अपराजिता -32

“यहीं की पंकज तुझे लाइक करता है.. अब यार ये तो पूरी क्लास को पता है यार.. !”

“लाइक करने में क्या प्रॉब्लम है ?”

“कोई प्रॉब्लम नहीं है पर पूरी दुनिया को दिखाने की क्या ज़रूरत है.. ?”

“मतलब ?”

“मतलब तू उसके साथ कभी कहीं गयी होगी, आज पंकज ने तेरी और अपनी सेल्फी अपने स्टेटस पर लगायी है, वो भी नीचे पर्पल हार्ट्स के साथ.. !”

“व्हाट ?”

रेशम और पूर्वा शुरू से ही रूम मेट्स थी और दोनों अपनी सारी बातें एक दूसरे से बताया करती थी। आज पंकज का स्टेटस देख कर पूर्वा को यह लगा कि उसे बताए बिना रेशम किसी दिन पंकज के साथ बाहर कहीं गई है और उसी दिन की सेल्फी को पंकज ने अपने स्टेटस पर लगाया है, पूर्वा इसीलिए रेशम से थोड़ी सी नाराज थी..
रेशम की समझ से बाहर था कि ये सब क्या हो रहा है.. उसे पूर्वा का यूँ छेड़ा जाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था..।

रेशम ने फ़ोन में तुरंत पंकज का प्रोफाइल खोला और उसके स्टेटस पर चली आयी..
पंकज ने आज के ही दिन की तस्वीर लगायी थी..
तस्वीर में वो चाय का कप देख रही थी, और पंकज उसे देख रहा था..।
और इसी वक्त पर पंकज ने उसकी जानकारी के बिना उन दोनों की सेल्फी ले ली थी…
नीचे पर्पल हार्ट्स के साथ उस सेल्फी को पोस्ट कर दिया था..।
इतना ही नहीं पंकज ने अपने फेकबुक प्रोफाइल पर भी इसी तस्वीर को डाल रखा था..
रेशम को इतना ज़ोर से गुस्सा आया कि लगा फ़ोन पटक दे लेकिन फिर खुद को संभाल कर उसने तुरंत पंकज को फ़ोन लगा दिया..

“पंकज ये क्या बदतमीज़ी है ?”

रेशम ने ज़रा तेज़ आवाज़ में ही पूछ लिया..

“क्या बदतमीज़ी ? क्या हो गया ?”

“तुमने मेरे साथ सेल्फी कब ली ?”

“वाह तुम तो ऐसे रिएक्ट कर रहीं हो जैसे तुम्हें मालूम ही नहीं ?”

“अरे…. तुम्हें क्या लगता है मैं जानबूझ कर नाराज़गी दिखा रहीं हूँ.. मुझे सीरियसली तुम्हारी ये हरकत पसंद नहीं आ रहीं है..।
अभी के अभी वो फोटो हर जगह से हटाओ, अपने हर एक सोशल अकाउंट से हटा दो उसे, और स्टेटस से भी.. !”

गुस्से में रेशम ने फ़ोन रख दिया, और दूसरी तरफ बैठा पंकज हंसने लगा…
उसके साथ उसके दो दोस्त भी बैठे थे.. राघव और निशांत

“अबे क्या हो गया, बहुत भड़क रहीं थी ये !”..निशांत ने पूछा

“हाँ, अब क्या बोलूं यार… ये लड़कियां भी ना जबरन का दिखावा कुछ ज्यादा ही करती है.. खुद ही साथ में कॉफ़ी पीने गयी, खुद ही मीठी मीठी बातें की, खुद बोल कर सेल्फी खिंचवाई और अब जैसे ही मैंने फोटो सोशल मीडिया पर डाली तुरंत भड़कने की एक्टिंग करने लगी..!
खूबसूरत लड़कियां और उनके खूबसूरत नखरे  !”

“यार रेशम दिखावे वाली तो नहीं लगती !” राघव बोला

“हाँ तुझे बड़ा पता है उसके बारे में.. अबे सब एक बराबर रहती हैं.. इन लड़कियों को हम लड़कों के साथ एन्जॉय भी करना है, और दुनिया के सामने भोली मासूम भी बनी रहना है ! “

“पंकज कुछ भी मत बोल यार, रेशम ऐसी नहीं है.. और तू उसके बारे में कुछ ज्यादा ही बोल रहा है !” वहीं बैठे राघव ने कहा, वो रेशम के शहर से था और रेशम के स्वभाव से भी परिचित था..

