी जगह बैठे।
हम चले गए। हम उसके पीछे बैठ गए। उसके बाल पीछे हो रहे थे। हमारा हाथ था, हमारे हाथ में उसके बाल पड़ गए। हमनें थोड़ा सा हटा दिया। पीछे मुड़ी और हमें देखकर घूर कर कहने लगी, आइंदा  बदतमीजी की ना तो अच्छा नहीं होगा पंकज!
   हम बोले,क्या कर दिया हमने तो कहने लगी, तुम खुद जानते हो कि तुमने क्या किया?
     वेलकम पार्टी चल रही थी…
वहां लड़के लड़कियां सभी एक दूसरे के साथ नाच रहे थे। अब ये रेशम जो है अपनी सहेली पूर्वा के साथ नाच रही थी।
     हम पहुंच गए, हम बोलो जरा एक तरफ होना चाहिए और हमने उसकी कमर में हाथ डाल दिया, बदतमीज लड़की पलटी और हमारे तमाचा जड़ दिया..।
कसम से कह रहे हैं दीपक भैया हमारा खून जल गया। लड़की वाकई बहुत सुंदर है, लेकिन उसको सुंदरता का अपने घमंड भी बहुत है। उसी समय हम कसम खा लिए कि इसका घमंड तो हम चूर चूर कर करेंगे ।
उस समय तो हम माफी मांग कर निकल लिए, लेकिन उसके बाद पूरा 2 महीना हम उसके सामने अच्छा लड़का होने का ऐसा नाटक रचे, ऐसा नाटक रचे कि खुद ब खुद शीशे मे उतर गई। एक दिन लाइब्रेरी में हमसे मिली तो बोलती है सॉरी पंकज हम वेलकम पार्टी में तुमको गलत समझ लिए रहे। हम भी बोले कोई बात नहीं, कभी-कभी ऐसा गलती हो जाता है। उसके बाद एनुअल फंक्शन का कार्यक्रम शुरू हुआ। और हम हर जगह उस पर अपना इमेज बनाते गए।
हमारी अच्छी इमेज उस पर बनने का हमने फायदा उठा लिया। उस दिन काफी पीने पूछे तो चुपचाप चली आई। और हम उसके साथ सेल्फी खींच कर वायरल कर दिए। अब उसके बाद जब हमसे पूछी तो हम बोले, हमने नही खींची , कोई और खींच कर डाल दिया था।
ऐसा लग रहा है जैसे हमारा सेल्फी था। बेवकूफ लड़की फिर हमारी बातों में आकर चली गई..

इसी बीच धीरु भैया यानी कि धीरेंद्र प्रजापति चले आए। अब वह जैसे ही इस पिक्चर में आए, उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। उनका दुश्मनी अखंड परिहार से था और अखंड परिहार इस लड़की के पीछे पूरी तरह से पागल हो रखा है।
तो हमने भी सोचा हम रेशम से बदला ले लेंगे और धीरु भैया अखंड से बदला ले लेंगे। इस तरह से हम दोनों का कार्य पूरा हो जाएगा..।”

” तुम्हारा उस लड़की से कोई प्यार मोहब्बत नहीं है.. ?”

” अरे नहीं भैया हम भी क्या पागल हैं, जो प्यार मोहब्बत के लफड़े में फंसेगे ? वैसे भी वह लड़की बहुत ही सुंदर है। जो लड़का उसको देखता है ना वही उस पर पगला जाता है।
अभी अखंड परिहार पगलाया है, कल को धीरेंद्र प्रजापति पगला जाएगा। तो यह दो रावण लोगों के बीच में हम का करेंगे ? इसलिए हमारा किनारे रहना ही ठीक है..।”

“बात तो यह उङा है कि, तुम्हारा उस लड़की से चक्कर था और इसीलिए अखंड परिहार तुम को मारपीट के  गया है.. ?”

“यह सब धीरू भैया का किया कराया है.. नेता आदमी अपना राजनैतिक फायदा के लिए कर रहे हैं… !”

“पंकु इन सब नेता आदमी लोगों से दूर ही रहो..। इन की ना दोस्ती अच्छी और ना दुश्मनी। यह लोग अपना काम निकलने के बाद किसी के सगे नहीं होते। समझ जाओ बाबू इन सब से दूर ही रहो।
    हम अब निकलते हैं। गांव पहुंचते रात हो जाएगी.. ।
तुम अपना ध्यान रखना समझे.. !”

