अपराजिता -37
कुछ देर पहले का उसका सारा उत्साह तिरोहित हो गया और गुस्से में अपना सर पकड़े वहीं एक तरफ ढह गई…
वो गुस्से में खड़ी हुई और एक तरफ को बढ़ने लगी कि पूर्वा ने उसे खींच कर रोक लिया..
“रेशु क्या हुआ ? तू इतनी परेशान क्यूँ लग रहीं ?”
रेशम ने भरी भरी आँखों से पूर्वा को देखा और उसकी तरफ मोबाइल घूमा दिया..
रेशम और अखंड की तस्वीरें देख पूर्वा की आंखें फटी की फटी रह गयी..
उसी वक्त रेशम के मोबाइल पर एक मेसेज आया जिसे पूर्वा ने पढ़ लिया..
और पढ़ने के साथ ही उसने रेशम को एक तरफ खींच लिया और धीमे से उसके कान में फुसफुसाने लगी..
“रेशु ये मेसेज पढ़… !”
इधर उधर देखते हुए पूर्वा ज़रा घबरा सी रही थी..
“और थोड़ा अपने गुस्से को काबू में रख.. !”
“तुझे लग रहा मैं अपना गुस्सा काबू करूँ..? मेरा तो मन कर रहा उस कमीने के बाल नोच कर उसकी आंखें फोड़ दूँ..।
उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरी तस्वीरें मॉर्फ करने की..।
और मैं कोई शांत नहीं बैठने वाली, मैं जा रहीं हूँ डीन सर के पास.. इस बद्तमीज़ आदमी की शिकायत करने ! इसे यूनिवर्सिटी से सस्पेंड करवा के रहूंगी.. !”
“रेशु चुप हो जा, एक बार मेसेज तो पढ़ ले !”
गुस्से में पागल होती रेशम को पूर्वा ने खींच कर कुर्सी पर बैठाया और उसके हाथ में ठन्डे पानी की बोतल पकड़ा दी..
“पहले पानी पी… और शांति से बैठ कर मोबाइल में आया मेसेज देख.. !”
रेशम ने मेसेज पढ़ना शुरू किया..
“ये तस्वीरें तो सिर्फ ट्रेलर है, मेरे पास इससे ज्यादा गहराई वाली तस्वीरें हैं, ज़ाहिर है तब की है जब हम साथ थे….
मैं तुमसे क्या चाहता हूँ ये तो अब तुम्हें पता चल ही गया होगा.. तो बस बिना देर किये मेरे पास आ जाओ..
अगर तुम मेरे पास नहीं आई तो ये तस्वीरें यूनिवर्सिटी में मौजूद हर एक मोबाइल पर कत्थक करती नज़र आएंगी.. ! बिल्कुल वैसे ही जैसे कुछ देर पहले तुम कर रहीं थी…
बिन्दा श्याम मानत नाहीं, कासे कहूं मैं अपने जिया की सुनत नाही हाय… !”
गुस्से में रेशम ने फ़ोन पटक दिया…
लेकिन फ़ोन टूटने से बाल बाल बच गया..
उसी वक्त उसी नंबर से कॉल आने लगा..
पूर्वा ने कॉल उठाने का इशारा किया, -” कॉल उठा रेशु और साथ ही रिकॉर्ड कर लें.. हमारे पास उस कमीने के खिलाफ सबूत हो जायेगा.. उठा जल्दी ! देख तो क्या बोल रहा है ?”
रेशम ने फ़ोन उठा लिया..
दूसरी तरफ से एक निर्लज्ज हंसी की आवाज़ गूंज गयी..
“अखंड बोल रहा हूँ… अखंड परिहार ! और अखंड बाबू को जो चीज़ एक बार पसंद आ जाती है ना वो और किसी की ऑंख भी उस पर नहीं पड़ने देते !
सोते जागते बस तुम्ही को देखा और सोचा करते हैं…
क्या बतायें तुम्हे कैसे कैसे सोचा करते हैं.. ।”
सामने वाले की बात सुन रेशम के कान की लोरियां जलने लगी.. गुस्से में उसने फ़ोन काट दिया..