“अब ज्यादा कम का नहीं पता मुझे.. तुम लोगों के सामने तो सबूत रख चुका हूँ.. मेरे साथ अकेले कॉफ़ी तो पी ही रहीं है ना.. वैसे भी मुझे किसी के सामने कुछ साबित नहीं करना है.. जो है हम दोनों के बीच है.. !”

“क्या है भाई तुम दोनों के बीच ?”
     धीरेन्द्र वहाँ चला आया…. पंकज के कंधे पर हाथ धरे उसने पूछ लिया..

“तुमसे मतलब ? तुम कौन होते हो ये सब पूछने वाले ?”

गुस्से में पंकज ने धीरेन्द्र का हाथ झटक दिया..

“अबे गुस्सा कम करो बे, सेहत के लिए अच्छा नहीं है !”

“और तुम आउट साइडर्स हमारे कैम्पस में घुसना बंद करो ! समझ में आई मेरी बात ?”

“अबे ज़बर्ज़स्त गुस्सा फूट रहा है डाक्टर साहब का ? ख़ून में उबाल है की भौकाल है ?
सुन लो बे हम खुद नहीं आये है, तुम्हारे यूथ फेस्ट के लिए कार्ड छपवा कर हमें भिजवा कर तुम्हारे प्रिंसिपल ने बुलाया है.. समझे ? काहे की तुम डाक्टर लोग ना कित्ता भी दिमाग रख लो, तुम्हारे ये महंगे तामझाम के लिए रुपया तो हमारे ही कारण जुड़ा है ना !”

पंकज ने एक जलती सी नज़र धीरेन्द्र पर डाली और उठ कर जाने लगा कि धीरेन्द्र ने पंकज को हलके से पकड़ कर रोकना चाहा, लेकिन उसी झूमाझटकी में पंकज के कंधे पर रखा एप्रन गलती से खिंच कर फट गया…

एप्रन के फटते ही पंकज गुस्से में मुड़ा और उसने धीरेन्द्र को एक तमाचा रसीद कर दिया….

वहीं आसपास बहुत से मेडिकल वाले विद्यार्थी थे… कुछ लड़कियां भी थी जो धीरेन्द्र को देख हॅंस कर निकल गयी
लेकिन धीरेन्द्र गुस्से में कांपने लगा.. उसे नहीं लगा था की ये दो कौड़ी का लड़का ऐसे सब के सामने उसे थप्पड़ रसीद कर देगा..
धीरेन्द्र ने पंकज को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और एक घूंसा उसे जड़ दिया..
पंकज ज़मीन पर गिर पड़ा, उसके साथ बैठे लड़के उचक कर खड़े हो गए..

धीरेन्द्र ने पंकज को ज़मीन पर से उठाया और उसके सर पर अपने माथे से ज़ोर की टक्कर मार दी..

“साले कमीने, हम पर हाथ उठाएगा तू.. !”

धीरेंद्र के चेले भी उसके इशारे पर पंकज पर टूट पड़े, फिर तो उन लोगों के हाथ जो लगता गया उसी से उन लोगों ने उसकी धुनाई कर दी…
कुछ विद्यार्थियों ने जाकर प्रोफेसर्स से शिकायत की और उन्हें बुला कर लाये तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ..
प्रोफेसर्स के समझा बुझा कर शांत करने के बावजूद धीरेन्द्र भद्दी भद्दी गलियां देता हुआ वहाँ से चला गया..

पंकज बुरी तरह से कुटी पिटी हालत में वहीँ पड़ा था.. उसकी उठने की हिम्मत नहीं हो रहीं थी..
उसके दोस्त उसे उठा कर मेडिकल ले गए..
वहाँ पर के जूनियर डॉक्टर्स ने उसे भरती कर लिया..

पंकज के घाव साफ कर उसका इलाज शुरू कर दिया गया..

“क्या हुआ इतनी चोट कैसे लगी ?”

“बस.. ऐसे ही.. !”

डॉक्टर के सवाल पर वो सही जवाब नही दे पाया..