पंकज की जेब में नोटों की गड्डी ठूंस कर उसका बड़ा भाई दीपक वहां से वापस लौट गया। लेकिन उस वक्त वह खुद नही जानता था कि वह अपने छोटे भाई से आखिरी बार मिल रहा है। दीपक के जाने के कुछ देर बाद पंकज के दोस्त भी वहां से चले गए… ।

पंकज की वाकई अखंड ने जोरदार पिटाई की थी। बावजूद उसकी हड्डी पसली अपनी सही जगह पर मौजूद थी। यहां तक कि उसकी हालत अब भी ऐसी थी कि वह छुट्टी करवा कर अपने हॉस्टल वापस लौट सकता था। लेकिन पंकज को भी अपना नाम बनाने का कुछ ज्यादा ही शौक था।
उसे अपनी इमानदारी धीरेंद्र प्रजापति पर साबित करनी थी। धीरेंद्र को उसने अपना कुछ ज्यादा ही सगा मान गया था और शायद यही वह गलती कर बैठा.. ।

आधी रात के वक्त जब लगभग सारा अस्पताल सोया पड़ा था। नाइट शिफ्ट की नर्स और आया बाई भी अपने-अपने जंक्शन में बैठी ऊंघ रही थी! चेहरे पर साफा बांधे एक लड़का दबे पांव अस्पताल परिसर में चला आया! अपने चेहरे को उसने गमछे से पूरी तरह लपेट रखा था! वह चल रहा था तो बिल्कुल आवाज नहीं हो रही थी। बहुत धीमे से वह पंकज के पास पहुंच गया..!

  
   पंकज को ड्रिप लगी हुई थी..
उस लड़के ने अपने साथ लाया वायल निकाला और उसमें से दवा सलाइन में इंजेक्ट कर दी..

उसने जो भी तरल डाला था वो बड़े आराम से नार्मल सलाइन में घुलमिल गया..

वो पलटा और तेज़ तेज़ कदमो से बाहर निकल गया…

******

भावना को उसके घर पर उतार कर राजेंद्र अपने घर पहुँच चुका था, उसे चंद्रा भैया के गुंडों ने बेतहाशा पीटा था.. उसकी चलने फिरने की हालत नहीं थी..।
लेकिन काका ने जैसा कहा था, की गाँव छोड़ कर चले जाओ.. उस बात पर अभी वो कुछ नहीं सोच पा रहा था..।

सरना आकर उसे अपने साथ अपने घर ले गया था..
सरना के घर में उसकी बूढ़ी माँ भर थी..
सरना भी खेतिहर किसान था, कुछ खेत खुद जोतता था तो कुछ अधिया पर दे रखें थे उसने..।
उसके घर के पीछे ही उसकी धान की कुठरिया थी, जहाँ अनाज की बोरियां पड़ी थी..।
उसके अलावा रसोई से लग कर उसका भंडार घर था, जहाँ मिट्टी और गोबर को मिला कर बनी आदमकद कुठलियाँ थी, जिनमे अनाज भरा था..।
सरना ने उसी भंडार कक्ष में राजेंद्र को छुपा दिया..

चंद्रा भैया का वैसे भी इस बात पर ध्यान नहीं गया था कि सरना राजेंद्र का दोस्त है..।
इसलिए भी राजेंद्र सरना के घर पर सुरक्षित था। राजेंद्र के घर पर उसने ताला डाल दिया था। उसकी बाइक भी वहां से हटाकर पीछे आंगन में छुपा दी थी..।

क्योंकि सरना भी जानता था कि राजेंद्र और भावना के भागने के बाद चंद्रा भैया के गुंडे उन दोनों को तलाशते हुए जरूर आएंगे। सरना को भावना की भी चिंता लगी हुई थी..।.

फिलहाल सरना की मां राजेंद्र और सरना के लिए खाना लेकर चली आई। थाली में रखी गरमा गरम घी लगी रोटियां, गुड़ की डली और पालक का साग देखकर राजेंद्र की भूख जाग गयी..।
पिछले डेढ़ दिन से जब से उसे चंद्रा भैया के गुर्गो ने पकड़ कर रखा था, उसने कुछ भी नहीं खाया पिया था..।

वह चुपचाप खाना खाने लगा लेकिन तभी उसे भावना की भी याद आ गई। राजेंद्र ने अपना फोन ढूंढने की कोशिश की लेकिन उसे उसका मोबाइल नहीं मिला। सरना से उसका फोन लेकर उसने भावना को फोन लगा दिया..।

अनजान नंबर देखकर भावना पहले तो फोन उठाने में संकोच कर रही थी, लेकिन फिर उसने फोन उठा लिया। भावना के फोन उठाते ही राजेंद्र उसका हाल समाचार पूछने लगा..

“कैसी हो भावना ?”

“ठीक हैं ? आप कैसे हैं डाक्टर साहब ?”

“ठीक हूँ ! “

“आप जल्दी से जल्दी यहाँ से निकल जाइये.. ये लोग आपको छोड़ेंगे नहीं..!”