“अरे पागल फ़ोन क्यूँ काट दिया ? यहीं तो उसके खिलाफ हमारे पास सबूत होता !”
“मुझसे उस ज़ाहिल की आवाज़ सुनी नहीं जा रहीं ! इतना ही लग रहा तो तू सुन ले… कमीना मुझे धमकी दे रहा की मेरे फोटो वायरल कर देगा..!”
अब तक गुस्से की जलन में जलती रेशम का अचानक ध्यान अपनी ही कही बात पर गया और वो भरभराकर वहीं कुर्सी पर गिर पड़ी..
पूर्वा ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया…
“रेशम… !”
पूर्वा की रुंधी हुई सी आवाज़ सुन रेशम सिसक पड़ी..
अपना चेहरा दोनों हाथों में छिपाये वो सिसकने लगी और वहीँ उसके पास बैठी पूर्वा उसके सर पर हाथ फेरती रहीं..
उसी वक्त शमिता वहाँ चली आई..
“क्या हुआ पूर्वा ? रेशम ? कुछ प्रॉब्लम है क्या ?”
रेशम तो वैसे ही सर झुकाये सिसकती रहीं लेकिन पूर्वा ने ऑंख उठा कर शमिता को देखा और मोबाइल पर की तस्वीरें उसके सामने कर दी..!
उन तस्वीरों को देखते ही शमिता का पारा चढ़ गया…
गुस्से में वो पलटी और एक तरह से भागती हुई पंकज को ढूंढने निकल गयी….
सीधे पंकज के पास जाने से पहले काश उस पागल लड़की ने पूर्वा और रेशम को सारा सच बता दिया होता..!!
शमिता को दर्शक दीर्घा में अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता पंकज नज़र आ गया..
वो सीधे उसके पास पहुंची और उसका कॉलर पकड़ लिया…
“अरे ये क्या कर रहीं शम्मी.. छोड़.. लग रहीं है.. !”
उसे कॉलर से पकड़ कर घसीटते हुए वो वहाँ से बाहर लें गयी..
बाहर के पिछले सूने कॉरिडोर में इस वक्त लोगों की आवाजाही कम थी..
“तो इसलिए तूने रेशु के फोटो मंगवाए थे.. छी.. तेरी सोच इतनी गिरी हुई निकलेगी यह मैंने कभी सोचा भी नहीं था साले क****..
तूने मुझसे कहा था कि तुझे हमारी बैच की लड़कियों की तस्वीरें चाहिए जिन्हें तू एनुअल फंक्शन के एल्बम में लगा सके। और इसीलिए मैंने रेशु निहाया और बाकी लड़कियों की तस्वीरें तुझे भेज दी। और तूने क्या किया?
मुझसे कहा सब कुछ सरप्राइज रखना। मुझे क्या पता था मैं अपनी ही सहेलियों की तस्वीर एक गुंडे मवाली के हाथ में भेज रही हूं। पंकज तू डॉक्टर बनने के लायक नहीं है…।
डॉक्टर तो लोगों की जान बचाने का काम करते हैं। तेरे जैसे नीच और घटिया लोग कभी अच्छे डॉक्टर नहीं हो सकते। तू अभी के अभी उसकी मॉर्फ की हुई तस्वीरों को हर जगह से हटा ले। वरना तू सोच ले तेरे साथ क्या होगा? क्योंकि मैं यहां से सीधे डीन सर के पास जाऊंगी और तेरी शिकायत लगाऊंगी..।”
” अबे यार तू इतना भाव क्यों खा रही है ? पहली बात तो उसकी तस्वीरें मॉर्फ मैंने करवाई जरूर है, लेकिन मैंने किसी सोशल मीडिया या कहीं पर भी उसकी तस्वीरें भेजी नहीं..।”
” तो फिर रेशु के मोबाइल पर वो तस्वीरें क्या कर रही है..? तुझ से वह तस्वीरें मोर्फ किसने करवाई? अखंड ने?”
” धीरेंद्र प्रजापति ने।”
” धीरेंद्र प्रजापति? वो यूनिवर्सिटी का गुंडा?”
