अपराजिता -26

इधर उधर रेशम को तलाश करता वो बोल पड़ा और उसे लड़कियों के साथ आगे चलती रेशम दिख गयी..
उसने गोलू को रेशम के पास भेज दिया..

गोलू को अपने सामने देख रेशम चौंक गयी..

“क्या हुआ ?”

गोलू ने नारियल पानी रेशम की तरफ बढ़ा दिया..

“ये क्यूँ ?”

“हमें नहीं पता.. भैया जी भिजवाए हैं पी लीजिये… !”

रेशम के माथे पर बल पड़ गए..

“कौन भैया ?”

“भैया नहीं भैया जी.. अखंड भैया जी.. वो रहे…. !”

गोलू ने अखंड की तरफ ऊँगली कर दी.. रेशम ने उस तरफ देखा.. अखंड ने शरमा कर आंखें फेर ली..

“पी ले ना.. तूने कोल्डड्रिंक भी नहीं पी.. गर्मी में ऐसे ही घूमते रहें तो डिहाइड्रेशन हो जायेगा.. चुपचाप गटक ले… !”  पूर्वा  ने कहा और रेशम ने हाँ में गर्दन हिला दी..

रेशम ने एक नज़र अखंड पर डाली, लेकिन अखंड उसकी तरफ पीठ किये खड़ा था..
रेशम ने गोलू की तरफ देख कर हाँ में गर्दन हिलायी और नारियल पानी उसके हाथ से ले लिया… गोलू ख़ुशी से  उछलता कूदता वापस लौट गया…

रेशम ने नारियल पानी का एक सिप लिया और उसके चेहरे पर राहत के भाव चले आये..

वो पूरा दिन रैली में निकल गया और शाम तक थक कर चूर हुए विद्यार्थी अपने अपने हॉस्टल के कमरों में लस्त पड़े अगले दिन की तैयारियों का लेखा जोखा बनाने लगे…

****

अगले दिन रंगोली प्रतियोगिता थी… जो लड़कों और लड़कियों दोनो के लिये थी..
अब उस प्रतियोगिता में ज्यादा देर बने रहने के लिए उस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना पड़ता..
अखंड भैया के पंटर उसे भी भाग लेने के लिए उकसा रहे थे, पर अखंड को कुछ आता तब तो वो बनाता..?

वहाँ पहुँचने पर पता चला, कॉलेज में उस दिन जो विद्यार्थी भाग ले रहे थे, उनके अलावा बाकियों के लिए आने की मनाही थी…..
कॉलेज परिसर में कमरों के सामने के गलियारे में ही रंगोली प्रतियोगिता होनी थी..
जिससे यूथ फेस्ट के समय कॉलेज सजा संवरा नज़र आये..   

और कोई उपाय ना देख अखंड भैया ने भी भाग लेने का विचार कर लिया….

“भैया जी आप एक डाक्टरनी का तस्वीर बना कर आई लव यू लिख मारना…. भाभी तुरंते समझ जायेंगी.. !”

“अबे साले घोंचू आदमी.. तुम नहीं सुधरोगे… वो डॉक्टरनी है बे.. ऐसे रंगोली बना कर नहीं प्रपोज करेंगे..।
  वैसे तो हमसे ये सब बनेगा भी नहीं..
बल्कि ऐसा करो गोलू तुम भाग ले लो.. एक और आदमी अंदर जा सकता है.. बनाने वाले के अलावा..
हाँ बेटा यही सही रहेगा.. !”

“भैया जी का बोल रहें हैं..? हमको नहीं आता कुच्छो  बनाना !”

“साले तो हम का महाभारत का पार्थ अर्जुन संवाद वहाँ बना डालेंगे क्या ? हम कोई तुमको पिकासो नज़र आ रहें हैं ?”

“अब ऊ कौन भैया जी ?”

“अबे फेमस पेण्टर है बे.. अमेरिका के !”

लल्लन ने अपना ज्ञान पेला और अखंड ने उसके सर पर हलकी सी चपत लगा दी..

“स्पेन के चित्रकार है.. हाँ तो हम कोई पिकासो है का बे.. जो रंगों से खेल जायेंगे.. तो अब यही तय हुआ हमारी जगह गोलू रंगोली बनाएगा..।”

गोलू का मुहँ बन गया.. उसने आज के पहले कभी रंगोली के रंग हाथ में ना लिए थे.. उसे रंगोली कैसे बनाना, रंग कैसे भरना कुछ नहीं पता था। लेकिन अब उसे ये समझ आ गया था कि उसकी इज्जत का गज़ब कचरा होने वाला था.. ।

अखंड ने जो कह दिया उसे टालना मुश्किल था..
वो भी बाकी प्रतिभागियों के साथ अंदर दाखिल हो गया, और उसी के साथ अखंड भी..

बाकी अधिकतर लड़कियां ही प्रतिभागी थी, कुछ एक दो लड़के भी तो जो मिजाज़ के चित्रकार थे..
सब अपनी पूरी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में लगे थे.. गोलू ने अखंड की तरफ देखा, अखंड ने कुछ भी बना दो का इशारा कर दिया.. उसका पूरा ध्यान तो इधर से उधर टहलती और सबको नियम याद दिलाती रेशम पर ही था….

कैसी मुलायम सी आवाज़ में वो सबको नियम समझा रहीं थी…
एक लड़का छन्नी का इस्तेमाल कर रहा था, रेशम ने उसे मना किया और उसकी छन्नी उठा ली, वो भी बड़े प्यार मनुहार से रेशम को छन्नी वापस करने की ज़िद करने लगा..

“देखो सुमित ये नियम के खिलाफ है… मैंने पहले ही बताया था। आप सब किसी भी ऐसी चीज़ का उपयोग नहीं कर सकते जो आपका काम आसान कर दे !”