“तुमसे भी यहीं कहना चाहता था, कि तुम भी यहाँ से निकल जाओ ! पर तुम जाओगी कहाँ ?”

“अभी तो अम्मा कह रहीं मामा जी के घर जाने, देखते है  !”

भावना राजेंद्र से बात कर रही थी कि तभी भावना के घर पर जोर-जोर से दस्तक होने लगी। भावना और उसकी मां दोनों घबरा गई।
    भावना ने राजेंद्र से कहा कि वह फोन रखती है, शायद घर पर कोई आया हुआ है। राजेंद्र ने उसे फोन ना काटने की ताकीद कर दी वो खुद भी जानना चाहता था कि इस वक्त उनके घर कौन आया हुआ है ?
  भावना ने फोन को यूंही रखा और उसकी मां दरवाजा खोलने चली गई।
दरवाजा धीरे से खोल कर उसकी मां बाहर झांकने लगी। बाहर 2 औरतें खड़ी थी।
  भावना की मां दरवाजे पर थी, वह दोनों ही औरतें दरवाजे को खेलकर तेजी से अंदर चली आई। भावना ने देखा कुसुम की भाभी और एक नौकरानी आई हुई थी…।

कुसुम की भाभी ने आते ही भावना के चेहरे को अपने हाथ में लिया और उसे बड़े ध्यान से देखने लगी।
सुजाता के चेहरे पर पीड़ा नजर आने लगी।
उनकी आंखों में आंसू छलक आये..।

” हम तो शुरु से यह सब जानते थे, लेकिन कुसुम कुमारी जी को कोई बात समझ आए, तब ना !!
हम तो जाने कितनी बार उनको बोले, उनके भैया इतने सीधे आदमी नहीं है लेकिन वह मानती ही नहीं थी..।
हमसे तो उन्होंने कभी कुछ बताया ही नहीं। हमसे बताती तो हम सीधा शहर का टिकट कटवा कर उन दोनों को शहर भिजवा देते कि जाओ चैन से रहो, इन ठाकुरों की बस्ती से दूर अपना घर बना लो।
लेकिन कुसुम कुमारी जी हमें अपना सगा समझे तब ना…!
वह तो आज जब जीवन मरण का सवाल हो गया तब हमारी नंदरानी हमारे पास आई और हमें सारा कारनामा कह सुनाया।
उनका कांड सुनकर ही हम समझ गए थे कि उनका सारा गुस्सा उनके अति प्रिय बड़े भैया ने तुम पर निकाला होगा..!”

भावना चुप बैठी थी…

“भावना पंडिताइन हो तुम.. तुम पर अत्याचार कर के नरक की अग्नि में जलने का कारज कर बैठे हैं वो….।
हम अभी उन्हें भी ख़ूब खरी खोटी सुना कर आये है…।
अब घर में सबको पता चल गया है कि घर भर की लाड़कुंवर क्या गुल खिला रहीं हैं..
अरे किया धरा कुसुम का तुम्हें काहे सजा दे गए..?
चलो हम तुम्हें लेने आये हैं… अम्मा तुम्हें बुलवाई है.. माफ़ी मांगने.. !
ब्राम्हण कन्या वो भी कुंवारी, राम राम ! उस पर हाथ छोड़ बैठे, नरक की अग्नि में जलेंगे सब साले… !”

भावना की समझ से बाहर था कि सामने बैठी कुसुम की भाभी आखिर चाहती क्या है ?
एक बार तो वो कुसुम का साथ देकर उसे भागने की बात कर रहीं दूसरे ही पल उसका साथ दे रहीं..।

“भाभी आप चाहती क्या है.. ?”