“अबे गुंडा मत बोल उसे.. वही तो मुझे हर सेमेस्टर में पास करवाने वाला है। अब देख यार मेरा डॉक्टर बनने का बिल्कुल मन नहीं था।
तूने सही पकड़ा,मैं डॉक्टर बनूंगा भी नहीं ।
मेरे भाई की इच्छा थी कि उनके परिवार खानदान में भी एक भी डॉक्टर बन जाए,बस इसीलिए जबरदस्ती मुझे यहां पेमेंट सीट पर मोटा डोनेशन दे दिवाकर घुसा दिया। लेकिन डॉक्टरी में घुस जाने से कोई डॉक्टर नहीं बन जाता ना!
मुझसे यह साली पढ़ाई होती नहीं। इतने कठिन तो नाम है जो मैं बोल नहीं पाता, उन्हें याद कैसे रखूंगा? तो बस बहुत समय से सेटिंग के जुगाड़ में था कि पास होने का कोई जुगाड़ बन जाए।
धीरेन्द्र प्रजापति मेरा एक काम करने तैयार हो गया… उसने कहा तीनों एक्सटर्नल एग्जाम और बाकी के सारे इंटरनल में बहुत अच्छे नंबर दिलवा दूंगा बस मेरा एक काम कर दो..
मैं तैयार हो गया ..!”
” इस चक्कर में एक लड़की की तस्वीरें मॉर्फ कर दी और अब वायरल करने की सोच रहे हो ?”
“मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रहा ? जो सोच रहा और कर रहा वो प्रजापति है !”
” मैं जा रही हूं!
तुम सब का कच्चा चिट्ठा मैं रेशु के सामने ले आऊंगी! और उसे साथ लेकर सीधे डीन सर के पास जाऊंगी, उसके मोबाइल पर तुम्हारे भेजे हुए फोटोस हैं..।
वहां पर मैं यह गवाही भी दूंगी कि मैंने ही तुम्हें रेशम और निहाया की तस्वीरें भेजी थी, जिनमें से निहाया की जगह तुमने अखंड परिहार को मोर्फ किया है।
तुम खुद को समझते क्या हो? यू स्टूपिड फेलो..
इतना बोलकर शमिता जैसे ही पलटी उसके चेहरे पर किसी ने एक बड़ा सा काला रुमाल डाल दिया। वो कुछ समझ पाती कि रुमाल के नीचे के छोर को आपस में इस तरीके से पकड़कर अलट पलट कर उसकी गर्दन पर कस दिया गया कि वह कुछ भी देखने सुनने समझने में असमर्थ होने लगी। वो अपने दोनों हाथ तेजी से चलाने लगी।
उसके दोनों हाथ उसके ठीक सामने खड़े लड़के के चेहरे कंधे आदि पर पड़ने लगे, लेकिन वह लड़का अपने आप को बचाता उस रुमाल से शमिता के चेहरे को बांधने में लगा था। उसके चेहरे को बांधने के बाद उसने झटके से शमिता के दोनों हाथों को पकड़कर पीछे की तरफ मोडा और एक मोटा टेप उसके हाथों में कस दिया..
पंकज ये सब देख रहा था..
“अरे भाई.. ये क्या..
वह कुछ बोलता उसके पहले ही सामने खड़े लड़के ने अपने होठों पर उंगली रखकर पंकज को चुप रहने का इशारा कर दिया। यह सब कुछ सेमिनार हॉल के बाहर के कॉरीडोर में हो रहा था जहां इस वक्त बहुत ज्यादा उजाला भी नहीं था। हालांकि दूर-दूर पर कुछ लोग नजर आ रहे थे, लेकिन इस वक्त वह पूरा कॉरिडोर सुनसान पड़ा था।
उस लड़के ने यह सारा काम बड़ी सफाई से पल भर में किया और शमिता को तेजी से खींचकर वही पास खड़ी अपनी गाड़ी में धकेल कर बैठा दिया..
पंकज कुछ समझ पता कि तभी उसके लिए उस लड़के ने चेतावनी सी दी..
“सी 12 में तुरंत पहुंचो !”
