देखें सीधी सी बात है मौका हर किसी को मिलना चाहिए,मतलब हर एक ईमानदार व्यक्ति को मिलना चाहिए। हम कुछ गलत बोले क्या ? बताइए..?
नहीं बताइए, अब आपको हमारी बात समझ में आई या नहीं? ठीक है, हम मानते हैं हमारे तरीका गलत है, लेकिन हमारी बात में सच्चाई तो है..।”
बबीता ने घूर कर अंबर की तरफ देखा और वापस अखंड की तरफ देखने लगी..
” ठीक है। मैं सामान्य की सीट से दावेदारी वापस लेकर अपने आरक्षित पद से ही अपनी सीट पर हॉउस सर्जन शिप करुँगी… सामान्य की सीट आपके अंबर बाबू को मुबारक.. अब जाने दीजिए मुझे यहां से..!”
अखंड को घूरते हुए बबिता ने कहा और अखंड एक तरफ को हट गया..
पैर पटकती हुई बबिता वहाँ से चली गयी और अंबर भाग कर अखंड के पैरों पर गिर गया..
“हम नहीं सोचें थे भैया जी कि आप हमारा भला करने ही ये सब कर रहें..। कल कुछ ज्यादा ही बोल डाले आपको.. मुआफ कर दीजियेगा..।
आप जो बोलेंगे हम करने को तैयार है.. ।”
“आज हमारी बंदरों की फ़ौज के लिए चाय समोसा का प्रबंध करवा दो, और… सुनो.. तुम्हारे यहाँ का यूथ फेस्ट जब से शुरू हो रहा..
उसका पल पल का खबर चाहिए हमको.. समझे ?”
“हो जायेगा.. !”
अंबर अखंड के पैर छू कर निकल गया…
अखंड अपनी गाड़ी में जा बैठा.. किसी लड़के ने गलती से रेडियो चला दिया.. उसमें एक नाज़ुक सा गाना बजने लगा और भैया जी को पसंद नहीं आएगा ये सोच कर लल्लन ने गाना बंद कर दिया..
” अबे काहे बंद कर दिया बे ? चलाओ अच्छा लग रहा था गाना सुनना ।”
लल्लन गोलू के साथ बाकी लोग भी आश्चर्य से अखंड परिहार की तरफ देखने लगे कि क्या यह पत्थर दिल इंसान भी कभी गाने सुनता होगा? लेकिन अखंड खुद में मगन उस गाने को सुनते हुए उसके साथ-साथ खुद भी गुनगुनाने लगा और उनकी जीप वापस अखंड के हॉस्टल की तरफ बढ़ गई…
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा,
जैसे सुबह का रूप,
जैसे सरदी की धूप,
जैसे वीणा की तान,
जैसे रंगों की जान,
जैसे बलखायें बेल,
जैसे लहरों का खेल,
जैसे खुशबू लिये आये ठंडी हवा, हो!
ओ… एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
क्रमशः..

Mam mera matlab hai ki adhure hai naye episode toh koi aisa platform ho toh mujhe link share kare jisse main puri story padh saku
यहाँ पूरी कहानी मौजूद हैं मैम.. आप मुख्य पेज पर अपराजिता को kholiye उसमे आपको सारे पार्ट्स मिल जायेंगे
Mam aprajita story me 20 ke baad koi naye episode nahi hai or mujhe padhna hai please kuch help kariye.
Mam hum apke page pe aake padh rahe hai yaha bhi nahi mil rahe hai