“भावना…. हम सच का साथ देना चाहते हैं.. ! कुसुम कुमारी के लक्षण देखकर हम बहुत पहले समझ गए थे कि उनके दिल में प्यार की बारिश हो चुकी है और वह इस बारिश में पूरी तरह भीग रही है। जानती हो हम भी तो तुम लोगों के ही उमर के है ना, दो साले तो बड़े हैं।
तो हम नहीं पहचान पाएंगे क्या कि कौन सी लड़की मोहब्बत में पड़ी हुई है?
   अरे कुसुम कुमारी जी के रंग ढंग ही बदल गए थे। दिन भर इधर से उधर डोलती फिरती थी, परफ्यूम के कुंड में स्नान होने लगा था,हम तो तब ही समझ गए थे.. लेकिन भावना हम अपने ससुराल को भी अच्छे से जानते हैं..
हम जानते हैं कि वहां कुसुम कुमारी बात करना चाहेंगी  तो कोई राजी नहीं होगा!
अगर कुसुम ने पहले हमसे कहा होता तो हम चुपचाप गहना जेवर रुपया पैसा देकर उसको और उसके डॉक्टर साहब को भगा दिये रहते..।
लेकिन हमसे सच कहा नहीं…।
अब ये जो कांड करी है के चंद्रा भैया के दिमाग में खून सवार हो गया है।
     उनका गुस्सा अपनी बहन और उस लड़के के लिए ही था। लेकिन गुस्सा तुम्हारे ऊपर भी उतार दिए। जब उन्होंने अंदर आकर हमें और अम्मा जी को बताया तब हमने भी अच्छी खरी-खोटी सुना दी।
अरे भाई जब तुम्हारा इस सब मे कोई कसूर ही नहीं था तो तुम्हें मारने पीटने का क्या मतलब?
ब्राम्हण लड़की को पीट दिया.. हमारा यह कहना सुनकर अम्मा जी भी हमारा पक्ष लेने लगी और उन्हें समझाया कि तुम्हारे साथ इनमें जो किया है वह गलत किया है।
   यह तुम्हारे खिलाफ बोलने लगे कि तुम वहां मौजूद थी और तुम ने उन्हें रोका नहीं। तब हम बोले यह भी तो हो सकता है कि कुसुम कुमारी और डॉक्टर साहब के बीच सिर्फ दोस्ती ही हो। ऐसा क्या देख लिया जो आप नाराज हुये जा रहे हैं..।
तो फिलहाल इनकी कुंद बुद्धि के ऊपर हम इस बात की चादर डाल कर आए हैं कि वह दोनों की बस दोस्ती है। और उससे ज्यादा कुछ नहीं है।
और प्यार मोहब्बत से अपनी बहन को समझा कर घर बैठा दो।
    लड़का वैसे भी डॉक्टर हैं। आज यहां कल कहीं और डॉक्टरी कर लेगा।
इस तरह से समझाइश देकर शांति पूर्ण तरीके से मामले को निपटा लिया जाए..।

अब इन्होंने सिर्फ तुम सब को एक साथ चाय की टपरी में बैठे ही तो देखा था और ऐसा कुछ तो देखा नहीं था..।
असल में इनके पास एक आदमी आता है दीपक.. वहीं कुछ ज्यादा कान भरा है इनके..।
हम भी उसका नाम लेकर बोल दिये, की वो जो बोल दिया तो ऑंख मूँद कर सच मान लिए, अरे एक बार अपनी बहन से पूछताछ तो कर लेते की का सही है और का गलत..?
आजकल नए ज़माने के लोग है, लड़का लड़की में दोस्ती भी तो रहता है…।”

भावना को अब सुजाता की उलझी बातों के तार समझ आने लगे थे…

“चलो भावना.. इन्हें भी अपनी गलती समझ आ गयी है..। अम्मा जी तुम्हें बुलाई है, तुमसे माफ़ी मांगने !”

सुजाता ने अपनी आँखों में आयी दो बूंदे पोंछ ली.. भावना ने अपनी अम्मा की तरफ देखा, उन्होंने जाने के लिए अनुमति दे दी..

भावना उठ कर चलने को थी कि तभी उसके मोबाइल पर मेसेज की बीप बजने लगी उसने देखा उसके बाबूजी के नंबर से मेसेज आया था..

“कैसी हो ?”

“हम ठीक है !”….

“अपना ख्याल रखना, और सुनो.. !”

“कहिये..

“तुमसे बात करनी है, लेकिन अकेले में !”

“क्यूँ ?”

“तुम्हें कुछ बहुत ज़रूरी बात बतानी है… कब बात हो सकती है ?”

“अभी कुसुम की भाभी के साथ उसके घर जा रहें हैं, वहाँ कुसुम की अम्मा बुलाई है.. वहाँ से आकर बात करेंगे बाबूजी !”

“वहीँ चंद्रा के घर जा रहीं हो.. ठीक है अपना फ़ोन बंद मत करना.. कुछ भी गड़बड़ लगे तो यहाँ मैं सुन रहा हूँ तुरंत पुलिस को आगाह कर दूंगा.. !”.

“जी.. !”

“सम्भल कर जाना !”

“जी !”

भावना ने भावुकता में बह कर उन्हें भी हर एक बात बता दी थी..

सुजाता के साथ जाती भावना के मन में यही चल रहा था की अब उसके बाबूजी उसे कौन सी बात बताना चाहते हैं…।
दूसरी तरफ चंद्रा भैया के आदमियों से इतना पिटने के बाद उसका कुसुम के घर जाने का भी कोई ख़ास मन नहीं था, लेकिन सुजाता के बार बार मनाने पर आखिर वो जाने को तैयार हो गयी थी..

क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌👌♥️♥️♥️

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👌👌👌👌👌♥️♥️♥️