ये लड़का धीरेन्द्र प्रजापति का सबसे ख़ास चेला था.. वो वैसे तो इस वक्त यहाँ पंकज से ही मिलने आया था, लेकिन शमिता की बातें कानों में पड़ने से उसे लगा शमिता उसके धीरू भाई के लिए खतरा बन सकती है और उसलिए ज्यादा दिमाग लगाए बिना वो शमिता को पकड़ कर धीरू के कमरे में लें जाने की तैयारी करने लगा.. उसे लगा धीरू भैया को सब बता देगा और वो ही इस लड़की की सज़ा मुकर्रर करेंगे !
कार को बंद कर वो लड़का तेज़ी से गाड़ी चलाता वहाँ से निकल गया….
शमिता ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी..
सामने गाड़ी चलाते लड़के ने अपनी जेब से एक रुमाल निकाला और पीछे पलट कर शमिता के मुहँ में उस रुमाल के ऊपर से ही ठूंसने लगा..
गाडी तेज़ स्पीड में थी और वो पलट कर उसके मुहँ में रुमाल ठूंस रहा था कि तभी सामने से एक बड़ी हाइवा आई..
हाइवा के चालक ने तेज़ी से हॉर्न दिया लेकिन तब तक गाडी का संतुलन बिगड़ा और वो तेज़ी से उस बड़ी सी हाइवा की चपेट में आ गयी…..
गाड़ी एक झटका खा कर तेज़ी से हवा में उछली और दो बार घूम कर ज़मीन पर आ गिरी..
इसी सब में शमिता के चेहरें पर बाँधा गया कपडा हट कर उसके कंधे पर चला आया..
टक्कर इतनी ज़ोर की थी कि वो छोटी सी गाड़ी बिल्कुल खिलौने वाली गाड़ी सी उछल पड़ी …
दो तीन बार पलट कर वो नीचे गिरी और उसके अंजर पंजर ढीले हो गए..
सामने का कांच टूट कर अंदर बिखर गया और दरवाज़े टूट फूट कर लटक गए..
हाइवा के सामने के हिस्से में गाडी जाकर ज़ोर से टकराई और रहा सहा हिस्सा भी उड़ गया..
सामने गाड़ी चला रहा लड़का तेज़ी से डेशबोर्ड से टकरा कर एक तरफ को फिंक गया और सीधे हाइवा के नीचे आ गया..
इतनी सब दुर्घटना के साथ ही शमिता भी इधर उधर टकराती चोटिल होती चली गयी..
हायवा का सामने का हिस्सा उस छोटी सी गाड़ी की छत भेद कर कार के अंदर घुस कर धंस गया था..
चारों तरफ फ़ैला ख़ून देखने वालों को झकझोर गया था…
वहीँ मौजूद किसी ने तुरंत पोलिस को फ़ोन लगा दिया..
इन सब से अनजान पंकज भी उस गाड़ी के पीछे निकलने के लिए अपनी बाइक की तरफ बढ़ा ही था कि अखंड की मज़बूत बाँहों ने उसे एक तरफ खींच कर अपने दोनों हाथों से उसे हवा में ऊँचा उठा लिया..
अखंड उसे ज़मीन पर पटकने ही वाला था कि पंकज चीख पड़ा..
“मुझे मत मारिये अखंड भैया.. मैं आपको सब बताता हूँ..
वो तस्वीरें मैंने धीरू भैया के कहने पर उन तक पहुंचाई थी.. इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है.. ।”
अखंड को अब तक तस्वीरो के बारे में कुछ मालूम नहीं था, वो सिर्फ पंकज को यूँ ही धमकाने आया था कि वो रेशम से दूर रहे लेकिन यहाँ तो पंकज के मुहँ से कुछ और ही किस्सा सुनाई दे रहा था..
अखंड के माथे पर बल पड़ गए.. उसने पंकज को नीचे उतारा और एक तमाचा उसे रसीद करने के बाद उससे पूछ बैठा..
“अब बताओ.. कौन सी तस्वीर की बात कर रहें हो तुम..
क्रमशः
aparna…
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