“पक्का लड़की का चक्कर होगा ?”  डॉक्टर भी युवा था, इसी कॉलेज से पासआउट था, वो यहाँ के कारनामे जानता समझता था..

उसकी बात सुन पंकज झेंप गया और उसके दोस्तों ने हामी भर दी..

पल भर में ये खबर मेडिकल हॉस्टल के गलियारों की सबसे गर्म खबर बनी फैलती चली गयी कि पंकज की यूनिवर्सिटी के नेता टाइप लड़कों से किसी लड़की के चक्कर में झड़प हो गयी है….

विश्वविद्यालय के लड़कों के मुहँ कोई नहीं लगना चाहता था, उस पर पंकज का इस कदर झगड़ा हो जाना मेडिकल के लिए एक बड़ा चर्चा का विषय हो गया..।
हॉस्टल में सुगबुगाहट होने लगी कि आखिर वो कौन सी लड़की है जिसके चक्कर में इतना सब कांड हो गया है..

पंकज का नाम सभी को मालूम चल गया था, अब उसकी आज सुबह की लगायी सेल्फी ने आग में घी का काम किया और लोग खुद होकर रेशम का नाम दबी ज़बान से लेने लगे..
कॉलेज यूनिवर्सिटी आदि में ऐसी बातें फैलने में वक्त नहीं लगता… कुछ देर में सब जगह ये बात फ़ैल गयी कि यूनिवर्सिटी के गुंडों और मेडिकल के एक जूनियर डॉक्टर के बीच एक लड़की को लेकर कहासुनी हो गयी है..

ये बात रेशम के कान में भी पड़ी और गुस्से में उसने अपना सर पीट लिया..

अपने थोड़े से कपड़े एक बैग में डाल वो अपने घर जाने निकल गयी…
उसका दिमाग बुरी तरह से ख़राब हो रखा था और इस वक्त वो ठन्डे दिमाग से कुछ भी सोच पाने में असमर्थ थी…

उसे पूर्वा ने जाने से रोका भी लेकिन घर के लिए बस उसे हॉस्टल के ठीक बाहर वाले गेट से ही मिल जाती थी, यही सोच कर वो निकल गयी…

अपने कमरे में बैठे अखंड को भी धीरेन्द्र और पंकज की लड़ाई वाली बात मालूम चल चुकी थी..
उसका दिमाग इसी बात पर ख़राब हो गया था कि रेशम का नाम इस सब में बेवज़ह घसीटा जा रहा था..
वो पिछले कई दिनों से रेशम को देख रहा था और उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि रेशम का पंकज के साथ कोई लेना देना नहीं था..।
हालाँकि पंकज की खींची तस्वीर देख वो भी आश्चर्य में था कि आखिर उस जैसे लड़के के साथ रेशम चली कैसे गयी लेकिन बाकी लड़कों के लाख कहने पर भी उसे रेशम सही और पंकज गलत लग रहा था..।

वो कमरे में बैठा था कि एक लड़का भागता हुआ उसके पास चला आया..

“भैया जी भौजी कहीं जा रहीं हैं !”

“कहाँ ?”

“शायद अपने घर !”

अखंड फटाफट अपनी शर्ट डाल कर बाइक की चाबी लिए तेज़ी से बाहर निकल गया…

तेज़ी से बाइक चलाता वो मेडिकल हॉस्टल के सामने पहुंचा ही था कि रेशम सामने रुकी बस में चढ़ गयी..

अखंड ने एकबारगी सोचा कि वो भी बस में चढ़ जायें, लेकिन उसे अपनी प्यारी बाइक को पार्क करने की कोई मुआफ़िक जगह नज़र नहीं आई और उतनी देर में बस चल पड़ी..
वो बाइक में ही बस के पीछे चल पड़ा..

धीमे से वो बस के एक किनारे की ओर चलने लगा.. उसे खिड़की पर बैठी रेशम नज़र आ गयी..
रेशम खोयी हुई नजरों से बाहर छूटते पेड़ देख रहीं थी, उसकी आँखों से बूँद भर आँसू का टुकड़ा लुढ़क गया..

हवा चली और वो आँसू की बूँद बस के साथ साथ चलते अखंड के गाल पर आ गिरी..

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