“यार रेशु.. रहने दे ना यार.. इतना स्ट्रिक्ट क्या होना.. अच्छा सुन हम प्राइज मनी को आधा आधा बाँट लेंगे !”

रेशम ने उसकी बात सुन कर कहकहा लगा दिया..

“शट अप… चुपचाप रंगोली बनाओ, और अगर उसके अलावा भी कुछ रखा है तो निकाल कर दे दो.. !”

“आकर खुद तलाशी ले लो.. !”

वो लड़का दोनों हाथ फैलाये ऐसी मुद्रा में खड़ा हो गया जैसे रेशम कुछ आगे बढे तो उसे अपनी बाँहों में भर लेगा..

इस तरह का मस्ती मजाक कॉलेज के लड़के लड़कियों के बीच सामान्य था, लेकिन अखंड को जाने क्यूँ वो लड़का पसंद नहीं आया..

“हद बद्तमीज है ये लड़का… जबसे देख रहे  छिछोरपंथी किये जा रहा है…. ये आजकल के लड़के ना, जहाँ लड़की दिखी वहीं लार बहाना चालू कर देते हैं !”
.
“हाँ भैया जी फिलर्ट कर रहा है !”

“गोलू रंगोली निपटें उसके बाद जरा पता करो ये बाबू साहब का क्या सीन है… !”

“जी भैया जी.. आप कहें तो बजा दें.. ?”

“अबे जितना बोला है उतना ही करो… बजाना है की नहीं बजाना है वो बाद में देखेंगे.. ! अभी तुम रंगोली बनाओ बे.. !और सुनो बहुत जल्दबाजी में बनाने की ज़रूरत नहीं.. पूरा समय लेकर आराम से बनाओ.. !”

अखंड ने देखा गोलू ने बहुत ख़राब तरीके से रंग इधर उधर फ़ैला दिये थे…
कहीं काले रंग से दो गोले बनायें थे, कहीं पर गुलाबी और लाल रंग के बड़े बड़े गोले बना कर थोड़ा पीला नीला रंग छिड़का हुआ था.. कहीं हरे रंग से लाइन खींची थी.. कुल मिलाकर समझ के बाहर था कि गोलू ने अपनी कौन सी कलाकारी दिखाई थी..

सबके पास से गुज़रते हुए रेशम उन लोगों के पास भी पहुँच गयी..
वो अखंड के बाजू में खड़ी गोलू की चित्रविचित्र कलाकारी समझने की कोशिश कर रहीं थी, और अखंड ठीक उसके पीछे खड़ा आंखें मूंदे गहरी सी साँस खींच कर रेशम की खुशबू खुद में भरने की कोशिश कर रहा था..

“कुछ मॉडर्न आर्ट जैसा बना है, गुड !”

“आपको समझ में आया ?”

गोलू की आश्चर्य से आंखें फट गयी…

“हम्म दो आंखें बनायीं है, कुछ फ़ूल हैं.. पत्ते भी दिख रहें… अब कोई अच्छा सा स्लोगन लिख कर पूरा कर दीजिये.. !”

अपनी बात कह कर रेशम चली गयी और मुस्कुरा कर गोलू खड़ा हो गया..

“भैया जी.. भाभी को तो गज़ब पसंद आ गया हमारा कारनामा.. कुछ लिखने कह रही, जाने का लिखने कह गयी.. !”

“अबे स्लोगन लिखने बोल गयीं हैं, लेकिन तुम साले बौड़म आदमी क्या लिखोगे… ? यहाँ से निकलते ही उस लड़के की जन्मकुंडली निकलवाओ तुम!”

“जी भैया जी.. !”

वो दिन भी गुज़र गया…
शाम में अपने कमरे में बैठे अखंड के पास गोलू और लल्लन उस लड़के की सारी जन्मकुंडली लिए बैठे थे..

“भैया जी भाभी की ही क्लास में पढता है और बहुत गज़ब का चित्रकार है.. दिल्ली का रहने वाला लड़का है, स्कूल की पढाई सेंट फ्रांसिस से कर के आया है, पढ़ने लिखने में ठीक है, अपने माँ बाप का इकलौता है, इसके बाप की मिठाई की तीन बड़ी बड़ी दुकाने सरोजिनी, और लाजपत नगर में है.. ख़ूब पैसे वाला लड़का है..  और..

“और क्या बे… पसंद उसंद करता है क्या.. ?”

“किसे भैया जी.. !”

गोलू का बौड़म सवाल हवा में लहराया और अखंड के माथे की नसें तन गयी..

“साले…. हमें ? अबे और किसके लिए पूछेंगे.. बार बार तुम्हारी भाभी का नाम किसी और के साथ जोड़ना अच्छा नहीं लगता हमें और तुम खच्चर घोंचू कहीं के.. समझते ही नहीं.. !”

“अच्छा भाभी को.. ? नहीं भैया जी… उनका अलग सेटिंग है… उन्हीं की कक्षा में पढ़ती है, लड़की का नाम सियाली है.. वो भी दिल्ली की है.. ! शायद इस्कूल से एक साथ पढ़ें हैं… !”

ये बात सुनते ही अखंड के चेहरे पर राहत चली आई…

“भैया जी कुछ सिखाना पढ़ाना है क्या उसे ?”

“नहीं लल्लन.. अब जब उसका ध्यान तुम्हारी भाभी पर नहीं है तो उसे जाने दो.. अगर तुम्हारी भाभी के पीछे रहता तो पक्का आज उसका ख़ून………..
बहना था बे… जान से थोड़ी ना मार देंगे…
तुम लोग तो हमको वहशी दरिंदा समझ लिए हो बे !”

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Dolly
Dolly
1 year ago

Nice